करीब एक महीने पहले की बात है, जब मैं अपने मायके गई थी। चूंकि मुझे वहां ज्यादा समय नहीं रुकना था, मैंने घर पर आरामदायक जूते पहन रखे थे। जब मायके पहुंची, तो मेरी भाभी नेहा की चप्पलें देखकर सोचा कि इन्हें पहनकर और आराम मिलेगा, इसलिए मैंने उनकी चप्पलें पहन लीं।
नेहा की चप्पलें दिखने में साधारण थीं, पर जब मैं वॉशरूम गई, तो अचानक मेरा पैर फिसल गया। गिरते-गिरते बची, और उस पल मुझे एहसास हुआ कि चप्पलों की ग्रिप कितनी जरूरी होती है। मैंने नेहा को तुरंत सलाह दी, "नेहा, ये चप्पलें बदल लो। ऐसी पहनना जिनकी ग्रिप बेहतर हो, वरना फिसलने का खतरा बना रहेगा।"
नेहा ने मेरी बात को मजाक में लेते हुए कहा, "दीदी, मैं तो इन्हीं में सारा काम करती हूँ, बाथरूम में भी। आपको शायद आदत नहीं है।" उसकी बात सुनकर मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया, और हम बात वहीं खत्म कर दी।
कुछ दिनों बाद, मैंने नेहा से हालचाल लेने के लिए फोन किया। उसकी आवाज़ में उदासी थी। मैंने पूछा, "सब ठीक तो है?" नेहा ने जवाब दिया, "दीदी, दो दिन पहले बाथरूम में फिसल गई। कमर और पैरों में बहुत दर्द है। डॉक्टर ने दवाइयां दी हैं। शुक्र है कि हड्डी नहीं टूटी।" उसकी बात सुनकर मुझे दुख हुआ और पूछा, "अब तो तुमने चप्पलें बदल लीं?"
नेहा हल्के से हंसते हुए बोली, "हाँ दीदी, आपकी बात सुन लेनी चाहिए थी। अब मैंने नई चप्पलें ली हैं और अपनी बेटियों के लिए भी ले आई हूं।" यह सुनकर मुझे तसल्ली हुई। यह घटना एक बड़ी सीख दे गई कि हम कई बार सलाह को नजरअंदाज कर देते हैं, जब तक कि खुद पर कुछ न गुजर जाए। अगर सही समय पर सही सलाह मान ली जाए, तो हम बहुत सी मुसीबतों से बच सकते हैं।
*सीख:**
कई बार हम दूसरों की सलाह को हल्के में लेते हैं, लेकिन समझदारी इसी में है कि सही वक्त पर सही सलाह को मानकर अमल में लाया जाए। इससे हम अनचाही परेशानियों से बच सकते हैं।
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