sunilrathod

Monday, 2 September 2024

बेटी को बाहर पढ़ने भेज रहे हैं, तो उससे कठोर नहीं बल्कि दोस्त बनकर इस बारे में बात करें।

 मैं तो किसी भी लड़के के सामने टांग खोल कर लेट जाऊंगी, और मिनट में मेरा काम हो जाएगा, तुम अपना सोचो। 😔मेरा नाम सोनी है, और मैं मध्य प्रदेश के छोटे से गांव जोगियापुर में रहती हूँ। 🏡 अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण, घर की जिम्मेदारियाँ मेरे कंधों पर हैं। मेरे माता-पिता ईंट भट्ठे पर काम करते थे, लेकिन एक हादसे में पापा का एक हाथ कट गया और तबसे उन्होंने काम पर जाना बंद कर दिया।💔


जब मैं घर से आ रही थी, तो पापा ने मुझे ₹5000 दिए और बोले, "बेटा, अपना ध्यान रखना।" 💸 **क्योंकि हॉस्टल में खाना-पीना और रहना हो ही रहा था, मेरे पास बस कुछ निजी खर्चे ही थे। मुझे लगा था कि यह पैसे पर्याप्त होंगे, पर ऐसा नहीं था। 😟 कॉलेज में मैंने देखा कि जो लड़कियाँ फीस माफी की एप्लीकेशन देती हैं, उनके पास महंगे फोन और कपड़े होते हैं और वे कहीं आने-जाने के लिए कार बुक करती हैं।🚗


**जब मैंने इस बारे में और जानना चाहा, तो जो बातें सामने आईं, उनसे मैं हैरान रह गई। यह सब मेरे लिए अविश्वसनीय था, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह आम बात थी।** 😳 **आप में से कुछ लोग मेरी इस बात को सुनकर गुस्सा करेंगे और कुछ को यकीन नहीं होगा, लेकिन एक बहुत बड़ा तबका है जो इस सच्चाई को अच्छी तरह जानता है। यह तबका जानता है कि कैसे शहर की लड़कियाँ कॉलेज में पढ़ाई के साथ अपना खर्च चलाती हैं।**


**मुझे पता चला कि ये लड़कियाँ अमीर लड़कों को ढूंढती हैं, जिनकी शक्ल-सूरत से ज्यादा पैसा मायने रखता है।** 💰 **यह सारी प्रक्रिया एक क्रमबद्ध तरीके से होती है। पहले लड़कियाँ एक अच्छा लड़का फंसाती हैं, कुछ दिन प्यार भरी बातें करती हैं और 1-2 हफ्ते में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं।** 😶 **इसके लिए वे डेटिंग ऐप, पब-बार, और महंगी पार्टियों का सहारा लेती हैं, जहां अमीर लड़के आते हैं। एक बार शारीरिक संबंध बन जाने के बाद ये लड़कियाँ लड़कों को अपने वश में कर लेती हैं, और बदले में महंगे मोबाइल, कपड़े, रेस्टोरेंट में खाना आदि मांगती हैं।** 📱👗


**लेकिन इसमें गलती सिर्फ लड़कियों की नहीं है, उनके माता-पिता की भी है। आखिर वे क्यों नहीं पूछते कि उनकी बेटी को इतना महंगा फोन और हर हफ्ते नए कपड़े कहां से मिल रहे हैं?** 🤔 **इस तरह लोग अपना खर्चा चलाते हैं। यह सुनकर आपको लग सकता है कि किसी लड़के को बेवकूफ बनाना कितना आसान है।**

*लेकिन लड़के हमेशा अच्छे नहीं होते हैं। कई बार लड़कियाँ अपने क्षणिक सुख के लिए यह काम करती हैं, लेकिन कैसे चुटकी बजाते ही उनकी जिंदगी खराब हो जाती है, यह मैं बताती हूँ।** 😓 **हमारे वार्ड नंबर 6 के कमरे नंबर 33 की एक लड़की को भी यही नशा चढ़ा था। उसे एक लड़का मिल गया, जो उसे महंगे गिफ्ट और फोन देकर फंसाता रहा। उसने जितना गिफ्ट और पैसे दिए थे, उसका चार गुना लड़की के जिस्म को बेचकर कमा लिया था।** 😢


**एक दिन उस लड़के ने उसे अपने कुछ जानने वालों के साथ संबंध बनाने को कहा। लड़की समझ गई कि वह फंस चुकी है, लेकिन मजबूरी में उसे यह सब करना पड़ा।** 😔 **उसके पास नग्न अवस्था की वीडियो थी, जिसे दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया गया। यह सिलसिला चलता रहा और लड़की को समाज के डर से कोई एक्शन नहीं ले सकी। आज वह लड़की काउंसलिंग सेंटर में है, क्योंकि वह अंदर से इतनी स्ट्रॉन्ग नहीं थी।** 😢


**यह एक सच्ची कहानी है, जो बड़े शहर में जाने के बाद कई लड़कियों और लड़कों के साथ होती है।** 😔 **मेरे हॉस्टल में 100 में से 98 लड़कियाँ इसी तरह अपना खर्चा चलाती थीं और उनमें से 10 लड़कियों का जमकर शारीरिक शोषण होता था।** 😓 **यह नंबर सुनने में कम लग सकता है, लेकिन हो सकता है कि आपकी बहन या बेटी भी कभी बड़े कॉलेज में एडमिशन ले और इस रास्ते पर चल पड़े।**

*मैं सभी पैरेंट्स से अनुरोध करूंगी कि आप अपनी बेटी को बाहर पढ़ने भेज रहे हैं, तो उससे कठोर नहीं बल्कि दोस्त बनकर इस बारे में बात करें।** 💬 **उन्हें बताएं कि कैसे लोग चंद जरूरतों के लिए अपना जिस्म किसी गैर लड़के के हाथ में देते हैं और बाद में उन्हें जीवन भर पछताना पड़ता है।** 😢 **यदि उन्हें किसी से प्रेम है या कोई मित्र बना है, तो सबसे पहले मित्रता परिवारवालों की नजर के सामने करें।** 👨‍👩‍👧 **ऐसे दोस्त बनाएं जो आपको अपने माता-पिता से मिलाने में हिचकिचाहट महसूस न करें। नहीं तो पल भर में ही एक कॉलेज स्टूडेंट से वैश्या बनने में समय नहीं लगेगा।** 😞

प्रेम और सेक्स*

 **प्रेम और सेक्स**


अगर कोई पुरुष किसी स्त्री के पास जाता है और कहता है कि "मैं तेरे करीब इस कारण हूँ कि मैं प्यार करता हूँ," तो यह धोखा है। यह गलत है। 


सेक्स शरीर की जरूरत है, तो यह गलत नहीं है। पर सेक्स को प्यार कहने की भूल से बचें। ईमानदार रहें। अगर सेक्स करना है, तो सामने वाले को साफ शब्दों में कहें। 

और साथी से पहले, खुद को स्पष्ट कर लें कि आप प्यार में हैं या वासना में। 


स्त्री फूल की तरह कोमल होती है। और फूल को रगड़कर, नोचकर, उसके शरीर पर निशान बनाकर या बाहर-भीतर घिसकर, प्यार नहीं किया जाता। स्त्री का शरीर और उसकी योनि की नसें बेहद संवेदनशील होती हैं। बहुत ज्यादा बारीक होती हैं। 


आज जो महिलाएं अपनी डॉक्टर के पास जा रही हैं, उसका एक कारण यह भी है कि उनके शारीरिक संबंधों में हिंसा है। वासना के वेग के चलते, न तो पुरुष को होश रहता है और न स्त्री इतनी हिम्मत कर पाती कि पुरुष को 'न' कह सके। 


और फिर बच्चेदानी में हजारों बीमारियां लग जाती हैं। मासिक धर्म में भयानक दर्द, OCD, PCOD और पता नहीं क्या-क्या सहन करना पड़ता है। 


पुरुष एक्टिव है स्वभाव से और स्त्री पैसिव। इसलिए यहां पुरुष को समझना चाहिए कि पल भर की वासना के लिए किसी स्त्री का शरीर खराब न करें। वैसे भी अगर सेक्स को धैर्य और तरीके से किया जाए, और एक ठहराव हो भीतर तो उसके परिणाम दोनों व्यक्तियों के लिए सुखद होते हैं। और संतुष्टि भी मिलती है। 


लेकिन जोश में आकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाले पुरुष, कभी भी संतुष्टि को उपलब्ध नहीं होते। जो व्यक्ति विवाहित हैं, उन्होंने अनुभव किया होगा कि सालों तक सेक्स करने पर भी उनके भीतर सेक्स की इच्छा ज्यों की त्यों है। इसका कारण यही है कि उन्होंने गहराई से कभी इस चीज को नहीं जाना। 


45 मिनट से पहले तो स्त्री का शरीर खुलता ही नहीं कि वह तुम्हें अपनी बाहों में भरे, या तुम्हें अनुमति दे कि तुम उसके भीतर प्रवेश करो। इसलिए फोरप्ले का इतना महत्व है। और ठीक उसी तरह आफ्टरप्ले भी अर्थ रखता है कि तुम्हारी वजह से मैं जीवन ऊर्जा का आनंद ले पाया। 


केवल पेनिट्रेशन को सेक्स समझने वाले, बलात्कारी हैं। अपने ही साथी का बलपूर्वक हरण करना, बलात्कार ही होता है। आज जो 70 फीसदी महिलाएं ऑर्गेज़्म से अनजान हैं, उसका कारण सेक्स की अज्ञानता है। इस बात को अहंकार पर चोट न समझें, बल्कि अपने आपको बेहतर बनाने का प्रयास करें। अपनी महिला मित्र के पैर छुएं, उससे अनुमति लें, उसके प्रति श्रद्धा भाव रखें, और इस बात का ध्यान रखें कि उसे दर्द न दें, आनंद दें। 


भले तुम दस मिनट, आधे घंटे का सेक्स कर लो, पर स्त्री अछूती ही रह जाती है तुम्हारे स्पर्श से, और तुम भी अधूरे ही लौटकर आते हो। बहुत धीरे-धीरे शरीर तैयार होता है, बहुत धीरे-धीरे वे द्वार खुलते हैं, जब तुम्हें अनुमति मिलती है। 


और यह सब समझने के लिए भीतर स्थिरता चाहिए। और बिना मेडिटेशन के यह संभव नहीं। बिना मेडिटेशन जीवन उथला ही रहता है। अगर गहराई चाहिए जीवन में, तो ध्यान बहुत जरूरी है। 


होश, ठहराव, स्थिरता, धीरज, प्रेम, श्रद्धा – ये सारे शब्द केवल ध्यान करने से ही जीवन में उतरेंगे। किताबें पढ़ने या ज्ञान सुनने से कुछ नहीं होगा।

पति और पत्नी दोनों सरकारी अधिकारी थे,

 पति और पत्नी दोनों सरकारी अधिकारी थे, जिसमें पत्नी का पद पति से एक रैंक छोटा था। 😝 एक दिन उनमें किसी बात पर ऐसी खटपट हो गई कि दोनों के बीच बोलचाल बंद हो गई। घर में तीसरा कोई नहीं था, तो यह चुप्पी और भी तकलीफदेह हो गई। लेकिन चूंकि दोनों सरकारी कर्मचारी थे, तो उन्होंने इस समस्या का समाधान भी सरकारी तरीके से निकाल लिया - नोट शीट के माध्यम से! 😍


एक शाम, जब पति महोदय घर लौटे, तो पत्नी ने नोट शीट पर लिखा, "थके हुए लग रहे हैं, क्या चाय लेना चाहेंगे?" 


पति ने लिखा, "यथा प्रस्तावित!" 😁


पत्नी ने आगे लिखा, "अगर आदेश हो, तो क्या बिस्किट भी साथ में संलग्न किए जाएं?" 


पति ने जवाब दिया, "अनुमोदित, लेकिन केवल 2 ही स्वीकृत हैं!" 😜


इस तरह नोट शीट के जरिये चाय-पानी, खाना-पीना सब कुछ चलता रहा, लेकिन बातचीत बंद ही रही। 


फिर एक दिन, पत्नी ने एक और नोट शीट प्रस्तुत की, "मांजी की तबीयत ठीक नहीं है, चार दिनों के लिए मायके जाना चाहती हूं। कृपया अवकाश स्वीकृत कर रिलीव करें।" 


पति ने लिखा, "स्वीकृत, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही अवकाश पर जाएं।" 


इसके बाद घर में मानो पानीपत का चौथा युद्ध शुरू हो गया... और अब पति महोदय मेडिकल लीव पर हैं। 


**मजेदार लगी हो तो हंसी का इजहार जरूर करें! 

नारी किसी भी रूप में हमसे श्रेष्ठ होती है।

 पति: "बिस्तर पर सोने को केवल चार लोगों की ही जगह है।"


पत्नी: "कोई बात नहीं मुझे तो वैसे भी नया गद्दा चुभता है, मैं ज़मीन पर ही सो लूँगी, आप और बच्चे बिस्तर पर सो जाओ।"


पति: "इस बार दिवाली पर बोनस नहीं मिलेगा। पूजा तो हो जाएगी मगर नए कपड़े और खिलौने नहीं ला पाऊँगा बच्चों के लिए।"


पत्नी: "आप चिंता मत कीजिए। मैंने कुछ पैसे बचा कर रखे थे आपके पिछले महीनों के बोनस में से। आप थान के कपड़े ले आइयेगा, मैं बच्चों के नए कपड़े सिल दूँगी और खिलौने भी आ जाएंगे उन्ही पैसो से।"


पति: "सुनो, मेरी सैलरी में इजाफ़ा हुआ है। इस बार अपने लिए एक-दो सलवार-सूट सिलवा लेना।"


पत्नी: "मेरे पास पहनने के कपड़ों की कमी नहीं है। आपने अपने जूतों की हालत देखी है? इस बार तो आपके लिए रेड चीफ के शूज़ ही खरीदने हैं। और बड़ी बेटी को फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में भाग लेना था। उसके लिए भी एक प्यारी सी ड्रेस।"


बेटा: "माँ, खाने में तो मटर-पनीर बना था ना। तुम ये कल रात की बासी सब्जी क्यों खा रही हो?"


माता: "अरे, मुझे मटर पनीर नहीं पसंद है बेटा। तेरे पापा और छुटकी को पसंद है। उनको सुबह टिफ़िन में देने के लिए बचा दी है।"


पति: "सुनो, माफ़ करना, मैं इस बार फिर से हमारी शादी की सालगिरह भूल गया।"


पत्नी: "कोई बात नहीं, मैं भी भूल गई थी। मुझे भी अपनी बेटियों ने ही याद दिलाया।" 😍😍


माता: "बेटी, तू दिल्ली रहकर तैयारी कर ले परीक्षा की।"


बेटी: "नहीं, माँ। छुटकी का नए कॉलेज में एडमिशन भी तो कराना है। मैं कोई जॉब ढूँढकर सेटल हो जाती हूँ। एक साल का ड्रॉप लेकर फिर पोस्ट-ग्रेजुएशन कर लूँगी। कोई दिक्कत नहीं है।"


मिडिल क्लास परिवारों में केवल एडजस्टमेंट्स होते हैं। वहां प्यार की जगह नहीं होती मगर शायद प्यार ऐसी जगहों में पलना ही पसंद करता है। तभी तो एडजस्ट करते-करते न जाने कब बड़ा हो जाता है प्यार और फिर ठहर जाता है, साथ ही पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता जाता है। असल मायने में दूसरों की ख़ुशियों को अपनी खुशी से ऊपर रखना ही तो होता है ये प्यार।


आप सभी मित्रों से अनुरोध है, कि कभी किसी नारी का अपमान नहीं कीजिए। नारी किसी भी रूप में हमसे श्रेष्ठ होती है। चाहे वह माँ, बहन, पत्नी किसी भी रूप में हो, त्याग वही करती है। मैं नारी जाति के जज्बे को नमन करता हूँ। जरूरी नहीं कि महिला की तारीफ सिर्फ महिला दिवस पर ही की जाए।

और अगर आप भी मिडिल क्लास फैमिली से हैं, तो कॉमेंट में बताए 💕😍🙏

स्त्रियों में एक ऐसा गुण होता है जो वाकई अद्भुत है

 स्त्रियों में एक ऐसा गुण होता है जो वाकई अद्भुत है।  यह गुण है कि चाहे कोई पुरुष कितना भी सभ्य और सौम्य भाषा में उनसे बात करे, स्त्री तुरंत ही उस पुरुष के मन को भांप लेती है, उसे पढ़ लेती है। चंद बातों में ही वह पुरुष की प्रामाणिकता, उसके अंदर छिपी कामुकता, या उसके भीतर के फूलों और कचरे को भी जान लेती है। 


स्त्रियों में एक ऐसा गुण होता है जो वाकई अद्भुत है। 🌸 यह गुण है कि चाहे कोई पुरुष कितना भी सभ्य और सौम्य भाषा में उनसे बात करे, स्त्री तुरंत ही उस पुरुष के मन को भांप लेती है, उसे पढ़ लेती है।  चंद बातों में ही वह पुरुष की प्रामाणिकता, उसके अंदर छिपी कामुकता, या उसके भीतर के फूलों और कचरे को भी जान लेती है। 

लेकिन स्त्री को समझना पुरुषों के लिए बड़ा कठिन होता है। 💫 'स्त्री बिना पुरुष' अधूरा ही नहीं, बल्कि असंभव भी है। पर दिलचस्प बात यह है कि बिना पुरुष के भी स्त्री अधूरी होकर भी अस्तित्वमान रह सकती है।  यही कारण है कि स्त्री, बेशक नाजुक हो, फिर भी जीवन की जननी है। 

स्त्रियों में छिपे इस गुण के कारण उन्हें सिर्फ आदर या सम्मान की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की नितांत आवश्यकता है। लेकिन स्त्री को समझना पुरुषों के लिए बड़ा कठिन होता है। 💫 'स्त्री बिना पुरुष' अधूरा ही नहीं, बल्कि असंभव भी है। पर दिलचस्प बात यह है कि बिना पुरुष के भी स्त्री अधूरी होकर भी अस्तित्वमान रह सकती है। यही कारण है कि स्त्री, बेशक नाजुक हो, फिर भी जीवन की जननी है। 

स्त्रियों में छिपे इस गुण के कारण उन्हें सिर्फ आदर या सम्मान की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की नितांत आवश्यकता है। 

लेखक: सुनिल राठौड़ 

प्रेम किसी भी इंसान को सिर्फ किसी के साथ सुख भोगने के लिए नहीं होता,

 प्रेम किसी भी इंसान को सिर्फ किसी के साथ सुख भोगने के लिए नहीं होता, ,,प्रेम में तो एक दूजे का दुःख भी बांटा जाता है,,, और जो आपका साथ दुःख में ना दे पाए छोड़ जाए अपनी मजबूरी या कोई भी वजह बता कर ,,,वह या तो आपका सिद्दत वाला प्यार देखकर आप पर तरस खाता है या आपके पागलपन वाला प्यार देखकर सिर्फ आपका फायदा उठाता है 

जिसके साथ तुम अपना दुःख बाँटने में समर्थ हो और जो आपका दुख सुनकर आपका हाथ पकड़ कर तब तक बैठा रहे जब तक आप खुद को संभाल नहीं लेते ,, या जो तुम्हारी चुप्पी से जान ले तुम आज परेशान हो उसे फर्क पड़े उतना ही तुम्हारी खामोशी से जितना तुम्हें लग रहा होता है अंदर से ,,,,,समझो बस वही है इस समस्त संसार में तुम्हारा सच्चा साथी.... तुम्हारा प्रेम... क्योंकि सच्चे प्यार से कुछ भी छुपा नहीं होता ना.. देह और ना आत्मा

लेखक: सुनिल राठौड़ ❣️

Sunday, 1 September 2024

सिर्फ पत्नी कह देने भर से पत्नी ..... पत्नी नहीं बन जाती✍🏻

 सिर्फ पत्नी कह देने भर से पत्नी 

..... पत्नी नहीं बन जाती✍🏻

उसे भी कुछ हक़ देने पड़ते हैं

दुनिया तो जुदा करती है ..... पर

मिलन की सिंदूरी शामें देनी पड़ती है🤟🏻

 दिन-भर की थकी आँखों पर .... होंठों🫦 की छुअन देनी पड़ती है☺️

कभी हँसी कभी शरारत में .... 

कलाई से खींच कर सीने से लगानी पड़ती है

 महज़ चार दीवारें लेकर ..... 

वो महफ़ूज़ नहीं होगी

उसे भी बाँहों के घेरे की ..... 

सुरक्षा देनी पड़ती है❤️

 फूल दे देने से ..... नहीं झलकती मौहब्बत🌹

काँटों से भी ....

महफ़ूज़ रखनी पड़ती है🤟🏻

 एक सिर्फ़ देह से लिपटना ही ... ज़रूरत का नहीं है उसका धर्म 

रुह की परतें भी ...... हरी करनी पड़ती है  

लेखक: सुनिल राठौड़ 





हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...