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Monday, 2 September 2024

प्रेम किसी भी इंसान को सिर्फ किसी के साथ सुख भोगने के लिए नहीं होता,

 प्रेम किसी भी इंसान को सिर्फ किसी के साथ सुख भोगने के लिए नहीं होता, ,,प्रेम में तो एक दूजे का दुःख भी बांटा जाता है,,, और जो आपका साथ दुःख में ना दे पाए छोड़ जाए अपनी मजबूरी या कोई भी वजह बता कर ,,,वह या तो आपका सिद्दत वाला प्यार देखकर आप पर तरस खाता है या आपके पागलपन वाला प्यार देखकर सिर्फ आपका फायदा उठाता है 

जिसके साथ तुम अपना दुःख बाँटने में समर्थ हो और जो आपका दुख सुनकर आपका हाथ पकड़ कर तब तक बैठा रहे जब तक आप खुद को संभाल नहीं लेते ,, या जो तुम्हारी चुप्पी से जान ले तुम आज परेशान हो उसे फर्क पड़े उतना ही तुम्हारी खामोशी से जितना तुम्हें लग रहा होता है अंदर से ,,,,,समझो बस वही है इस समस्त संसार में तुम्हारा सच्चा साथी.... तुम्हारा प्रेम... क्योंकि सच्चे प्यार से कुछ भी छुपा नहीं होता ना.. देह और ना आत्मा

लेखक: सुनिल राठौड़ ❣️

Sunday, 1 September 2024

सिर्फ पत्नी कह देने भर से पत्नी ..... पत्नी नहीं बन जाती✍🏻

 सिर्फ पत्नी कह देने भर से पत्नी 

..... पत्नी नहीं बन जाती✍🏻

उसे भी कुछ हक़ देने पड़ते हैं

दुनिया तो जुदा करती है ..... पर

मिलन की सिंदूरी शामें देनी पड़ती है🤟🏻

 दिन-भर की थकी आँखों पर .... होंठों🫦 की छुअन देनी पड़ती है☺️

कभी हँसी कभी शरारत में .... 

कलाई से खींच कर सीने से लगानी पड़ती है

 महज़ चार दीवारें लेकर ..... 

वो महफ़ूज़ नहीं होगी

उसे भी बाँहों के घेरे की ..... 

सुरक्षा देनी पड़ती है❤️

 फूल दे देने से ..... नहीं झलकती मौहब्बत🌹

काँटों से भी ....

महफ़ूज़ रखनी पड़ती है🤟🏻

 एक सिर्फ़ देह से लिपटना ही ... ज़रूरत का नहीं है उसका धर्म 

रुह की परतें भी ...... हरी करनी पड़ती है  

लेखक: सुनिल राठौड़ 





सुहागरात: सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का पल

 💞 सुहागरात: सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का पल 💞


जब भी हम सुहागरात की बात करते हैं, तो अक्सर लोगों के मन में इसका मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना होता है। लेकिन क्या वाकई सुहागरात का मतलब सिर्फ यही है? 🤔


सुहागरात का पारंपरिक मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना नहीं होता। यह रात नवविवाहित दंपति के लिए एक खास और महत्वपूर्ण समय होता है। यह वो समय है जब दोनों साथी एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने, समझने और अपने रिश्ते को एक नई दिशा देने की कोशिश करते हैं। 🌹


इस रात का असली महत्व एक-दूसरे के साथ खुलकर बातचीत करने में होता है। यह वक्त होता है अपनी भावनाओं, अपने अनुभवों, और अपने भविष्य की योजनाओं को साझा करने का। 💬 यह वह समय है जब दोनों साथी एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने का प्रयास करते हैं।


सुहागरात का माहौल आरामदायक और प्रेमपूर्ण होना चाहिए, ताकि दोनों साथी एक-दूसरे के साथ सहज महसूस कर सकें। अगर शारीरिक संबंध बनाने का विचार है, तो यह जरूरी है कि दोनों इसके लिए सहमत और तैयार हों। किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए। 🚫


इस रात को खास और यादगार बनाने के लिए कुछ रोमांटिक समय बिताना भी शामिल हो सकता है। जैसे कि मोमबत्तियों की रोशनी में डिनर, संगीत सुनना, या एक-दूसरे के साथ प्यार भरे पल साझा करना। 🎶🌟


इसलिए, सुहागरात सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह समय है जब आप एक मजबूत भावनात्मक और मानसिक संबंध बना सकते हैं। 💖

लेखक: सुनिल राठौड़ 

पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है

 **पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है।** राजा की तरह जीने और आज दुनिया में अपना सिर ऊंचा रखने के लिए अपनी पत्नी का **शुक्रिया** अदा कीजिए। 😊 आपकी **सुविधा-असुविधा**, आपके बिना कारण के क्रोध को संभालती है। तुम्हारे **सुख से सुखी** है और तुम्हारे **दुःख से दुःखी** है। आप रविवार को देर से बिस्तर पर रहते हैं लेकिन इसका कोई रविवार या त्योहार नहीं होता है। **चाय लाओ, पानी लाओ, खाना लाओ**। ये ऐसा है और वो ऐसा है। कब अक्कल आएगी तुम्हें? ऐसे ताने हम मारते हैं। उसके पास **बुद्धि** है और केवल उसी के कारण तो आप **जीवित** हैं। वरना दुनिया में आपको कोई भी नहीं पूछेगा। 🙏


अब जरा इस स्थिति की सिर्फ **कल्पना** करें:

एक दिन **पत्नी** अचानक रात को गुजर जाती है! घर में रोने की आवाज आ रही है। पत्नी का **अंतिम दर्शन** चल रहा था। उस वक्त पत्नी की आत्मा जाते-जाते जो कह रही है, उसका वर्णन: 😢


"मैं अभी जा रही हूँ, अब फिर कभी नहीं मिलेंगे। जिस दिन शादी के फेरे लिए थे, उस वक्त साथ-साथ **जीने का वचन** दिया था, पर अब अकेले जाना पड़ रहा है, यह मुझको पता नहीं था। मुझे जाने दो। अपने आंगन में अपना शरीर छोड़ कर जा रही हूँ। बहुत **दर्द** हो रहा है मुझे, लेकिन मैं मजबूर हूँ, अब मैं जा रही हूँ। मेरा मन नहीं मान रहा, पर अब मैं कुछ नहीं कर सकती। मुझे जाने दो। 💔


**बेटा और बहू** रो रहे हैं, देखो। मैं ऐसा नहीं देख सकती और उनको दिलासा भी नहीं दे सकती हूँ। **पोता** 'बा बा बा' कर रहा है, उसे शांत करो, बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हो। हाँ, और आप भी मन मजबूत रखना और बिल्कुल ढीले न होना। मुझे जाने दो। 👶


अभी बेटी **ससुराल** से आएगी और मेरा मृत शरीर देखकर बहुत रोएगी। उसे संभालना और शांत करना। और आप भी बिल्कुल नहीं रोना। मुझे जाने दो। जिसका **जन्म** हुआ है, उसकी **मृत्यु** निश्चित है। जो भी इस दुनिया में आया है, वह यहाँ से ऊपर गया है। धीरे-धीरे मुझे भूल जाना, मुझे बहुत याद नहीं करना। और इस जीवन में फिर से **काम में डूब जाना**। अब मेरे बिना जीवन जीने की आदत जल्दी से डाल लेना। मुझे जाने दो। 🌺


आपने इस जीवन में मेरा कहा कभी नहीं माना है। अब जिद छोड़कर **व्यवहार** में विनम्र रहना। आपको अकेला छोड़कर जाते हुए मुझे बहुत चिंता हो रही है, लेकिन मैं मजबूर हूँ। मुझे जाने दो। 😔


आपको **BP** और **डायबिटीज** है। गलती से भी मीठा नहीं खाना, अन्यथा परेशानी होगी। सुबह उठते ही दवा लेना न भूलना। **चाय** अगर आपको देर से मिलती है तो बहू पर गुस्सा न करना। अब मैं नहीं हूँ, यह समझकर जीना सीख लेना। मुझे जाने दो। ☕💊


**बेटा और बहू** कुछ बोले तो चुपचाप सब सुन लेना। कभी गुस्सा नहीं करना। हमेशा **मुस्कुराते** रहना, कभी उदास नहीं होना। मुझे जाने दो। अपने बेटे के बेटे के साथ **खेलना**। अपने दोस्तों के साथ समय बिताना। अब थोड़ा धार्मिक जीवन जीएं ताकि जीवन को संयमित किया जा सके। अगर मेरी याद आये तो चुपचाप **रो** लेना लेकिन कभी कमजोर नहीं होना। मुझे जाने दो। 😇


मेरा **रूमाल** कहां है, मेरी **चाबी** कहां है, अब ऐसे चिल्लाना नहीं। सब कुछ ध्यान से रखने और याद रखने की आदत डालना। सुबह और शाम नियमित रूप से दवा ले लेना। अगर बहू भूल जाये तो सामने से याद कर लेना। जो भी **खाने** को मिले, प्यार से खा लेना और गुस्सा नहीं करना। मेरी अनुपस्थिति खलेगी, पर कमजोर नहीं होना। मुझे जाने दो। 🔑🍴


**बुढ़ापे की छड़ी** भूलना नहीं और धीरे-धीरे चलना। यदि बीमार हो गए और बिस्तर में लेट गए तो किसी को भी सेवा करना पसंद नहीं आएगा। मुझे जाने दो। शाम को बिस्तर पर जाने से पहले एक लोटा **पानी** मांग लेना। प्यास लगे तो ही पानी पी लेना। अगर आपको रात को उठना पड़े तो अंधेरे में कुछ लगे नहीं, इसका ध्यान रखना। मुझे जाने दो। 🚶‍♂️💧


शादी के बाद हम बहुत **प्यार** से साथ रहे। परिवार में फूल जैसे बच्चे दिए। अब उस फूलों की सुगंध मुझे नहीं मिलेगी। मुझे जाने दो। उठो, सुबह हो गई, अब ऐसा कोई नहीं कहेगा। अब अपने आप उठने की आदत डाल लेना, किसी की प्रतीक्षा नहीं करना। मुझे जाने दो। 🌷🌞


और हाँ, एक बात तुमसे छिपाई है, मुझे माफ कर देना। आपको बिना बताए बाजू की **पोस्ट ऑफिस** में बचत खाता खुलवाकर **14 लाख रुपये** जमा किये हैं। मेरी दादी ने सिखाया था। एक-एक रुपया जमा करके कोने में रख दिया। इसमें से पाँच-पाँच लाख बहू और बेटी को देना और अपने खाते में चार लाख रखना अपने लिए। मुझे जाने दो। 💸💼


भगवान की **भक्ति** और पूजा करना भूलना नहीं। अब फिर कभी नहीं मिलेंगे! मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना।" 🙏


इस आत्मीय संदेश में पत्नी की भावनाएं और उसकी देखभाल की **जिम्मेदारी** को दर्शाया गया है, जो उसके जाने के बाद भी परिवार को संभालने का संदेश देती है। 💖

बच्चों के सेक्स एजुकेशन को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन एक प्रमुख राय यह है

 बच्चों के सेक्स एजुकेशन को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन एक प्रमुख राय यह है कि बच्चों को इस विषय में समय पर और सही तरीके से जानकारी दी जानी चाहिए। यह जानकारी देने वाला व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिसे न केवल शरीर शास्त्र की, बल्कि बच्चों के मनोविज्ञान की भी गहरी समझ हो। मुझे जयपुर में इसी तरह की एक क्लास में शामिल होने का मौका मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों को समय पर सेक्स से संबंधित जानकारी देना कितना आवश्यक है। 🎓


एक नजरिया यह भी है कि जैसे अन्य जीव बिना किसी विशेष शिक्षा के सेक्स की समझ विकसित कर लेते हैं, वैसे ही मनुष्य भी कर सकता है। आमतौर पर धार्मिक और परंपरावादी लोग यही सोचते हैं। लेकिन मेरी जानकारी में, किसी भी धर्म में सेक्स एजुकेशन के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। कुछ जनजातियों में सेक्स एजुकेशन के कुछ रूप देखे जा सकते हैं, लेकिन इसका कोई व्यवस्थित ढांचा वहां भी नजर नहीं आता। 🌍


कुछ लोग मानते हैं कि अगर वे अपने बच्चों के सामने सहज और सामान्य व्यवहार करें, जिससे बच्चे उनके शरीर से परिचित हो जाएं, तो बच्चों में विपरीत सेक्स के प्रति सहजता विकसित हो सकती है। लेकिन यह सेक्स एजुकेशन का कोई कारगर उपाय नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं स्विमिंग सूट पहनती हैं और उनके इर्द-गिर्द बच्चे और हर उम्र के पुरुष भी होते हैं। लेकिन उन समाजों में भी सेक्स आधारित हिंसा होती है। यह साफ है कि किशोर-किशोरियां अगर स्त्री या पुरुष के शरीर को देख लेते हैं, तो इससे विपरीत सेक्स के प्रति कोई विशेष सहजता विकसित नहीं होती। 🏊‍♀️


अब उस तर्क की बात की जाए कि समय के साथ सभी लोग सेक्स से जुड़ी जरूरी बातें खुद ही सीख लेते हैं, जैसे दूसरे प्राणी। यहां मनुष्य और दूसरे प्राणियों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य का सेक्स के लिए कोई निश्चित समय नहीं होता। वह बच्चा पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि आनंद के लिए सेक्स करता है। बच्चे बाई डिफॉल्ट पैदा हो जाते हैं। मनुष्य स्त्री के मासिक धर्म के दौरान या गर्भावस्था में भी सेक्स करता है। स्त्री की मर्जी न हो, वह बीमार हो, कम या ज्यादा उम्र की हो, फिर भी उसके साथ सेक्स हो सकता है। यह सभी बातें दिखाती हैं कि मनुष्य का सेक्स जीवन अन्य प्राणियों जितना सरल नहीं है। 🌱


मनुष्येतर प्राणियों में अगर मादा का शरीर सेक्स के लिए तैयार नहीं है तो नर उसके करीब नहीं जाता। मादा भी एक खास मौसम या समय में ही सेक्स के लिए तैयार होती है। इस तरह यह बात स्पष्ट है कि मनुष्य का सेक्स जीवन और मनुष्येतर प्राणियों का सेक्स जीवन समान नहीं माना जा सकता। 🌿


स्त्री की यौनिकता को सदियों से नियंत्रित किया गया है जिससे मनुष्य का सेक्स जीवन विकृत हो गया है। हालांकि इसका सम्पूर्ण इलाज एक न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था में ही संभव है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, बच्चों को जननांगों की कार्यप्रणाली और सामाजिक जीवन में इसे सीमित करने के मामले के सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा बात होनी चाहिए। 🗣️


अंतिम बात, हम सब एक कामाणु का ही विस्तार हैं, इसलिए सेक्स को पाप, अधर्म या ऐसा कुछ कहना सही नहीं है, इसे समझना जरूरी है। यह भी आवश्यक है कि फैमिली लाइफ के सुख-दुःख का गहरा संबंध स्वस्थ सेक्स लाइफ से है, इसलिए इसे नजरअंदाज या उपेक्षित नहीं किया जा सकता और न ही किसी प्रकार की झाड़फूंक टाइप शिक्षा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 🌟

रिलेशनशिप क्या है....?

 रिलेशनशिप क्या है....?


रिलेशनशिप का मतलब एक bf या gf वाला रिलेशनशिप ही नही होता....! 


एक ऐसा रिलेशन जिसमे दो लोग सिर्फ 

भावनाओं से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं..!


इक ऐसा रिश्ता जिस पर कोई सामाजिक 

मोहर या नाम नही होता. 

मगर समाज के हर दिखावटी रिश्ते से 

बढ़कर फर्ज निभाया जाता है


एक ऐसा बंधन जिसमे आप एक दूसरे से 

जुड़े भी रहते है और आपकी आज़ादी पर भी 

किसी तरह की कोई पाबंदी नही रहती


वो एहसास जो आपको कभी तन्हा नही रहने देता... 

ज़रूरी नही की कोई आपके साथ चल रहा है 

तभी साथ है,

ज़रूरी तो ये है की किसी की मौजूदगी 

आपको कभी अकेला महसूस ना होने दे..!


आपकी हँसी में जिसकी खुशी शामिल हो,

आपके दर्द में नमी उसकी पलकों पर ठहर जाये.... 

एक ऐसा रिलेशन जिसमे वादे नही होते,

कसमें नही खायी जाती

बस एक एहसास जो दो लोगो को 

आपस में जोड़े रखता है.


रिलेशन शिप का अंत ज़रूरी नही की 

शादी हो या हमेशा के लिए बिछड़ जाना.... 

उम्र भर निभाया जाने वाला एक अहसास 

एक भरोसा कि चाहे मेरे साथ कोई हो ना हो 

वो हमेशा होगा.. 

एक विश्वास जो आपको कभी कमज़ोर नही पड़ने देता!!

लेखक: सुनिल राठौड़.....

मैं भी एक स्त्री हीं हूं

 वर्ना.. .... वर्ना क्या कर लेंगींं आप?? - सविता गोयल 

नीलम एक मध्यमवर्गीय परिवार की पढ़ी लिखी, सर्वगुण संपन्न लड़की थी। उसके पिता उसके लिए रिश्ता देख हीं रहे थे कि नीलम की बुआ एक बड़े घर का रिश्ता लेकर आ गई। देखने सुनने में सब अच्छा लगा तो नीलम के पापा ने नीलम की रजामंदी से उसका रिश्ता वहीं तय कर दिया।


नीलम भी आंखों में नए संसार, प्यार और अपनेपन के सपने लेकर बहू बनकर अपने ससुराल आ गई। शुरुआत में तो सब अच्छा हीं लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे नीलम की सास के व्यवहार में अंतर आने लगा था। हर रोज कांता जी हर बात पर टोकना और छोटे घर की होने का ताना देने लगी थी।


शादी के चार पांच दिन बाद हीं घर के सारे काम काज का भार कांता जी ने नीलम के सर मंढ दिया और खुद सिर्फ हर काम पर नजर रखने और कमी निकालने में लगी रहतीं।


एक दिन सब्जी में नमक थोड़ा ज्यादा हो गया तो कांता जी चिल्लाते हुए बोली, " कुछ सिखाया नहीं तेरी मां ने ... ढंग से काम कर वर्ना ......


नीलम धोने के कपड़े लेकर वाशिंग मशीन की तरफ बढ़ी तो कांता जी चिल्लाते हुए बोली, " तुझे पता भी है मशीन चलाने से बिजली का बिल कितना आता है?? बिजली का बिल क्या तेरा बाप भरेगा? चुपचाप बैठकर हाथ से कपड़े धो ले वर्ना... ,,


जब नीलम पगफेरे के लिए मायके जा रही थी तो कांता जी बोलीं, " शादी में तो तेरे बाप ने कुछ दिया नहीं इस बार वापस आए अपने बाप से कह देना .. तो मेरे बेटे के लिए एक सोने की चैन और घड़ी दे कर भेजे .. वर्ना... ,,


नीलम मायके जरूर गई लेकिन वहां इस बात का जिक्र भी नहीं किया । बहू को खाली हाथ वापस आया देख कांता जी फिर चिल्लाई , " तुझे कहा था ना कि चैन और घड़ी लेकर आना .... खाली हाथ आने की तेरी हिम्मत कैसे हुई? अभी फोन लगा तेरे बाप को ... वर्ना....


इस बार बाप का नाम आते हीं नीलम के सब्र का बांध टूट गया और वो भी ऊंची आवाज में बोल पड़ी, " वर्ना ... वर्ना क्या मां जी ?? क्या कर लेंगी आप?? मुझे वापस मायके भेजेंगी तो सुन लीजिए.... ये घर जितना आपका है अब मेरा भी है .. और अगर अपने बेटे की दूसरी शादी कराने का इरादा है तो मैं आपके बेटे को तलाक कभी नहीं देने वाली ... और क्या करेंगी ?

मुझपर हाथ उठाएंगी!!!

तो सोचना भी मत.. क्योंकि मैं स्कूल में कराटे चैंपियन रह चुकी हूं .... आप बड़ी हैं इसलिए हाथ नहीं उठाऊंगी.. लेकिन उठे हुए हाथ को ऐसा मरोडूंगी कि दोबारा उठाने लायक भी नहीं रहेगा.....

  और... और क्या करेंगी!! रो धोकर अपने बेटे और ससुर जी को दिखाएंगी, मेरी शिकायत करेंगी !! त्रिया चरित्र दिखाकर बेटे और परिवार वालों को मेरे खिलाफ करेंगी ?? तो सुन लीजिए.... मैं भी एक स्त्री हीं हूं.. ये रोना धोना और नौटंकी दिखाना मुझे भी आता है...


और हां... ज्यादा परेशान करने की कोशिश की तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दूंगी ... इसलिए भलाई इसी में है कि आराम से जिएं और मुझे जीने दें... वर्ना...


बहू की चेतावनी सुनकर कांता जी का हलक सूख गया। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि सीधी सादी दिखने वाली बहू इतना कुछ बोल भी सकती है। पसीने से तर कांता जी की सांस फूलने लगी तो नीलम ने पानी का गिलास पकड़ाते हुए कहा ,

" मां जी यदि आप चाहती हैं कि मैं इस बात का जिक्र किसी से ना करूं तो विश्वास रखिए नहीं करूंगी ..... लेकिन यदि आप चाहती हैं कि मैं आपकी इज्जत करूं तो खुद को सुधारने में हीं भलाई है। ,,

कांता जी ने एक सांस में हीं पानी का पूरा गिलास गटक लिया। शाम को जब नीलम के ससुर और पति आफिस से वापस आया तो घर का माहौल बिल्कुल शांत था। नीलम चाय लेकर आई तो सबके साथ कांता जी ने भी चुपचाप चाय पी ली। आज कोई नुक्स कोई कमी कांता जी को नजर नहीं आ रही थी ....

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...