sunilrathod

Saturday, 31 August 2024

यह सम्मान होगा उस प्यार, देखभाल, दयाभाव और त्याग का जो एक आदमी अपने बच्चे के पालन के लिए कर सकता है

 बाप.💖..प्रस्तुत है वो कहानी जो मेरे अंतर्मन को छू गई .🌼

शहर के एक प्रसिद्ध अन्तरराष्ट्रीय के विद्यालय के बग़ीचे में तेज़ धूप और गर्मी की परवाह किये बिना, बड़ी लग्न से पेड़ - पौधों की काट छाँट में लगा था कि तभी विद्यालय के चपरासी की आवाज़ सुनाई दी, गंगादास! तुझे प्रधानाचार्या जी तुरंत बुला रही हैं।


गंगादास को आख़िरी के पांँच शब्दों में काफ़ी तेज़ी महसूस हुई और उसे लगा कि कोई महत्त्वपूर्ण बात हुई है जिसकी वज़ह से प्रधानाचार्या जी ने उसे तुरंत ही बुलाया है।

शीघ्रता से उठा, अपने हाथों को धोकर साफ़ किया और चल दिया, द्रुत गति से प्रधानाचार्या के कार्यालय की ओर। 


 उसे प्रधानाचार्या महोदया के कार्यालय की दूरी मीलों की लग रही थी जो ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही थी। उसकी हृदयगति बढ़ गई थी। 


 सोच रहा था कि उससे क्या ग़लत हो गया जो आज उसको प्रधानाचार्या महोदया ने तुरंत ही अपने कार्यालय में आने को कहा।


      वह एक ईमानदार कर्मचारी था और अपने कार्य को पूरी निष्ठा से पूर्ण करता था। पता नहीं क्या ग़लती हो गयी। वह इसी चिंता के साथ प्रधानाचार्या के कार्यालय पहुँचा......

       #मैडम, क्या मैं अंदर आ जाऊँ? आपने मुझे बुलाया था।


हाँ। आओ और यह देखो" प्रधानाचार्या महोदया की आवाज़ में कड़की थी और उनकी उंगली एक पेपर पर इशारा कर रही थी। 

       "पढ़ो इसे" प्रधानाचार्या ने आदेश दिया।

       "मैं, मैं, मैडम! मैं तो इंग्लिश पढ़ना नहीं जानता मैडम!" गंगादास ने घबरा कर उत्तर दिया। 

     "मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ मैडम यदि कोई गलती हो गयी हो तो। मैं आपका और विद्यालय का पहले से ही बहुत ऋणी हूँ। क्योंकि आपने मेरी बिटिया को इस विद्यालय में निःशुल्क पढ़ने की इज़ाज़त दी। मुझे कृपया एक और मौक़ा दें मेरी कोई ग़लती हुई है तो सुधारने का। मैं आप का सदैव ऋणी रहूंँगा।" गंगादास बिना रुके घबरा कर बोलता चला जा रहा था।

      उसे प्रधानाचार्या ने टोका "तुम बिना वज़ह अनुमान लगा रहे हो। थोड़ा इंतज़ार करो, मैं तुम्हारी बिटिया की कक्षा-अध्यापिका को बुलाती हूँ।"

      वे पल जब तक उसकी बिटिया की कक्षा-अध्यापिका प्रधानाचार्या के कार्यालय में पहुँची बहुत ही लंबे हो गए थे गंगादास के लिए। सोच रहा था कि क्या उसकी बिटिया से कोई ग़लती हो गयी, कहीं मैडम उसे विद्यालय से निकाल तो नहीं रहीं। उसकी चिंता और बढ़ गयी थी।

      कक्षा-अध्यापिका के पहुँचते ही प्रधानाचार्या महोदया ने कहा, "हमने तुम्हारी बिटिया की प्रतिभा को देखकर और परख कर ही उसे अपने विद्यालय में पढ़ने की अनुमति दी थी। अब ये मैडम इस पेपर में जो लिखा है उसे पढ़कर और हिंदी में तुम्हें सुनाएँगी, ग़ौर से सुनो।"

      कक्षा-अध्यापिका ने पेपर को पढ़ना शुरू करने से पहले बताया, "आज मातृ दिवस था और आज मैंने कक्षा में सभी बच्चों को अपनी अपनी माँ के बारे में एक लेख लिखने को कहा। तुम्हारी बिटिया ने जो लिखा उसे सुनो।" 

      उसके बाद कक्षा- अध्यापिका ने पेपर पढ़ना शुरू किया।

      "मैं एक गाँव में रहती थी, एक ऐसा गाँव जहाँ शिक्षा और चिकित्सा की सुविधाओं का आज भी अभाव है। चिकित्सक के अभाव में कितनी ही माँयें दम तोड़ देती हैं बच्चों के जन्म के समय। मेरी माँ भी उनमें से एक थीं। उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं कि चल बसीं। मेरे पिता ही वे पहले व्यक्ति थे मेरे परिवार के जिन्होंने मुझे गोद में लिया। पर सच कहूँ तो मेरे परिवार के वे अकेले व्यक्ति थे जिन्होंने मुझे गोद में उठाया था। बाक़ी की नज़र में तो मैं अपनी माँ को खा गई थी। मेरे पिताजी ने मुझे माँ का प्यार दिया। मेरे दादा - दादी चाहते थे कि मेरे पिताजी दुबारा विवाह करके एक पोते को इस दुनिया में लायें ताकि उनका वंश आगे चल सके। परंतु मेरे पिताजी ने उनकी 

एक न सुनी और दुबारा विवाह करने से मना कर दिया। इस वज़ह से मेरे दादा - दादीजी ने उनको अपने से अलग कर दिया और पिताजी सब कुछ, ज़मीन, खेती बाड़ी, घर सुविधा आदि छोड़ कर मुझे साथ लेकर शहर चले आये और इसी विद्यालय में माली का कार्य करने लगे। मुझे बहुत ही लाड़ प्यार से बड़ा करने लगे। मेरी ज़रूरतों पर माँ की तरह हर पल उनका ध्यान रहता है।"


    आज मुझे समझ आता है कि वे क्यों हर उस चीज़ को जो मुझे पसंद थी ये कह कर खाने से मना कर देते थे कि वह उन्हें पसंद नहीं है, क्योंकि वह आख़िरी टुकड़ा होती थी। आज मुझे बड़ा होने पर उनके इस त्याग के महत्त्व पता चला।"

     "मेरे पिता ने अपनी क्षमताओं में मेरी हर प्रकार की सुख - सुविधाओं का ध्यान रखा और मेरे विद्यालय ने उनको यह सबसे बड़ा पुरस्कार दिया जो मुझे यहाँ निःशुल्क पढ़ने की अनुमति मिली। उस दिन मेरे पिता की ख़ुशी का कोई ठिकाना न था।"

 यदि माँ, प्यार और देखभाल करने का नाम है तो मेरी माँ मेरे पिताजी हैं।


यदि दयाभाव, #माँ को परिभाषित करता है तो मेरे पिताजी उस परिभाषा के हिसाब से पूरी तरह मेरी माँ हैं।

यदि त्याग, माँ को परिभाषित करता है तो मेरे पिताजी इस वर्ग में भी सर्वोच्च स्थान पर हैं।


 यदि संक्षेप में कहूँ कि प्यार, देखभाल, दयाभाव और त्याग माँ की पहचान है तो मेरे पिताजी उस पहचान पर खरे उतरते हैं और मेरे पिताजी विश्व की सबसे अच्छी माँ हैं।


 आज मातृ दिवस पर मैं अपने पिताजी को शुभकामनाएँ दूँगी और कहूँगी कि आप संसार के सबसे अच्छे पालक हैं। बहुत गर्व से कहूँगी कि ये जो हमारे विद्यालय के परिश्रमी माली हैं, मेरे पिता हैं।


मैं जानती हूँ कि मैं आज की लेखन परीक्षा में असफल हो जाऊँगी। क्योंकि मुझे माँ पर लेख लिखना था और मैंने पिता पर लिखा,पर यह बहुत ही छोटी सी क़ीमत होगी उस सब की जो मेरे पिता ने मेरे लिए किया।

 धन्यवाद। 

आख़िरी शब्द पढ़ते - पढ़ते अध्यापिका का गला भर आया था और प्रधानाचार्या के कार्यालय में शांति छा गयी थी।


इस शांति में केवल गंगादास के सिसकने की आवाज़ सुनाई दे रही थी। बग़ीचे में धूप की गर्मी उसकी कमीज़ को गीला न कर सकी पर उस पेपर पर बिटिया के लिखे शब्दों ने उस कमीज़ को पिता के आँसुओं से गीला कर दिया था। वह केवल हाथ जोड़ कर वहाँ खड़ा था।  


उसने उस पेपर को अध्यापिका से लिया और अपने हृदय से लगाया और रो पड़ा।


प्रधानाचार्या ने खड़े होकर उसे एक कुर्सी पर बैठाया और एक गिलास पानी दिया तथा कहा, "गंगादास तुम्हारी बिटिया को इस लेख के लिए पूरे 15/15नम्बर दिए गए है। यह लेख मेरे अब तक के पूरे विद्यालय जीवन का सबसे अच्छा मातृ दिवस का लेख है। 🌼🍀


हम कल मातृ दिवस अपने विद्यालय में बड़े ज़ोर - शोर से मना रहे हैं। इस दिवस पर विद्यालय एक बहुत बड़ा कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। विद्यालय की प्रबंधक कमेटी ने आपको इस कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बनाने का निर्णय लिया है।🌼🍀


 यह सम्मान होगा उस प्यार, देखभाल, दयाभाव और त्याग का जो एक आदमी अपने बच्चे के पालन के लिए कर सकता है। यह सिद्ध करता है कि आपको एक औरत होना आवश्यक नहीं है एक पालक बनने के लिए।🌼🌼


 साथ ही यह अनुशंषा करता है उस विश्वाश का जो विश्वास आपकी बेटी ने आप पर दिखाया। हमें गर्व है कि संसार का सबसे अच्छा पिता हमारे विद्यालय में पढ़ने वाली बच्ची का पिता है जैसा कि आपकी बिटिया ने अपने लेख में लिखा। 🌼


गंगादास हमें गर्व है कि आप एक माली हैं और सच्चे अर्थों में माली की तरह न केवल विद्यालय के बग़ीचे के फूलों की देखभाल की बल्कि अपने इस घर के फूल को भी सदा ख़ुशबूदार बनाकर रखा जिसकी ख़ुशबू से हमारा विद्यालय महक उठा। तो क्या आप हमारे विद्यालय के इस मातृ दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बनेंगे🌼

रो पड़ा गंगादास और दौड़ कर बिटिया की कक्षा के बाहर से आँसू भरी आँखों से निहारता रहा , अपनी प्यारी बिटिया को..🌼🍀🌺

आपको ये कहानी कैसी लगी ?

 अपने अनमोल विचार कमेंट्स में जरूर दीजियेगा 🙏

अच्छी लगी हो तो शेयर और फॉलो जरूर कीजियेगा 🙏

🙏धन्यवाद🙏

🧡💖💖💖🧡

आज के दौर में लड़कियाँ शादी से पहले लड़के की कमाई पर ध्यान देती हैं

 पति को संभोग सुख दो तो वो तुम्हें दुनिया के सारे सुख देगा।** यह बात मैं हमेशा अपनी सहेलियों, माँ, और चाची से सुनती आ रही थी। लेकिन असल में, बात कुछ और थी। जब मेरी शादी 35 साल की उम्र में हुई, तब मेरे पति की उम्र 37 साल थी। पहले लोग जल्दी शादी करने पर जोर देते थे, लेकिन आजकल लोग पहले करियर बनाने में लगे रहते हैं। कम उम्र में शादी से पार्टनर और परिवार से घुलने-मिलने में आसानी होती है, लेकिन देर से हुई शादी में लोग नए माहौल में ढलने में कठिनाई महसूस करते हैं। 💍


**35 की उम्र में शादी करने से शरीर में कामवासना का स्तर भी घटने लगता है, और 37 साल के पुरुष में भी उतनी ऊर्जा नहीं बचती।** जब मेरी शादी हुई, तो मुझे पता था कि मेरे पति की आय कम है, लेकिन 35 साल की उम्र हो जाने के कारण मेरी माँ को मेरी शादी की चिंता होने लगी थी। पापा की असमय मृत्यु के बाद, परिवार ने मुझे शादी करने की सलाह दी। सहेलियों ने कहा कि पति को खुश रखो, वो खुद मेहनत करके ज्यादा कमाएगा। 💰💔


**शादी के बाद, मैंने पाया कि पति के साथ जिम्मेदारी भी आती है।** मेरे पति जानते थे कि मैं उनकी कम आय से खुश नहीं थी। उन्होंने शादी की पहली रात ही मुझसे कहा, "मेरी आय कम है, लेकिन हम साथ में खुश रह सकते हैं। मैं तुम्हें सभी संसाधन नहीं दे सकता, लेकिन इतना जरूर दे सकता हूं कि हमारी जिंदगी अच्छे से चल सके।" **ऐसे ही 20-22 दिन बीत गए, लेकिन हमारे बीच पति-पत्नी का रिश्ता नहीं बन पाया। शायद उन्हें लगा कि मैंने उन्हें मन से स्वीकार नहीं किया है।** 😔💔


**फिर सहेलियों से बात हुई, उन्होंने फिर वही बात कही कि उन्हें खुश रखो।** महीने के अंत में, पति ने मुझे 20000 रुपये दिए और कहा कि मेरी जरूरतें सीमित हैं, ये पैसे तुम रखो। पर जब मैंने हिसाब लगाया तो पैसे कम पड़े। जब मैंने उनसे इस बारे में बात की, तो उन्होंने कहा कि वे दूसरी नौकरी की कोशिश कर रहे हैं। छह महीने बाद हमारा झगड़ा हुआ, और मैं मायके आ गई। उन्होंने कई बार मुझे बुलाया, लेकिन मैंने गुस्से में कहा कि जब आप अच्छा कमाने लगेंगे, तब आना। **इस बात से उन्हें गहरा आघात लगा। उन्होंने वकील से बात कर तलाक की पेशकश की।** 😢🛑


**तलाक के बाद, मैं घर पर रही और फिर नौकरी करने का निश्चय किया।** अब मेरी उम्र 37 साल हो गई थी। नौकरी पर आने के बाद पता चला कि काम कितना कठिन है और डिवोर्सी महिला के साथ कैसे व्यवहार किया जाता है। मेरी तनख्वाह 15000 रुपये थी, और अब समझ में आया कि नौकरी करना कितना कठिन है। पहले 20000 रुपये घर बैठे मिलते थे, लेकिन अब 15000 रुपये के लिए दिनभर की मेहनत करनी पड़ती थी। 🏢💼


**आज मेरे पति की तनख्वाह 86000 रुपये है।** मैंने रिश्ते को पैसे के पैमाने पर तोला, जो सही नहीं था। यदि प्यार से समझती, तो जीवन बेहतर होता। **आज के दौर में लड़कियाँ शादी से पहले लड़के की कमाई पर ध्यान देती हैं, लेकिन असल में चरित्र पर ध्यान देना चाहिए।** शादी जैसे बंधन को चलाने के लिए आपसी सहमति, समझौता और विश्वास जरूरी है। 👫💕


**मुझे यह बात तब समझ आई जब मैंने अपना रिश्ता खो दिया।** किसी अमीर से चार बातें सुनने से बेहतर है कि किसी कम आय वाले के साथ खुशी से रहो। **ये एक सत्य घटना है, आप बताइए, आपके हिसाब से रिश्ते चलाने के लिए पैसे कितने जरूरी हैं?**

शादीशुदा जिंदगी को एंजॉय करेंगे और उसके बाद बच्चे के बारे में सोचेंगे।

 जब मेरी शादी हुई, तो हर दिन और रात मेरे पति के साथ प्यार और रोमांस से भरे हुए थे। हम दोनों एक-दूसरे के साथ वक्त बिताना चाहते थे, और मैं उनके पास रहकर खुद को खो देती थी। लेकिन जैसे ही कुछ हफ्ते बीते, हम पर परिवार और समाज का दबाव बढ़ने लगा - "अब जल्दी से बच्चा दे दो, दूधो नहाओ, पूतो फलो।"  

💑

ऐसा लगने लगा कि लोग हमारी शादी केवल एक बच्चे की जरूरत के लिए चाहते थे। लेकिन मेरे पति और मैं पढ़े-लिखे थे और हमें पता था कि बच्चे की जिम्मेदारी बहुत बड़ी होती है। हमने पहले ही तय कर लिया था कि पहले दो साल अपनी शादीशुदा जिंदगी को एंजॉय करेंगे और उसके बाद बच्चे के बारे में सोचेंगे।  

📚


हम दोनों बहुत रोमांटिक थे और हमारे मूड बनते देर नहीं लगती थी। कई बार बिना प्रोटेक्शन के हमने संबंध बनाए। सुबह होते ही चिंता सताने लगती कि अब क्या होगा। गर्भनिरोधक गोलियां लेने का सहारा लिया, लेकिन हम दोनों जानते थे कि यह स्थायी समाधान नहीं है। डॉक्टर ने हमें प्रतिदिन लेने वाली एक दवा दी और कहा कि जब बच्चा करने का प्लान हो, तो 23 दिन पहले इसे बंद कर दें।  

💊

हमने पूरे दो साल इस दवा का सेवन किया और अपनी शादीशुदा जिंदगी को एंजॉय किया। लेकिन जब दो साल बाद बच्चा पैदा करने की स्थिति आई, तो हम दोनों ने बहुत कोशिश की, पर मैं गर्भधारण नहीं कर पाई। डॉक्टर ने बताया कि मेरी नली सुख चुकी है और गर्भधारण नहीं हो पा रहा है। एक साल इलाज के बाद मेरी रिपोर्ट सही आई, लेकिन फिर भी बच्चा नहीं हो पाया। इस बार मेरे पति की जांच हुई और पता चला कि अत्याधिक संबंध बनाने से वीर्य की क्वालिटी खराब हो गई है। उनके इलाज में भी एक साल लग गया।  

🩺😔


कुल मिलाकर, जब हमारी उम्र बच्चा पैदा करने की थी, तो हमने अपने पढ़े-लिखे होने के कारण फैसला लिया, लेकिन अब जब जरूरत है, तो हर कोशिश के बाद भी मैं मां नहीं बन पा रही हूं। आज मुझे समझ में आता है कि चंद किताबें पढ़ लेने से वह ज्ञान नहीं मिलता जो अनुभव से मिलता है। बड़े-बुजुर्गों की बात मानकर अगर मैंने पहले ही बच्चा किया होता, तो आज मुझे यह दिन नहीं देखना पड़ता।  

📖👵


हर चीज अपने समय से होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जीवन में सही समय पर सही निर्णय लेना जरूरी है, ताकि आगे चलकर पछताना न पड़े। यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सही समय पर सही कदम उठाना कितना महत्वपूर्ण होता है। 🌸  

नीरा के बरसों से रुके आंसू उमड़ पड़े।

 नीरा बिस्तर पर लेटी हुई थी और छत पर घूमते पंखे की पंखुड़ियों को एकटक देख रही थी। जैसे ही पंखुड़ियाँ घूमती, नीरा के मन में पुराने समय की यादें उभरने लगीं। ⏳ उसकी यादों की किताब के पन्ने धीरे-धीरे खुलने लगे, जिसमें वक्त की स्याही भले ही धुंधली पड़ गई हो, लेकिन भावनाओं के निशान अब भी गहरे थे। 🕰️ उसे याद आया कि उसने सोलह साल की उम्र में ही शादी कर ली थी। उसके पति, राजीव, उससे सिर्फ दो साल बड़े थे - अल्हड़, मस्त और बेफिक्र। 💑 घर का पुश्तैनी बिज़नेस उनके पिता, सुरेश जी, संभाल रहे थे, इसलिए राजीव का दिन अपनी नई नवेली दुल्हन के इर्द-गिर्द घूमते हुए बीतता। 🏡 अम्मा अपने बेटे-बहू की हर दिन नज़र उतारतीं और उनके रिश्ते की बलैयाँ लेतीं। 


नीरा भी अम्मा के साथ बैठकर अमिया छीलती या चावल बीनती। 😌 वह घूंघट की ओट से तिरछी नज़रों से राजीव को देखती, और उसकी शरारती निगाहें राजीव के दिल के आर-पार हो जातीं। 💕 अम्मा उनकी प्रेम लीला देखकर भी अनदेखा कर देतीं। राजीव ने ब्याह से पहले ही महंगी मोटरसाइकिल खरीदी थी। 🏍️ सुरेश जी ने कहा भी था कि कार ले लो, बहू आएगी तो आराम रहेगा, पर राजीव का सपना था कि उसकी बहुरिया उसकी कमर पकड़कर बाइक पर पीछे बैठे और वे लॉंग ड्राइव पर जाएं। 🚗


प्रेम के सागर में डूबते-उतरते एक साल बीत गया और नीरा एक प्यारे से बेटे की माँ बन गई। 👶 पूरे नौ महीने सुरेश जी, उनकी पत्नी और राजीव ने नीरा को धरती पर पैर नहीं रखने दिया। अम्मा ने पोता होने की खुशी में अपना नौलखा हार नीरा को दे दिया। 💍 नीरा को डर लगता था कि कहीं किसी की नज़र न लग जाए। 😌


बेटे की छठी पर राजीव ने कहा कि वह नौलखा हार पहन ले, पर नीरा की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए वह हार पहन नहीं पाई। बेटे के पहले जन्मदिन की धूमधाम से तैयारी हो रही थी, और नीरा को एक सुंदर लाल बनारसी साड़ी में सजाया गया। 🎉 राजीव ने उसे देखा तो बस देखता ही रह गया। 😍 उसने कहा, "अब मैं सब्र नहीं कर सकता, बस तुम्हें अम्मा का नौलखा हार पहने देखना चाहता हूँ," और वह एक मिनट में बाइक उठाकर हार लाने चला गया। 


नीरा जैसे ही गले में नौलखा हार डालने वाली थी, तभी शोर मचा कि गली के नुक्कड़ पर एक तेज रफ्तार कार ने राजीव को टक्कर मार दी। 🚗💥 राजीव के हाथ में नीरा का मनपसंद सफेद मोगरे का गजरा था, जिसे लेने वह जल्दी में गया था। अस्पताल ले जाते-ले जाते राजीव नीरा और अपने माता-पिता को बिलखता छोड़कर इस दुनिया से चला गया। 😢 नन्हा सोनू तो अपनी मस्ती में था, उसे समझ ही नहीं आया कि उसके सर से पिता का साया उठ गया। 


राजीव के बिना जीना नीरा के लिए असंभव था, उसकी दुनिया तो राजीव से शुरू होकर उसी पर खत्म होती थी। 💔 लेकिन धीरे-धीरे, नीरा ने उन तीनों के लिए खुद को संभाला जो राजीव के बाद उसकी जिम्मेदारी बन गए थे। सुरेश जी और उनकी पत्नी ने नीरा से दोबारा घर बसाने की बात की, लेकिन नीरा ने साफ इंकार कर दिया। उसने सुरेश जी के साथ बिज़नेस संभालना शुरू किया और सोनू को पढ़ा-लिखाकर बड़ा करने में जुट गई। 📚


समय बीतता गया, सोनू इंजीनियर बन गया और सुरेश जी ने सारा बिज़नेस नीरा और सोनू के नाम कर दिया। 🏢 सोनू की शादी शीना से हो गई और सुरेश जी और उनकी पत्नी भी चल बसे। नीरा के पास सब कुछ था, लेकिन मन का सुकून नहीं था। 😔 राजीव के बिना उसका जीवन अधूरा था। एक दिन उसने शीना को सोनू से कहते सुना, "मम्मी के पास नौलखा हार है, उन्हें क्या वह बुढ़ापे में पहनेंगीं? मैं तो उनसे वह नौलखा हार लेकर रहूंगी।" 😡


शीना ने आकर नीरा से नौलखा हार मांगा। नीरा ने कहा, "वह मनहूस नौलखा हार मैं कभी तुम्हारे गले में नहीं पहनाऊंगी। राजीव उसे देखने की ललक में चला गया और अब सोनू? नहीं, कभी नहीं। इसे बेच देंगे और इसके पैसे किसी गरीब लड़की के विवाह में दान कर देंगे।" 💔


कहते हुए नीरा के बरसों से रुके आंसू उमड़ पड़े। 😢 सोनू और शीना का सिर दुःख और शर्म से झुक गया। 😔


मनुष्य कुछ सोचता है, लेकिन होता कुछ और है। किसी के चले जाने से जीवन रुकता नहीं, वक्त का पहिया अपनी रफ्तार से चलता रहता है। ⏳ जीना पड़ता है दूसरों के लिए, बिना किसी मंजिल के। नीरा भी राजीव के संग मर तो नहीं सकी, लेकिन अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए जीना पड़ा, जो काम राजीव अधूरे छोड़ गया था, उन्हें पूरा करने के लिए। 🌹 लेकिन ऐसा अधूरा जीवन, जीवन नहीं कहलाता। 😔

लड़की अपने बॉयफ्रेंड से पूछती है,

 लड़की अपने बॉयफ्रेंड से पूछती है, "अच्छा, किसी दूसरे लड़के से मेरा विवाह हो जाए तो तुम क्या करोगे?" 

लड़का जवाब देता है, "तुम्हें भूल जाऊंगा।" (लड़के ने बहुत छोटा सा जवाब दिया)  


ये सुनकर लड़की गुस्से में दूसरी तरफ घूम कर बैठ गई। फिर लड़के ने कहा, "सबसे बड़ी बात कि तुम मुझे भूल जाओगी। जितना जल्दी मैं तुम्हें भुला सकूंगा, उससे ज्यादा जल्दी तुम मुझे भुला दोगी।"  

"कैसे?" लड़की ने पूछा।  

लड़के ने बोलना शुरू किया, "सोचो, विवाह का पहला दिन है। तुम एक नए घर में हो, शरीर पर जेवर, चेहरे पर मेकअप, चारों तरफ कैमरे का फ्लैश और लोगों की भीड़। तुम चाह कर भी मुझे याद नहीं कर पाओगी।"  


"और मैं तुम्हारे विवाह की खबर सुनकर दोस्तों के साथ कुछ उटपटांग पीकर किसी कोने में पड़ा रहूंगा। फिर जब मुझे होश आएगा, तो मैं तुम्हें धोखेबाज बेवफा बोलकर गाली दूंगा।"  


"फिर जब तुम्हारी याद आएगी, तो दोस्त के कंधे पर सर रखकर रो लूंगा। विवाह के बाद तुम्हारा बिजी टाइम शुरू होगा। तुम अपने पति और हजार तरह के रस्मों को निभाने में बिजी रहोगी। फिर कभी-कभी तुम्हें मेरी याद आएगी जब तुम अपने पति का हाथ पकड़ोगी या उसके साथ बाइक पर बैठोगी।"  


"और मैं आवारा की तरह इधर-उधर घूमता रहूंगा, जैसे जिंदगी का कोई मकसद ही नहीं। अपने दोस्तों को समझाऊंगा कि 'कभी प्यार मत करना, कुछ नहीं मिलता, जिंदगी खतम हो जाती है प्यार के चक्कर में।'"  


"कुछ वक्त बाद तुम अपने पति के साथ हनीमून पर जाओगी। नया घर होगा, शॉपिंग होगी, नई जिम्मेदारियां होंगी। तब अचानक तुम्हें मेरी याद आएगी और तुम सोचोगी, 'पता नहीं किस हाल में होगा।' मेरी खुशी की प्रार्थना मांगते हुए वापस अपने परिवार में बिजी हो जाओगी।"  

🌅💼 मै अब तक मम्मी, पापा, भाई या फिर दोस्तों से डांट सुन-सुन कर लगभग सुधर गया हूं। सोच लिया है, अब कोई काम करना है, एक अच्छी सी लड़की से विवाह करके तुम्हें भी दिखा देना है। सबको यही बोलूंगा कि भुला दिया है मैंने तुम्हें, लेकिन तब भी मैं तुम्हारे मैसेजेस को आधी रात को निकालकर पढूंगा और सोचूंगा, शायद मेरे प्यार में ही कमी थी जो तुम्हें न पा सका। फिर अपनी तकलीफ को कम करने की कोशिश करूंगा।"  

📱😢


"दो वर्ष बाद अब तुम कोई प्रेमिका या नई दुल्हन नहीं रही, अब तुम माँ बन चुकी हो। पुराने आशिक की याद और पति के प्यार को छोड़कर तुम अपने बच्चे के लिए सोचोगी। अब तुम अपने बच्चे के साथ बिजी रहोगी, मतलब अब तक मैं तुम्हारी जिंदगी से परमानेन्टली डिलीट हो चुका हूं।"  

👶💔


"इधर मुझे भी एक अच्छा काम मिल गया है, विवाह की बात चल रही है और लड़की भी पसंद आ गई है। अब मेरा बिजी टाइम शुरू हो गया है। अब मैं तुम्हें सचमुच भूल गया हूं। अगर किसी जोड़ी को देखता हूं तो तुम्हारी याद आती है, लेकिन अब तकलीफ नहीं होती।"  

यहां तक सुनने के बाद लड़के ने देखा, लड़की की आंखों में आंसू छलक रहे हैं। लड़की भरी आंखों से लड़के की तरफ देखती है। दोनों बिल्कुल चुप हैं, पर आंखें बरस रही हैं। थोड़ी देर बाद लड़की ने पूछा, "तो क्या सब कुछ यहीं खतम हो जाएगा?"  

लड़के ने जवाब दिया, "नहीं। किसी दिन जब तुम रूठ जाओगी अपने पति से किसी बात पर, लेकिन तुम्हारे पति आराम से सो रहे होंगे। पर उस रात तुम्हारी आंखों में नींद नहीं होगी। इधर मैं भी अपनी पत्नी से किसी बात पर खफा होकर तुम्हारी तरह जागूंगा। पूरी दुनिया सो रही होगी सिर्फ हम दोनों के अलावा। फिर हम अपने अतीत को याद करके खूब रोएंगे, एक दूसरे को बहुत महसूस करेंगे, लेकिन इस बात का भगवान के अलावा और किसी को पता नहीं चलेगा।"  

उम्मीद है कि मेरे इस अनुभव से आप सभी को कुछ सीख मिलेगी

 शादी के शुरुआती दिनों में जो सुकून और खुशी मिलती है, उसका अनुभव शायद हर नई दुल्हन ने किया होगा। खासकर ठंड के मौसम में, जब अपने पति के साथ वक्त बिताने का अलग ही मज़ा होता है। मेरी शादी नवंबर में हुई थी, और मुझे एक प्यार करने वाला, रोमांटिक पति मिला था। हमारे बीच एक खास जुड़ाव था, और वो हर पल को रोमांटिक बना देते थे। वो कहते थे कि प्यार और विश्वास में गहराई लाने के लिए यह जरूरी है, और सच कहूं तो, उनके साथ वक्त बिताना मेरी जिंदगी का सबसे हसीन अनुभव था।


जनवरी का महीना था और कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। रात के एक बजे सभी अपने-अपने कमरों में आराम कर रहे थे। हम भी अपने कमरे में बातें कर रहे थे, लेकिन ठंड के कारण हमारी बातें अचानक से किसी और दिशा में मुड़ गईं। जैसे ही कुछ खास होने वाला था, मम्मी जी ने जोर से पुकारा। मैं तुरंत बाहर गई तो उन्होंने कहा कि बर्तन ऐसे ही पड़े हैं, यह शुभ नहीं है। मन में तो यही आ रहा था कि इतना अच्छा मूड था, फालतू में मम्मी जी ने बुला लिया। लेकिन मैंने बर्तन साफ किए और वापस आई।


समय बीतने के साथ, घर की जिम्मेदारियां और काम का बोझ बढ़ने लगा। मम्मी जी मुझे हर काम में टोकने लगीं। उनकी सबसे बड़ी शिकायत यह थी कि मैं काम में देरी कर रही हूँ। धीरे-धीरे, यह बातें मेरी जेठानी तक पहुंचने लगीं, और घर का माहौल तनावपूर्ण हो गया। एक दिन, जब नाश्ता और लंच तैयार नहीं हो पाया, तो मम्मी जी ने हमें डांटा। मैंने जब इस बात की शिकायत अपने पति से की, तो उन्होंने भी मुझसे ही कहा कि मुझे समय का ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद, घर का रूटीन बिगड़ने लगा। खाना देर से बनता, और हम दोनों देवरानी-जेठानी ने काम को जल्दी निपटाने के चक्कर में हर काम आधे मन से करना शुरू कर दिया।


घर का माहौल धीरे-धीरे और बिगड़ने लगा। मेरे पति, जो पहले बहुत प्यार करते थे, अब चिढ़ने लगे थे। एक दिन, सासु माँ ने हमसे हमारे फोन मांग लिए और कहा कि अब से फोन सिर्फ दोपहर 1 बजे से रात 7 बजे तक मिलेगा। इस बात पर हमें गुस्सा आया, लेकिन फिर भी हम चुप रहे। रक्षा बंधन पर जब मैंने यह बात अपने घरवालों को बताई, तो उन्होंने भी मुझे समझाया कि सासु माँ की बातों पर ध्यान देना चाहिए।


इस घटना के बाद, मैंने और मेरी जेठानी ने देखा कि जबसे हमने फोन का इस्तेमाल कम किया, हमारे काम तेजी से निपटने लगे। शॉर्ट वीडियो और रील्स देखने की आदत ने हमें इतना व्यस्त कर दिया था कि हम घर के काम में देरी कर रहे थे, और इसका असर हमारे रिश्तों पर भी पड़ रहा था। लेकिन जब हमने यह आदत छोड़ी, तो सब कुछ सामान्य होने लगा।


अब सोचिए, यह शॉर्ट्स और रील्स कितनी खतरनाक हो सकती हैं। यह मीठा जहर हमारे समय को चुपचाप खा जाता है, और हमें पता भी नहीं चलता। अगर आपको भी लगता है कि आपका समय जल्दी खत्म हो जाता है और आप कुछ खास नहीं कर पाते, तो एक महीने के लिए रील्स देखना बंद कर दीजिए। यह छोटा सा कदम आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। उम्मीद है कि मेरे इस अनुभव से आप सभी को कुछ सीख मिलेगी, और आप भी अपने जीवन को बेहतर बना पाएंगे।

आज खाना खाकर तुमने मेरा कितना बड़ा सम्मान किया मुझे माफ कर दो

 ग्रामीण बैंक में मैनेजर की पोस्टिंग होने के बाद पहली बार राजेश किराए के नए घर में शिफ्ट हुऐ थे. पर आज ही सीढ़ियों से फिसलने के कारण प्रिया के पैरों में जबरदस्त मोच आ गयी थी. डॉक्टर ने घर पर आकर पट्टियाँ तो बाँध दी. साथ ही साथ सख्त हिदायत दे दीं कि चलना फिरना बिल्कुल मना है.

एक सप्ताह पहले आये नए घर के आस पास कोई जान पहचान के लोग भी नहीं थे. ये तो बहुत अच्छी बात रही कि पिछले कुछ दिनों में प्रिया ने किचन के साथ साथ पूरे घर को व्यवस्थित कर लिया था.

चार साल पहले राजेश और प्रिया की परिवार वालों की सहमति से अर्रेंज मैरेज हुई थी. प्रिया खुद भी पढ़ने में काफी तेज थी और पढ़ लिख कर जीवन मे कुछ बनना चाहती थी. लेकिन पापा को कैंसर का पता चला और उसी वक़्त राजेश के यहाँ से रिश्ता आया तो मजबूरी के चलते शादी करनी पड़ी.

शादी के बाद प्रिया पूरी तरह से ससुरालवालों की खुशियों के लिए खुद को न्योछावर कर दी. वो पूरी तरह से आदर्श बहू बन गयी. ससुराल में सब उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे. उसके व्यवहार ,कार्यकुशलता से सभी प्रभावित थे.

कुछ ही दिनों में उसने अपने ससुराल की काया बदल कर रख दी थी. पहले हर चीज जैसे तैसे होती थी. अब हर चीज साफ सुथरी और व्यवस्थित रहने लगी. खाना भी वो बड़े जतन से बनाती थी. हर लोग उसके बनाये लजीज खाने की खूब तारीफ करते. सिवाय उसके पति राजेश के.

राजेश को जरा भी खाने में नमक कम या ज्यादा लगता या मसाला कम होता तो वो एक कोर खाना खाकर छोड़ देता था. परसों खीर में थोड़ी चीनी कम क्या हुई? प्रिया के लाख मिन्नतों के बाद भी उसने खाने को दुबारा हाथ तक नहीं लगाया.

सबसे ज्यादा राजेश को मटर पनीर पसंद थी. कुछ दिनों पहले जब मटर पनीर बनी और मटर थोड़ी गल गयी तो भी राजेश ने खाना नहीं खाया. जबकि घर के सभी सदस्यों ने खूब मजे से खाये.

प्रिया के लाख मिन्नतें करने और मनाने के बाद भी राजेश खाना नहीं खाता था. और राजेश जब भूखा सो जाता तो प्रिया भी भूखी सो जाती थी. महीने में कई बार ऐसा होता था. अब पहली बार राजेश नौकरी के लिए घर से दूर आया था.

प्रिया को पलँग पर अच्छे से सुलाकर राजेश आज जिंदगी मे पहली बार खाना बनाने के ख्याल से घुसा. किचन में हर चीज प्रिया ने व्यवस्थित रखा था. राजेश ने एक तरफ थोड़ा सा चावल गैस चूल्हे पर चढ़ा दिया और दूसरी तरफ थोड़ी सी दाल एक पतीले में चढ़ा दी.

फिर वो थोड़े आलू प्याज लेकर भुजिया काटने लगा. काफी मेहनत के बाद बहुत ही बेतरतीब ढंग से आलू और प्याज कटे. उसे आभास होने लगा था खाना बनाने में बहुत मेहनत लगती है. दो घंटे की मेहनत के बाद उसने किसी तरह खाना बनाने में सफलता पाई.

एक थाली में भात और कटोरी में दाल और प्लेट में भुजिया लेकर वो पलँग पर प्रिया को अपने हाथों से खाना खिलाने लगा. वो कोर कोर प्रिया को खाना खिलाता जाता था और प्रिया बड़े आराम से खुशी-खुशी खाना खाती जाती थी.

खाना खत्म होने के बाद राजेश ने प्रिया से पूछा कैसा लगा खाना? प्रिया ने कहा बहुत अच्छा. मैं कितनी खुशनसीब हूँ आज जिन्दगी में पहली बार पति के हाथों बना गरमागरम खाना खाने को मिला. राजेश से सुनकर बहुत खुश हुआ. आखिर दो घंटे कड़ी मेहनत करके उसने खाना बनाया था.

खाने की तारीफ सुनकर वह फूला न समाया. उसे लगा उसकी मेहनत सफल रही. प्रिया को खाना खिलाने के बाद वो खुद खाना खाने बैठा. उसे जोरों की भूख लगी थी. दाल भात मिलाकर थोड़ी भुजिया का कोर बनाकर जैसे ही मुँह में डालकर राजेश ने चबाना शुरू किया. तेजी से वाश बेसिन की तरफ दौड़ा और मुँह का सारा खाना वाश बेसिन में उगल दिया.

चावल कच्चा पक्का था. दाल में नमक बहुत ज्यादा था. भुजिया भी कच्चा था. ऐसा घटिया खाना प्रिया ने बिना कोई शिकायत के खा लिया. सिर्फ इसलिए कि मैंने इतनी मेहनत से बनाया था. छोटी-छोटी बात पर पिछले सारे खाना न खाने वाले वक़्त की उसे याद आने लगी.

उसके दोनों आँखों से आँसू निकल पड़े. अपने बनाये जिस जिस खाने को वो एक कोर भी न खा सका. प्रिया ने बिना कुछ कहे पूरे खाने को खा लिए. राजेश प्रिया के सामने सर झुकाए हाथ जोड़े धीरे से बोला- "पिछले चार सालों में कई बार खाना न खाकर मैंने तुम्हारा जो अपमान किया. आज खाना खाकर तुमने मेरा कितना बड़ा सम्मान किया मुझे माफ कर दो.

प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, दूध गर्म कर चूड़ा के साथ आज खा लीजिए. एक दो दिनों में मैं ठीक हो जाऊँगी. फिर आपको कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा.

इसके बाद कोई भी ऐसा वक़्त नहीं आया. जब प्रिया का बनाया खाना राजेश ने खुशी खुशी न खाया हो. एक बार खाना बनाने में लगी मेहनत ने राजेश को पत्नी का सम्मान करना सीख गया था।

रिश्ते टूटते नहीं। बस रिश्ते दिल से होना चाहिए

 कोर्ट में पेपर पर आखिरी साइन होते ही वकील मुस्कुराया और बोला, “लो मैडम, अब आपका डिवोर्स हो गया है। कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये हर्जाने के तौ...