संध्या रोज की तरह अपने सारे काम निपटा कर नहाने गई थी कि अचानक सास की कर्कश आवाज़ कानों में पड़ी, **"अरे बहू... ओ बहू, कहां मर गई? सुनती नहीं हो क्या?"** 😡 रसोई के सारे काम खत्म करने के बाद अब नहाने का समय मिला था, लेकिन उसे इस कर्कश आवाज़ की आदत हो चुकी थी। दिन में माया देवी की एक न एक शिकायत उसके कानों में गूंजती रहती थी।
संध्या ने जैसे-तैसे अपने ऊपर पानी डाला, जल्दी से कपड़े पहने और दौड़ते हुए सास के कमरे में पहुँची। माया देवी गुस्से में चिल्ला रही थीं, **"अरे, तुझसे एक काम भी ठीक से नहीं होता! ये पानी कहां से आ गया? अगर मैं गिर जाती तो मेरी हड्डियां टूट जातीं!"** 😠 संध्या डरते हुए बोली, **"मां जी, मैंने पोछा तो लगाया था।"** पर माया देवी फिर से चिल्लाईं, **"तुझसे कुछ ठीक से नहीं होता! किस्मत ही खराब है जो तेरे जैसे को मेरे बेटे ने पसंद किया।"**
संध्या समझ गई थी कि माया देवी जानबूझकर उसे तंग कर रही थीं। उसने चुपचाप फर्श का पानी साफ किया और वापस अपने कमरे में जाकर बैठ गई। यह रोज़ का सिलसिला बन चुका था। 🥲 सुरेश के ऑफिस जाते ही माया देवी संध्या को परेशान करने के नए तरीके ढूंढती थीं। पहले तो संध्या सहन कर रही थी, लेकिन अब यह सब बर्दाश्त से बाहर हो रहा था।
शाम को जब सुरेश घर आता, संध्या कई बातें करने की सोचती, पर सुरेश अक्सर थका होता और माँ की शिकायतों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता था। माया देवी भी बेटे के सामने एकदम अलग रूप धारण कर लेतीं—बहुत ही प्यारी सास बन जातीं। लेकिन सुरेश के जाते ही उनका असली चेहरा सामने आ जाता। 🤔
माया देवी की सबसे बड़ी नाराजगी थी कि शादी में उन्हें दहेज पर्याप्त नहीं मिला। उन्होंने घर की नौकरानी भी हटा दी थी, और अब सारा काम संध्या के जिम्मे आ गया था। 😔
एक दिन, जब संध्या झाड़ू लगा रही थी, माया देवी बिस्तर पर बैठी स्वेटर बुन रही थीं। अचानक उन्होंने बिना देखे जोर से पैर मारा, जिससे संध्या का सिर दीवार से टकरा गया। 😣 संध्या दर्द से कराह उठी, लेकिन फिर भी चुप रही। तभी माया देवी ने फिर से उसे लात मारी, और इस बार संध्या बेहोश हो गई।
माया देवी फिर से चिल्लाईं, **"अरे मर गई क्या? उठ, अभी काम पड़ा है!"** 😡 लेकिन जब संध्या नहीं उठी, तो माया देवी के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत सुरेश को फोन किया। सुरेश उसे अस्पताल ले गया, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद, संध्या की जान नहीं बच पाई। 💔
धीरे-धीरे, पड़ोसियों को माया देवी के बुरे बर्ताव की सच्चाई पता चलने लगी। सुरेश भी समझ गया था कि उसकी माँ ने उसकी पत्नी के साथ जो किया, वह गलत था। 😞 सुरेश ने ज्यादा दिन इस बोझ के साथ नहीं जी पाए और एक दिन उसने खुद को पंखे से लटकाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली। 💔
अब माया देवी के घर में बस सन्नाटा था। वह दिनभर बड़बड़ाती रहतीं, **"अरे बहू, कहां मर गई? मेरे बेटे को भी ले गई। जल्दी आ, घर गंदा पड़ा है!"** 😢 लोगों ने सुना, लेकिन कोई उनकी मदद करने नहीं आया। कुछ दिनों बाद खबर आई कि माया देवी को पागलखाने में भर्ती करा दिया गया, और उनके घर को सस्ते दामों में बेच दिया गया। 🏚️
**सीख:** अत्याचार और बदसुलूकी का अंजाम हमेशा बुरा होता है। रिश्तों में प्यार और समझदारी सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। 💔
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