sunilrathod

Thursday, 5 September 2024

जिसमें प्यार का अंत बिछड़ने से हुआ..

 प्रिये..

बहुत वक्त हो गए तुमसे बिछड़े, पर अब न तुम याद आतीं हो न ही तुम्हारी सूरत, बस याद आती हैं तुम्हारे साथ बिताए वो पल, जिसकी यादों में मैं बेजुबान सा हो जाता हूँ..


नाम नहीं लिखूंगा तुम्हारा क्योंकि ये ना मैं जरूरी समझता हूं और न ही तुम्हें कोई नाम देने की जरूरत कभी महसूस हुई मुझे..

तुम्हारे बगैर शामें सिंदूरी रंग से सरोबार हो कर भी फीकी सी लगती हैं ,अब मुझे उतनी ही फीकी जितनी फीकी होती है तुम्हारी मुस्कुराहट मुझे दर्द में देखकर..


उतनी ही फीकी जितनी फीकी चाय नापसन्द है मुझे

उतनी फीकी जितना फीका पड़ जाता है मेरे चेहरे का रंग तुम्हें उदास देखकर..

इन दिनों ना जाने कहाँ गुम रहता हूँ बस आधी तुममे उलझा तो कुछ हिस्सा किताबो में उलझी किसी और ही दुनिया का गणित लगाता रहता हूँ..


बाल संवारने का ना अब वक्त मिलता है ना जरूरत महसूस होती है तुम्हारी आँखो में अपना दर्पण जो तलाश लिया था मैंने तबसे घर भर के आईनो से बैर बंध गया है मेरा..

तुम्हारे बगैर ये शामें बोझिल लगती हैं और सुबह की उदास शुरुआत..


हर दिन अनमने मन से क्षितिज तकता हूँ और दिनभर का हिसाब डायरी में लिख निश्चिंत होने की कोशिश करता हूँ..

पर तुम तो जानती हो ना मेरा सुकूँ किसमे हैं

मेरी उंगलियों पर रहते हैं इंतज़ार के दिन हमारी मुलाकातों की तारीखें मुझे मुँह जबानी याद हैं..


तुम्हारा ये फ़ितूर दिन पर दिन सर चढ़ता जा रहा है और तुम्हारी अनुपस्थिति से एक वैराग पलने लगा है मुझमे..

मैं बेमन ही लिखने बैठा था और इतना कुछ लिख गया मैं जब तुम्हें लिखने बैठता हूँ तो ना जाने क्यों वक्त कम पड़ जाते हैं मेरी पिछली डायरियां तुम्हारे खतों से अटी पड़ी हैं जिन्हें मैं कभी तुम्हें नहीं सौंपना चाहता..


ना जाने क्यों तुम्हारे हक़ की हर चीज़ तुमसे दूर रखता हूँ इसका जवाब तुम हो बेहतर जानती हो... खत लिखना नापसन्द है मुझे फिर आज ना जाने क्यों अचानक लिखने बैठ गया हूँ ..


यही खत्म करता हूँ तुम्हारी यादें जो बरसों से चलीं आ रहीं हैं और ये कभी-कभी भावावेश में इतना हावी हो जाता है मुझपर की मैं सम्पूर्ण ग्रन्थ लिखने लगता हूँ

तो बस यही विराम देता हूँ..


वरना ख़ामख़ा नाराज़गी का पात्र बन जाऊंगा

ये अधूरा सा खत एक पूरे इंसान के लिए 

जो दुनिया है मेरी..


पर वक्त और लोगों ने इस कदर फसाया हमें की न हम तुम्हारे हो सकें और न तुम हमारें, और हम दोनो अलग हो गए 

अब शायद बात या मुलाकात हो या न हो पर तुम्हारें साथ बिताए पल हमें, फिर से मिला जाता हैं..


तुम जहाँ भी रहो हमेशा खुश रहना

कही पढ़ा हैं ,जिसमें प्यार का अंत बिछड़ने से हुआ..❤️🥀

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