sunilrathod

Friday, 30 August 2024

हमें जो चीजें बहुत सुख देती हैं उसमें धन की कोई भूमिका नहीं होती

 हमें जो चीजें बहुत सुख देती हैं उसमें धन की कोई भूमिका नहीं होती। जैसे बॉयफ्रेंड/गर्लफ्रेंड के साथ बाहों में बाहें डालकर घूमना, चुम्बन, सेक्स। मुक्त होकर घूमना। पेड़ पर चढ़ जाना। खरगोश, बिल्ली, कुत्ते के साथ खेलना। नदी किनारे गर्लफ्रेंड/बॉयफ्रेंड के साथ बैठना, पानी के बहाव को निहारना,पानी मे दूर तक कंकड़ फेंकना। यूँ ही टहलते रहना।

इसमें किसी चीज में धन का रोल नहीं है। केवल पेट भरने के लिए धन को इतना जरूरी कर दिया गया, उसके बाद इतनी आवश्यकताएं क्रिएट की गईं कि सुख वाली चीजें लोग भूल ही गए। उन पर नैतिकता के इतने पहरे लगा दिए गए कि वह अपराध बन गया। 

असल चीज वह बन चुकी है जिसका हमारे सुख से दरअसल कोई लेना देना ही नहीं है। एक इल्यूजन में हम जीने को बाध्य हैं और वहाँ सुख ढूंढते हैं जहां सुख है ही नहीं।

देखो बे लौंडों! जब कभी जिंदगी में इतना टूट जाओ

 देखो बे लौंडों! जब कभी जिंदगी में इतना टूट जाओ और लगे कि सब कुछ खत्म हो चुका है अब साला कुछ नही बचा जीने को! सुसाइड का खयाल आए और सोंचने लगो कि अब मर ही जातें हैं, या पागल होने के कगार पर पहुँच जाओ...मतलब एकदम वर्स केस हो जाए, चाहें वो किसी ऐसे के चले जाने की वजह से हो जिसे तुम अपना सब कुछ मानते थे या फिर साला ये emi भरने के लिए नौकरी करने की वजह से हो या फिर चाहें जो कुछ भी रीज़न हो तो एक काम करना। सब कुछ छोड़-छाड़ के निकल जाना बस। अगर नौकरी करते हो तो नौकरी छोड़ देना अगर पढ़ाई करते हो तो पढ़ाई बन्द कर देना क्योंकि भोसd के जीना बहुत जरूरी है और जिंदगी उतनी ही खूबसूरत है पर ये सब बातें तुम तभी जान पाओगे जब ये सारा बुरा फेस बिताकर जिंदा बच जाओगे। जानता हूँ कि ये सब इतना आसान नही है पर बस तुम सोचना मत, कर देना इतना! क्योंकि मर जाना सबसे आसान होता है। 


देखो! पढ़ाई या नौकरी छोड़कर जायेंगे भी कहाँ। कब तक भागेंगे यही ना? तो बस 2-3 महीने के लिए घर पर चले आओ सबसे पहले तो। और साला एक बात बताएं! जिंदगी में चाहें कितनी भी परेशानियां हो न अगर तुम्हारे पास 2-4 ढंग के दोस्त हैं न तो सब ठीक हो जाता है और अगर वो नही हैं न तो साला तुम आज तक जी ही नही रहे थे। तो फ़ोन करो उन्हें या जाओ उन ख़ास दोस्तों के पास और मन भर रो लो। जितना मन करे खुल के रो लो पहिले। ऐसा नही है कि एक बार रो देने भर से तुम्हारे सारे आँसू निकल जाएंगे या सारा दर्द। रोने का ये सिलसिला चलता रहेगा अभी कुछ दिनों तक पर यकीन करो बहुत कुछ हल्का हो जाएगा एक बार किसी के सामने खुल के रो लेने पर।


कुछ बहुत बुरा होने के बाद इससे पहले कि तुम खुद को शराब और सिगरेट में झोंकों उससे पहले ही मेडिटेशन की तरफ मुड़ जाओ। ऐसे बहुत से फ्री कोर्सेज हैं जो तुम्हें हफ्ते-दश दिन अपने पास रखेंगे और तुम्हारे अंदर बहुत कुछ सकारात्मक बदलाव ले आएंगे! तो उनको करो। फिर जब निकलो तो अगर पैसे-रुपये ना हों तो उधार लो दोस्तों से और निकल पड़ो किसी भी शहर में। यूँ ही भटकने को। किसी दिन पूरी दोपहरी किसी चौराहे पर पेड़ के नीचे बैठकर यूँ ही लोगों को आते जाते देखते हुए बिता दो। हाँ पता है यही कहोगे कि अकेलेपन में बुरी चीजें और भी याद आती हैं पर नही बे! जब तुम किसी दुपहरी को ऐसे बिता दोगे न तो देखोगे और खुद ही समझ पाओगे कि साला सच में दुनिया क्या है और क्या तमाशा चल रहा है यहाँ और यकीन मानो वो चीज़ बिना तुम्हारे खुद के अनुभव किए बिना नही आएगी और ना ही कोई समझा पाएगा तुम्हें।


साला ऐसे टाइम में सबसे ज्यादा जरूरत होती है प्यार की! पर कभी भी ऐसे बुरे वक्त में प्यार मत करना। क्योंकि इस वक़्त इंसान प्यार कम सहारा ज्यादा ढूंढ़ता है और ऐसे में तुम्हें तो सहारा मिल जाता है और अच्छा भी लगने लगता है पर कुछ समय बाद जब होश आता है तो पता चलता है कि तुम सामने वाले इंसान की फीलिंग्स के साथ पूरी तरह से न्याय नही कर पा रहे हो और कहीं न कहीं धोका दे रहे हो उसे और अगर उस वक्त तुम्हारा जमीर फिर से जाग गया! जो कि जागेगा ही क्योंकि अगर तुम्हारे अंदर अगर जमीर नही होता तो तुम्हारी ये कंडीशन ही नही होती, तो उस वक्त गुरु! तुम्हें मरने से कोई नही बचा नही बचा पाएगा। तो इन सब चूतियापे में मत पड़ना कि एक सब्स्टीट्यूट के सहारे तुम ठीक हो जाओगे। अगर सब्स्टीट्यूट वाले तुम होते न तुम्हारी इतनी गांd ही नही फटती कभी। 


बाकी तुम्हें अगर सेक्स चाहिए तो करो! और हो सके तो किसी ऐसे इंसान से करो जिसको तुम्हारी न बोली समझ आती हो न भाषा! इसका एक बड़ा फायदा ये होगा कि तुम्हारे अंदर के जज़्बात उसके साथ नही जुड़ पाएंगे न ही उस वक्त तुम्हारी एकतरफा कही बातों का कोई मतलब होगा। तो जाओ उसके पास और रोते हुए जो कुछ भी कहना चाहते थे किसी और से सब कह लो! और सेक्स करने के लिए हैं बहुत से लीगल जगहें तो इस बात का ख़ास ध्यान रखना कि इसके लिए किसी की फीलिंग्स के साथ मत खेलना कभी, किसी को नुकसान ना पहुंचाना। जो करना है करो, जितनी तकलीफें देनी हैं दो! लेकिन खुद को! पर बेटीचो* जिंदा रहो! बस कुछ दिन! साला अगर मर गए न झांt ये देखकर अफसोस करने को भी नही मिलेगा कि जिंदगी कितनी खूबसूरत थी। जो जाना चाहता है उसे जाने दो! जो गया उसे भूल जाओगे! सबको अपनी जिंदगी जीने का हक अपने हिसाब से है तो इस बात का रंDरोना मत रोओ कि मेरे साथ ऐसा क्यों किया या मेरे साथ वैसा क्यों किया। तुम्हारे साथ न कोई अच्छा कर सकता है और न कोई बुरा जब तक तुम न चाहो। बाकी जीने दो सबको खुशी-खुशी! फिर धीरे-धीरे देखोगे की कैसे साला जिंदगी मजे से पटरी पर चढने लगती है और फिर से फूल रफ्तार में भागना शुरू कर देती है। बस जिंदा रहना और कभी जरूरत हो तो बताना! लव गुरु खाली fm पर नही मिला करते 🖤


मलाल

किसी भी गरीब** की गरीबी का मजाक बनाने के बजाय उसकी **प्रतिभा** का उचित सम्मान करें। 😀

 एक **फटी धोती** और **फटी कमीज** पहने एक व्यक्ति अपनी **15-16 साल की बेटी** के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन्हें कुर्सी पर बैठते देख एक वेटर ने उनके सामने **दो गिलास साफ ठंडा पानी** रख दिया और पूछा, "आपके लिए क्या लाना है?" 💧


उस व्यक्ति ने कहा, "मैंने मेरी बेटी से वादा किया था कि यदि तुम **कक्षा दस में जिले में प्रथम** आओगी तो मैं तुम्हें शहर के सबसे बड़े होटल में एक **डोसा** खिलाऊंगा। इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक **डोसा** ले आओ।" 🥇🥘


वेटर ने पूछा, "आपके लिए क्या लाना है?" उसने कहा, "मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।" 💔


पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बताकर कहा, "मैं इन दोनों को भर पेट नाश्ता कराना चाहता हूँ। अभी मेरे पास पैसे नहीं हैं, इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलरी से काट लेना।" 🤝


मालिक ने कहा, "आज हम होटल की तरफ से इस होनहार बेटी की सफलता की **पार्टी** देंगे।" 🎉


होटलवालों ने एक **टेबल** को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहकों के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया। मालिक ने उन्हें एक बड़े थैले में **तीन डोसे** और पूरे मोहल्ले में बांटने के लिए **मिठाई** उपहार स्वरूप पैक करके दे दी। इतना **सम्मान** पाकर आंखों में **खुशी के आंसू** लिए वे अपने घर चले गए। 🎁😢


समय बीतता गया और एक दिन वही लड़की **I.A.S.** की परीक्षा पास कर उसी शहर में **कलेक्टर** बनकर आई। उसने सबसे पहले उसी होटल में एक सिपाही भेजकर कहलवाया कि **कलेक्टर साहिबा** नाश्ता करने आएंगी। होटल मालिक ने तुरन्त एक **टेबल** को अच्छी तरह से सजा दिया। यह खबर सुनते ही पूरा होटल ग्राहकों से भर गया। 🏛️👮‍♂️


कलेक्टर रूपी वही लड़की होटल में मुस्कराती हुई अपने माता-पिता के साथ पहुंची। सभी उसके सम्मान में खड़े हो गए। होटल के मालिक ने उन्हें **गुलदस्ता** भेंट किया और ऑर्डर के लिए निवेदन किया। 🌸🙇‍♂️


उस लड़की ने खड़े होकर होटल मालिक और उस वेटर के आगे **नतमस्तक** होकर कहा, "शायद आप दोनों ने मुझे पहचाना नहीं। मैं वही लड़की हूँ जिसके पिता के पास दूसरा **डोसा** लेने के पैसे नहीं थे और आप दोनों ने **मानवता की सच्ची मिसाल** पेश करते हुए, मेरे पास होने की खुशी में एक शानदार पार्टी दी थी और मेरे पूरे मोहल्ले के लिए भी मिठाई पैक करके दी थी।" 🥰🙏


"आज मैं आप दोनों की बदौलत ही **कलेक्टर** बनी हूँ। आप दोनों का **एहसान** मैं सदैव याद रखूंगी। आज यह **पार्टी** मेरी तरफ से है और उपस्थित सभी ग्राहकों एवं पूरे होटल स्टाफ का बिल मैं दूंगी। कल आप दोनों को '**श्रेष्ठ नागरिक**' का सम्मान एक नागरिक मंच पर किया जाएगा।" 🎖️👩‍💼


### **शिक्षा**

**किसी भी गरीब** की गरीबी का मजाक बनाने के बजाय उसकी **प्रतिभा** का उचित सम्मान करें। 😀

संस्कार.परिवार.प्रेम.जीवन

 शादी के कुछ महीने बाद, मैं यह सोचता था कि अगर मैं अपनी पत्नी की सभी ज़रूरतें पूरी कर दूं, तो ज़िन्दगी में कोई परेशानी नहीं आएगी। मेरे खुद के व्यापार के चलते, मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए थी जो स्मार्ट हो, मेरे काम में मेरा हाथ बंटा सके, और समाज में अच्छी तरह से मिलजुल सके। अंजली से मेरी शादी हुई, जो खूबसूरती और दिमाग, दोनों में बेमिसाल थी।


शुरुआत के तीन महीने शानदार थे। हमारे बीच जिस्मानी रिश्ते बहुत अच्छे थे, और मुझे लगा कि मैंने सही जीवनसाथी चुना है। मुझे विश्वास था कि एक सफल शादी के लिए शारीरिक सुख सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन धीरे-धीरे, सेक्स से भी मन हटने लगा और व्यापार के दबाव के कारण इस ओर ध्यान देने का समय भी कम हो गया।


लेकिन असली समस्या तब शुरू हुई जब अंजली ने मुझसे कहा कि वह अपने माता-पिता से अलग एक फ्लैट में रहना चाहती है। मैंने चौंकते हुए पूछा, "क्यों? ऐसा क्या दिक्कत है यहाँ?"


अंजली ने जवाब दिया, "मुझे प्राइवेसी चाहिए। मम्मी-पापा के साथ रहते हुए वो संभव नहीं है।" मैंने कहा, "लेकिन अपना घर है, अपना कमरा है। जैसा मन करो, वैसे रहो।"


उसने बताया, "तुम्हें शायद यह आसान लगता है, लेकिन मुझे दिनभर सलवार-सूट में रहना पड़ता है, जबकि मैं शर्ट्स और टी-शर्ट में ज्यादा कंफर्टेबल महसूस करती हूँ। मायके में पापा के सामने भी निक्कर और टी-शर्ट पहन सकती हूँ, लेकिन यहाँ मर्यादा का ख्याल रखना पड़ता है।"


मैंने सोचा, "बात तो सही कह रही है।" फिर मैंने मां-पापा से इस बारे में बात की। पापा को कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन मां ने साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि बहू को उनके हिसाब से रहना होगा।


मैं दुविधा में पड़ गया—एक ओर मां, जिन्होंने मुझे जन्म दिया, और दूसरी ओर पत्नी, जिसके साथ पूरी ज़िन्दगी गुजारनी है। शादी को केवल आठ महीने हुए थे और अब यह सवाल उठने लगा था कि किसके साथ खड़ा रहूं।


इसी दौरान, मैंने एक दिन अंजली के फोन पर इंस्टाग्राम खोला और देखा कि वह रील्स देख रही थी। एक रील में बताया जा रहा था कि कैसे माता-पिता से अलग रहने से शादीशुदा जिंदगी बेहतर होती है। दूसरी रील में सास-ससुर के साथ रहने से महिलाओं की आजादी पर असर पड़ने की बात कही गई थी। मैंने तुरंत समझ लिया कि असली समस्या "प्राइवेसी" नहीं, बल्कि ये सोशल मीडिया क्रिएटर्स हैं जो ऐसे विचार फैला रहे हैं।


मैंने सोचा, भले ही ये बातें सही लग सकती हैं, लेकिन हमारे संस्कार और परिवार का महत्व इससे कहीं अधिक है। मैंने तय किया कि किसी भी कीमत पर मां-पापा को नहीं छोड़ूंगा। बल्कि अंजली को इस सोशल मीडिया के प्रभाव से दूर करना ज्यादा जरूरी है।


उस दिन के बाद से, मैंने अंजली को ऑफिस में अपने साथ लाना शुरू किया। जब भी वह रील देखती, मैं उसे कोई काम दे देता। ऑफिस में आए बड़े डॉक्टरों ने भी उसे बताया कि रील्स देखने से होने वाले नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं। धीरे-धीरे, अंजली ने रील्स देखना बंद कर दिया और "अलग घर" या "प्राइवेसी" की बातें भी खत्म हो गईं। 😊


अब जब कभी मैं उसे छेड़ता हूँ और कहता हूँ, "चलो, अलग घर ले लेते हैं, ताकि तुम आराम से छोटे कपड़े पहन सको," तो वह मुझे आंखें दिखाने लगती है। 😜


दोस्तों, यह समस्या सिर्फ मेरे घर में नहीं, बल्कि कई घरों में है। एक बार जरूर सोचिए कि यह मोबाइल और सोशल मीडिया अनजाने में हमारे परिवार और संस्कारों को तोड़ने का काम कर रहा है। ❤️


#संस्कार #परिवार #प्रेम #जीवन

वह पुरुष जो सचमुच तुमसे प्यार करता हैं

 #प्रेम_का_अंत


वह पुरुष जो सचमुच तुमसे प्यार करता हैं 

तुम्हें छोड़कर जानें का फैसला एक पल में नहीं करता, महीनों-सालो वह ख़ुद को समझाता हैं..

वह तुम्हारे याद में महिनों-सालों और बरसों तक

चेतना-शुन्य हों जाता हैं..


तुम्हें पाने के लिए वह इंतज़ार करता हैं की तुम कभी-न-कभी आओगी

पर उसका इंतज़ार तो एक कहानी 

बनकर रह जाता हैं..

कुछ पुरुष ख़ुद को सम्भलना और समझना सीख जाते है, सीख जाते हैं जीवन जिना..वह जानते है मेरे बुढे मां-बाप का सहारा मै ही हूं..


पर इन सब के बिच कुछ होते हैं ऐसे पुरुष जिन्हें तुम्हें पाना ही उनका आख़िरी मक़सद है 

अगर तुम मिल जाओ तो उनके लिए एवरेस्ट फतह होंगी...


तुम्हें उस दिन डरना चाहिए जिस दिन तुम्हारे प्रेम में पड़े 

किसी पुरुष को छोड़ कर हमेशा-हमेशा के लिए चली जाती हो..

ये वही पुरुष हैं जो तुमसे मिले प्रेम को अपने दिल में बसा लेते हैं ,और हमेशा-हमेशा के लिए दिल के दरवाज़े तुम्हारे लिए खुला रखतें हैं.. यह उसका अंतिम फैसला होता है , तुम्हें छोड़ कर जाने का, विद्रोही भीं नहीं होते, विद्रोह करने से पहले वह बार-बार तुम्हें एहसास कराते है कि' अब पहले जैसा प्रेम महसूस नहीं हो रहा हैं, प्रेम को कुछ वक्त दिया करो..


पर तुम उसे और उसकी बातों को लापरवाही से टाल देती हों, और एक दिन वह तमाम यादें और प्रेम समेट कर तुमसे दूर चला जाता है हमेशा-हमेशा के लिए..


तुम्हारे जिस प्रेम ने उसे कोमल और संतुलित बनाया था, तुम्हारा वही प्रेम उसे जीवन भर के लिए कठोर और निष्ठुर बना देता है..


हमेशा लापरवाह और अपनी मौज में रहने वाले पुरुष जो हमेशा उल्टी सीधी हरकते करते थे,

वो तुम्हारे प्रेम में आने के बाद बहुत बदल गये..


पर आज वही पुरुष जिसे तुमने छोड़ा है 

अपनी चाहतें अपना प्यार ,अपनी ख्वाहिशों की हत्या कर चुका है,जो वादा करता था अपने और तुम्हारे परिवार का हम सहारा बनेंगे 

आज बुढे मां बाप ख़ुद उसके सहारे बने हैं...


वह कभी बद्दुआ नहीं देता तुम्हें, पर वो मान लेता है की हमेशा-हमेशा के लिए तुम मर चुकी हो, हो चुका है अंत उसके प्यार का और बिना किसी से कहे, करवा लेता है अपना मुंडन, मिटा देता है दिल से हमेशा-हमेशा के लिए तुम्हारा नाम..


बस साथ रह जाती हैं कुछ यादें, जिसे महसूस करके हंसता या रो लेता है... ख़त्म हो जाती है उसकी दुनिया...जिसे वो दुनिया मान चुका था, 

वह वेवफा भी नहीं कह पाता है, क्योंकि तुम्हें अपना जो मान चुका था..❤️🥀

कौन सा पति खरीदूँ...

 *कौन सा पति खरीदूँ...?*

शहर के बाज़ार में एक बड़ी दुकान खुली जिस पर लिखा था - *“यहाँ आप पतियों को ख़रीद सकती है |”*

देखते ही देखते औरतों का एक हुजूम वहां जमा होने लगा. सभी दुकान में दाख़िल होने के लिए बेचैन थी, लंबी क़तारें लग गयी.दुकान के मैन गेट पर लिखा था -

*“पति ख़रीदने के लिए निम्न शर्ते लागू”* 👇👇👇

✡ *इस दुकान में कोई भी औरत सिर्फ एक बार ही दाख़िल हो सकती है, आधार कार्ड लाना आवश्यक है ...*

✡ *दुकान की 6 मंज़िले है, और प्रत्येक मंजिल पर पतियों के प्रकार के बारे में लिखा है....*

✡ *ख़रीदार औरत किसी भी मंजिल से अपना पति चुन सकती है....*

✡ *लेकिन एक बार ऊपर जाने के बाद दोबारा नीचे नहीं आ सकती, सिवाय बाहर जाने के...*

एक खुबसूरत लड़की को दूकान में दाख़िल होने का मौक़ा मिला...

*पहली मंजिल* के दरवाज़े पर लिखा था - *“इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है और नेक है."*लड़की आगे बढ़ी ..

*दूसरी मंजिल* 

पर लिखा था - *“इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है और बच्चों को पसंद करते है.”*लड़की फिर आगे बढ़ी ...

*तीसरी मंजिल* के दरवाजे पर लिखा था - *“इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है और खुबसूरत भी है.”*यह पढ़कर लड़की कुछ देर के लिए रुक गयी मगर यह सोचकर कि चलो ऊपर की मंजिल पर भी जाकर देखते है, वह आगे बढ़ी...

*चौथी मंजिल* के दरवाज़े पर लिखा था - *“इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है, नेक है, खुबसूरत भी है और घर के कामों में मदद भी करते है.”*

यह पढ़कर लड़की को चक्कर आने लगे और सोचने लगी *“क्या ऐसे पति अब भी इस दुनिया में होते है ?*

यहीं से एक पति ख़रीद लेती हूँ...लेकिन दिल ना माना तो एक और मंजिल ऊपर चली गयी...

*पांचवीं मंजिल* पर लिखा था - *“इस मंजिल के पति अच्छे रोज़गार वाले है , नेक है और खुबसूरत है , घर के कामों में मदद करते है और अपनी बीबियों से प्यार करते है.”*

अब इसकी अक़ल जवाब देने लगी वो सोचने लगी *इससे बेहतर और भला क्या हो सकता है ?* मगर फिर भी उसका दिल नहीं माना और आखरी मंजिल की तरफ क़दम बढाने लगी...

*आखरी मंजिल*

 के दरवाज़े पर लिखा था - *“आप इस मंजिल पर आने वाली 3339 वीं औरत है , इस मंजिल पर कोई भी पति नहीं है , ये मंजिल सिर्फ इसलिए बनाई गयी है ताकि इस बात का सबूत सुप्रीम कोर्ट को दिया जा सके कि महिलाओं को पूर्णत संतुष्ट करना नामुमकिन है.*

हमारे स्टोर पर आने का धन्यवाद ! बांयी ओर 8सीढियाँ है जो बाहर की तरफ जाती है !


*सांराश - आज समाज की सभी कन्याओं और वर पक्ष के माता पिता यह सब कर रहे है एवं 'अच्छा' और "अच्छा" ... के चक्कर में शादी की सही उम्र तो खत्म ही हो रही है...

🌷🙏

Thursday, 29 August 2024

सरकारी नौकरी** की चाहत ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी।

 **सेक्स एक औरत के शरीर को पूर्ण करता हैं** और सही उम्र में यदि संभोग ना हो तो एक औरत का शरीर उभर नहीं पाता। रति क्रिया के समय जब एक महिला संतुष्टि की प्राप्ति करती है, तब उसके शरीर में कुछ ऐसे **हार्मोन** बनते हैं जो मासिक धर्म की समस्या, चेहरे की चमक और उदर समस्या का समाधान करते हैं। 🌸


कॉलेज खत्म होने के बाद मेरी उम्र महज **23 साल** की थी। **पापा, चाचा** सभी मेरे लिए रिश्ता देख रहे थे। कई लड़कों के रिश्ते आते थे, पर किसी को सही नहीं समझा जाता था। कारण था **सरकारी नौकरी**। घर में **माँ** तरह-तरह के टोटके करती रहतीं कि मेरी शादी जल्दी हो जाए। एक दिन मैंने माँ से कहा, "माँ, इन टोटकों से क्या होगा? जहां शादी होनी होगी, वहीं हो जाएगी।" 😕


माँ ने जवाब दिया, "**तुम चुप रहो**। शादी-ब्याह अपने समय पर हो तो ठीक है।" मैं उनकी बात सुनकर हट गई।


तकरीबन **6 महीने** बाद एक लड़का मिला जो सरकारी विभाग में नौकरी करता था। उसकी उम्र **37 साल** थी, मुझसे तकरीबन **14 साल** बड़ा। सरकारी नौकरी देखकर **पापा-चाचा** ने हां कर दी, माँ ने भी हां कर दी। मुझसे पूछा भी नहीं गया कि क्या मुझे लड़का पसंद है या नहीं। 😔


फिर उनके घर वाले मेरे घर आए और मुझे देखकर पसंद कर लिया। मैंने उन्हें देखा, वो उम्र में काफी बड़े थे, पर इस बारे में कोई सवाल करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। हम दोनों को बात करने के लिए कमरे में छोड़ दिया गया, पर मेरे अंदर हिम्मत नहीं हो रही थी कि कुछ पूछूं। 🤐


जब सब चले गए, तो बहुत दबे मन से मैंने माँ से कहा कि ये उम्र में काफी बड़े हैं। माँ ने डांटकर बैठा दिया और बोली, **"इतना अंतर चलता है।"** माँ-पिता की मर्जी को मैं आशीर्वाद मानकर स्वीकार कर लिया, और हमारी शादी हो गई। 💍


**शादी की पहली रात** हम दोनों के बीच कुछ नहीं हुआ। मुझे लगा, शायद स्ट्रेस की वजह से है। धीरे-धीरे **2 हफ्ते** बीत गए। मैंने उनसे पूछा, "क्या मैं आपको पसंद नहीं हूं जो आप मेरे करीब नहीं आना चाहते?" उन्होंने हाथ पकड़कर कहा, **"ऐसा नहीं है।"**


फिर मौका देखकर मैं ही उनके करीब आई और जो एक लड़की का हक होता है, वो करने की कोशिश की। हम संभोग करने ही वाले थे कि तभी मेरे पति का सब कुछ हो गया। वो शर्मिंदा होकर कमरे से बाहर चले गए। मैंने उन्हें भरपूर समय दिया और एक हफ्ते बाद उनसे पूछा कि क्या इस समस्या के लिए डॉक्टर को दिखाया है। 😓


उन्होंने कहा, "**पिछले 2 साल से इलाज कर रहा हूँ, कोई फायदा नहीं हुआ।**" मेरा मन बैठ गया। एक स्त्री को जब संभोग सुख नहीं मिलता, तो वह पूर्ण महसूस नहीं कर पाती और ना ही वह माँ बन सकती। धीरे-धीरे हमारे बीच दूरी बढ़ने लगी। जब मैं डॉक्टर के पास गई, तो पता चला **अधिक उम्र** होने की वजह से नसें सूख चुकी हैं और इस उम्र में काम के प्रेशर से साथ लड़कों में कामेच्छा की कमी भी होने लगती है, जिसकी वजह से समस्या जल्दी ठीक नहीं होती। 🧑‍⚕️


मेरी उम्र **24 साल** थी, जहां मेरा शरीर संभोग सुख की डिमांड कर रहा था, और दूसरी तरफ **38 साल** के पति, जिनमें कामेच्छा मर सी गई थी। यह मेरे लिए जीते जी मरने के समान था। मेरे पति मुझे **शारीरिक सुख** नहीं दे सकते, पर इंसान अच्छे हैं। मैं भी उनसे प्रेम करती हूँ और वो भी मुझसे। ❤️


पर **सरकारी नौकरी** की चाहत ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। मुझे लगता है, अगर अपने **हम उम्र** के लड़के के साथ शादी करती, भले ही वो कम पैसा कमाता, पर मुझे खुश रखता। आज स्थिति ऐसी है कि सारी सुख-सुविधाएं भी फीकी पड़ती जा रही हैं। 😔


मैं सभी लड़कियों के **माता-पिता** से कहना चाहूंगी कि सरकारी नौकरी की तलाश में अपने बच्चे की जिंदगी से खिलवाड़ मत कीजिए। जीवन में खुश रहने के लिए **पैसे** ही सबकुछ नहीं होते। सही समय पर, सही उम्र के लड़के के साथ शादी करें। 👰


आज के जमाने में **50 साल** के बूढ़े में भी 25 साल के लड़के जैसी ताकत नहीं रहती। आज तो लोग **30 में** ही बूढ़े हो रहे हैं। जीवन एक बार मिलता है, इसे अच्छे से जीएं और सही समय पर सही फैसले लें। 🌟

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...