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Thursday, 15 August 2024

विरह में सिर्फ स्त्रियां ही नहीं सूखती सूख जाते हैं पुरुष भी

 विरह में सिर्फ स्त्रियां ही नहीं सूखती

सूख जाते हैं पुरुष भी

होंठ पर पड़ जाती हैं पपड़ियां

लटक जाते हैं गाल

झाड़ियों सी फैलती है दाढ़ी

नहीं सुहाती रंगीन कमीज़ें

आंखों में समा जाता अथाह पीलापन

अनगिनत काली रातों में

जलती हैं ख़ाली आंखें

जलाता है सूरज, बुझ जाती है सुबह

बंजर हो जाती है छाती

जम जाता है हृदय का महासागर

हांथों में नहीं बचता स्पर्श का एहसास

लकीरें काटने को दौड़ती हैं

शिथिल बोझिल सा हो जाता है शरीर

निकल नहीं पाता कोई गुबार मुख से

सुप्त हो जाता है मन का लावा

पसर जाती है सीलन दिलों दीवार पर

वीरान मरुस्थल सा हो जाता है मन

जिनमे रेंगता है मौन ही मौन

 उगते रहते हैं असंख्य कांटें

वे फूंकते हैं धुआं, खुद धुआं हो जाने तक

बटुए में तस्वीर के रिक्त स्थान को 

निहारते हैं, सोचते हैं 

फिर बंद कर देते हैं...

सहेजते हैं वे भी प्रेम के अवशेष

उनके आंसू सुप्त जल स्त्रोत की

तरह होते हैं

रोते हैं पर दिखते नहीं आंसू

पत्थर हो जाता है तकिया

धंस जाता है बिस्तर का गद्दा

एक टक ताकते रहते हैं कमरे

में ऊपर चलते पंखे को गोल गोल 

और समाहित हो जातें है भीतरी भंवर में

प्रेम के अभाव में सिर्फ स्त्रियां ही नहीं मरती 

मर जाते हैं पुरुष भी....

समय से शादी कीजिए बच्चा पैदा कीजिए,

 22 साल की उम्र में जब शरीर का यौवन उफान मारता है

तो इस उम्र में सभी लड़कियों का मन होता है शादी करने का अपने पति के साथ आलिंगन होने का क्यों की शरीर के हार्मोन हमे संकेत देते हैं की हमारा शरीर अब शारीरिक संभोग के लिए तैयार है

ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी होता था, हर एक नए लड़के में अपना जीवनसाथी तलाशती अपने सुहागरात के सपने दिन में देखती इसका ये मतलब कभी नहीं होता की मैं कैरेक्टर less हूं हर महिला उमर के इस पड़ाव पर अपने शरीर में ये बदलाव महसूस करती है

लेकिन ऑफिस के काम की वजह से शादी नही हो रही थी या यूं बोले तो मुझे नशा था की पहले करियर सेट करना है उसके बाद कुछ और

23 साल में मेरी दादी मां मेरे ऊपर जोर डालने लगी की बिट्टी की शादी जल्दी करो नही तो मैं मर जाऊंगी मरने से पहले मैं चाहती हूं की अपने दामाद को देख लूं

लेकिन मैं करियर को लेके ज्यादा सीरियस थी ऐसे करते करते उम्र कब 28 साल पहुंच गई पता ही नहीं चला

अब मेरी मां भी शादी के लिए जोर डालती, और बोलती बुढ़ापे में घर बसाओगी क्या, तो मैं उनसे झगड़ती की अभी मेरी उम्र क्या है 28 साल कोई उम्र होती है

असल में इसका कारण एक था आए दिन बड़ी बड़ी हीरोइन की रील देखती सोशल मीडिया पे एक नई वीडियो देखती जिसमे वो बोलती की शादी तभी करो जब तुम मानसिक तौर पर तैयार हो और ये बातें इतनी ज्यादा दिमाग में घुसी की मुझे भी यही लगा की पहले करियर बाद में सब कुछ

ऐसे ही मेरी उम्र 31 साल हुई, और मुझे पीरियड्स में काफी दिक्कत आने लगी जैसे ब्लीडिंग में दर्द होना, फ्लो ज्यादा होना

जब डॉक्टर के पास गई तो उन्होंने ने भी दवाई दी और बोला शादी सही उम्र में करो नही तो बच्चे पैदा होने में दिक्कत होगी

जब घर आई और इसके बारे में इंटरनेट पर देखा तो तो पाया की बड़ी बड़ी एक्ट्रेस egg freez कराती हैं

जिसमे मेरे भ्रुड से अंडा निकाल कर उसे कई सालो के लिए फ्रिज कर दिया जाएगा, और जब भी मैं मां बनना चाहूं तो इस egg ka इस्तेमाल कर सकती हूं

एक बार फिर फिल्मी और इंटरनेट का अधूरा ज्ञान प्राप्त कर के मैं खुश थी

लेकिन अब मुझे भी लग रहा था या तो #eggfreez Kara लिया जाए या शादी की जाए

तो मुंबई के एक बड़े अस्पताल गई dr से बात किया तो पता चला egg की क्वालिटी 25 से 27 तक सबसे अच्छी होती है, आप खुद अभी 31 की है जिसमे egg ki quality गिर चुकी है

जिसे सुनकर बुरा लगा लेकिन उससे भी बुरा ये जानकर लगा की egg freez करने के लिए हर महीने मुझे 30000 देने होंगे ये सुनकर मेरी हालत खराब

मुझे एहसास हुआ की शादी और परिवार बसाने की उम्र अब निकल चुकी है

मैने लड़का देखना शुरू किया और 33 साल की उम्र में एक 36 साल के आदमी से मेरी शादी हुई

लेकिन आज शादी को 4 साल हो गए हैं लेकिन मां बाप बनने का सुख अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है

अब मुझे दादी की वो बात याद आती है जब वो बोला करती थी की शादी कर लो नही तो बहुत देर हो जाएगी

जिस करियर को सेटअप करने के लिए इतने साल का इंतजार किया और पैसे कमाए वो अब हमारी ट्रीटमेंट और हजार तरह के टेस्ट में जा रहे है

मैं उन सभी लड़के और लड़कियों को ये बोलना चाहती हूं। करियर बाद में भी बनता है

आप किसी इंसान के साथ हैं तो प्यार उनसे भी हो जाता है

हमारा शरीर के लिए हर चीज का समय डिसाइड है जैसे पहली महावारी 12 साल में आना और 50 में खत्म होना

वैसे ही बच्चे पैदा करने का भी एक समय है सारी चीज समय के साथ फिर प्राप्त की जा सकती है लेकिन समय दुबारा प्राप्त नहीं किया जा सकता

और ना आप की उम्र दुबारा कम की जा सकती है

एक्ट्रेस हीरोइन और टीवी पे आने वाली 55 साल की अदाकारा को देख कर अपने जीवन का फैसला कभी ना लें क्यों की ये पैसे के दम पर जवान दिखते हैं

पैसे के दम पर दूसरे की कोख किराए पर लेके अपने बच्चे उनके कोख में पैदा करवाते हैं

ये साधारण लोगो के लिए एक #ब्रेनवाश का काम करते हैं जिसे हमारी जैसी लड़किया देख कर अपना शरीर और समय दोनों बर्बाद करती है,

समय से शादी कीजिए बच्चा पैदा कीजिए, क्योंकि समय रहते आप नही सचेत होंगे तो सारी जिंदगी सिर्फ पछतावा होगा और कुछ नहीं..।।

माँ के बलिदानों को हमेशा याद रखना चाहिए, उन्हें कभी भी बोझ नहीं समझना चाहिए

 दिनभर की थकान से चूर वह स्त्री जैसे ही झुग्गी में दाखिल हुई, उसके सामने बैठे उसके शराबी पति ने जोर से आवाज दी, "आ गई? चल जल्दी से २० रुपए निकाल, तीन दिन से गला सूखा पड़ा है।"


स्त्री ने बिना कुछ कहे पानी पीने के लिए कदम बढ़ाए ही थे कि फिर से पति की कर्कश आवाज गूंजी, "साली, सुनती नहीं है? जल्दी कर!"


स्त्री ने शांत स्वर में जवाब दिया, "पैसे नहीं हैं मेरे पास।"


पति का चेहरा क्रोध से लाल हो गया। वह बोला, "झूठ बोलती है! सारा दिन बाहर रही और कहती है पैसे नहीं हैं। अच्छा, १० ही दे दे, किसी से दो घूंट लेकर पी लूंगा।"

स्त्री ने फिर से वही बात दोहराई, "कहा ना, काम नहीं मिला आज।"

यह सुनते ही शराबी पति का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उसकी मर्दानगी को जैसे किसी ने चुनौती दे दी हो। वह उठा और अंदर का क्रूर इंसान जाग उठा। बिना सोचे-समझे, वह औरत पर लात-घूंसों की बौछार करने लगा। वह गालियाँ बकता रहा, उसे पीटता रहा, और वह बेचारी चुपचाप मार खाती रही।

इस पूरे घटनाक्रम को चारपाई के नीचे छुपा उसका पाँच वर्ष का बेटा सिसकते हुए देख रहा था। उसकी मासूम आँखों में डर और असहायता की गहरी छाप थी।

स्त्री मार खाती-खाती सोच रही थी, उसकी माँ हमेशा कहती थी कि पति परमेश्वर होता है। उसका घर ही तेरा घर है। मायके से लड़की डोली में जाती है और ससुराल से अर्थी पर। उसने कितनी बार सोचा कि इस दुख और पीड़ा से मर ही जाए, पर बेटे के लिए जीना है, इसलिए हर बार अपने आपको संभाल लेती थी।

चार-पाँच घंटे तक पीटने के बाद जब उसका शराबी पति थक गया, तो बड़बड़ाता हुआ सो गया। वह रातभर दर्द और आँसुओं में डूबी रही, अपनी किस्मत को कोसती रही। सुबह जब सूरज की किरणें झुग्गी के अंदर आईं, तो उसका बेटा धीरे से उसके पास आकर बोला, "माँ, मैं आज स्कूल नहीं जाऊँगा। सबने अपनी फीस जमा कर दी है, मुझे छोड़कर। कल मास्टर जी ने मुझे मुर्गा बनाया था, आज छड़ी से मारेंगे।"

माँ ने अपने बेटे की दुखभरी आँखों को देखा और उसका दर्द महसूस किया। उसने अपने पेटी कोट के घेरे से २० रुपए निकालते हुए कहा, "मेरे लाल, तू स्कूल में ना पीटे, इसलिए तेरी माँ रातभर पिटती रही। ये ले, अपनी फीस जमा कर दे।"

बेटे की आँखें खुशी से चमक उठीं। उसने रोती माँ के आँसू पोछते हुए कहा, "माँ, जब मैं पढ़-लिखकर बड़ा हो जाऊँगा ना, तब कभी तेरी आँखों में आँसू नहीं आने दूँगा।"

माँ ने अपने बेटे को गले से लगा लिया, आँसुओं में डूबे उस क्षण में भी उसने एक उम्मीद की किरण देखी।

दोस्तों, यह कहानी केवल एक माँ की नहीं है, बल्कि दुनिया की हर माँ की है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर तरह के दुख और दर्द को सहन करती है। वह दिन-रात मेहनत करती है, केवल इस उम्मीद में कि उसका बच्चा बड़ा होकर एक सफल और खुशहाल व्यक्ति बने।

लेकिन अफसोस, कुछ बच्चे बड़े होकर अपनी माँ के किए बलिदानों को भूल जाते हैं। वे यह सोचने लगते हैं कि वे अपनी माँ को पाल रहे हैं, जबकि सच तो यह है कि वही माँ उनकी जिंदगी की नींव रखती है। उन्होंने उन्हें नौ महीने अपनी कोख में रखा, तीन साल तक सीने से चिपकाए रखा, और जिंदगी भर अपने दिल में जगह दी। अगर वह माँ न होती, तो शायद उनका अस्तित्व भी न होता।

इसलिए, हमें अपनी माँ के बलिदानों को हमेशा याद रखना चाहिए, उन्हें कभी भी बोझ नहीं समझना चाहिए। वे ही हमारे जीवन का असली आधार हैं। उनके प्रेम और त्याग का सम्मान करना ही हमारी सच्ची जिम्मेदारी है।

जीवन साथी सम्भोग साथी होते हैं पर सम्भोग साथी जीवन साथी नहीं..

 जीवन साथी सम्भोग साथी होते हैं पर सम्भोग साथी जीवन साथी नहीं... 🚫❤️


आज की नई लड़कियों और लड़कों को मैं यह बताना चाहती हूं। हमारे समाज में सामान्यत: जीवन साथी ही सम्भोग साथी होते हैं, पर इन दिनों मैं देख रही हूं कि एकल स्त्रियां, विवाह विच्छेद स्त्रियां और कई बार विवाहिता स्त्रियां भी ऐसे पुरुषों के साथ इन्वॉल्व हो रही हैं जो पहले से विवाहिता हैं और जिनका अपना घर-परिवार है। 😔


सेक्स के साथ ये स्त्रियां इमोशनली भी ऐसे पुरुषों से जुड़ जाती हैं और उन पर भरोसा भी कर बैठती हैं कि इन दोनों के बीच का रिश्ता सिर्फ़ इन दोनों तक है, किसी तीसरे को इसके बारे में ज़रा भी भनक नहीं लगेगी। 💔


पर रुकना मेरी जान, यहीं तुम शातिर पुरुष से मात खा जाती हो। जो अपनी बीवी-बच्चों को धोखे में रखकर तुम्हारे साथ होने का नाटक कर रहा हो, वो तुम्हारा कभी नहीं हो सकता। तुम्हें नहीं पता वो कहां-कहां, किसके-किसके बीच बैठकर तुम्हारे चरित्र का चीरहरण कर रहा है और बेशरम होकर तुम्हें मात्र ट्रॉफी की तरह देख रहा है। 😡

वो खुद को इतना कूल समझ रहा है कि बीवी होने के बाद भी कोई दूसरी स्त्री उस पर फ़िदा है। तुम उस पर भरोसा कर उस पर खुद को लुटाए जा रही हो और वो लुटेरा बनकर तुम्हारे शरीर और मन दोनों से खेल रहा है। साल दो साल, दस साल बाद भी वह अपने परिवार के साथ ही रहेगा। सारे गुनाह के बाद भी उसकी मां, बीवी, बच्चे सब उसे अपना लेंगे और बुरी होगी सिर्फ़ तुम। 🤯

क्योंकि ऐसे मामले में परिवार की नज़र में पुरुष बेचारा होता है, जिसे महिला ने अपने प्रेम जाल में फांस लिया था। तुम एक बार फिर से टूटे हुए मन से बुरे रिश्तों का मातम मनाती रह जाओगी। इसलिए ज़रा संभालो खुद को, एक आग की लपट से बचने के लिए दूसरे आग के कुएं में मत कूदो। 🔥

**समझदारी से काम लो और अपने आप को ऐसे धोखेबाजों से बचाओ।** 🚨

आपकी इस कहानी से क्या सीख मिली? कमेंट करके जरूर बताइएगा। 😊✨

Tuesday, 13 August 2024

शादी के बाद इसकी गहराई का एहसास हुआ।

 " जवान स्त्री का संभोग उसके मन से शुरू होता है, जबकि पुरुष का उसके जननांग से।" यह एक ऐसा वाक्य था, जिसे मैं तब पूरी तरह से नहीं समझ पाई थी, लेकिन शादी के बाद इसकी गहराई का एहसास हुआ।


मेरी शादी अक्षय से तय हुई थी। उनके परिवार के लोग मुझे देखने के लिए मंदिर आए थे। मैं उन लड़कियों में से थी जो ज्यादा बाहर नहीं निकलती थीं, और मेरी कोई खास सहेलियां भी नहीं थीं। जब अक्षय से मुलाकात हुई, तो हमारी बातचीत बहुत ही औपचारिक थी। उन्होंने अपने माता-पिता पर भरोसा किया और कहा कि अगर उन्हें लड़की ठीक लगती है, तो वह भी मान जाएंगे। मैंने भी अपने माता-पिता से कहा, "जो आपको सही लगे, वही ठीक है।"


शादी से पहले हमारी थोड़ी बहुत बातचीत शुरू हुई, लेकिन जल्दी ही हमारी बातें शारीरिक संबंधों की ओर मुड़ गईं। मैंने अक्षय की बातों में हां मिलाई, लेकिन अंदर ही अंदर घबराई हुई थी। मुझे नहीं पता था कि शादी के बाद के जीवन को कैसे संभालूंगी।


शादी के बाद, सुहागरात के दिन अक्षय ने मुझे छूने की कोशिश की, लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं थी। मैंने उन्हें समय देने के लिए कहा। यह मेरे लिए भी शर्मिंदगी की बात थी, लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि बिना मन के कुछ भी करूं।


सप्ताह बीतते-बीतते अक्षय का व्यवहार मेरे प्रति रूखा हो गया। मुझे पता था कि इसका कारण क्या है, लेकिन यह समझ नहीं आ रहा था कि इसे कैसे ठीक किया जाए। मेरी सास, नीरा आंटी, ने मेरी हालत देखकर मुझसे पूछा कि सब ठीक है या नहीं। पहले तो मैंने कहा कि सब ठीक है, लेकिन फिर अपने आंसू रोक नहीं पाई और उन्हें सच्चाई बता दी।


नीरा आंटी ने मुझे समझाया कि शारीरिक संबंध एक विवाह के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और यह एक पति को यह विश्वास दिलाता है कि उसकी पत्नी पूरी तरह से उसकी है। उन्होंने मुझे जबरदस्ती न करने की सलाह दी, लेकिन यह भी कहा कि अच्छे वैवाहिक संबंधों के लिए शारीरिक सुख का योगदान बहुत अहम होता है।


मेरी ननद, अनुष्का, और जीजा, विक्रम, ने भी अक्षय से बात की और उन्हें समझाया कि एक स्त्री के लिए शारीरिक संबंध का मतलब केवल शारीरिकता नहीं होता, यह उसके मन से शुरू होता है। अक्षय ने धीरे-धीरे मेरे साथ और समय बिताना शुरू किया, और हम दोस्त बनने लगे।


धीरे-धीरे, हम दोनों के बीच की दूरी मिट गई, और कब हम दो जिस्म एक जान बन गए, हमें पता ही नहीं चला। सेक्स के प्रति मेरी सारी अरुचि खत्म हो गई थी, और अक्षय को भी यह समझ में आ गया था कि एक स्त्री के लिए संभोग सिर्फ शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि मन से जुड़ी प्रक्रिया है।

अगर नीरा आंटी, अनुष्का, और विक्रम नहीं होते, तो शायद हमारी शादी इतनी आसानी से नहीं चल पाती। परिवार का सहारा और मार्गदर्शन हमें सही दिशा में लेकर गया। आजकल लोग ऐसे जीवनसाथी की तलाश करते हैं, जो अपने माता-पिता से अलग रह रहा हो, लेकिन सच तो यह है कि परिवार के साथ रहने के अनगिनत फायदे होते हैं। बंदिशें तो हर जगह होती हैं, लेकिन परिवार का साथ किसी भी रिश्ते को मजबूती से बांधे रखने के लिए जरूरी है।

प्रेम करें, लेकिन आज़ादी के साथ।

 #जबरदस्ती !!!

कई बार जीवन में हमें ऐसे मोड़ पर आकर रुकना पड़ता है जहाँ हमें यह महसूस होता है कि हमें किसी को जबरदस्ती अपने साथ नहीं रखना चाहिए। यह हमारे आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की परीक्षा होती है। यह पोस्ट उसी विचार को लेकर है: "मैं कभी जबरदस्ती नहीं करता अगर कोई भी मुझे चुनता है, अगर उन्हें लगता है कि वे मुझसे बेहतर पा सकते हैं, तो मैं उन्हें जाने देता हूं।"

यह वाक्य हमें यह सिखाता है कि प्रेम और संबंधों में स्वतंत्रता और सम्मान कितना महत्वपूर्ण होता है। जब हम किसी को अपने जीवन में रखते हैं, तो यह उनकी पसंद होनी चाहिए, न कि हमारी मजबूरी। जबरदस्ती से जुड़े रिश्ते अक्सर दर्द और निराशा ही देते हैं। 

जब कोई व्यक्ति हमारे साथ रहना चाहता है, तो वह हमारे गुणों और हमारी आत्मा को देखकर हमें चुनता है। लेकिन अगर उन्हें लगता है कि कहीं और उनके लिए कुछ बेहतर है, तो हमें उन्हें जाने देना चाहिए। यह केवल उनका निर्णय नहीं है, बल्कि यह हमारे आत्मसम्मान की भी पहचान है। 

खुद से यह सवाल पूछें: क्या हम किसी को इसलिए चाहते हैं क्योंकि हम उनके साथ रहकर खुश हैं, या केवल इसलिए क्योंकि हम उन्हें खोना नहीं चाहते? अगर हमारा उत्तर दूसरा है, तो हमें अपने विचारों को बदलने की आवश्यकता है। 

यह याद रखें कि किसी को जाने देना कमजोरी नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी ताकत का प्रतीक है। यह दिखाता है कि हम अपने आप पर विश्वास रखते हैं और यह जानते हैं कि जो सही होगा, वही हमारे पास वापस आएगा। 

अपने आत्मसम्मान को बढ़ावा दें और अपनी स्वतंत्रता को महत्व दें। जीवन का सफर लंबा है और इसमें कई लोग आएंगे और जाएंगे। जो वास्तव में हमारे लिए बने हैं, वे हमारे जीवन में हमेशा बने रहेंगे, चाहे हालात कैसे भी हों।

इसलिए, जब आप किसी को जाने देने का निर्णय लेते हैं, तो यह मानें कि यह आपका सबसे सशक्त निर्णय है। आप केवल अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर रहे हैं और अपने लिए नए रास्ते खोल रहे हैं। किसी के प्रति प्यार का मतलब उन्हें जबरदस्ती पकड़ना नहीं, बल्कि उन्हें स्वतंत्रता देना है। 

अपने जीवन में खुशी और संतोष लाने के लिए हमें यह सीखना होगा कि कब किसी को जाने देना है। यह एक नई शुरुआत का संकेत हो सकता है और एक ऐसा मौका जिसे आपने कभी सोचा नहीं था। 

आइए, हम सब इस भावना को समझें और अपने जीवन को इस नई दृष्टिकोण से देखें। हमारे पास जो भी है, वह हमारे पास इसलिए है क्योंकि हम उसके योग्य हैं, न कि इसलिए क्योंकि हमने उसे मजबूर किया है। 

हमेशा अपने दिल की सुनें और अपने आत्मसम्मान का पालन करें। एक सच्चे प्रेम में किसी को भी अपने निर्णय के लिए दोषी नहीं ठहराना चाहिए। प्रेम का वास्तविक अर्थ स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान है। सच्चा प्रेम स्वतंत्रता से पैदा होता है, और जब हम किसी को जबरदस्ती अपने साथ रखते हैं, तो वह प्रेम नहीं, बल्कि बंधन होता है। इसलिए, प्रेम करें, लेकिन आज़ादी के साथ। 

Monday, 12 August 2024

रात में पत्नी से लिपट के सो जाओ, और रात भर आलिंगन करो, सुबह उठो तो पत्नी खुश 😊

 रात में पत्नी से लिपट के सो जाओ, और रात भर आलिंगन करो, सुबह उठो तो पत्नी खुश 😊❤️


**और पत्नी खुश तो मैं खुश, और मैं खुश तो पूरा परिवार खुश।** 🌸


शादी की उम्र हो रही थी मेरे लिए लड़कियाँ देखी जा रही थीं। मैं भी मन ही मन में काफी खुश था कि चलो कोई तो ऐसा होगा जिसे मैं अपना हमसफर बोलूंगा, जिसके साथ जब मन करे प्यार करूंगा। 💑 मेरी अच्छी खासी नौकरी है, घर में बूढ़ी माँ है, पापा हैं और इतनी कमाई तो हो ही जाती है कि अपनी पत्नी का खर्चा उठा सकूं। ये सारी बातें सोच-सोच के खुश होता था। माँ की उम्र भी हो गई थी, तो एक प्वाइंट ये भी लोगों को बताता कि यार मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं, ये तो माँ हैं जिनकी उम्र निकल रही है उनके लिए शादी करनी है। माँ ने भी मेरी बात मान ली, लेकिन मन ही मन में तो मेरी भी चाहत थी कि मेरी शादी हो जाए। 💍


मेरी शादी दिव्या से फिक्स होती है। मैंने कहा, दिव्या, हम आगे जाकर बहुत अच्छी जिंदगी जीने वाले हैं, क्योंकि मेरे घर में कोई नहीं है। बस तुम्हें मेरे माँ-बाप का ध्यान रखना होगा। दिव्या ने तुरंत कहा, "आपके माँ-बाप भी मेरे माँ-बाप हो जाएंगे शादी के बाद।" दिव्या की अच्छी बातों से मुझे दिन-रात और ज्यादा प्रेम होने लगा था। कभी परिवार संभालने की बातें, कभी शरारत भरी रोमांटिक बातें सुनकर मैं बहुत खुश था। मानो एक परफेक्ट जिंदगी मुझे मिल गई हो। 💕💑

शादी के बाद हम दोनों घूमने गए, सब कुछ बहुत अच्छा था। ना जाने क्यों इस पल हम दोनों को ऐसा लगता था कि बस हम एक-दूसरे से लिपटे रहें। जिनकी शादी हुई होगी वे समझ पा रहे होंगे कि मैं क्या बोलना चाहता हूँ। घूमने के बाद जब घर आया तो ज्यादातर समय ऑफिस के लिए ही होता था। छुट्टी में जब कभी मम्मी-पापा बाहर जाते तो दिव्या मैडम मूड में रहती थी। कब, क्या, कहाँ, कैसे कुछ हो जाता था पता नहीं चलता था। 😍🌙

मुझे अब लगने लगा था, एक ऐसी पत्नी मिली है, जो घर की जरूरतों को समझती है, साथ में मेरी शारीरिक जरूरतों का भी ध्यान रखती है। संबंध बनाने के लिए खुद ही पहल करती है, और यदि कभी मैं कर दूं तो मना नहीं करती बल्कि पूरा साथ देती है। अब जिंदगी में इससे अच्छा क्या होगा? फालतू में मेरे दोस्त बोलते थे कि शादी मत करो, लाइफ खराब हो जाती है। 

हमारी शादी को 2 महीने हुए थे, दिव्या ने कहा, "अजी, मुझे साड़ी में दिक्कत होती है, क्या मैं घर पर सूट पहन सकती हूँ?" मैंने तुरंत कहा, "हाँ, क्यों नहीं पहन सकती हो, चलो अभी दिलाता हूँ।" हम दोनों बाजार से घर आते हैं। मम्मी ने उसके हाथ में सूट देखा, कुछ बोली नहीं। अगली सुबह जब वो नहाकर सूट पहन कर निकली तो मम्मी ने कहा, "तुमने सूट क्यों पहन लिया, हमारे यहां शादी के 6 महीने तक नई बहू को सिर्फ साड़ी पहननी होती है। रोज कोई ना कोई मेहमान देखने आता है, सबके सामने सूट पहन कर जाओगी तो अच्छा नहीं लगेगा। और बार-बार दिन भर कपड़ा बदलना भी अच्छा नहीं है।"

इस पर दिव्या ने मां को सॉरी कहा और बोली, "मैंने तो इनसे पूछ के लिया था।" तभी मां बोलती हैं, "ये कौन होता है ये सब डिसाइड करने वाला? अभी मैं हूँ तो मैं करूंगी, जब मैं मर जाऊं तो जैसे मन वैसे रहना।" इसे सुनने के बाद मुझे पहली बार घर में अपनी औकात का पता चला। 😔

मासूमियत से दिव्या मेरी तरफ देख रही थी शायद यह बताना चाह रही थी कि मेरी वजह से उसे डांट पड़ गई। पत्नी प्रेम में लिप्त होकर मैंने मां से बोल दिया, "अरे मम्मी, इसकी गलती नहीं है, मुझसे पूछी थी वो।" मां ने तुरंत बोला, "2 महीना हुआ नहीं और आगए पत्नी का पक्ष लेने। इस घर में मालिक मैं हूँ या तुम हो?" अब मेरे पास कोई जवाब नहीं था। हम दोनों एक-दूसरे को देखते रहे और अंदर चले गए। 

इस बात से दिव्या डर गई थी और अब वो हर काम मां से पूछ कर करने लगी। लेकिन मां के लिए यह भी एक आफत था। अब उनका कहना था कि तुम 28 साल की हो, तुम्हें खुद बुद्धि होनी चाहिए क्या करना है क्या नहीं। हर चीज के लिए मेरे पास मत आया करो। लेकिन अब इस बार दिव्या भी चिढ़ गई, पर मां से कुछ नहीं बोली। 

जब मैं ऑफिस से आया तो अंदर आते ही मां बोलने लगी, "तुम्हारी धर्मपत्नी को बुद्धि नाम की चीज नहीं है।" मैंने मां को समझाया कि जाने दो, सीख जाएगी। थोड़ा समय दो। इस पर मां ने मुझसे मुंह फुला लिया और उदास रोते हुए कहा, "तुम बदल गए हो।" और पीछे से धीरे-धीरे मेरे पिता जी देखते हुए हंस रहे थे, मानो ऐसा जताने कि उन्होंने पहले ही भविष्य देखा हुआ था। 😅

इसके बाद कमरे में गया तो वहां दिव्या का मुंह खुला हुआ था। कमरे में घुसते ही उसने मुझसे कहा, "मैं कितनी भी कोशिश कर लूं, मां मुझसे कभी खुश नहीं होती। हर चीज की एक सीमा होती है और यह सारी बातें सीमा से भी ऊपर हैं।" 

मैंने उसे पकड़ा और बोला, "घबराओ मत, थोड़ा समय लगेगा मां को संभालने में। क्योंकि तुम्हारे अलावा उनका कोई और नहीं है, वह तुम्हें अपना मानती हैं इसलिए तुमसे ऐसी बातें करती हैं। चलो चल के नीचे खाना खाते हैं, बहुत तेज भूख लगी है।" ऐसा बोलकर हम नीचे आते हैं और मैं मन में ही सोचता हूं कि दिव्या को तो मैं धीरे से किसी भी तरह से मना लूंगा। एक रात की बात है, एक बार जहां लिपट के सोया सब कुछ सुबह ठीक हो जाएगा। मां के लिए कुछ सोचना पड़ेगा। 

नीचे खाना खाने के बाद हम अपने कमरे में जाते हैं। दिव्या अभी भी थोड़ी नाराज लग रही थी। मैंने उसे बोला, "क्यों मन की बात का इतना बुरा मानती हो?" उसने तुरंत मुझसे कहा, "मेरी कोई गलती भी नहीं होती और हर चीज के लिए मुझे दोषी ठहराया जाता है। मैं कुछ अच्छा भी करने जाती हूं तो उसमें भी मेरी बुराई निकल जाती है।" 

मैंने उसे जोर से गले लगाया और बोला, "ऐसा कुछ नहीं है, समय के साथ सारी चीज ठीक हो जाएगी।" और अब बारी थी कुछ करने की, लेकिन उसने मुझे अपने से दूर कर दिया और बोला, "मेरा मन नहीं है।" अब जो मुझे लगता था कि एक रात लिपट के सोने से अगली सुबह सब कुछ ठीक हो जाएगा, यह बातें झूठी समझ आने लगीं। 

धीरे-धीरे हर छोटी-छोटी चीज पर घर में लड़ाई-झगड़ा होने लगे। मां को दिव्या की कुछ चीजें नहीं पसंद थीं और दिव्या को मां की बहुत सारी चीजें पसंद नहीं आती थीं। दिव्या का कहना था कि घर उसका भी है और हर छोटी चीज के लिए परमिशन लेना उसे ठीक नहीं लगता। उधर मां का कहना था कि इस गृहस्थी को मैंने बसाया है और तुम्हें हैंडोवर किया है, इसलिए अभी भी इसकी मालकिन मैं ही हूं। तुम्हें जो भी करना है, मुझसे पूछकर करो।

दोनों अपनी बात पर बिल्कुल सही थे। एक तरफ दिव्या, जिसके साथ मुझे पूरी जिंदगी बितानी थी, दूसरी तरफ मेरी मां, जिन्होंने इस गृहस्थी को संभाला था, मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया था। 

लेकिन इन दोनों की लड़ाई का असर सीधा-सीधा मेरे ऊपर दिख रहा था और मैं पिसता जा रहा था। धीरे-धीरे बात कहीं ज्यादा बढ़ने लगी और घर में प्रतिदिन लड़ाई-झगड़े की नौबत आ गई। अब मुझे भी लगने लगा था कि जो मेरे दोस्त बोलते थे कि शादी करने से बहुत ज्यादा खुशी नहीं मिलती बल्कि लाइफ में टेंशन आता है, वे क्यों बोलते थे। 

इसी तरह एक दिन अत्यधिक बात बढ़ने पर मैं रात को दोनों के कमरे में गया। सबसे पहले मैं मां के कमरे में गया और मां को समझाया कि देखो मां, तुम दोनों के झगड़े की वजह से मेरा करियर खराब हो रहा है और मैं ठीक से रह नहीं पा रहा हूं। मैं तुम्हें छोड़ नहीं सकता और ना मैं दिव्या को छोड़ सकता हूं, तो इसलिए थोड़ी नरम हो जाओ। जो चीज जैसे चल रही है, चलने दो। इस बार मैं थोड़ा कठोर था।

मां से तुरंत बोलने के बाद मैं अपनी पत्नी के कमरे में गया और मैं यही बात उससे भी कही कि देखो, मां की उम्र हो चुकी है। यदि तुम यह सोच रही हो कि मां अपने आप को बदल सकती हैं, तो यह होना मुमकिन नहीं है। बदलना तुम्हें खुद को होगा जिसमें मैं तुम्हारा पूरा साथ दूंगा। मैं ना तुम्हें छोड़ सकता हूं क्योंकि तुम मेरा भविष्य हो, और ना मैं अपनी मां को छोड़ सकता हूं क्योंकि उन्होंने मुझे पाल-पोसकर इस लायक बनाया है। तो कोई बीच का रास्त

ा निकालो और घर में शांति से रहो।

यह बात होने की कुछ दिन बाद तक तो चीजें ठीक थीं, लेकिन धीरे-धीरे कुछ समय बाद फिर झगड़ा होना शुरू हो गया। और इस बार मैंने दोनों को आमने-सामने बैठाकर कहा कि लास्ट टाइम मैंने आप लोगों से बात की थी पर उसका कोई भी मतलब नहीं निकला। अगर आज के बाद फिर घर में कभी झगड़ा होता है, तो मैं यह घर छोड़कर चला जाऊंगा। मैं कहीं बाहर रहूंगा और हर महीने की सैलरी आधी मां को और आधी दिव्या को दे दिया करूंगा। इस बात का दोनों के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

हफ्ता बीतता है और घर में फिर झगड़ा होता है। इस बार समय था एक्शन लेने का। मैं झगड़ा होते हुए देखता हूं, पर इस बार कुछ भी नहीं बोलता। मैं ऑफिस जाता हूं और इस बार देर रात तक ऑफिस में ही रुकता हूं। जब दिव्या मुझे फोन करती है कि आप कहां हैं तो मैं उनसे कहता हूं कि मुझे नहीं पता मैं कहां हूं। कुछ देर बाद मां का फोन आता है और मां भी मुझसे यही पूछती हैं कि तुम कहां हो, इतना देर क्यों हो रहा है? मैंने मां को भी बोल दिया कि मैं कहां हूं, मुझे भी नहीं पता।

इस दौरान मैं अपने एक अविवाहित दोस्त के घर पर रुका हुआ था, जिसके बारे में मेरे घर में किसी को नहीं पता था। सिर्फ मेरे पिता जानते थे। जब दिव्या का फोन आता है या मां का फोन आता तो मैं उनसे नॉर्मल बात करता और यह बोल देता कि कई बार मैंने उन लोगों को समझाया है कि घर में लड़ाई-झगड़ा मत करो जिससे घर की शांति भंग होती है। इस वजह से मैं अब घर छोड़कर बाहर आ गया हूं और हमेशा के लिए बाहर हूं।

यह सुनने के बाद मेरी मां घबरा गईं, दिव्या घबरा गई कि आखिर ऐसा क्या हो गया। और ये दोनों मुझे फोन करके समय-समय पर यह एहसास दिलाते कि दोबारा उनसे यह गलती कभी नहीं होगी। मुझे जल्दी से जल्दी घर आ जाना चाहिए। मां ने तो यह तक बोल दिया कि "तू क्या चाहता है, मैं बिना पोते का मुंह देखे मर जाऊं?" और दिव्या फोन करके मुझे यह बोलती कि "आपकी मां आपके लिए बहुत परेशान हैं, मेरे लिए ना सही, कम से कम उनके लिए तो वापस आजाइए।"

मुझे यह देखकर बहुत खुशी हो रही थी कि दोनों लोग मेरे चक्कर में एक-दूसरे के बारे में सोच रहे थे। बस फर्क इतना था कि दिव्या खुलकर मुझे बोल रही थी, पर मां इशारों में बोल रही थी।

एक हफ्ते बाद मैं घर आता हूं और घर जाकर सबसे पहले मां को देखता हूं और पिताजी से मिलता हूं। पापा मुझे बताते हैं कि एक हफ्ते से घर में काफी शांति है और उम्मीद है आगे भी ऐसा झगड़ा नहीं होगा। और यकीन मानिए, उस दिन के बाद से ऐसा झगड़ा दोबारा कभी नहीं हुआ। मेरी मां मेरी पत्नी के साथ अच्छे से रहती हैं और मेरी पत्नी मेरी मां के साथ अच्छे से रहती हैं। 😊

आज दिव्या के साथ मुझे पूरे 5 साल हो चुके हैं और हमारा एक बेटा भी है। लेकिन आज हमारे घर में गृहकलह नाम की चीज नहीं है और इसका पूरा श्रेय मैं अपने पिता को देना चाहता हूं। 🙏 क्योंकि उस दिन जब हम पेंशन का काम करने कचहरी गए थे, तो उन्होंने ही मुझे यह आईडिया दिया कि "तुम एक हफ्ते के लिए घर से बाहर भाग जाओ और बोल देना कि अब तुम दोबारा लौट के कभी नहीं आओगे।"

मुझे पता है मेरा यह कदम काफी ज्यादा हास्यास्पद और कुछ लोगों को बेकार लगेगा। पर यकीन मानिए, इस चीज ने मेरी जिंदगी बदल दी। अगर मैंने आज यह कदम न उठाया होता, तो शायद हर घर की तरह मेरे घर में भी रोज लड़ाई-झगड़ा हो रहा होता।

भारत में शादी सिर्फ लड़के और लड़की की नहीं होती बल्कि लड़की और लड़के की फैमिली की भी होती है। शादी के बाद सिर्फ पत्नी के साथ जी भर के प्यार करने से खुशी नहीं प्राप्त होती। असली खुशी तब मिलती है जब आपका परिवार भी खुश हो। और परिवार को खुश करने की जिम्मेदारी सिर्फ लड़की की नहीं होती बल्कि पूरे परिवार की होती है। इसमें आप, मैं, आपकी मां, आपके पापा और लड़की सभी शामिल होते हैं।

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हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...