कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है! डॉ. गुप्ता कहते हैं, लापरवाही के अलावा कैंसर से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए। (1). पहला कदम चीनी का सेवन बंद करना है। आपके शरीर में चीनी के बिना, कैंसर कोशिकाएं स्वाभाविक रूप से मर जाती हैं। (2). दूसरा कदम यह है कि एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाएं और इसे सुबह भोजन से पहले 1-3 महीने तक पिएं और कैंसर खत्म हो जाएगा। मैरीलैंड मेडिकल रिसर्च के अनुसार, गर्म नींबू पानी कीमोथेरेपी से 1000 गुना बेहतर, मजबूत और सुरक्षित है। (3). तीसरा कदम है सुबह और रात को 3 बड़े चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल पिएं, कैंसर गायब हो जाएगा, आप चीनी से परहेज सहित अन्य दो उपचारों में से कोई भी चुन सकते हैं। अज्ञानता एक बहाना नहीं है। अपने आस-पास के सभी लोगों को बताएं, कैंसर से मरना किसी के लिए भी अपमान है; जीवन बचाने के लिए व्यापक रूप से साझा करें।
मेरी किताब — मेरी जिंदगी की सच्ची कहानी यह किताब किसी कल्पना से पैदा हुई कहानी नहीं है। यह मेरी जिंदगी का वह आईना है, जिसमें मैंने अपने जीवन के अच्छे-बुरे, सुख-दुख, संघर्ष, रिश्ते, गलतियां, सफलताएं, असफलताएं और उन सभी परिस्थितियों को ईमानदारी से दर्ज करने की कोशिश की है, जिन्होंने मुझे आज का इंसान बनाया। हर इंसान की जिंदगी बाहर से जितनी सरल दिखाई देती है, अंदर से उतनी ही कहानियों से भरी होती है। मेरी जिंदगी भी ऐसी ही रही है। मैंने बहुत कुछ पाया है, बहुत कुछ खोया है,
sunilrathod
Tuesday, 8 July 2025
Friday, 4 July 2025
महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने देखा था। सपना...
सोचिए, आपका फ़ोन बिना तार के चार्ज हो रहा है, या दूर-दराज के इलाकों में भी पलक झपकते ही बिना तार के बिजली पहुंच रही है!
यह बात सुनने में भले ही साइंस फिक्शन लगे, लेकिन अब यह सिर्फ कल्पना नहीं है!
जून 2025 में, अमेरिकी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) ने न्यू मैक्सिको में एक अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने लेजर तकनीक की मदद से 800 वॉट ऊर्जा को 5.3 मील (8.6 किमी) दूर सफलतापूर्वक भेजा है!
इस 30 सेकंड के प्रयोग में 1 मेगाजूल से अधिक ऊर्जा भेजी गई, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
यह सफलता साबित करती है कि लंबी दूरी तक वायरलेस बिजली भेजना अब कोई सपना नहीं, बल्कि एक उज्ज्वल वास्तविकता है।
एक शक्तिशाली लेजर और विशेष रिसीवर का उपयोग करके, हवा में उड़ने वाले ड्रोन, बिना ईंधन वाले सैन्य ठिकाने, और यहां तक कि दुर्गम क्षेत्रों में भी बिजली पहुंचाना संभव होगा।
आश्चर्यजनक रूप से, वायरलेस बिजली भेजने का यह सपना लगभग एक सदी से भी पहले महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने देखा था।
उन्होंने 'वर्ल्ड सिस्टम' नामक एक विशाल टावर के निर्माण के माध्यम से दुनिया भर में वायरलेस बिजली वितरण की कल्पना की थी, हालांकि विभिन्न सीमाओं के कारण तब यह साकार नहीं हो पाया था।
DARPA की यह सफलता टेस्ला के उस दूरदर्शी सपने को नया जीवन दे रही है!
लेकिन सिर्फ यु'द्ध के मैदान में ही नहीं, यह वायरलेस बिजली तकनीक हमारे दैनिक जीवन में जो क्रांति ला सकती है, वह अकल्पनीय है!
यह तकनीक हमारे दैनिक जीवन को और अधिक सुविधाजनक, कुशल और सुरक्षित बनाएगी।
हो सकता है निकट भविष्य में हम एक ऐसी दुनिया में रहें जहाँ तारों के जंजाल से मुक्ति मिलेगी और बिजली और अधिक सुलभ होगी। ⚡❤️
Thursday, 3 July 2025
तुमने हमेशा कहा कि मैं तुम्हारी बात नहीं समझता… पर क्या तुमने कभी ये सोचा,
"तुमने हमेशा कहा कि मैं तुम्हारी बात नहीं समझता…
पर क्या तुमने कभी ये सोचा,
कि समझने के लिए भी तो कुछ कहा जाना चाहिए ?
तुम चुप रही, और मैं हर चुप्पी को तोड़ने की कोशिश करता रहा।
तुमने अपनी थकावट का हवाला दिया,
और मैंने अपनी बेचैनी को तकिए में छुपा लिया।
तुमने कहा, ‘मुझे स्पेस चाहिए।’
और मैंने अपनी पूरी दुनिया ही तुम्हारे लिए खाली कर दी…
पर जब तुम गई,
तो वो दरवाज़ा भी बंद कर गई
जिस पर मैंने उम्मीद टाँग रखी थी।
अब अगर कभी लौटने का मन हो भी,
तो दस्तक मत देना —
क्योंकि मैं अब आवाज़ नहीं पहचानता…"
:सुनिल राठौड़ बुरहानपुर
Monday, 30 June 2025
दिमाग कहां तक फैला होता है?"
🧠 "दिमाग कहां तक फैला होता है?"
👉 तस्वीर को ध्यान से देखिए — यह सिर्फ एक दिमाग नहीं, बल्कि मानव तंत्रिका तंत्र (Nervous System) की अद्भुत और सच्ची झलक है।
हम सोचते हैं कि दिमाग बस सिर तक सीमित होता है, लेकिन सच यह है कि हमारा दिमाग पूरे शरीर में फैला होता है — रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) और तंत्रिकाओं (Nerves) के जरिए।
⚡ क्या है यह जो तस्वीर में दिख रहा है?
📸 इस चित्र में आप देख रहे हैं:
दिमाग (Brain) – जहां हमारे विचार, यादें, भावनाएं और निर्णय बनते हैं।
स्पाइनल कॉर्ड (Spinal Cord) – दिमाग और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच की सूचना का मुख्य राजमार्ग।
तंत्रिकाएं (Nerves) – जो शरीर के हर हिस्से तक जानकारी पहुँचाती हैं और वहाँ से दिमाग तक संदेश लाती हैं।
💡 कुछ अद्भुत तथ्य:
हमारा दिमाग लगभग 86 अरब न्यूरॉन्स से बना होता है।
ये तंत्रिकाएं इतनी लंबी होती हैं कि अगर एक व्यक्ति की सभी नसों को सीधा किया जाए, तो वे लगभग 100,000 किलोमीटर तक फैल सकती हैं! 😲
यह नेटवर्क इतना तेज़ है कि दिमाग से किसी हिस्से तक संदेश कुछ मिलीसेकंड्स में पहुँच जाता है।
🧘♂️ क्या सीख मिलती है?
"दिमाग सिर्फ सोचने के लिए नहीं, बल्कि पूरे शरीर को चलाने का मुख्य केंद्र है। इसलिए इसे शांति, संतुलन और अच्छे खानपान से स्वस्थ रखना ज़रूरी है।"
योग, मेडिटेशन और संतुलित आहार से ना सिर्फ आपका मन शांत रहता है, बल्कि पूरा नर्वस सिस्टम भी बेहतर तरीके से काम करता है।
📌 याद रखिए:
आपका दिमाग सिर्फ आपके सिर में नहीं — आपकी हर हरकत, हर अनुभव, हर स्पर्श में शामिल होता है।
सही सोचें, गहराई से सोचें — क्योंकि दिमाग वाकई हर जगह है।
संभोग के दौरान वीर्यपात कितनी देर में होना चाहिए,,,,?- विशेषज्ञों ने बताया सच....।
संभोग के दौरान वीर्यपात कितनी देर में होना चाहिए,,,,?- विशेषज्ञों ने बताया सच....।
सभोग के दौरानवीर्यस्खलन (ejaculation) का समय हर पुरुष में अलग-अलग हो सकता है।
यह कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे कि आयु, मानसिक स्थिति, शारीरिक स्वास्थ्य, तनाव, जीवनशैली और पहले के अनुभव ।
शोध के अनुसार, संभोग के दौरान प्रवेश (penetration) के बाद 5 से 7 मिनट में ज्यादातर पुरुष वीर्यस्खलन कर लेते हैं।
कुछ पुरुषों का वीर्यपात 1-2 मिनट में ही हो जाता है (जिसे Premature Ejaculation - PE कहा जाता है), जबकि कुछ 10-15 मिनट तक सहवास कर सकते हैं।
वीर्यपात की अवधि बढ़ाने के उपाय:
माइंडफुलनेस और श्वास नियंत्रण: मानसिक तनाव कम करके संभोग की अवधि बढ़ाने में मदद करता है।
स्टॉप-स्टार्ट तकनीक: जब वीर्यस्खलन होने वाला हो, तो थोड़ी देर रुकें और फिर दोबारा शुरू करें।
केगल व्यायाम: पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करके अधिक नियंत्रण पाया जा सकता है।
संतुलित आहार और फिटनेस: शरीर स्वस्थ रहेगा, तो स्टैमिना भी बढ़ेगा।
औसत वीर्यस्खलन का समय:
संभोग शुरू करने के बाद (penetration के बाद) 5-7 मिनट में वीर्यस्खलन सामान्य माना जाता है।
यदि 1-2 मिनट में वीर्यपात हो जाए, तो इसे शीघ्रपतन (Premature Ejaculation - PE) कहा जाता है।
कुछ पुरुष 10-15 मिनट तक सहवास जारी रख सकते हैं।
सही समय क्या होना चाहिए?
संभोग का समय केवल अवधि पर निर्भर नहीं करता, बल्कि संतुष्टि और आनंद पर निर्भर करता है।
महिलाओं को ऑर्गैज़्म तक पहुंचने में औसतन 13-15 मिनट लगते हैं, इसलिए पुरुषों को संभोग के दौरान नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
संभोग की अवधि बढ़ाने के तरीके:
स्टॉप-स्टार्ट तकनीक: जब वीर्यस्खलन होने वाला हो, तो कुछ समय रुकें और फिर दोबारा शुरू करें।
गहरी सांस लें: मस्तिष्क को शांत रखने से वीर्यपात देर से होता है।
केगल व्यायाम करें: पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करके वीर्यस्खलन को नियंत्रित किया जा सकता है।
सही पोजिशन का चुनाव करें: कुछ मुद्राएं (जैसे स्पूनिंग पोजिशन) वीर्यपात को नियंत्रित कर सकती हैं।
लुब्रिकेंट का इस्तेमाल करें: यह संवेदनशीलता को थोड़ा कम कर सकता है और संभोग की अवधि बढ़ा सकता है।
कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए,,,?
यदि हमेशा 1-2 मिनट में वीर्यस्खलन हो जाता है और साथी असंतुष्ट रहता है।
यदि मानसिक तनाव, थकान या कुछ दवाओं के कारण संभोग का समय कम हो रहा हो।
यदि हार्मोनल या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण शीघ्रपतन की समस्या हो रही हो।
#ayurveda #fb #everyonefollowers #healthtips #viralpost2025シ #viralpost2025 #highlightseveryone #highlighteveryone #
Sunday, 25 May 2025
ऋचा से मेरी शादी के बाद घर में सब खुश थे।
स्त्री अगर हमे #सम्भोग का सुख देती है तो हम उसके विवश हो जाते है और हमे उसकी हर बात माननी पड़ती है |
ऋचा से मेरी शादी के बाद घर में सब खुश थे। वह न केवल सुंदर और कामुक थी, बल्कि घर के काम में भी दक्ष थी। माँ और पिताजी उससे बहुत खुश थे, और मैं भी। शादी के चार साल बाद, माँ की मृत्यु हो गई और घर की सारी जिम्मेदारी ऋचा पर आ गई। इस बदलाव के साथ ही उसके व्यवहार में भी परिवर्तन आने लगा।
माँ की मृत्यु के बाद, पिताजी की देखभाल का जिम्मा भी ऋचा पर आ गया। अक्सर पिताजी की जरूरतें पूरी करने में उसे फालतू काम लगता था। एक दिन, जब ऋचा बाथरूम से तौलिया लपेटकर निकली, पिताजी ने नजर चुराकर अंदर चले गए। इस घटना पर ऋचा ने मुझसे शिकायत की। मैंने उसे ध्यान रखने को कहा, लेकिन उसने कड़े शब्दों में कहा कि यह घर उसका भी है और वह जैसे चाहे वैसे रह सकती है।
ऋचा ने मुझ पर दबाव डाला कि पिताजी को नीचे के कमरे में शिफ्ट कर दूं। मैं मजबूर था और पिताजी का सामान नीचे शिफ्ट कर दिया। पिताजी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके चेहरे पर दुख साफ झलक रहा था। कुछ दिन बाद, पिताजी ने हमें दुबई के लिए टिकट बुक की और कहा कि हमें घूमने जाना चाहिए।
जब हम 16 दिन बाद वापस आए, तो देखा कि घर के बाहर ताला लगा हुआ था। माथुर अंकल आए और हमें नए फ्लैट की चाभी और रेंट एग्रीमेंट दिया। #पिताजी ने एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें लिखा था कि उन्होंने घर बेच दिया है और हमें आजादी दी है। उन्होंने अपने लिए एक नया बंगलो लिया और हमारी चिंता न करने को कहा।
मुझे यह समझ नहीं आया कि मैंने अपने पिता के दुख को कैसे अनदेखा कर दिया। पिताजी ने हमें कभी यह बात नहीं बताई कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, लेकिन अब मैं और ऋचा समझते हैं कि उन्होंने क्या सहा होगा। हमारे समाज में लोग पिताजी को गलत ठहराते हैं, लेकिन असल सच्चाई हमें ही पता है।
यह कहानी एक महत्वपूर्ण सबक देती है: पत्नी के साथ जीवन बिताना जरूरी है, लेकिन माता-पिता का सम्मान और उनकी देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। किसी भी परिस्थिति में माता-पिता से बैर नहीं करना चाहिए।
#जीवन में संतुलन और समझदारी से काम लेना जरूरी है। पत्नी के साथ-साथ माता-पिता की भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यह कहानी हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सच्ची सफलता है।
Sunday, 18 May 2025
6 अगस्त 1945 — मानव इतिहास का वह काला दिन, जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया.
6 अगस्त 1945 — मानव इतिहास का वह काला दिन, जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा पर दुनिया का पहला परमाणु बम गिराया. तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा हमला हुआ. दोनों शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गए.
पल भर में डेढ़ लाख से ज्यादा लोग मारे गए, लेकिन इस तबाही की भयावहता यहीं नहीं रुकी.इसके ज़हरीले निशान आने वाले दशकों तक इंसानों को निगलते रहे. इतिहास में इंसान का इंसान पर किया गया यह सबसे बड़ा और निर्मम अपराध था, जिसका जिम्मेदार अमेरिका था।
'फैट मैन' और 'लिटिल बॉय' - ये थे वो दो परमाणु बम, जिन्हें अमेरिका ने तैयार किया था और जिन्होंने इंसानी इतिहास की सबसे भयावह तबाही को अंजाम दिया. इन्हें बनाने वाले वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने बम गिरने के बाद कहा था कि मेरे हाथ खून से सने हैं.
हिरोशिमा पर विस्फोट इतना भीषण था कि महज एक मिनट में शहर का 80 प्रतिशत हिस्सा राख में बदल गया, जो लोग बच भी गए, उन्हें विकिरण की जहरीली लहरों और 'काली बारिश' ने अपनी चपेट में ले लिया. बाद में हजारों लोग कैंसर, ल्यूकीमिया और अन्य भयानक बीमारियों का शिकार हुए.
जो इस परमाणु तूफान में जिंदा रह गए, उनकी जिंदगी भी किसी सजा से कम नहीं थी. ये लोग 'हिबाकुशा' कहलाते हैं. जापानी भाषा का एक शब्द, जिसका अर्थ है 'विस्फोट से प्रभावित व्यक्ति'.हिबाकुशा ना सिर्फ पीढ़ी दर पीढ़ी विकिरण जनित बीमारियों से जूझते रहे, बल्कि समाज के तिरस्कार के शिकार भी बने, उन्हें बीमारी का सोर्स माना गया.बीबीसी की एक रिपोर्ट बताती है कि आज भी जापान में कई लोग हिबाकुशा से विवाह करने से कतराते हैं. उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया.
BBC की एक डॉक्यूमेंट्री में 86 वर्षीय मिचिको कोडमा का इंटरव्यू है. एक 'हिबाकुशा', जिन्होंने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिरने की त्रासदी खुद अपनी आंखों से देखी और सही है.मिचिको कहती हैं कि जब मैं आज दुनिया में चल रहे जंग के बारे में सोचती हूं.मेरा शरीर कांप उठता है... और आंखों से आंसू छलक पड़ते हैं. हम परमाणु बमबारी के उस नरक को दोबारा नहीं दोहरा सकते. मुझे संकट का एहसास हो रहा है.
बीबीसी की रिपोर्ट में एक हिबाकुशा का बयान है, जो उस दिन की दर्दनाक लम्हे को आज भी नहीं भूल पाए हैं. वे कहते हैं कि जो कुछ भी मैंने देखा... वो किसी नरक से कम नहीं थाॉ. लोग हमारी ओर भाग रहे थे, उनके शरीर पिघल रहे थे, मांस लटक रहा था. बुरी तरह झुलसे हुए लोग दर्द से कराह रहे थे. उनकी चीखें अब भी मेरे कानों में गूंजती हैं.
1980 में, वैज्ञानिकों ने 'न्यूक्लियर विंटर थ्योरी' पेश की, जिसमें परमाणु युद्ध के प्रभाव का विश्लेषण किया गया था. यह थ्योरी हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों के नतीजों को देखते हुए विकसित की गई थी. इस थ्योरी के मुताबिर, किसी भी स्तर का परमाणु युद्ध वैश्विक तापमान को प्रभावित करेगा, जिससे धरती का औसत तापमान 10 सालों में 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है. इससे सूरज की रोशनी धरती तक नहीं पहुंचेगी, जिससे पौधे मुरझा जाएंगे और वैश्विक खाद्य उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे भुखमरी और खाद्य संकट आ जाएगा.
Science Alert की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध हुआ, तो न केवल न्यूक्लियर विंटर आएगा, बल्कि समुद्र का तापमान भी गिर जाएगा. यानी धरती एक 'न्यूक्लियर आइस एज' में प्रवेश कर सकती है, जो हजारों सालों तक चल सकती है. वर्तमान में दुनिया के 9 देशों के पास परमाणु हथियार हैं-विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध होता है, तो लगभग 13 करोड़ लोगों की तत्काल मौत हो सकती है. जंग के दो साल बाद तक करीब 2.5 अरब लोग भुखमरी के शिकार हो सकते हैं.
हिरोशिमा में अब फिर से फूल खिलने लगे हैं.हिरोशिमा और नागासाकी ये दो शहर जो कभी राख हो गए थे.अब फिर से उठ खड़े हुए हैं. जापान के ये शहर आज न सिर्फ फिर से बस चुके हैं. सड़कें, दीवारें, और म्यूजियम आज भी दुनिया को याद दिलाते हैं कि तबाही का वो मंजर दोहराया नहीं जाना चाहिए.
Sunday, 11 May 2025
दोपहर में पतिदेव के साथ, संभोग करने में जो आनंद है वो दुनिया के किसी और काम में नही है, खास तौर पर जब आप की नई नई शादी हुई है, और एक हैंडसम खूब प्यार करने वाला पति मिला हो
वो लड़किया इस बात को ज्यादा समझ पाएंगी जिनकी नई नई शादी हुई हो
नवम्बर ने मेरी शादी हुई थीं, अच्छा परिवार मिला था प्यार करने वाला पति मिला था दोस्त की तरह एक ननद और 2 जेठानिया मिली थी
और पतिदेव तो इतने रोमांटिक की जब मौका मिले जहां मिले शुरू हो जाते थे, उनका कहना था ऐसा करने से प्यार और विश्वास में गहराई आती है,
मैं सच बोलूं प्यार विश्वास का तो ज्यादा नहीं पता पर पति रोमांटिक मिल जाए तो जिंदगी में मजे हैं
जनवरी का महिना था कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, और तकरीबन एक बजे खाना खाकर सभी अपने अपने कमरे में आराम करने गए,
मैं और मेरे पतिदेव भी आगया, थोड़ी बात शुरू हुई थी, लेकिन सभी जानते हैं ठंडी में बात कहा से कहा पहुंच जाए कोई नही जातना
Namaskar ji
हम दोनो का भी यही हाल था, जैसे ही कुछ होने वाला था तभी मम्मी जी जोर से बुलाई
तुरंत दरवाजा खोला और बाहर चली गई
उन्होंने बोला बरतन ऐसे ही पड़े हैं ये शुभ नही है, जाओ आराम करो आगे से ध्यान देना, मैं साफ कर देती हूं अभी
Hello everyone
मैने बोला मम्मी आप रहने दीजिए मैं कर देती हूं
और मन ही मन में सोचने लगी की इतना अच्छा सीन था फालतू मम्मी जी ने बुला लिया
धीरे धीरे मैं जैसे पुरानी होती गई मम्मी मुझे हर चीज पर टोकने लगी, उनका सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर होता की मैं काम करने ने देरी कर रही हूं
जबकि मैं हर काम अपने हिसाब से करती थी
धीरे धीरे ये बात जेठानी जी को भी बोल जाने लगी
एक दिन सभी को ऑफिस जाना था और ना जाने कैसे इन लोगो के निकलने के समय तक भी नाश्ता और लंच नही बन पाया, इसे सुन मां जी ने हम दोनो लोगो डांट लगाई
शाम को जब पतिदेव घर पर आते हैं तो मैंने ये बात बताई, तो वो मेरे ऊपर ही बोलने लगे की तुम्हे ध्यान देना चाहिए, ऑफिस का समय इधर उधर नही हो सकता
धीरे धीरे पता नही कैसे शाम का खाना जो पहले 8 बजे तक हो जाता था अब उसे होने में 11 बजने लगा था
मां का गुस्सा मेरे और जेठानी पर फूटता की तुम लोगो ने आते ही घर का सारा रूटीन बदल दिया
11 बजे खाने के बाद सोते सोते 1 बज जाता
और सुबह उठने में तकलीफ होती फिर नाश्ता बनाने में आलस आता, हम दोनो देवरानी जेठानी इस चक्कर में पड़े रहते की जल्दी से बिना कम मेहनत का खाना बना दिया जाए
और इस बात का फस्टरेशन पतिदेव और बड़े भैया में भी देखने को मिलने लगा था, लेकिन गलती कहा हो रही थी समझ में नहीं आरा था
धीरे धीरे घर की शांति भी भंग होने लगी, जो आदमी शादी के समय इतना प्यार करता था, वो अब हर सवाल का जवाब चिढ़ के देता है
फिर एक सभी चीज की हद हो गईं
सास ने हम दोनो से कहा की तुम दोनो अपना फोन मुझे देदो हम दोनो को गुस्सा आता है मैं तो कुछ बोलती नही हूं पर जेठानी जी बोल देती है
की मम्मी घर को घर रहने दीजिए इसे जेल मत बनाइए
उन्होंने एक ना सुनी और फोन ले लिया और कहा
अब से फोन सिर्फ दोपहर 1 बजे से रात को 7 बजे तक मिलेगा
हमे अपनी सास का ये रवैया काफी खराब लगा
2 दिन बाद रक्षा बंधन था, मैने मां और पापा से सारी बात बताई जब मैं अपने भाई को राखी बांधने गई थी
मेरी मां और भाई भड़क गए और बोले अभी बात करता हूं किसी की पर्सनल चीज को लेने का क्या हक बनता है
पापा ने भाई को समझाया और बोला तुम इतने बड़े नही हुए हो जो इसकी सास से ऐसे पेश आओ, फिर पापा मुझे कोने में ले जाते हैं और बोलते हैं बेटा तुम्हारी सास तुमसे उमर में बड़ी है, एक बार उनकी बात मानो आखिर इसमें कुछ सच्चाई हो
मैं घर आती हूं और अगले दिन सुबह जल्दी उठ के खाना बनाती हूं समय पर सबको खाना देती हूं और घर के सारे काम भी निपटा देती हूं
लगभग 1 महिने बाद मुझे और मेरी जेठानी को ये बात समझ आई की हम दोनो का हाथ धीमा क्यों चल रहा था
जो काम पहले 8 बजे होता था वो अब 11 बजे क्यों हो रहा
इसके पीछे कारण था मोबाइल, और मोबाइल में भी सबसे खतरनाक चीज चोटी शॉर्ट वीडियो, जो एक के बाद एक देखते जाओ, कैसे समय को खा रही है पता ही नही चलता
मैने ये भी देखा की जबसे शॉर्ट देखना बंद किया किसी चीज पे ज्यादा ध्यान टिकने लगा, कोई भी बात काफी जल्दी समझ आने लगी
और सबसे बड़ी बात पहले घर का सारा काम कर के 2 बजे खाली होते थे अब 12 बजे हो जाते हैं
मुझे और जेठानी जी को इस बात को समझने में समय लगा लेकिन आज 1 साल हो गया है अब सुबह उठ के फोन ना देखना अपने आप में एक अच्छी आदत बन गई है
शायद मेरे पापा ये बात जानते थे इस लिए बड़ी सहूलियत से बोल दिया की जो सास बोल रही हैं कुछ दिन कर के देखो
हमारे घर में होने वाली कीच कीच खत्म हो गई,
अब सोचिए ये शॉर्ट्स कितनी खतरनाक चीज है
मेरा जो हाल था वही हाल आज की हर लड़की और लड़के का है, शॉर्ट और रील के चक्कर में
जो काम 10 मिनट का है वो 2 घंटे में पूरा होता है
यदि आप भी अपने परिवार को ठीक से संभाल नहीं पा रहई हैं या आप को लगता है की समय बहुत जल्दी खत्म हो जाता है और आप सारा दिन कुछ कर नहीं पाते तो
मात्र 1 महीने के लिए रील देखना बंद कर दीजिए
ये वो मीठा जहर है जो अंदर से दिमाग और और हमारे समय को धीरे धीरे खाता जा रहा है
उम्मीद में मेरे इस अनुभव से बहुत से गृहणियों को कुछ फायदा होगा
कमेंट कर के ये भी बताएं क्या आपने ये नोटिस किया है की रील दखने से बिना अंदाज का समय नष्ट होता है
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Tuesday, 6 May 2025
निःस्वार्थ प्रेम का अर्थ वह होता है,
यदि निस्वार्थ भाव से इंसान की आंखों में स्नेह, होठों पर मुस्कान, हृदय में सरलता और करुण नहीं है, तो सब कुछ है व्यर्थ
✍🏻
निःस्वार्थ प्रेम का अर्थ वह होता है, जिसमें स्वार्थ न हो । प्रेम देने का नाम है, लेने का नहीं। जब प्रेम के बदले कोई अपेक्षा की जाती है, तब वह प्रेम निः स्वार्थ प्रेम नहीं रह जाता है। एक माँ अपने बुरे से बुरे पुत्र को भी निःस्वार्थ प्रेम के वशीभूत होकर गले से लगा लेती है, जबकि दूसरे रिश्तों में उस व्यक्ति विशेष के लिए हमें अच्छा होना पड़ता है, तभी प्रेम मिल पाता है, लेकिन माता-पिता द्वारा अपने बच्चे को किए गए प्रेम को निस्वार्थ कह सकते हैं। बच्चा बड़ा होकर अपने मां-बाप के प्रेम का कर्ज किस तरह उतारेगा, इसकी परवाह मां बाप कभी नहीं करते हैं और अपने बच्चे की परवरिश में पूरी जिंदगी लगा देते हैं। निस्वार्थ प्रेम का इससे सच्चा उदाहरण और क्या हो सकता है ।
आज के परिवर्तनशील माहौल में अधिकांश लोग स्वार्थी हो गए हैं क्योंकि हर चीज किसी न किसी स्वार्थ के धागे में बंधी हुई है। फिर भी सच्चा प्रेम और दिल से किया गया प्रेम हमेशा निस्वार्थ होता है, लेकिन क्या सच्चे प्रेम को नापने का कोई पैमाना है ? इसलिए इस तरह के प्रेम में समय के साथ बदलाव भी होता है और धोखे भी होते हैं। हम एक-दूसरे को चाहे कितने भी भारी भारी प्यार भरे शब्दों से सजावट कर के सुविचार भेज दें, यदि निस्वार्थ भाव से हमारी आंखों में स्नेह, होठों पर मुस्कान, ह्रदय में सरलता और करुणा नहीं है, तो सब कुछ व्यर्थ है ।
लेखक: सुनिल राठौड़
Friday, 2 May 2025
जिस मनुष्य का जैसा विचार, कर्म, व्यवहार व स्वभाव होता है, उसी के अनुरूप उसे मिलता है सुख दुख व मान सम्मान
जिस मनुष्य का जैसा विचार, कर्म, व्यवहार व स्वभाव होता है, उसी के अनुरूप उसे मिलता है सुख दुख व मान सम्मान
✍🏻
सम्मान वह अनमोल भावना है, जो ना केवल हमारे रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक संबंधों को भी बेहतर बनाता है। यह एक सकारात्मक दृष्टिकोण है, जो किसी भी व्यक्ति की अहमियत और गरिमा को पहचानने से जुड़ा होता है। आत्म-सम्मान से लेकर दूसरों के प्रति सम्मान तक, यह हर पहलू हमारे जीवन को प्रभावित करता है। खासकर छात्रों के लिए, यह एक महत्वपूर्ण विषय बन जाता है क्योंकि यही वह समय है, जब वे दूसरों से सम्मान प्राप्त करने के साथ-साथ खुद का भी सम्मान करना सीखते हैं। मान सम्मान व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है । बुरे विचार व बुरे स्वभाव वाला व्यक्ति हमेशा पतन की खाई में ही गिरता है । यदि हममें दूसरों से मान सम्मान पाने की अपेक्षा है तो हमें भी सामने वाले व्यक्ति को सम्मान देना ही होगा ।
मान सम्मान अनंत सम्पत्ति है। पद पैसे की शक्ति का रुतबा इन सबका अंत है, मान और सम्मान की सम्पत्ति तो सदैव अनंत है क्योंकि समय के बदलने के साथ ही पद प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है, परंतु मान और सम्मान का कभी भी अंत नहीं होता। ताली दोनों हाथों से बजती है, एक हाथ से नहीं । रास्ता दिखाने वाले को पहले स्वयं आगे चलना पड़ता है । हर मनुष्य का जैसा विचार, कर्म, व्यवहार और स्वभाव होता है, उसी के अनुरूप उसे सुख-दुख व मान-सम्मान मिलता है ।
✍🏻 *लेखक
सुनिल राठौड़ बुरहानपुर मप्र
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के नाम छोटा सा संदेश.. छोड़ा मुंह बड़ी बात..
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के नाम छोटा सा संदेश.. छोड़ा मुंह बड़ी बात.. राज नेता, कुछ विपक्षी दल,संगठन,मीडिया.सभी, के सभी अपनी अपनी र...
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मैने कहा क्यों मेरे लिए स्वयं को बर्बाद कर रहे हो, ये जानते हुए भी की मेरी शादी हो गई है, आप भी कोई अच्छी लड़की देख कर शादी क्यों नही कर ले...
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तुम्हें देखे..... बिना जाने.....तेरी तस्वीर बनादी है।2 तुम्हें चाहे..... बिना चाहे..... तेरी सूरत बना दी है। तू कितनी खूबसूरत है....ते...
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मैं " पुरुष " हूँ... (सुनिल राठोड) मैं भी घुटता हूँ , पिसता हूँ टूटता हूँ , बिखरता हूँ चिल्लाता हूं।सहता हू भीतर ही भीतर रो नही पा...
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खरेच मंत्री संजय राठोड यांनी बंजारा समाजासाठी काय केले ? *मंत्री संजयभाऊ राठोड यांचेवर प्रश्न निर्माण करणा-यांच्या माहितीकरीता.* बंजारा आरक...
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सभी को प्रणाम। सबसे पहले मैं आपको अपना परिचय देता हूँ। मेरा पूरा नाम सुनील नारायण राठौड़ है। मेरा जन्म 22 अप्रैल 1989 दिन बु...
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एक स्कूल के प्रिंसिपल एक बड़ी मीट की दुकान में घुसे और काउंटर पर बैठे लड़के से कहा कि मुझे दो किलो मीट दे दो। वहां लड़के ने कहा हां सर आप ब...