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Wednesday, 25 September 2024

उसकी शादी गांव की एक सीधी-साधी लड़की से करवा दी। लड़की का नाम कुमुद है।

 मेरे बेटे की शादी मैंने मुश्किल से करवाई। वह एक लड़की से प्यार करता था, लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि उसकी शादी उसी से हो।


मैंने उसे बहुत समझाया और उसकी शादी गांव की एक सीधी-साधी लड़की से करवा दी। लड़की का नाम कुमुद है।


मुझे पता था कि यह लड़की मेरे बेटे और इस घर के लिए बहुत अच्छी है, इसलिए मैंने उस लड़की की शादी मेरे बेटे से करवा दी।


कुमुद हमारे घर में आई। लड़की घरेलू थी, बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करती थी और घर का काम भी करती थी। अभी 10 ही महीने हुए थे शादी को, लेकिन मुझे लगने लगा कि मैंने अपने बेटे की शादी इस लड़की से करवा कर अच्छा किया। मेरा बेटा अरविंद भी खुश लग रहा था।


लेकिन उस रात के बाद मेरी यह सोच बदल गई। एक रात करीब 2 बजे मेरे बेटे के कमरे से चीखने की आवाज आने लगी।


ये चीखें मेरी बहू की थीं। मैंने थोड़ी देर तक सुना फिर वह चीखना बंद हो गया। अरविंद के पिता, मेरे पति, को यह सब सुनाई दिया था लेकिन फिर हमने उन्हें रात में पूछना उचित नहीं समझा। इसलिए दरवाजा नहीं खटखटाया। सुबह मेरी बेटी भी बोल रही थी कि मम्मी, रात को कौन चीख रहा था?


मैंने उसकी बात काट दी, कहा कि कोई नहीं, शायद कोई बाहर से चीख रहा था। मेरी बहू का स्वभाव उस दिन से बदल गया। वह चुप थी सारा दिन।


मैंने सोचा शायद पति-पत्नी के बीच की कोई बात होगी, इसलिए मैंने कुछ पूछा नहीं। अगली रात फिर 2 बजे वही हुआ, मेरे बेटे के कमरे से फिर चीखने और रोने की आवाज आने लगी। इस रात वह आवाज करीब 10 मिनट तक चली। मेरी बेटी उठ गई और उसने हमारे कमरे का दरवाजा बजाया।


मैंने दरवाजा खोला। देखा तो वह बहुत डरी हुई थी। बोली, मम्मी, यह क्या है? भाभी रोज रात को रोती और चीखती क्यों है? क्या होता है?


कमरे के अंदर चलो, अभी दरवाजा खुलवाते हैं। मैं दरवाजे के पास जाने लगी तो मेरे पति ने मुझे रोक लिया, कहा कि रुको, अभी बात मत करो, कल सुबह दोनों से बात करते हैं।


उस रात को मेरा सोना मुश्किल हो गया था। सुबह मेरी बहू जल्दी उठकर घर के काम में लग गई। मैंने सुबह अपने बेटे के कमरे में जाकर पूछा कि क्या बात है, रात को बहू रोती क्यों है? उसका चेहरा पूरा उतर चुका था। उसने कहा कुछ नहीं। उसकी बातों और आंखों से साफ दिखाई दे रहा था कि वह कुछ छिपा रहा है। उन्होंने भी उससे पूछा लेकिन वह कुछ नहीं बोल कर घर से बाहर चला गया। मैंने अपनी बहू से पूछा। वह कुछ काम कर रही थी।


उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे रात में ठीक से सोई नहीं है। आंखें साफ बता रही थीं। मैंने उसे पूछा, क्या हुआ, तुम रात को रो क्यों रही थी?


वह बोली, रो रही थी कब? नहीं, मैं तो सो रही थी और मुझे तो कोई आवाज नहीं आई। आप क्या बात कर रही हैं? उस कमरे में ऐसा क्या हो रहा था, यह बात या तो मेरी बहू जानती थी या बेटा, लेकिन दोनों ही कुछ नहीं बता रहे थे। लेकिन दोनों के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि कुछ है जो ये दोनों छिपा रहे हैं। लेकिन क्या?


अब जब भी रात आती, मुझे नींद ही नहीं आती। क्यों कि आधी रात को फिर वही होता। बहू ज़ोर से चीखती और रोती।


मेरे मन में कई सवाल थे, क्या होता है उस कमरे में? फिर एक रात करीब 2 बजे मेरे घर में वो हुआ जो मैंने सोचा भी नहीं था।


मेरी बहू रात को कमरे से बाहर आ गई। उसके कपड़े कहीं भी जा रहे थे, उसे कुछ होश ही नहीं था। बाल खुले थे और वह घर के चौक में आकर बैठ गई। ज़ोर से चीखने और रोने लगी। हम सभी घर वाले बाहर आ गए। मेरा बेटा भी कमरे से डरा हुआ बाहर आया। बहू की ऐसी हालत देखकर हम सब ही डर गए थे।


मैंने अपने बेटे से पूछा, यह क्या है? वह बोला, बस माँ, देख लो, यह रोज रात 2 बजे ऐसी ही करती है। मैं आप लोगों को क्या बताता?


सुबह जब उसे पूछता हूं तो उसे कुछ याद ही नहीं रहता है। बोलती है मैंने तो कुछ नहीं किया। बहू जब थोड़ी देर बाद शांत हुई तो मेरे बेटे ने उसे कमरे में ले जाकर सुला दिया।


मैं सोच रही थी, यह क्या है? मैंने अपने बेटे को कहा, तू उसे उसके घर छोड़ आ सुबह। मैं उसकी माँ से बात करूंगी।


सुबह होते ही मेरे बेटे ने उसे कुछ बहाना करके उसके घर छोड़ दिया। मैंने उसकी माँ से बात की। उसकी माँ ने कहा, यह क्या बोल रही हैं? मेरी बेटी बिल्कुल ऐसा नहीं करती है। मैंने जो सोचकर अरविंद की शादी उससे की थी, वैसा हो नहीं सका। बहू को छोड़े अब 20 दिन हो चुके थे।


इस दौरान उसके घर से फोन आता रहा लेकिन मैंने टाल दिया। मेरा बेटा भी कह रहा था कि मेरे वह दिन कैसे निकले हैं, मैं ही जानता हूं।


मैंने उस पर फिर ज्यादा दबाव नहीं डाला। पर मैं अपने आप को कोस रही थी कि मैंने अपने बेटे की शादी उस लड़की से क्यों करवाई। अब मेरे घर में कोई नहीं चाहता था कि वह वापस आए। इन्हीं सब बातों में 3 महीने निकल गए।


फिर एक दिन अचानक ही मेरी बहू अपने सामान के साथ वापस मेरे घर आ गई। वह आते ही मुझसे कहती है, माँजी, मैं जानती हूं कि आप मेरे बारे में क्या सोच रही हैं, लेकिन सच क्या है, यह आपको पता नहीं है।


उसकी बातों से मुझे लगा कि कुछ है जो वह बताना चाहती है। मेरा बेटा घर आया और उसे देखकर गुस्सा हो गया, कहा, यह यहाँ वापस आ गई। मैं अब इस घर में नहीं रह सकता, मैं जा रहा हूं। मेरी बहू ने उसी समय कहा, क्यों, सच सामने आ जाएगा, इसलिए डर रहे हैं। बताइये सबको सच क्या है। मैं उस तरह से क्यों करती थी।


बेटा बोला, क्या सच, सच यह है कि तुम पागल हो और रोज रात उस तरह से करती हो। बहू बोली, माँजी, आज अगर सबसे ज्यादा दुखी और परेशान है तो वह और कोई नहीं, मैं हूं।


मैंने अपने पति की बात मानी, उन पर विश्वास किया। मैंने कहा, तुम क्या कहना चाहती हो? फिर मेरी बहू ने जो बताया, उसे सुनकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई।


वह बोली, आपके बेटे ने मुझे पहली रात से यह नाटक करने को कहा था, लेकिन मैंने नहीं माना। वह कहते थे कि हम दोनों अलग बड़े शहर में जाकर रहेंगे। उन्हें कहा कि अगर ऐसे मेरे घर वाले मुझे नहीं छोड़ेंगे, लेकिन तुम इस तरह का नाटक करोगी तो वे डर जाएंगे और फिर हम अलग रहेंगे।


पहले मैंने बोला कि यहाँ सबके साथ अच्छा है, लेकिन फिर जब वह मुझसे बात नहीं करते थे तो मुझे उनकी बात माननी पड़ी। और फिर मैंने जब सब नाटक किया तो उन्होंने मुझे घर छोड़ दिया। मुझे आप सभी की नजरों में पागल और न जाने क्या साबित कर दिया।


उसके बाद मेरा फोन भी नहीं उठाया। मैं उनका वहाँ मेरे घर इंतजार कर रही थी लेकिन वह नहीं आए। मैंने समझ लिया कि उन्होंने मुझे बेवकूफ बनाया है। मुझसे झूठ बोला है। यह मुझे अपनी ज़िंदगी से भगाना चाहते थे। मैं इस बात को समझ गई। अब मैं खुद ही इनसे दूर चली जाऊंगी लेकिन मैं चाहती थी कि सच आप सभी के सामने आ जाए।


मुझे बहू की बातों पर पूरा विश्वास हो गया था। मेरे बेटे ने कहा, तुम्हें इसे रखना है तो रखो। मेरी शादी तुमने उससे नहीं होने दी जिससे मैं चाहता था और इस गाँव की लड़की से करवा दी। मैं चाहता था कि यह भी यहाँ से चली जाए। तुम परेशान हो, सोचो कि मैंने क्या किया।


अब भी मैं इसे अपनी पत्नी नहीं मानता। मैंने अपने बेटे को कहा कि बेटा, तुझे इस घर में रहना है या नहीं, इसका फैसला तू कर ले। मेरी बहू इस घर में ही रहेगी। और जो इसे इसका हक और इज़्ज़त नहीं देगा, वह इस घर में नहीं रह सकता। तू इस तरह की साज़िश कर सकता है, वो भी सिर्फ अपनी माँ से बदला लेने के लिए। एक भोली लड़की को कुछ भी करने को कह सकता है। लेकिन बेटा, जरा सोच, तूने इसे जो करने को कहा, इसने किया अपने बारे में और किसी के बारे में कुछ नहीं सोचा। सिर्फ तेरा सोचा। सोच ऐसी पत्नी कहाँ मिलेगी। तू बहुत बड़ा अभागा है जो इस लड़की को छोड़ेगा। मैंने अपने बेटे की शादी के लिए हीरा चुना था, लेकिन शायद मेरा बेटा ही उसके लायक नहीं था। मैंने अपनी बहू को प्यार से गले लगाया। मेरा बेटा भी कहीं नहीं गया। थोड़े समय तक जरूर नाराज़ रहा। लेकिन मुझे पता था कि उस लड़की से प्यार किए बिना कैसे रह सकता था। आखिर धीरे-धीरे सब ठीक होने लगा।

हर इंसान की ज़िंदगी में किसी ना किसी से प्यार होता है एक बार, जब दिल टूट जाता है तो फिर वैसी मोहब्बत नही होती दुबारा, जिस से प्यार हो उसी से शादी हो कोई ज़रूरी नहीं, होता है लेकिन, सच्चा प्यार मिलता कहा है आजकल 

Tuesday, 24 September 2024

सुहागरात की वो घटना मेरे जीवन की एक यादगार और मजेदार घटना है

 सुहागरात की वो घटना मेरे जीवन की एक यादगार और मजेदार घटना है, जिसे याद कर आज भी हंसी आ जाती है। उस रात मैं और मेरी पत्नी रिया एक-दूसरे के साथ समय बिता रहे थे, जब अचानक हमारे पलंग पर एक अनचाहा मेहमान आ गया—एक मकड़ी। 🕷


रिया मकड़ी देखकर जोर से चीख उठी, और उसकी चीख ने मुझे हैरान कर दिया। मुझे लगा कि शायद मुझसे कोई गलती हो गई है, लेकिन जब रिया ने मकड़ी की ओर इशारा किया, तब जाकर मुझे असली वजह समझ में आई। मैं हंसते हुए मकड़ी को भगाने में जुट गया। उस वक्त मकड़ी जैसे हमारे प्यारे पल को बर्बाद करने की पूरी कोशिश कर रही थी। आखिरकार, मैंने उस मकड़ी से निजात पा ली और हमारी प्यारी रात फिर से सामान्य हो गई। 


हम दोनों काफी देर बाद सोए और अगली सुबह जब मैं उठकर बाहर आया, तो सामने भाभीजी खड़ी थीं। उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, "रात को कोई हॉरर फिल्म देख रहे थे?" मैं थोड़ा असहज हो गया, लेकिन फिर हंसते हुए सच्चाई बता दी कि कमरे में एक मकड़ी आ गई थी, जिसकी वजह से रिया चिल्ला उठी थी। भाभीजी ने भी हंसते हुए कहा, "अरे, मकड़ियां तो इन दिनों हर जगह हैं, ध्यान रखना कहीं काट न लें।"

उसके बाद मैंने सोचा, अगर भाभीजी ने रात की आवाजें सुनीं, तो शायद मेरे छोटे भाई-बहन ने भी सुनी होंगी, लेकिन उन्होंने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा। हालांकि, मुझे अंदर ही अंदर यह एहसास हुआ कि उन दोनों के मन में भी कुछ न कुछ जरूर आया होगा। 

उस घटना के बाद हमने यह सुनिश्चित किया कि कमरे में कोई और अनचाहा मेहमान न हो। हम दोनों ने मिलकर पूरा कमरा छान मारा और फिर जाकर अगली रात चैन से सो पाए।

Monday, 23 September 2024

समाज की नाक ऊंची रखने के लिए मुझे अपने प्यार को खोना पड़ा।

 मैंने दीप्ति के सारे कपड़े उतार दिए,पहली बार मुझे किसी लड़की के शरीर को महक इतनी ज्यादा अच्छी लग रही थी जिसके आगे सारे सेंट फेल थे


वो इस लिए, क्यों की मुझे उससे बहुत प्रेम था दीप्ति से मेरी मुलाकात मुंगेर में हुई थी, जब मैं बंगलोर में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रहा था। एक दिन, जब मैं स्टेशन पर उतरा, मेरी ट्रॉली का व्हील टूट गया था। जैसे-तैसे मैं उसे उठा कर ले जा रहा था, तभी एक लड़की ने मेरी हालत देख कर कहा,


"भैया, दिक्कत हो रही है तो मैं उठा दूं।"


पहले तो मैंने मना कर दिया, लेकिन फिर सोचा कि इतनी सीढ़ियां चढ़नी हैं। शरमाते हुए मैंने कहा,


"एक तरफ से पकड़ लीजिए तो सीढ़ी चढ़ जाएंगे।"


उसने मदद की और हम सीढ़ियां चढ़ गए। बाहर निकलने पर मैंने शुक्रिया कहा और उसने मुस्कुरा कर कहा, "कोई बात नहीं भैया।" उस समय मुझे एहसास हुआ कि बड़े शहर के लोग मदद करते समय खुद को छोटा नहीं समझते, जबकि हमारे शहर के लोग अजनबियों की भी सहायता के लिए हाथ बढ़ाते हैं।


कुछ दिनों बाद, एक दुकान पर मुझे दीप्ति फिर से दिखी। हमने थोड़ी बात की और मुझे पता चला कि वह मेरे घर के पास वाले मुहल्ले में रहती है। हमने नंबर साझा किए और रात में मैंने उसे फोन किया। हमारी बातचीत में, दीप्ति ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से है और अपने परिवार को सुविधाओं के अभाव में संभाल रही है। उसकी सादगी और संघर्ष ने मुझे प्रभावित किया और मुझे उससे प्रेम हो गया।


मैं बंगलोर वापस आया और रात में दीप्ति से बात करता तो मेरे मन को शांति मिलती। मैंने उसे अपने प्रेम के बारे में बताया और उसने भी सकारात्मक उत्तर दिया। हमारी बातचीत और प्यार गहरा हो गया। मैंने दीप्ति को बंगलोर आने का न्योता दिया और उसने इसे स्वीकार कर लिया।


तकरीबन तीन महीने बाद दीप्ति बंगलोर आई और मेरे घर रुकी। पहले दिन हमने बंगलोर की कई जगहें घूमीं और रात में घर आकर सो गए। सुबह जब मैं उठा तो देखा दीप्ति एक पत्नी की तरह मेरे लिए चाय और नाश्ता बना रही थी। इसे देख कर मुझे अजीब सी खुशी हुई। हमने साथ में नाश्ता किया और अपनी जिंदगी के बारे में बातें कीं।


अगले दिन फिर से हम घूमने निकले और शाम को दीप्ति ने कहा कि वह बाहर का खाना पसंद नहीं करती और घर पर खाना खाएंगे। उसने बिहारी अंदाज में दाल-चावल और भुजिया बनाया, जो बहुत स्वादिष्ट था। उसे देखकर मेरे दिल में उसके लिए इज्जत और प्यार और बढ़ गया।


रात में जब हम सोने जा रहे थे, हमने बातें की और मैंने दीप्ति के गालों को चूम लिया। दीप्ति थोड़ा असहज थी, लेकिन उसने मना नहीं किया। हमने एक-दूसरे के साथ समय बिताया और हमारे बीच पति-पत्नी जैसा संबंध बना।


दीप्ति को वापस जाना था और हम दोनों दुखी थे। मैंने अपनी मां को दीप्ति के बारे में बताया और शादी की इच्छा व्यक्त की। मां ने उसकी फोटो देखकर कहा कि वह एक डांसर है और लोगों की शादियों में नाचकर अपना खर्चा चलाती है। यह सुनकर मैं स्तब्ध रह गया क्योंकि हमने कभी इस बारे में बात नहीं की थी।


मां-पापा ने दीप्ति से शादी करने से मना कर दिया और कहा कि अगर मैंने शादी की तो मुझे परिवार से रिश्ता तोड़ना पड़ेगा। मैंने कई बार समझाया लेकिन वे समाज के डर से राजी नहीं हुए।


आज इस बात को 5 साल हो गए हैं और मुझे किसी और लड़की से प्यार नहीं हुआ। दीप्ति ने भी मेरे लिए अपना काम छोड़ दिया था और अब उसे भी काम मिलने में दिक्कत हो रही है। मैंने कई बार उसे आर्थिक सहायता देने की कोशिश की, लेकिन उसने मना कर दिया।


आज, मैं खुद को और दीप्ति को इस स्थिति का दोषी मानता हूं। समाज की नाक ऊंची रखने के लिए मुझे अपने प्यार को खोना पड़ा।


Sunday, 22 September 2024

शादी का आधार संभोग होता है ये अच्छा तो सब अच्छा

 शादी का आधार संभोग होता है ये अच्छा तो सब अच्छा 

पर मॉर्डन जमाने में एक जरूरत और है वो है स्टेबल नौकरी पैसा और अच्छी लाइफस्टाइल 

जब मैं छोटी थी, तो मेरे ख्वाब बड़े थे। मुझे हमेशा लगता था कि मेरी शादी किसी अमीर और वेल-सेटल लड़के से होगी, जिसके पास बड़ी गाड़ी, शानदार घर, और बेहतरीन लाइफस्टाइल हो। मेरे पापा, मोहनलाल, हमेशा कहते थे कि पैसे में ही जिंदगी का सारा सुख नहीं होता, लेकिन मेरे लिए पैसा ही सब कुछ था। मुझे यकीन था कि अगर पैसा हो, तो सारी खुशियां अपने आप मिल जाती हैं।


फिर एक दिन, पापा ने मेरी शादी अर्जुन से तय कर दी। अर्जुन साधारण इंसान था, न उसके पास बड़ी गाड़ी थी, न ही महंगा घर। जब पापा ने यह रिश्ता तय किया, तो मुझे बहुत बुरा लगा। मुझे लगा कि मेरी पूरी जिंदगी के सपने बर्बाद हो गए हैं, और मैं कभी खुश नहीं रह पाऊंगी। 


शादी के बाद जब मैंने अर्जुन के साथ जीवन शुरू किया, तो उसका साधारण जीवन मुझे बहुत अखरता था। हर दिन मैं यह सोचती थी कि मेरी जिंदगी कैसी हो सकती थी, अगर मेरी शादी किसी अमीर व्यक्ति से हुई होती। अर्जुन बहुत ही साधारण था, लेकिन उसने कभी मुझे किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं होने दी। उसने हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखा और मुझे सम्मान दिया। फिर भी, मैं उसकी इन अच्छाइयों पर ध्यान नहीं दे रही थी, क्योंकि मेरा ध्यान बस उन चीज़ों पर था जो मेरे पास नहीं थीं।


कुछ महीने बीतने के बाद, मैंने अर्जुन की सादगी और ईमानदारी की गहराई को समझना शुरू किया। उसने बिना किसी भव्यता के, मेरे प्रति जो प्यार और सम्मान दिखाया, वह मेरी जिंदगी में असली खुशी लेकर आया। धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि जो चीजें मैंने अर्जुन के बारे में पहले नजरअंदाज की थीं, वे ही मेरी सच्ची खुशी की कुंजी थीं। 

आज, मैं अपने जीवन को देखती हूँ और महसूस करती हूँ कि मेरे पास वह सब कुछ है जिसकी मुझे ज़रूरत है। अर्जुन ने मेरे दिल को प्यार और सम्मान से भर दिया, और अब मुझे समझ में आता है कि असली दौलत पैसों में नहीं, बल्कि सच्चे प्यार और समझ में है। 

जब मैंने यह बात अपने पापा को बताई, तो वह मुस्कुराए और बोले, "बेटी, एक साधारण व्यक्ति दिल से प्यार और सम्मान करता है, और यही जीवन का असली सुख है।" अब मैं समझ चुकी हूँ कि असली दौलत प्यार और सम्मान में है, और मैं खुद को दुनिया की सबसे खुशकिस्मत लड़की मानती हूँ।

जीवन पुनरुक्त नहीं होता।

 मैंने सुना है कि एक रात ऐसा हुआ, एक पति घर वापस लौटा थका—मादा यात्रा से। प्यासा था, थका था। आकर बिस्तर पर बैठ गया। उसने अपनी पत्नी से कहा कि पानी ले आ, मुझे बड़ी प्यास लगी है। पत्नी पानी लेकर आयी, लेकिन वह इतना थका—मादा था कि लेट गया, उसकी नींद लग गयी। तो पत्नी रातभर पानी का गिलास लिए खड़ी रही बिस्तर के पास। क्योंकि उठाए, तो ठीक नहीं, नींद टूटेगी। खुद सो जाए, तो ठीक नहीं, पता नहीं कब नींद टूटे और पानी की मांग उठे, क्योंकि पति प्यासा सो गया है। तो रातभर गिलास लिए खड़ी रही।


सुबह पति की आंख खुली, तो उसने कहा, पागल, तू सो गयी होती! उसने कहा, यह संभव न था। तुम्हें प्यास थी, तुम कभी भी उठ आते! तो तू उठा लेती, पति ने कहा। उसने कहा, वह भी मुझसे न हो सका, क्योंकि तुम थके भी थे और तुम्हें नींद भी आ गयी थी। तो यही उचित था कि तुम सोए रहो, मैं गिलास लिए खड़ी रहूं। जब नींद खुलेगी, पानी पी लोगे। नहीं नींद खुलेगी, तो कोई हर्जा नहीं, एक रात जागने से कुछ बिगड़ा तो नहीं जाता है।


यह बात पूरे गांव में फैल गयी। सम्राट ने गांव के उस पत्नी को बुलाकर बहुत हीरे—जवाहरातों से स्वागत किया। उसने कहा कि ऐसी प्रेम की धारा मेरी इस राजधानी में थोड़ी भी बहती है, तो हम अभी मर नहीं गए हैं; अभी हमारी संस्कृति का प्राण जीवित है, स्पंदित है।


पड़ोस की महिला इससे बड़ी ईर्ष्या से भर गयी कि यह भी कोई खास बात थी! एक रात गिलास हाथ में लिए खड़े रहे, इसके लिए लाखों रुपए के हीरे—जवाहरात दे दिए हैं! यह भी कोई बात है?


उसने अपने पति से कहा कि देखो जी, आज तुम थके—मांदे होकर लौटना। आते से ही बिस्तर पर बैठ जाना। पानी मांगना। मैं पानी लेकर आ जाऊंगी। लेकिन तुम आंख बंद करके सो जाना और मैं खड़ी रहूंगी रातभर। और सुबह जब तुम्हारी आंख खुले, तो तुम इस—इस तरह के वचन मुझसे बोलना, कि तू क्यों रातभर खड़ी रही? तू उठा लेती। मैं कहूंगी, कैसे उठा सकती थी? तुम थके —मांदे थे। कि तू सो जाती! तो मैं कहूंगी, कैसे सो जाती? तुम्हें प्यास लगी थीं। और इतने जोर से यह बात चाहिए कि पड़ोस में लोगों को पता चल जाए, सुनाई पड़ जाए। क्योंकि यह तो हद हो गयी! जरा रातभर... और किसको पक्का पता है कि खड़ी भी रही कि नहीं, क्योंकि रात सो ली हो, झपकी ले ली हो और फिर सुबह उठ आयी हो, और बात फैला दी हो! मगर हमें भी यह सम्राट से पुरस्कार लेना है।


पति सांझ थका—मादा वापस लौटा। लौटना पड़ा, जब पत्नी कहे, थके—मांदे लौटो, लौटना पड़ा। आते ही बिस्तर पर बैठा। कहा, प्यास लगी है। पत्नी पानी लेकर आयी। पति आंख बंद करके लेट गया। कोई नींद तो आई नहीं, लेकिन मजबूरी है। जब पत्नी कहती है, तो मानना पड़ेगा। और फिर लाखों—करोड़ों के हीरे—जवाहरात उसके मन को भी भा गए।


अब पत्नी ने सोचा कि बाकी दृश्य तो सुबह ही होने वाला है। अब कोई रातभर बेकार खड़े रहने में भी क्या सार है? और किसको पता चलता है कि खड़े रहे कि नहीं खड़े रहे? वह भी सो गयी गिलास—विलास रखकर।


सुबह उठकर उसने जोर से बातचीत शुरू की कि पड़ोस जान ले। सम्राट के द्वार से उसके लिए भी बुलावा आया, तो बहुत प्रसन्न हुई। लेकिन जब दरबार में पहुंची, तो बड़ी हैरान हुई; सम्राट ने वहा कोड़े लिए हुए आदमी तैयार रखे थे, और उस पर कोड़ों की वर्षा करवा दी। वह चीखी—चिल्लाई कि यह क्या अन्याय है? एक को हीरे—जवाहरात; मुझे कोड़े? किया मैंने भी वही है!


सम्राट ने कहा, किया वही है, हुआ नहीं है। और होने का मूल्य है, करने का कोई मूल्य नहीं है। और जीवन में यह रोज होता है। अगर हृदय में स्पंदन न हो रहा हो, तो तुम कर सकते हो, लेकिन उस करने से क्या अर्थ है?


सारे मंदिर, मस्जिद, गिरजे, गुरुद्वारे कर रहे हैं। धर्म क्रियाकांड है। हो नहीं रहा है। गीता पढ़ी जा रही है, की जा रही है; हो नहीं रही है। तुमने सुन लिया है कि गीता को पढ़ने वाले पाप से मुक्त हो गए, मोक्ष को उपलब्ध हो गए। तुमने सोचा, हम भी हो जाएं! तुमने भी पढ़ ली। लेकिन तुम्हारा पढ़ना उस दूसरी पत्नी जैसा है। तुम परमात्मा को धोखा न दे पाओगे। साधारण सम्राट भी धोखा न खा सका, वह भी समझ गया कि ऐसी घटनाएं रोज नहीं घटती। और पड़ोस में ही घट गई! और वही की वही घटी, बिलकुल वैसी ही घटी! यह तो कोई नाटक हुआ।


जीवन पुनरुक्त नहीं होता। हर भक्त ने परमात्मा की प्रार्थना अपने ढंग से की है, किसी और के ढंग से नहीं। हर प्रेमी ने प्रेम अपने ढंग से किया है। कोई मजनू और शीरी और फरिहाद, उनकी किताब रखकर और पन्ने पढ़—पढ़कर और कंठस्थ कर—करके प्रेम नहीं किया है।


कोई जीवन नाटक नहीं है कि उसमें पीछे प्राम्पटर खड़ा है, और वह कहे चले जा रहा है, अब यह कहो, अब यह कहो। जीवन जीवन है। तुम उसे पुनरुक्त करके खराब कर लोगे। गीता तुम हजार दफे पढ़ लो; लेकिन जैसे अर्जुन ने पूछा था, वैसी जिज्ञासा न होगी, वैसी प्राणपण से उठी हुई मुमुक्षा न होगी। तो जो कृष्ण को सरल हुआ कहना, जो अर्जुन को संभव हुआ समझना, वह तुम्हें न घट सकेगा।

दोहराया जा ही नहीं सकता जगत में कुछ। प्रत्येक घटना अनूठी है। इसलिए सभी रिचुअल, सभी क्रियाकाड धोखाधड़ी है, पाखंड है। तुम भूलकर भी किसी की पुनरुक्ति मत करना, क्योंकि वहीं धोखा आ जाता है और प्रामाणिकता खो जाती है।

प्रामाणिक के लिए मुक्ति है, पाखंड के लिए मुक्ति नहीं है। और तुम कितना ही लाख सिर पटको और कहो कि मैंने भी तो वैसा ही किया था, मैंने भी तो ठीक अक्षरश: पालन किया था नियम का, फिर यह अन्याय क्यों हो रहा है? अक्षरश: पालन का सवाल ही नहीं है। हृदय के साथ उठे स्वर। ....

पांच सालों के बाद भी मीरा प्रेग्नेंट नहीं हो पाई थी।

 पांच सालों के बाद भी मीरा प्रेग्नेंट नहीं हो पाई थी। आदित्य और मीरा ने बहुत से डॉक्टरों से सलाह ली, टेस्ट करवाए, लेकिन कोई भी इलाज सफल नहीं हुआ।


मीरा को बच्चे की बहुत चाह थी, और वह इस बात को लेकर अंदर ही अंदर टूट रही थी। वह देखती कि उसकी सहेलियों के बच्चे हो गए थे, और वे सभी अपनी मां बनने की खुशी में मग्न थीं। हर बार जब मीरा किसी गर्भवती महिला को देखती, उसकी आँखों में उदासी और निराशा घर कर जाती।


आदित्य, जो एक बेहद समझदार और धैर्यवान पति था, हमेशा मीरा को हिम्मत दिलाता रहता था। उसने कभी मीरा को इस बात के लिए दोषी नहीं ठहराया और उसे समझाया कि वे दोनों किसी और उपाय के बारे में सोच सकते हैं—जैसे कि सरोगेसी या गोद लेना। लेकिन मीरा को यह सब विकल्प सही नहीं लगते थे। वह खुद माँ बनना चाहती थी, वह अपने बच्चे को अपनी कोख में पालना चाहती थी।


एक दिन, मीरा के मन में एक अजीब ख्याल आया। उसने सोचा, "अगर आदित्य और मैं बच्चे के माता-पिता नहीं बन सकते, तो क्या आदित्य का कोई दोस्त मुझे प्रेग्नेंट कर सकता है?" यह ख्याल अजीब था, लेकिन मीरा को लगता था कि यह एकमात्र उपाय हो सकता है।


आदित्य का सबसे करीबी दोस्त राहुल था, जो उनके परिवार का हिस्सा जैसा था। राहुल की शादी नहीं हुई थी, और वह मीरा और आदित्य के साथ काफी वक्त बिताता था। मीरा को राहुल पर हमेशा भरोसा था और वह उसे अपना अच्छा दोस्त मानती थी। धीरे-धीरे, मीरा के मन में यह ख्याल पक्का होता गया कि अगर वह राहुल से इस बारे में बात करे, तो शायद राहुल उनकी मदद करने के लिए तैयार हो जाए।


लेकिन यह बात आसान नहीं थी। मीरा जानती थी कि यह निर्णय न सिर्फ उनके रिश्ते को, बल्कि आदित्य और राहुल की दोस्ती को भी प्रभावित कर सकता है।


मीरा ने कई दिनों तक इस ख्याल को अपने दिल में रखा, लेकिन उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि वह राहुल से यह बात कैसे कहे। वह एक शाम राहुल और आदित्य के साथ बैठी हुई थी, जब राहुल ने मजाक में कहा, "तुम दोनों के बच्चे कब आएंगे? मैं तो चाचा बनने के लिए तैयार बैठा हूँ।"


मीरा का दिल धड़क उठा। उसने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "शायद तुम्हें ही कुछ करना पड़े।"


राहुल ने इसे मजाक के रूप में लिया, लेकिन मीरा के मन में यह बात बहुत गंभीर थी। उसने सोचा कि अब समय आ गया है कि वह राहुल से इस बारे में खुलकर बात करे।


कुछ दिन बाद, जब आदित्य ऑफिस में था, मीरा ने राहुल को मिलने के लिए बुलाया। वह बेहद नर्वस थी, लेकिन उसने साहस जुटाया और अपनी बात कहनी शुरू की।


"राहुल, मुझे तुमसे एक बहुत ही व्यक्तिगत और गंभीर बात करनी है," मीरा ने कहा, उसकी आवाज़ कांप रही थी।


राहुल ने ध्यान से उसकी ओर देखा और गंभीरता से कहा, "क्या हुआ मीरा? तुम तो परेशान लग रही हो। बताओ, मैं तुम्हारी कैसे मदद कर सकता हूँ?"


मीरा ने गहरी सांस ली और कहा, "राहुल, मैं और आदित्य पांच साल से बच्चे की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही हूँ। हमने सारे मेडिकल विकल्प आजमा लिए, लेकिन कुछ भी काम नहीं आया।"


राहुल ने सहानुभूति से सिर हिलाया, "यह बहुत दुखद है, मीरा। लेकिन तुम मुझसे यह क्यों कह रही हो?"


मीरा ने हिचकिचाते हुए कहा, "राहुल, मैं तुमसे कुछ मांगना चाहती हूँ, लेकिन मुझे नहीं पता कि तुम इसे कैसे लोगे। मैं चाहती हूँ कि तुम मेरी मदद करो... मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे प्रेग्नेंट करने में मदद करो।"


राहुल चौंक गया और कुछ देर तक कुछ नहीं बोला। उसकी आँखों में आश्चर्य और उलझन साफ दिखाई दे रही थी। "मीरा, यह तुम क्या कह रही हो? तुम समझ रही हो कि यह कितना बड़ा कदम है?"


मीरा ने आँसू भरी आँखों से कहा, "मैं जानती हूँ, राहुल। लेकिन मुझे लगता है कि यह एकमात्र उपाय हो सकता है। आदित्य को हमसे बहुत उम्मीदें हैं, और मैं चाहती हूँ कि हम माता-पिता बनें। लेकिन मैं उसे धोखा नहीं देना चाहती। मैं चाहती हूँ कि यह सब उसकी जानकारी और सहमति से हो।"


राहुल के लिए यह स्थिति बेहद कठिन थी। वह आदित्य का सबसे अच्छा दोस्त था और वह कभी नहीं चाहता था कि उसके दोस्त की शादी या उसकी दोस्ती पर कोई आंच आए। उसने मीरा की आँखों में देखा और फिर गहरी सोच में डूब गया।


कुछ देर की चुप्पी के बाद, राहुल ने कहा, "मीरा, मैं समझता हूँ कि तुम किस दर्द से गुजर रही हो। लेकिन यह रास्ता सही नहीं है। यह न सिर्फ तुम्हारे और आदित्य के रिश्ते को प्रभावित करेगा, बल्कि हमारी दोस्ती को भी खत्म कर सकता है। इस तरह की चीज़ें बहुत जटिल होती हैं। अगर तुम और आदित्य चाहो, तो कोई दूसरा वैज्ञानिक या सामाजिक उपाय ढूंढ सकते हो।"


मीरा ने अपनी आँखों से आँसू पोंछते हुए राहुल की बातों को सुना। वह समझ गई कि जो ख्याल उसके मन में था, वह गलत था। राहुल की बातों ने उसे यह समझाया कि रिश्तों में कोई भी कदम उठाने से पहले उसकी नैतिकता और भावनात्मक परिणामों के बारे में सोचना जरूरी होता है।


नई दिशा:

राहुल के समझदारी भरे जवाब ने मीरा को अपनी गलती का एहसास कराया। उसने महसूस किया कि उसका यह कदम उनके रिश्तों को और ज्यादा उलझा सकता था।


जब आदित्य घर आया, मीरा ने उससे खुलकर बात की और अपनी भावनाओं और संघर्षों के बारे में बताया। आदित्य ने उसकी बातें ध्यान से सुनीं और उसे समझाया कि वे दोनों मिलकर इसका कोई और हल निकाल सकते हैं। दोनों ने एक साथ मिलकर गोद लेने के बारे में सोचा, और उन्होंने तय किया कि वे एक बच्चे को गोद लेंगे और उसे अपना सच्चा प्यार देंगे।


निष्कर्ष:

यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में कोई भी निर्णय लेते समय उसके दीर्घकालिक परिणामों और रिश्तों पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना जरूरी होता है। कठिन परिस्थितियों में भी नैतिकता और रिश्तों की गरिमा बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। प्यार और रिश्तों में मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन उनका समाधान सोच-समझकर और ईमानदारी से किया जाना चाहिए।

Saturday, 21 September 2024

ननंद उसी दिन अपने घर चली गई.

 शादी कीं पहली रात ही मेरी ननंद नें मेरे पति के बारे ऐसी बात बताई जिसे सुनकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये.


हम लोग उनके मुकाबले कुछ भी नहीं है. पिताजी के पुराने परिचित होने के वजह से मेरी शादी उस घर में हो गई. विदा होकर घर में जाते ही मुझे पता चला कीं वो लोग कितने बड़े है. घर बहुत बड़ा था. पहली बार था जब उनका घर मैंने देखा था. सबकुछ बहुत अच्छा था.रात को मेरी ननंद मुझे अकेले में लें गई. मेरे समझ नहीं आया मुझे लगा कुछ बात करना होंगी.


उनका चहेरा उतरा हुआ था, जैसे की कोई बात वो मुझसे करना चाहती हो. मैंने उन्हें पूछा क्या हुआ आप डरी हुई सी क्यों हो?


मेरी नंद बोली भाभी मैं आपको कुछ बताना चाहती हूं . लेकिन तुम यह सुनकर आप हिम्मत रखना. इस बात को हमारे बीच में ही रखना. यह बड़ा घर है यहाँ बात फ़ैलते ज्यादा समय नहीं लगता और वो बात सबके सामने आ गई तो हमारे घर कीं इज़्ज़त मिट्टी में मिल जायेगी.


अब आप इस घर की बहू हो और आपको इस घर का मान रखना होगा. उनकी बाते सुनकर में सच में थोड़ा डर गई. मुझे समझ नहीं आए रहा था की वो क्या बोलना चाह रही है.


मैंने कहां आप बताये मुझे क्या बात है? मेरी नंद बोली की भाभी मेरा भाई आपको कोई सुख नहीं दे सकता.उसमें कुछ शारीरिक कमियां है जो कि मुझे पता है .आपसे यह बात छुपा कर शादी की गई है.


मेरा भाई रात में अक्सर बाथरूम में ही रहता है. पता नहीं वहाँ क्या करता जब भी उसे पूछो तो यही कहता है कीं उसका पेट ख़राब है.

कमरे में जानें के पहले अपने पति के लिये यह बाते सुनकर मुझे समझ नहीं आ रहा था कीं में क्या करू. 

मेरी ननंद ने कहा कि आप उनसे कोई बात मत करना, थोड़ा समय उसके साथ बिताओ. फिर उनसे खुल कर बात करो. अगर हमसे कुछ हो सकता है तो हम जरूर करेंगे. हम तुम्हारे साथ है

आपको अकेला नहीं छोडेंगे. 


सुहागरात वाली रात यह सब सुनकर मैं अपने कमरे में जा रही थी. मुझे अब डर लगने लगा था.

यही सब सोच रही थी, की मेरे पति कमरे में आये. कमरे का दरवाजा बंद किया. और दरवाजे से ही पेट पर हाथ लगाते हुऐ आये बिस्तर पर मेरी तरफ पीठ करके बैठ गए, और बोले कीं उनका पेट ख़राब. कुछ ही सेकंड में वो उठकर बाथरूम में चले गये. बिलकुल वैसा ही हुआ जैसा कीं मेरी नंद नें मुझसे कहा था.


पेट ख़राब हो तो थोड़ी देर बाद वो बाथरूम से बाहर आ जाते लेकिन वो करीब 1 घंटे तक बाथरूम में ही रहें. मैं बाहर चुपचाप अपने बिस्तर पर बैठी रही.


उन्हें मैंने आवाज भी नहीं दी. बस यही सब सोचते सोचते मैं बिस्तर पर लेट गई. करीब 2 घंटे बाद वो बाथरूम से निकले.


मेरा अब उनसे बात करने का मन ही नहीं था. मुझे लगा की मेरे साथ धोखा किया गया. वो भी अपने बिस्तर कीं साइड पर जाकर सो गये.


सुबह तक मैं अपने आप को खुश किस्मत मान रही थी और रात होते होते अपनी किस्मत को कोसने लगी. सुबह में जल्दी उठी और बाथरूम में गई.


बाथरूम में जैसे ही गई मेरे होश उड़ गये क्यों कीं बाथरूम में एक नयी नाइटी थी. साथ ही मेकअप का समान. यह सब क्या था मुझे समझ नहीं आ रहा था.


एक ऐसे इंसान से मेरी शादी क्यों करवा दी. सुबह मेरी ननंद नें मुझसे पूछा क्या हुआ रात में. मैंने कहा वही जो आपने बताया था .यह कहकर मैं रोने लगी.


मेरी ननंद ने कहां मैं माँ से कह रही थी ऐसे किसी लड़की की ज़िन्दगी ख़राब मत करो, लेकिन किसी नें मेरी बात नहीं मानी. अब आप क्या ऐसे ही घुट घुट कर यहाँ रहेगी?


मेरी ननंद बोली की आप जो भी फैसला लेंगी मैं आपके साथ हूं लेकिन आपको यह वचन देना होगा की यह राज बाहर नहीं निकलेगा.


अगली रात फिर वो कमरे में आये. मुझे अब उनकी तरफ देखने का भी मन नहीं हो रहा था. मैं चुपचाप अपनी साइड पर सो गई,क्योंकी अब बात करने को रखा क्या था.


उन्होंने भी अभी तक कुछ बात नहीं की,उसकी वजह भी मैं जानती थी. थोड़ी देर वो बिस्तर पर बैठे रहें और फिर उठकर वो बाथरूम में चले गये. मैं समझ गई थी कीं वो क्या करने गये है. थोड़ी देर बाद बाथरूम से चीज़े गिरने की आवाज आने लगी, कुछ टूटने की. थोड़ी देर बाद आवाज रुकी और इस बार वो जल्दी ही बाथरूम से बाहर आ गये. आकर बिस्तर पर सो गये.


हमारे बीच कोई बात नहीं हो रही थी. मैं सोच रही थी की मैं क्या करूं?


यही सब सोचते सोचते नींद आ गई. सुबह जल्दी उठी और फिर में बाथरूम में गई. लेकिन इस बार बाथरूम में जब गई तो सब कुछ बिखरा हुआ था. नयी नाइटी को फाड़ दिया था, मेकअप का समान बिखरा हुआ था. बाथरूम में कचरे में एक कागज भी था, जिस पर लिखा था टू माय बूटीफुल वाइफ.


मेरे मन में अब शक आया की यह समान और कपडे कहीं मेरे लिये तो इन्होने नहीं रखें. लेकिन फिर मैंने सोचा की मेरी ननंद मुझसे झूठ क्यों बोलेगी. अभी मैंने उनसे कुछ बात नहीं की. 


सुबह मेरी ननंद फिर मुझसे सहानुभूति जता रही थी मुझे उनकी बातो से लगा की वो चाहती है की मैं इस घर को छोड़ कर इस घर से चली जाऊं. मुझे अब मेरी ननद पर शक हुआ.


मैंने घर की पुरानी नौकरानी से बात की. मैंने बातों बातों उससे पूछा की मेरे पति कैसे इंसान है? वो बोली की वो तो बहुत सीधे है. उनकी माँ और बहन तो चाहती थी की उनकी शादी उनकी बहन के पति के रिश्तेदार से हो. बहन और माँ ने तो बहुत कोशिश कीं लेकिन उनके पिताजी नहीं माने और उनके दोस्त की बेटी यानि आपसे शादी करवा दी. वो दोनों तो आपकी शादी के खिलाफ थे. कई दिनों तक घर में विवाद भी होता था.


अब मुझे अब पता चल गया था की मेरी ननंद मुझे क्यों भगाना चाहती थी. इसलिये उन्होंने मुझसे झूठ कहा था. उन्होंने शायद मेरे पति यानी कि अपने भाई से भी मेरे बारे में कुछ कहा होगा. 


रात को मैं अपने पति से बात करने का इंतजार कर रही थी. वो कमरे में आये. तो उनका मुँह तो उतरा हुआ था.


यह पहली बार था जब मैं उनसे बात करने वाली थी. उनके आते ही मैंने कहा, आप मुझसे कुछ बात करना चाहते है? 


वो बोले अब बात करने को रखा क्या है? पापा का विश्वास था की वो घर अच्छा है. इसलिये मैंने माँ और बहन की ना सुनकर तुमसे शादी की और तुमने सच छिपाया. 

मैंने बोला सच, कौन सा सच?


यह सच की तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहती थी. तुम्हारी ज़िन्दगी में अभी भी कोई और है. 


यह बात तुमने ही तो मेरी बहन को बताई थी. घर की इज़्ज़त और पापा के कारण मैं चुप हूं. कुछ कदम नहीं उठा रहा. मैंने भी देख लिया कि तुम्हारे लिए मैं कितना मायने रखता हूं.


सुहागरात ज़िन्दगी में बहुत स्पेशल होती है. लेकिन मेंरे बाथरूम में 2 घंटे रहने पर भी तुम्हे फर्क नहीं पड़ा. बहन नें सही कहा था, की तुम आवाज़ भी नहीं दोगी, बात भी नहीं करोगी.


मैंने पूछा आपसे बाथरूम में रुकने को उन्होंने कहा था? उन्होंने बोला, हां उसने ही कहा था कि तुम्हारी सच्चाई देखनी है तो मुझे यह करना ही पड़ेगा? 


और वो कपडे और मेकअप? 


वो मेरी बहन नें रखा था, कहा था पहली रात का गिफ्ट है, तुम्हारे लिये . 


मैं उठकर उनके पास गई और उनसे कहा आपको पता है उन्होंने मुझे क्या कहा? 


फिर मैंने उन्हें सारी बात समझाई. हम दोनों को यह बात समझ में आ चुकी थी कि वह चाहती थी, हम दोनों में गलतफहमी हो और हम अलग हो जाये. ताकि वो जो चाहती है वो पूरा हो जाये.


सारी सच्चाई जानकर मेरे पति को बहुत गुस्सा आया, लेकिन मैंने कहा नहीं, अब हम इस बात को यही ख़तम करेंगे और किसी को कुछ नहीं कहेँगे. 


उस रात मेरी सारी परेशानी और ग़लतफहमी दूर हो गई. वो थी मेरी सही मायने में सुहागरात. 


अगली सुबह मेरी ननंद नें मुझसे पूछा की मेरा क्या फैसला है? मैं क्या करने वाली हूं? 


मैंने कहा की मैं इस घर की बहू बनकर सारी जिंदगी इस घर में रहना चाहती हूं, जिसे सुनकर मेरी ननंद हैरान हो गई.

मेरे चेहरे पर मुस्कान देखकर उनका चेहरा उतर गया और उन्हें समझ में आ गया कि हम दोनों को सारी सच्चाई पता चल चुकी है और हमारे बीच की सारी गलतफहमियां दूर हो गई है. ननंद उसी दिन अपने घर चली गई.


रिश्ते टूटते नहीं। बस रिश्ते दिल से होना चाहिए

 कोर्ट में पेपर पर आखिरी साइन होते ही वकील मुस्कुराया और बोला, “लो मैडम, अब आपका डिवोर्स हो गया है। कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये हर्जाने के तौ...