sunilrathod

Friday, 6 March 2026

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है।


दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है, 

और सभी हिंदू पुरुषों को ब्रह्मचारी बनने का संदेश देता है। 


*कृपा यहीं अटकी हुई है।*


हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा,

 रक्तदान, 

पेड़ लगाओ, 

सभ्य बनो, 

अनाथालय चलाओ, 

अस्पताल चलाओ, 

योग शिविर, 

ध्यान शिविर, 

मुफ्त शिविर लगाओ में जाता है।


इसके विपरित, 

मुस्लिम कभी दान दक्षिणा में विश्वास नहीं करता। 

वो सिर्फ जकात देता है,

 *जिसका इस्तेमाल इस्लाम को बढ़ाने में होता है।*

बाकी सभी लोगों से वो पैसा छीनता है। 


मुसलमान सारी मुफ्त सुविधाओं का लाभ लेता है, 

अस्पतालों में भीड़ देखो,

 बैंकों में योजनाओं का लाभ लेने वालों की भीड़ देखो,

 तुम्हें सच पता चल जायेगा। 


*मुसलमान हर पल भारत पर कब्जा करने की तैयारी में लगा हुआ है,* 

और हिंदू दान दक्षिणा से ऊपर ही नही उठ पा रहा है। 


जब तक हिंदू की नींद खुलेगी, 

तब तक मुसलमान भारत पर कब्जा जमा चुके होंगे। 


फिर ये धर्मगुरु, कथावाचक ,

शिविर चलाने वाले, 

रक्तदान करने वाले, 

भंडारा करने वाले, 


ये सब बैठ के रोएंगे कि 

"हमे बचा लो, हमें बचा लो"। 

*पर बचाएगा कौन?*


*जब तुम्हें युद्ध की तैयारी करनी चाहिए थी,*

*तब तो तुम दान पुण्य में लगे थे।*


अब रोने से क्या होगा, 

क्योंकि तुमने सिर्फ धर्म को करने पर ध्यान दिया लेकिन तुमने यह नहीं सोचा कि 

*कोई अधर्म द्वारा तुम्हारे धर्म को मिट्टी में मिला रहा है l*


क्योंकि तूने सिर्फ अच्छा किया l 

लेकिन तुम्हारे घर में कोई डाका डाल रहा है ,

तुम्हारे देश में कोई डाका डाल रहा है,

 *तुमने उसे आंख मूंद लिया रोना* तो पड़ेगा ?

 

तुम्हारा सबकुछ मुसलमानों का है। उन्होंने अपना दिमाग सही जगह लगाया।


तुमने कभी युद्ध की तैयारी नही की। ना हथियार खरीदे, 

ना हथियार बांटे, 

ना दूसरों को चलाना सिखाया, 

ना अपने बच्चों को चलाना सिखाया। *इसकी कीमत तो तुम्हें चुकानी ही होगी।*


इन भंडारों, 

दान दक्षिणा से आगे निकलो, 

और *युद्ध की तैयारी करो।* 


भंडारे लगाना ही है, 

तो हथियारों के लगाओ। 


ट्रेनिंग देना ही है तो  

हथियार कैसे चलाना है


सामने वाली जिहादी टीम इसी काम में लगी हुई है। 

तुम कब शुरू करोगे, ये सोच लो। 


इससे पहले कि समय हाथ से निकल जाए, 

अपनी ऊर्जा सही काम में लगा लो।

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              सनातन धर्म की जय हो,🙏 जय श्री राम ॐ नमो नारायण 🌹

Monday, 6 October 2025

 हो सकता है मैं कभी प्रेम ना जता पाऊं तुमसे..

लेकिन कभी

पीली साड़ी में तुम्हे देखकर थम जाए मेरी नज़र... तो

समझ जाना तुम...

जब तुम रसोई में अकेली हो

और उसी वक़्त मैं वहां पानी पीने आऊँ... तो

मेरी प्यास को समझ जाना तुम...!

ऑफिस से लौटते हुए कुछ ग़ज़रे ले आऊँ... और 

सबकी नज़रों से बचाकर तुम्हारे सामने रख दूँ... तो 

समझ जाना तुम...!

जब दोस्तों के साथ 

घूमने का प्लान कैंसिल करके

तुम्हारे साथ गोलगप्पे खाने चला जाऊं... तो 

समझ जाना तुम...!

तुमसे कोई गलती हो जाये और मैं गुस्साने या खीजने की बजाय तुम्हारी पीठ को सहला दूँ... तो

उस स्पर्श को समझ जाना तुम...!

हां मैं जानता हूं कि मैं भूल जाऊंगा, 

 तुम्हारा जन्मदिन, या घर से बाहर जाते वक्त 

तुम्हे आई लव यू बोलना

लेकिन कभी वक़्त बेवक़्त तुम्हे सीने से लगा लूं... तो

समझ जाना तुम...!

तुम्हारे बिना घर मे एक बेचैनी सी होने लगे... और मैं 

कॉल करके कहूं कि... कहाँ हो इतनी देर से,

अभी के अभी घर आओ... तो 

मेरी नाराज़गी में छुपी मेरी तड़प को समझ जाना तुम...!

जो कभी झल्लाकर कहूं कि.. "तुम्हारी रखी हुई चीज़, 

मुझे कभी नही मिल सकती"... तो

तुम पर मेरी निर्भरता को समझ जाना तुम...!

हो सकता है, मैं.... अपना हर दुख, हर परेशानी, 

तुमसे साझा ना कर सकूं... लेकिन कभी, 

किसी बच्चे की तरह तुम्हारी आगोश में सिमट जाऊँ... तो

समझ जाना तुम...!

हो सकता है मैं कभी प्रेम ना जता पाऊं तुम्हे... तो क्या तुम समझ जाओगी न प्रेम... ❣️

क्योंकि.... 

भविष्य मे एक दिन... 

अपनी सारी उदासी बहा देना चाहता हूँ... 

एक सिर्फ तुम्हारे कंधे पर रख कर सर..!!


संभोग एक स्त्री के लिए उतना ही ज़रूरी है जितना सासों के लिए हवा — क्योंकि वही उसे महसूस कराता है कि वो जी रही है, सिर्फ निबाह नहीं रही।

मेरी शादी एक ऐसे इंसान से कर दी गई थी, जिसे मैंने न तो चाहा, न ही कभी जानने की कोशिश की। उसका नाम था विराज — एक आम सा लड़का, एक छोटे से कस्बे में पला-बढ़ा, जिसकी ज़िंदगी में बस एक ही सहारा था — उसकी माँ शांति देवी। न कोई भाई, न बहन, न ही कोई रौबदार रिश्तेदार। घर भी छोटा सा, ज़रूरत भर का।


लेकिन इस साधारण से रिश्ते में मेरा दिल नहीं था। मेरा दिल तो कहीं और भटक रहा था — करण के पास। वो लड़का जो मुझे प्यार के वादे देता था, जो कहता था कि एक दिन वो मुझे अपनी दुल्हन बनाएगा। पर किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। मैं आ गई विराज के घर — मजबूरी में, समझौते में।


पहली रात, जब सब उम्मीद करते हैं कोई नई शुरुआत की... उसने सिर्फ एक कप दूध मेरी ओर बढ़ाया। मैं चौंकी, सोच रही थी कि अब वो आगे क्या करेगा। और मैंने गुस्से में पूछ ही लिया,


"अगर पति अपनी पत्नी की मर्जी के बिना उसे छुए, तो क्या वो हक कहलाएगा या ज़बरदस्ती?"


उसने मेरी आँखों में देख कर कहा,


"मैं सिर्फ शुभरात्रि कहने आया हूँ। आपकी मर्ज़ी से बढ़कर कुछ नहीं।"


और बिना कुछ कहे वो बाहर चला गया।


मैं चाहती थी कि कोई बहस हो, कोई झगड़ा, ताकि मैं इस रिश्ते से बाहर निकल सकूं। लेकिन वह तो एक शांत नदी की तरह था — ठहरा हुआ, संयमित, अपनी ही लय में।


मैं इस घर में रही, लेकिन कभी अपना कोई कर्तव्य नहीं निभाया। खाना बनाना तो दूर, मैंने माँ (शांति देवी) के हाथ का बना खाना भी नीचा दिखाने की कोशिश की।


एक दिन जानबूझकर मैंने थाली गिरा दी, गुस्से में कहा, "ये खाना जानवर भी ना खाएं!"

विराज ने पहली बार मुझे पकड़ा — थप्पड़ नहीं मारा, सिर्फ मेरी आँखों में झांका और कहा,


"इतनी नफरत क्यों है?"


वो सवाल नहीं था, एक कसक थी। और उसी पल मैं उठी, बिना किसी को कुछ बताए, सीधे करण के पास पहुँची।


"चलो, अब नहीं सहना ये सब, भाग चलते हैं," मैंने कहा।


लेकिन करण अब वो नहीं था, जो वादे करता था। उसके लफ्ज़ों में कोई गर्मी नहीं थी।


"अब भागकर क्या करेंगे? तुम्हारे पास कुछ नहीं, मेरे पास भी नहीं।"


मैं सन्न रह गई। वो जिसे मैं प्यार समझती थी, वो तो बस लालच से भरा था।


थकी, टूटी और बेबस मैं फिर उसी घर लौटी जिसे कभी "जेल" कहा था।


घर सूना था, अलमारी खोली — और वहाँ जो मिला, उसने मेरी दुनिया बदल दी।


मेरे बैंक डॉक्युमेंट्स, गहने, पैसे — सब वैसे ही थे। और साथ में था एक खत:


"मैं जानता हूँ ये रिश्ता तुम्हारे लिए एक बोझ रहा है। लेकिन मैंने तुम्हारी हर चीज संभाल कर रखी है, ताकि जिस दिन तुम खुद लौटो, तुम्हें लगे कि ये घर तुम्हारा है।"


"मैं तुम्हारा पति ज़रूर हूँ, पर जब तक तुम मर्जी से अपना दिल नहीं दोगी, मैं सिर्फ एक इंसान ही रहूंगा। मैं तुम्हारा हक नहीं छीनना चाहता, मैं तुम्हारा विश्वास जीतना चाहता हूँ।"


मेरे अंदर कुछ टूट गया था… और फिर कुछ नया जुड़ने लगा।


अगली सुबह मैंने पहली बार अपने मांग में सिंदूर भरकर खुद को आईने में देखा — अब मैं विराज की पत्नी थी, मन से भी।


सीधे उसके ऑफिस पहुँची और सबके सामने कहा,


"विराज, हमें लंबी छुट्टी पर जाना है। अब मैं तुम्हारी हूं — पूरी तरह से।"


💔 कहानी की सीख:

ज़िंदगी में कई बार हम जिसे “साधारण” समझते हैं, वही सबसे अनमोल साबित होता है।

प्यार, दिखावे और बोलचाल में नहीं — सम्मान, धैर्य और इंतज़ार में छिपा होता है।


अगर आपको ये कहानी दिल छू गई हो, तो एक ❤️ ज़रूर दबाइए और दूसरों से भी शेयर कीजिए — शायद किसी की आंखें खुल जाएं! 

Wednesday, 24 September 2025

बाप को कभी भी वो प्यार नहीं मिलता

ज्यों ज्यों बच्चे बड़े होते है। बाप से दूरियों बढ़ जाती है। बाप की याद तभी आती है जब उन्हें जरूरत होती है। एक उम्र के बाद बाप भरे घर में अकेला हो जाता है। बच्चों की शादी के बाद तो वह परिवार से पूरी तरह अलग कर दिया जाता है। घर के भीतर के हंसी ठहाकों में उसकी उपस्थिति नहीं होती। बस एक कमरे में उसकी जिंदगी ठहर जाती है। बहुत से काम उसकी अनुपस्थिति में होने लगते है। उसे शरीक करना भी जरूरी नहीं समझते। जिस घर की एक एक ईंट को जिसने अपनी सांसे होम कर बनाया था। वो घर भी उसके लिए अजनबी बनता जाता है। बाप को कभी भी वो प्यार नहीं मिलता जो एक मां को मिलता है। एक उम्र के बाद बच्चे बाप को गले नहीं लगाते। ना बाप की गोद में सिर रखकर सोते हैं। जो बच्चे परदेस रहते है वो भी मां को फोन लगाते है। उनकी कुशलता का समाचार भी बाप के पास मां के जरिए पहुंचता है। बाप के आखिरी पल एकांत में ही गुजरते है । पुरानी यादों के साथ। वह खुद में सिमट कर रह जाता है। घुटता है। छटपटाता है। मन मसोस कर रह जाता है। सच है ना?? #BAAP #motivation #pita #fatherlove 

#bapu #papa #deddy #parampita

 

खरेच मंत्री संजय राठोड यांनी बंजारा समाजासाठी काय केले ?

 खरेच मंत्री संजय राठोड यांनी बंजारा समाजासाठी काय केले ?

*मंत्री संजयभाऊ राठोड यांचेवर प्रश्न निर्माण करणा-यांच्या माहितीकरीता.*

बंजारा आरक्षणाचे पार्श्वभूमीवर एका बंजारा बांधवाने काही प्रश्न उपस्थित केले त्याला उत्तर देण्याचा प्रयत्न.

प्रश्न:- *“आरक्षणासाठी समाज रस्त्यावर आहे, आंदोलन तापले आहे, तुम्ही कुठे गायब आहात ?”*


सर्वप्रथम ही बाब लक्षात घेतली पाहीजे की, कोणताही मंत्री हा प्रत्यक्षात आंदोलनात उतरत नसतो. तो शासनाचा प्रतिनिधी असतो.मराठा आरक्षणात राधाकृष्ण वि खे पाटील यांनी जी भूमिका घेतली तीच ना संजय राठोड बंजारा आरक्षण मुद्यावर घेत आहेत.मंत्रिमंडळात काम करणाऱ्या समज परातिनिधीने समाज आणि शासन यामध्ये दुवा म्हणून काम करणे अपेक्षित असते.तसेच बंजारा समाजाची अनुसुचित जमातीची आरक्षणाची असलेली मागणी फार जुनी असून, हैद्राबाद गॅझेट लागू केल्याने तिला भक्कम आधार मिळाला आहे. आपल्या समाजाचे मंत्री संजय राठोड हे *सातत्याने समाजाला ONE NATION, ONE CATEGORY, ONE RESERVATION* ची भूमिका राज्य व देशपातळीवर मांडत आलेले आहे. एव्हढेच नव्हेतर बंजारा समाजाची काशी पोहरादेवी येथे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व इतर मंत्री मंडळातील सदस्यांसमोर बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीच्या आरक्षणाला धक्का न लावता आरक्षण देण्याबाबतची (ONE CATEGORY) मागणी सातत्याने केली आहे याचे समाज घटकातील बहुतांश लोक साक्षीदार आहेत. 


प्रश्न:- हैद्राबाद गॅझेटप्रमाणे बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीचे आरक्षण मिळू शकतो काय ?*

               

याअनुषंगाने समाजाचे सजग आणि तत्पर नेतृत्व मा. संजयभाऊ राठोड साहेबांनी स्वत: पुढाकार घेवून दि.8/9/2025 रोजी मुंबई येथे समाजातील सर्व महंत, नेते, विविध संघटनाचे पदाधिकारी, अभ्यासक यांचे समवेत विचारमंथन बैठक घेतली. सदर बैठकीतून अभ्यासकांकडून तो विषय समजून घेतला. तसेच त्यावेळी त्यांनी हा विषय अत्यंत महत्वाचा असून, याकरिता अराजकीय सर्व मान्य कृती समिती असावी अशी भूमिका मांडली. जर एखाद्या आंदोलनाला राजकीय वळण लागले तर त्याला पाहिजे त्याप्रमाणात यश मिळू शकत नाही याची त्यांना पूर्णपणे कल्पना आहे.

                  जर आपण श्री. मनोज जरांगे-पाटील यांचे आंदोलनाचा अभ्यास केला तर आज जवळपास 70 टक्के नेते मराठा समाजाचे आहेत. तसेच मंत्री मंडळात सुध्दा मोठया प्रमाणात आहेत. जसे की, सर्वश्री एकनाथ शिंदे, शरद पवार, अजितदादा पवार, नारायण राणे, अशोक चव्हाण, चंद्रकांत दादा-पाटील, राधाकृष्ण विखे-पाटील असे अनेक मान्यवर असून सुध्दा त्यांनी प्रत्यक्ष आंदोलनाचे नेतृत्व न करता अप्रत्यक्षरित्या (न कळत) बाहेरुन पाठींबा देत मनोज जरांगे-पाटील यांच्या नेतृत्वाखाली मराठा समाजाचे यशस्वी आंदोलन केले. त्यामुळे वरील दि.8/9/2025 रोजी झालेल्या बैठकीतून संजयभाऊ राठोड यांचीही भूमिका अशीच असल्याची दिसून येते.


प्रश्न :- *“संजय राठोड साहेब, तुम्ही स्वार्थासाठी महाराष्ट्रभर दौरे केले – ते समाजासाठी होते की स्वतःचं मंत्रीपद वाचवण्यासाठी ?*


न थकता, न थांबता सातत्याने समाजासाठी काम करणारा नेता म्हणून ना संजय राठोड यांची ओळख आहे. (ते मंत्री असो किंवा नसोत.) भारतात राहणारा बंजारा समाज जरी हा विविध आरक्षणाच्या प्रवर्गात, विविध नावाने विभागला असला, तरी तो एकच आहे, हीच भूमिका घेवून संजयभाऊ राज्य व देशपातळीवर दौरे करीत असतात. त्यामुळे समाजाला ONE NATION, ONE CATEGORY, ONE RESERVATION मिळावे ही भूमिका सातत्याने घेत आहेत. एव्हढेच नव्हेतर *महसूल मंत्री, चंद्रशेखर बावनकुळे यांचे अध्यक्षतेखाली* नेमण्यात आलेल्या इतर मागासवर्ग करिता नेमण्यात आलेल्या *मंत्रीमंडळ उपसमितीमध्ये संजयभाऊ राठोड हे सुध्दा सदस्य आहेत. मंत्रीमंडळ समितीच्या पहिल्याच बैठकीत बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीचे आरक्षणाला धक्का न लावता स्वतंत्र अनुसुचित जमातीचे आरक्षण द्यावे अशी मागणी केली*. तसेच बंजारा कृती समितीचे निवेदन सुध्दा समितीच्या अध्यक्षांना देवून समाजाची भावना त्यांच्यापर्यंत पोहोचविली. त्यामुळे समितीच्या अध्यक्षांनी तात्काळ दखल घेवून,व निवेदनावर लेखी शेरा देऊन, सचिव, इतर मागास बहुजन कल्याण यांना निवेदन पाठविले. 

         तसेच छगन भुजबळ यांचे अध्यक्षतेखाली सन 2020 मध्ये मंत्रीमंडळ उपसमिती नेमण्यात आली होती. त्या समितीमध्ये संजयभाऊ राठोड हे सदस्य होते. या समितीने बंजारा समाजाचे अनुषंगाने काही महत्वपूर्ण शिफारशी केल्या होत्या. जसे की,

• *वि.जा. (अ) आणि भ.ज. (ब) या मागास प्रवर्गासाठी नॉन क्रिमीलेयरची अट रद्द करणे.*

• *वि.जा.(अ), भ.ज. (ब), भ.ज. (क) व भ.ज. (ड) यामधील अंतरपरिवर्तनीयेचा नियम रद्द करणे.*

   या शिफारशीच्या अनुषंगाने विभागाने आतापर्यंत काय कार्यवाही केली, असे दि.10/09/2025 रोजीच्या मंत्रीमंडळ उपसमितीच्या पहिल्याच बैठकीत संजयभाऊ राठोड यांनी स्पष्ट शब्दात विचारले. तसेच पुढच्या बैठकीत केलेल्या कार्यवाहीचा अहवाल सादर करण्याबाबत सूचना दिल्या.


प्रश्न:- *तुमच्या भ्रष्टाचाराचे व इतर कारणामे डाग उघड होऊ नयेत म्हणून तुम्ही समाजाच्या नावाचा उपयोग केला का?* *की फक्त समाजाच्या नावावर राजकारण करून सत्ता उपभोगण्यासाठी हा खेळ केला?* *आज समाज तुम्हाला याचं उत्तर विचारतोय!”*

• 


समाजाचे दैवत स्व वसंतराव नाईक साहेब व स्व सुधाकरराव नाईक साहेब यांनी बंजारा समाजासाठी मोठे कार्य केले.यांच्या नंतर समाजाच्या विकासासाठी संजयभाऊ हे कार्य करीत आहेत.मंत्री संजयभाऊ राठोड यांनी केलेल्या प्रयत्नामुळे बंजारा समाजाची काशी असलेले श्रध्दास्थान पोहरादेवी-उमरीचा विकास होतांना दिसत आहे ही आपल्या समाजासाठी अभिमानाची बाब आहे. तसेच पोहरादेवी येथे उभारण्यात येत असलेल्या *संत सेवालाल महाराज इमारतीला महाराष्ट्र शासनाचा सर्वोत्कृष्ट इमारतीचा पुरस्कार* प्राप्त झाला आहे. हे आपल्यासाठी अभिमानाची बाब आहे. *धार्मिक स्थळाचा विकास म्हणजे समाजाचा विकास नव्हे ही बाब कायमची लक्षात ठेवता समाजाच्या सर्वांगीण विकासासाठी संजयभाऊंच्या प्रयत्नामुळे नक्कीच काही महत्वपूर्ण निर्णय मागील काळात समाजासाठी झाले आहेत*. जसे की,

• संत सेवालाल महाराज यांची शासकीय स्तरावर जयंती साजरी करणे.

• गोर बंजारा साहित्य अकादमी स्थापना

• बार्टी, सारथी, महाज्योती, अमृत योजनेच्या धर्तीवर वसंतराव संशोधन व प्रशिक्षण संस्था (वनार्टी)

या वरील योजनेमुळे SC, ST, मराठा, OBC वर्गामध्ये स्पर्धा परीक्षेची तयारी करून *हजारो विद्यार्थ्यांचे IAS,IPS व इतरही मोठ्या पदावर विराजमान होण्याचे सामान्य कुटुंबातील विद्यार्थ्यांचे स्वप्न पूर्ण झाले आहे. वानर्टी संस्थेमुळे आपल्याही समाजातून मोठे अधिकारी घडायला मदत होणार आहे*.. हे ही लक्षात घेतले पाहिजे.

• नवी मुंबई समाजासाठी जागा मिळवून त्याठिकाणी सेवाभवन बांधण्यात येणार.

• वसतिगृहात प्रवेश न मिळाल्यामुळे समाजातील हजारो विद्यार्थ्यांचे शिक्षण आर्थिक अडचणीमुळे पूर्ण होऊ शकत नाही. संजय भाऊ बंजारा समाजातील सामान्य कुटुंबातून आलेले असल्याने त्यांना ही बाब माहिती होती. त्यामुळेच सातत्यपूर्ण पाठपुरावा करून स्वाधार योजनेच्या धर्तीवर सावित्रीबाई फुले आधार योजना सुरू केली. यामाध्यमातून विद्यार्थ्यांना आर्थिक मदत होणार आहे. जेवढी मदत SC, ST विद्यार्थ्यांना होते, तेवढीच आपल्या विद्यार्थ्यांना होणार आहे.

• गोपीनाथ मुंडे उसतोड कामगार महामंडळ व सानुग्रह अनुदान योजना

• जिल्हयाच्या ठिकाणी मुलां-मुलींसाठी 72 शासकीय वसतिगृहे सुरु.

• ऊसतोड कामगारांच्या मुलां-मुलींसाठी 82 शासकीय वसतिगृहे सुरु.

• परदेशी शिक्षणासाठी दरवर्षी 75 विद्यार्थ्यांना शिष्यवृत्ती.

• संत सेवालाल महाराज समृध्दी योजना या माध्यमांतून तांडयामध्ये स्वतंत्र ग्रामपंचायती स्थापन होणार आहे.

तांड्यात स्वतंत्र ग्रामपंचायत स्थापनेसाठी असलेली सर्वात मोठी अडचण म्हणजे दोन गावामध्ये असलेली 3 किमी अंतराची अट... कुठेही मंत्रिमंडळ प्रस्तावात अंतर शिथिल करणे नसतानाही, *सर्वांना विरोध करून अंतराची अट रद्द करायला भाग पाडले*.. त्यामुळेच आज तांड्यात स्वतंत्र ग्रामपंचायत स्थापनेला वेग आला आहे..

• स्पर्धा परिक्षेची तयारी करणा-या बंजारा समाजातील 1000 मुलां-मुलींसाठी आपल्या आईच्या नावाने *मातोश्री प्रमिलादेवी दुलिचंद राठोड शिष्यवृत्ती योजना*..स्वतंत्र वैयक्तिक योजना सुरू केली.

यामाध्यमातून समाजातील *विद्यार्थ्यांना स्पर्धा परीक्षेचे मार्गदर्शन, अभ्यास साहित्य व आर्थिक* मदत होणार आहे. अशी कोणत्याही समाजासाठी एखाद्या राजकीय व्यक्तीने सुरू केलेली पहिली आणि एकमेव योजना आहे..


• वरील सर्व योजना मंजूर करणे/सुरु होणे, हे संजयभाऊ राठोड यांच्या प्रयत्नांचेच फलित आहे. *या सर्व बाबींमधून बंजारा समाजाचा फायदा होणार आहे. ना की संजयभाऊ राठोड यांचा फायदा होणार आहे*. त्यामुळे टिका-टिपण्णी करणा-यांनी या सर्व बाबींचा अभ्यास करणे गरजेचे आहे. उगाच काहीतरी लिहायचे म्हणून लिहू नये आणि समाजात संम्रभ निर्माण करु नये.


प्रश्न:- *मुंबईत आरक्षणाबाबत बैठक घेऊन तुम्ही समाजाला आश्वासन दिलं होतं – मग आज समाज आंदोलन करत असताना तुम्ही गायब का आहात ?*


 *याअनुषंगाने आपल्या समाजाचे संवेदनशील नेते मा. संजयभाऊ राठोड साहेबांनी स्वत: पुढाकार घेवून दि.8/9/2025 रोजी मुंबई येथे समाजातील सर्व महंत, नेते, विविध संघटनाचे पदाधिकारी, अभ्यासक यांचे समवेत बैठक घेतली. सदर बैठकीतून अभ्यासकांकडून तो विषय समजून घेतला. तसेच त्यावेळी त्यांनी हा विषय अत्यंत महत्वाचा असून, याकरिता अराजकीय सर्व मान्य कृती समिती असावी अशी भूमिका मांडली. जर एखाद्या आंदोलनाला राजकीय वळण लागले तर त्याला पाहिजे त्याप्रमाणात यश मिळू शकत नाही याची त्यांना पूर्णपणे कल्पना आहे.*


*प्रश्न:- आरक्षण मिळवून देण्याबाबत तुम्ही सरकारशी नेमकी कोणती पावलं उचललीत? त्याचा खुलासा आजपर्यंत का केला नाही?*


- ज्यावेळी मराठा समाजाला हैद्राबाद गॅझेट लागू झाला. त्यानंतरच्या मंत्रीमंडळ बैठकीत संजयभाऊ राठोड यांनी मुख्यमंत्री महोदय यांना बंजारा समाजाला हैद्राबाद गॅझेट लागू करावा, अशी भूमिका घेतली. तसेच सातत्याने ते मुख्यमंत्री महोदय यांचेकडे पाठपुरावा करीत आहेत. लवकरच मुख्यमंत्री यांचे अध्यक्षतेखाली बंजारा समाजाचे शिष्टमंडळाची बैठक व्हावी यासाठी ते प्रयत्नशील आहे.आज बहुतेक त्याबद्दल त्यांनी मुख्यमंत्री यांना पत्र दिल्याचे सुद्धा कळतेय.

     तसेच महसूल मंत्री, चंद्रशेखर बावनकुळे यांचे अध्यक्षतेखाली नेमण्यात आलेल्या इतर मागासवर्ग करिता नेमण्यात आलेल्या मंत्रीमंडळ उपसमितीमध्ये संजयभाऊ राठोड हे सुध्दा सदस्य आहेत. मंत्रीमंडळ समितीच्या पहिल्याच बैठकीत बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीचे आरक्षण द्यावे, अशी मागणी केली. तसेच बंजारा कृती समितीचे निवेदन सुध्दा समितीच्या अध्यक्षांना देवून समाजाची भावना त्यांच्यापर्यंत पोहोचविले. त्यामुळे समितीच्या अध्यक्षांनी तात्काळ दखल घेवून सचिव, इतर मागास बहुजन कल्याण यांना निवेदन पाठविले


प्रश्न:- आरक्षण कोणत्या मार्गाने मिळणार – न्यायालयीन, विधेयक, की केंद्राचा निर्णय ? समाजाला स्पष्ट उत्तर द्या!


 *अनुसुचित जमातीचे आरक्षण देण्याचे संपूर्ण अधिकार हे केंद्र शासनाचे आहे. राज्य शासन याची फक्त शिफारस करु शकतो. राज्यशासनाकडून केंद्र शासनास शिफारस होण्याकरीता संजयभाऊ राठोड हे प्रयत्नशील आहे*. 

         *एवढयावर न थांबता न्यायालयीन मार्ग अवलंबविता येईल काय, यासाठी विविध कायदे तज्ज्ञांशी त्यांची चर्चा सुरु आहे. मंत्रालयातील विविध विभागाच्या सचिवांशी सुध्दा ते विचार विनिमय करीत आहे. तसेच इतरही काही मार्ग अवलंबविता येईल काय याचाही ते प्रयत्न करीत आहेत. समाज हा संजयभाऊ राठोड यांचा प्राण आहे. ते कायम समाजासोबत असतात आणि समाजासाठी वाटेल ते करण्याची त्यांची नेहमीच तयारी राहीली आहे.


प्रश्न:- *स्वतःचं मंत्रीपद जाऊ नये, स्वतःवरचे भ्रष्टाचाराचे व इतर डाग उघड होऊ नयेत म्हणून तुम्ही समाजापासून दूर तर पळ काढत नाही ना?*


- बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीच्या आरक्षणाला धक्का न लावता अनुसुचित जमातीचे आरक्षण मिळावे, याकरिता संजयभाऊ राठोड साहेबांनी स्वत: पुढाकार घेवून दि.8/9/2025 रोजी मुंबई येथे समाजातील सर्व महंत, नेते, विविध संघटनाचे पदाधिकारी, अभ्यासक यांचे समवेत बैठक घेतली. तसेच ते सातत्याने समाजातील अभ्यासकांच्या संपर्कात राहून पुढील रणनिती काय असावी यावर विचारमंथन करीत आहे. मंत्रीन ना संजय राठोड यांनी स्वत: एखाद्या आंदोलनामध्ये किंवा मोर्चामध्ये प्रत्यक्ष सहभागी व्हावे हे कितपत योग्य आहे,याचीही अपेक्षा करतांना विचार करणे गरजेचे आहे.मंत्र्यांचे काम हे सरकार कडून काम करवून घेण्याचे आहे.


प्रश्न:- *आंदोलनकर्त्यांवर होणारा पोलिसांचा बडगा थांबवण्यासाठी तुम्ही हस्तक्षेप का करत नाही? हा अन्याय तुम्हाला दिसत नाही का?*


-लोकशाही मार्गाने आंदोलन, मोर्चे, उपोषण करणे याचे सर्वांना अधिकार आहेत. त्यामुळे काही ठिकाणी अनुचित प्रकार घडल्यास प्रशासन त्यांच्या नियमानुसार कारवाई करतो. परंतू एखाद्या ठिकाणी एखाद्यावर चुकीची कारवाई झाल्यास त्याची खात्री करुन त्याला संजयभाऊ नक्कीच मदत करतील, हे आपणांस सर्वांना माहिती आहे.


प्रश्न:- *बंजारा समाजाने तुम्हाला नेते मानलं, पण नेता संकटात पाठीशी राहतो – मग तुम्ही मागे का हटला ?*


- बंजारा समाज हा अनुसुचित जमातीच्या आरक्षणाची मागणी करीत आहे. यापूर्वी कित्येकवेळा संजयभाऊ यांनीही बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीच्या आरक्षणाला धक्का न लावता आरक्षण देण्याची मागणी केली आहे. समाजासोबत खंबीरपणे पाठीशी आहे आणि राहणार हे दाखवून देण्यासाठीच दि.8/9/2025 रोजी मुंबई येथे घेतलेल्या बैठकीत संजयभाऊ यांनी दाखवून दिलेले आहे. या बैठकीला जे उपस्थित होते, त्या सर्वांना हे ज्ञात आहेत.


प्रश्न:- *समाजात संभ्रम आणि अविश्वास वाढत आहे – याची नैतिक जबाबदारी तुम्ही घेणार का?*


समाजात कोणताही संभ्रम आणि अविश्वास नाही. समाजाची स्पष्ट आणि मुख्य एकच मागणी आहे की, बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीच्या आरक्षणाला धक्का न लावता आरक्षण मिळावे. त्यामुळे उगाच अनावश्यकरित्या काहीतरी लिखाण करुन समाजामध्ये संभ्रम निर्माण करु नये.


प्रश्न:- मुंबईच्या बैठकीत दिलेलं आश्वासन फक्त समाजाला फसवण्यासाठी होतं का? रणनीती भरकटवण्यासाठी होती?


-समाजाने अराजकीय कृती समिती स्थापन करावी. या कृती समितीच्या माध्यमातून प्रश्न सोडविण्यासाठी प्रयत्न करावेत. समाजाचा घटक म्हणून कृती समितीच्या सोबत असल्याचे ना संजय राठोड यांनी सांगितले आहे.आतापर्यंत यशस्वी झालेले सर्व आंदोलने पाहता ते अराजकीय असल्यास यश मिळण्याची मोठी संधी असते, हे मुंबईच्या बैठकीत संजयभाऊ यांनी आपल्या बोलण्यातून सांगितले आहे. परंतू संजयभाऊ यांनी प्रत्यक्षात आंदोलनात सहभागी होणे अपेक्षित नाही, असे वाटते.


प्रश्न:- *महाराष्ट्रातील बंजारा समाजातील तरुण, पुरुष-महिला, शेतकरी रस्त्यावर उतरले – काहींनी प्राण दिले त्यांच्याशी तुम्ही संवाद का साधला नाही?*


-आतापर्यंत समाजातील चार तरुणांनी आरक्षणाकरीता आपले प्राण गमावले आहे. संजयभाऊ यांनी या तरुणांच्या कुटुंबियांतील सदस्यांशी तसेच स्थानिक प्रशासनासाठी सुध्दा संपर्क साधला आहे. तसेच मी आपल्या सर्वांसोबत ठामपणे उभा आहे, अशी ग्वाही दिली आहे.


प्रश्न:- समाजाचा प्रश्न बाजूला ठेवून तुम्ही सत्ताधाऱ्यांना खूश करण्यासाठी गप्प बसलात का?

- यापूर्वीच वेळोवेळी संजयभाऊ यांनी आपली भूमिका स्पष्ट केलेली आहे हे आपणांस सर्वांना ज्ञात आहे.


प्रश्न:- *जर खरंच तुम्ही समाजाच्या बाजूने असता, तर आज आंदोलनकर्त्यांसोबत दिसलात असता – तुम्ही कुठे आहात?*


-काही तरी संभ्रम निर्माण करण्यासाठीचे प्रश्न विचारत असल्याचे दिसून येते. एखादा मंत्री कसा काय आंदोलनामध्ये सहभागी होवू शकतो,याचा विचार करावा.मराठा आंदोलन यशस्वी झाले. त्यात महाराष्ट्र शासनातील किती मंत्री उपस्थित होते याचे देखील प्रश्न उपस्थित करण्याऱ्याने विचार करावा.


प्रश्न:- *तुम्ही म्हणालात “मी आरक्षण घेऊनच समाजापुढे जाईन” – मग आता दिलेल्या वचनाचं काय झालं ?*


-आरक्षणाबाबत संजयभाऊ यांनी वेळोवेळी त्यांची भूमिका मांडली आहे.आरक्षण मिळवणे ही एक दिवसाची बाबा नाही त्याला कायदेशीर स्वरून द्यावे लागते.


 प्रश्न:- *समाजाच्या मागणीला ठोस कायदेशीर आधार देऊन सरकारसमोर मांडलं का ? की फक्त टाळाटाळ केली ?*


- अनुसुचित जमातीचे आरक्षण देण्याचे संपूर्ण अधिकार हे केंद्र शासनाचे आहे. राज्य शासन याची फक्त शिफारस करु शकतो. राज्यशासनाकडून केंद्र शासनास शिफारश होण्याकरीता संजयभाऊ राठोड यांचे प्रयत्न सुरु आहे. 

         एवढयावर न थांबता न्यायालयीन मार्ग अवलंबविता येईल काय, यासाठी विविध कायदे तज्ज्ञांशी त्यांची चर्चा सुरु आहे. मंत्रालयातील विविध विभागाच्या सचिवांशी सुध्दा ते विचार विनिमय करीत आहे. तसेच इतरही काही मार्ग अवलंबविता येईल काय याचाही ते प्रयत्न करीत आहेत.


प्रश्न:- समाजाला वारंवार आश्वासन देऊन पोहरादेवीला स्वतःसाठी बोलवले होते का?

- पोहरादेवी हे तिर्थक्षेत्र बंजारा समाजाची काशी असून, दरवर्षी लाखो समाजबांधव त्याठिकाणी दर्शनासाठी येतात. या तिर्थक्षेत्राचा विकास होणे त्यासोबतच समाजाच्या विकासाचे काही महत्वाचे प्रश्न मार्गी लागणे, हाच त्यांचा प्रयत्न होता. त्यामुळे आतापर्यंत समाजाच्या विकासासाठी झालेल्या निर्णयाचे फलित संजयभाऊ यांचे प्रयत्न आहेत. त्यामुळे स्पष्ट लक्षात येते की, समाजाचा विकास हाच संजयभाऊ यांचा ध्यास आहे 


प्रश्न:- *नॉन क्रिमिलियर व आरक्षण मिळून देऊ असे म्हणत तुम्ही दहा वर्षे काढले का?*


छगन भुजबळ यांचे अध्यक्षतेखाली सन 2020 मध्ये मंत्रीमंडळ उपसमिती नेमण्यात आली होती. त्या समितीमध्ये संजयभाऊ राठोड हे सदस्य होते. या समितीने बंजारा समाजाचे अनुषंगाने काही महत्वपूर्ण शिफारशी डिसेंबर 2020 मध्ये केल्या होत्या. जसे की,

• वि.जा. (अ) आणि भ.ज. (ब) या मागास प्रवर्गासाठी नॉन क्रिमीलेयरची अट रद्द करणे.

• वि.जा.(अ), भ.ज. (ब), भ.ज. (क) व भ.ज. (ड) यामधील अंतरपरिवर्तनीयेचा नियम रद्द करणे.

   या शिफारशीच्या अनुषंगाने विभागाने आतापर्यंत काय कार्यवाही केली, असे दि.10/09/2025 रोजीच्या मंत्रीमंडळ उपसमितीच्या पहिल्याच बैठकीत संजयभाऊ राठोड यांनी स्पष्ट शब्दात विचारले. तसेच पुढच्या बैठकीत केलेल्या कार्यवाहीचा अहवाल सादर करण्याबाबत सूचना दिल्या.


प्रश्न:- *पोहरादेवी व समाजाचा गैरवापर तुम्ही केला का ?


-संजयभाऊ राठोड हे दिग्रस, दारव्हा व नेर या यवतमाळ जिल्हयातील मतदार संघांचे आमदार आहेत. पोहरादेवी हे तिर्थक्षेत्र संजयभाऊ यांच्या मतदार संघाच्या क्षेत्राच्या बाहेरील वाशिम जिल्हयात आहे. परंतू ज्या समाजात जन्माला आलो, त्या समाजाचे देणं लागतो. या भावनेनी त्यांनी पोहरादेवी तिर्थक्षेत्र व समाजाच्या विकासासाठी कार्य करण्याचे सातत्याने प्रयत्न केले आहेत. याचेच फलित आजची पोहरादेवीची परिस्थिती, समाजासाठी शैक्षणिक, सांस्कृतिक, राजकिय, धार्मिक या अनुषंगाने मार्गी लागलेले प्रश्न होय. 


प्रश्न:- * महाराष्ट्राच्या आरक्षणाचा पत्ता नाही आणि देशाला एक आरक्षणाची मागणी तुम्ही कोणाच्या आधारावर करता ?


-बंजारा समाजाला अनुसुचित जमातीचे आरक्षण मिळावे किंवा देशपातळीवर एक समान आरक्षण असावे, यासाठी संजयभाऊ सतत प्रयत्नशील असल्याचे आपण वेळोवेळी पाहिलेले आहे.


प्रश्न:- *तुम्ही आतापर्यंत तीन मुख्यमंत्री महोदयांसोबत काम केलात केवळ समाजाचे विषय पुढे करून तुम्ही तुमची पोळी भाजली का 

 एखाद्या आमदाराला मंत्री करणे किंवा न करणे, हा त्या पक्षश्रेष्ठीचा अधिकार असतो. *परंतू मिळालेल्या संधीचे सोनं कसे करता येईल, हे त्या व्यक्तींवर अवलंबून असते. म्हणून संजयभाऊ यांनी मिळालेल्या संधीचे सोने करुन* पोहरादेवी-उमरी तिर्थक्षेत्राचा विकास व समाजाचे प्रमुख प्रश्न मार्गी लावले आहे.इतर प्रश्न मार्गी लावणे साठी ते प्रयत्न करीत आहेत.

संजयभाऊ याच्याबद्दल काहीही लिहीतांना किंवा भाष्य करतांना आपण अभ्यास करणे अपेक्षित आहे.समाज पूर्ण जाणतो.

Sanjay Rathod-संजय राठोड

Sanjay Rathod-आपला माणूस

Sanjay Rathod For Maharashtra

Sanjay Rathod FC

Sanjay Rathod - दिग्रस विधानसभा

Sanjay Rathod Samarthak

Sanjay bhau Rathod

Shital Sanjay Rathod

Damini Sanjay Rathod-दामिनी संजय राठोड

Monday, 15 September 2025

भारत में हर खाताधारक के खाते से मात्र ₹1 स्वतः कट जाए

 🇮🇳 भारत में हर खाताधारक के खाते से मात्र ₹1 स्वतः कट जाए, जब भी कोई वीर सैनिक सीमा पर शहीद हो, और वह पैसा सीधे उस शहीद के खाते में जमा हो जाए। यह विचार न केवल हमारे सैनिकों के बलिदान को सम्मान देगा, बल्कि हर नागरिक को देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास भी कराएगा। 🌟 आइए, इस नेक पहल को समर्थन दें और अपने शहीदों के परिवारों के लिए कुछ करें। #BharatMataKiJai #IndianArmy


💪 यह राशि भले ही छोटी हो, लेकिन इसके पीछे का भावना बहुत गहरी है। एक रुपये की कीमत से कहीं ज्यादा कीमती है वह स्वतंत्रता, जो हमारे सैनिकों की शहादत से मिली है। हर शहीद का परिवार हमारे लिए एक प्रेरणा है, जो बिना शिकायत के देश की सेवा में अपने प्रियजनों को खो देता है। 🙏 आइए, हम सब मिलकर उनका दर्द बांटें। #Shaheed #Respect


🌹 जब कोई सैनिक सीमा पर अपनी जान देता है, तो उसकी कुर्बानी का मूल्य आंकने के लिए कोई पैमाना नहीं है। लेकिन अगर हर भारतीय अपने खाते से ₹1 दे दे, तो यह एक बड़ा संदेश होगा कि हम उनके बलिदान को भूल नहीं सकते। 🌿 हर शहीद की याद में यह छोटा सा योगदान उनकी आत्मा को शांति देगा। #Freedom #Sacrifice


🎖️ हमारे सैनिक दिन-रात कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं, और उनके परिवार को हर कदम पर समर्थन की जरूरत होती है। यदि यह योजना लागू हो जाए, तो शहीदों के परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी, जो उनके जख्मों पर मरहम लगाने का काम करेगी। 💂 आइए, इस विचार को हकीकत बनाएं। 

जो इस बात से सहमत हैं कि शहीदों के लिए यह छोटा सा योगदान जरूरी है, वे कमेंट में "हां" लिखकर अपनी सहमति दें। इस पोस्ट को शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस नेक पहल से जुड़ सकें और देशभक्ति का जज्बा जागृत हो। 📢 हर एक वोट इस मुहिम को मजबूत करेगा। #Honor #Unity


🇮🇳 आखिर में, यह वादा करें कि हम अपने सैनिकों के बलिदान को कभी भूलेंगे नहीं और उनके परिवारों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे। 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे पर्वों पर उनकी शहादत को याद करते हुए देश के लिए कुछ न कुछ जरूर करें। जय हिंद! 🚩 


#JaiHind #Patriotism #politicalgyan

Wednesday, 3 September 2025

नाराज़ पत्नी ने अपने अध्यापक पति

 नाराज़ पत्नी ने अपने अध्यापक पति


से कहा–आप बाहर खाना खिलाने ही


नहीं ले जाते,आज रात का खाना बाहर


करेगें..।


मास्टर साब–


ठीक है पास के होटल में चलते हैं,


पत्नी–नहीं..किसी फाइव स्टार


होटल में चलते हैं....।


मास्टर साब–(एक मिनट के लिए


मौन) ठीक है...शाम 7 बजे चलते हैं।


ठीक सात बजे पति-पत्नी


अपनी कार में घर से निकले...।


रास्ते में–


मास्टर साब बोले,जानती हो...


एक बार मैंने अपनी बहन के


साथ पानीपूरी प्रतिस्पर्धा की थी।


मैंने 30 पानी पूरी खाई


और उसे हरा दिया....।


पत्नी–क्या यह इतना मुश्किल है.??


मास्टर साब–मुझे पानी-पूरी


प्रतियोगिता में "हराना" बहुत


"मुश्किल" है।


पत्नी–मैं आसानी से


आपको हरा सकती हूँ।


मास्टर साब–रहने दो ये


तुम्हारे बस का नहीं ….!!


पत्नी–


हमसे प्रतियोगिता करने चलिये….


मास्टर साब–


तो "आप" अपने-आप को


हारा हुआ देखना चाहती हैं.!!?


पत्नी–चलिये देखते हैं…।


वे दोनों एक पानी-पूरी स्टॉल पर


रुके और खाना शुरू कर दिया….।


25 पानी पूरी के बाद मास्टर


साब ने खाना छोड़ दिया।


पत्नी का भी पेट भर गया था,


लेकिन उसने मास्टर साब को


हराने के लिए एक और खा लिया


और चिल्लाई,“तुम हार गये।”


बिल 100 रुपये आया...


मास्टर साब-


अब होटल चलें खाना खाने …


पत्नी-नहीं अब पेट में जगह


नहीं बची...वापस घर चलो।


(पति-पत्नी घर लौट गये)


और पत्नी वापस घर आते हुए...


शर्त जीतने की बात पर बेहद


खुश थी....।


कहानी से नैतिक शिक्षा....


#एक_अच्छे_अध्यापक का


मुख्य उद्देश्य #न्यूनतम_खर्च


के साथ साथ #शिकायतकर्ता


को संतुष्ट करना होता है….।।

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...