sunilrathod

Thursday, 5 September 2024

आँख मूंदकर विश्वास करना कितना खतरनाक हो सकता है।

 अजय की नींद अलार्म की कर्कश ध्वनि से टूट गई। वह धीरे-धीरे उठकर गेट की ओर बढ़ा, जहाँ बाहर रखी दूध की थैली उठानी थी। लेकिन जैसे ही उसने गेट खोला, उसकी आँखें फटी रह गईं। उसके घर के कम्पाउंड में, दीवार के सहारे एक लड़की बैठी हुई थी, जो शायद नींद में थी। अजय ने चौंककर पूछा, "अरे! कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रही हो?"


अजय की तीखी आवाज़ से लड़की की नींद टूट गई। वह घबरा कर उठी और फिर अचानक अजय के पैरों में गिर गई। "मुझे बचा लीजिए, साहब! वे लोग मुझे मार डालेंगे। प्लीज, मुझे बचा लीजिए," लड़की ने काँपती आवाज़ में कहा। उसकी हालत देखकर अजय हड़बड़ा गया। उसने अपने पैर छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन लड़की ने उन्हें कसकर पकड़ रखा था।


अजय ने झल्लाकर कहा, "पहले मेरे पैर छोड़ो और सच-सच बताओ कि तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रही हो? कौन तुम्हें मारने की धमकी दे रहा है?"


लड़की ने आँसुओं के बीच कहा, "साहब, मैं सब कुछ सच बताऊंगी, पर पहले मुझे अंदर ले चलिए। वे लोग यहीं कहीं छिपे होंगे, अगर उन्होंने मुझे देख लिया तो वे मुझे मार डालेंगे।" लड़की की आवाज़ में इतनी गहरी दहशत थी कि अजय निरुत्तर हो गया।


अजय ने चारों ओर नजर दौड़ाई, लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। थोड़ी देर सोचने के बाद उसने कहा, "ठीक है, मेरे पीछे आओ, लेकिन पहले रोना बंद करो।"


लड़की चुपचाप अजय के पीछे-पीछे घर के अंदर आ गई। अजय ने दरवाजा बंद कर लिया और उसे सोफे पर बैठने के लिए कहा। खुद भी सामने वाले सोफे पर बैठते हुए उसने पूछा, "अब बताओ, तुम कौन हो, और मेरे घर के कम्पाउंड में क्या कर रही हो? कौन तुम्हें मारने की धमकी दे रहा है?"


लड़की ने आँसू पोंछते हुए कहा, "साहब, मेरा नाम नेहा है। मेरी शादी विकास से हुई थी। वह एक बदमाश निकला, जिसने शराब, जुआ और सट्टे में अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली। उसने मुझे 20 लाख रुपये में अपने पड़ोसी, विनोद, को बेच दिया।"


अजय ने हैरानी से पूछा, "क्या? ये तुम क्या कह रही हो?"


नेहा ने सिर झुका लिया और कहा, "विकास मुझे विनोद के घर ले गया और कहा, 'लो, अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है।' और फिर चला गया। जब मैंने जाने की कोशिश की, तो विनोद ने मुझे पकड़ लिया और कहा, 'मैंने तुम्हें 20 लाख रुपये में खरीदा है, ऐसे कैसे जाने दूंगा?' तब मुझे एहसास हुआ कि मेरी सुंदरता ही मेरे विनाश का कारण बन गई थी।"


अजय ने नेहा की स्थिति को समझते हुए उसे सांत्वना दी, "अब रोना बंद करो। आगे क्या हुआ, बताओ।"


नेहा ने बात जारी रखी, "उस दिन से मेरा शोषण शुरू हो गया। जब मैंने विरोध किया, तो उसने मुझे बुरी तरह मारा। मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस ने मेरी रिपोर्ट लिखने के बजाय विनोद को बुला लिया। थाने में ही विनोद ने मेरी जमकर पिटाई की, और पुलिस वाले मुस्कुराते रहे। उसके बाद से मैं विनोद की गुलाम बन गई।"


अजय कुछ कहने ही वाला था कि अचानक डोरबेल बज उठी। उसने स्क्रीन पर देखा कि दो अजनबी चेहरे बाहर खड़े थे। नेहा ने डरते हुए कहा, "ये वही लोग हैं! दरवाजा मत खोलना, साहब, वे लोग मुझे मार डालेंगे!"


अजय ने ऑडियो ऑन कर पूछा, "कौन है?"


बाहर से आवाज आई, "साहब, एक लड़की है, वह यहां आई क्या?"


अजय ने जवाब दिया, "नहीं, यहां कोई नहीं है। अब जाओ यहां से।"


जब वे लोग चले गए, तो नेहा ने अजय का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "साहब, आपने आज मेरी जान बचाई है। मैं आपकी जिंदगी भर गुलाम रहने को तैयार हूं।" उसने अजय को गले लगा लिया, लेकिन अजय ने तुरंत उसे पीछे हटने को कहा।


थोड़ी देर बाद, नेहा ने एक तस्वीर की ओर इशारा करते हुए पूछा, "ये लड़की कौन है आपके साथ?"


अजय ने हंसते हुए कहा, "वह मेरी पत्नी, स्वाति है। आज दोपहर तक वह घर आ जाएगी।"


नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा, "तो क्या मैं भी उनसे मिल सकती हूँ?"


अजय ने गंभीरता से मना करते हुए कहा, "नहीं, तुम उनसे नहीं मिल सकती। अगर वह तुम्हें यहां देखकर कुछ गलत समझ बैठी तो?"


नेहा ने समझने का अभिनय करते हुए कहा, "आप सचमुच अपनी पत्नी से बहुत डरते हैं!"


अजय ने थोड़ा मुस्कुराते हुए उसे किचन में फ्रेश होने के लिए भेजा और खुद सैंडविच बनाने की तैयारी में लग गया।


कुछ देर बाद, नेहा ताजगी से भरी हुई किचन में आई, लेकिन अजय का ध्यान उसके कपड़ों की ओर गया। वह स्वाति के कपड़े पहनकर आई थी, लेकिन कपड़े उसे तंग आ रहे थे, जिससे उसके शरीर के उभार और भी स्पष्ट हो गए थे। अजय उसकी ओर देखता रह गया।


तभी फिर से डोरबेल बजी। इस बार अजय ने स्क्रीन पर देखा कि पुलिस खड़ी थी। उसके दिल की धड़कन तेज हो गई। पुलिस ने अंदर आकर पूरे घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान, बेसमेंट से किसी लड़की की घुटी-घुटी आवाज़ सुनाई दी।


पुलिस ने बेसमेंट में जाकर देखा, तो नेहा, जिसे अब श्वेता के नाम से पहचाना गया, हाथ-पैर बंधी और घायल अवस्था में पड़ी थी। उसने पुलिस को बताया कि अजय ने उसे किडनैप किया था।


पुलिस ने अजय को गिरफ्तार कर लिया। अजय की पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी। उसने जो मदद की थी, वह अब उसके लिए बर्बादी का कारण बन गई थी। श्वेता उर्फ नेहा ने उसे धोखा दिया था, और अब उसकी पत्नी स्वाति भी घर लौटने वाली थी। अजय समझ नहीं पा रहा था कि वह इस हालात से कैसे निकले।


शेखर और उसके साथियों ने अब अजय से एक करोड़ रुपये की मांग की, ताकि वह मामले को दबा सकें। अजय को मजबूरन पैसे देने पड़े, और उसने स्वाति के आने से पहले ही उन्हें वहां से रवाना कर दिया।


उस दिन के बाद अजय ने सीख लिया कि इस दुनिया में किसी पर भी आँख मूंदकर विश्वास करना कितना खतरनाक हो सकता है। उसने यह कड़वा सबक हमेशा के लिए याद कर लिया।

Wednesday, 4 September 2024

आठ वर्ष हो चुके थे शादी को, और मेरी गोद अब भी खाली थी

 आठ वर्ष हो चुके थे शादी को, और मेरी गोद अब भी खाली थी। हर दिन तानों से भरे होते, पति का बेरुखापन अंदर तक घुटन पैदा कर रहा था। मैंने हर संभव कोशिश की, डॉक्टर से जांच करवाई, परंतु सब रिपोर्ट्स साफ थीं कि समस्या मुझमें नहीं, मेरे पति में है। फिर भी, घर के लोग मुझे ही दोषी ठहराते थे। यह सोचकर कि मैं बांझ हूँ, मेरे अस्तित्व को ही खत्म कर रहे थे।

रोज़ के ताने, समाज के सवाल, और पति का पीकर आकर मुझ पर हाथ उठाना—ये सब मेरे जीवन का हिस्सा बन गए थे। कितनी बार घर छोड़कर मां के पास चली गई, सोचते हुए कि शायद मुझे समझने वाला कोई मिलेगा। पर मां, समाज की परवाह करते हुए, मुझे हर बार ससुराल वापस भेज देतीं। "लोग क्या कहेंगे?"—इस सवाल ने मेरी मां को भी मजबूर कर दिया, और मैं फिर वही चक्रव्यूह में फंस जाती थी।

सहना औरत का गहना है, ऐसा सुना था, पर अब समझ आया कि सहना तो औरत के लिए एक सजा है। एक ऐसी सजा, जिसके लिए वह दोषी भी नहीं होती। मेरे सब्र का बांध अब टूट चुका था। आखिर मेरा कसूर क्या था? मैंने ठान लिया कि अब और नहीं सहूंगी। तलाक का फैसला कर लिया और घर हमेशा के लिए छोड़ दिया। मां के पास आ गई, और इस बार ठान लिया कि वापस नहीं जाऊंगी।

शुरू में मां ने मुझे समझाया, लेकिन इस बार मैंने अड़ने की ठान ली थी। आखिरकार, मां ने भी मेरी बात समझी और इस बार मेरा साथ दिया। ससुराल वालों ने धमकियां दीं, मुझे डराने की कोशिश की, पर मैं अपनी जिद पर अड़ी रही। तलाक हो गया, और मैंने बदले में कुछ नहीं लिया, सिर्फ अपनी आजादी।

कुछ समय बाद, एक दिन किसी ने आगे बढ़कर मेरा हाथ थामा। पहले तो मैं डरी, लेकिन मां ने समझाया और मेरी दूसरी शादी कर दी। नए घर में सब कुछ अच्छा था। धीरे-धीरे मैं अपने पुराने घावों को भूलने लगी, और अब मैं मां बनने वाली थी। पहले पति के चेहरे पर कुदरत ने एक ऐसा तमाचा मारा कि वह तिलमिला उठा। उसकी असलियत समाज के सामने आ गई थी।

अब मैं आठवें महीने में हूँ, और कुछ ही दिनों में मेरी गोद संतान से भर जाएगी। इस बार मैं खुद को दोषी महसूस नहीं करती। मैंने अपने पहले पति को सबक सिखाया—निर्दोष होकर भी बांझ का लेबल क्यों ढोएं? क्यों अपने जीवन को बर्बाद करें उन लोगों के लिए जो हमें सिर्फ दोषी ठहराते हैं?

ये मेरी सच्ची कहानी है, और आज मैं गर्व से कह सकती हूँ कि मैंने सही फैसला लिया। अब मैं खुद को आजाद और खुशहाल महसूस करती हूँ। ऐसे मर्दों को सबक सिखाना ही चाहिए, ताकि वे जान सकें कि औरत की भी एक हद होती है, और उसे तोड़ना आसान नहीं।

जानकी बुआ नही रहीं एक सप्ताह पहले हीं

 जानकी बुआ नही रहीं एक सप्ताह पहले हीं ये मनहूस खबर मुझे मिली थी।जानकी बुआ से बरसों पहले किया वादा मुझे याद आ रहा था, मैं मौके की तलाश में थी।


हमारे पड़ोस में जानकी बुआ उनके पति दो बेटे,दो बेटियां जिनकी शादी हो चुकी थी और दो बहुएं पोता पोती से भरा संपन्न परिवार रहता था।मम्मी के ससुराल के आसपास के किसी कस्बे में जानकी बुआ का मायका था।इसी से दोनो में ननद भौजाई का रिश्ता कायम हो गया था।मुझे भी जानकी बुआ से खास लगाव था।


घर में कुछ खास बनता मुझे जरूर खिलाती। बाजार जाती तो कभी क्लिप तो कभी सुंदर सा दुपट्टा कभी कुछ मेरे लिए जरूर लाती।

              

एक बात मुझे बहुत अजीब लगती बुआ कभी अपने पति से बात नहीं करती। घर में मम्मी पापा को हर मसले पर एक दूसरे की राय हंसी मजाक तो कभी गम्भीर विषय पर विचार करते देखती।पर बुआ का कमरा अलग था और उनके पति का अलग।दोनो भईया और भाभी भी उनसे बात नही करते थे।


बिरजू नाम का एक आदमी जो बाजार से सामान लाने से लेकर किचेन में दोनो भाभियों की मदद करता वही उनको खाना नाश्ता दवा देता था।मेरी उत्सुकता उम्र के साथ बढ़ती जा रही थी पर हिम्मत नही होती बुआ से पूछने की।


मेरा कॉलेज की मैगजीन में मेरी लिखी एक छोटी सी कहानी छपी।मैं घर में सबको दिखा दौड़ते हुए बुआ के पास गई।बुआ चश्मा लगा कर बड़े गौर से मेरी कहानी पढ़ी।मेरे सर पर हाथ रखा।खूब आशीर्वाद दिया और मेरे पसंद की मिठाई मुझे अपने हाथों से खिलाई।


फिर बहुत गंभीर स्वर में मुझसे कहा तनु मुझसे वादा करो जब मैं नहीं रहूंगी दुनिया में तब तुम मेरी कहानी लिखना, जो आज मैं तुझे सुनाऊंगी।मैने वादा किय,बुआ मुझे लेकर पार्क चली गई।


 बुआ ने कहना शुरू किया मेरी शादी सत्रह साल की उम्र में हो गई।मेरी खूबसूरती देख मेरे ससुर मेरे पिता से मेरा हाथ अपने इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर बेटे के लिए मांग लिया।मेरी शादी हो गई।सब कुछ अच्छे से चल रहा था मैं चार बच्चों की मां बन गई थी।पच्चीस साल की उम्र में हीं।सास ससुर ननद जेठ जेठानी सब मुझसे खुश रहते।


कुछ दिनों से मेरे पति घर देर से आ रहे थे।मैने एक दिन पूछा तो बोले एक महात्मा शहर में आए हैं उनका प्रवचन सुनने जाता हूं।मेरे पति बहुत अच्छे वक्ता भी थे।उनकी आवाज का सम्मोहन लोगों को मंत्र मुग्ध कर देता।छोटे छोटे बच्चों और घर परिवार में उलझी मैं ज्यादा ध्यान नहीं दिया।


धीरे धीरे मेरे पति के घर आने का अंतराल बढ़ता गया। फिर मेरे पति एक कम उम्र की खूबसूरत नई नई दीक्षा ली साध्वी के साथ प्रचार के लिए जाने लगे।घर खर्च ससुर जी हीं चलाते थे।उनका कहना था तुम लोग अपने पैसे जमा करो।

               

उड़ते उड़ते मेरे कानों में खबर पहुंची मेरे पति उस साध्वी के साथ प्रचार के लिए विदेश जाने वाले हैं।जब घर आए तो गेरुआ वस्त्र गले में माला और बाल मुड़े हुए।मैं तो पैर पकड़ के रोने लगी।बच्चों का वास्ता दिया पर,पासबुक कुछ कपड़े और कागजात लेकर चले गए ,ये कहते हुए मैं मोह माया से मुक्त हो गया हूं।मुझे असली और सच्चा ज्ञान मिल गया है।

               

हंसते खेलते परिवार पर मानो बिजली गिर गई हो।मैं बच्चों को पकड़ कर रोती फिर उन्हे चुप कराती। अकाउंट के सारे पैसे भी लेकर चले गए थे मेरे पति। ससुर को दिल का दौरा पड़ा वो ये आघात झेल नहीं पाए।सब की नजरें बदल गई थी।सास मुझे कुलच्छिनी नाम से हीं बुलाती। कौड़ी कामख्या की जादूगरनी है ये अपने रूप से ससुर को मोहित कर लिया।अब पति और ससुर दोनो को घर से दूर कर दिया जेठानी और उनके बच्चे मुझसे नौकरानी सा व्यवहार करते। मेरे बच्चों पर भी उन्हे तरस नही आता था।सुना बिस्तर ओह रात भर रोती रहती तकिया गिला हो जाता।कैसे कटेगी जिंदगी।


    एक रात जेठ कमरे में आए और बोले मुझे खुश रखोगी तो सब ठीक हो जायेगा,मैं सिहर उठी,ओह जेठ का ये रूप।


                  

मैं मायके चली गई बच्चों के साथ,बाबूजी रिटायर हो गए थे, भईया पेंशन का पैसा उठा कर लाते और भाभी के हाथ में दे देते।अम्मा बाबूजी भी अपनी मजबूरी जाहिर कर चुके थे।बुढ़ापा हमारा इन्ही के सहारे कटेगा, हमलोग मजबूर हैं जानकी भाभी भी गिरगिट की तरह रंग बदल चुकी थी।

                

मेरे बचपन की सहेली मुझसे मिलने आई मेरा दुख दर्द सुनकर उसने कहा जानकी जिसका पति उसका साथ छोड़ देता है उसका कोई मायका ससुराल नही होता।तू हिम्मत कर मेरे पति वकील हैं जितना हो सकता है तुम्हारी मदद करेंगे।रात भर सोचकर कल बताना,मैं रात भर सोचती रही बच्चों से नौकरों सा बर्ताव स्कूल में बच्चों को दूसरे बच्चे चिढ़ाते थे देखो साधु का बेटा आ गया। बच्चे रोते हुए कहते कल से स्कूल नहीं जाना।और मैने मन बना लिया।पति अपनी नौकरी से इस्तीफा दे चुके थे।


          

मैं अपनी सहेली से सुबह सुबह हीं दृढ़ संकल्प के साथ मिलने चली गई।उसके पति के कहे के अनुसार मुझे ससुराल में करना था। ससुराल में खूब ड्रामा हुआ मैने कहा मेरे हिस्से के घर का पैसा दे दीजिए नही तो कानूनी कार्रवाई करूंगी और किसी दूसरे से बेंच दूंगी।


सहेली के पति का नाम लेकर मुझे चरित्रहीन भी कहा गया,बेटा कम उम्र की साध्वी के साथ देश विदेश में क्या कर रहा है कोई पूछने वाला नही और मैं चार बच्चों को लेकर दूसरे शहर चली आई।अपने हिस्से के घर के पैसे मैं ले चुकी थी,यही मेरी हिम्मत थी।चारों बच्चों का नाम सरकारी स्कूल में लिखा दिया,एक कमरे में सिलाई का काम शुरू किया,टिफिन भी बनाती,बच्चे सहायता करते। बच्चों ने भी खूब साथ दिया,पढ़ने में भी खूब मन लगा रहे थे।


बाहर की दुनिया एक अकेली जवान औरत के लिए कितनी खौफनाक होती है ये कड़वी सच्चाई मेरे सामने आ रही थी। मजबूरी में मैं सिंदूर लगा रही थी।जिसके नाम से मैं नफरत करती थी उनके नाम का सिंदूर लगाना उफ्फ।

                 


छोटा सा सिलाई सेंटर और टिफिन का काम मुझे सोचने का वक्त नहीं देता पर कभी कभी आंखें बरस पड़ती।

               


समय गुजरता गया।बेटा वरुण और वैभव दोनों नौकरी करने लगे।उन्होंने पहले दोनो बहनों की शादी करने के बाद अपनी शादी करने का संकल्प लिया था।


तनु स्कूल में टीचर हो गई और मनु इंफोसिस में इंजीनियर।दोनो की शादी खूब धूमधाम से हो गई।शादी से पहले सुनने में आया की मेरे पति लौट आए हैं और यहां आना चाहते हैं।मैने साफ इंकार कर दिया।नासूर बने जख्म रिसने लगे थे।

                             

मैने दोनो बेटियों का कन्यादान लोटा रखकर किया।दोनो बेटों की शादी भी अच्छे से संपन्न हो गई।

        

बच्चों ने मेरा काम करना नौकरी लगते हीं छुड़वा दिया था।एक एनजीओ से जुड़ी थी।एक दिन दीन हीन से मेरे पति हाथ जोड़े दरवाजे पर खड़े थे आंखों से पश्चाताप के आठ आठ आंसू बह रहे थे।


मुझे माफ कर दो जानकी,और मैं पत्थर बन चुकी थी। चाहती तो लात मार कर बाहर कर देती पर मुझे उनके गुनाह के लिए उनकी आंखों में हमेशा आंसू देखनी थी।


मैं पंद्रह सालों में एक घर में रहते हुए भी कभी उनसे बात नही की है.. बच्चे भी उनसे बात नही करते। बेटियां आती है पूरा परिवार हंसता है घूमने जाता है ये पश्चाताप के आंसू अपने कमरे में बहाते रहते हैं।मेरी जिंदगी के खूबसूरत पल को जिसे इस इंसान ने तिल तिल कर मरने के लिए छोड़ दिया।


मेरे बच्चों का बचपन मेरी जवानी सब कुछ इस इंसान ने दांव पर लगा कर दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया।बच्चे गर्व करते हैं मुझ पर बहुएं और दामाद भी मेरी बहुत इज्जत करते हैं।और ये इंसान घर के एक कोने में बेकार की चीज जैसा पड़ा आंसू बहाता रहता है।पोता पोती भी उसके पास नही जाते।


 जो भी मुझसे इसके बारे में पूछता है, मैं कहती हूं मेरा तथाकथित पति है।जो अपनी जिम्मेवारियों से मुंह मोड़कर संन्यासी बनने गया था, आज सब कुछ रहते हुए भी इतना अकेला है की आंसू बहाता रहता है।


महात्मा जी और उनके चेलों ने इसका जमा पूंजी खतम होते हीं आश्रम के कामों में लगा दिया और जब बीमार पड़ा और कमजोर हो गया तो भगा दिया। इसके घरवालों ने भी इसे नही रखा और यहां भेज दिया।


 ये उदाहरण है हमारे समाज के उन मर्दों के लिए जो शादी कर बच्चे पैदा करते हैं और फिर संन्यासी बनने चले जाते हैं।उनका यही हस्र होता है।बिरजू खाना पानी नाश्ता सब कमरे में दे आता है।


 वो भी इससे बात नही करता.. बच्चे बड़े हो गए तो मैने सिंदूर लगाना भी छोड़ दिया। मैं इतनी दूर आ चुकी हूं की इसका होना या नहीं होना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता।औरत त्याग ममता सहनशीलता की देवी होती है पर। उसका एक रूप ये भी है।


पूरा वातावरण बोझिल हो चुका था।बुआ बोली मैं दुबारा अपने मायके भी कभी नहीं गई ना हीं ससुराल से कोई रिश्ता रखा है।सब ठीक हो जाने पर उन लोगों ने नजदीकियां बढ़ानी चाही पर मैने और बच्चों ने साफ नकार दिया।

          

 शाम हो चुकी थी हम दोनों वापस धीरे धीरे घर की ओर बढ़ने लगे।मैने बुआ का हाथ जोर से अपने हाथों से पकड़ लिया था।


#best #virals #viralpost #viralpage #town #job #engineering #bhua #patio #maschine जय माता

बहन-बेटी का घर न बने।

 बेटियों, जब तुम शादी करके किसी नए घर में जाती हो, तो यह जरूरी नहीं कि वह घर तुम्हारे मायके जैसा हो। हर घर में हालात अलग होते हैं। जिस तरह की सुख-सुविधा तुम्हें मम्मी-पापा के घर में मिली है, वह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी मिल जाए। 🌸


आज सुबह मैं अपने पड़ोसी शर्मा जी से मिला। उन्होंने उदास होकर बताया कि उनकी बेटी हमेशा के लिए अपने पति को छोड़कर मायके आ गई है और अब वह तलाक की मांग कर रही है। 😔 मैंने पूछा, "क्या हुआ, बेटी को क्या परेशानी है?" शर्मा जी ने बताया कि उनकी बेटी कहती है, पति की कमाई कम है और वह उसके शौक पूरे नहीं कर पाता। इसलिए वह अब उस व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहती। 😕💔


मैंने फिर शर्मा जी से कहा कि यह बात सिर्फ उनकी बेटी के लिए नहीं, बल्कि हर मां-बाप के लिए एक सीख है। 👨‍👩‍👧‍👦


आपको अपने बच्चों को यह समझाना चाहिए कि शादी के बाद की जिंदगी मायके जैसी नहीं होती। मायके में जो सुख-सुविधाएं मिलती हैं, वह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी मिलें। हर घर की अपनी परिस्थितियां होती हैं। 💫


जैसे अगर पिता के घर में लाइट जाते ही इनवर्टर चालू हो जाता है, तो यह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी ऐसा हो। 😅 अगर मम्मी-पापा ने जन्मदिन पर महंगे गिफ्ट दिए हैं, तो यह जरूरी नहीं कि पति भी इतना महंगा गिफ्ट दे। 🎁 अगर मायके में तुम कार में घूमती थीं, तो यह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी कार हो, हो सकता है वहां साइकिल हो। 🚴‍♀️


मैं यह नहीं कहता कि तुम्हारे शौक गलत हैं, परंतु रिश्तों में प्रेम और समझौता ही सबसे बड़ी संपत्ति होती है। 💖 किसी भी रिश्ते में समर्पण और एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझना जरूरी है। अगर किसी बात से असहमति हो तो उसे प्यार और समझ से हल किया जा सकता है, लेकिन तलाक किसी समस्या का हल नहीं है। 😔


शर्मा जी को मैंने यही समझाया और उनकी आंखों में आंसू आ गए। 😢 उन्होंने कहा, "शायद मैंने अपनी बेटी को यह समझ नहीं दी।"


दोस्तो, मैं आप सबसे भी यही कहना चाहता हूं कि अपनी बेटियों को यह सिखाएं कि जो चीजें उन्हें मायके में मिलती हैं, वह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी मिलें। परंतु रिश्तों का सम्मान, प्यार, और समझदारी हर जगह जरूरी होती है। 🏡👩‍❤️‍👨


अगर आप मेरी बात से सहमत हैं, तो इसे दूसरों तक पहुंचाएं, ताकि किसी की भी बहन-बेटी का घर न टूटे। 🙏🌸


#समझदारी #शादी #रिश्तों_का_सम्मान

लड़की की शारीरिक जरुरत

 एक लड़की की शारीरिक जरूरत संभोग से पूरी होती है , 

एक सुखद संभोग स्त्रीत्व की पूर्ति करता है, दिमाग में ऐसे केमिकल निकालने में मदद करती है जिससे स्त्री पूर्ण महसूस करती है।

और मैने भी इस बात को महसूस किया है और ये सत प्रतिशत सही है ।


जब मैं कॉलेज में थी, तो नई नई फिल्म इंटरनेट पर लेख पढ़ती थी, और ये समझ आया कि स्त्री पुरुष की शारीरिक जरुरते होती हैं।

स्त्री की जरूरत को पूरा करने के लिए पुरुष की आवश्यकता होती है, और पुरुष को स्त्री की ओर एक दूसरे की आवश्यकता को पूर्ण करने में कोई गलत बात नहीं है।


वहीं दूसरी तरफ हमारे ग्रन्थ माता पिता इस बात के खिलाफ थे, उनका कहना था शादी से पहले ये सब गलत है। 

ऐसा क्यों था? 

मुझे समझ नहीं आया और मुझे खुद ये लगता था कि ये सब फिजूल की बातें हैं।


मेरा बॉयफ्रेंड बना, और मैने अपनी सहमति जाहिर की,

कि मैं संभोग का आनंद लेना चाहती हूं।


वो भी तैयार था, हम दोनो जाते हैं और इसे एक्सपीरियंस करते हैं।

ये जादुई एहसाह था शरीर में एक अलग तरह की ऊर्जा आने लगी थी। अब मुझे लगा कि ये शारीरिक जरूरत जरूर पूरी करनी चाहिए।

लेकिन कुछ समय बाद मेरा breakup हो गया।


और मैं किसी दूसरे लड़के के साथ सम्बन्ध बनाने लगी।

पर हमारी शादी नहीं हो सकती थी।


और अब शादी की उम्र आगई थी तो मां पापा ने एक अच्छा लड़का खोज के शादी कर दी।

पहले कुछ दिन तो संभोग अच्छा रहा।


लेकिन ना जाने क्यों मेरा मन इस बात से हटने लगा।

पति जब संभोग के बारे में पहल करते मैं बहाना बना देती 

हमारे रिश्तों में खटास आने लगी थी।


मैने डॉक्टर के पास नंबर लगाया और उन्हें अपनी समस्या बताई।

उन्होंने बोला उम्र के साथ ऐसा होता है,

और पूरा एक साल दवाई खाई।


इधर मेरे पति भी मुझसे खिन्न रहने लगे थे।

मुझे पता है, कि पुरुषों को सेक्स की चाहत होती है।

पर मैं चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी।


हमारे बच्चे भी नहीं थे lऔर ना हमारे बीच ज्यादा शारीरिक संबंध था।


उन्होंने मुझ बोला कि पत्नी होते हुए भी मेरी शारीरिक जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। तो अब हमारा साथ रहने का कोई मतलब नहीं है।


मुझे ये बात अंदर तक चुभ गई।

मैने बोला कुछ समय दो।

और मैं इस बार सब छोड़कर कर ऋषिकेश आई।

इस आस में की मेरी मानसिक स्थिति ठीक नहीं जिसकी वजह से ये सब हो रहा है।

वहां मुझे मेरी गुरु मा मिली जो मुझे ध्यान और योग सिखाती थी।

उन्होंने मुझसे मेरे बातो पर चर्चा किया।

तो मैने उन्हें बताया कि मेरी ये समस्या है।


उन्होंने पल भर में ही ये बोल दिया कि, शादी से पहले कितने पुरुषों के साथ सोई हो ? 


मैं हैरान थी पर मैने उन्हें सही जवाब दे दिया।


उन्होंने बोला हमारा शरीर यादों से मिलकर बना है। जब किसी स्त्री किसी पुरुष के साथ सम्बद्ध बनती हैं तो उसके अंग अंग में उस पुरुष की याद बसती हैं ।

और इस वजह से दोनों के मध्य परस्पर प्रेम काम वासना धीरे धीरे बढ़ती है।


लेकिन जब यही काम 2 3 पुरुषों के साथ करो तो शरीर समझ ही नहीं पाता है कि किसे यादों में बसाना है और किसे निकाल फेकना ।

और आप को संभोग में अरुचि होती है धीरे धीरे प्रेम खत्म होने लगता ।


फिर मुझे समझ आया कि क्यों बड़े बुजुर्ग शादी के बाद ही संभोग करने की सलाह देते हैं।

जिससे हमारे रिश्ते मजबूत हो जाएं।


लेकिन आज मेरी तरह ना जाने कितनी लड़किया शादी से पहले संभोग करती हैं। बिना इसका दुष्प्रभाव डाले।

और ना चाहते हुए भी उनकी शादी शुदा जिंदगी बर्बाद होती है ।


इसके अलावा ऐसी भी लड़किया हैं जो अपने काम को निकालने या अपने स्टेटस को मेंटेन रखने मात्र के लिए अपनी कपड़े किसी के भी सामने खोल देती हैं।

पर ये बात गलत है।

 मुझे इसका एहसाह तब हुआ जब मेरे पति और मेरे रिश्तों के बीच खटास आने लगी।

किसी भी स्थिति में शादी से पहले सम्बन्ध बनाना गलत है। 


आपकी अपनी पूजा मिश्रा

सेक्स एजुकेशन .निधि चौहान की कलम से

पढ़िए निधि चौहान की कलम से सेक्स एजुकेशन से संबंधित एक और दमदार, शानदार लेख यदि आप पूरा पढ़ लोगे तो आपको भी लगेगा कि हां वाकई में बहुत अच्छा लेख है दोस्तो थोड़ा सा लेख बड़ा जरूर है लेकिन बहुत रोमांचक और बहुत जानकारी वाला है इसलिए पूरा जरूर पढें।

लेख शुरू करने से पहले आपको बता दूं मैने इस लेख को भारत के महान दार्शनिक रजनीश ओशो की किताबों को पढ़कर एवं महर्षि वात्सायन की कामसुत्र पुस्तक को पढ़कर तैयार किया है..!!

आइए शुरू करते हैं 👇👇

दोस्तो सबसे पहले मैं सेक्स से संबंधित कुछ बातें आपको बताना चाहती हूं जो मैने अभी तक अनुभव की हैं।

दोस्तो सेक्स हर कोई करना चहता है चाहे वह महिला हो या पुरुष।
कामुक बातें हर किसी को पसन्द हैं
हर कोई कामवासना में लिप्त है।
लेकिन लोग अच्छा होने का दिखावा करते हैं।
जबकि वह भी काम वासना में लिप्त हैं
हालाकि यह कोई बुराई नहीं है क्योंकि यह प्रकृति प्रदत्त है अर्थात प्रकृति ने हमको दिया है।

और सिर्फ मानव ही नहीं बल्कि सभी जीवों की स्वाभाविक प्रक्रिया है।
सहमति से सेक्स कोई गलत नहीं है और ओशो के अनुसार सेक्स भी आम क्रियाओं की तरह ही है।
ओशो कहते हैं जो जीवन को, रूह को आनंदित कर दे वह विषय खराब कैसे हो सकता है।
और फिर जिस विषय पर महर्षि वात्स्यान जैसे महान दार्शनिक ने कामसूत्र पुस्तक लिखी हो और विस्तार पूर्वक वर्णन किया हो बह विषय चर्चा के योग्य क्यों नहीं हो सकता वह विषय खराब कैसे हो सकता है।
सेक्स एजुकेशन के अभाव में ही आजकल बलात्कार जैसे जघन्य अपराध हो रहे हैं क्योंकि लोगों को जिस विषय से जितना दूर रखा जाता है इंसान उसको किसी भी कीमत पर करना चाहता है। यदि सेक्स पर इतनी पाबंदी न हो तो शायद रेप एवं बलात्कार जैसी घटनाओं पर अंकुश भी लग सकता है।

मध्यप्रदेश के खजुराहो के जगत प्रसिद्ध मंदिर जो की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं उन मंदिरों पर जो चित्रकारी की गई है उसमें संभोग को दर्शाया गया है कई इतिहासकारों का मानना है कि उस समय लोगों की सेक्स से काफी दूरी बन गई थी कोई सेक्स पर बात भी नहीं करता था इसी कारण सेक्स एजुकेशन का प्रचार प्रसार करने एवं यह दर्शाने के सेक्स कोई गलत विषय नहीं है इसीलिए वह चित्रकारी की गई थी 

 महर्षि वात्सायन कहते हैं कि यदि सेक्स को सेक्स तरह किया जाए तो फिर सेक्स सबसे ज्यादा आनंदित करने बाली क्रिया है।
 महर्षि वात्सायन का मानना है कि सिर्फ 
इंटरकोर्स करना ही सेक्स नहीं है।
 इंटरकोर्स का मतलब आप समझ ही रहे होंगे चूंकि मैं भाषा को थोड़ा मर्यादित रखना चाहती हूं...इसलिए ऐसा लिख रही हूं कि आपको समझ में भी आ जाए और अपने लेख की भाषा की गरिमा भी बनी रहे।
महर्षि वात्स्यान कामसूत्र में लिखते हैं की जो युवक युवती सिर्फ इंटरकोर्स को ही सेक्स समझते हैं इसका मतलब है कि वह सेक्स को समझते ही नहीं हैं।
सेक्स को बड़े ही आराम से एकाग्रचित होकर
और अच्छा समय लेकर करना चाहिए इसमें जल्दबाजी बिलकुल भी नहीं होना चाहिए।
सेक्स में फॉर प्ले का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होना चाहिए फॉर प्ले मतलब संभोग से पहले महिला एवं पुरुष का आपस में प्यार करना और ऐसा प्यार की वह एक दूसरे में खो जाएं।
ओशो कहते हैं कि चाहे पुरुष हो या महिला फोर प्ले के समय अपने साथी को खुश एवं आनंदित करने के लिए हर वह रति क्रीड़ा करनी चाहिए जिससे उसके प्रेमी को सुखद एहसास हो सके।
ओशो ने एक पुस्तक लिखी है संभोग से समाधि की ओर उसमे उन्होंने बहुत विस्तार पूर्वक सम्भोग का वर्णन किया है।

दोस्तो असल में होता क्या है.... कुछ लोग ऊपर से दिखावा ऐसा करेंगे जैसे सारे संस्कार सिर्फ इन्हीं में कूट कूट कर भर दिए हों।
जब कोई सेक्स की बातें करेगा तो बहुत ही संस्कार वान बनेंगे जैसे ये सेक्स करते ही न हों और यदि सच कहूं तो ऐसे ढोंगी लोग ही कामवासना में सबसे ज्यादा लिप्त हैं यही वो लोग हैं जो अकेले में हर रोज पोर्न वीडियो देखते हैं लेकिन सबके सामने बड़े ही मर्यादित बनेंगे।

जैसे एक ताजा उदाहरण आपको दे दूं अभी मैंने सेक्स विषय पर लिखने से पहले आपकी सहमति मांगी थी हालाकि 95 प्रतिशत लोगों ने सहमति दी कुछ लोगों ने विरोध भी किया।
क्या जिन लोगों ने विरोध किया वह सेक्स नहीं करते होंगे मुझे लगता सबसे ज्यादा पोर्न वीडियो ऐसे ही लोग देखते हैं..!
सेक्स एक क्रिया है महान दार्शनिक रजनीश ओशो जी ने कहा है कि जिस प्रकार नहाना धोना,खाना पीना, सोना जागना, एक क्रिया ठीक वैसे ही सेक्स भी एक क्रिया ही है..!

हालाकि ये सिर्फ महिला और पुरुष द्वारा एकांत में करने वाली क्रिया है।

लेकिन सेक्स से संबंधित जरूरी जानकारी पर खुलकर बात करने में कोई बुराई नहीं है।

क्योंकि सेक्स की शिक्षा के अभाव के कारण कई लोग सेक्स से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कई लोग फर्जी डॉक्टरों द्वारा ठगे जा रहे हैं गर्भपात की दर बढ़ रही है महिलाओं में यौन संबंधी रोग बढ़ रहे हैं इसका वास्तविक कारण है सेक्स एजुकेशन की कमी सेक्स विषय पर खुलकर चर्चा न करना।
इसलिए मैं तो सिर्फ सेक्स ही नहीं जिस विषय पर भी लिखती हूं खुलकर लिखती हूं.!!
सेक्स पर लिखूंगी तो कोई बुराई ही तो देगा इससे ज्यादा और कोई क्या कर सकता है और बुराई तो वैसे भी सहज ही मिल जाती है अच्छे कामों में भी मिल जाती है बुराई तो फिर डर किस बात का।
प्रकृति का एक नियम है हमको जिस चीज से दूर रहने का बचने का बोला जाता है तो फिर उसी चीज में अधिक मन लगता है यही हाल सेक्स विषय का है लोगों के मन में ऐसे भ्रांति पैदा कर दी कि सेक्स के बारे में कोई खुलकर बात भी नहीं कर सकता।
गांवों में तो आज भी यह हालात हैं कि कोई लड़की दुकान से पैड तक नहीं खरीद सकती है।
जिसके कारण महिलाओं में इन्फेक्शन की बीमारी हो जाती है और यही हाल गांवों के लड़कों का है वह आज भी गांव की दुकान से निरोधक लेने में शर्म करते हैं जिससे यौन रोगों का खतरा बढ़ जाता है..!!
ओशो कहते हैं- मैं युवकों से कहना चाहूंगा कि तुम जिस दुनिया को बनाने में लगे हुए हो, उसमें यौन संबंधों को वर्जित मत करना. नहीं तो आदमी और भी कामुक से कामुक होता चला जाएगा. मेरी यह बात देखने में बड़ी उलटी लगेगी. लोग चिल्‍ला-चिल्‍ला कर घोषणा करते हैं कि मैं लोगों में काम का प्रचार कर रहा हूं. सच्‍चाई उलटी है कि मैं लोगों को काम से मुक्‍त करना चाहता हूं और प्रचार वे कर रहे हैं. उनका प्रचार दिखाई नहीं पड़ता क्‍योंकि हजारों साल की परंपरा से उनकी बातें सुन-सुन कर हम अंधे और बहरे हो गए है. इसलिए आज जितना कामुक आदमी भारत में है. उतना कामुक आदमी पृथ्‍वी के किसी कोने में नहीं।

एक शिष्य के सवाल के जवाब देते हुए ओशो ने कहा, 'अभी मैं एक गांव में था और कुछ बड़े विचारक और संत-साधु मिलकर अश्लील पोस्टर विरोधी एक सम्मेलन कर रहे थे. तो उनका ख्याल है कि अश्लील पोस्टर दीवार पर लगता है. इसलिए लोग कामवासना से परेशान रहते हैं. जब कि हालत दूसरी है. लोग कामवासना से परेशान हैं, इसलिए पोस्टर में मजा है. यह पोस्टर कौन देखेगा? पोस्टर को देखने कौन जा रहा है?'

ओशो ने आगे कहा, 'पोस्टर को देखने वही जा रहा है, जो स्त्री-पुरुष के शरीर को देख ही नहीं सका. जो शरीर के सौंदर्य को नहीं देख सका, जो शरीर की सहजता को अनुभव नहीं कर सका, वह पोस्टर देख रहा है. पोस्टर इन्हीं गुरुओं की कृपा से लग रहे हैं, क्योंकि ये इधर स्त्री-पुरुष को मिलने-जुलने नहीं देते, पास नहीं आने देते. इसी का परिणाम है कि कोई गंदी किताब पढ़ रहा है, कोई गंदी तस्वीर देख रहा है, कोई फिल्म बना रहा है. क्योंकि आखिर यह फिल्म कोई आसमान से नहीं टपकती, लोगों की जरूरत है...!
इसलिए सवाल यह नहीं है कि गंदी फिल्म क्यों है, सवाल ये है कि लोगों में जरूरत क्यों है? यह तस्वीर जो पोस्टर लगती है, कोई ऐसे ही मुफ्त पैसा खराब करके नहीं लगाता, इसका कोई उपयोग है. इसे कहीं कोई देखने को तैयार है, मांग है इसकी. वह मांग कैसे पैदा हुई है? वह मांग हमने पैदा की है. स्त्री-पुरुष को दूर कर वह मांग पैदा हुई. अब वह मांग को पूरा करने जब कोई जाता है तो हमें गड़बड़ लगती है. तो उसके लिए और बाधाएं डालते हैं. उसको जितनी वे बाधाएं डालेंगे, वह नए रास्ते खोजता है मांग के. क्योंकि मांग तो अपनी पूर्ति मांगती है..!

 ओशो ने अपनी किताब में कहा है कि मेरे एक डॉक्‍टर मित्र इंग्‍लैण्‍ड के एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में भाग लेने गए थे. वाइट पार्क में उनकी सभा होती थी. कोई 500 डॉक्‍टर इकट्ठे थे. बातचीत चलती थी. खाना-पीना चलता था. लेकिन पास की बेंच पर एक युवक और युवती गले में हाथ डाले अत्‍यंत प्रेम में लीन आंखे बंद किए बैठे थे. उन मित्र के प्राणों में बेचैनी होने लगी. भारतीय प्राण में चारों तरफ झांकने का मन होता है. अब खाने में उनका मन न रहा. अब चर्चा में उनका रस न रहा. वे बार-बार लौटकर उस बेंच की ओर देखने लगे. पुलिस क्‍या कर रही है. वह बंद क्‍यों नहीं करती ये सब. ये कैसा अश्‍लील देश है. यह लड़के और लड़की आंख बंद किए हुए चुपचाप 500 लोगों की भीड़ के पास ही बेंच पर बैठे हुए प्रेम प्रकट कर रहे है. कैसे लोग हैं. यह क्‍या हो रहा है. यह बर्दाश्‍त के बाहर है. पुलिस क्‍या कर रही है. बार-बार वहां देखते.पड़ोस के एक ऑस्‍ट्रेलियन डॉक्‍टर ने उनको हाथ का इशारा किया ओर कहा, बार-बार मत देखिए, नहीं तो पुलिसवाला आपको यहां से उठा कर ले जाएगा. वह अनैतिकता का सबूत है. यह दो व्‍यक्‍तियों की निजी जिंदगी की बात है और वे दोनों व्‍यक्‍ति इसलिए 500 लोगों की भीड़ के पास भी शांति से बैठे है, क्‍योंकि वे जानते हैं कि यहां सज्‍जन लोग इकट्ठे हैं. कोई घूरेगा नहीं. आपका यह देखना अच्‍छे आदमी का सबूत नहीं है. आप 500 लोगों को देख रहे हैं, कोई भी फिक्र नहीं कर रहा. यह उनकी अपनी बात है. और दो व्‍यक्‍ति इस उम्र में प्रेम करें तो पाप क्‍या है? और प्रेम में वह आंख बंद करके पास-पास बैठे हों तो हर्ज क्‍या है? आप परेशान हो रहे है. न तो कोई आपके गले में हाथ डाले हुए है, न कोई आपसे प्रेम कर रहा है.वह मित्र मुझसे लौटकर कहने लगे कि मैं इतना घबरा गया कि कैसे लोग हैं. लेकिन धीरे-धीरे उनकी समझ में यह बात पड़ी कि दरअसल गलत वे ही थे. हमारा पूरा मुल्‍क ही एक दूसरे घर में दरवाजे के होल बना कर झांकता रहता है. कहां क्‍या हो रहा है.कौन क्‍या कर रहा है? कौन जा रहा है? कौन किसके साथ है? कौन किसके गले में हाथ डाले है? कौन किसका हाथ-हाथ में लिए है? क्‍या बदतमीजी है, कैसी संस्‍कारहीनता है. यह सब क्‍या है? यह क्‍यों हो रहा है? यह हो रहा है इसलिए कि भीतर वह जिसको दबाता है, वह सब तरफ से दिखाई पड़ रहा है. वही दिखाई पड़ रहा है.युवकों से मैं कहना चाहता हूं कि तुम्‍हारे मां बाप, तुम्‍हारे पुरखे, तुम्‍हारी हजारों साल की पीढ़ियां यौन संबंध से भयभीत रही हैं. तुम भयभीत मत रहना. तुम समझने की कोशिश करना उसे. तुम पहचानने की कोशिश करना. तुम बात करना. तुम इसके संबंध में आधुनिक जो नई खोज हुई है उनको पढ़ना, चर्चा करना और समझने की कोशिश करना कि सेक्‍स क्‍या है.
भारत के युवक के चारों तरफ सेक्‍स घूमता रहता है पूरे वक्‍त. और इस घूमने के कारण उसकी सारी शक्‍ति इसी में लीन और नष्‍ट हो जाती है. जब तक भारत के युवक की इस रोग से मुक्‍ति नहीं होती, तब तक भारत के युवक की प्रतिभा का जन्‍म नहीं हो सकता. प्रतिभा का जन्‍म तो उसी दिन होगा, जिस दिन इस देश में सेक्‍स की सहज स्‍वीकृति हो जायेगी. हम उसे जीवन के एक तथ्‍य की तरह अंगीकार कर लेंगे—प्रेम से, आनंद से—निंदा से नहीं. और निंदा और घृणा का कोई कारण भी नहीं है...!!
दोस्तो भले ही हमारा विषय सेक्स का है लेकिन फिर भी मैंने लेखन की भाषा की गरिमा का ध्यान रखा है कहीं भी आपत्तिजनक एवं अश्लील शब्दों का प्रयोग नहीं किया है।
मुझे पूरा विश्वास है मेरे इस लेख पर आपका प्यार जरूर मिलेगा आपको जरूर पसन्द आयेगा।
दोस्तो एक बात और कहना चाहती हूं आजकल कॉपी पेस्ट का जमाना है लोग कॉपी कर लेते हैं लेकिन ये मैंने खुद मेहनत करके लिखा है यदि कोई इसे कॉपी पेस्ट साबित कर देगा आज से लिखना बंद कर दूंगी।
जो व्यक्ति आज से पहले इस पोस्ट को अपलोड होने का स्क्रीनशॉट दे देगा मैं 10000 दस हज़ार रूपए इनाम दूंगी और लिखना बंद कर दूंगी क्योंकि इस तरह का दावा कोई झूठा व्यक्ति नहीं कर सकता है सांच को आंच का कोई डर नहीं रहता है। हो सकता कल कोई इस पोस्ट को कॉपी कर अपना भी बता सकता है।
लेकिन आज दिनांक 29/08/2024 रात्रि 07:55 पर यह पोस्ट मैने अपलोड की है इस समय से पहले यह पोस्ट किसी ने नहीं पढ़ी होगी। और उससे पहले इस पोस्ट का कोई दवा भी नहीं कर सकता है।
 आजकल लोग फेसबुक से पोस्ट को कॉपी कर अपना बता देते हैं..!!

दोस्तो एक निवेदन है यदि आपको लेख अच्छा लगे तो शेयर जरूर कीजिएगा।

                      
             🙏 धन्यवाद 🙏

✍️..... निधि चौहान की कलम से _...
_______❤️_______❤️_______❤️______

सीख: किसी रिश्ते में खुश रहने के लिए हमें एक-दूसरे की कमियों को नजरअंदाज करना

 राहुल और रिया की शादी धूमधाम से हुई थी। रिया बेहद खूबसूरत थी, और उसकी सुंदरता को देखकर हर कोई उसकी तारीफ करता था। शादी के बाद राहुल ने अपनी पत्नी को बहुत प्यार किया और उसकी खूबसूरती की हर दिन सराहना करता रहता। रिया की सुंदरता में जैसे चार चांद लगे हों, और राहुल की नजरें उससे हटती ही नहीं थीं। उनकी ज़िंदगी प्यार और खुशी से भरी हुई थी। दोनों एक-दूसरे को बिना शर्त प्यार करते थे, और हर दिन उनकी मोहब्बत पहले से ज्यादा गहरी हो रही थी।


समय बीतता गया, लेकिन कुछ महीनों बाद रिया को अचानक एक त्वचा रोग हो गया। उसकी त्वचा पर दाग-धब्बे दिखने लगे, और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती खोने लगी। रिया को इस बात का बहुत डर था कि उसकी सुंदरता खत्म हो रही है, और कहीं राहुल उससे नफरत न करने लगे। उसकी सुंदरता ही तो उनकी शादी की पहचान थी, और अब जब वह खत्म हो रही थी, तो उसके मन में बेचैनी बढ़ने लगी। वह अक्सर खुद को शीशे में देखकर उदास हो जाती और सोचती कि जब राहुल उसकी इस हालत को देखेगा, तो क्या वह उससे पहले की तरह प्यार करेगा?


कुछ ही दिनों बाद राहुल को किसी जरूरी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। रिया ने उसे विदा किया, लेकिन उसके मन में बेचैनी थी। कुछ समय बाद, जब राहुल घर लौट रहा था, तो उसका एक भयानक हादसे में एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उसने अपनी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खो दी। यह खबर सुनकर रिया टूट गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने पति का ध्यान रखा और उनकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी।


अब दोनों की ज़िंदगी बदल चुकी थी। रिया अब पहले की तरह खूबसूरत नहीं रही, लेकिन उसे इस बात की तसल्ली थी कि राहुल अंधा हो चुका है और वह उसकी बदसूरती को नहीं देख सकता। इस बीच, रिया का त्वचा रोग और बढ़ता गया, और उसकी सुंदरता पूरी तरह समाप्त हो गई। वह बदसूरत हो गई थी, लेकिन राहुल की आंखों की रोशनी न होने के कारण उनके रिश्ते पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। राहुल उसे वैसे ही प्यार करता रहा, जैसे पहले करता था। उनके बीच का रिश्ता उतना ही मजबूत और प्यार भरा रहा, जितना पहले था।


समय बीतता गया, और एक दिन अचानक रिया की तबीयत बिगड़ गई। कुछ समय बाद, वह दुनिया से चली गई। राहुल को गहरा सदमा लगा। उसने अपनी जिंदगी का सबसे अनमोल साथी खो दिया था। रिया के जाने के बाद, वह बिल्कुल अकेला हो गया। उसने खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन रिया की यादें उसे चैन से जीने नहीं दे रही थीं।


रिया की अंतिम संस्कार की सारी रस्में पूरी होने के बाद, राहुल ने फैसला किया कि वह इस शहर को छोड़कर कहीं और चला जाएगा। उसने अपना सामान पैक किया और रवाना होने की तैयारी करने लगा। तभी एक परिचित व्यक्ति, जो उनके रिश्ते के बारे में जानता था, उसके पास आया और बोला, "राहुल भाई, अब आप अकेले कैसे चलेंगे? इतने सालों तक तो रिया आपका सहारा थी। अब वह नहीं रही, तो आप कैसे अपने आप को संभालेंगे?"


राहुल ने हल्की सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "दोस्त, मैं अंधा नहीं हूं। मैंने अंधे होने का सिर्फ दिखावा किया था। जब रिया की खूबसूरती खोने लगी थी, तो मुझे एहसास हुआ कि अगर उसे पता चल गया कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूं, तो वह बहुत दुखी हो जाएगी। इसलिए, मैंने उसके सामने अपनी आंखों की रोशनी खो देने का नाटक किया। मैं बस उसे खुश रखना चाहता था। वह मेरी पत्नी थी, और मुझे उससे पहले की तरह प्यार था।"


राहुल की आंखों में आंसू थे, लेकिन उन आंसुओं में प्यार और बलिदान की एक गहरी कहानी थी। उसने रिया की कमजोरी को कभी उजागर नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि उसकी खुशी उसकी सुंदरता में नहीं, बल्कि उनके रिश्ते की गहराई में थी।


सीख: किसी रिश्ते में खुश रहने के लिए हमें एक-दूसरे की कमियों को नजरअंदाज करना आना चाहिए। यदि हम हर कमी पर ध्यान देंगे, तो रिश्ते में प्यार कम होता जाएगा। लेकिन अगर हम एक-दूसरे को वैसे ही स्वीकार करेंगे जैसे वे हैं, तो प्यार और रिश्ते की मजबूती कभी खत्म नहीं होगी।

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...