sunilrathod

Tuesday, 3 December 2024

दो शरीर संभोग करें तो "काम"

 दो शरीर संभोग करें तो "काम"

दो मन संभोग करें तो "प्रेम"


दो दिल संभोग करें तो "ध्यान"

दो आत्माएं संभोग करें तो "समाधि"


दो पति-पत्नी संभोग करें तो "कर्तव्य"

दो प्रेमी संभोग करें तो "सुकून"


दो अनजान संभोग करें तो "वासना"

दो पड़ौसी संभोग करें तो "मजबूरी

लेखक: सुनिल राठौड़ 

_________________________________________

आज दराज़ में मिले तेरे ख़त कई पुराने थे

यक़ीनन वो मेरे गुज़रे हुए खूबसूरत ज़माने थे


कुछ वादे टूटे- बिखरे और गुम हो गए

ये वो वादे थे जो हमें उम्र भर निभाने थे


वफ़ा की राह में बिछड़े थे हम क्यों ..कब ..कैसे 

ये वो मसले थे जो हमें मिल बैठ कर सुलझाने थे


अब तलक हमारी हर शेर ओ शायरी का मेयार हो तुम

तुम्हारी दास्तान से जो गुमशुदा हम वो बदनसीब अफसाने थे


हाय ! क्या दौर था मोहब्बत के हसीं आलम का

किस कदर हम तेरे इश्क़ में दीवाने थे...


तुम हज़ार मर्तबा भी रुठ जाते तो मना लेते तुम्हे

बस हमारे दरमियां रकीबो के फ़लसफ़े ना आने थे


अभी कल की ही तो बात थी होठों पर मुस्कुराहट थी

आज ये आलम है कि ग़मज़दा धड़कनों के तराने हैं!


No comments:

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...