शरीर फिट होता है तो सेक्स का आनंद दोगुना हो जाता है। नहीं तो मुरझाया हुआ फल कौन खाना चाहेगा?" ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे थे। मैं इन्दौर में अपनी नई नौकरी पर था, और एक बड़े शहर में पहली बार इतने फिट लोगों को देखकर खुद को काफी कमजोर महसूस कर रहा था। मेरा नाम सुनिल राठौड़ है, और मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से शहर, बुरहानपुर, से आता हूँ। वहाँ का माहौल थोड़ा पुराना और पारंपरिक था। घर में मुझे कभी किसी अजनबी लड़की से बात करने की भी इजाजत नहीं थी, बहनें ही मेरी दुनिया थीं।
इन्दौर आकर जब मैंने देखा कि यहाँ सब लोग अपने शरीर का कितना ख्याल रखते हैं, तो मेरी तोंद और गले की बढ़ी हुई चर्बी मुझे खलने लगी। काम की वजह से कंप्यूटर के सामने दिनभर बैठने से मेरे शरीर का आकार बिगड़ चुका था। तभी मेरे दोस्त ऋतिक ने मुझसे कहा, "भाई, जिम जॉइन कर लो। फिटनेस बहुत जरूरी है।"
मैंने सोचा, "ठीक है, जिम तो जाना चाहिए," और पास के एक जिम में गया। वहां के सीन देखकर मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं। मेरे छोटे शहर में ₹300 में महीना जिम मिल जाता था, और यहां ₹20,000 तीन महीने का एडवांस देना था। अगर ट्रेनर चाहिए तो ₹10,000 और। मुझे तो पता ही नहीं था कि ट्रेनर क्या होता है! मैंने बिना ट्रेनर के जिम में एडमिशन ले लिया।
परंतु एक महीने की कड़ी मेहनत के बाद भी पेट जस का तस रहा। दोस्त ऋतिक ने कहा, "भाई, एक ट्रेनर ले लो, शायद फायदा हो।" फिर मैंने जिम मैनेजर से बात की और उन्होंने एक ट्रेनर का इंतजाम किया।
ट्रेनर के रूप में एक दमदार और हट्टी-कट्टी लड़की सामने आई। उसका शरीर देख कर लगा कि हर अंग जैसे तराशा हुआ हो। मैंने पहली बार देखा कि कोई इतनी फिट हो सकती है। उसकी सख्त निगाहें और मजबूत शरीर देखकर मेरी बोलती बंद हो गई। मैंने मैनेजर से कहा, "भाई, इसे हटाकर कोई पुरुष ट्रेनर दे दो," लेकिन उन्होंने कहा कि अभी सिर्फ वही खाली है।
मैं मन मसोस कर रह गया, और अगले दिन से उस ट्रेनर के साथ कसरत शुरू कर दी। एक हफ्ते बाद ही, उसने अपनी टी-शर्ट उतार कर सिर्फ स्पोर्ट्स ब्रा पहन ली और मेरे सामने एक्सरसाइज करवाने लगी। मैंने अपनी ओर से तो कसरत पर ध्यान देने की कोशिश की, पर उसकी बॉडी देखकर मेरे मन में हलचल मचने लगी। इस पर उसने हंसते हुए मजाक में कहा, "अपने मन को काबू में रखो।"
मैं शर्मिंदा हो गया। लेकिन उसकी बातें और उसके छोटे होते कपड़े मुझे और असहज करने लगे। कभी उसके अंग मुझसे छू जाते, कभी वह मेरे बहुत करीब आकर बैठती। एक दिन उसने कहा, "शाम को क्या कर रहे हो? साथ में खाना खाते हैं।"
मैं थोड़ा हैरान था, फिर सोचा कि दोस्ती ही सही, और हामी भर दी। हम एक रेस्तरां में गए, और वहां 3000 रुपये का बिल आया। खाने के दौरान वह हंसते हुए बोली, "तुम्हारे जज़्बात तुम्हारी पैंट में दिखते हैं, सुनिल।" उसकी बातों से मैं असहज महसूस कर रहा था, लेकिन मैं चुप रहा। फिर उसने पूछा, "घर में कौन-कौन है?"
मैंने बताया कि मैं अकेला रहता हूँ। उसने तुरंत कहा, "चलो तुम्हारा घर देखते हैं।" मुझे कुछ अजीब लगा, पर मैंने हाँ कह दी। हम घर पहुँचे, और उसने दरवाजा बंद करते ही अपने कपड़े उतार दिए। वह सिर्फ ब्रा में मेरे सामने खड़ी थी। मैं पूरी तरह से स्तब्ध था।
"शर्मा क्यों रहे हो? तुमने मुझे जिम में देखा ही है न," उसने कहा। मैं बिना कुछ बोले अंदर चला गया और पानी का गिलास लेने लगा। जब मैं वापस आया, तो उसने मेरे पैंट पर हाथ रखते हुए कहा, "यहाँ मन को काबू में रखने की कोई जरूरत नहीं है। सिर्फ 5000 रुपये दो, और मैं तुम्हारे जज़्बातों को हल्का कर दूंगी।"
मैं पूरी तरह से असहज हो गया। मैंने उससे कहा, "आप जिम में काम करती हैं, फिर ये क्यों?"
हंसते हुए उसने कहा, "शरीर फिट हो तो सेक्स का मजा दोगुना हो जाता है। और मुरझाए हुए फलों को कौन खाना चाहेगा?"
उसकी बात सुनकर मैंने गंभीरता से कहा, "मुझे कोई सूखा या गीला आम नहीं चाहिए। आप जा सकती हैं।"
वह थोड़ा चिढ़ी, लेकिन चली गई। अगले दिन जब मैं जिम गया, तो उसने ऐसे व्यवहार किया जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मैंने यह सब अपने दोस्त निखिल को बताया, तो उसने कहा, "भाई, मजा लेना चाहिए था! यहाँ फिटनेस ट्रेनर्स बस नाम के होते हैं। असली कमाई तो इस 'साइड बिजनेस' से होती है। जिम मालिक भी इसका हिस्सा लेते हैं।"
तब मुझे समझ में आया कि जिम का असली धंधा क्या था। यह सिर्फ एक्सरसाइज का अड्डा नहीं, बल्कि एक तरह से 'बाजार' था। लड़कियां ही नहीं, लड़के भी ऐसी 'सर्विस' देते हैं।
मैंने तब फैसला किया कि मुझे अपने शरीर को फिट रखना है, लेकिन इस गंदगी से दूर रहकर।
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