sunilrathod

Sunday, 10 November 2024

गांठ बांध लीजिए...

 गांठ बांध लीजिए...*🪢 कन्याओं का विवाह 21 से 25 वे वर्ष तक, और लड़कों का विवाह 25 से 29वें वर्ष की आयु तक हर स्थिति में हो जाना चाहिए !*

*🪢 फ्लैट न लेकर जमीन खरीदो, और उस पर अपना घर बनाओ! वरना आपकी संतानों का भविष्य पिंजरे के पंछी की तरह हो जाएगा*

*🪢 गांव से नाता जोड़ कर रखें ! और गांव की पैतृक सम्पत्ति, और वहां के लोगों से नाता, जोड़कर रखें !*

*🪢 अपनी संतानों को अपने धर्म की शिक्षा अवश्य दें, और उनके मानसिक व शारीरिक विकास पर अवश्य ध्यान दें !*

*🪢 किसी भी और आतंकवादी प्रवृत्ति के व्यक्ति से सामान लेने-देने, व्यवहार करने से यथासंभव बचें !*

*🪢 घर में बागवानी करने की आदत डालें,(और यदि पर्याप्त जगह है,तो देशी गाय पालें।* 

*🔖 होली, दीपावली,विजयादशमी, नवरात्रि, मकर संक्रांति, जन्माष्टमी, राम नवमी, आदि जितने भी त्यौहार आयें, उन्हें आफिस/कार्य से छुट्टी लेकर सपरिवार मनाये।* 

*🪢 !(हो सके तो पैदल, व परिवार के साथ )*

🪢 *प्रात: काल 5-5:30 बजे उठ जाएं, और रात्रि को 10 बजे तक सोने का नियम बनाएं ! सोने से पहले आधा गिलास पानी अवश्य पिये (हार्ट अटैक की संभावना घटती है)*

*🪢 यदि आपकी कोई एक संतान पढ़ाई में असक्षम है, तो उसको कोई भी हुनर (Skill) वाला ज्ञान जरूर दें !*

*🪢 आपकी प्रत्येक संतान को कम से कम तीन फोन नंबर स्मरण होने चाहिए, और आपको भी!*

*🪢 जब भी परिवार व समाज के किसी कार्यक्रम में जाएं, तो अपनी संतानों को भी ले जाएं ! इससे उनका मानसिक विकास सशक्त होगा !*

*🪢 परिवार के साथ मिल बैठकर भोजन करने का प्रयास करें, और भोजन करते समय मोबाइल फोन और टीवी बंद कर लें !*

*🪢 अपनी संतानों को बालीवुड की कचरा फिल्मों से बचाएं, और प्रेरणादायक फिल्में दिखाएं !*

*🪢 जंक फूड और फास्ट फूड से बचें !*

*🪢 सांयकाल के समय कम से कम 10 मिनट भक्ति संगीत सुने, बजाएं !*

*🪢 दिखावे के चक्कर में पड़कर, व्यर्थ का खर्चा न करें !*

*🪢 दो किलोमीटर तक जाना हो, तो पैदल जाएं, या साईकिल का प्रयोग करें !*

*🪢 अपनी संतानों के मन में किसी भी प्रकार के नशे (गुटखा, तंबाखू, बीड़ी, सिगरेट, दारू...) के विरुद्ध चेतना उत्पन्न करें,तथा उसे विकसित करें !*

*🪢 सदैव सात्विक भोजन ग्रहण करें, अपने भोजन का ईश्वर को भोग लगा कर प्रसाद ग्रहण करें ! !*

*🪢 अपने आंगन में तुलसी का पौधा अवश्य लगायें, व नित्य प्रति दिन पूजा, दीपदान अवश्य करें !*

*🪢 अपने घर पर एक हथियार अवश्य रखें, ओर उसे चलाने का निरन्तर हवा में अकेले प्रयास करते रहें, ताकि विपत्ति के समय प्रयोग कर सकें ! जैसे-लाठी,हॉकी,गुप्ती, तलवार,भाला,त्रिशूल व बंदूक/पिस्तौल लाइसेंस के साथ !*

*🪢 घर में पुत्र का जन्म हो या कन्या का, खुशी बराबरी से मनाएँ ! दोनों जरूरी है ! अगर बेटियाँ नहीं होगी तो परिवार व समाज को आगे बढाने वाली बहुएँ कहाँ से आएगी और बेटे नहीं होंगे तो परिवार समाज व देश की रक्षा कौन करेगा !*

Saturday, 9 November 2024

पति नहीं चाहिए, दोस्त चाहिए

 पति नहीं चाहिए, दोस्त चाहिए


सुबह जब अलसाई आँखों से उठूँ तो उसके डर से नहीं, बल्कि खुद के लिए उठना चाहती हूँ। कभी-कभी कहना चाहूँ कि, "यार, आज तुम चाय बना दो।" एक ऐसा दोस्त चाहिए, जिससे बेझिझक अपनी बात कह सकूँ।


मुझे वो नहीं चाहिए जो हर बात में मुझसे कहे, "ये मत पहनो, वहाँ मत जाओ, इस से मत मिलो।" बल्कि मुझे चाहिए एक दोस्त, जो कहे, "तुम जैसे हो वैसे ही रहो।"


मुझे वो नहीं चाहिए जो खिड़की से झांकता रहे कि मैं किससे बात कर रही हूँ, और शक की कहानियाँ बुन ले। कोई ऐसा चाहिए जो मुझे समझे और कहे, "यार, तुम्हारी सोशल नेचर अच्छी है।" जो मुझसे कहे, "तुम कितनी जल्दी लोगों से घुल-मिल जाती हो, काश मैं भी कर पाता।"

पति नहीं चाहिए, जो मेरे छोटे-छोटे सपनों पर नाराज़ हो। मुझे ऐसा दोस्त चाहिए, जो कहे, "सपने देखो, और उन्हें पूरा करो।" जो कहे, "कभी अपने दोस्तों के साथ पहाड़ों पर घूम आओ, या बारिश में चाय का मज़ा लो।"

मुझे चाहिए वो, जिससे मैं कह सकूँ, "आज मेरी तारीफ करो।" जो मेरे नखरे उठाए और मुझे स्पेशल फील कराए।

मुझे वो नहीं चाहिए जो हर बात पर टोक दे, बल्कि मुझे वो चाहिए जो बारिश में मेरा हाथ पकड़ कर कहे, "आओ खिड़की खोलते हैं और बारिश में भीगते हैं।"

Sunday, 3 November 2024

KBC जहां रुकना संतोष है

 जहां रुकना संतोष है


केबीसी

हाल ही के एक एपिसोड में, नीरज सक्सेना ने "फास्टेस्ट फिंगर" राउंड में सबसे तेजी से जवाब देकर हॉट सीट पर जगह बनाई।


वह बड़े ही शांत भाव से बैठे, बिना चिल्लाए, नाचे, रोए, हाथ उठाए, या अमिताभ को गले लगाए। नीरज एक वैज्ञानिक, पीएच.डी. और कोलकाता की एक विश्वविद्यालय के कुलपति हैं। उनका स्वभाव सहज और सादा है। उन्होंने खुद को भाग्यशाली माना कि उन्हें डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ काम करने का अवसर मिला, और बताया कि पहले वह केवल अपने बारे में सोचते थे, लेकिन कलाम साहब के प्रभाव से उन्होंने दूसरों और देश के बारे में भी सोचना शुरू कर दिया।


नीरज ने खेलना शुरू किया। उन्होंने एक बार ऑडियंस पोल लाइफलाइन का इस्तेमाल किया, लेकिन चूंकि उनके पास "डबल डिप" लाइफलाइन भी थी, तो उसे भी बाद में इस्तेमाल करने का अवसर मिला। उन्होंने सभी सवालों के जवाब सहजता से दिए, और उनकी बुद्धिमत्ता प्रभावित करने वाली थी। उन्होंने ₹3,20,000 और उसके बराबर बोनस राशि जीत ली, और फिर ब्रेक हुआ।


ब्रेक के बाद, अमिताभ ने घोषणा की, "चलिए, डॉ. साहब, आगे बढ़ते हैं। यहाँ ग्यारहवां सवाल आता है..." तभी, नीरज बोले, "सर, मैं गेम छोड़ना चाहता हूँ।"


अमिताभ को आश्चर्य हुआ। कोई इतना अच्छा खेल रहा है, तीन लाइफलाइन बची हैं, और एक करोड़ (₹1,00,00,000) जीतने का अच्छा मौका है, फिर भी वह छोड़ रहे हैं? उन्होंने पूछा, "ऐसा पहले कभी नहीं हुआ..."


नीरज ने शांतिपूर्वक उत्तर दिया, "अन्य खिलाड़ी इंतजार कर रहे हैं, और वे मुझसे छोटे हैं। उन्हें भी मौका मिलना चाहिए। मैंने पहले ही बहुत पैसे जीत लिए हैं। मुझे लगता है 'जो मेरे पास है, वही काफी है।' मुझे और की इच्छा नहीं है।"


अमिताभ स्तब्ध रह गए और थोड़ी देर के लिए सन्नाटा छा गया। फिर, सभी खड़े हो गए और उन्हें लंबे समय तक तालियों से सम्मानित किया।


अमिताभ ने कहा, "आज हमने बहुत कुछ सीखा है। ऐसा व्यक्ति दुर्लभ है।"


सच कहूं तो यह पहली बार है जब मैंने किसी को अपने सामने इतनी बड़ी संभावना के बावजूद दूसरों को मौका देने और अपने पास जो है उसे पर्याप्त मानने वाला देखा। मैंने मन ही मन उन्हें सलाम किया।


आजकल लोग केवल पैसे के पीछे दौड़ रहे हैं। चाहे जितना भी कमा लें, संतोष नहीं होता, और लालच खत्म नहीं होता। इस दौड़ में वे परिवार, नींद, खुशी, प्रेम, और दोस्ती खो रहे हैं।


ऐसे समय में, डॉ. नीरज सक्सेना जैसे लोग एक अनुस्मारक बनकर आते हैं। आज के समय में संतुष्ट और निःस्वार्थ लोग मिलना मुश्किल है।


उनके खेल छोड़ने के बाद, एक लड़की ने हॉट सीट पर जगह बनाई और अपनी कहानी सुनाई: "मेरे पिता ने हमें, मेरी मां समेत, केवल इसलिए घर से बाहर निकाल दिया क्योंकि हम तीन बेटियां हैं। अब हम एक अनाथालय में रहते हैं..."


मैंने सोचा, अगर नीरज ने छोड़ने का फैसला न किया होता, तो, यह अंतिम दिन होने के कारण, किसी और को मौका नहीं मिलता। उनके इस त्याग के कारण इस गरीब लड़की को कुछ पैसे कमाने का अवसर मिल गया।


आजकल लोग अपनी संपत्ति में से एक पाई भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके लिए हम झगड़े और यहां तक कि हत्याएं होते हुए देखते हैं। स्वार्थ आम हो गया है। लेकिन यह उदाहरण एक अपवाद है।


ईश्वर ऐसे लोगों में बसते हैं जो दूसरों और देश के बारे में सोचते हैं। मैं इस महान व्यक्ति को जीवन भर नहीं भूलूंगा। मुझे खुशी है कि मुझे आज एक अद्वितीय व्यक्ति के बारे में लिखने का मौका मिला।


जब आपकी ज़रूरतें पूरी हो जाएं, तो रुक जाना चाहिए और दूसरों को मौका देना चाहिए। स्वार्थ को छोड़ दें, और सभी खुश रहेंगे। यह सबक मैंने सीखा। मैंने हमेशा ऐसे लोगों की प्रशंसा की है और मानता हूँ कि उनके बारे में ईमानदारी से लिखना समाज के उत्थान के लिए आवश्यक है। 🌹🌹

पिता के बाद पति ही होते हैं जो पत्नियों के लिए हमेशा अमीर होते है ❤️

 एक विवाहित स्त्री जो आपको आकर्षक और सुंदर लगती हैं 😊


याद रखिए कि उसकी सुंदरता भले ही जन्मजात हो लेकिन उस सौंदर्य को बरकरार रखने में एक पुरूष का प्रेम और समर्पण होता है...


 पुरूष जो खुद भूल जाते है कई बार शेव करवाना हेयर कट...


याद रखते हैं त्यौहारों पर स्त्री के लिए की उसे कुछ चाहिए तो नहीं नई साड़ी, चूड़ियां, श्रृंगार...


 वो एडजस्ट कर लेते हैं अपने लिए पर सदैव ये चाहते हैं कि उनकी पत्नी जब घर परिवार के साथ खड़ी हो तो लोगों को उनकी किस्मत पर रश्क हो...


 गौर से देखिएगा कभी उन स्त्रियों का चेहरा जिनके विवाह सफल नहीं हुए या पति जल्दी चले गए ..


आपको एहमियत समझ में आ जाएगी एक स्त्री के जीवन में पुरूष के क्या मायने हैं 😊


शारीरिक रूप से स्त्री एक नहीं हजारों पुरुषों की प्रेमिका हो सकती हैं लेकिन..


 उसे सर का ताज गृह लक्ष्मी अपना मान ये हर कोई नहीं बना सकता है उसे मानसिक रूप से हर पुरूष नही संभाल सकता है...


 भले वो परिवार की धुरी है पर उसे भी एक समतल स्थान चाहिए स्वछंद होकर घूमने के लिए 😊


याद रखिए जब आप कहते है कि एक विवाहिता की उम्र देख कर नहीं लगता कि वो शादीशुदा है या बच्चों की मां है तो उसमें सबसे बड़ा योगदान उस पुरूष का होता है जो किसी की घर की राजकुमारी को अपने घर की रानी बनाकर रखता है...


 पिता के बाद पति ही होते हैं जो पत्नियों के लिए हमेशा अमीर होते है ❤️ 🧿🧿🧿

Wednesday, 30 October 2024

जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।

 एक दिन, एक कंपनी में साक्षात्कार के दौरान, बॉस, जिसका नाम अनिल था, ने सामने बैठी महिला, सीमा से पूछा, "आप इस नौकरी के लिए कितनी तनख्वाह की उम्मीद करती हैं?"


सीमा ने बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास से कहा, "कम से कम 90,000 रुपये।"


अनिल ने उसकी ओर देखा और आगे पूछा, "आपको किसी खेल में दिलचस्पी है?"


सीमा ने जवाब दिया, "जी, मुझे शतरंज खेलना पसंद है।"


अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा, "शतरंज बहुत ही दिलचस्प खेल है। चलिए, इस बारे में बात करते हैं। आपको शतरंज का कौन सा मोहरा सबसे ज्यादा पसंद है? या आप किस मोहरे से सबसे अधिक प्रभावित हैं?"


सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, "वज़ीर।"


अनिल ने उत्सुकता से पूछा, "क्यों? जबकि मुझे लगता है कि घोड़े की चाल सबसे अनोखी होती है।"


सीमा ने गंभीरता से जवाब दिया, "वास्तव में घोड़े की चाल दिलचस्प होती है, लेकिन वज़ीर में वो सभी गुण होते हैं जो बाकी मोहरों में अलग-अलग रूप से पाए जाते हैं। वह कभी मोहरे की तरह एक कदम बढ़ाकर राजा को बचाता है, तो कभी तिरछा चलकर हैरान करता है, और कभी ढाल बनकर राजा की रक्षा करता है।"


अनिल ने उसकी समझ से प्रभावित होते हुए पूछा, "बहुत दिलचस्प! लेकिन राजा के बारे में आपकी क्या राय है?"


सीमा ने तुरंत जवाब दिया, "सर, मैं राजा को शतरंज के खेल में सबसे कमजोर मानती हूँ। वह खुद को बचाने के लिए केवल एक ही कदम उठा सकता है, जबकि वज़ीर उसकी हर दिशा से रक्षा कर सकता है।"


अनिल सीमा के जवाब से प्रभावित हुआ और बोला, "बहुत शानदार! बेहतरीन जवाब। अब ये बताइए कि आप खुद को इनमें से किस मोहरे की तरह मानती हैं?"


सीमा ने बिना किसी देर के जवाब दिया, "राजा।"


अनिल थोड़ी हैरानी में पड़ गया और बोला, "लेकिन आपने तो राजा को कमजोर और सीमित बताया है, जो हमेशा वज़ीर की मदद का इंतजार करता है। फिर आप क्यों खुद को राजा मानती हैं?"


सीमा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "जी हाँ, मैं राजा हूँ और मेरा वज़ीर मेरा पति था। वह हमेशा मेरी रक्षा मुझसे बढ़कर करता था, हर मुश्किल में मेरा साथ देता था, लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है।"


अनिल को यह सुनकर थोड़ा धक्का लगा, और उसने गंभीरता से पूछा, "तो आप यह नौकरी क्यों करना चाहती हैं?"


सीमा की आवाज भर्राई, उसकी आँखें नम हो गईं। उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, "क्योंकि मेरा वज़ीर अब इस दुनिया में नहीं रहा। अब मुझे खुद वज़ीर बनकर अपने बच्चों और अपने जीवन की जिम्मेदारी उठानी है।"


यह सुनकर कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई। अनिल ने तालियाँ बजाते हुए कहा, "बहुत बढ़िया, सीमा। आप एक सशक्त महिला हैं।"


शिक्षा और सशक्तिकरण का महत्व:


यह कहानी उन सभी बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो जिंदगी में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर सकती हैं। बेटियों को अच्छी शिक्षा और परवरिश देना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कभी उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो वे खुद वज़ीर बनकर अपने और अपने परिवार के लिए एक मजबूत ढाल बन सकें।

किसी विद्वान ने कहा है, "एक बेहतरीन पत्नी वह होती है जो अपने पति की मौजूदगी में एक आदर्श औरत हो, और पति की गैरमौजूदगी में वह मर्द की तरह परिवार का बोझ उठा सके।"

यह कहानी अरविन्द वर्मा हमें सिखाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।

Monday, 28 October 2024

रिश्ते में सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उन्हें पूरा करना भी जरूरी होता है।

 जब एक औरत की शारीरिक जरूरत उसका पति पूरा नहीं कर पाता तो अक्सर औरत ऐसा ही करती है 

रीमा ने एक दिन अपने पति अशोक से सीधे शब्दों में सवाल किया, "क्या तुम्हें लगता है कि हमारी शादी में वो जुनून अब भी है?" अशोक कुछ देर चुप रहा, जैसे उसे समझ ही नहीं आया कि आखिर रीमा ऐसा सवाल क्यों पूछ रही है। उसने हल्की हंसी के साथ जवाब दिया, "हम तो एक खुशहाल दंपती हैं, ऐसा क्या कमी महसूस होती है तुम्हें?" लेकिन रीमा की आँखों में जो खलिश थी, वो शायद अशोक समझ नहीं पा रहा था।


💔 रीमा की उलझन: शादी के आठ साल बाद भी रीमा को अपने रिश्ते में वो अपनापन और उत्साह महसूस नहीं हो रहा था। अशोक एक अच्छा इंसान था, लेकिन उसने कभी रीमा की भावनाओं और उसकी गहरी इच्छाओं को समझने की कोशिश नहीं की थी। उसकी सारी प्राथमिकताएं काम और परिवार की जिम्मेदारियों में समाई हुई थीं। रीमा अक्सर महसूस करती कि उनका रिश्ता एक रूटीन बनकर रह गया है, जिसमें रोमांच और वो खास जुड़ाव कहीं खो गए हैं।


🌹 अपनी सहेली से सलाह: अपनी उलझन को दूर करने के लिए रीमा ने अपनी करीबी सहेली सोनल से बात की। सोनल ने उसे एक महत्वपूर्ण सलाह दी, "तुम्हें अशोक से इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। बहुत बार मर्द अपनी पत्नी की ख्वाहिशों को तभी समझ पाते हैं जब वो सीधा बताती हैं।" सोनल ने रीमा को समझाया कि उसे अपनी भावनाएं स्पष्ट शब्दों में अशोक के सामने रखनी चाहिए।


🌌 अशोक के साथ संवाद: रीमा ने एक शांत शाम को अशोक के साथ बैठकर अपनी भावनाओं के बारे में बात की। उसने बताया कि वो सिर्फ एक जीवन साथी नहीं, बल्कि एक ऐसा साथी भी चाहती है जो उसकी भावनाओं, इच्छाओं और ख्वाहिशों को समझ सके। उसने अशोक से कहा कि उसे सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि ऐसा जुड़ाव चाहिए जो उनकी शादीशुदा जिंदगी को और मजबूत बना सके।


💫 अशोक की जागरूकता: रीमा की बातों ने अशोक को सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने महसूस किया कि उसने कभी अपने रिश्ते में उस गहराई को नहीं देखा, जिसकी रीमा को जरूरत थी। उसने अपने रिश्ते को एक नई ऊर्जा देने का वादा किया। उसने तय किया कि वो सिर्फ एक पति नहीं, बल्कि रीमा का ऐसा साथी बनेगा जो उसकी भावनाओं को भी समझे।


💖 नई शुरुआत: धीरे-धीरे अशोक और रीमा के बीच की दूरियां मिटने लगीं, और उनका रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया। अशोक ने महसूस किया कि रीमा की इच्छाओं को समझने और उसे संतुष्ट करने से उनकी शादी में वो पुरानी गर्मजोशी लौट आई है। अब रीमा भी पहले से ज्यादा खुश और संतुष्ट महसूस करने लगी थी।


सीख: रिश्ते में सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उन्हें पूरा करना भी जरूरी होता है। सच्चा प्यार और संतोष तभी संभव है जब दोनों अपने दिल की बातें खुलकर साझा करें और अपने रिश्ते को संजीवनी देने की कोशिश करें।

Sunday, 20 October 2024

आपकी एक छोटी सी पहल समाज को एक कुरीति से बचाएगी…

 विवाह भोज या निकाह की पार्टी : विचार करना 

कल एक जैन परिवार की शादी में ,प्रीतिभोज में जाना हुआ , स्वागत गेट में गुलाब के फूल ,मैंगो शेक,ड्राइफूट के साथ स्वागत हुआ अंदर मैदान में अद्भुत नजारा था। आर्केस्ट्रा की स्वर लहरी चारो तरफ गुंजायमान थी ।

इवेंट मैनेजमेंट का फंडा चारो तरफ बिखरा हुआ दिख रहा है। दूल्हा और दुल्हन को गेट से ही मंच तक लेकर जाने की अदभुत तैय्यारी भी रथ व नाचने गाने वालो को पूरी टीम तैयार थी जो वर वधु को लेकर बीच मैदान में ले जाकर वरमाला करवाकर स्टेज में ले गया ।


हम सब तो थके मांदे भूख से व्याकुल लोग थे जो पहुंच गए स्टार्टर की ओर पर उसी बीच एक दूसरे और तेज हो हल्ला सुनाई देने लगी, मैं भी गुपचुप का दोना रख उस और हो लिया।


वहा तो अलग ही नजारा था। चक सफेद धोती कुर्ता और कंधे में क्रीम कलर का साफी डाले लगभग 65 साल का बुजुर्ग पर उनका आवाज युवाओं से भी तेज ,लड़की वाले व केट्ररर्स को चमका रहा था और बार बार कह रहा था हम सब खाना नही खायेगे,या तो आप ये मेनू की जो सूची लिखे बोर्ड है उसे फेके या फिर भोजन को फेके ? हम सब ये खाना नही खायेगे ।

हम शादी में आए है निकाह में नहीं।


मेरी भी नजर अचानक खाने के स्टाल पर पड़ी ,जहा लिखा था #वेज_बिरयानी_हरा_भरा_कबाब_वेज_कोरमा_कबाब_वेज_हांडी_बिरयानी,।


बुजुर्ग तमतमाया हुआ था, बात बात में कहता था बिरयानी व कबाब किसे कहते है, मुझे समझाओ फिर ही हम सब भोजन करेगे और अपने इस बहस में मुझे भी शामिल कर लिया की बताइए भाईजी क्या ऐसा लिखना उचित है।

मांस के उपयोग से बने भोजन को ही बिरयानी व कबाब कहते है ,क्या हमे इस जगह पर ऐसे हालात में भोजन करना चाहिए ।मेरे और अनायास दादा के प्रश्न पर मैं भी कुछ बोल नहीं पा रहा था।


एक तरफ केट्ररर्स की गलती ,समाज में चल रहे अंधाधुन पश्चात्य संस्कृति के ढल रहे लोग,और दूसरी ओर हाथ जोड़े अनुनय करते खड़े लड़की के परिवार वाले? और सबके बीच धर्म, संस्कृति व भोजन के तरीके पर अड़े दादाजी,जो अपनी जगह बिल्कुल सही थे अब उनके स्वर और तीखे हो गए कहने लगे बताओ मैं विवाह में आया हूं की निकाह में ?


बाते बढ़ते देख मैंने व वहाँ पर खड़े दो तीन मित्रो ने मिलकर केटरर्स को चिल्लाकर स्टाल से सारे स्टीगर निकाल फेके जिसमे बिरयानी व कबाब जैसे शब्द लिखे थे, तब दादाजी का गुस्सा शांत हुआ और फिर उन्होंने भोजन ग्रहण करने की हामी भरी वो भी बैठकर, ।


दादा जी की बाते वहा पर उपस्थित सभी लोगो को एक सीख दे गई की मांसाहारी भोजन के लिए ही कबाब व बिरयानी जैसे शब्द प्रयोग किया जाता है ।और खाना नही हमे भोजन करना चाहिए । केटरर्स जो भी लिखे उसे हमे भी एक बार मेन्यू तय करते समय अपनी समाज एवम संस्कृति के हिसाब से देख भी लेना चाहिए।ज़्यादातर लोग बिना जानकारी के ही कर लेते हैं हम सब यदि सोच समझकर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे तो बदलाव लाया जा सकता है…

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*बिरयानी का मतलब होता है सब्ज़ियों एंव मांस का मिश्रण 

*कवाब एक फ़ारसी शब्द है जिसका मतलब होता है पका हुआ मांस 

*कोरमा मतलब भुना हुआ मांस

अब आप खुद सोचें भारतीय व्यंजन के नाम के साथ इनको जोड़ना ठीक है…?जब नाम ये होगा तो हम किस मानसिकता का खाना खाते हैं…

विरोध करिये अभी तो हमारी पकड़ में है नहीं तो वास्तव में निकाह में ही जाओगे और मांसाहारी खाना खाओगे…नई पीढ़ी वेज भूल जाएगी और मांसाहारी बन जाएगी क्यूँकि हम यही तो दे रहे हैं…?

कैटर्स को रोकिये ये नाम देने के लिये…होटल व रेस्टोरेंट में विरोध प्रकट कीजिए…

आपकी एक छोटी सी पहल समाज को एक कुरीति से बचाएगी…

आप भी करिये, मैं भी करता हूँ।

साभार

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...