sunilrathod

Monday, 2 September 2024

नारी किसी भी रूप में हमसे श्रेष्ठ होती है।

 पति: "बिस्तर पर सोने को केवल चार लोगों की ही जगह है।"


पत्नी: "कोई बात नहीं मुझे तो वैसे भी नया गद्दा चुभता है, मैं ज़मीन पर ही सो लूँगी, आप और बच्चे बिस्तर पर सो जाओ।"


पति: "इस बार दिवाली पर बोनस नहीं मिलेगा। पूजा तो हो जाएगी मगर नए कपड़े और खिलौने नहीं ला पाऊँगा बच्चों के लिए।"


पत्नी: "आप चिंता मत कीजिए। मैंने कुछ पैसे बचा कर रखे थे आपके पिछले महीनों के बोनस में से। आप थान के कपड़े ले आइयेगा, मैं बच्चों के नए कपड़े सिल दूँगी और खिलौने भी आ जाएंगे उन्ही पैसो से।"


पति: "सुनो, मेरी सैलरी में इजाफ़ा हुआ है। इस बार अपने लिए एक-दो सलवार-सूट सिलवा लेना।"


पत्नी: "मेरे पास पहनने के कपड़ों की कमी नहीं है। आपने अपने जूतों की हालत देखी है? इस बार तो आपके लिए रेड चीफ के शूज़ ही खरीदने हैं। और बड़ी बेटी को फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में भाग लेना था। उसके लिए भी एक प्यारी सी ड्रेस।"


बेटा: "माँ, खाने में तो मटर-पनीर बना था ना। तुम ये कल रात की बासी सब्जी क्यों खा रही हो?"


माता: "अरे, मुझे मटर पनीर नहीं पसंद है बेटा। तेरे पापा और छुटकी को पसंद है। उनको सुबह टिफ़िन में देने के लिए बचा दी है।"


पति: "सुनो, माफ़ करना, मैं इस बार फिर से हमारी शादी की सालगिरह भूल गया।"


पत्नी: "कोई बात नहीं, मैं भी भूल गई थी। मुझे भी अपनी बेटियों ने ही याद दिलाया।" 😍😍


माता: "बेटी, तू दिल्ली रहकर तैयारी कर ले परीक्षा की।"


बेटी: "नहीं, माँ। छुटकी का नए कॉलेज में एडमिशन भी तो कराना है। मैं कोई जॉब ढूँढकर सेटल हो जाती हूँ। एक साल का ड्रॉप लेकर फिर पोस्ट-ग्रेजुएशन कर लूँगी। कोई दिक्कत नहीं है।"


मिडिल क्लास परिवारों में केवल एडजस्टमेंट्स होते हैं। वहां प्यार की जगह नहीं होती मगर शायद प्यार ऐसी जगहों में पलना ही पसंद करता है। तभी तो एडजस्ट करते-करते न जाने कब बड़ा हो जाता है प्यार और फिर ठहर जाता है, साथ ही पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ता जाता है। असल मायने में दूसरों की ख़ुशियों को अपनी खुशी से ऊपर रखना ही तो होता है ये प्यार।


आप सभी मित्रों से अनुरोध है, कि कभी किसी नारी का अपमान नहीं कीजिए। नारी किसी भी रूप में हमसे श्रेष्ठ होती है। चाहे वह माँ, बहन, पत्नी किसी भी रूप में हो, त्याग वही करती है। मैं नारी जाति के जज्बे को नमन करता हूँ। जरूरी नहीं कि महिला की तारीफ सिर्फ महिला दिवस पर ही की जाए।

और अगर आप भी मिडिल क्लास फैमिली से हैं, तो कॉमेंट में बताए 💕😍🙏

स्त्रियों में एक ऐसा गुण होता है जो वाकई अद्भुत है

 स्त्रियों में एक ऐसा गुण होता है जो वाकई अद्भुत है।  यह गुण है कि चाहे कोई पुरुष कितना भी सभ्य और सौम्य भाषा में उनसे बात करे, स्त्री तुरंत ही उस पुरुष के मन को भांप लेती है, उसे पढ़ लेती है। चंद बातों में ही वह पुरुष की प्रामाणिकता, उसके अंदर छिपी कामुकता, या उसके भीतर के फूलों और कचरे को भी जान लेती है। 


स्त्रियों में एक ऐसा गुण होता है जो वाकई अद्भुत है। 🌸 यह गुण है कि चाहे कोई पुरुष कितना भी सभ्य और सौम्य भाषा में उनसे बात करे, स्त्री तुरंत ही उस पुरुष के मन को भांप लेती है, उसे पढ़ लेती है।  चंद बातों में ही वह पुरुष की प्रामाणिकता, उसके अंदर छिपी कामुकता, या उसके भीतर के फूलों और कचरे को भी जान लेती है। 

लेकिन स्त्री को समझना पुरुषों के लिए बड़ा कठिन होता है। 💫 'स्त्री बिना पुरुष' अधूरा ही नहीं, बल्कि असंभव भी है। पर दिलचस्प बात यह है कि बिना पुरुष के भी स्त्री अधूरी होकर भी अस्तित्वमान रह सकती है।  यही कारण है कि स्त्री, बेशक नाजुक हो, फिर भी जीवन की जननी है। 

स्त्रियों में छिपे इस गुण के कारण उन्हें सिर्फ आदर या सम्मान की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की नितांत आवश्यकता है। लेकिन स्त्री को समझना पुरुषों के लिए बड़ा कठिन होता है। 💫 'स्त्री बिना पुरुष' अधूरा ही नहीं, बल्कि असंभव भी है। पर दिलचस्प बात यह है कि बिना पुरुष के भी स्त्री अधूरी होकर भी अस्तित्वमान रह सकती है। यही कारण है कि स्त्री, बेशक नाजुक हो, फिर भी जीवन की जननी है। 

स्त्रियों में छिपे इस गुण के कारण उन्हें सिर्फ आदर या सम्मान की नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की नितांत आवश्यकता है। 

लेखक: सुनिल राठौड़ 

प्रेम किसी भी इंसान को सिर्फ किसी के साथ सुख भोगने के लिए नहीं होता,

 प्रेम किसी भी इंसान को सिर्फ किसी के साथ सुख भोगने के लिए नहीं होता, ,,प्रेम में तो एक दूजे का दुःख भी बांटा जाता है,,, और जो आपका साथ दुःख में ना दे पाए छोड़ जाए अपनी मजबूरी या कोई भी वजह बता कर ,,,वह या तो आपका सिद्दत वाला प्यार देखकर आप पर तरस खाता है या आपके पागलपन वाला प्यार देखकर सिर्फ आपका फायदा उठाता है 

जिसके साथ तुम अपना दुःख बाँटने में समर्थ हो और जो आपका दुख सुनकर आपका हाथ पकड़ कर तब तक बैठा रहे जब तक आप खुद को संभाल नहीं लेते ,, या जो तुम्हारी चुप्पी से जान ले तुम आज परेशान हो उसे फर्क पड़े उतना ही तुम्हारी खामोशी से जितना तुम्हें लग रहा होता है अंदर से ,,,,,समझो बस वही है इस समस्त संसार में तुम्हारा सच्चा साथी.... तुम्हारा प्रेम... क्योंकि सच्चे प्यार से कुछ भी छुपा नहीं होता ना.. देह और ना आत्मा

लेखक: सुनिल राठौड़ ❣️

Sunday, 1 September 2024

सिर्फ पत्नी कह देने भर से पत्नी ..... पत्नी नहीं बन जाती✍🏻

 सिर्फ पत्नी कह देने भर से पत्नी 

..... पत्नी नहीं बन जाती✍🏻

उसे भी कुछ हक़ देने पड़ते हैं

दुनिया तो जुदा करती है ..... पर

मिलन की सिंदूरी शामें देनी पड़ती है🤟🏻

 दिन-भर की थकी आँखों पर .... होंठों🫦 की छुअन देनी पड़ती है☺️

कभी हँसी कभी शरारत में .... 

कलाई से खींच कर सीने से लगानी पड़ती है

 महज़ चार दीवारें लेकर ..... 

वो महफ़ूज़ नहीं होगी

उसे भी बाँहों के घेरे की ..... 

सुरक्षा देनी पड़ती है❤️

 फूल दे देने से ..... नहीं झलकती मौहब्बत🌹

काँटों से भी ....

महफ़ूज़ रखनी पड़ती है🤟🏻

 एक सिर्फ़ देह से लिपटना ही ... ज़रूरत का नहीं है उसका धर्म 

रुह की परतें भी ...... हरी करनी पड़ती है  

लेखक: सुनिल राठौड़ 





सुहागरात: सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का पल

 💞 सुहागरात: सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का पल 💞


जब भी हम सुहागरात की बात करते हैं, तो अक्सर लोगों के मन में इसका मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना होता है। लेकिन क्या वाकई सुहागरात का मतलब सिर्फ यही है? 🤔


सुहागरात का पारंपरिक मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना नहीं होता। यह रात नवविवाहित दंपति के लिए एक खास और महत्वपूर्ण समय होता है। यह वो समय है जब दोनों साथी एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने, समझने और अपने रिश्ते को एक नई दिशा देने की कोशिश करते हैं। 🌹


इस रात का असली महत्व एक-दूसरे के साथ खुलकर बातचीत करने में होता है। यह वक्त होता है अपनी भावनाओं, अपने अनुभवों, और अपने भविष्य की योजनाओं को साझा करने का। 💬 यह वह समय है जब दोनों साथी एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने का प्रयास करते हैं।


सुहागरात का माहौल आरामदायक और प्रेमपूर्ण होना चाहिए, ताकि दोनों साथी एक-दूसरे के साथ सहज महसूस कर सकें। अगर शारीरिक संबंध बनाने का विचार है, तो यह जरूरी है कि दोनों इसके लिए सहमत और तैयार हों। किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए। 🚫


इस रात को खास और यादगार बनाने के लिए कुछ रोमांटिक समय बिताना भी शामिल हो सकता है। जैसे कि मोमबत्तियों की रोशनी में डिनर, संगीत सुनना, या एक-दूसरे के साथ प्यार भरे पल साझा करना। 🎶🌟


इसलिए, सुहागरात सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह समय है जब आप एक मजबूत भावनात्मक और मानसिक संबंध बना सकते हैं। 💖

लेखक: सुनिल राठौड़ 

पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है

 **पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है।** राजा की तरह जीने और आज दुनिया में अपना सिर ऊंचा रखने के लिए अपनी पत्नी का **शुक्रिया** अदा कीजिए। 😊 आपकी **सुविधा-असुविधा**, आपके बिना कारण के क्रोध को संभालती है। तुम्हारे **सुख से सुखी** है और तुम्हारे **दुःख से दुःखी** है। आप रविवार को देर से बिस्तर पर रहते हैं लेकिन इसका कोई रविवार या त्योहार नहीं होता है। **चाय लाओ, पानी लाओ, खाना लाओ**। ये ऐसा है और वो ऐसा है। कब अक्कल आएगी तुम्हें? ऐसे ताने हम मारते हैं। उसके पास **बुद्धि** है और केवल उसी के कारण तो आप **जीवित** हैं। वरना दुनिया में आपको कोई भी नहीं पूछेगा। 🙏


अब जरा इस स्थिति की सिर्फ **कल्पना** करें:

एक दिन **पत्नी** अचानक रात को गुजर जाती है! घर में रोने की आवाज आ रही है। पत्नी का **अंतिम दर्शन** चल रहा था। उस वक्त पत्नी की आत्मा जाते-जाते जो कह रही है, उसका वर्णन: 😢


"मैं अभी जा रही हूँ, अब फिर कभी नहीं मिलेंगे। जिस दिन शादी के फेरे लिए थे, उस वक्त साथ-साथ **जीने का वचन** दिया था, पर अब अकेले जाना पड़ रहा है, यह मुझको पता नहीं था। मुझे जाने दो। अपने आंगन में अपना शरीर छोड़ कर जा रही हूँ। बहुत **दर्द** हो रहा है मुझे, लेकिन मैं मजबूर हूँ, अब मैं जा रही हूँ। मेरा मन नहीं मान रहा, पर अब मैं कुछ नहीं कर सकती। मुझे जाने दो। 💔


**बेटा और बहू** रो रहे हैं, देखो। मैं ऐसा नहीं देख सकती और उनको दिलासा भी नहीं दे सकती हूँ। **पोता** 'बा बा बा' कर रहा है, उसे शांत करो, बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हो। हाँ, और आप भी मन मजबूत रखना और बिल्कुल ढीले न होना। मुझे जाने दो। 👶


अभी बेटी **ससुराल** से आएगी और मेरा मृत शरीर देखकर बहुत रोएगी। उसे संभालना और शांत करना। और आप भी बिल्कुल नहीं रोना। मुझे जाने दो। जिसका **जन्म** हुआ है, उसकी **मृत्यु** निश्चित है। जो भी इस दुनिया में आया है, वह यहाँ से ऊपर गया है। धीरे-धीरे मुझे भूल जाना, मुझे बहुत याद नहीं करना। और इस जीवन में फिर से **काम में डूब जाना**। अब मेरे बिना जीवन जीने की आदत जल्दी से डाल लेना। मुझे जाने दो। 🌺


आपने इस जीवन में मेरा कहा कभी नहीं माना है। अब जिद छोड़कर **व्यवहार** में विनम्र रहना। आपको अकेला छोड़कर जाते हुए मुझे बहुत चिंता हो रही है, लेकिन मैं मजबूर हूँ। मुझे जाने दो। 😔


आपको **BP** और **डायबिटीज** है। गलती से भी मीठा नहीं खाना, अन्यथा परेशानी होगी। सुबह उठते ही दवा लेना न भूलना। **चाय** अगर आपको देर से मिलती है तो बहू पर गुस्सा न करना। अब मैं नहीं हूँ, यह समझकर जीना सीख लेना। मुझे जाने दो। ☕💊


**बेटा और बहू** कुछ बोले तो चुपचाप सब सुन लेना। कभी गुस्सा नहीं करना। हमेशा **मुस्कुराते** रहना, कभी उदास नहीं होना। मुझे जाने दो। अपने बेटे के बेटे के साथ **खेलना**। अपने दोस्तों के साथ समय बिताना। अब थोड़ा धार्मिक जीवन जीएं ताकि जीवन को संयमित किया जा सके। अगर मेरी याद आये तो चुपचाप **रो** लेना लेकिन कभी कमजोर नहीं होना। मुझे जाने दो। 😇


मेरा **रूमाल** कहां है, मेरी **चाबी** कहां है, अब ऐसे चिल्लाना नहीं। सब कुछ ध्यान से रखने और याद रखने की आदत डालना। सुबह और शाम नियमित रूप से दवा ले लेना। अगर बहू भूल जाये तो सामने से याद कर लेना। जो भी **खाने** को मिले, प्यार से खा लेना और गुस्सा नहीं करना। मेरी अनुपस्थिति खलेगी, पर कमजोर नहीं होना। मुझे जाने दो। 🔑🍴


**बुढ़ापे की छड़ी** भूलना नहीं और धीरे-धीरे चलना। यदि बीमार हो गए और बिस्तर में लेट गए तो किसी को भी सेवा करना पसंद नहीं आएगा। मुझे जाने दो। शाम को बिस्तर पर जाने से पहले एक लोटा **पानी** मांग लेना। प्यास लगे तो ही पानी पी लेना। अगर आपको रात को उठना पड़े तो अंधेरे में कुछ लगे नहीं, इसका ध्यान रखना। मुझे जाने दो। 🚶‍♂️💧


शादी के बाद हम बहुत **प्यार** से साथ रहे। परिवार में फूल जैसे बच्चे दिए। अब उस फूलों की सुगंध मुझे नहीं मिलेगी। मुझे जाने दो। उठो, सुबह हो गई, अब ऐसा कोई नहीं कहेगा। अब अपने आप उठने की आदत डाल लेना, किसी की प्रतीक्षा नहीं करना। मुझे जाने दो। 🌷🌞


और हाँ, एक बात तुमसे छिपाई है, मुझे माफ कर देना। आपको बिना बताए बाजू की **पोस्ट ऑफिस** में बचत खाता खुलवाकर **14 लाख रुपये** जमा किये हैं। मेरी दादी ने सिखाया था। एक-एक रुपया जमा करके कोने में रख दिया। इसमें से पाँच-पाँच लाख बहू और बेटी को देना और अपने खाते में चार लाख रखना अपने लिए। मुझे जाने दो। 💸💼


भगवान की **भक्ति** और पूजा करना भूलना नहीं। अब फिर कभी नहीं मिलेंगे! मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना।" 🙏


इस आत्मीय संदेश में पत्नी की भावनाएं और उसकी देखभाल की **जिम्मेदारी** को दर्शाया गया है, जो उसके जाने के बाद भी परिवार को संभालने का संदेश देती है। 💖

बच्चों के सेक्स एजुकेशन को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन एक प्रमुख राय यह है

 बच्चों के सेक्स एजुकेशन को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन एक प्रमुख राय यह है कि बच्चों को इस विषय में समय पर और सही तरीके से जानकारी दी जानी चाहिए। यह जानकारी देने वाला व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिसे न केवल शरीर शास्त्र की, बल्कि बच्चों के मनोविज्ञान की भी गहरी समझ हो। मुझे जयपुर में इसी तरह की एक क्लास में शामिल होने का मौका मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों को समय पर सेक्स से संबंधित जानकारी देना कितना आवश्यक है। 🎓


एक नजरिया यह भी है कि जैसे अन्य जीव बिना किसी विशेष शिक्षा के सेक्स की समझ विकसित कर लेते हैं, वैसे ही मनुष्य भी कर सकता है। आमतौर पर धार्मिक और परंपरावादी लोग यही सोचते हैं। लेकिन मेरी जानकारी में, किसी भी धर्म में सेक्स एजुकेशन के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। कुछ जनजातियों में सेक्स एजुकेशन के कुछ रूप देखे जा सकते हैं, लेकिन इसका कोई व्यवस्थित ढांचा वहां भी नजर नहीं आता। 🌍


कुछ लोग मानते हैं कि अगर वे अपने बच्चों के सामने सहज और सामान्य व्यवहार करें, जिससे बच्चे उनके शरीर से परिचित हो जाएं, तो बच्चों में विपरीत सेक्स के प्रति सहजता विकसित हो सकती है। लेकिन यह सेक्स एजुकेशन का कोई कारगर उपाय नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं स्विमिंग सूट पहनती हैं और उनके इर्द-गिर्द बच्चे और हर उम्र के पुरुष भी होते हैं। लेकिन उन समाजों में भी सेक्स आधारित हिंसा होती है। यह साफ है कि किशोर-किशोरियां अगर स्त्री या पुरुष के शरीर को देख लेते हैं, तो इससे विपरीत सेक्स के प्रति कोई विशेष सहजता विकसित नहीं होती। 🏊‍♀️


अब उस तर्क की बात की जाए कि समय के साथ सभी लोग सेक्स से जुड़ी जरूरी बातें खुद ही सीख लेते हैं, जैसे दूसरे प्राणी। यहां मनुष्य और दूसरे प्राणियों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य का सेक्स के लिए कोई निश्चित समय नहीं होता। वह बच्चा पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि आनंद के लिए सेक्स करता है। बच्चे बाई डिफॉल्ट पैदा हो जाते हैं। मनुष्य स्त्री के मासिक धर्म के दौरान या गर्भावस्था में भी सेक्स करता है। स्त्री की मर्जी न हो, वह बीमार हो, कम या ज्यादा उम्र की हो, फिर भी उसके साथ सेक्स हो सकता है। यह सभी बातें दिखाती हैं कि मनुष्य का सेक्स जीवन अन्य प्राणियों जितना सरल नहीं है। 🌱


मनुष्येतर प्राणियों में अगर मादा का शरीर सेक्स के लिए तैयार नहीं है तो नर उसके करीब नहीं जाता। मादा भी एक खास मौसम या समय में ही सेक्स के लिए तैयार होती है। इस तरह यह बात स्पष्ट है कि मनुष्य का सेक्स जीवन और मनुष्येतर प्राणियों का सेक्स जीवन समान नहीं माना जा सकता। 🌿


स्त्री की यौनिकता को सदियों से नियंत्रित किया गया है जिससे मनुष्य का सेक्स जीवन विकृत हो गया है। हालांकि इसका सम्पूर्ण इलाज एक न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था में ही संभव है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, बच्चों को जननांगों की कार्यप्रणाली और सामाजिक जीवन में इसे सीमित करने के मामले के सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा बात होनी चाहिए। 🗣️


अंतिम बात, हम सब एक कामाणु का ही विस्तार हैं, इसलिए सेक्स को पाप, अधर्म या ऐसा कुछ कहना सही नहीं है, इसे समझना जरूरी है। यह भी आवश्यक है कि फैमिली लाइफ के सुख-दुःख का गहरा संबंध स्वस्थ सेक्स लाइफ से है, इसलिए इसे नजरअंदाज या उपेक्षित नहीं किया जा सकता और न ही किसी प्रकार की झाड़फूंक टाइप शिक्षा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 🌟

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...