मान लो, तुम्हें ज़िंदगी ने बहुत बड़ा आघात दिया।
तुम टूटे, बिखरे… पर फिर सोचा अब तुम्हें संभलना ही होगा, अपने लिए... तभी तुम्हारी ज़िंदगी में कोई आया।
उसने तुम्हारे ज़ख्मों पर मरहम रखा,तुम्हारी आँखों के आँसू पोंछे और तुम्हें यक़ीन दिलाया कि तुम फिर से मुस्कुरा सकते हो। उस पल तुम्हे लगेगा यही तो है तुम्हारी सारी पीड़ा की दवा।
लेकिन वक़्त बदला। वही इंसान, जिसने तुम्हारे घाव भरे थे,उन्हीं घावों के पास एक और गहरा निशान देकर चला गया। तुम फिर टूटे… लेकिन हार नहीं मानी।
हाँ, तुम्हारे घाव वक़्त के साथ भर गए लेकिन उनके निशान आज भी तुम्हारे साथ हैं। उन्होंने तुम्हें सिखा दिया कि तुम्हें संभलना है, पर किसी और के सहारे पर नहीं। तुम्हें अपनी मज़बूती खुद बनानी है।
तुम चाँद मत बनो जो किसी और की रोशनी में चमकता है। तुम सूरज बनो जो खुद जलकर, अपनी रोशनी से
न सिर्फ़ अपनी दुनिया, बल्कि औरों की राह भी रौशन कर देता है।
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