sunilrathod

Friday, 30 August 2024

ये स्त्री के मूल में ही नहीं है...

 स्त्री कभी संतुष्ट नहीं होती ..... स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं

ये स्त्री के मूल में ही नहीं है अगर आप बहुत ज्यादा केयर करते है तो उससे भी ऊब जाएगी


अगर आप बहुत उग्र हैं तो वो उससे भी बिदक जाएगी


अगर आप बहुत ज्यादा विनम्र हैं तो वो उससे भी चिढ जाएगी


अगर आप उससे बहुत ज्यादा बात करते हैं तो वो आपको टेक इट फौर ग्रांटड लेने लगेगी


अगर आप उससे बहुत कम बात करते हैं तो वो मान लेगी कि आपका चक्कर कहीं और चल रहा है


यानी आप कुछ भी कर लीजिए वो संतुष्ट नहीं हो सकती


ये उसका स्वभाव है वो एक ऐसा डेडली काॅम्बीनेशन खोजती है जो बना ही न हो बन ही न सकता हो


ठीक वैसे ही जैसे कपड़ा खरीदने जाती है तो कहती कि इसी कलर में कोई दूसरा डिजाइन दिखाओ,


इसी डिजाइन में कोई दूसरा कलर दिखाओ


कपड़े का गट्ठर लगा देती है...


बहुत परिश्रम के बाद एक पसंद आ भी गया, तो भी संतुष्ट नहीं हो सकती...


आखिरी तक सोचती है कि इसमे ये डिजाइन ऐसे होता तो परफैक्ट होता...


इन सबके बावजूद एक बहुत बड़ी खूबी भी है स्त्री के अंदर ...


एक बार उसे कुछ पसंद आ गया तो उसे आखिरी दम तक सजो के रखती है वो चाहे रिश्ते हो या चूड़ी


रंग उतर जाएगा चमक खत्म हो जाएगी पर खुद से जुदा नहीं करेगी


बस यही खूबी स्त्री को विशिष्ट बनाती है


स्त्री से प्रेम में अगर आप ये उम्मीद करते हैं कि वो आपसे पूरी तरह खुश है तो आप नादानी में हैं...


ये स्त्री के मूल में ही नहीं है...

सेक्स एक ऐसा विषय है..

 सेक्स एक ऐसा विषय है.......

जिसे हर कोई अनुभव करना चाहता है, चाहे वह महिला हो या पुरुष। कामुकता और सेक्स से जुड़ी बातें हर किसी को आकर्षित करती हैं, और ऐसा होना स्वाभाविक है क्योंकि यह हमारी प्रकृति का हिस्सा है। सहमति से किया गया सेक्स बिल्कुल गलत नहीं है, बल्कि इसे भी अन्य सामान्य क्रियाओं की तरह ही समझा जाना चाहिए। 


सेक्स, जब सही ढंग से किया जाए, तो यह सबसे सुखद अनुभव हो सकता है। महर्षि वात्स्यायन जैसे महान दार्शनिक ने कामसूत्र जैसी पुस्तक में सेक्स का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है, जो दर्शाता है कि यह विषय चर्चा के योग्य है और इसे खुले मन से स्वीकार किया जाना चाहिए। 


हालांकि, समाज में कुछ लोग खुद को अत्यधिक संस्कारवान दिखाने का प्रयास करते हैं। जब भी कोई सेक्स की बातें करता है, तो ये लोग बड़ी मर्यादा और नैतिकता का दिखावा करते हैं, जैसे वे इस विषय से बिल्कुल अनभिज्ञ हों। परंतु, वास्तविकता यह है कि यही लोग कामवासना में सबसे अधिक लिप्त होते हैं और अकेले में पोर्न वीडियो देखने से भी नहीं चूकते, लेकिन सबके सामने एक अलग चेहरा दिखाते हैं। 


महान दार्शनिक रजनीश ओशो ने कहा है कि जैसे नहाना, खाना, सोना-जागना हमारी दैनिक क्रियाएं हैं, ठीक वैसे ही सेक्स भी एक सामान्य क्रिया है। यह बस एकांत में की जाने वाली क्रिया है, लेकिन इसके बारे में बात करने में कोई बुराई नहीं होनी चाहिए। 


मैं हर विषय पर खुलकर लिखता हूं, चाहे वह सेक्स हो या कोई अन्य मुद्दा। सेक्स पर बात करने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि बुराई तो किसी भी अच्छे काम में ढूंढी जा सकती है। इसलिए, क्यों न हम इस डर को छोड़कर इस पर भी खुलकर चर्चा करें? ✨

     सुनिल राठौड़   👈👈👈

हमें जो चीजें बहुत सुख देती हैं उसमें धन की कोई भूमिका नहीं होती

 हमें जो चीजें बहुत सुख देती हैं उसमें धन की कोई भूमिका नहीं होती। जैसे बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रेंड के साथ बाहों में बाहें डालकर घूमना, चुम्बन, सेक्स। मुक्त होकर घूमना। पेड़ पर चढ़ जाना। खरगोश, बिल्ली, कुत्ते के साथ खेलना। नदी किनारे गर्लफ्रेंड/बॉयफ्रेंड के साथ बैठना, पानी के बहाव को निहारना,पानी मे दूर तक कंकड़ फेंकना। यूँ ही टहलते रहना।

इसमें किसी चीज में धन का रोल नहीं है। केवल पेट भरने के लिए धन को इतना जरूरी कर दिया गया, उसके बाद इतनी आवश्यकताएं क्रिएट की गईं कि सुख वाली चीजें लोग भूल ही गए। उन पर नैतिकता के इतने पहरे लगा दिए गए कि वह अपराध बन गया। 

असल चीज वह बन चुकी है जिसका हमारे सुख से दरअसल कोई लेना देना ही नहीं है। एक इल्यूजन में हम जीने को बाध्य हैं और वहाँ सुख ढूंढते हैं जहां सुख है ही नहीं।

देखो बे लौंडों! जब कभी जिंदगी में इतना टूट जाओ

 देखो बे लौंडों! जब कभी जिंदगी में इतना टूट जाओ और लगे कि सब कुछ खत्म हो चुका है अब साला कुछ नही बचा जीने को! सुसाइड का खयाल आए और सोंचने लगो कि अब मर ही जातें हैं, या पागल होने के कगार पर पहुँच जाओ...मतलब एकदम वर्स केस हो जाए, चाहें वो किसी ऐसे के चले जाने की वजह से हो जिसे तुम अपना सब कुछ मानते थे या फिर साला ये emi भरने के लिए नौकरी करने की वजह से हो या फिर चाहें जो कुछ भी रीज़न हो तो एक काम करना। सब कुछ छोड़-छाड़ के निकल जाना बस। अगर नौकरी करते हो तो नौकरी छोड़ देना अगर पढ़ाई करते हो तो पढ़ाई बन्द कर देना क्योंकि भोसd के जीना बहुत जरूरी है और जिंदगी उतनी ही खूबसूरत है पर ये सब बातें तुम तभी जान पाओगे जब ये सारा बुरा फेस बिताकर जिंदा बच जाओगे। जानता हूँ कि ये सब इतना आसान नही है पर बस तुम सोचना मत, कर देना इतना! क्योंकि मर जाना सबसे आसान होता है। 


देखो! पढ़ाई या नौकरी छोड़कर जायेंगे भी कहाँ। कब तक भागेंगे यही ना? तो बस 2-3 महीने के लिए घर पर चले आओ सबसे पहले तो। और साला एक बात बताएं! जिंदगी में चाहें कितनी भी परेशानियां हो न अगर तुम्हारे पास 2-4 ढंग के दोस्त हैं न तो सब ठीक हो जाता है और अगर वो नही हैं न तो साला तुम आज तक जी ही नही रहे थे। तो फ़ोन करो उन्हें या जाओ उन ख़ास दोस्तों के पास और मन भर रो लो। जितना मन करे खुल के रो लो पहिले। ऐसा नही है कि एक बार रो देने भर से तुम्हारे सारे आँसू निकल जाएंगे या सारा दर्द। रोने का ये सिलसिला चलता रहेगा अभी कुछ दिनों तक पर यकीन करो बहुत कुछ हल्का हो जाएगा एक बार किसी के सामने खुल के रो लेने पर।


कुछ बहुत बुरा होने के बाद इससे पहले कि तुम खुद को शराब और सिगरेट में झोंकों उससे पहले ही मेडिटेशन की तरफ मुड़ जाओ। ऐसे बहुत से फ्री कोर्सेज हैं जो तुम्हें हफ्ते-दश दिन अपने पास रखेंगे और तुम्हारे अंदर बहुत कुछ सकारात्मक बदलाव ले आएंगे! तो उनको करो। फिर जब निकलो तो अगर पैसे-रुपये ना हों तो उधार लो दोस्तों से और निकल पड़ो किसी भी शहर में। यूँ ही भटकने को। किसी दिन पूरी दोपहरी किसी चौराहे पर पेड़ के नीचे बैठकर यूँ ही लोगों को आते जाते देखते हुए बिता दो। हाँ पता है यही कहोगे कि अकेलेपन में बुरी चीजें और भी याद आती हैं पर नही बे! जब तुम किसी दुपहरी को ऐसे बिता दोगे न तो देखोगे और खुद ही समझ पाओगे कि साला सच में दुनिया क्या है और क्या तमाशा चल रहा है यहाँ और यकीन मानो वो चीज़ बिना तुम्हारे खुद के अनुभव किए बिना नही आएगी और ना ही कोई समझा पाएगा तुम्हें।


साला ऐसे टाइम में सबसे ज्यादा जरूरत होती है प्यार की! पर कभी भी ऐसे बुरे वक्त में प्यार मत करना। क्योंकि इस वक़्त इंसान प्यार कम सहारा ज्यादा ढूंढ़ता है और ऐसे में तुम्हें तो सहारा मिल जाता है और अच्छा भी लगने लगता है पर कुछ समय बाद जब होश आता है तो पता चलता है कि तुम सामने वाले इंसान की फीलिंग्स के साथ पूरी तरह से न्याय नही कर पा रहे हो और कहीं न कहीं धोका दे रहे हो उसे और अगर उस वक्त तुम्हारा जमीर फिर से जाग गया! जो कि जागेगा ही क्योंकि अगर तुम्हारे अंदर अगर जमीर नही होता तो तुम्हारी ये कंडीशन ही नही होती, तो उस वक्त गुरु! तुम्हें मरने से कोई नही बचा नही बचा पाएगा। तो इन सब चूतियापे में मत पड़ना कि एक सब्स्टीट्यूट के सहारे तुम ठीक हो जाओगे। अगर सब्स्टीट्यूट वाले तुम होते न तुम्हारी इतनी गांd ही नही फटती कभी। 


बाकी तुम्हें अगर सेक्स चाहिए तो करो! और हो सके तो किसी ऐसे इंसान से करो जिसको तुम्हारी न बोली समझ आती हो न भाषा! इसका एक बड़ा फायदा ये होगा कि तुम्हारे अंदर के जज़्बात उसके साथ नही जुड़ पाएंगे न ही उस वक्त तुम्हारी एकतरफा कही बातों का कोई मतलब होगा। तो जाओ उसके पास और रोते हुए जो कुछ भी कहना चाहते थे किसी और से सब कह लो! और सेक्स करने के लिए हैं बहुत से लीगल जगहें तो इस बात का ख़ास ध्यान रखना कि इसके लिए किसी की फीलिंग्स के साथ मत खेलना कभी, किसी को नुकसान ना पहुंचाना। जो करना है करो, जितनी तकलीफें देनी हैं दो! लेकिन खुद को! पर बेटीचो* जिंदा रहो! बस कुछ दिन! साला अगर मर गए न झांt ये देखकर अफसोस करने को भी नही मिलेगा कि जिंदगी कितनी खूबसूरत थी। जो जाना चाहता है उसे जाने दो! जो गया उसे भूल जाओगे! सबको अपनी जिंदगी जीने का हक अपने हिसाब से है तो इस बात का रंDरोना मत रोओ कि मेरे साथ ऐसा क्यों किया या मेरे साथ वैसा क्यों किया। तुम्हारे साथ न कोई अच्छा कर सकता है और न कोई बुरा जब तक तुम न चाहो। बाकी जीने दो सबको खुशी-खुशी! फिर धीरे-धीरे देखोगे की कैसे साला जिंदगी मजे से पटरी पर चढने लगती है और फिर से फूल रफ्तार में भागना शुरू कर देती है। बस जिंदा रहना और कभी जरूरत हो तो बताना! लव गुरु खाली fm पर नही मिला करते 🖤


मलाल

किसी भी गरीब** की गरीबी का मजाक बनाने के बजाय उसकी **प्रतिभा** का उचित सम्मान करें। 😀

 एक **फटी धोती** और **फटी कमीज** पहने एक व्यक्ति अपनी **15-16 साल की बेटी** के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन्हें कुर्सी पर बैठते देख एक वेटर ने उनके सामने **दो गिलास साफ ठंडा पानी** रख दिया और पूछा, "आपके लिए क्या लाना है?" 💧


उस व्यक्ति ने कहा, "मैंने मेरी बेटी से वादा किया था कि यदि तुम **कक्षा दस में जिले में प्रथम** आओगी तो मैं तुम्हें शहर के सबसे बड़े होटल में एक **डोसा** खिलाऊंगा। इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक **डोसा** ले आओ।" 🥇🥘


वेटर ने पूछा, "आपके लिए क्या लाना है?" उसने कहा, "मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।" 💔


पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बताकर कहा, "मैं इन दोनों को भर पेट नाश्ता कराना चाहता हूँ। अभी मेरे पास पैसे नहीं हैं, इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलरी से काट लेना।" 🤝


मालिक ने कहा, "आज हम होटल की तरफ से इस होनहार बेटी की सफलता की **पार्टी** देंगे।" 🎉


होटलवालों ने एक **टेबल** को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहकों के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया। मालिक ने उन्हें एक बड़े थैले में **तीन डोसे** और पूरे मोहल्ले में बांटने के लिए **मिठाई** उपहार स्वरूप पैक करके दे दी। इतना **सम्मान** पाकर आंखों में **खुशी के आंसू** लिए वे अपने घर चले गए। 🎁😢


समय बीतता गया और एक दिन वही लड़की **I.A.S.** की परीक्षा पास कर उसी शहर में **कलेक्टर** बनकर आई। उसने सबसे पहले उसी होटल में एक सिपाही भेजकर कहलवाया कि **कलेक्टर साहिबा** नाश्ता करने आएंगी। होटल मालिक ने तुरन्त एक **टेबल** को अच्छी तरह से सजा दिया। यह खबर सुनते ही पूरा होटल ग्राहकों से भर गया। 🏛️👮‍♂️


कलेक्टर रूपी वही लड़की होटल में मुस्कराती हुई अपने माता-पिता के साथ पहुंची। सभी उसके सम्मान में खड़े हो गए। होटल के मालिक ने उन्हें **गुलदस्ता** भेंट किया और ऑर्डर के लिए निवेदन किया। 🌸🙇‍♂️


उस लड़की ने खड़े होकर होटल मालिक और उस वेटर के आगे **नतमस्तक** होकर कहा, "शायद आप दोनों ने मुझे पहचाना नहीं। मैं वही लड़की हूँ जिसके पिता के पास दूसरा **डोसा** लेने के पैसे नहीं थे और आप दोनों ने **मानवता की सच्ची मिसाल** पेश करते हुए, मेरे पास होने की खुशी में एक शानदार पार्टी दी थी और मेरे पूरे मोहल्ले के लिए भी मिठाई पैक करके दी थी।" 🥰🙏


"आज मैं आप दोनों की बदौलत ही **कलेक्टर** बनी हूँ। आप दोनों का **एहसान** मैं सदैव याद रखूंगी। आज यह **पार्टी** मेरी तरफ से है और उपस्थित सभी ग्राहकों एवं पूरे होटल स्टाफ का बिल मैं दूंगी। कल आप दोनों को '**श्रेष्ठ नागरिक**' का सम्मान एक नागरिक मंच पर किया जाएगा।" 🎖️👩‍💼


### **शिक्षा**

**किसी भी गरीब** की गरीबी का मजाक बनाने के बजाय उसकी **प्रतिभा** का उचित सम्मान करें। 😀

संस्कार.परिवार.प्रेम.जीवन

 शादी के कुछ महीने बाद, मैं यह सोचता था कि अगर मैं अपनी पत्नी की सभी ज़रूरतें पूरी कर दूं, तो ज़िन्दगी में कोई परेशानी नहीं आएगी। मेरे खुद के व्यापार के चलते, मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए थी जो स्मार्ट हो, मेरे काम में मेरा हाथ बंटा सके, और समाज में अच्छी तरह से मिलजुल सके। अंजली से मेरी शादी हुई, जो खूबसूरती और दिमाग, दोनों में बेमिसाल थी।


शुरुआत के तीन महीने शानदार थे। हमारे बीच जिस्मानी रिश्ते बहुत अच्छे थे, और मुझे लगा कि मैंने सही जीवनसाथी चुना है। मुझे विश्वास था कि एक सफल शादी के लिए शारीरिक सुख सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन धीरे-धीरे, सेक्स से भी मन हटने लगा और व्यापार के दबाव के कारण इस ओर ध्यान देने का समय भी कम हो गया।


लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब अंजली ने मुझसे कहा कि वह अपने माता-पिता से अलग एक फ्लैट में रहना चाहती है। मैंने चौंकते हुए पूछा, "क्यों? ऐसा क्या दिक्कत है यहाँ?"


अंजली ने जवाब दिया, "मुझे प्राइवेसी चाहिए। मम्मी-पापा के साथ रहते हुए वो संभव नहीं है।" मैंने कहा, "लेकिन अपना घर है, अपना कमरा है। जैसा मन करो, वैसे रहो।"


उसने बताया, "तुम्हें शायद यह आसान लगता है, लेकिन मुझे दिनभर सलवार-सूट में रहना पड़ता है, जबकि मैं शर्ट्स और टी-शर्ट में ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करती हूँ। मायके में पापा के सामने भी निक्कर और टी-शर्ट पहन सकती हूँ, लेकिन यहाँ मर्यादा का ख्याल रखना पड़ता है।"


मैंने सोचा, "बात तो सही कह रही है।" फिर मैंने मां-पापा से इस बारे में बात की। पापा को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन मां ने साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि बहू को उनके हिसाब से रहना होगा।


मैं दुविधा में पड़ गया—एक ओर मां, जिन्होंने मुझे जन्म दिया, और दूसरी ओर पत्नी, जिसके साथ पूरी ज़िन्दगी गुजारनी है। शादी को केवल आठ महीने हुए थे और अब यह सवाल उठने लगा था कि किसके साथ खड़ा रहूं।


इसी दौरान, मैंने एक दिन अंजली के फोन पर इंस्टाग्राम खोला और देखा कि वह रील्स देख रही थी। एक रील में बताया जा रहा था कि कैसे माता-पिता से अलग रहने से शादीशुदा जिंदगी बेहतर होती है। दूसरी रील में सास-ससुर के साथ रहने से महिलाओं की आजादी पर असर पड़ने की बात कही गई थी। मैंने तुरंत समझ लिया कि असली समस्या "प्राइवेसी" नहीं, बल्कि ये सोशल मीडिया क्रिएटर्स हैं जो ऐसे विचार फैला रहे हैं।


मैंने सोचा, भले ही ये बातें सही लग सकती हैं, लेकिन हमारे संस्कार और परिवार का महत्व इससे कहीं अधिक है। मैंने तय किया कि किसी भी कीमत पर मां-पापा को नहीं छोड़ूंगा। बल्कि अंजली को इस सोशल मीडिया के प्रभाव से दूर करना ज्यादा जरूरी है।


उस दिन के बाद से, मैंने अंजली को ऑफिस में अपने साथ लाना शुरू किया। जब भी वह रील देखती, मैं उसे कोई काम दे देता। ऑफिस में आए बड़े डॉक्टरों ने भी उसे बताया कि रील्स देखने से होने वाले नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं। धीरे-धीरे, अंजली ने रील्स देखना बंद कर दिया और "अलग घर" या "प्राइवेसी" की बातें भी खत्म हो गईं। 😊


अब जब कभी मैं उसे छेड़ता हूँ और कहता हूँ, "चलो, अलग घर ले लेते हैं, ताकि तुम आराम से छोटे कपड़े पहन सको," तो वह मुझे आंखें दिखाने लगती है। 😜


दोस्तों, यह समस्या सिर्फ मेरे घर में नहीं, बल्कि कई घरों में है। एक बार जरूर सोचिए कि यह मोबाइल और सोशल मीडिया अनजाने में हमारे परिवार और संस्कारों को तोड़ने का काम कर रहा है। ❤️


#संस्कार #परिवार #प्रेम #जीवन

वह पुरुष जो सचमुच तुमसे प्यार करता हैं

 #प्रेम_का_अंत


वह पुरुष जो सचमुच तुमसे प्यार करता हैं 

तुम्हें छोड़कर जानें का फैसला एक पल में नहीं करता, महीनों-सालो वह ख़ुद को समझाता हैं..

वह तुम्हारे याद में महिनों-सालों और बरसों तक

चेतना-शुन्य हों जाता हैं..


तुम्हें पाने के लिए वह इंतज़ार करता हैं की तुम कभी-न-कभी आओगी

पर उसका इंतज़ार तो एक कहानी 

बनकर रह जाता हैं..

कुछ पुरुष ख़ुद को सम्भलना और समझना सीख जाते है, सीख जाते हैं जीवन जिना..वह जानते है मेरे बुढे मां-बाप का सहारा मै ही हूं..


पर इन सब के बिच कुछ होते हैं ऐसे पुरुष जिन्हें तुम्हें पाना ही उनका आख़िरी मक़सद है 

अगर तुम मिल जाओ तो उनके लिए एवरेस्ट फतह होंगी...


तुम्हें उस दिन डरना चाहिए जिस दिन तुम्हारे प्रेम में पड़े 

किसी पुरुष को छोड़ कर हमेशा-हमेशा के लिए चली जाती हो..

ये वही पुरुष हैं जो तुमसे मिले प्रेम को अपने दिल में बसा लेते हैं ,और हमेशा-हमेशा के लिए दिल के दरवाज़े तुम्हारे लिए खुला रखतें हैं.. यह उसका अंतिम फैसला होता है , तुम्हें छोड़ कर जाने का, विद्रोही भीं नहीं होते, विद्रोह करने से पहले वह बार-बार तुम्हें एहसास कराते है कि' अब पहले जैसा प्रेम महसूस नहीं हो रहा हैं, प्रेम को कुछ वक्त दिया करो..


पर तुम उसे और उसकी बातों को लापरवाही से टाल देती हों, और एक दिन वह तमाम यादें और प्रेम समेट कर तुमसे दूर चला जाता है हमेशा-हमेशा के लिए..


तुम्हारे जिस प्रेम ने उसे कोमल और संतुलित बनाया था, तुम्हारा वही प्रेम उसे जीवन भर के लिए कठोर और निष्ठुर बना देता है..


हमेशा लापरवाह और अपनी मौज में रहने वाले पुरुष जो हमेशा उल्टी सीधी हरकते करते थे,

वो तुम्हारे प्रेम में आने के बाद बहुत बदल गये..


पर आज वही पुरुष जिसे तुमने छोड़ा है 

अपनी चाहतें अपना प्यार ,अपनी ख्वाहिशों की हत्या कर चुका है,जो वादा करता था अपने और तुम्हारे परिवार का हम सहारा बनेंगे 

आज बुढे मां बाप ख़ुद उसके सहारे बने हैं...


वह कभी बद्दुआ नहीं देता तुम्हें, पर वो मान लेता है की हमेशा-हमेशा के लिए तुम मर चुकी हो, हो चुका है अंत उसके प्यार का और बिना किसी से कहे, करवा लेता है अपना मुंडन, मिटा देता है दिल से हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारा नाम..


बस साथ रह जाती हैं कुछ यादें, जिसे महसूस करके हंसता या रो लेता है... ख़त्म हो जाती है उसकी दुनिया...जिसे वो दुनिया मान चुका था, 

वह वेवफा भी नहीं कह पाता है, क्योंकि तुम्हें अपना जो मान चुका था..❤️🥀

रिश्ते टूटते नहीं। बस रिश्ते दिल से होना चाहिए

 कोर्ट में पेपर पर आखिरी साइन होते ही वकील मुस्कुराया और बोला, “लो मैडम, अब आपका डिवोर्स हो गया है। कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये हर्जाने के तौ...