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Thursday, 30 January 2025

एक पौधा सैकड़ों बीमारी की दवा

 🔹#अपामार्ग को चिरचिटा, लटजीरा, चिरचिरा, चिचड़ा भी बोलते हैं। यह एक बहुत ही साधारण पौधा है। आपने अपने घर के आस-पास, जंगल-झाड़ या अन्य स्थानों पर अपामार्ग का पौधा जरूर देखा होगा, लेकिन शायद इसे नाम से नहीं जानते होंगे। अपामार्ग की पहचान नहीं होने के कारण प्रायः लोग इसे बेकार ही समझते हैं, लेकिन आपका सोचना सही नहीं है। अपामार्ग (लटजीरा) एक जड़ी-बूटी है, और इसके कई औषधीय गुण हैं। कई रोगों के इलाज में अपामार्ग (चिरचिटा) के इस्तेमाल से फायदे मिलते हैं। दांतों के रोग, घाव, पाचनतंत्र विकार सहित अनेक बीमारियों में अपामार्ग के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।

      अपामार्ग की मुख्यतः दो प्रजातियां होती हैं, जिनका प्रयोग चिकित्सा में किया जाता है।

●सफेद अपामार्ग

●लाल अपामार्ग 


★सफेद अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे और उपयोग:-

अपामार्ग (लटजीरा) का औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा और विधियां ये हैंः-

●दांत के दर्द में अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे:

अपामार्ग के 2-3 पत्तों के रस में रूई को डुबाकर फोया बना लें। इसे दांतों में लगाने से दांत का दर्द ठीक होता है।

        अपामार्ग की ताजी जड़ से रोजाना दातून करने से दांत के दर्द तो ठीक होते ही हैं, साथ ही दाँतों का हिलना, मसूड़ों की कमजोरी, और मुंह से बदबू आने की परेशानी भी ठीक होती है। इससे दांत अच्छी तरह साफ हो जाते हैं।  

●चर्म रोग में अपामार्ग (चिरचिरा) के औषधीय गुण से फायदा:

चर्म रोग में अपामार्ग (लटजीरा) से औषधीय गुण से लाभ मिलता है। इसके पत्तों को पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी आदि चर्म रोग और गांठ के रोग ठीक होते हैं।

●मुंह के छाले में अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे:

मुंह में छाले होने पर अपामार्ग (लटजीरा) के गुण फायदेमंद होते हैं। इसके लिए अपामार्ग के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करें। इससे मुंह के छाले की परेशानी ठीक होती है।

●बहुत अधिक भूख लगने की बीमारी को भस्मक रोग कहते हैं। इसके उपचार के लिए अपामार्ग के बीजों के 3 ग्राम चूर्ण दिन में दो बार लगभग एक सप्ताह तक सेवन करें। इससे अत्यधित भूख लगने की समस्या ठीक होती है।

       अपामार्ग के 5-10 ग्राम बीजों को पीसकर खीर बना लें। इसे खाने से अधिक भूख लगने की समस्या ठीक होती है।

       अपामार्ग के बीजों को खाने से भी अधिक भूख नहीं लगती है।

       अपामार्ग (लटजीरा) के बीजों को कूटकर महीन चूर्ण बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे 3-6 ग्राम तक सुबह-शाम जल के साथ सेवन करें। इससे भी लाभ होता है।

●2 ग्राम अपामार्ग की जड़ के रस में 2 चम्मच मधु मिलाएं। इसे 2-2 बूंद आंख में डालने से आंखों के रोग ठीक होते हैं।

आईफ्लू, आंखों के दर्द, आंख से पानी बहने, आंखें लाल होने, और रतौंधी आदि में अपामार्ग का इस्तेमाल करना उत्तम परिणाम देता है। अपामार्ग की जड़ को साफ कर लें। इसमें थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर दही के पानी के साथ तांबे के बर्तन में घिसें। इसे काजल की तरह लगाने से आंखों के रोग में लाभ होता है।

●अपामार्ग के 2-3 पत्तों को हाथ से मसलकर रस निकाल लें। इस रस को कटने या छिलने वाले स्थान पर लगाएं। इससे खून बहना रुक जाता है।

     अपामार्ग की जड़ को तिल के तेल में पकाकर छान लें। इसे कटने या छिलने वाले जगह पर लगाएं। इससे आराम मिलता है।

●पुराने घाव हो गया हो तो अपामार्ग के रस के मलहम लगाएं। इससे घाव पकता नहीं है।

अपामार्ग (लटजीरा) की जड़ को तिल के तेल में पकाकर छान लें। इसे घाव पर लगाएं। इससे घाव का दर्द कम हो जाता है। इससे घाव ठीक भी हो जाता है।

लगभग 50 ग्राम अपामार्ग के बीज में चौथाई भाग मधु मिला लें। इसे 50 ग्राम घी में अच्छी तरह पका लें। पकाने के बाद ठंडा करके घाव पर लेप करें। इससे घाव तुरंत ठीक हो जाता है।

जड़ का काढ़ा बनाकर घाव को धोने से भी घाव ठीक होता है।

●अपामार्ग (लटजीरा) पंचांग से काढ़ा बना लें। इसे जल में मिलाकर स्नान करने पर खुजली ठीक हो जाती है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर मिलें।

●दमा के इलाज के लिए अपामार्ग की जड़ चमत्कारिक रूप से काम करती है। इसके 8-10 सूखे पत्तों को हुक्के में रखकर पीने से श्वसनतंत्र संबंधित विकारों में लाभ होता है।

●लगभग 125 मिग्रा अपामार्ग क्षार में मधु मिलाएं। इसे सुबह और शाम चटाने से बच्चों की श्वास नली और छाती में जमा कफ निकल जाता है। बच्चों की खांसी ठीक होती है। खांसी बार-बार परेशान करती है, और कफ नहीं निकल रहा है या फिर कफ गाढ़ा हो गया है तो अपामार्ग के सेवन से लाभ मिलता है। इस बीमारी में या न्यूमोनिया होने पर 125-250 मिग्रा अपामार्ग क्षार और 125-250 मिग्रा चीनी को 50 मिली गुनगुने जल में मिला लें। इसे सुबह-शाम सेवन करने से 7 दिन में लाभ हो जाता है।

     6 मिली अपामार्ग की जड़ का चूर्ण बना लें। इसमें 7 काली मिर्च के चूर्ण को मिलाएं। सुबह-शाम ताजे जल के साथ सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।

     अपामार्ग (लटजीरा) पंचांग का भस्म बनाएं। 500 मिग्रा भस्म में शहद मिलाकर सेवन करने से कुक्कुर खांसी ठीक होती है।

     बलगम वाली खासी को ठीक करने के लिए अपामार्ग की जड़ चमत्कारिक रूप से काम करती है। इसके 8-10 सूखे पत्तों को हुक्के में रखकर पीने से खांसी ठीक हो जाती है।

●अपामार्ग (लटजीरा) के 10-20 पत्ते लें। इन्हें 5-10 नग काली मिर्च और 5-10 ग्राम लहसुन के साथ पीसकर 5 गोली बना लें। बुखार आने से दो घंटे पहले 1-1 गोली लेने से ठंड लगकर आने वाला बुखार खत्म होता है।

●2-3 ग्राम अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को दिन में 2-3 बार ठंडे जल के साथ सेवन करें। इससे हैजा ठीक होता है।

अपामार्ग के 4-5 पत्तों का रस निकालें। इसमें थोड़ा जल व मिश्री मिलाकर प्रयोग करने से भी हैजा में लाभ मिलता है।

●20 ग्राम अपामार्ग पंचांग को 400 मिली पानी में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी एक चौथाई रह जाए तब 500 मिग्रा नौसादर चूर्ण और 1 ग्राम काली मिर्च चूर्ण मिला लें। इसे दिन में 3 बार सेवन करने से पेट के दर्द में राहत मिलती है। इससे पेट की अन्य बीमारी भी ठीक हो जाती है।

     2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिरा) की जड़ के चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट के दर्द ठीक होते हैं।

●अपामार्ग की 6 पत्तियों और 5 नग काली मिर्च को जल के साथ पीस लें। इसे छानकर सुबह और शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है। इससे खून बहना रुक जाता है।

अपामार्ग के बीजों को कूट-छानकर महीन चूर्ण बना लें। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे 3-6 ग्राम तक सुबह-शाम जल के साथ सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।

10-20 ग्राम अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को चावल के धोवन के साथ पीस-छान लें। इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर पिलाने से पित्तज या कफज विकारों के कारण होने वाले खूनी बवासीर की बीमारी में लाभ होता है।

●अपामार्ग की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में पीस लें। इसे घोलकर पिलाने से पथरी की बीमारी में बहुत लाभ होता है। यह औषधि किडनी की पथरी को टुकडे-टुकड़े करके शरीर से बाहर निकाल देती है। किडनी में दर्द के लिए यह औषधि बहुत काम करती है।

●रसौली के इलाज में अपामार्ग के फायदे होते हैं। अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते एवं 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। इसे गाय के 20 मिली दूध में मिलाकर पिलाएँ। इसमें इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाएं। यह प्रयोग रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें। इससे गर्भाशय में गांठ (रसौली) की बीमारी ठीक हो जाती है।

●सज्जीक्षार, सेंधा नमक, चित्रक, दंती, भूम्यामलकी की जड़, श्वेतार्क लें। इसके साथ ही अपामार्ग (चिरचिरा) बीज का पेस्ट और गोमूत्र लें। इसे तेल में पकाएँ। इसका लेप करने से साइनस जल्द ठीक हो जाता है।

●भोजन उचित तरह से नहीं पचने के कारण भी वजन बढ़ता है। अपामार्ग में दीपन-पाचन गुण होता है। यह भोजन को पचाने में मदद करता है। इससे शरीर के वजन को कम करने में मदद मिलती है। 


★लाल अपामार्ग (चिरचिरा) के फायदे और उपयोग:


◆भूख बढ़ाने में लाल अपामार्ग (चिरचिरा) के औषधीय गुण फायदेमंद होते हैं। लाल अपामार्ग की जड़ या पंचांग का काढ़ा बना लें। 10-30 मिली मात्रा में काढ़ा का सेवन करें। इससे भूख बढ़ती है।  

●1-2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिरा) के तने और पत्ते के चूर्ण का सेवन करने से कब्ज की बीमारी ठीक होती है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

●लाल अपामार्ग के पत्ते से बने 10-30 मिली काढ़ा में चीनी मिला लें। इसका सेवन करने से मूत्र रोग जैसे पेशाब में दर्द होना और पेशाब का रुक-रुक कर आने की परेशानी ठीक होती है।

●लाल अपामार्ग की जड़ या पंचांग का काढ़ा बना लें। इसे 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से पेचिश और हैजा रोग में लाभ होता है।

★ अपामार्ग का इस्तेमाल की सही मात्रा :-

रस- 10-20 मिली

जड़ का चूर्ण- 3-6 ग्राम

बीज- 3 ग्राम

क्षार- 1/2-2 ग्राम

   नोट- अपामार्ग अर्थात चिरचिरा के उपयोग की समस्त जानकारी विभिन्न स्रोतों से ली गयी है, उपयोग से पूर्व किसी जानकार वैद्य/डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें। 

   धन्यवाद!

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🔹 महिलाओं की सभी समस्याओं का समाधान है ये अकेला पौधा *खाली पेट 20-30ml पंचांग का स्वरस पीने से लगभग सभी प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं या पांच ग्राम पंचांग चूर्ण या दस ग्राम पंचांग का काढ़ा उबालकर छानकर पिएं 

एक औषधीय वनस्पति है। इसका वैज्ञानिक नाम 'अचिरांथिस अस्पेरा' (ACHYRANTHES ASPERA) है। हिन्दी में इसे 'चिरचिटा', 'लटजीरा', 'चिरचिरा ' आदि नामों से जाना जाता है।इसे लहचिचरा भी कहा जाता है।

सफेद और लाल दोनों प्रकार के अपामार्ग की मंजरियां पत्तों के डण्ठलों के बीच से निकलती हैं। ये लंबे, कर्कश, कंटीली-सी होती है। इनमें ही सूक्ष्म और कांटे-युक्त बीज होते हैं। ये बीज हल्के काले रंग के छोटे चावल के दाने जैसे होते हैं। ये स्वाद में कुछ तीखे होते हैं। इसके फूल छोटे, कुछ लाल हरे या बैंगनी रंग के होते हैं। लाल अपामार्ग की डण्डियां और मञ्जरियां कुछ लाल रंग की होती हैं। इसके पत्तों पर लाल-लाल सूक्ष्म दाग होते हैं।  

ये एक गज़ब का डाइयुरेटिक और डिटाक्सीफायर है

आप इसके इस्तेमाल से 1 महीने के भीतर ही अपना वज़न कम कर सकते हैं। अपामार्ग के पत्ते आपके शरीर से ज़हरीले पदार्थो को बाहर निकालते हैं और आपके शरीर के अन्दर फ़ालतू पानी को भी बाहर निकालते हैं। किडनी तथा लिंफेटिक सिस्टम की विषाक्तता को डिटॉक्स करने के लिए अपामार्ग जबरदस्त औषधि है 


 इसका उपयोग करने से आपका पेट भरा भरा हुआ सा लगता हैं, जिससे आपको भूख नहीं लगती हैं और आपका वज़न बहुत ही जल्दी कम होने लगता हैं। इसके सेवन से आपको बार-बार पेशाब लगने लगता हैं, लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं हैं। पेशाब के जरिये यह आपके शरीर के अंदरूनी सफाई करके विषैले टोक्सिन्स को बाहर निकालता हैं


पुरूषों के लिए भी ये महा गुणकारी है अपामार्ग चूर्ण 8 ग्राम पानी में पीसकर छानकर 5 ग्राम शहद और 250 मिली दूध के साथ पीने से शीघ्रपतन नहीं होता है

अपामार्ग के 5-8 ग्राम बीजों का चूर्ण बराबर मिश्री के साथ दिन में दो बार खाने से जो बार बार भूख लगती है वो शांत हो जाती है यानी भस्मिक रोग शांत हो जाता है 


इसके बीजों की खीर बनाकर खाने से कई दिन तक भूख नहीं लगती और शरीर कमजोर नहीं होता है। साथ ही मोटापा दूर करने में मददगार होता है।

इसमें लिपोमा और अन्य गांठों को पिघलाने के भी जबरदस्त गुण पाए जाते हैं 

लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में अपामार्ग क्षार, सज्जी क्षार और जवाक्षार को लेकर पानी में पीसकर सूजन वाली गांठ पर लेप की तरह सेलगाने से सूजन दूर हो जाती है।

इस के रस में रूई को डुबाकर दांतों में लगाने से दांतों का दर्द कम होता है।

इसकी ताजी जड़ से दातून करने से भी दांतों का दर्द ठीक होता है। साथ ही दांतों की सफाई दातों का हिलना, मसूड़ों की कमजोरी और मुंह की बदबू भी दूर होती है।

 

अपामार्ग के पंचांग का काढ़ा लगभग 14 से 28 मिलीलीटर दिन में 3 बार सेवन करने से कुष्ठ (कोढ़) रोग ठीक हो जाता है।


 अपामार्ग का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग की

मात्रा में लेकर पीने से जलोदर (पेट में पानी भरना) की सूजन कम होकर समाप्त हो जाती है।

अपामार्ग की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में पीस लें। इसे घोलकर पिलाने से पथरी की बीमारी में बहुत लाभ होता है। यह औषधि किडनी की पथरी को टुकडे-टुकड़े करके शरीर से बाहर निकाल देती है। किडनी में दर्द के लिए यह औषधि बहुत काम करती है।


*महिलाओं के लिए वरदान है अपामार्ग *

अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म विकार ठीक होता है।

अपामार्ग की जड़ के रस से रूई को भिगोएं। इसे योनि में रखने से मासिक धर्म की रुकावट खत्म होती है।

अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते और 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। अब इसे गाय के दूध में मिला लें। इसमें ही 20 मिली या इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाने से मासिक धर्म के दौरान अधिक खून बहने की परेशानी में लाभ होता है। इसे रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें।

अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव की समस्या ठीक होती है।

सिस्ट और फाइब्रॉयड के इलाज में अपामार्ग के जबरदस्त फायदे होते हैं। अपामार्ग के लगभग 10 ग्राम ताजे पत्ते एवं 5 ग्राम हरी दूब को पीस लें। इसे 60 मिली जल में मिलाकर छान लें। इसे गाय के 20 मिली दूध में मिलाकर पिलाएँ। इसमें इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सुबह सात दिन तक पिलाएं। यह प्रयोग रोग ठीक होने तक नियमित रूप से करें। इससे गर्भाशय में गांठ (सिस्ट फाइब्रॉयड ) की बीमारी ठीक हो जाती है।

 ल्यूकोरिया का इलाज करने के लिए अपामार्ग का प्रमुखता से इस्तेमाल करते हैं। अपामार्ग पंचांग के रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से ल्यूकोरिया ठीक होता है।


इसके अलावा इसके तंत्र में भी बहुत महत्वपूर्ण प्रयोग हैं 

प्रसव पीड़ा प्रारम्भ होने से पहले अपामार्ग के जड़ को एक धागे में बांधकर कमर में बांधने से प्रसव सुखपूर्वक होता है, परंतु प्रसव होते ही उसे तुरंत हटा लेना चाहिए। 


इसे वज्र दन्ती भी कहते हैं। इसकी जड़ से दातून करने से दांतों की जड़ें मजबूत और दाँत मोती की तरह चमकते हैं। पायरिया मसूड़ों दांतों की कमजोरियां और सड़न हटाने में चमत्कारिक रूप से प्रभावी है

बहुत ही गुणकारी है।

Saturday, 18 January 2025

मेरा यौवन उफान मार रहा था, लेकिन मेरे पति मेरी शारीरिक जरूरतों को पूरी नहीं कर पा रहे थे

 मेरा यौवन उफान मार रहा था, लेकिन मेरे पति मेरी शारीरिक जरूरतों को पूरी नहीं कर पा रहे थे 

जिंदगी की आपाधापी में कब हमारा रिश्ता थोड़ा ठंडा पड़ गया, यह मैं खुद भी नहीं समझ पाई। अरुण से प्यार तो बहुत है मुझे, लेकिन उनकी व्यस्त जिंदगी और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच कहीं हमारी अपनी दुनिया का वो पुराना रोमांस जैसे खो गया था। मुझे उनकी तरफ से वो गर्मजोशी और ध्यान नहीं मिल पा रहा था, जो पहले मिला करता था। धीरे-धीरे, मैं खुद को अकेला महसूस करने लगी थी, मानो मेरे दिल के एक कोने में खालीपन सा छा गया हो।


इसी दौरान, हमारी गली में एक नया चेहरा दिखने लगा—आदित्य। एक जोशीला, हमेशा मुस्कुराता हुआ, 25 साल का लड़का, जो अपने हर अंदाज से जिंदगी को मानो एक नई रोशनी दे रहा था। उसकी ऊर्जा, उसकी मासूमियत, मुझे खींचने लगी थी। जब भी उससे बातचीत होती, मुझे अपने अंदर एक नई ताजगी महसूस होती।


लेकिन मैंने खुद से सवाल भी किए, 'क्या यह सही है? क्यों मैं आदित्य के प्रति आकर्षित हो रही हूँ, जबकि मेरी खुद की शादी है और अरुण से मेरा सच्चा प्यार है?' खुद को मैं समझा नहीं पा रही थी कि आखिर ये सब मेरे साथ क्यों हो रहा है।


मैंने अपनी सबसे करीबी दोस्त नीतू से बात की। उसने मुझे समझाया, 'हर किसी की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आता है, जब उन्हें नए तरीके से भावनात्मक और शारीरिक ऊर्जा की जरूरत महसूस होती है। पर इसका मतलब ये नहीं कि तुम्हारा अरुण के प्रति प्यार खत्म हो गया है। हो सकता है, ये उस भावनात्मक खालीपन का नतीजा हो जो तुम अपने रिश्ते में महसूस कर रही हो।'


नीतू की बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। मुझे एहसास हुआ कि शायद ये सिर्फ क्षणिक आकर्षण था। मैंने महसूस किया कि यह अरुण से ही बातचीत का समय है। मैंने अरुण से खुलकर अपनी भावनाओं को साझा किया। अरुण ने मेरी बातों को समझा और उसने माना कि कहीं न कहीं हम दोनों अपने रिश्ते को नजरअंदाज कर बैठे थे।


अब हमने तय किया कि एक-दूसरे के लिए समय निकालेंगे, अपनी भावनाओं को फिर से जोड़ेंगे। हमने मिलकर अपने रिश्ते को फिर से वो गर्मजोशी और उत्साह देने की ठानी, जो कभी हमारी पहचान हुआ करता था।


इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि जब रिश्ते में खालीपन महसूस हो, तो बिना झिझक एक-दूसरे से खुलकर बात करनी चाहिए। शायद इसी से हर रिश्ते में वो ताजगी और खुशहाली बनी रहती है।"


दोस्तों,,,, ये बात बिल्कुल सही है अगर रिश्ते में खालीपन मे हो तो जल्दी से उस रिश्ते पर ध्यान देना चाहिए 


वर्ना फिर अपना होते हुए भी अपना नही रहेगा, रहेगी,, पैसे कमाने के साथ साथ इन सब चीजों पर ध्यान देना चाहिए 


पोस्ट अच्छी लगी हो तो फॉलो, लाइक, कॉमेंट, यर ज़रूर करें🙏

Tuesday, 14 January 2025

डॉ. गुप्ता कहते हैं, लापरवाही के अलावा कैंसर से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए।

 डॉ. गुप्ता कहते हैं, लापरवाही के अलावा कैंसर से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए।

 (1). पहला कदम चीनी का सेवन बंद करना है। आपके शरीर में चीनी के बिना, कैंसर कोशिकाएं स्वाभाविक रूप से मर जाती हैं। (2). दूसरा कदम यह है कि एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाएं और इसे सुबह भोजन से पहले 1-3 महीने तक पिएं और कैंसर खत्म हो जाएगा। मैरीलैंड मेडिकल रिसर्च के अनुसार, गर्म नींबू पानी कीमोथेरेपी से 1000 गुना बेहतर, मजबूत और सुरक्षित है। 

(3). तीसरा कदम है सुबह और रात को 3 बड़े चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल पिएं, कैंसर गायब हो जाएगा, आप चीनी से परहेज सहित अन्य दो उपचारों में से कोई भी चुन सकते हैं। अज्ञानता एक बहाना नहीं है। अपने आस-पास के सभी लोगों को बताएं, कैंसर से मरना किसी के लिए भी अपमान है; 

जीवन बचाने के लिए व्यापक रूप से साझा करें।


केवल सलाह 


सोर्स इंटरनेट #cancer 

Monday, 13 January 2025

थोड़ा उजट किस्म का हो सकता है पुरूष लेकिन औरत को सवाँर देता है पुरुष

 भले ही पुरुष घर मे सामान बिखेर देता हो पर

घर सँवारने के लिये पसीना वो ही बहाता है।

           अपना मोजा भी न ढूँढ पाने वाला पुरुष

अपने बच्चे के मनपसंद खिलौना सारे बाजार में से ढूँढ लाता है।।

             घर के काम मे हाथ न बटा पाये चाहे

मगर घर की नींव वही रखता है।।।

          जिस घर को औरत सजाती है उस घर में पाई-पाई लगा देता है...

          थोड़ा उजट किस्म का हो सकता है पुरूष लेकिन औरत को सवाँर देता है पुरुष।।

            सुबह का जब शाम को घर लौटता है पुरुष, अपने साथ कई दीये उज्वलित कर देता है।

             ब्रिज सा विशाल पुरुष भीतर से शिशु होता है। प्यार, दुलार और मनुहार की अपेक्षा करता है स्त्री से, तो क्या बुरा करता है..!

              लाख नारी शक्ति की बात करें हम । पर हम बखूबी ये जानते है कि औरत पुरुष का ही आधा हिस्सा है। 

हमारी बहस इस सोच से भी खत्म हो सकती है कि अगर हम खुद को अलग-अलग स्थापित करते है तो बिखराव निश्चित है। शिव के अर्धनारी रूप को मन से स्वीकार करना होगा। और यही सत्य है...यही प्रकृति है।

🙏🙏🙏🙏🙏

Monday, 23 December 2024

कम उम्र में सेक्स के लिए मैंने सारी हदे पार कर दी

 जवान उम्र में सेक्स के लिए मेने सारी हदे पार कर दी लेकिन अब विश्वास नहीं होता की में 5 साल पहले की एक बिगड़ैल और गैरजिम्मेदार, सामाजिक परंपराओं को तोड़ने वाली लड़की थी

उस दिन सुबह से ही मौसम खुशगवार था। अंशुल के घर में फूलों की महक थी, और हवा गुनगुना रही थी। अंशुल के मम्मी-पापा कल ही कानपुर से आ गए थे। अंशुल ने उन्हें सब कुछ बता दिया था। उन्हें खुशी थी कि बेटा पांच साल बाद ही सही, ठीक रास्ते पर आ गया था। वरना शादी के नाम से तो वह भड़क जाया करता था।


मम्मी-पापा के सामने शिखा को खड़ा कर अंशुल ने कहा,

"अब आप देख लीजिए। जैसा आप चाहते थे, वैसा ही मैंने किया। आप एक सुंदर, पढ़ी-लिखी और अच्छी बहू अपने बेटे के लिए चाहते थे। क्या शिखा से अच्छी और सुंदर बहू कोई हो सकती है?"


शिखा जैसे ही अंशुल की मम्मी के चरण छूने के लिए झुकी, उन्होंने उसे रोक लिया और गले से लगा लिया। शिखा पहली ही नजर में सबको पसंद आ गई थी।


अंशुल ने मम्मी-पापा को शिखा के अतीत के बारे में बताना जरूरी नहीं समझा। उसने बस इतना कहा कि शिखा एक रिश्तेदार के घर पली-बढ़ी है और अब दिल्ली में नौकरी कर रही है। मम्मी-पापा समझदार थे और शिखा की भावनाओं का सम्मान करते हुए कोई सवाल नहीं किया।


शिखा और अंशुल की शादी बेहद सादगी और परंपरागत तरीके से हुई। ज्यादा तामझाम और दिखावा अंशुल के परिवार को पसंद नहीं था। करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच शादी संपन्न हुई।


शादी के बाद शिखा ने न सिर्फ अंशुल के घर को, बल्कि उसके व्यक्तित्व को भी संवार दिया। अंशुल की मम्मी ने उसे बेटी की तरह घर की जिम्मेदारियां सिखाईं। शिखा ने भी हर बात को खुलकर सीखा। नतीजा यह हुआ कि वह एक समझदार पत्नी, आदर्श बहू और सुलझी हुई गृहिणी बन गई।


अब शिखा को विश्वास नहीं हो रहा था कि कभी वह इतनी विद्रोही और गैरजिम्मेदार लड़की थी। वह अपने अतीत को याद कर सोचती कि बिना शादी के किसी पुरुष के साथ रहना और शादी कर एक परिवार का हिस्सा बनना कितना अलग है।


कॉलेज के दिनों की शिखा


शिखा पढ़ाई में होशियार थी लेकिन अपने विद्रोही स्वभाव के कारण कॉलेज में मशहूर थी। वह हर गतिविधि में भाग लेती, लेकिन उसकी चंचलता के कारण उसकी सच्चाई शायद ही किसी को समझ में आती।


कॉलेज में ही उसकी मुलाकात राघव से हुई, जो यूनियन का अध्यक्ष था। दोनों ने होस्टल छोड़ ममफोर्डगंज में एक कमरा लेकर साथ रहना शुरू कर दिया। यह पूरे शहर के लिए एक चौंकाने वाली बात थी।


परंतु राघव के साथ बिताए गए पांच सालों ने शिखा को जीवन का सबसे बड़ा सबक सिखाया। राघव ने उसे केवल अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया। जब उसका मन भर गया, तो उसने शिखा को छोड़ दिया।


अंशुल की मुलाकात शिखा से


शादी के कई साल बाद, मैट्रो में अंशुल और शिखा की मुलाकात हुई। एक-दूसरे को पहचानते ही उनके चेहरे पर हैरानी और खुशी के भाव आ गए।


बातों का सिलसिला शुरू हुआ। अंशुल ने बताया कि उसने शादी नहीं की क्योंकि वह अपने जीवन को स्थिर करने में व्यस्त था। शिखा ने धीरे-धीरे अपने अतीत की बातें साझा कीं और स्वीकार किया कि उसने अपने फैसलों से बहुत कुछ सीखा है।


नए रिश्ते की शुरुआत


अंशुल और शिखा ने एक-दूसरे के साथ समय बिताना शुरू किया। धीरे-धीरे दोनों के बीच का रिश्ता गहराता गया। शिखा ने अंशुल के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत की।


कुछ महीनों बाद, शिखा और अंशुल की शादी हो गई। शिखा ने अंशुल के घर में न सिर्फ अपने लिए जगह बनाई, बल्कि मम्मी-पापा के दिल में भी खास जगह बना ली।


अब, शिखा एक खुशहाल जिंदगी जी रही थी। अंशुल अक्सर मजाक में कहता,

"तुमने मुझे तो पाया, लेकिन मम्मी-पापा को मुझसे छीन लिया!"


दोस्तों, ये कहानी आपको कैसी लगी? नीचे कमेंट में जरूर बताएं। ऐसी ही और कहानियों के लिए पेज को फॉलो करें।

Sunday, 15 December 2024

गरम मसाला सामग्री

 उत्पादों के जहर से बचना चाहते हैं तो घर में बने शुद्ध और ग्रेवी के स्वाद को सौ गुना बढ़ा दे 🌿


गरम मसाला सामग्री


धनिया साबुत 40 ग्राम (5 टेबल स्पून) 

जीरा 20 ग्राम (3 टेबल स्पून) 

काली मिर्च- 25 ग्राम (4 टेबल स्पून)

बड़ी इलायची- 10 ग्राम (2 टेबल स्पून)

शाही जीरा- 20 ग्राम (3 टेबल स्पून)

पियानो- 10 ग्राम या 8 से 10 टुकड़े (1 इंच)

पत्थर का फूल -5 ग्राम (1 टेबल स्पून) 

तेजपत्ते- 5 -6

जयफल- 10 ग्राम (2 टेबल स्पून)

जावित्री- 10 ग्राम (2 टेबल स्पून)

लौंग- 5 ग्राम (1 टेबल स्पून)

छोटी इलायची - 5 ग्राम (1 टेबल स्पून) 

पिपली - 4-5 स्टिक

चक्र फूल - 1 या 2


गरम मसाला बनाने की विधि


🌸एक नॉन स्टिक पैन या आटे में धनिया के बीज को मिलाकर मिश्रण पर ठंडा होने तक मिश्रण और किसी प्लेट में ठंडा होने के लिए रख दीजिये|


🌸अब वापस वही पॉट में जीरा, रॉयल जीरा, काली मिर्च, को अधकचरे प्रभाव पर प्रभाव भूने और ठंडा होने के लिए अन्य प्लेट में रख दें।


🌸अब बाकी बचे सभी पटाखों को फ़्राईट में फ़्राईट गरम कर के टुकड़ों में तोड़ दिया..और ठंडा होने के लिए रख देंगे 

🌸ध्यान रखें कि आटा जले नहीं, उन्हें टुकड़ों में मिला लें तो सभी को निकाल कर ठंडा करके पीसकर जार में डाल दें और मोटा (दरदरा) पीसकर तैयार कर लें |मसालों को एयरटाइट में निकाल लें।


आपका गरम मसाला पाउडर तैयार है। किसी भी सब्जी को पकाते समय आखिरी में गरम मसाला पकाते समय एक मिनट पका लें। स्वाद बढेगा 


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लेखक:सुनिल राठौड़ 

मुझे शतरंज खेलना बहुत पसंद है।"

 एक दिन, एक कंपनी में interview के दौरान, बॉस, जिसका नाम रोहित था, ने सामने बैठी महिला, पूजा से पूछा, "आप इस नौकरी के लिए कितनी तनख्वाह की उम्मीद करती हैं?"


पूजा ने बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास से कहा, "कम से कम 90,000 रुपये।"

रोहित ने उसकी ओर देखा और आगे पूछा, "आपको किसी खेल में दिलचस्पी है?"

पूजा ने जवाब दिया, "जी, मुझे शतरंज खेलना बहुत पसंद है।"

रोहित ने मुस्कुराते हुए कहा, "शतरंज बहुत ही दिलचस्प खेल है। चलिए, इस बारे में बात करते हैं। आपको शतरंज का कौन सा मोहरा सबसे ज्यादा पसंद है? या आप किस मोहरे से सबसे अधिक प्रभावित होती है?"

पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा, "वज़ीर।"

रोहित ने उत्सुकता से पूछा, "क्यों? जबकि मुझे लगता है कि घोड़े की चाल सबसे अनोखी होती है।"

पूजा ने गंभीरता से जवाब दिया, "वास्तव में घोड़े की चाल दिलचस्प होती है, लेकिन वज़ीर में वो सभी गुण होते हैं जो बाकी मोहरों में अलग-अलग रूप से पाए जाते हैं। वह कभी मोहरे की तरह एक कदम बढ़ाकर राजा को बचाता है, तो कभी तिरछा चलकर हैरान करता है, और कभी ढाल बनकर राजा की रक्षा करता है।"

रोहित ने उसकी समझ से प्रभावित होते हुए पूछा, "बहुत दिलचस्प! लेकिन राजा के बारे में आपकी क्या राय है?" पूजा 

पूजा ने तुरंत जवाब दिया, "सर, मैं राजा को शतरंज के खेल में सबसे कमजोर मानती हूँ। वह खुद को बचाने के लिए केवल एक ही कदम उठा सकता है, जबकि वज़ीर उसकी हर दिशा से रक्षा कर सकता है।"

रोहित पूजा के जवाब से प्रभावित हुआ और बोला, "बहुत शानदार! बेहतरीन जवाब। अब ये बताइए कि आप खुद को इनमें से किस मोहरे की तरह मानती हैं?"

पूजा ने बिना किसी देर के जवाब दिया, "राजा।"

रोहित थोड़ी हैरानी में पड़ गया और बोला, "लेकिन आपने तो राजा को कमजोर और सीमित बताया है, जो हमेशा वज़ीर की मदद का इंतजार करता है। फिर आप क्यों खुद को राजा मानती हैं?"

पूजा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "जी हाँ, मैं राजा हूँ और मेरा वज़ीर मेरा पति था। वह हमेशा मेरी रक्षा मुझसे बढ़कर प्यार करता था, हर मुश्किल में मेरा साथ देता था, लेकिन अब वह मुझे पूरी तरह से छोड़ चुका है।"


रोहित को यह सुनकर थोड़ा धक्का लगा, और उसने गंभीरता से पूछा, "तो आप यह नौकरी क्यों करना चाहती हैं?"

पूजा की आवाज भर्राई, उसकी आँखें नम हो गईं। उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, "क्योंकि मेरा वज़ीर अब इस दुनिया में नहीं रहा। अब मुझे खुद वज़ीर बनकर अपने बच्चों और अपने जीवन की जिम्मेदारी उठानी है।"

यह सुनकर कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई। रोहित ने तालियाँ बजाते हुए कहा, "बहुत बढ़िया, पूजा जी। आप एक सशक्त महिला हैं।"...

यह कहानी उन सभी बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो जिंदगी में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर सकती हैं। बेटियों को अच्छी शिक्षा और परवरिश देना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कभी उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो वे खुद वज़ीर बनकर अपने और अपने परिवार के लिए एक मजबूत ढाल बन सकें।

किसी विद्वान ने कहा है, "एक बेहतरीन पत्नी वह होती है जो अपने पति की मौजूदगी में एक आदर्श औरत हो, और पति की गैरमौजूदगी में वह मर्द की तरह परिवार का बोझ उठा सके।"

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।

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दहेज़ के पैसे जुटाना शुरू कर दो।"

 अपनी प्लेट में दो तरह की आइसक्रीम का मज़ा लेती सुनीता ने अपने देवर विनोद को कहा, "क्या देवर जी तीसरी बेटी होने पे कौन पार्टी देता है? अब तो दहेज़ के पैसे जुटाना शुरू कर दो।"


अपनी भाभी के प्लेट को देख हँसते हुए विनोद ने कहा, अरे भाभी ! "आप क्यूँ चिंता करती है घर में ख़ुशी आयी थी तो सबके साथ बाँट लिया और फिर बेटियां तो अपना भाग्य ले कर आती है।"


अपने देवर की बात सुन सुनीता मुस्कुरा के रह गई...जबकि असल में दिल खुशी से झूम रहा था देवर के घर तीसरी बेटी का जन्म जो हुआ था। खुद सुनीता के दो बेटे थे और इस बात का खूब घमंड रखती।


दो तीन दिन में सारे मेहमान चले गए। अब घर पे थे तो विनोद रूचि और तीनों बेटियां मानवी, अंकिता और तीसरी बेटी जिसका नाम सबने प्रीति रखा।


समय अपनी रफ़्तार से चल रहा था बच्चियों एक से बढ़ कर एक थी चाहे पढ़ाई हो या घर में माँ की मदद करना। घर की दीवारें बेटियों की बनायीं खूबसूरत पेंटिंग से सजती और अलमारियां उनके जीते मैडल और ट्रॉफी से, तीनों बेटियों की किलकारी और हँसी से विनोद और रूचि का घर गुलजार रहता।


सुनीता कोई मौका नहीं छोड़ती रूचि को एहसास दिलाने का की वो बेटियों की माँ है।


"देख रूचि चाहे जितने इनाम जीत ले ये लड़कियाँ पर दहेज़ तो फिर भी लगेगा जोड़ना शुरू किया की नहीं।"


रूचि अपनी जेठानी के बातों से जब घबरा जाती तब विनोद समझाता...।


"बेटियां अपना भाग्य ले कर आयी है रूचि, हमें तो बस उन्हें सही राह दिखानी है फिर देखना किसी बेटे वालों से कम सुख हमें नहीं देंगी हमारी ये तीनों बेटियां।"


"जब कोई पूछता क्या विनोद जी कब तक किराये के मकान में रहेंगे अपना घर नहीं बनवाना क्या....."?


"हॅंस कर विनोद कहता जब मेरी बच्चियाँ कुछ बन जायेंगी तो समझो मेरा मकान भी बन जायेगा फिलहाल तो मुझे मेरी बच्चियों का भविष्य बनाना है।"


समय अपनी गति से बढ़ता गया रूचि और विनोद की तपस्या रंग लाई.. मानवी की बैंक में नौकरी लग गई, अंकिता सीए कर जॉब में आ गई और प्रीति इंजीनियरिंग कर दिल्ली में जॉब करने लगी।


"बड़ी मम्मी, कल माँ पापा की एनिवर्सरी की एक छोटी सी पार्टी रखी है आप सब समय से आ जाना।" मानवी ने अपनी बड़ी मम्मी सुनीता को फ़ोन कर पार्टी का इनविटेशन दे दिया।


सारी तैयारियां तीनों बहनों ने बहुत मन से की थी शहर के सबसे अच्छे होटल में पार्टी हॉल बुक था। खाने की मेनू में सारी चीज़े चुन चुन कर तीनों ने रखा था और माँ पापा का गिफ्ट वो तो एक सरप्राइज था सबके लिये...."


पार्टी वाले दिन सुबह सुबह प्रीति भी दिल्ली से आ गई प्रीति के आते ही घर में एक रौनक सी आ गई।


"ये क्या माँ? बालों में कैसी सफेदी सी आ रही है ऐसे जाओगी क्या पार्टी में..।"


प्रीति ने कहा तो रूचि ने हँसते हुए कहा मुझे कौन देखने वाला वहाँ अब तो तुम बच्चों के दिन है। नहीं माँ, अभी चलो पार्लर और प्रीति अपनी माँ को ले पार्लर चली गई। हल्के मेकअप और सुन्दर सी साड़ी में अपनी माँ को सजा संवार दिया प्रीति ने। विनोद के लिये एक शानदार सूट तैयार था। सूट को देख आंखें झलक उठी विनोद की....। शाम होते है सब तैयार हो हॉल की ओर निकल पड़े।


मेहमानों से हॉल भर गया सबकी बधाइयाँ स्वीकार कर रूचि और विनोद ने एक दूसरे को माला पहनाया और केक काट एक दूसरे को खिलाया।


सब विनोद और रूचि के भाग्य को सराह रहे थे सुनीता भी आयी थी पार्टी में अपने पति और दोनों बेटों के साथ। पार्टी की भव्य तैयारी देख सुनीता जलन से भर उठी। आज अहसास हो रहा था की देवर की बेटियां हो कर भी जो सुख ये लड़कियाँ अपने माता पिता को दे रही थी वो उसके लाडलों ने ना कभी दी थी और ना ही कभी देते।


तभी प्रीति ने माइक ले अनाउंस किया.. "" नमस्कार सभी को आप सब हमारे बुलाने पे आये आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया। अब समय है मेरे पापा माँ के गिफ्ट का जो हम तीनों बहनो ने अपने माँ पापा को दिया है लेकिन इसके लिये बाहर लॉन में चले सब।


ये क्या है प्रीति? जब विनोद ने धीरे से प्रीति से पूछा तो हँसते हुए मानवी ने कहा आप बस चले पापा और खुद देख ले.. तीनों बहनें आँखों ही आँखों में इशारे कर हॅंस रही थी। सारे मेहमान कौतुहल से बाहर आये, लॉन में एक चमचमाती नई कार खड़ी थी सारे मेहमान तालियां बजाने लगे, वाह भाई वाह बेटियां हो तो ऐसी।


"पापा अब आपके स्कूटर का मज़ा तो ये नहीं दे सकती पर अब हम सब एक साथ स्कूटर पे बैठ भी तो नहीं सकते इसलिए आज से इसकी सवारी होगी।" सारे मेहमान अंकिता की बात सुन हॅंस पड़े।


रूचि और विनोद के आँखों में खुशी के आंसू थे और सिर गर्व से ऊंचा सब ने खूब बधाई दी और पार्टी का लुत्फ उठाया ।


सुनीता भी गई बधाई देने, 'बधाई हो देवर जी बेटियों ने नई गाड़ी दी और क्या चाहिए।"


"सच कहा भाभी और क्या चाहिए मुझे जब ऐसे बच्चे हो तो। मैंने कहा था ना बेटियां खुद अपना भाग्य बनाती है यहाँ तो इन तीनों ने मेरा भाग्य भी बदल दिया, देखिये तो कैसे मुझे स्कूटर से उठा कार में बिठा दिया।"


अपने देवर की बात सुन सुनीता ने अपने नालायक जवान बेटों को देखा जो आइसक्रीम के मज़े लेने में व्यस्त थे ... आज बेटों की माँ होने का दंभ टूट गया था सुनीता का।


* बेटियां किसी बेटे से कम नहीं होती बस थोड़ा प्यार ओर साथ हो तो बेटियां वो कर जाती है जो कई बेटे वालो के भाग्य में भी नहीं होता।

Friday, 13 December 2024

पैसे और गहने ले लिए ना?

 रात के 12 बज रहे थे। अनुज का फोन आया। फोन पर एक धीमी आवाज में फुसफुसाहट हुई - "हेलो..."

नेहा ने भी धीमे स्वर में जवाब दिया, "हां बोलो..."


अनुज ने पूछा, "सब तैयारी हो गई? सुबह 4 बजे की बस है।"

नेहा ने कहा, "हां, मेरे कपड़े पैक हो गए हैं। बस पैसे और गहने लेना बाकी है।"


अनुज ने फिर कहा, "अपने सारे डॉक्यूमेंट भी ले लेना। नया घर बसाना है, शायद दोनों को काम करना पड़े।"

नेहा ने जवाब दिया, "ठीक है, सब कुछ लेकर तुम्हें कॉल करती हूं।"


इसके बाद नेहा ने माँ की अलमारी खोली। उसमें से गहनों का डिब्बा निकाला और अपने लिए बनवाया गया मंगलसूत्र बैग में रखा। झुमके पहन लिए, और चूड़ियों का डिब्बा बैग में डाल ही रही थी कि माँ की तस्वीर गिर पड़ी। तस्वीर को उठाते हुए उसे याद आया कि माँ ने कितनी मेहनत से ये सब जोड़ा था। माँ की बातें उसे अंदर तक कचोट गईं।


फिर उसने घर के पैसे निकाले। यह वही रकम थी जो पापा, अनिकेत की पढ़ाई के लिए लोन लेकर आए थे। नेहा ने इसे भी बैग में रख लिया। उसके दिल में उलझन थी, लेकिन वह खुद को समझाने की कोशिश कर रही थी।


उसने अनिकेत के कमरे में झांका। अनिकेत पढ़ाई में डूबा हुआ था। माँ नींद की दवा लेकर सो रही थीं। पापा, हमेशा की तरह, वर्किंग टेबल पर बही खाता बना रहे थे। सब अपने काम में व्यस्त थे।


अपने कमरे में जाकर उसने अनुज को फोन लगाया। "सब कुछ तैयार है। घर में कोई जाग नहीं रहा।"

अनुज ने पूछा, "पैसे और गहने ले लिए ना?"

इस बार नेहा को अनुज का यह सवाल चुभा। उसने गुस्से में कहा, "हां ले लिए। लेकिन तुम बार-बार यही क्यों पूछ रहे हो?"


अनुज ने बहलाते हुए कहा, "अरे, नए घर के लिए पैसे तो चाहिए ही ना। मोबाइल भी लेना है। बस तुम फिक्र मत करो।"

नेहा ने एक पल के लिए सोचा और बोली, "सुनो, क्या तुममें इतनी हिम्मत नहीं है कि मेरे लिए कुछ कमा सको?"


अनुज बगलें झांकते हुए बोला, "अरे, ऐसी बात नहीं है। बस शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा।"

नेहा अब चुप हो गई। उसे अनुज की बातों में सच्चाई नहीं दिख रही थी।


थोड़ी देर की खामोशी के बाद उसने कहा, "सुनो, अभी के लिए ये भागने का प्लान कैंसल करते हैं। पहले तुम कुछ कमा कर दिखाओ। जब दो महीने का खर्च इकट्ठा कर सको, तब मुझे बुलाना। नहीं कर पाए, तो मुझे भूल जाना।"

अनुज कुछ बोलने ही वाला था कि नेहा ने फोन काट दिया।


नेहा ने पापा के कमरे का दरवाजा खटखटाया। पापा ने चौंककर पूछा, "क्या हुआ बेटा, अभी तक सोई नहीं?"

नेहा ने कहा, "पापा, मैं नौकरी करना चाहती हूं। जब तक अनिकेत की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती, मुझे घर का हाथ बंटाने दीजिए।"

पापा ने स्नेह से नेहा के सिर पर हाथ फेरा। उनकी आंखों में गर्व था।

नेहा मन ही मन सोच रही थी कि भगवान ने उसे सही वक्त पर संभाल लिया। "थैंक यू गॉड, आपने मुझे एक बड़ी गलती करने से बचा लिया।"

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लेखक: सुनिल राठौड़ 

Monday, 9 December 2024

जवानी में क्यों हर लड़की की चाहत होती है

 जवानी में क्यों हर लड़की की चाहत होती है, इसमें कोई भी शामिल नहीं है कि ये शारीरिक ज़रूरत के साथ मानसिक ज़रूरत भी है जिसे आप किसी से प्यार करते हैं। तो उसके साथ अपने प्यार को अनंत सीमा तक ले जाने की दवा है सेक्स 

एक साधारण सी लड़की, जिसे कॉलेज में देखकर अपने सपनों की दुनिया मिल गई। वह वक्त मेरी जिंदगी में बेहद प्रभावशाली लग रहा था। पढ़ाई, दोस्त, और सबसे साहसी राहुल। राहुल...वो नाम नहीं, मेरी दुनिया थी।


पहली बार उन्हें पायल में देखा तो लगा, जैसे किसी फिल्म का हीरो हो। दोस्त से भरा, मुस्कुराता हुआ चेहरा और हर किसी की मदद का हाथ बढ़ाने वाला। पता नहीं कब और कैसे, हमारी दोस्ती प्यार में बदल गई। राहुल के साथ हर पल एक जादू जैसा लगता था। वह मेरी हर छोटी-बड़ी बात कहता है, मेरे सपने को सुनता है, और उन्हें पूरा करने का वादा करता है।


कॉलेज की लाइब्रेरी में एक साथ पढ़ना, कैंटीन में चाय के कप शेयर करना, और क्लास के बाद चौदह बातें करना—हमारी जिंदगी बस दोस्ती खुशियों से भरी थी। राहुल ने माय से कहा, "सीमा, चांदनी शादी करके ही मेरा सपना पूरा होगा। हम साथ रहेंगे, हमेशा के लिए।" मैं भी उनकी हर बात पर विश्वास रखता था।


हमारा रिश्ता इतना गहरा हो गया कि हमने अपने प्यार को हर सरहद पार कर लिया। पहली बार जब राहुल ने मुझसे करीब आकर कहा, तो मुझे थोड़ा डर लगा, लेकिन उनके बयान ने मुझे हर डर से दूर कर दिया। मुझे लगता है, राहुल तो मेरा ही है, फिर यह डर कैसा? मैंने उसे अपना राजसी राजसी दिया, अपनी आत्मा, अपना शरीर, अपना विश्वास।


लेकिन हर बार जब मैं डरता हूं कि कहीं कुछ गलत न हो जाए, राहुल मुझे समझाता है। उन्होंने ही कहा था। मैं उसकी बात सहयोगी रही। ये छोटी-छोटी गोलियां मुझे असुरक्षा से बचाती रहीं, या शायद मैं यही बनी थी।


कॉलेज खत्म हो गया और मेरे दोस्तों को हमारे साथी की खबर मिल गई। मैंने सोचा था, जैसे फिल्मों में होता है, राहुल सब ठीक कर लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मेरे परिवार ने उन्हें लॉरी से ज़मानत दे दी। दूसरी वह जाति का था, और मेरे साथियों के लिए यह संबंध नामुम्किन था।


मैंने बहुत लड़ाई की, रोई, गिड़गिड़ाई, लेकिन मेरे माता-पिता ने मेरी एक न सुनी। और आख़िरकार, मैंने हार मान ली। राहुल से दूर जाना मेरे लिए सबसे बड़ा दर्द था। मेरी शादी अजय से तय हो गई। अजय अच्छा इंसान था, लेकिन राहुल जैसा नहीं।


शादी के बाद मैंने खुद को नई जिंदगी में ढालने की कोशिश की। अजय मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता था। वह मेरी हर ज़रूरत का असली मतलब है, लेकिन मेरे दिल में राहुल की यादें अब भी ताज़ा हैं। मैंने खुद से वादा किया कि मुझे इस अवसर का एक मौका मिला।


शादी के कुछ महीने बाद जब मैं इस बात से अनजान हो गया तो अजय ने डॉक्टर से मिलकर फैसला किया। मुझे चिंता हो गई थी, लेकिन उम्मीद थी कि सब ठीक हो जाएगा। डॉक्टर ने जब मेरी नैतिकता देखी, तो उनका चेहरा गंभीर हो गया।


उन्होंने कहा, "आपकी प्रजनन क्षमता खत्म हो गई है। बार-बार क्वांटम कॉन्ट्रासेप्टिव का इस्तेमाल आपकी सेहत पर भारी पड़ गया है।" मेरी दुनिया वहीं थी। मैंने अजय को सच बताया-राहुल के साथ मेरा रिश्ता, मेरी ग़लतियाँ।


अजय ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसके चेहरे की स्याही ब्यां कर रही थी। वह अवलोकन करता है, जैसे मैं कोई अजनबी हूं। उसने मुझे न अपनाता, न ही छोड़ा। हमारा रिश्ता अब सिर्फ एक समझौता बनकर रह गया है।


आज जब मैं अपने कमरे में बैठा था, तो सोच रहा था कि अगर मैंने उस समय राहुल के प्यार में अपने भविष्य के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाई, तो शायद आज मेरी जिंदगी अलग होगी।

राहुल का प्यार सच्चा था या नहीं, ये मुझे आज तक समझ नहीं आया। लेकिन मैंने जो सपना देखा था, वे राजनीतिक रह गए। मेरा आरज़ू अधूरा रह गया।

अगर आप मेरी कहानी पढ़ रहे हैं, तो एक गुज़ारिश है—प्यार की गहराई में जाने से पहले अपना भविष्य पहचानो और मत भूलिए। हमें कई सारी मशीनें मिलती हैं, लेकिन हर मौका एक नई ज़िम्मेदारी भी देता है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के नाम छोटा सा संदेश.. छोड़ा मुंह बड़ी बात..

 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के नाम छोटा सा संदेश.. छोड़ा मुंह बड़ी बात..   राज नेता, कुछ विपक्षी दल,संगठन,मीडिया.सभी, के सभी अपनी अपनी र...