*इंसान की असली पहचान*
*मनुष्य की असली पहचान उसकी कद काठी और अच्छे पहनावे से नहीं, बल्कि उसके अपने व्यवहार से होती है और उसमें भी मधुर वाणी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वेश भूषा, कद काठी और अच्छा पहनावा तो एक बाहरी पहचान है जो मस्तिष्क में अंकित हो जाती है। वहीं मधुर वाणी और व्यवहार से बनी पहचान अमिट हो जाती है क्योंकि यह ह्रदय और मन में अंकित होती है।*
*व्यक्ति का आकार, रंग रूप, समय यह सब परिस्थितियों के साथ बदल जाता है । उसे पहचानना मुश्किल हो जाता है, लेकिन मधुर वाणी और व्यवहार से बनने वाली पहचान व्यक्ति की असली पहचान के रूप में मन में स्थिर होती है और इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलती है । इसलिए अच्छे कपड़े और चेहरे की तरह अपनी पहचान में सुधारकर संवारना ही हितकारी है।*
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