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Saturday, 23 August 2025

हनीमून की रात जैसे ही पतिदेव के साथ समागम होने का मूड बना वैसे ही मेरी बुआ सास दरवाजे पर आके जोर से बुलाती है

हनीमून की रात जैसे ही पतिदेव के साथ समागम होने का मूड बना वैसे ही मेरी बुआ सास दरवाजे पर आके जोर से बुलाती है


बेटा बाहर आओ,


जल्दी से मैंने कपड़े पहने और मन में सोचने लगी क्या तरीका है ये

बार आते ही उन्होंने ने बोला आज तुम्हारी सुहागरात है, सब अच्छे से करने की जिम्मेदारी तुम्हारे ऊपर है, बबुआ अभी नादान है


मैं शरमाते हुए मन में सोची 4 महीने फोन पर बात करने पर ही समझ आगया था की आप के बबुआ कितने नादान है


मैने बोला ठीक है बुआ जी, और बुआ जी बोलती है

बस जल्दी से इगो पोता या पोती का मुंह दिखा दो

अब नेक काम में दूरी बर्दाश्त नहीं होती है


खैर मैं अपने कमरे में आई और पतिदेव के साथ शरारत भरी बातें हुई और फिर वही हुआ जो होना होता है


लेकिन अब कुछ दिन घर में मेहमान आने वाले थे, लोग बारी बारी आते और सभी औरतें एक ही आशीर्वाद देती


जल्दी से एक बच्चा देदो पहले तो मैं शर्मा जाती लेकिन धीरे धीरे सुन सुन के मुझे भी अब चिढ़ होने लगी थी।


क्यों की जो आता बस यही बोलता, मन तो करता बोल दो की अभी तो नई शादी हुई है बोले होते इतनी जल्दी है तो साथ में पहले बच्चा कर लेती फिर शादी कर के उसे ले आती


पर नई होने की वजह से कुछ बोलना मेरे संस्कार के खिलाफ था


दिन रात ये बात सुन के मैने पतिदेव से बोला की अब हमे डॉक्टर से मिल के बच्चे के बारे में सोचना चाहैए शादी को 6 महीने हो गए हैं


उन्होंने बोला पागल हो क्या शादी में खुद इतना खर्चा हुआ है कैसे सभी कुछ मैनेज होगा बच्चे की जिम्मेदारी एक बड़ी जिम्मदारी है, कोई जो बोल रहा है बोलने दो, एक कान से सुनो दूसरे से निकाल दो


मुझे गुस्सा लग गईं मैंने बोला आप खुद तो दिनभर घर से बाहर रहते हैं सुनना तो मुझे पड़ता है

घर के लोग तो बोलते हैं

साल में एक बार फोन करने वाले भी हेलो बोलने के बाद सीधा पूछते हैं


बहु को कुछ है ?अब कैसे सबको जवाब दूं


और ऐसे ही पहली बार हमारी लड़ाई हुई


फिर एक दिन मेरी सास मुझे समझाने लगी की बेटा जल्दी बच्चा पैदा करो, यदि कोई दिक्कत है तो खुल के बोलो डॉक्टर से बात करते हैं


मैने भी बोल दिया मैं तो चाहती हूं पर आप के बबुआ नही चाहते हैं


अब घर में बवाल मच गया, लेकिन किसी तरह मेरे समझदार ससुर जी ने समझाया और बात को खत्म किया


2 3 दिन तो किसी ने कुछ नही बोला लेकिन एक दिन शाम को फिर यही बात उठने लगी


और मेरे पति ने बोला की अभी मेरी कमाई इतनी नही है की एक बच्चे की जिम्मेदारी ले सकूं


मां ने तुरंत बोला क्या बच्चा के पीछे करोड़ों खर्च होंगे

जब पैदा होगा तो अपने भाग्य से लेके आएगा

तुम्हारे पापा की छोटी सी नौकरी में मैने 3 बच्चे पाले हैं


मेरे पतिदेव के पास कोई जवाब नही था तभी मेरे ससुर जी बीच में आते हैं


और बोलते हैं


मेरी कमाई कम थी लेकिन हमारा खर्चा भी कम था, इस लिए बच्चे पल गए


पहले हमारी जरूरत सीमित थी, रोटी कपड़ा और मकान ये सबसे ज्यादा जरूरी था इसके अलावा अन्य किसी चीज की जरूरत नहीं थी


लेकिन आज रोटी कपड़ा मकान और इंटरनेट जिंदा रहने के लिए जरूरी है, पहले एक फोन से पूरा घर काम होता था लेकिन आज जितने सदस्य उतना फोन है और उतना रिचार्ज है


हमारे समय में स्कूल में 2 बच्चे पढ़ने पर एक को फुल फीस थी एक ही हाफ

और तीन पढ़ने पर 2 को फुल और की पूरी तरह माफ


स्कूल का काम सिर्फ पढ़ना था ड्रेस किताब कॉपी ये सब हम कहीं से भी ले सकते थे, लेकिन आज सब कुछ 4 गुने दाम पर लेना होता है उसी स्कूल से


खाने में हमारे लिए डाल चावल सलाद रोटी पर्याप्त थी, और स्कूल में रोटी सब्जी पराठा अचार यही ले जाते थे

लेकिन अब कंपटीशन में बच्चो को कॉन्टिनेटियल खाना देना पड़ता है


पहले साल में 1 2 बार बाहर खाते थे और आज हफ्ते में 2 बार बाहर खाया जाता है


पीने का पानी शुद्ध कुवे से मिलता था लेकिन आज पानी भी खरीद के पीना पड़ता है,


बुखार हो या सर्दी जुखाम, तेल मालिश करते ही बच्चे ठीक हो जाते थे

लेकिन आज छींक आने पर भी डॉक्टर स्पेशल केस में बच्चो को डाल देते हैं और हजारों का बिल बनाते हैं


एक ऑटो रिजर्व कर के पूरा शहर घूम लेते थे, आज घर के एक एक सदस्य को मोटरसाइकिल चाहिए साइकिल से कोई चलना नही चाहता


देखो शांति समय समय की बात है, बबुआ अभी बच्चा नही चाहता क्यों की उसे आज की सच्चाई पता है

की महंगाई ज्यादा नही हुई है बल्कि हमारे खर्च ज्यादा हो गए हैं


इस लिए उसे समय दो थोड़ा सेविंग करने की


और बबुआ तुम, इस बात का ध्यान रखो कि बाप बनने से पहले अच्छा पैसा कमाओ एक बच्चा पैदा करो लेकिन परवरिश अच्छी करो उसकी

और सबसे जरूरी समय रहते बच्चा पैदा करो नही तो पता चला तुम्हारे रिटारमेंट की उम्र हो रही है, और तुम्हारा बच्चा दसवीं को परीक्षा दे रहा है


उस दिन में बाद से घर में दुबारा बच्चे को लेके चर्चा नही हुई

और पतिदेव भी समझ गए

और 2 साल बाद हमे एक बेटी हुई, है जिसको परवरशिष हम सब मिलकर करते हैं


घर के बड़े बुजुर्ग यदि समझदार हो तो घर हमेशा सही दिशा में चलता है और खुशहाली बरकरार होती है 

Friday, 22 August 2025

आप कुछ करिए या ना करिए कुंडली मिलिया ना या ना मिलिया पर आप लोग फोन पर बात जरूरकीजिए

 कॉलेज खत्म होने के बाद मेरे पिता मेरे लिए रिश्ता तो ढूंढ रहे थे लेकिन मैं अभी आगे और पढ़ना चाहती थी मैं घर पर इस बारे में बात करने की कोशिश की तो पापा ने कहा शादी की जा रही है अगर तुम आगे पढ़ना चाहती हो तो शादी के बाद भी पढ़ सकती हो लेकिन एक बार अगर उम्र निकल गई तो अच्छे लड़के नहीं मिलेंगे


अनीश का रिश्ता मेरे घर आया दिखने में काफी हैंडसम थे परिवार भी काफी संपन्न था जब मेरे पापा ने अनीश की फोटो मुझे दिखाई तो मुझे यह कोई खास नहीं लगे थे पर जब बात सामने से हुई तो अनीश के प्रति मेरा रवैया बदल गया


अनीश के घर से कई लोग आए थे और मेरे घर से सिर्फ मेरा परिवार था इस दौरान हम लोगों ने एक दूसरे को देखा और देख करके ही पसंद कर लिया हमें मौका ही नहीं मिला कि हम दोनों एक दूसरे से कुछ बात कर सके


कुछ समय बाद हिम्मत जुटा करके मैंने अपनी भाभी से यह बात रखी की शादी से पहले मैं चाहती हूं कि मैं अनीश से कुछ बातें कर लूं


जब भाभी ने इस बात को भैया के सामने रखा तो भैया ने उन्हें तुरंत बोल क्या मैंने भी कभी शादी से पहले तुमसे बात की थी जो इसे करने की जल्दी है भाभी ने उन्हें समझाया कि आज जमाना बदल चुका है तो अगर वह बात करना चाहती है तो उसमें कोई बुरी बात नहीं है हर लड़की चाहती है कि उसे अच्छा पति मिले जो उसे समझे


भैया भाभी की बात को मान जाते हैं और यह बात पापा के सामने रखते हैं पर आप सोच सकते हैं जिस घर में भाई ही नहीं तैयार है उसे घर में बाप कैसे तैयार हो सकता है


से बात भैया ने पापा को बताइ और बोला कि पापा आपका जमाना कुछ और था आज का जमाना कुछ और है


जब मेरे पापा ने यह बात अनीश के पापा के सामने रखें तो उनका रवैया बदल गया और वह गुस्से में आ गए उन्होंने बोला


क्या हम आपको गैर जिम्मेदार लगते हैं या हमारे संस्कार में आपको कुछ कमी लगती है जो आप ऐसी बातें कर रहे हैं हमारे यहां शादी से पहले लड़का लड़की बात नहीं करते


यदि आपको लगता है कि हमारी सोच खराब है तो आप यहां से रिश्ता तोड़ सकते हैं


उनकी यह बातें सुनकर मेरे पापा डर गए उन्हें डर था की शादी फिक्स हो चुकी है अगर अब टूटती है तो समाज और बिरादरी में काफी बदनामी होगी


जिसके डर की वजह से उन्होंने मुझे समझाया कि यह चीज अभी मुमकिन नहीं है


हमारी शादी होती है और सुहागरात वाले दिन हम करीब आते हैं और शादीशुदा जोड़ों की तरह हमारे बीच में भी वह सब कुछ होता है जिसकी चाहत एक लड़की को होती है


लेकिन शादी के दूसरे और तीसरे दिन है अनीश मुझे बोलते हैं कि मेरा छोटा भाई भी तुम्हारे साथ संबंध बनाना चाहता है


जिसे सुनकर मैं निशब्द रह गई और मैंने बोला आपको शर्म नहीं आती अपनी पत्नी के बारे में ऐसी बातें करते हुए


इस पर अनीश ने मुझे बोला तो इसमें गलत क्या है मैं भी अपनी भाभी के साथ संबंध बनाए हैं आखिर हम सब एक ही परिवार के हिस्सा है


यह सुनने के बाद मेरे पांव के नीचे से जमीन खिसक गई और मैं सच में पड़ गई कि आखिर मेरी शादी कैसे घर में हो गई है


शादी के 10 दिन बाद मेरे ससुर मुझे गलत तरीके से छूते हैं यह मेरे लिए किसी सदमे से कम नहीं था जब मैं अनीश के सामने इस बात को रखा तो अनीश ने बोला पापा का भी हक है तुम्हारे ऊपर


जिसे सुनने के बाद मैं अंदर से हिल गई


मैंने अनिल से बोला यह क्या तरीका है आपके घर में एक लड़की का इज्जत मान और सम्मान आप लोगों के लिए कुछ भी मायने नहीं रखती आप क्या चाहते हैं

मैं आपके साथ भी आपके भाई के साथ भी और आपके पापा के साथ भी ये सब करूं


स्तब्ध होकर कि मैं अपनी सास के पास जाती हूं और अपनी जेठानी के पासbजाती हूं जब मैं उनसे यह बात बोली तो उन्होंने बोला जैसा तुम्हारा पति का रहा है वैसाकरो


इसके बाद मुझे भाभी ने बताया कि यह परिवार पारिवारिक संबंध में भरोसा करता है जिसमें कोई भी किसी के साथ भी संबंध बन सकता है


इसे सुनने के बाद में अंदर से सहम गई थी कि किसी परिवार में ऐसा कैसे हो सकता है जब मैं अनीश से इस बारे में बात की कि आप लोगों ने पहले मुझे क्यों नहीं बताया तो उसे पर उन्होंनेकहा


यह भी कोई बताने की चीज है हर घर के अपने कुछ रीति रिवाज होते हैं और हमारे घर के रीति रिवाज यही है


और हमें यह बताने के लिए मौका ही नहीं मिला अगर शादी होने से पहले तुम मुझसे पहले बात की होती तो शायद मैं तुम्हें इस बारे में बता सकता था पर हमारे तुम्हारे बीच कोई बात ही नहीं हुई थी


इस पर मैंने बोला कि मेरे पिता ने आपके सामने पेशकश रखी थी पर आपके पिताजी ने मना कर दिया था


अनीश ने बोला कारण कुछ भी हो मानना तुम्हें पड़ेगा क्योंकि अब तुम इस घर की बहू और हमारी परंपरा को निभाना पड़ेगा


इसे सुनने के बाद मैंने अपने पिता को फोन किया और उनसे बोला कि मुझे इस घर में नहीं रहना है मेरे पापा बोलते हैं शादी हुई अभी एक महीना भी नहीं हुआ और तुम ऐसी बातें कर रही हो एडजेस्ट होने में थोड़ा समय लगता है


मैंने उन्हें बताया कि अगर एक पल में और यहां रुकती हूं तो फिर मुझे मेरी जान देनी पड़ेगी इस पर मेरे पापा का घबराते हैं और मेरे भाई से मेरी बात करवाते हैं


मुझे पता था अगर मैं अपने भाई अपने पिता के सामने कोई भी बात रखूंगी तो मेरा यकीन कोई नहीं करेगा इसलिए मैंने अपने पिता और अपने भाई को बोला कि आप सीधे मेरे घर आइए नहीं तो इन लोगों को मेरे ऊपरशक होगा


इसके बाद मेरी भाभी ने कमान संभाली और मेरे ससुराल में फोन करके मुझे बोला कि आप 2 से 3 घंटा के लिए मुझे को घर भेज दीजिए क्योंकि मेरी सास की तबीयत सही नहीं है और वह उसे काफी याद कर रही है


पहले तो घर वालों ने मना कर दिया लेकिन दो-तीन बार बात करने के बाद वह तैयार हो गए पर इस शर्त पर कि उनके साथ अनीश भी जाएंगे


मेरी भाभी ने बोला कोई दिक्कत नहीं है आप सब भी आ जाइए और तबियत देख सकते हैं जिसे सुनने के बाद उन लोगों को शायद यह यकीन हो गया कि मेरी मां की तबीयत सच में खराब है और उन्होंने बोला कि ठीक है आप अपने पति को भेज दीजिए यानी कि मेरे बड़े भाई को भेज दीजिए ताकि मैं अपने घर जा सकूं


मेरे भाई आते हैं मुझे ले जाने के लिए और मैं उनके साथ तैयार होकर जाने लगती हूं उसी के साथ मेरी सास और मेरे ससुर मुझे सख्त हिदायत देते हैं कि चाहे जो भी हो तुम्हें दो से तीन घंटे में यहां आना है और हमारे घर की कोई भी बात तुम्हें किसी से शेयर नहीं करनीहै


उनके मुंह पर मैंने बोला हां ठीक है मैं ऐसा ही करूंगी लेकिन जब मैं घर जाती हूं तो अपने पापा को बोलता हूं कि वह घर हमारे लायक नहीं है


उसे घर में इतनी घिनौनी हरकत होती थी कि उसे समय मुझे अपने पिता के सामने उन चीजों को बताने में भी शर्म आ रही थी


मैं किसी को कुछ बताया नहीं और सिर्फ रोती रही क्योंकि मेरी जिंदगी खराब हो चुकी थी हिम्मत जुटा करके मैंने अपनी भाभी को सारी बात बताई


कि वह घर ऐसा घर है जहां पर मेरे पति मुझे ससुर से और देवर से संबंध बनाने को बोलते हैं उनका कहना है कि यह उनके घर की परंपरा है और वह लोग पारिवारिक संबंध स्थापित करने में यकीन रखतेहैं


जिसे सुनने के बाद मेरी भाभी भी मेरी तरह ही दुखी हो गई और उन्होंने यह सारी बात अपने भाई को बताई


यह ऐसी व्यवस्था थी किसके बारे में कोई भी सुनता तो उसे कभी यकीन नहीं होता था मजबूरन मेरे भाई को भी कोई यकीन नहीं हुआ उन्होंने बोला ऐसी कोई प्रथम होती ही नहींहै


फिर मेरी भाभी ने बताया कि सच में ऐसी होते हैं और बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिन चीजों को फॉलो भी करते हैं


शाम को जब मेरे ससुर का फोन आता है तो मैं उन्हें साफ मना कर देता हूं कि ऐसे घर में जहां पर एक ही औरतों के साथ अलग-अलग मर्द संबंध बनाते हो मुझे ऐसे घर में नहीं रहनाहै


इस पर वह मुझे पुलिस की धमकी देते हैं और मेरे भाई मेरा फोन लेकर के उल्टा उन्हें धमकी देते हैं


आज जिस चीज को होगी 4 साल का समय बीत चुका है मेरी जिंदगी खराब होने के पीछे सिर्फ और सिर्फ एक कारण था और वह था शादी से पहले बात न करने देना


शादी कैसी स्थिति होती है जिसमें आप किसी अनजान शख्स के साथ अपनी पूरी जिंदगी बिताते हैं और अब यह पुराने जमाने जैसी बात नहीं रही इसलिए यह बहुत ज्यादा जरूरी है कि आपकी शादी जिससे भी फिक्स हो रही है शादी को फिक्स करने से पहले कम से कम एक महीने तक आप लोग बातकीजिए


लड़कों के केस का तो मुझे नहीं पता पर एक लड़की के लिए यह काफी ज्यादा जरूरी होता है क्योंकि वह अपने घर को छोड़कर के किसी नए घर में जा रहीहोती है


लेकिन यही लड़की अगर फोन पर बात करने की बात कर दे तो लोग उसे कैरक्टरलेस समझते हैं


मेरी भाभी ने मेरी जिंदगी बचाई जहां पर मेरी कोई भी गलती नहीं थी पर आज भी मेरे ऊपर तलाकशुदा का ठप्पा लगा हुआ है जिसमें मेरी कोई गलती नहीं है


गलती है तो इस समाज की जिसने ऐसी प्रथा बनाई की शादी से पहले फोन पर बात करना भी बहुत सारे लोगों के लिए काफी बड़ी बात हो जाती है


आज के समय में चाहे लड़की हो या लड़का मैं सबसे यही गुजारिश करती हूं आप अगर शादी के लिए लड़की देख रहे हैं या लड़का देख रहे हैं आप कुछ करिए या ना करिए कुंडली मिलिया ना या ना मिलिया पर आप लोग फोन पर बात जरूरकीजिए


और दोनों लोग इस तरीके से बात कीजिए जिसमें कोई भी चीज छिपी ना हो अगर सामने वाला इंसान आपको आपकी स्थिति के अनुसार ही अपनाने को तैयार है तो इससे अच्छा और सुखद अनुभव आपके लिए कुछ भी नहीं हो सकता

Monday, 4 August 2025

संभोग 19 साल की लड़की 31 साल का लड़का

 संभोग 19 साल की लड़की 31 साल का लड़का

शब्द सुनकर कई लोगों की आँखें चमक उठेंगी... पर मुझे आज भी याद है वो पहली रात, जब मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई थी।


मैं कविता, 19 साल की एक साधारण लड़की हूँ। मेरे लिए ये सब बातें किताबों में पढ़ी थीं या दोस्तों की गपशप में सुनी थीं। लेकिन मेरी शादी अश्विन से हुई — 31 साल के एक सफल बिजनेसमैन से। उम्र का ये फासला मेरे लिए शुरू में अजीब था, जैसे कोई दो अलग-अलग दुनियाएं एक छत के नीचे आ गई हों।


भाग 1: पहली रात की ख़ामोशी


शादी की पहली रात मेरी धड़कनें तेज़ थीं। डर, शंका, संकोच… सब एक साथ मन में उमड़ रहे थे। लेकिन अश्विन ने कुछ नहीं कहा। उसने न मुझे छूने की कोशिश की, न कोई सवाल किया। बस मेरे हाथ को थामकर एक वाक्य बोला —


"तुम्हें जितना समय चाहिए, मैं दूंगा।"


उसकी ये बात मेरे दिल को छू गई… पर कहीं ना कहीं ये सन्नाटा किसी तूफान का पूर्व संकेत लग रहा था।


भाग 2: दो ज़िंदगियाँ, दो रफ्तारें


अश्विन की जिंदगी एक मशीन जैसी थी। सुबह 5 बजे उठना, 6 बजे मीटिंग्स, 9 बजे ऑफिस, 10 बजे डील, 8 बजे डिनर… और मैं? मैं तो अभी तक कॉलेज की दोस्तियों से बाहर नहीं निकली थी। मुझे तो बस देर तक सोना, मस्ती करना, गाने सुनना अच्छा लगता था।


हम दोनों के बीच जैसे एक अदृश्य दीवार खड़ी हो गई थी।


भाग 3: पहली दरार


एक दिन मैंने गुस्से में कह दिया — "आपको बस काम से प्यार है! मेरे लिए तो आप के पास कभी समय ही नहीं होता!"


अश्विन ने कुछ नहीं कहा, सिर्फ मुस्कुरा कर बोला, "प्यार का मतलब सिर्फ बातें करना नहीं होता, कविता।"


पर मैं जानती थी, कुछ तो है जो वो छुपा रहा है।


भाग 4: बदलते रिश्ते… और एक राज़


धीरे-धीरे अश्विन वीकेंड पर समय निकालने लगा। लॉन्ग ड्राइव, कॉफी डेट्स, पिज़्ज़ा पार्टी… जैसे सबकुछ अचानक बदल रहा था। लेकिन मेरा मन कह रहा था, कुछ तो है… कोई खालीपन जो छुपाया जा रहा है।


एक रात मैंने उसकी डायरियों में झाँका… वहाँ एक लाइन पढ़ी —


"शायद कविता को कभी बताना ही नहीं चाहिए… कि मेरी पिछली ज़िंदगी में कोई और भी थी।"


मेरा दिल कांप उठा…


भाग 5: पुरानी परछाइयाँ और नई रोशनी


मैंने सामना किया। अश्विन सन्न रह गया, लेकिन उसने मेरी आँखों में देखकर कहा —


"वो अतीत था कविता… और तुम मेरा भविष्य हो। मैंने उससे कुछ नहीं छुपाया, सिर्फ तुम्हें दुख से बचाना चाहता था।"


उस दिन मैंने सीखा — हर रिश्ते की परछाई में कभी न कभी कोई पुरानी कहानी होती है। लेकिन आगे बढ़ना ही सच होता है।


भाग 6: तालमेल की जीत


आज मैं और अश्विन एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा ही नहीं, सुकून भी हैं। मैं उसके काम में हाथ बँटाती हूँ, वो मेरी मस्ती में साथ देता है।


हमने एक-दूसरे को बदला नहीं… समझा है।


अंतिम पंक्तियाँ


🕯️ कभी-कभी प्यार की असली परीक्षा उम्र, अतीत या आदतें नहीं होती…

बल्कि ये होती है — कितनी बार हम बिना टूटे, एक-दूसरे के सच को स्वीकार कर पाते हैं।


❣️ अगर ये कहानी आपके दिल तक पहुँची हो, तो इसे ❤️ 

Thursday, 10 July 2025

योग्यता अनुभव से आती है

 योग्यता अनुभव से आती है और विश्वास बढ़ाता है मानवीय रिश्तों की चमक

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योग्यता का कोई आधार नहीं है । कभी कभी एक अनपढ़ भी वो कर देता है, जो बड़े बड़े बुद्धिमान नहीं कर सकते।योग्यता अनुभव से आती है, फिर भी हमारा कानून 21 साल के लड़के को योग्य मानते हैं, जबकि लड़की को 18 साल में योग्य मानते हैं । दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति अपनी “योग्यता” के अनुसार चमकता है, अपनी इच्छा के अनुसार नहीं ! कहते हैं कि अनुभव और अभ्यास हमें बलवान बनाता हैं । दुःख हमें इंसान बनाता हैं । हार हमें विनम्रता सिखाती हैं । जीत हमारे व्यक्तित्व को निखारती है, लेकिन सिर्फ़ विश्वास ही है, जो हमें आगे बढने की प्रेरणा देता है।

योग्यता किसी व्यक्ति की किसी विशेष कार्य को करने की क्षमता है, चाहे वह जन्मजात हो या सीखी हुई। यह एक महत्वपूर्ण कारक है, जो किसी व्यक्ति के सफल होने की संभावना को प्रभावित करता है। हममें से कोई नहीं जानता कि अगले पल क्या होने वाला है, फिर भी हम आगे बढ़ते हैं तो किसके सहारे? यह भरोसा ही होता है, जो हमारे लिए प्रेरक का काम करता है। जिन लोगों को भरोसे की समस्या होती है, उन्हें केवल आईने में देखने की जरूरत होती है। वहां वे उस एक व्यक्ति से मिलेंगे जो उन्हें सबसे अधिक धोखा देगा।


      लेखक: सुनिल राठौड़.. बुरहानपुर MP 

Tuesday, 8 July 2025

कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है

 कैंसर कोई खतरनाक बीमारी नहीं है! डॉ. गुप्ता कहते हैं, लापरवाही के अलावा कैंसर से किसी की मौत नहीं होनी चाहिए। (1). पहला कदम चीनी का सेवन बंद करना है। आपके शरीर में चीनी के बिना, कैंसर कोशिकाएं स्वाभाविक रूप से मर जाती हैं। (2). दूसरा कदम यह है कि एक कप गर्म पानी में नींबू का रस मिलाएं और इसे सुबह भोजन से पहले 1-3 महीने तक पिएं और कैंसर खत्म हो जाएगा। मैरीलैंड मेडिकल रिसर्च के अनुसार, गर्म नींबू पानी कीमोथेरेपी से 1000 गुना बेहतर, मजबूत और सुरक्षित है। (3). तीसरा कदम है सुबह और रात को 3 बड़े चम्मच ऑर्गेनिक नारियल तेल पिएं, कैंसर गायब हो जाएगा, आप चीनी से परहेज सहित अन्य दो उपचारों में से कोई भी चुन सकते हैं। अज्ञानता एक बहाना नहीं है। अपने आस-पास के सभी लोगों को बताएं, कैंसर से मरना किसी के लिए भी अपमान है; जीवन बचाने के लिए व्यापक रूप से साझा करें।

Friday, 4 July 2025

महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने देखा था। सपना...

 सोचिए, आपका फ़ोन बिना तार के चार्ज हो रहा है, या दूर-दराज के इलाकों में भी पलक झपकते ही बिना तार के बिजली पहुंच रही है!

यह बात सुनने में भले ही साइंस फिक्शन लगे, लेकिन अब यह सिर्फ कल्पना नहीं है!


जून 2025 में, अमेरिकी रक्षा अनुसंधान एजेंसी DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) ने न्यू मैक्सिको में एक अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की है।

उन्होंने लेजर तकनीक की मदद से 800 वॉट ऊर्जा को 5.3 मील (8.6 किमी) दूर सफलतापूर्वक भेजा है!

इस 30 सेकंड के प्रयोग में 1 मेगाजूल से अधिक ऊर्जा भेजी गई, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।


यह सफलता साबित करती है कि लंबी दूरी तक वायरलेस बिजली भेजना अब कोई सपना नहीं, बल्कि एक उज्ज्वल वास्तविकता है।

एक शक्तिशाली लेजर और विशेष रिसीवर का उपयोग करके, हवा में उड़ने वाले ड्रोन, बिना ईंधन वाले सैन्य ठिकाने, और यहां तक कि दुर्गम क्षेत्रों में भी बिजली पहुंचाना संभव होगा।


आश्चर्यजनक रूप से, वायरलेस बिजली भेजने का यह सपना लगभग एक सदी से भी पहले महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने देखा था।

उन्होंने 'वर्ल्ड सिस्टम' नामक एक विशाल टावर के निर्माण के माध्यम से दुनिया भर में वायरलेस बिजली वितरण की कल्पना की थी, हालांकि विभिन्न सीमाओं के कारण तब यह साकार नहीं हो पाया था।

DARPA की यह सफलता टेस्ला के उस दूरदर्शी सपने को नया जीवन दे रही है!


लेकिन सिर्फ यु'द्ध के मैदान में ही नहीं, यह वायरलेस बिजली तकनीक हमारे दैनिक जीवन में जो क्रांति ला सकती है, वह अकल्पनीय है!

यह तकनीक हमारे दैनिक जीवन को और अधिक सुविधाजनक, कुशल और सुरक्षित बनाएगी।


हो सकता है निकट भविष्य में हम एक ऐसी दुनिया में रहें जहाँ तारों के जंजाल से मुक्ति मिलेगी और बिजली और अधिक सुलभ होगी। ⚡❤️

Thursday, 3 July 2025

तुमने हमेशा कहा कि मैं तुम्हारी बात नहीं समझता… पर क्या तुमने कभी ये सोचा,

 "तुमने हमेशा कहा कि मैं तुम्हारी बात नहीं समझता…

पर क्या तुमने कभी ये सोचा,

कि समझने के लिए भी तो कुछ कहा जाना चाहिए ?


तुम चुप रही, और मैं हर चुप्पी को तोड़ने की कोशिश करता रहा।

तुमने अपनी थकावट का हवाला दिया,

और मैंने अपनी बेचैनी को तकिए में छुपा लिया।

तुमने कहा, ‘मुझे स्पेस चाहिए।’

और मैंने अपनी पूरी दुनिया ही तुम्हारे लिए खाली कर दी…


पर जब तुम गई,

तो वो दरवाज़ा भी बंद कर गई

जिस पर मैंने उम्मीद टाँग रखी थी।


अब अगर कभी लौटने का मन हो भी,

तो दस्तक मत देना —

क्योंकि मैं अब आवाज़ नहीं पहचानता…"

:सुनिल राठौड़ बुरहानपुर 

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...