sunilrathod

Wednesday, 4 December 2024

शादी होती है तो संभोग होना लाज़मी है,

 शादी होती है तो संभोग होना लाज़मी है, एक लड़का शादी करता है तो उसके पीछे मुख्य कारण लड़की का शरीर है, लेकिन अगर गहराई से समझा जाए तो ऐसा नहीं है बात इससे कहीं ज्यादा बड़ी है 

मेरी शादी को छह साल हो गए थे। मेरे पति, राकेश, एक साधारण आदमी थे। बैंक में नौकरी करते थे और बस, उनकी दुनिया मेरे और हमारे छोटे से घर तक ही सीमित थी।, न कोई बड़े-बड़े सपने दिखाते थे। उनकी बातें, उनकी आदतें, सब मुझे साधारण लगती थीं। मैं अक्सर सोचती, "काश मेरी शादी किसी और से हुई होती, जो ज्यादा रोमांचक होता, मेरे लिए कुछ अलग करता।"


मेरे करीब तभी आते थे जब उन्हें शारीरिक संतुष्टि चाहिए होती थी और यही से मेरे मन में ये बात घर कर गई कि लडको को सिर्फ इस ही चीज से मतलब है 


मुझे कभी उनकी कद्र ही नहीं हुई। छोटी-छोटी बातों पर मैं उन्हें टोक देती। कभी कपड़े सही से नहीं पहने, कभी दाल में नमक ज्यादा डाल दिया, तो कभी बच्चों के होमवर्क में मदद करते-करते थक जाते। मुझे उनकी ये मुझे ये सब कभी अच्छी नहीं लगी।


मुझे इस बात से नफरत होती थी जब मैं बाहर माडर्न कपड़े पहन कर जाती और वो बोलते बाहर निकलने से पहले ध्यान दिया करो क्या पहनना है क्या नहीं

पर मैं बेपरवाह उनकी बात ध्यान नहीं देती थी


एक दिन राकेश जल्दी उठकर काम के लिए तैयार हो रहे थे। मैंने बिना देखे ही कहा, "ऑफिस के बाद सब्जी ले आना। हर बार भूल जाते हो।" उन्होंने सिर हिलाया और मुस्कुराते हुए बोले, "ठीक है।" वो दरवाजे से बाहर निकले और फिर... वो कभी वापस नहीं आए।


राकेश का ऑफिस जाते वक्त एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। जब पुलिस की गाड़ी मेरे घर के बाहर रुकी और उन्होंने खबर दी, तो जैसे मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई।


चंद दिनों बाद मुझे पता चला कि राकेश ने हमारे नाम पर बीमा लिया था। एक करोड़ की रकम मेरे खाते में आ गई। रिश्तेदारों ने कहा, "बहुत अच्छा किया राकेश ने। देखो, तुम्हारे और बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर दिया।" मैं बस चुपचाप सुनती रही।


वो एक करोड़ रुपये मेरे सामने थे, लेकिन मेरे पास राकेश नहीं था। मैंने सोचा, इस पैसे से मैं क्या खरीद सकती हूं? उनके चाय बनाने का तरीका? उनका बच्चों के साथ खेलना? वो हर शाम मुझे दफ्तर से फोन कर कहना, "कुछ चाहिए क्या?"


आज राकेश नहीं है, और मैं खुद माडर्न कपड़े नहीं पहनती क्यों की पहले मै बेपरवाह थी क्यों की लोग गंदी नजरों से नहीं देखते थे क्यों की राकेश साथ रहते थे 

आज ऐसा करने से पहले 100 बार सोचना पड़ता है


अब सब कुछ वही था, लेकिन उनके बिना सब अधूरा। जब मैं सुबह उठती, तो उनकी आदत थी चाय बनाकर मेरे पास लाने की। अब चाय का कप खाली था। जब मैं गुस्से में होती, तो वो मजाक करके मेरा मूड हल्का कर देते। अब वो खामोशी थी जो मेरे दिल को हर दिन तोड़ती थी।


मुझे याद आता है, कैसे वो हर महीने सैलरी मिलते ही मेरे लिए चुपचाप मेरी पसंद की साड़ी खरीद लाते थे। मैं शिकायत करती, "जरूरत नहीं थी, पैसे बचाया करो।" और वो कहते, "तुम्हारी मुस्कान के लिए इतना खर्च कर सकता हूं।"


अब मुझे एहसास हुआ कि वो छोटे-छोटे पल ही असली खुशियां थे। वो 'साधारण' पल ही मेरी जिंदगी का आधार थे। जिन बातों को मैं नज़रअंदाज़ करती थी, वो ही मेरे जीवन का हिस्सा थीं।


जीवन का सबक


अब जब मैं अकेली हूं, तो हर पल राकेश को महसूस करती हूं। हर चीज, हर कोना उनकी याद दिलाता है। जो बातें पहले मुझे शिकायतें लगती थीं, आज वही मेरी सबसे कीमती यादें हैं।


पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन वो जो रिश्ता, जो प्यार, जो अपनापन राकेश ने मुझे दिया, उसे कोई नहीं खरीद सकता। अब मैं समझती हूं कि प्यार दिखावा नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों में छुपा होता है।


काश, मैंने उनकी कदर पहले की होती। काश, मैंने उनकी हर छोटी बात को समझा होता। पर अब सिर्फ यही सोचती हूं—उनकी कमी हर पल महसूस होती है।


आज मैं नई लड़कियों की पोस्ट और वीडियो देखती हूं उसपे वो पति की बुराई करती हैं, और ज्यादातर महिलाएं आज अपने पति से संतुष्ट नहीं है और रोज घर में किसी ना किसी बात को लेके क्लेश करती है 


बस एक बात बोलूंगी, एक बार आंख बंद कर के देखो और सोचो अगर तुम्हारा पति तुम्हारे साथ ना रहे तो तुम्हारी दुनिया कैसी रहेगी

Tuesday, 3 December 2024

दो शरीर संभोग करें तो "काम"

 दो शरीर संभोग करें तो "काम"

दो मन संभोग करें तो "प्रेम"


दो दिल संभोग करें तो "ध्यान"

दो आत्माएं संभोग करें तो "समाधि"


दो पति-पत्नी संभोग करें तो "कर्तव्य"

दो प्रेमी संभोग करें तो "सुकून"


दो अनजान संभोग करें तो "वासना"

दो पड़ौसी संभोग करें तो "मजबूरी

लेखक: सुनिल राठौड़ 

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आज दराज़ में मिले तेरे ख़त कई पुराने थे

यक़ीनन वो मेरे गुज़रे हुए खूबसूरत ज़माने थे


कुछ वादे टूटे- बिखरे और गुम हो गए

ये वो वादे थे जो हमें उम्र भर निभाने थे


वफ़ा की राह में बिछड़े थे हम क्यों ..कब ..कैसे 

ये वो मसले थे जो हमें मिल बैठ कर सुलझाने थे


अब तलक हमारी हर शेर ओ शायरी का मेयार हो तुम

तुम्हारी दास्तान से जो गुमशुदा हम वो बदनसीब अफसाने थे


हाय ! क्या दौर था मोहब्बत के हसीं आलम का

किस कदर हम तेरे इश्क़ में दीवाने थे...


तुम हज़ार मर्तबा भी रुठ जाते तो मना लेते तुम्हे

बस हमारे दरमियां रकीबो के फ़लसफ़े ना आने थे


अभी कल की ही तो बात थी होठों पर मुस्कुराहट थी

आज ये आलम है कि ग़मज़दा धड़कनों के तराने हैं!


युवाओं को मेरी सलाह...

 युवाओं को मेरी सलाह...

1. अपनी #यौन इच्छाओं पर नियंत्रण ही आपकी सफलता या असफलता का कारण होगा।


2. पोर्न और हस्तमैथुन सफलता का सबसे बड़ा हत्यारा है। यह आपके मस्तिष्क को अवरुद्ध और नष्ट कर देता है।


3. ऊँट की तरह शराब पीने से बचें। अपने होश खोने और मूर्ख बनने से बुरा कुछ नहीं है।


4. अपने मानक ऊँचे रखें और किसी चीज़ से सिर्फ़ इसलिए संतुष्ट न हों कि वह उपलब्ध है।


5. अगर आपको कोई आपसे ज़्यादा होशियार मिले, तो उसके साथ काम करें, प्रतिस्पर्धा न करें।


6. कोई भी आपकी समस्याओं को बचाने नहीं आ रहा है। आपके जीवन की 100% ज़िम्मेदारी आपकी है।


7. आपको ऐसे लोगों से सलाह नहीं लेनी चाहिए जो जीवन में उस मुकाम पर नहीं हैं जहाँ आप पहुँचना चाहते हैं।


8. पैसे कमाने के नए तरीके खोजें। पैसे कमाएँ और उन मज़ाक करने वालों को नज़रअंदाज़ करें जो आपका मज़ाक उड़ाते हैं।


9. आपको 100 सेल्फ़-हेल्प किताबों की ज़रूरत नहीं है, आपको बस कार्रवाई और आत्म-अनुशासन की ज़रूरत है। अनुशासित रहें!


10. नशीली दवाओं से बचें। खरपतवार से बचें।


11. YouTube पर कौशल सीखें, नेटफ्लिक्स पर घटिया सामग्री देखने में अपना समय बर्बाद न करें।


12. कोई भी आपकी परवाह नहीं करता। इसलिए शर्मीलेपन को छोड़ें, बाहर जाएँ और अपने लिए अवसर बनाएँ।


13. आराम सबसे बुरी लत है और अवसाद का सस्ता टिकट है।


14. अपने परिवार को प्राथमिकता दें। भले ही वे बदबूदार हों, भले ही वे मूर्ख हों, उनका बचाव करें। उनकी नग्नता को छिपाएँ।


15. नए अवसर खोजें और अपने से आगे के लोगों से सीखें।


16. किसी पर भरोसा न करें। किसी एक पर भी नहीं, चाहे आपको कितना भी प्रलोभन क्यों न दिया जाए। खुद पर विश्वास रखें।


17. चमत्कार होने का इंतज़ार न करें। हाँ, आप हमेशा अकेले नहीं कर सकते, लेकिन लोगों की राय न सुनें।


18. कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प आपको कुछ भी हासिल करा सकता है। खुद को विनम्र बनाना ही आपको ऊँचा उठाता है।


19. खुद को खोजने का इंतज़ार करना बंद करें। इसके बजाय खुद को बनाएँ।


 20. दुनिया आपके लिए धीमी नहीं होगी।


21. कोई भी आपका कुछ भी कर्जदार नहीं है।


22. जीवन एक एकल खिलाड़ी का खेल है। आप अकेले पैदा हुए हैं। आप अकेले मरने वाले हैं। आपकी सभी व्याख्याएँ अकेले हैं। आप तीन पीढ़ियों में चले गए हैं और किसी को परवाह नहीं है। आपके आने से पहले, किसी को परवाह नहीं थी। यह सब एकल खिलाड़ी है।


23. आपका जीवन पथ इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि आप हर समय ज़रूरतमंद, उदास और कमज़ोर महसूस करते हैं। और केवल एक ही रास्ता है, जो बाहर निकलने का फैसला करना है। आपके अलावा कोई भी खुद को और अपने प्रियजनों को नहीं बचा सकता।


24. हर किसी का दिल आपके जैसा नहीं होता। हर कोई आपके साथ उतना ईमानदार नहीं होता जितना आप उनके साथ हैं। आप ऐसे लोगों से मिलेंगे जो आपको अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करेंगे और फिर अपने जीवन का वह हिस्सा बीत जाने और संतुष्ट होने के बाद आपको त्याग देंगे। जागते रहें।


 25. 25 वर्ष की आयु तक, आपको इतना समझदार हो जाना चाहिए कि:

→दूसरों की सफलता का जश्न मनाएँ

→ईर्ष्या और जलन से बचें

→खुले दिमाग रखें

→अनुमान लगाने से बचें

→इरादे से काम करें

→कृतज्ञता का अभ्यास करें

→ईमानदारी से बोलें

→रोज़ाना व्यायाम करें

→गपशप से बचें

→स्वच्छ भोजन करें

→माफ़ करें

→सुनें

→सीखें

→प्यार करें

👉कुछ सीखने को मिला हो तो लाइक/Like जरुर करें

और दूसरो को भी बताना चाहते हैं तो #शेयर भी कर सकते हैं

         धन्यवाद❤💐 खुश रहो, मस्त रहो,स्वस्थ रहो 

20 तक की गिनती सुनाएगा, वही राजकुमारी का पति बनेगा

 एक राजा की बेटी की शादी होनी थी। बेटी की यह शर्त थी कि जो भी 20 तक की गिनती सुनाएगा, वही राजकुमारी का पति बनेगा। गिनती ऐसी होनी चाहिए जिसमें सारा संसार समा जाए। जो यह गिनती नहीं सुना सकेगा, उसे 20 कोड़े खाने पड़ेंगे। यह शर्त केवल राजाओं के लिए ही थी।


अब एक तरफ राजकुमारी का वरण और दूसरी तरफ कोड़े! एक-एक करके राजा-महाराजा आए। राजा ने दावत का आयोजन भी किया। मिठाई और विभिन्न पकवान तैयार किए गए। पहले सभी दावत का आनंद लेते हैं, फिर सभा में राजकुमारी का स्वयंवर शुरू होता है।


एक से बढ़कर एक राजा-महाराजा आते हैं। सभी गिनती सुनाते हैं, जो उन्होंने पढ़ी हुई थी, लेकिन कोई भी ऐसी गिनती नहीं सुना पाया जिससे राजकुमारी संतुष्ट हो सके।


अब जो भी आता, कोड़े खाकर चला जाता। कुछ राजा तो आगे ही नहीं आए। उनका कहना था कि गिनती तो गिनती होती है, राजकुमारी पागल हो गई है। यह केवल हम सबको पिटवा कर मज़े लूट रही है।


यह सब नज़ारा देखकर एक हलवाई हंसने लगा। वह कहता है, "डूब मरो राजाओं, आप सबको 20 तक की गिनती नहीं आती!"


यह सुनकर सभी राजा उसे दंड देने के लिए कहने लगे। राजा ने उससे पूछा, "क्या तुम गिनती जानते हो? यदि जानते हो तो सुनाओ।"


हलवाई कहता है, "हे राजन, यदि मैंने गिनती सुनाई तो क्या राजकुमारी मुझसे शादी करेगी? क्योंकि मैं आपके बराबर नहीं हूँ, और यह स्वयंवर भी केवल राजाओं के लिए है। तो गिनती सुनाने से मुझे क्या फायदा?"


पास खड़ी राजकुमारी बोलती है, "ठीक है, यदि तुम गिनती सुना सको तो मैं तुमसे शादी करूँगी। और यदि नहीं सुना सके तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जाएगा।"


सब देख रहे थे कि आज तो हलवाई की मौत तय है। हलवाई को गिनती बोलने के लिए कहा गया।


राजा की आज्ञा लेकर हलवाई ने गिनती शुरू की:


"एक भगवान,  

दो पक्ष,  

तीन लोक,  

चार युग,  

पांच पांडव,  

छह शास्त्र,  

सात वार,  

आठ खंड,  

नौ ग्रह,  

दस दिशा,  

ग्यारह रुद्र,  

बारह महीने,  

तेरह रत्न,  

चौदह विद्या,  

पन्द्रह तिथि,  

सोलह श्राद्ध,  

सत्रह वनस्पति,  

अठारह पुराण,  

उन्नीसवीं तुम और  

बीसवां मैं…"

सब लोग हक्के-बक्के रह गए। राजकुमारी हलवाई से शादी कर लेती है! इस गिनती में संसार की सारी वस्तुएं मौजूद हैं। यहाँ शिक्षा से बड़ा तजुर्बा है। 🙏🏻🙏🏻

Monday, 2 December 2024

आशुतोष की शुरुआती शिक्षा गाडरवारा के ही विद्यालय में हुई थी

 मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर ज़िला के गाडरवारा में जन्मे दिग्गज अभिनेता आशुतोष राणा का पूरा नाम आशुतोष रामनारायण नीखरा है। आशुतोष के माता पिता प्यार से उन्हें राणा कह के बुलाते थे। आशुतोष की शुरुआती शिक्षा गाडरवारा के ही विद्यालय में हुई थी। बाद में उन्होंने डॉ॰ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, मध्यप्रदेश से स्नातक किया। 


आशुतोष की पढ़ाई सेे जुड़ीएक बहुत रोचक घटना है जिस का वर्णन उन्होंने स्वयं कई बार किया है। आशुतोष ने बताया कि उनके पिताजी ने अच्छी शिक्षा के लिए आशुतोष और उनके भाई का प्रवेश गाडरवारा से जबलपुर के क्राइस्ट चर्च स्कूल में करवा दिया जहाँ आशुतोष के ऊपर अंग्रेजी शिक्षा का प्रभाव इतना अधिक पड़ा कि एक दिन जब उनके माता-पिता उनसे मिलने उनके स्कूल पहुंचे तो आशुतोष ने उनको प्रभावित करने के लिये उनके पैर छूने की बजाय गुड ईवनिंग कह कर उनका अभिवादन किया और जिस माँ से वो हर समय लिपटे रहते थे उनके पास भी नहीं गये और माँ कि निश्चल हंसी से उन्हें लगा कि सबलोग उनके इस आत्मविश्वास से बहुत प्रभावित हो गये हैं लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा थोड़ी ही देर बाद उनके पिता ने कहा कि अपना सामान पैक करो तुम लोगों को गाडरवारा वापस चलना है आगे की पढ़ाई अब वहीं होगी। 


बड़े अचरज के साथ जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो उनके पिता ने उत्तर दिया कि "राणाजी मैं तुम्हें मात्र अच्छा विद्यार्थी नहीं एक अच्छा व्यक्ति बनाना चाहता हूँ। तुम लोगों को यहाँ नया सीखने भेजा था पुराना भूलने नहीं। कोई नया यदि पुराने को भुला दे तो उस नए की शुभता संदेह के दायरे में आ जाती है, हमारे घर में हर छोटा अपने से बड़े परिजन, परिचित,अपरिचित जो भी उसके सम्पर्क में आता है उसके चरण स्पर्श कर अपना सम्मान निवेदित करता है लेकिन देखा कि इस नए वातावरण ने मात्र सात दिनों में ही मेरे बच्चों को परिचित छोड़ो अपने माता पिता से ही चरण स्पर्श की जगह गुड ईवनिंग कहना सिखा दिया। मैं नहीं कहता की इस अभिवादन में सम्मान नहीं है, किंतु चरण स्पर्श करने में सम्मान होता है यह मैं विश्वास से कह सकता हूँ। विद्या व्यक्ति को संवेदनशील बनाने के लिए होती है संवेदनहीन बनाने के लिए नहीं होती। मैंने देखा तुम अपनी माँ से लिपटना चाहते थे लेकिन तुम दूर ही खड़े रहे, विद्या दूर खड़े व्यक्ति के पास जाने की समझ देती है ना कि अपने से जुड़े हुए से दूर करने का काम करती है।"


उन्होंने कहा "आज मुझे विद्यालय और स्कूल का अंतर समझ आया, व्यक्ति को जो शिक्षा दे वह विद्यालय जो उसे सिर्फ साक्षर बनाए वह स्कूल, मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे सिर्फ साक्षर हो के डिग्रियोंं के बोझ से दब जाएँ मैं अपने बच्चों को शिक्षित कर दर्द को समझने उसके बोझ को हल्का करने की महारत देना चाहता हूँ। मैंने तुम्हें अंग्रेज़ी भाषा सीखने के लिए भेजा था आत्मीय भाव भूलने के लिए नहीं। संवेदनहीन साक्षर होने से कहीं अच्छा संवेदनशील निरक्षर होना है। इसलिए बिस्तर बाँधो और घर चलो

आशुतोष और उनके भाई तुरंत अपने माता पिता के चरणों में गिर गए उनके पिता ने उन्हें उठा कर गले से लगा लिया और कहा कि किसी और के जैसे नहीं स्वयं के जैसे बनो। पिता की ये बातें आशुतोष ने उनके आशीर्वाद की तरह गाँठ बाँधकर रख ली और उन बातों को यादकर वो आज भी आत्मविश्वास से भर जाते हैं।


#AshutoshRana #actor #actorlife #bollywoodyaatra 

हर चीज़ सही मात्रा में खाइये,

 खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है।

हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये

बाल रंगने हैं तो रंगिये, 

वज़न कम रखना है तो रखिये, 

मनचाहे कपड़े पहनने हैं तो पहनिए,

बच्चों की तरह खिलखिलाइये, 

अच्छा सोचिये, 

अच्छा माहौल रखिये, 

शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये। 


कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती, 

कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता,

कोई तेल बाल नही उगाता, 

कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता। 

चाहे वो PNG हो या पतंजलि.....सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं। 


ये सब कुदरती होता है। 

उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है। 

पुरानी मशीन को Maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे नई नही कर सकते।


ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम। 

किसी क्रीम में केसर नही होती, क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती ! 


कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो,

कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो,

कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं 

या आपके होंठों की shape perfect नही हैं, 


फिर भी हम सुंदर हैं, 

अपनी सुंदरता को पहचानिए।


दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है, अपनी सुंदरता को महसूस करना।


हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते हैं तो वो मासूमियत खो देते हैं 

और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।


मन की खूबसूरती पर ध्यान दो।


पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए शर्माना ज़रूरी नही।

आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये।


सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है,

यह खाओ, वो मत खाओ 

ठंडा खाओ, गर्म पीओ, 

कपाल भाती करो,  

सवेरे नीम्बू पीओ,

रात को दूध पीओ

ज़ोर से सांस लो,लंबी सांस लो 

दाहिने से सोइये ,

बाहिने से उठिए,

हरी सब्जी खाओ, 

दाल में प्रोटीन है,

दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जायेगा।


अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा 

ये ज़िन्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !!

आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे।


ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा, करेला, मेथी, पतंजलि में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है। 

स्वस्थ होना तो दूर स्ट्रेस हो जाता है।


अरे! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं,

कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ।


हर चीज़ सही मात्रा में खाइये, 

हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है। 


भोजन का संबंध मन से होता है

और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है..

मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता।

थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए,

टहलने जाइये, 

लाइट कसरत करिये,

व्यस्त रहिये,  

खुश रहिये,

Tuesday, 26 November 2024

EVM मशीन के बारे में:

 ईवीएम मशीन के बारे में:

वर्तमान देश में ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) को लेकर तरह-तरह के विवाद और भ्रम की स्थिति है। मैं, जो 12 से 15 बार चुनाव (त्रिकोणीय चुनाव, लोकसभा.विधानसभा etc) पार्टी अभिकर्ता के रूप में कार्य कर चुकी है, आपके साथ ईवीएम प्रक्रिया का पूरा विवरण साझा कर रही हूं ताकि आप समझ सकें कि किस प्रकार की हेराफेरी संभव नहीं है.

ईवीएम का कार्य एवं सुरक्षा प्रक्रिया:

1. मोक पोल:

मतदान प्रारंभ होने से पहले, सभी राजनीतिक विचारधारा के आचार्यों की उपस्थिति में मॉक पोल किया जाता है।

50 वोट यह जांच करता है कि हर वोट सही उम्मीदवार को मिल रहा है।

सही तरीके से आने वाली मशीन का डेटा डिलीट कर दिया जाता है और मशीन को सील कर दिया जाता है।

2. मतदान प्रक्रिया:

सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होता है।

इस दौरान सभी सैक्स पार्टी निर्माताओं की उपस्थिति हुई।


जोनल अधिकारी एवं अन्य अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं।

3. मतदान के बाद:

मतदान समाप्त होने पर मशीन में दर्ज वोट और रजिस्टर के आंकड़ों का मिलान किया जाता है।

मशीन को बैटरी फैक्ट्री, सील करके सुरक्षित तहसील या स्टोर रूम में भेज दिया जाता है।

4. भाषाई प्रक्रिया:

गिनती के दिन सभी पार्टी कंपनियों के सामने मशीन की सील हटा दी जाती है।


बैटरी स्थापित कुंजीपटल और नतीजे जारी किए जाते हैं।


ईवीएम में हेराफेरी क्यों असंभावित है?


1. इंटरनेट इंटरनेट नहीं:


मशीन इंटरनेट से जुड़ा नहीं है, इसलिए यह असंभव है।

2. मछुआरों का कोई रास्ता नहीं:


बैटरी निकालने और सीलिंग की प्रक्रिया के कारण बालों का झड़ना संभव नहीं है।

3. वीवीपैट:


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश 2015 में ईवीएम में वीवीपैट जोड़ा गया, जिससे मतदाता को यह सुनिश्चित हो गया कि उसका वोट सही जगह पर है।

ईवीएम का खुलासा:


भारतीय ईवीएम हिंदुस्तान लिवर लिमिटेड (एचएलएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीएचईएल) द्वारा बनाई गई हैं।


14 अन्य देशों में भी शामिल है।


सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में स्पष्ट कर दिया था कि ईवीएम विश्वसनीय हैं और इनमें हेराफेरी की संभावना नहीं है।



बैलेट पेपर बनाम ईवीएम:


बैलट पेपर में गड़बड़ी के कई उदाहरण हैं, जैसे बैलट बॉक्स को बदल देना।


ईवीएम का उपयोग मजबूती, मजबूती और सुरक्षित प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।


निष्कर्ष:


ईवीएम में हेराफेरी असंभावित है। इसे लेकर वह जो फैलाया जा रहा है, वह केवल राजनीतिक षडयंत्र है। हमें विज्ञान के युग में छोड़कर तकनीक का उ

पयोग करना चाहिए, न कि पुराने और महंगे बैलट पेपर पर लौटना चाहिए।


🙏🏻धन्यवाद!


हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...