sunilrathod

Tuesday, 20 August 2024

ऐसी हवा फैलाने वाले हम ना बनें।

 एक सहेली ने दूसरी सहेली से पूछा:- बच्चा पैदा होने की खुशी में तुम्हारे पति ने तुम्हें क्या तोहफा दिया ?

सहेली ने कहा - कुछ भी नहीं!


उसने सवाल करते हुए पूछा कि क्या ये अच्छी बात है ? क्या उस की नज़र में तुम्हारी कोई कीमत नहीं ?


लफ्ज़ों का ये ज़हरीला बम गिरा कर वह सहेली दूसरी सहेली को अपनी फिक्र में छोड़कर चलती बनी।


थोड़ी देर बाद शाम के वक्त उसका पति घर आया और पत्नी का मुंह लटका हुआ पाया। फिर दोनों में झगड़ा हुआ।


एक दूसरे को लानतें भेजी। मारपीट हुई, और आखिर पति पत्नी में तलाक हो गया।


जानते हैं प्रॉब्लम की शुरुआत कहां से हुई ? उस फिजूल जुमले से जो उसका हालचाल जानने आई सहेली ने कहा था।


बिकास जी ने अपने जिगरी दोस्त पवन से पूछा:- तुम कहां काम करते हो?


मनोज जी- फला दुकान में।

बिकास जी - कितनी तनख्वाह देता है मालिक?

मनोज जी-18 हजार।


बिकास जी-18000 रुपये बस, तुम्हारी जिंदगी कैसे कटती है इतने पैसों में ?

मनोज जी- (गहरी सांस खींचते हुए)- बस यार क्या बताऊं।


मीटिंग खत्म हुई, कुछ दिनों के बाद मनोज जी अब अपने काम से बेरूखा हो गया। और तनख्वाह बढ़ाने की डिमांड कर दी।


जिसे मालिक ने रद्द कर दिया। पवन ने जॉब छोड़ दी और बेरोजगार हो गया। पहले उसके पास काम था अब काम नहीं रहा।


एक साहब ने एक शख्स से कहा जो अपने बेटे से अलग रहता था। तुम्हारा बेटा तुमसे बहुत कम मिलने आता है। क्या उसे तुमसे मोहब्बत नहीं रही?


बाप ने कहा बेटा ज्यादा व्यस्त रहता है, उसका काम का शेड्यूल बहुत सख्त है। उसके बीवी बच्चे हैं, उसे बहुत कम वक्त मिलता है।


पहला आदमी बोला- वाह!!


यह क्या बात हुई, तुमने उसे पाला-पोसा उसकी हर ख्वाहिश पूरी की, अब उसको बुढ़ापे में व्यस्तता की वजह से मिलने का वक्त नहीं मिलता है। तो यह ना मिलने का बहाना है


इस बातचीत के बाद बाप के दिल में बेटे के प्रति शंका पैदा हो गई। बेटा जब भी मिलने आता वो ये ही सोचता रहता कि उसके पास सबके लिए वक्त है सिवाय मेरे।


याद रखिए जुबान से निकले शब्द दूसरे पर बड़ा गहरा असर डाल देते हैं।। बेशक कुछ लोगों की जुबानों से शैतानी बोल निकलते हैं।


हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत से सवाल हमें बहुत मासूम लगते हैं।


जैसे-

तुमने यह क्यों नहीं खरीदा।

तुम्हारे पास यह क्यों नहीं है।


तुम इस शख्स के साथ पूरी जिंदगी कैसे चल सकती हो।

तुम उसे कैसे मान सकते हो।

वगैरा वगैरा।।


इस तरह के बेमतलबी फिजूल के सवाल नादानी में या बिना मकसद के हम पूछ बैठते हैं।


जबकि हम यह भूल जाते हैं कि हमारे ये सवाल सुनने वाले के दिल में नफरत या मोहब्बत का कौन सा बीज बो रहे हैं।।


आज के दौर में हमारे इर्द-गिर्द, समाज या घरों में जो टेंशन टाइट होती जा रही है, उनकी जड़ तक जाया जाए तो अक्सर उसके पीछे किसी और का हाथ होता है।


वो ये नहीं जानते कि नादानी में या जानबूझकर बोले जाने वाले जुमले किसी की ज़िंदगी को तबाह कर सकते हैं।

ऐसी हवा फैलाने वाले हम ना बनें।

अनीता रवि की शादी

 अनीता और रवि की शादी 22 अप्रैल 2005 को हुई थी। उस समय दोनों ही पढ़ाई कर रहे थे। दोनों परिवार एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे, इसलिए शादी भी सहमति से हुई। दो साल बाद अनीता की बैंक में नौकरी लग गई और इसी बीच उनके जीवन में एक बेटा, समीर (जिसे वे प्यार से "आर्यन" कहते थे), भी आ गया।


शुरुआत में, जब नौकरी और बच्चे की जिम्मेदारी एक साथ संभालना मुश्किल हो रहा था, तो रवि ने अनीता का पूरा साथ दिया। वह हमेशा कहता, "तुम बैंक जाओ, मैं आर्यन का ध्यान तुमसे भी बेहतर रखूंगा।" अनीता ने कई बार डे केयर की सलाह दी, लेकिन रवि ने किसी और के भरोसे अपने बेटे को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया।


समय बीतता गया और धीरे-धीरे रवि एक घरेलू पुरुष बन गए। अनीता की नौकरी और घर की जिम्मेदारियां हंसी-खुशी से चल रही थीं, लेकिन एक समस्या ने उनके जीवन में दरार डाल दी। अनीता के मायके वाले, खासकर उसका भाई अमन, बार-बार घर के मामलों में दखल देने लगे। कोई भी समान खरीदने से पहले अनीता के पास फोन आता, और अमन उसे पेमेंट करने के लिए कहता। अनीता बिना किसी सवाल के भुगतान कर देती थी, लेकिन रवि के लिए यह सब बर्दाश्त से बाहर हो गया।


रवि ने अनीता को समझाने की कई बार कोशिश की, लेकिन अनीता उसकी बातों को अनसुना कर देती, जैसे रावण ने मंदोदरी की सलाह को अनदेखा किया था। एक बार अनीता के पिता सुरेश ने फोन करके कहा, "बेटी, तुम्हारी माँ सविता तीज व्रत के लिए एक कान के बूंदे खरीदना चाहती हैं। वह 26 हजार का है, तुम पेमेंट कर दो।" अनीता ने बिना सोचे-समझे पेमेंट कर दी।


लेकिन इस बार रवि का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने कहा, "तुम्हारे लिए अमन का कहा ही सब कुछ है, मेरी बात की कोई कीमत नहीं। मैं चुप रहता हूँ, लेकिन अब और नहीं सह सकता। तुम्हारी माँ तीज व्रत में नया जेवर पहन सकती है, लेकिन मेरी माँ के पास एक नई साड़ी तक नहीं है। गलती मेरी है, मैंने घर संभाला और तुमने बाहर। हम एक होकर भी अलग हैं। अपनी माँ की तरह मेरी माँ का भी कभी ख्याल रख लिया करो।"


रवि की ये बातें अनीता को बहुत नागवार गुजरीं और उसने गुस्से में आकर अपने बेटे को लेकर मायके चली आई। वह वहीं से बैंक जाने लगी और दो साल तक उसने और रवि ने एक-दूसरे से कोई संपर्क नहीं किया।


एक रविवार को रवि अचानक अनीता के घर आया और बोला, "अनीता, घर चलो। नहीं तो मेरे माता-पिता मुझ पर दूसरी शादी का दबाव बना रहे हैं।" लेकिन अनीता नहीं मानी। रवि ने एक कड़वा सच कह दिया, "कहते हैं, महिलाएं अपने तेवर और जेवर संभाल कर रखती हैं। लेकिन तुम्हारे साथ ऐसा कुछ नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पास पैसा है।"


कुछ साल बाद, अनीता को पता चला कि रवि ने दूसरी शादी कर ली है। उसकी एक बेटी भी है और उसने एक राशन की दुकान खोल ली है। अब उसकी गृहस्थी खुशहाल है। इधर, अनीता के माता-पिता सुरेश और सविता स्वर्ग सिधार गए, और उसका भाई अमन मेरठ में अपने नए घर में बस गया।


अनीता का बेटा आर्यन, जो अब दसवीं की परीक्षा दे चुका था, अपने पिता से मिलने गया। वहां से उसने फोन करके कहा, "माँ, मैं यहां से ही ग्यारहवीं और बारहवीं करूंगा। यहाँ माँ है, बहन है, पापा हैं, दादा-दादी हैं।" अनीता गुस्से में बोली, "बेटा, वह तुम्हारी सौतेली माँ है।" बेटे ने मासूमियत से जवाब दिया, "माँ, सब सौतेली माँ बुरी नहीं होतीं।"


अनीता को अब एहसास हो चुका था कि पैसे का गरूर और खुद की अहमियत में डूबकर उसने अपने रिश्तों को नजरअंदाज किया। अब उसके पास सिर्फ यादें थीं, और जीवन के आकाश में खालीपन था। रिश्तों की गिरहें खुल गईं और अब बस वह अपने निर्णयों के साथ एक खाली जीवन जी रही थी, जिसमें पछतावा ही उसका साथी था।


अज्ञात सांभार

प्रेमिका और पत्नी के बीच का अंतर**

 **प्रेमिका और पत्नी के बीच का अंतर** 🤔


अक्सर पुरुषों के मन में यह सवाल आता है कि प्रेमिका इतनी प्यारी क्यों लगती है, जबकि पत्नी इतनी सख्त क्यों महसूस होती है। इसका कारण कुछ इस प्रकार है:


🌧️ **बारिश में प्रेमिका** को उधार की बाइक पर भी लॉन्ग ड्राइव पर ले जाने का जुनून होता है, भले ही जेब खाली हो। लेकिन, जब वही पुरुष शादी कर लेते हैं और आर्थिक रूप से संपन्न हो जाते हैं, तब **पत्नी के लिए** बारिश के वक्त सिर्फ चाय-पकौड़ी बनवाने का ही ख्याल आता है। अगर कभी थकी-हारी पत्नी मना कर दे, तो पुरुषों के अहंकार को इतनी ठेस लगती है कि सुबह तक गुस्से में रहते हैं। जबकि **प्रेमिका** के सामने 365 दिन भी गिड़गिड़ाने पर कुछ न मिले, तो इसे संस्कार मानकर उसके लिए और प्यार उमड़ता है और डबल मान-मनौव्वल करने में भी संकोच नहीं होता। 😅


🌳 **प्रेमिका को** सुंदर और महंगी जगहों जैसे गार्डन, रेस्टोरेंट, पब, रिसोर्ट में ले जाया जाता है। लेकिन शादी के बाद **पत्नी** को मंदिर, पूजा-पाठ, बीमार की सेवा, या श्रद्धांजलि सभा में लेकर जाना याद आता है। 🤷‍♂️


💃 **प्रेमिका** के हर अंग पर नज़र डालने में आँखें नहीं थकतीं, और उसके लिए शायराना तारीफों की कमी नहीं होती। लेकिन जब बात **पत्नी** की आती है, तो शिकायत होती है कि वह तैयार होने में इतना समय क्यों लगाती है। 🙄


📱 **प्रेमिका का फोन** 24 घंटे में 24 बार भी आए, तो वह केयरिंग लगता है। जबकि दिन में पत्नी के दो फोन भी इन्क्वायरी की तरह महसूस होते हैं। 🤦‍♂️


👵 **अपने माता-पिता की सेवा** करने का मन नहीं करता, लेकिन **पत्नी** से यही उम्मीद होती है कि वह 24 घंटे में से 48 घंटे पूरे परिवार की सेवा में गुजारे। यही तो अंतर है **पत्नी और प्रेमिका** में। 😊


यह अंतर यही दिखाता है कि जीवन में प्राथमिकताएं और नजरिए कैसे बदल जाते हैं।

मैंने पापा जी के इस फैसले को समझा

 सुबह के करीब 7 बजे थे, जब अचानक अमेरिका से भैया का वीडियो कॉल आया। मैं चौंक गई! मेरे भाई, जो आमतौर पर अपने काम की व्यस्तताओं में इतने उलझे रहते हैं कि मुश्किल से समय निकाल पाते हैं, आज खुद कॉल कर रहे थे। बिना देर किए मैंने कॉल उठाया और बोली, "नमस्ते भैया।"


भैया ने अपने चिर-परिचित अंदाज में थोड़ी उतावली के साथ जवाब दिया, "हाँ, ठीक है-ठीक है।" भैया और मेरे बीच करीब 12 साल का अंतर है, इसलिए वे आज भी मुझे बच्ची ही समझते हैं, जबकि मैं अब खुद दो बच्चों की मां बन चुकी हूँ। फिर भैया ने थोड़ी गंभीरता के साथ कहा, "तुमने कुछ सुना है कि नहीं? पापा जी उस नर्स से शादी करने जा रहे हैं जो मां के जाने के बाद से उनकी देखभाल कर रही है। मैं तो अभी आ नहीं सकता, लेकिन तुम ही उन्हें समझाओ। इस उम्र में ये सब क्या अच्छा लगता है?"


शायद पापा जी के पड़ोस में रहने वाले किसी अंकल ने उन्हें यह खबर दी थी। मैं भले ही छोटी हूँ, लेकिन पापा के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल मुझे बिल्कुल सही नहीं लगा, इसलिए मैंने भैया को डांट दिया। भैया ने तुरंत माफी मांगते हुए कहा, "अच्छा, सॉरी-सॉरी। पर पापा को समझाना ज़रूरी है। तुम्हारी बात तो सुनते हैं। मुझसे तो हमेशा नाराज़ रहते हैं।"


मैंने थोड़ी नाराजगी के साथ जवाब दिया, "अभी दो दिन पहले ही हमारी पापा से बात हुई थी। तब तो उन्होंने कुछ नहीं कहा। वीडियो कॉल पर बातें तो हो जाती हैं, पर बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हुई है। आज हम तीनों, मैं, मनोज और विकी पापा से मिलकर आते हैं। घर से उनका घर बस दो घंटे का रास्ता ही तो है। देखते हैं, मामला क्या है।"


हमने तुरंत पापा जी के घर जाने का फैसला किया। जब हम पहुंचे, तो मैंने आदतन उनके चरण स्पर्श किए और फिर उनके पास पलंग पर बैठ गई। कुछ इधर-उधर की बातें करके माहौल को थोड़ा हल्का किया। मुझे लगा कि पापा खुद ही अपनी बात कहेंगे, और ऐसा हुआ भी। पापा ने खुद ही विषय उठाया, "अंजू बेटी, मैं जो कहने जा रहा हूँ, उसे ध्यान से सुन। कल मैं कस्तूरी से, जो मेरी नर्स है, शादी करने वाला हूँ। लेकिन कुछ कहने से पहले मेरी बात पूरी सुन लो।"


पापा के इन शब्दों ने मुझे थोड़ी असहजता में डाल दिया, लेकिन मैं चुपचाप उनकी बात सुनने लगी। कुछ क्षणों के बाद उन्होंने गहरी सांस लेते हुए कहना शुरू किया, "बेटी, तेरी मां के जाने के बाद से, पिछले 15 वर्षों से कस्तूरी और उसकी बेटी दीपा ने मेरी तन-मन से सेवा की है। कस्तूरी विधवा है, और दीपा अभी पढ़ रही है। मैं अब 80 साल का हो चुका हूँ। यह नाज़ुक उम्र है, कभी भी बुलावा आ सकता है। कस्तूरी जिस प्राइवेट हॉस्पिटल में काम करती है, वहां उसे सिर्फ 9000 रुपये मिलते हैं। आज के समय में इतने पैसे में क्या होता है, तुम खुद ही समझ सकती हो।"


उन्होंने आगे कहा, "अब, मेरी पेंशन 50,000 रुपये है। अगर मैं कस्तूरी से शादी करता हूँ, तो मेरे बाद उसे आधी पेंशन यानी 25,000 रुपये मिल जाएगी। मैं चला जाऊंगा, पर उसका भला हो जाएगा। मैंने सब कुछ सोच-समझकर किया है। बाकी सब लिखा-पढ़ी वकील अंकल से मिलकर करवा दी है। उनसे मिलकर तुम लोग भी पुष्टि कर सकते हो। अब मैं चाहता हूँ कि तुम सभी खुश होकर और उदार हृदय से 'नई मां' का स्वागत करो।"


पापा जी की बातें सुनकर मैं अवाक् रह गई। उनके हर शब्द में एक गहरी सोच और मानवीयता थी, जिसे मैंने पहले नहीं देखा था। मुझे समझ में आया कि वे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि कस्तूरी और उसकी बेटी के भविष्य के लिए यह फैसला कर रहे थे। यह कोई भावनात्मक निर्णय नहीं था, बल्कि पूरी तरह से सोचा-समझा हुआ कदम था।


पापा के इस निर्णय ने मेरी सोच को झकझोर दिया। मुझे एहसास हुआ कि जीवन में कुछ फैसले दिल से भी लिए जाते हैं, जिनमें किसी की भलाई की सोच होती है। यह सिर्फ पापा का निर्णय नहीं था, यह एक पिता का अपने जीवन के अंतिम चरण में लिया गया सबसे बड़ा निर्णय था, जिसमें उन्होंने अपने साथ-साथ कस्तूरी और उसकी बेटी के भविष्य की भी चिंता की थी।


मैंने पापा जी के इस फैसले को समझा और स्वीकार किया। मैंने सिर झुकाकर उन्हें सम्मान दिया और मन ही मन फैसला किया कि इस नई शुरुआत में हम सब साथ खड़े रहेंगे। आज, मैंने अपने पिता की सोच और उनके दिल की गहराई को समझा। यह मेरी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जो मुझे हमेशा याद रहेगा।

सोने का अंडा देने वाली मुर्गी मेरे हाथ से फिसल गई

 सोने का अंडा देने वाली मुर्गी मेरे हाथ से फिसल गई 😢💔


मैं, संदीप, पुणे का रहने वाला एक साधारण युवक था। मेरी जिंदगी तब तक सामान्य गति से चल रही थी, जब तक कि मेरी मुलाकात एक महिला, स्नेहा, से नहीं हुई। स्नेहा, जोकि एक अकेली और आत्मनिर्भर महिला थी, ने मेरे जीवन में एक नया मोड़ ला दिया। हम दोनों ने पहली बार एक कॉफी शॉप में मुलाकात की थी, और जल्दी ही हमारी दोस्ती गहरी हो गई।


स्नेहा का व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक था। उसकी बातें सुनकर मेरे दिल में एक खास जगह बनने लगी थी। हम जल्दी ही अच्छे दोस्त बन गए और अक्सर मिलने लगे। मैं उसके घर भी जाने लगा, और वह मेरी बातों और संगत में आनंद महसूस करती थी।


धीरे-धीरे हमारी दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि हमारे बीच शारीरिक संबंध भी बन गए। स्नेहा ने मुझे हमेशा अपने पास बुलाना शुरू कर दिया, और हर बार हमारे बीच कुछ न कुछ नया होता रहा। वह मुझे अक्सर आर्थिक रूप से भी मदद करती थी, जिसे मैं उस समय सामान्य समझता था। यह सिलसिला करीब दो साल तक चलता रहा।


एक दिन, स्नेहा ने अपनी एक खास इच्छा जाहिर की। उसने मुझे बताया कि वह एक नए अनुभव की तलाश में है और चाहती है कि हम दोनों के साथ एक और व्यक्ति हो। मुझे यह सुनकर थोड़ा अजीब लगा, लेकिन उसने मुझे किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढने को कहा जिस पर मैं भरोसा कर सकूं।


मेरा एक पुराना दोस्त, अनीश, जो मेरे काफी करीब था, मुझे तुरंत याद आया। मैंने उसे इस प्रस्ताव के बारे में बताया और वह इसके लिए तैयार हो गया। हम दोनों ने योजना बनाई और एक दिन हम तीनों, स्नेहा के घर पर मिले। उस रात हमने साथ में समय बिताया, और स्नेहा की इच्छाओं को पूरा किया।


मेरे लिए सब कुछ ठीक था, लेकिन जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि सब कुछ बदल गया है। उस घटना के बाद, स्नेहा ने मुझसे बात करना कम कर दिया। उसने मेरा फोन उठाना बंद कर दिया और जब भी मैं उसके घर जाता, वह मुझे देखकर ठंडी प्रतिक्रिया देती। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह सब क्यों हो रहा है।


कुछ दिन बाद, मैं और अनीश एक कैफे में बैठे हुए थे। बातचीत के दौरान, अनीश ने अचानक मुझे धन्यवाद दिया। मैंने हैरानी से पूछा, "धन्यवाद किस बात का?"


अनीश ने मुस्कुराते हुए कहा, "संदीप, तुमने जो स्नेहा से मिलवाया, उसके लिए धन्यवाद! अब वह मुझे रोज बुलाती है, और हम दोनों का समय बहुत अच्छा बीतता है। साथ ही, वह मुझे पैसे भी देती है।"


अनीश की बात सुनकर मेरे दिल में एक अजीब सा दर्द हुआ। मुझे समझ में आ गया था कि स्नेहा ने मुझे छोड़ दिया है क्योंकि उसे मुझसे बेहतर विकल्प मिल गया था।


वह दिन मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सबक बन गया। मैंने अपनी ही गलती से सब कुछ खो दिया। अगर मैंने उस दिन अनीश को स्नेहा से मिलवाने का फैसला नहीं किया होता, तो शायद आज भी सब कुछ मेरे पास होता।


स्नेहा अब मेरी जिंदगी से बाहर जा चुकी थी, और मैं खुद को बेहद अकेला महसूस करने लगा था।


इस कहानी से यह सीखने को मिलता है कि रिश्तों में भरोसा और समझदारी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। किसी भी निर्णय को लेने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचने की जरूरत होती है, क्योंकि एक छोटी सी गलती हमारी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती है।

मैं अभी भी उस जीवनसाथी की तलाश में हूँ जो मुझे मेरी कमियों के साथ स्वीकार कर सके

 नीलम दुविधा में फँस गई कि वेटिंग रूम से उठकर इंटरव्यू के लिए अंदर जाए या नहीं? उसने राकेश को उसी कमरे में जाते देखा था जहाँ नौकरी चाहनेवालों का साक्षात्कार चल रहा था। नीलम के मन में कई विचार उथल-पुथल मचा रहे थे।


कुछ साल पहले की बात है, नीलम एक प्रतिष्ठित कंपनी में अच्छी खासी तनख्वाह पर काम करती थी। उसके और राकेश के रिश्ते की बात चली थी। दोनों एक-दूसरे से मिले भी थे। लेकिन नीलम ने यह कहकर शादी से इनकार कर दिया था कि राकेश का वेतन उससे कम था। उस वक्त उसे लगा था कि एक ऐसी जिंदगी चाहिए जिसमें उसका जीवनसाथी उससे अधिक कमा सके, ताकि उसे समाज में गर्व महसूस हो।


लेकिन समय ने ऐसा मोड़ लिया कि नीलम की कंपनी में छँटनी हो गई और वह भी इस चपेट में आ गई। अब वह दूसरी नौकरी के लिए संघर्ष कर रही थी। इस इंटरव्यू में आकर पता चला कि जिस कंपनी में वह जॉब के लिए आई थी, राकेश उसी कंपनी में काम करता था और इंटरव्यू लेनेवाली टीम में शामिल था। एकबारगी नीलम के मन में आया कि राकेश के सामने अपनी बेइज्जती कराने से बेहतर है कि वह वापस चली जाए, लेकिन नौकरी की जरूरत ने उसे वहां रुकने पर मजबूर कर दिया।


अपनी बारी आने पर वह इंटरव्यू कमेटी के सामने बैठी। टीम के सदस्य सवाल पूछ रहे थे, और नीलम ने उन्हें अच्छे से जवाब दिए। तभी राकेश ने सीधे उसपर सवाल दागा, "आप हमारे पैकेज पर काम करने के लिए तैयार हैं?"


राकेश के इस सवाल ने मानो नीलम की दुखती रग पर हाथ रख दिया। उसने पुरानी बातों को याद करते हुए अपने मन में उठी कड़वाहट को दबाया और सधे हुए स्वर में जवाब दिया, "जी, मैं तैयार हूँ। पैकेज तो योग्यता पर भी निर्भर करता है। मुझे एक मौका दीजिए, मैं खुद को साबित करने की पूरी कोशिश करूँगी।"


राकेश के कारण नीलम को नौकरी मिल गई, लेकिन उसे यह समझ में आ गया था कि यह नौकरी उसके पुराने निर्णय का परिणाम भी हो सकती है। संयोगवश उसे राकेश की टीम में काम करने का मौका मिला, और वह उसकी अधीनस्थ बन गई।


पहले ही दिन, राकेश ने उससे सीधे सवाल किया, "मेरे साथ काम करने में कोई संकोच तो नहीं? वैसे अब तो मेरा पैकेज भी आपसे ज्यादा है।"


नीलम ने थोड़ी देर सोचा, फिर हिम्मत बटोरकर बोली, "आप पुरानी बातों को नहीं भूले हैं। तब से आज तक बहुत कुछ बदल गया है। मुझे अपनी गलती का एहसास हो चुका है। महिलाओं की बराबरी की चाहे कितनी भी बातें की जाएं, लेकिन जब मौका आता है, तो हम खुद ही पीछे हट जाते हैं। मैं उस वक्त ऐसे जीवनसाथी की तलाश में थी जो मुझसे अधिक कमा सके और उम्र में मुझसे बड़ा हो। लेकिन आज मुझे समझ में आ गया है कि यह सोच गलत थी। आखिर क्यों जरूरी है कि पति उम्र में बड़ा हो और ज्यादा कमाता हो? क्यों स्त्रियां खुद को पुरुषों से कमतर समझें?"


राकेश, जो इतनी साफगोई की उम्मीद नहीं कर रहा था, थोड़ी देर चुप रहा, फिर धीरे से बोला, "मैं अभी भी उस जीवनसाथी की तलाश में हूँ जो मुझे मेरी कमियों के साथ स्वीकार कर सके। वैसे बता दूं, अगर उस दिन आपने मुझसे शादी से मना नहीं किया होता, तो शायद मैं आज यहाँ नहीं होता। और हाँ, आपके रेज़्यूमे से पता चला कि आप अभी भी सिंगल हैं। क्या हम आज रात डिनर पर चल सकते हैं?"


नीलम ने मुस्कुराते हुए कहा, "शायद यह हमारे लिए दूसरा मौका है।"


क्या नीलम का जवाब बताने की जरूरत है? शायद नहीं, क्योंकि कभी-कभी जिंदगी हमें दूसरा मौका देती है, और यह सिर्फ हम पर निर्भर करता है कि हम उसे कैसे अपनाते हैं।

बहन बेटियाँ , सावधान

 बहन बेटियाँ , सावधान


जब कोई रिश्तेदार मामा, चाचा, ताऊ, फूफा, मौसा पड़ोसी, कज़िन भैया आदि प्रकार का रिश्ता किनारे रख कर तुमसे कहने लगे "रिश्ते अपनी जगह ,पर मैं तो तुम्हें अपनी फ्रेंड मानता हूँ।

तुम एक मॉर्डन गर्ल हो आज के ज़माने की तो पुराने टाइप के रिश्ते मत मानो।


"तो अपने माता पिता भाई को बता दो" क्योंकि उनकी नियत में खोट है।


फेसबुक के फ्रेंड किसी फ्रेंडशिप के प्रतीक नहीं हैं । फेसबुक फ्रेंड मतलब फालतू के फ्रेंड, सिर्फ ऑनलाइन हैं ये, 

इनसे जिंदगी पर तब तक कोई फर्क नही जबतक असल जिंदगी में न मिलो।।।

अतः फेसबुक पर उनकी फ्रेंड रिक्वेस्ट को संदेह से न देखो....

पर इनबॉक्स और व्हाट्सअप में वीडियो कोटेशन शेयर करने लगें तो सावधान।


पुरुषों के हथकंडे -

वे तुमसे ऐसे बातें करेंगे कि दर्द आंखों से छलक पड़े

स्वयं को अपनी पत्नी के पिछड़ेपन से त्रस्त दिखाएंगे 

खुद हैंडसम बने रह कर जताएंगे कि बहुत पुराने विचारों की पत्नी मिली है,दर्द किससे कहे...

  

तुम अगर कह बैठी कि मुझसे कहिये, मै हूँ न तो बस तुम्हारा जीवन उनके हवाले हो गया।


पत्नी को बीमार बता सकते हैं

पत्नी के अवैध संबंधों की झूठी बात बता कर सहानुभूति लूटेंगे..


तुम्हें सुंदर और इंटेलीजेंट बता कर काबू करेंगे,

तुम में उन्हें अचानक ऐश्वर्या, सानिया, कल्पना चावला दिखने लगेगी।

तुम्हारी मम्मी - पापा की ज़्यादा केअर शुरू करेंगे,


तुम्हें वो गिफ्ट करना शुरू करेंगे जो पापा नहीं दे सकते 

कोई कुछ कहेगा भी नहीं 

उनसे रिश्ता ही ऐसा है अचानक गिफ्ट बढ़ जाएं

कपड़े ज़्यादा प्राप्त होने लगें घर आना जाना बढ़ जाये

तुम्हें एग्जाम दिलाने वे स्वयं जाने लगे।


सावधान


कोई पुरुष रिश्ते की आड़ में तुम्हें लूटने की तैयारी में है।

अच्छी नियत वाले भी अलग दिख जाते हैं, सबसे सुरक्षित रहें।।।

माँ - बाप, सगे भाई- बहन के अलावा कोई हितैषी नही!!...

कॉपी पेस्ट शेयर जरूर करें।।

जय मातृशक्ति 🚩🚩

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...