🤷♀️मैंने एक पोस्ट कि थी तो उस पर🤷♀️
एक सज्जन ने बहुत ही अच्छा कमेंट किये है
हमें उनकी कमेंट bahut👙अच्छी लगी
आप भी पढ़ कर बताये
🤷♀️आपको कैसी लगी🤷♀️
🌹आपने मात्र एक पक्ष ही रखा है, कभी दूसरा पक्ष भी रखकर देखिए सोचिए और लिखिए
हमारी संस्कृति में स्त्री चार स्वरूप में स्वीकृत की गई है जिसमें प्रथम स्वरूप माँ है दूसरा स्वरूप बहिन है, तीसरा स्वरूप पुत्री है और चौथा स्वरूप है सहधर्मिणी जिसे धर्मपत्नी भी कहा जाता है।
यह प्राकृतिक स्वरूप है कि एक उम्र आने पर मनुष्यों में विपरीत लिंगी को देखकर कामोत्तेजक परिवर्तन होते हैं यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। जहां स्त्री अपनी कामोत्तेजना को नियंत्रित करने में स्वाभाविक रूप से सक्षम है वहीं कामोत्तेजना को नियंत्रित करने में पुरुष की सक्षमता स्त्रियों की तुलना में कम है।
हम जिस देश में रहते हैं उस देश में गाँव मुहल्ले के परिवार की बेटी सारे गांव मुहल्ले की बहिन बेटी तो होती है माँ, भाभी चाची मामी बुआ भी होती है लेकिन गांव के किसी एक व्यक्ति की पत्नी सारे गांव की पत्नी नहीं होती।
आज के समय में यदि पड़ौसी की बहिन बेटियों के प्रति यह सम्मान कम हुआ है तो इसके लिए आप मात्र पुरुषों को दोषी नहीं ठहरा सकते। फिल्मों में होते प्यार, वैवाहिक जीवन के अंतरंग दृश्य प्रेम प्रसंगों के प्रदर्शन में उत्तेजकता से भरे दृश्यों ने पुरुषों की मानसिकता में ठीक वैसा ही परिवर्तन किया है जैसा परिवर्तन स्त्रियों में ड्रेसिंग सेंस को लेकर हुआ है।
फिल्मों में चलती हुई स्त्री के नितम्ब और कमर पर कैमरा केन्द्रित होना, क्लीबेज गले से झांकते स्तन, दौड़ते और चलते हुए मात्र स्तनों पर कैमरे का केन्द्रित होना इन सबने पुरुषों के दृष्टिकोण को बदल दिया। धीरे-धीरे यह कामोत्तेजना को बढाने वाले दृश्यों की ऐसी परिणति हुई है अब हर स्त्री में स्त्री ही दिखती है बहिन बेटी माता आदि नहीं।
आप जड़ पर प्रहार कीजिए अभिनय के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता रोकने का प्रयास कीजिए पुरुषों की मानसिकता स्वयमेव बदल जाएगी।
यह जो फेमिनिज्म के नाम पर लड़कियां छोटी छोटी चड्डी से छोटी जीन्स और ऐसे टॉप जिनसे स्तन बाहर निकलने को आतुर रहते हैं निश्चित ही पुरुषों की कामोत्तेजना को बढ़ाते हैं, कोढ़ में खाज तब होती है जब मोबाईल अश्लीलतम कंटेंट भरे पड़े हैं, ऐसे में सक्षम पुरुष अपनी पत्नी के साथ अपनी उत्तेजना शांत कर लेता है, पत्नी नहीं है तो देहजीवाओं के पास चला जाता है लेकिन जिनके पास दोनों ही नहीं हैं वह लोग अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए अन्य साधनों का प्रयोग करते हैं जिसमें अंतिम साधन रेप होता है, ध्यान रहे हम यहां रेप का समर्थन नहीं कर रहे और न ही स्त्रियों की स्वतंत्रता का हम तो अश्लील फिल्म, अश्लील वीडियो, अश्लील साहित्य, सहजता से उपलब्ध नशा और अश्लील पहनावे के साथ साथ अश्लील भरी चाल, कामोत्तेजना को बढ़ाते मेकप आदि के दुष्प्रभाव को बता रहे हैं।
आप विचार करना कि टॉप से झांकते स्तन, जींस में से बाहर निकलने को आतुर नितम्ब चटख लिपस्टिक स्लीवलेस टॉप या ब्लाऊज़ या इस तरह के अन्य वस्त्र पहिनकर बाहर निकलने की आवश्यकता क्या है ❓ क्यों दिखाना चाहते हैं कि आप के स्तन या नितम्ब कैसे हैं ❓ जब लोग देखते हैं तो धारणा भी बनाते हैं और आपको धारणा बनाने पर आपत्ति है मतलब चित भी मेरी पट भी मेरी और अंटा भी मेरा वाह जी मुस्कान जी वाह सही जा रहे हैं
यदि आपको कोई देखे तो कुत्ता कैसे देख रहा है और न देखे तो कुत्ता देखता भी नहीं है
करें तो क्या करें
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