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Thursday, 5 September 2024

लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश करते समय सतर्क रहना

 बिना विवाह के शारीरिक सम्बन्ध के सुख को भोगने का आसान उपाय ,लिव-इन रिलेशनशिप , आजकल कई लोगों के लिए एक आम विकल्प बन गया है। यह मुख्यतः उन लोगों के लिए होता है जो एक दूसरे के साथ समय बिताना चाहते हैं और शारीरिक संतुष्टि की आवश्यकता को पूरा करना चाहते हैं। लेकिन इसे सही रूप में समझना और अपनाना महत्वपूर्ण है, अन्यथा यह कई समस्याओं का कारण बन सकता है।


लिव-इन रिलेशनशिप में शामिल लोग एक दूसरे की शारीरिक और आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, यदि इस संबंध को सिर्फ शारीरिक भूख और आर्थिक फायदे के लिए अपनाया जाता है, तो यह असफलता की ओर बढ़ सकता है।


यदि कोई महिला 40 वर्ष के बाद इस प्रकार के संबंध में प्रवेश करती है, तो उसे विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। इस उम्र में स्थायित्व और सुरक्षा की आवश्यकता अधिक होती है, और किसी अस्थाई संबंध में प्रवेश करना कठिनाई पैदा कर सकता है।


हमारे समाज में पारंपरिक विवाह संबंधों में भी कई चुनौतियाँ होती हैं। माता-पिता, रिश्तेदार और समाज का दबाव होता है, जिससे पति-पत्नी का साथ बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। लिव-इन रिलेशनशिप में इस प्रकार का कोई सामाजिक समर्थन नहीं होता, जिससे यह और भी अधिक जोखिम भरा हो सकता है।


बड़े शहरों में लिव-इन रिलेशनशिप का चलन बढ़ रहा है। अमीर महिलाएँ इसे अपने शौक के लिए अपनाती हैं, और कुछ मामलों में यह एक फैशन बन गया है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह संबंध कितने टिकाऊ और सुरक्षित हैं।


यदि कोई वृद्ध व्यक्ति किसी युवा के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि यह संबंध वास्तविकता में प्रेम और सहारा पर आधारित हो, न कि आर्थिक लाभ पर।


लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश करने से पहले दोनों पक्षों को अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। यदि आप इस प्रकार के संबंध में प्रवेश करने की सोच रहे हैं, तो इन बिंदुओं को ध्यान में रखें:


भरोसा और पारदर्शिता: दोनों पक्षों के बीच विश्वास और पारदर्शिता होनी चाहिए।

आर्थिक समझौते: आर्थिक मामलों में स्पष्टता होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

कानूनी सुरक्षा: कानूनी दस्तावेजों और समझौतों की जांच करवा लें, ताकि किसी प्रकार के विवाद से बचा जा सके।

इस प्रकार, लिव-इन रिलेशनशिप में प्रवेश करते समय सतर्क रहना और सभी संभावित खतरों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

_अच्छे ने अच्छा और_ _बुरे ने बुरा "जाना" मुझे,_

 *मुंशी प्रेमचंद जी की एक "सुंदर कविता", जिसके एक-एक शब्द को, बार-बार "पढ़ने" को "मन करता" है-_*


ख्वाहिश नहीं, मुझे

मशहूर होने की,"


        _आप मुझे "पहचानते" हो,_

        _बस इतना ही "काफी" है।_😇


_अच्छे ने अच्छा और_

_बुरे ने बुरा "जाना" मुझे,_


        _जिसकी जितनी "जरूरत" थी_

        _उसने उतना ही "पहचाना "मुझे!_


_जिन्दगी का "फलसफा" भी_

_कितना अजीब है,_


        _"शामें "कटती नहीं और_

  -"साल" गुजरते चले जा रहे हैं!_


_एक अजीब सी_

_'दौड़' है ये जिन्दगी,_


   -"जीत" जाओ तो कई_

 -अपने "पीछे छूट" जाते हैं और_


_हार जाओ तो,_

_अपने ही "पीछे छोड़ "जाते हैं!_😥


_बैठ जाता हूँ_

_मिट्टी पे अक्सर,_


        _मुझे अपनी_

        _"औकात" अच्छी लगती है।_


_मैंने समंदर से_

_"सीखा "है जीने का तरीका,_


        _चुपचाप से "बहना "और_

        _अपनी "मौज" में रहना।_


_ऐसा नहीं कि मुझमें_

_कोई "ऐब "नहीं है,_


        _पर सच कहता हूँ_

        _मुझमें कोई "फरेब" नहीं है।_


_जल जाते हैं मेरे "अंदाज" से_,

_मेरे "दुश्मन",_


   -एक मुद्दत से मैंने_

       _न तो "मोहब्बत बदली"_ 

      _और न ही "दोस्त बदले "हैं।_


_एक "घड़ी" खरीदकर_,

_हाथ में क्या बाँध ली,_


        _"वक्त" पीछे ही_

        _पड़ गया मेरे!_😓


_सोचा था घर बनाकर_

_बैठूँगा "सुकून" से,_


  -पर घर की जरूरतों ने_

        _"मुसाफिर" बना डाला मुझे!_


_"सुकून" की बात मत कर-

-बचपन वाला, "इतवार" अब नहीं आता!_😓😥


_जीवन की "भागदौड़" में_

_क्यूँ वक्त के साथ, "रंगत "खो जाती है ?_


  -हँसती-खेलती जिन्दगी भी_

        _आम हो जाती है!_😢


_एक सबेरा था_

_जब "हँसकर "उठते थे हम,_😊


  -और आज कई बार, बिना मुस्कुराए_

        _ही "शाम" हो जाती है!_😓


_कितने "दूर" निकल गए_

_रिश्तों को निभाते-निभाते,_😘


        _खुद को "खो" दिया हमने_

        _अपनों को "पाते-पाते"।_😥


_लोग कहते हैं_

_हम "मुस्कुराते "बहुत हैं,_😊


        _और हम थक गए_,

        _"दर्द छुपाते-छुपाते"!😥😥


_खुश हूँ और सबको_

_"खुश "रखता हूँ,_


        _ *"लापरवाह" हूँ ख़ुद के लिए_*

 *-मगर सबकी "परवाह" करता हूँ।_😇🙏*


*_मालूम है_*

*कोई मोल नहीं है "मेरा" फिर भी_*


   *कुछ "अनमोल" लोगों से_*

   *-"रिश्ते" रखता हूँ।*

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भगवान पर विश्वास और भी पक्का हो गया

 संजय शाम को थका हुआ घर पहुंचा तो उसकी पत्नि सुजाता ने पूछा … क्या बात है आप इतने परेशान क्यों हैं? … नहीं कुछ नहीं बस ऐसे ही संजय ने टालते हुए कहा … तभी सुजाता बोली … आप मुझसे कुछ छिपा रहे हैं अगर पैसों की बात है तो आप चिन्ता न करें मैं घरों में काम कर तो रही हूॅं आज नहीं तो कल तनख्वाह मिल जायेगी। … संजय ने नम आंखों से जबाब दिया … अब क्या तन्ख्वाह मिलेगी नौकरी ही चली गई … क्या ये क्या कह रहे हो तुम्हारा सेठ तो बहुत मक्कार निकला … सुजाता गुस्से में बोली।


संजय ने उदास मन से उसे जबाब दिया … नहीं ऐसा नहीं है। दुकान पर बहुत घाटा चल रहा है … पुराने बंधे हुए सारे ग्राहक दूसरी दुकान पर चले गये … पास ही एक बहुत बड़ी नई दुकान खुल गई है … मालिक को अब न पीछे से माल उधार मिलता है न कोई ग्राहक उधार का पैसा वापस कर रहा है … मालिक दुकान बंद करने को बोल रहे हैं।


इधर श्याम जी आज घर पहुंचे तो बहुत उदास थे … सांची ने पापा को देखा तो वह दौड़ कर पानी ले आई … तभी उनकी पत्नी कविता ने उन्हें परेशान देखा तो पूछा … क्या बात है तुम इतने परेशान क्यों हो … श्याम जी ने उन्हें दुकान की चाभी देते हुए कहा … आज मैं दुकान बंद कर आया हूॅं … अब उस दुकान में कुछ नहीं बचा … यह सुनकर कविता की आंखें नम हो गईं।


वह पहले से जानती थी कि दुकान घाटे में चल रही है … लेकिन इतनी जल्दी सब खत्म हो जायेगा उसे उम्मीद नहीं थी … फिर भी उसने अपने आपको संभालते हुए श्याम जी से चाभी ली और कहा … आप चिंता न करें ये चाभी में मन्दिर में रख रही हूॅं … हमारी दुकान को वे ही शुरू करवायेंगे … यह सुनकर श्याम जी के चहरे पर फीकी सी हंसी आई और कुछ देर में वह गायब हो गई।


अगले दिन श्याम जी घर के आंगन में बैठ कर सुबह का अखबार पढ़ रहे थे … आज न तो दुकान जाने की जल्दी थी … न अपने नौकर संजय को फोन करने की … इधर संजय भी आज सुबह उठ कर बहुत परेशान था … उसे लग रहा था अभी मालिक का फोन आ जायेगा और वे उसे डाटते हुए कहेंगे … अभी घर में ही बैठा है दुकान कब खोलेगा।


इसी सबके बीच बैठे बैठे श्याम जी को ध्यान आया कि उन्होंने अभी पिछले महीने ही बिट्यिा का ब्याह पक्का किया है … अगर उनके समधियों को यह पता लगा तो वे न जाने क्या सोचेंगे … बाजार में यह खबर तो आग की तरह फैल जायेगी … तभी कविता चाय बना कर ले आई … श्याम जी ने चाय का घूंट लेते हुए कहा … कविता किसी को ये बात मत बताना कि हमारी दुकान बंद हो गई है … कहीं लड़के वालों को पता लग गया तो वे न जाने क्या सोचेंगे … और कहीं रिश्ता न तोड़ दें।


सांची पीछे खड़ी पापा मम्मी की बातें सुन रही थी … वह गहरी सोच में पड़ गई … पापा की दुकान बंद हो गई … अब कैसे शादी का इंतजाम करेंगे … इसी दुकान के भरोसे तो वो कर्ज लेना चाह रहे थे … अब कौन उन्हें कर्ज देगा … यही सब सोच कर उसकी आंखों से आंसू बहने लगे … वह दौड़ कर घर के मन्दिर के सामने पहुंच गई … भगवान मुझे लड़की क्यों बनाया … मैं केवल अपने पिता पर बोझ बन गई हूॅं … आज अपने व्यापार की चिंता करने की बजाय उन्हें मेरी चिंता हो रही है।


कुछ देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई … कविता ने दरवाजा खोला तो देखा सामने संजय खड़ा था … आओ संजय अंदर आओ … उसे देख कर श्याम जी चौक गये … संजय मैंने तुमसे कहा था मैं तुम्हारी बकाया तनख्वाह धीरे धीरे चुका दूंगा फिर तुम सुबह सुबह यहां आ गये … मुझ पर अब इतना भी भरोसा नहीं रहा … संजय उन्हें देख कर रोने लगा … नहीं सेठ जी ऐसी बात नहीं है … बीस साल से आपकी दुकान पर नौकरी कर रहा हूं अब घर पर बैठ कर क्या करूं कुछ समझ नहीं आ रहा … सुबह आपके घर चाभी लेने आता था इसीलिये आ गया।


यह सुनकर श्याम जी की आंखे भी नम हो गई … क्या करें संजय अब तो तू कहीं और काम ढूंढ ले … हट्टा कट्टा है तुझे कहीं भी काम मिल जायेगा।


सेठ जी मुझे घर पर ही रख लीजिये घर का छोटा मोटा काम कर दिया करूंगा … नहीं नहीं ऐसा कैसे हम तनख्वाह कहां से देंगे … वैसे भी यहां काम ही कितना है।


श्याम जी ने उसे समझा कर वापस भेज दिया … उसे भेजने के बाद वे भी फूट फूट कर रो पड़े … तभी सांची उनके पास आई बोली … पापा आप हिम्मत हार जाओगे तो हमारा क्या होगा … आप एक काम कीजिये लड़के वालों से बात कीजिये कि अभी हम शादी नहीं कर सकते … हमें कुछ समय चाहिये … जब सब कुछ ठीक हो जायेगा तो शादी भी हो जायेगी।


श्याम जी ने अपने आंसू पौंछते हुए कहा … नहीं बेटी बड़ी मुश्किल से रिश्ता मिला है … मैं किसी तरह सब इंतजाम कर लूंगा … जरूरत पड़ी तो यह घर कुछ दिन के लिये गिरवीं रख दूंगा।


नहीं पापा आप ऐसा कुछ नहीं करेंगे … अगर आपने ऐसा कुछ किया तो मैं यह घर छोड़ कर चली जाउंगी … आप चिन्ता मत कीजिये मैं अपने आप सब ठीक कर लूंगी।


कुछ देर बाद सांची ने अपने होने वाले पति साहिल से फोन पर बात की और उसे एक बाहर मिलने के लिये बुलाया … दोंनो एक रेस्तरा में मिले … सांची ने सारी बात बता दी … यह सब सुनकर साहिल ने कहा … सांची तुम चिन्ता मत करो तुम्हारे पापा मेरे पापा की तरह हैं … मुझे एक दिन का समय दो मैं अपने परिवार से बात करके कल बताता हूॅं … सब ठीक हो जायेगा।


सांची को साहिल की बातों पर विश्वास हो गया और वह घर आ गई … अगले दिन सांची इंतजार करती रही लेकिन साहिल का फोन नहीं आया … दोपहर के बाद सांची ने उसे फोन किया तो उसने कहा … देखो सांची मेने पापा ने मेरी पढ़ाई पर बहुत पैसे खर्च किया हैं … हमने ये सोच कर रिश्ता किया था कि तुम्हारे पापा की मार्किट में अच्छी खासी दुकान है तो वे अच्छी शादी करेंगे …


लेकिन अब जब तुम्हारे पापा की दुकान ही नहीं रही तो … यह कहते हुए साहिल थोड़ा रुक गया फिर बोला … वो मेरे पिता रिश्ते के लिये इंकार कर रहे हैं … लेकिन साहिल क्या तुम पैसों के लिए मुझसे शादी कर रहे थे … सांची ने गुस्से में कहा यह सुनकर साहिल ने बहुत बेशर्मी से जबाब दिया … आजकल पैसा तो सबको चाहिये अच्छा लड़का चाहिये तो पैसा तो खर्च करना ही पड़ता है इसमें गलत क्या है … सांची ने गुस्से में कहा … मैं अब तुम जैसे लालची से शादी भी नहीं करना चाहती … वो तो अच्छा हुआ तुम लोगों का असली रूप सामने आ गया।


सांची ने फोन काट दिया और राते हुए मम्मी के पास पहुंची … उसने मम्मी को सारी बात बता दी … कविता ने कहा … बेटी अपने पापा को ये सब मत बताना … मैं बाद में बता दूंगी।


इसी तरह कुछ दिन बीत गये। श्याम जी अभी शादी की चिंता में डूबे थे … कि इतने कम समय में सारी तैयारियां कैसे होंगी … एक दिन कविता ने उनसे कहा … आपको एक बात बतानी थी … हमें सांची का रिश्ता कहीं ओर करना पड़ेगा … वे लोग अब हमारे घर से रिश्ता नहीं जोड़ना चाहते हैं … साहिल ने सांची को बता दिया है। यह सुनकर श्याम जी को गहरा धक्का लगा … हे भगवान अब क्या होगा मेरी बच्ची का … पापा आप चिंता न करें वे पैसे के लालची थे … शादी के बाद भी परेशान करते रहते।


श्याम जी चुप हो गये … जैसे मन के एक कोन में कुछ टूट गया … सारे बने हुए काम बिगड़ते चले जा रहे थे … पूरे जीवन की प्रतिष्ठा भी धूल में मिल गई … सबको इस रिश्ते के बारे में पता है .. अब क्या होगा यही सोच कर उनकी आंखें नम थीं … वे बिना कुछ बोले शांत हो गये।


दो दिन बाद कविता ने कहा … चलिये आप मेरे साथ बाजार चालिये कब से घर में बैठे हैं … मुझे कुछ सामान लाना है … श्याम जी बिना कुछ कहे चलने को तैयार हो गये … कविता जानती थी कि उन्हें बहुत गहरा सदमा लगा है … जिससे उन्हें बाहर निकालना है … वह श्याम जी के साथ बाजार पहुंच गई … श्याम जी चुपचाप उसे खरीदारी करते देखते रहे … जैसे उन्हें कोई मतलब न हो … तभी कविता ने कहा … आप यहां बेंच पर बैठ जाईये मैं अभी अंदर स्टोर से सामान लेकर आती हूॅं … भीड़ में आप परेशान हो जायेंगे।


श्याम जी वहीं बैंच पर बैठ गये … कुछ देर बाद किसी ने पीछे से कंधे पर हाथ रखा … श्याम जी ने मुड़ कर देखा तो उनके बचपन का दोस्त मनोहर खड़ा था … अबे तू यहां क्या कर रहा है … मनोहर ने पूछा … श्याम जी ने फीकी हंसी के साथ जबाब दिया … कुछ नहीं पत्नी को कुछ सामान लेना था उसी के साथ आया हूॅं।


मनोहर ने पूछा … दुकान कैसी चल रही है … दुःखती रग पर हाथ रखते ही श्याम ही उदास हो गये … अब तुझसे क्या छिपा है … दुकान में घाटा हो गया … इसी वजह से बेटी का रिश्ता भी हाथ से चला गया।


मनोहन ने डॉंटते हुए कहा … इतना सब हो गया मुझे एक फोन नहीं कर सकता था … भाई दिमाग ही कहां चल रहा है … तू बता क्या हाल है श्याम जी ने बात बदलते हुए कहा … वो सब छोड़ मेरे साथ चल … मनोहर बोला … श्याम जी ने पूछा … कहां … मनोहर … चल बस भाभी से मैं बात कर लेता हूं। वह स्टोर के अंदर गया और कुछ देर में बाहर आ गया … चल मैंने भाभी से बोल दिया है … खड़ा हो।


श्याम जी उसके साथ चल दिये … अब जैसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था। मनोहर उन्हें लेकर उसी बड़े स्टोर पर पहुंच गया … श्याम जी बाहर ही खड़े हो गये … अरे तू मुझे यहां क्या लाया है … इसी की वजह से मेरी दुकान बंद हो गई … अगर इसका मालिक मिल जाये तो उसका मुंह तोड़ दूं।


मनोहर बोला … चल दोंनो मिल कर उसका मुंह तोड़ते हैं … वह उन्हें अंदर ले गया और अंदर एक केबिन में ले गया जो कि मैंनेजर का केबिन था।


इससे पहले कि श्याम जी कुछ समझ पाते … मनोहर ने मैंनेजर से कहा … देखो ये मेरे खास दोस्त हैं और आज से इस स्टोर के मालिक … तुम हमारे दूसरे स्टोर का काम देखोगे … ले भाई श्याम संभाल अपना स्टोर।


श्याम जी को कुछ समझ नहीं आ रहा था … मनोहर बोला … परेशान मत हो मैं सब बता देता हूॅं … मैंने तुझसे कई बार कहा तरक्की कर लेकिन तू अपनी छोटी सी दुकान से खुश था … इसीलिये मैंने तेरे पास ही यह स्टोर खोला … आज से यह तेरा स्टोर है … मेरे ऐसे बारह स्टोर अलग अलग शहरों में हैं … हमारी एक कंपनी है जो इन स्टोर की फ्रंचाइजी देती है।


श्याम जी बोले … लेकिन मेरे पास तो एक भी पैसा नही है … मनोहर बोला … मुझे पता है तू चिन्ता मत कर इसीलिये मैंने तुझे बिना बताये ये स्टोर तेरे नाम पर रजिर्स्टड कर दिया है … पिछले छः महीने से इसे चला भी रहे हैं … वो भी प्राफिट में … बस तू यहां बैठ यह सब तेरा ही है। धीरे धीरे कंपनी का लोन चुका देना यह स्टोर तेरा हो जायेगा।


श्याम जी की आंखों से आंसू बह रहे थे … जैसे किसी ने उनके अंदर प्राण फूंक दिये हों … मैं तेरा यह एहसान कैसे चुकाउंगा … श्याम जी बोले … बहुत आसान है … ये जो मैंनेजर है ये मेरा बेटा है मैं इसके लिये तेरी बेटी का हाथ मांगता हूं … बोल करेगा शादी।


श्याम जी की आंखों से टप टप आंसू बह रहे थे … एक पल में उनकी सारी परेशानी दूर हो गईं … आज उनका भगवान पर विश्वास और भी पक्का हो गया … वे मनोहर के गले लग कर रोने लगे।


कुछ ही दिनों में सांची का विवाह हो गया … अब उन्होंने संजय को भी वापस काम पर बुला लिया था।


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आँख मूंदकर विश्वास करना कितना खतरनाक हो सकता है।

 अजय की नींद अलार्म की कर्कश ध्वनि से टूट गई। वह धीरे-धीरे उठकर गेट की ओर बढ़ा, जहाँ बाहर रखी दूध की थैली उठानी थी। लेकिन जैसे ही उसने गेट खोला, उसकी आँखें फटी रह गईं। उसके घर के कम्पाउंड में, दीवार के सहारे एक लड़की बैठी हुई थी, जो शायद नींद में थी। अजय ने चौंककर पूछा, "अरे! कौन हो तुम और यहाँ क्या कर रही हो?"


अजय की तीखी आवाज़ से लड़की की नींद टूट गई। वह घबरा कर उठी और फिर अचानक अजय के पैरों में गिर गई। "मुझे बचा लीजिए, साहब! वे लोग मुझे मार डालेंगे। प्लीज, मुझे बचा लीजिए," लड़की ने काँपती आवाज़ में कहा। उसकी हालत देखकर अजय हड़बड़ा गया। उसने अपने पैर छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन लड़की ने उन्हें कसकर पकड़ रखा था।


अजय ने झल्लाकर कहा, "पहले मेरे पैर छोड़ो और सच-सच बताओ कि तुम कौन हो और यहाँ क्या कर रही हो? कौन तुम्हें मारने की धमकी दे रहा है?"


लड़की ने आँसुओं के बीच कहा, "साहब, मैं सब कुछ सच बताऊंगी, पर पहले मुझे अंदर ले चलिए। वे लोग यहीं कहीं छिपे होंगे, अगर उन्होंने मुझे देख लिया तो वे मुझे मार डालेंगे।" लड़की की आवाज़ में इतनी गहरी दहशत थी कि अजय निरुत्तर हो गया।


अजय ने चारों ओर नजर दौड़ाई, लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया। थोड़ी देर सोचने के बाद उसने कहा, "ठीक है, मेरे पीछे आओ, लेकिन पहले रोना बंद करो।"


लड़की चुपचाप अजय के पीछे-पीछे घर के अंदर आ गई। अजय ने दरवाजा बंद कर लिया और उसे सोफे पर बैठने के लिए कहा। खुद भी सामने वाले सोफे पर बैठते हुए उसने पूछा, "अब बताओ, तुम कौन हो, और मेरे घर के कम्पाउंड में क्या कर रही हो? कौन तुम्हें मारने की धमकी दे रहा है?"


लड़की ने आँसू पोंछते हुए कहा, "साहब, मेरा नाम नेहा है। मेरी शादी विकास से हुई थी। वह एक बदमाश निकला, जिसने शराब, जुआ और सट्टे में अपनी जिंदगी बर्बाद कर ली। उसने मुझे 20 लाख रुपये में अपने पड़ोसी, विनोद, को बेच दिया।"


अजय ने हैरानी से पूछा, "क्या? ये तुम क्या कह रही हो?"


नेहा ने सिर झुका लिया और कहा, "विकास मुझे विनोद के घर ले गया और कहा, 'लो, अब यह तुम्हारी जिम्मेदारी है।' और फिर चला गया। जब मैंने जाने की कोशिश की, तो विनोद ने मुझे पकड़ लिया और कहा, 'मैंने तुम्हें 20 लाख रुपये में खरीदा है, ऐसे कैसे जाने दूंगा?' तब मुझे एहसास हुआ कि मेरी सुंदरता ही मेरे विनाश का कारण बन गई थी।"


अजय ने नेहा की स्थिति को समझते हुए उसे सांत्वना दी, "अब रोना बंद करो। आगे क्या हुआ, बताओ।"


नेहा ने बात जारी रखी, "उस दिन से मेरा शोषण शुरू हो गया। जब मैंने विरोध किया, तो उसने मुझे बुरी तरह मारा। मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन पुलिस ने मेरी रिपोर्ट लिखने के बजाय विनोद को बुला लिया। थाने में ही विनोद ने मेरी जमकर पिटाई की, और पुलिस वाले मुस्कुराते रहे। उसके बाद से मैं विनोद की गुलाम बन गई।"


अजय कुछ कहने ही वाला था कि अचानक डोरबेल बज उठी। उसने स्क्रीन पर देखा कि दो अजनबी चेहरे बाहर खड़े थे। नेहा ने डरते हुए कहा, "ये वही लोग हैं! दरवाजा मत खोलना, साहब, वे लोग मुझे मार डालेंगे!"


अजय ने ऑडियो ऑन कर पूछा, "कौन है?"


बाहर से आवाज आई, "साहब, एक लड़की है, वह यहां आई क्या?"


अजय ने जवाब दिया, "नहीं, यहां कोई नहीं है। अब जाओ यहां से।"


जब वे लोग चले गए, तो नेहा ने अजय का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "साहब, आपने आज मेरी जान बचाई है। मैं आपकी जिंदगी भर गुलाम रहने को तैयार हूं।" उसने अजय को गले लगा लिया, लेकिन अजय ने तुरंत उसे पीछे हटने को कहा।


थोड़ी देर बाद, नेहा ने एक तस्वीर की ओर इशारा करते हुए पूछा, "ये लड़की कौन है आपके साथ?"


अजय ने हंसते हुए कहा, "वह मेरी पत्नी, स्वाति है। आज दोपहर तक वह घर आ जाएगी।"


नेहा ने मुस्कुराते हुए पूछा, "तो क्या मैं भी उनसे मिल सकती हूँ?"


अजय ने गंभीरता से मना करते हुए कहा, "नहीं, तुम उनसे नहीं मिल सकती। अगर वह तुम्हें यहां देखकर कुछ गलत समझ बैठी तो?"


नेहा ने समझने का अभिनय करते हुए कहा, "आप सचमुच अपनी पत्नी से बहुत डरते हैं!"


अजय ने थोड़ा मुस्कुराते हुए उसे किचन में फ्रेश होने के लिए भेजा और खुद सैंडविच बनाने की तैयारी में लग गया।


कुछ देर बाद, नेहा ताजगी से भरी हुई किचन में आई, लेकिन अजय का ध्यान उसके कपड़ों की ओर गया। वह स्वाति के कपड़े पहनकर आई थी, लेकिन कपड़े उसे तंग आ रहे थे, जिससे उसके शरीर के उभार और भी स्पष्ट हो गए थे। अजय उसकी ओर देखता रह गया।


तभी फिर से डोरबेल बजी। इस बार अजय ने स्क्रीन पर देखा कि पुलिस खड़ी थी। उसके दिल की धड़कन तेज हो गई। पुलिस ने अंदर आकर पूरे घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान, बेसमेंट से किसी लड़की की घुटी-घुटी आवाज़ सुनाई दी।


पुलिस ने बेसमेंट में जाकर देखा, तो नेहा, जिसे अब श्वेता के नाम से पहचाना गया, हाथ-पैर बंधी और घायल अवस्था में पड़ी थी। उसने पुलिस को बताया कि अजय ने उसे किडनैप किया था।


पुलिस ने अजय को गिरफ्तार कर लिया। अजय की पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी। उसने जो मदद की थी, वह अब उसके लिए बर्बादी का कारण बन गई थी। श्वेता उर्फ नेहा ने उसे धोखा दिया था, और अब उसकी पत्नी स्वाति भी घर लौटने वाली थी। अजय समझ नहीं पा रहा था कि वह इस हालात से कैसे निकले।


शेखर और उसके साथियों ने अब अजय से एक करोड़ रुपये की मांग की, ताकि वह मामले को दबा सकें। अजय को मजबूरन पैसे देने पड़े, और उसने स्वाति के आने से पहले ही उन्हें वहां से रवाना कर दिया।


उस दिन के बाद अजय ने सीख लिया कि इस दुनिया में किसी पर भी आँख मूंदकर विश्वास करना कितना खतरनाक हो सकता है। उसने यह कड़वा सबक हमेशा के लिए याद कर लिया।

Wednesday, 4 September 2024

आठ वर्ष हो चुके थे शादी को, और मेरी गोद अब भी खाली थी

 आठ वर्ष हो चुके थे शादी को, और मेरी गोद अब भी खाली थी। हर दिन तानों से भरे होते, पति का बेरुखापन अंदर तक घुटन पैदा कर रहा था। मैंने हर संभव कोशिश की, डॉक्टर से जांच करवाई, परंतु सब रिपोर्ट्स साफ थीं कि समस्या मुझमें नहीं, मेरे पति में है। फिर भी, घर के लोग मुझे ही दोषी ठहराते थे। यह सोचकर कि मैं बांझ हूँ, मेरे अस्तित्व को ही खत्म कर रहे थे।

रोज़ के ताने, समाज के सवाल, और पति का पीकर आकर मुझ पर हाथ उठाना—ये सब मेरे जीवन का हिस्सा बन गए थे। कितनी बार घर छोड़कर मां के पास चली गई, सोचते हुए कि शायद मुझे समझने वाला कोई मिलेगा। पर मां, समाज की परवाह करते हुए, मुझे हर बार ससुराल वापस भेज देतीं। "लोग क्या कहेंगे?"—इस सवाल ने मेरी मां को भी मजबूर कर दिया, और मैं फिर वही चक्रव्यूह में फंस जाती थी।

सहना औरत का गहना है, ऐसा सुना था, पर अब समझ आया कि सहना तो औरत के लिए एक सजा है। एक ऐसी सजा, जिसके लिए वह दोषी भी नहीं होती। मेरे सब्र का बांध अब टूट चुका था। आखिर मेरा कसूर क्या था? मैंने ठान लिया कि अब और नहीं सहूंगी। तलाक का फैसला कर लिया और घर हमेशा के लिए छोड़ दिया। मां के पास आ गई, और इस बार ठान लिया कि वापस नहीं जाऊंगी।

शुरू में मां ने मुझे समझाया, लेकिन इस बार मैंने अड़ने की ठान ली थी। आखिरकार, मां ने भी मेरी बात समझी और इस बार मेरा साथ दिया। ससुराल वालों ने धमकियां दीं, मुझे डराने की कोशिश की, पर मैं अपनी जिद पर अड़ी रही। तलाक हो गया, और मैंने बदले में कुछ नहीं लिया, सिर्फ अपनी आजादी।

कुछ समय बाद, एक दिन किसी ने आगे बढ़कर मेरा हाथ थामा। पहले तो मैं डरी, लेकिन मां ने समझाया और मेरी दूसरी शादी कर दी। नए घर में सब कुछ अच्छा था। धीरे-धीरे मैं अपने पुराने घावों को भूलने लगी, और अब मैं मां बनने वाली थी। पहले पति के चेहरे पर कुदरत ने एक ऐसा तमाचा मारा कि वह तिलमिला उठा। उसकी असलियत समाज के सामने आ गई थी।

अब मैं आठवें महीने में हूँ, और कुछ ही दिनों में मेरी गोद संतान से भर जाएगी। इस बार मैं खुद को दोषी महसूस नहीं करती। मैंने अपने पहले पति को सबक सिखाया—निर्दोष होकर भी बांझ का लेबल क्यों ढोएं? क्यों अपने जीवन को बर्बाद करें उन लोगों के लिए जो हमें सिर्फ दोषी ठहराते हैं?

ये मेरी सच्ची कहानी है, और आज मैं गर्व से कह सकती हूँ कि मैंने सही फैसला लिया। अब मैं खुद को आजाद और खुशहाल महसूस करती हूँ। ऐसे मर्दों को सबक सिखाना ही चाहिए, ताकि वे जान सकें कि औरत की भी एक हद होती है, और उसे तोड़ना आसान नहीं।

जानकी बुआ नही रहीं एक सप्ताह पहले हीं

 जानकी बुआ नही रहीं एक सप्ताह पहले हीं ये मनहूस खबर मुझे मिली थी।जानकी बुआ से बरसों पहले किया वादा मुझे याद आ रहा था, मैं मौके की तलाश में थी।


हमारे पड़ोस में जानकी बुआ उनके पति दो बेटे,दो बेटियां जिनकी शादी हो चुकी थी और दो बहुएं पोता पोती से भरा संपन्न परिवार रहता था।मम्मी के ससुराल के आसपास के किसी कस्बे में जानकी बुआ का मायका था।इसी से दोनो में ननद भौजाई का रिश्ता कायम हो गया था।मुझे भी जानकी बुआ से खास लगाव था।


घर में कुछ खास बनता मुझे जरूर खिलाती। बाजार जाती तो कभी क्लिप तो कभी सुंदर सा दुपट्टा कभी कुछ मेरे लिए जरूर लाती।

              

एक बात मुझे बहुत अजीब लगती बुआ कभी अपने पति से बात नहीं करती। घर में मम्मी पापा को हर मसले पर एक दूसरे की राय हंसी मजाक तो कभी गम्भीर विषय पर विचार करते देखती।पर बुआ का कमरा अलग था और उनके पति का अलग।दोनो भईया और भाभी भी उनसे बात नही करते थे।


बिरजू नाम का एक आदमी जो बाजार से सामान लाने से लेकर किचेन में दोनो भाभियों की मदद करता वही उनको खाना नाश्ता दवा देता था।मेरी उत्सुकता उम्र के साथ बढ़ती जा रही थी पर हिम्मत नही होती बुआ से पूछने की।


मेरा कॉलेज की मैगजीन में मेरी लिखी एक छोटी सी कहानी छपी।मैं घर में सबको दिखा दौड़ते हुए बुआ के पास गई।बुआ चश्मा लगा कर बड़े गौर से मेरी कहानी पढ़ी।मेरे सर पर हाथ रखा।खूब आशीर्वाद दिया और मेरे पसंद की मिठाई मुझे अपने हाथों से खिलाई।


फिर बहुत गंभीर स्वर में मुझसे कहा तनु मुझसे वादा करो जब मैं नहीं रहूंगी दुनिया में तब तुम मेरी कहानी लिखना, जो आज मैं तुझे सुनाऊंगी।मैने वादा किय,बुआ मुझे लेकर पार्क चली गई।


 बुआ ने कहना शुरू किया मेरी शादी सत्रह साल की उम्र में हो गई।मेरी खूबसूरती देख मेरे ससुर मेरे पिता से मेरा हाथ अपने इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रोफेसर बेटे के लिए मांग लिया।मेरी शादी हो गई।सब कुछ अच्छे से चल रहा था मैं चार बच्चों की मां बन गई थी।पच्चीस साल की उम्र में हीं।सास ससुर ननद जेठ जेठानी सब मुझसे खुश रहते।


कुछ दिनों से मेरे पति घर देर से आ रहे थे।मैने एक दिन पूछा तो बोले एक महात्मा शहर में आए हैं उनका प्रवचन सुनने जाता हूं।मेरे पति बहुत अच्छे वक्ता भी थे।उनकी आवाज का सम्मोहन लोगों को मंत्र मुग्ध कर देता।छोटे छोटे बच्चों और घर परिवार में उलझी मैं ज्यादा ध्यान नहीं दिया।


धीरे धीरे मेरे पति के घर आने का अंतराल बढ़ता गया। फिर मेरे पति एक कम उम्र की खूबसूरत नई नई दीक्षा ली साध्वी के साथ प्रचार के लिए जाने लगे।घर खर्च ससुर जी हीं चलाते थे।उनका कहना था तुम लोग अपने पैसे जमा करो।

               

उड़ते उड़ते मेरे कानों में खबर पहुंची मेरे पति उस साध्वी के साथ प्रचार के लिए विदेश जाने वाले हैं।जब घर आए तो गेरुआ वस्त्र गले में माला और बाल मुड़े हुए।मैं तो पैर पकड़ के रोने लगी।बच्चों का वास्ता दिया पर,पासबुक कुछ कपड़े और कागजात लेकर चले गए ,ये कहते हुए मैं मोह माया से मुक्त हो गया हूं।मुझे असली और सच्चा ज्ञान मिल गया है।

               

हंसते खेलते परिवार पर मानो बिजली गिर गई हो।मैं बच्चों को पकड़ कर रोती फिर उन्हे चुप कराती। अकाउंट के सारे पैसे भी लेकर चले गए थे मेरे पति। ससुर को दिल का दौरा पड़ा वो ये आघात झेल नहीं पाए।सब की नजरें बदल गई थी।सास मुझे कुलच्छिनी नाम से हीं बुलाती। कौड़ी कामख्या की जादूगरनी है ये अपने रूप से ससुर को मोहित कर लिया।अब पति और ससुर दोनो को घर से दूर कर दिया जेठानी और उनके बच्चे मुझसे नौकरानी सा व्यवहार करते। मेरे बच्चों पर भी उन्हे तरस नही आता था।सुना बिस्तर ओह रात भर रोती रहती तकिया गिला हो जाता।कैसे कटेगी जिंदगी।


    एक रात जेठ कमरे में आए और बोले मुझे खुश रखोगी तो सब ठीक हो जायेगा,मैं सिहर उठी,ओह जेठ का ये रूप।


                  

मैं मायके चली गई बच्चों के साथ,बाबूजी रिटायर हो गए थे, भईया पेंशन का पैसा उठा कर लाते और भाभी के हाथ में दे देते।अम्मा बाबूजी भी अपनी मजबूरी जाहिर कर चुके थे।बुढ़ापा हमारा इन्ही के सहारे कटेगा, हमलोग मजबूर हैं जानकी भाभी भी गिरगिट की तरह रंग बदल चुकी थी।

                

मेरे बचपन की सहेली मुझसे मिलने आई मेरा दुख दर्द सुनकर उसने कहा जानकी जिसका पति उसका साथ छोड़ देता है उसका कोई मायका ससुराल नही होता।तू हिम्मत कर मेरे पति वकील हैं जितना हो सकता है तुम्हारी मदद करेंगे।रात भर सोचकर कल बताना,मैं रात भर सोचती रही बच्चों से नौकरों सा बर्ताव स्कूल में बच्चों को दूसरे बच्चे चिढ़ाते थे देखो साधु का बेटा आ गया। बच्चे रोते हुए कहते कल से स्कूल नहीं जाना।और मैने मन बना लिया।पति अपनी नौकरी से इस्तीफा दे चुके थे।


          

मैं अपनी सहेली से सुबह सुबह हीं दृढ़ संकल्प के साथ मिलने चली गई।उसके पति के कहे के अनुसार मुझे ससुराल में करना था। ससुराल में खूब ड्रामा हुआ मैने कहा मेरे हिस्से के घर का पैसा दे दीजिए नही तो कानूनी कार्रवाई करूंगी और किसी दूसरे से बेंच दूंगी।


सहेली के पति का नाम लेकर मुझे चरित्रहीन भी कहा गया,बेटा कम उम्र की साध्वी के साथ देश विदेश में क्या कर रहा है कोई पूछने वाला नही और मैं चार बच्चों को लेकर दूसरे शहर चली आई।अपने हिस्से के घर के पैसे मैं ले चुकी थी,यही मेरी हिम्मत थी।चारों बच्चों का नाम सरकारी स्कूल में लिखा दिया,एक कमरे में सिलाई का काम शुरू किया,टिफिन भी बनाती,बच्चे सहायता करते। बच्चों ने भी खूब साथ दिया,पढ़ने में भी खूब मन लगा रहे थे।


बाहर की दुनिया एक अकेली जवान औरत के लिए कितनी खौफनाक होती है ये कड़वी सच्चाई मेरे सामने आ रही थी। मजबूरी में मैं सिंदूर लगा रही थी।जिसके नाम से मैं नफरत करती थी उनके नाम का सिंदूर लगाना उफ्फ।

                 


छोटा सा सिलाई सेंटर और टिफिन का काम मुझे सोचने का वक्त नहीं देता पर कभी कभी आंखें बरस पड़ती।

               


समय गुजरता गया।बेटा वरुण और वैभव दोनों नौकरी करने लगे।उन्होंने पहले दोनो बहनों की शादी करने के बाद अपनी शादी करने का संकल्प लिया था।


तनु स्कूल में टीचर हो गई और मनु इंफोसिस में इंजीनियर।दोनो की शादी खूब धूमधाम से हो गई।शादी से पहले सुनने में आया की मेरे पति लौट आए हैं और यहां आना चाहते हैं।मैने साफ इंकार कर दिया।नासूर बने जख्म रिसने लगे थे।

                             

मैने दोनो बेटियों का कन्यादान लोटा रखकर किया।दोनो बेटों की शादी भी अच्छे से संपन्न हो गई।

        

बच्चों ने मेरा काम करना नौकरी लगते हीं छुड़वा दिया था।एक एनजीओ से जुड़ी थी।एक दिन दीन हीन से मेरे पति हाथ जोड़े दरवाजे पर खड़े थे आंखों से पश्चाताप के आठ आठ आंसू बह रहे थे।


मुझे माफ कर दो जानकी,और मैं पत्थर बन चुकी थी। चाहती तो लात मार कर बाहर कर देती पर मुझे उनके गुनाह के लिए उनकी आंखों में हमेशा आंसू देखनी थी।


मैं पंद्रह सालों में एक घर में रहते हुए भी कभी उनसे बात नही की है.. बच्चे भी उनसे बात नही करते। बेटियां आती है पूरा परिवार हंसता है घूमने जाता है ये पश्चाताप के आंसू अपने कमरे में बहाते रहते हैं।मेरी जिंदगी के खूबसूरत पल को जिसे इस इंसान ने तिल तिल कर मरने के लिए छोड़ दिया।


मेरे बच्चों का बचपन मेरी जवानी सब कुछ इस इंसान ने दांव पर लगा कर दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया।बच्चे गर्व करते हैं मुझ पर बहुएं और दामाद भी मेरी बहुत इज्जत करते हैं।और ये इंसान घर के एक कोने में बेकार की चीज जैसा पड़ा आंसू बहाता रहता है।पोता पोती भी उसके पास नही जाते।


 जो भी मुझसे इसके बारे में पूछता है, मैं कहती हूं मेरा तथाकथित पति है।जो अपनी जिम्मेवारियों से मुंह मोड़कर संन्यासी बनने गया था, आज सब कुछ रहते हुए भी इतना अकेला है की आंसू बहाता रहता है।


महात्मा जी और उनके चेलों ने इसका जमा पूंजी खतम होते हीं आश्रम के कामों में लगा दिया और जब बीमार पड़ा और कमजोर हो गया तो भगा दिया। इसके घरवालों ने भी इसे नही रखा और यहां भेज दिया।


 ये उदाहरण है हमारे समाज के उन मर्दों के लिए जो शादी कर बच्चे पैदा करते हैं और फिर संन्यासी बनने चले जाते हैं।उनका यही हस्र होता है।बिरजू खाना पानी नाश्ता सब कमरे में दे आता है।


 वो भी इससे बात नही करता.. बच्चे बड़े हो गए तो मैने सिंदूर लगाना भी छोड़ दिया। मैं इतनी दूर आ चुकी हूं की इसका होना या नहीं होना मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता।औरत त्याग ममता सहनशीलता की देवी होती है पर। उसका एक रूप ये भी है।


पूरा वातावरण बोझिल हो चुका था।बुआ बोली मैं दुबारा अपने मायके भी कभी नहीं गई ना हीं ससुराल से कोई रिश्ता रखा है।सब ठीक हो जाने पर उन लोगों ने नजदीकियां बढ़ानी चाही पर मैने और बच्चों ने साफ नकार दिया।

          

 शाम हो चुकी थी हम दोनों वापस धीरे धीरे घर की ओर बढ़ने लगे।मैने बुआ का हाथ जोर से अपने हाथों से पकड़ लिया था।


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बहन-बेटी का घर न बने।

 बेटियों, जब तुम शादी करके किसी नए घर में जाती हो, तो यह जरूरी नहीं कि वह घर तुम्हारे मायके जैसा हो। हर घर में हालात अलग होते हैं। जिस तरह की सुख-सुविधा तुम्हें मम्मी-पापा के घर में मिली है, वह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी मिल जाए। 🌸


आज सुबह मैं अपने पड़ोसी शर्मा जी से मिला। उन्होंने उदास होकर बताया कि उनकी बेटी हमेशा के लिए अपने पति को छोड़कर मायके आ गई है और अब वह तलाक की मांग कर रही है। 😔 मैंने पूछा, "क्या हुआ, बेटी को क्या परेशानी है?" शर्मा जी ने बताया कि उनकी बेटी कहती है, पति की कमाई कम है और वह उसके शौक पूरे नहीं कर पाता। इसलिए वह अब उस व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहती। 😕💔


मैंने फिर शर्मा जी से कहा कि यह बात सिर्फ उनकी बेटी के लिए नहीं, बल्कि हर मां-बाप के लिए एक सीख है। 👨‍👩‍👧‍👦


आपको अपने बच्चों को यह समझाना चाहिए कि शादी के बाद की जिंदगी मायके जैसी नहीं होती। मायके में जो सुख-सुविधाएं मिलती हैं, वह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी मिलें। हर घर की अपनी परिस्थितियां होती हैं। 💫


जैसे अगर पिता के घर में लाइट जाते ही इनवर्टर चालू हो जाता है, तो यह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी ऐसा हो। 😅 अगर मम्मी-पापा ने जन्मदिन पर महंगे गिफ्ट दिए हैं, तो यह जरूरी नहीं कि पति भी इतना महंगा गिफ्ट दे। 🎁 अगर मायके में तुम कार में घूमती थीं, तो यह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी कार हो, हो सकता है वहां साइकिल हो। 🚴‍♀️


मैं यह नहीं कहता कि तुम्हारे शौक गलत हैं, परंतु रिश्तों में प्रेम और समझौता ही सबसे बड़ी संपत्ति होती है। 💖 किसी भी रिश्ते में समर्पण और एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझना जरूरी है। अगर किसी बात से असहमति हो तो उसे प्यार और समझ से हल किया जा सकता है, लेकिन तलाक किसी समस्या का हल नहीं है। 😔


शर्मा जी को मैंने यही समझाया और उनकी आंखों में आंसू आ गए। 😢 उन्होंने कहा, "शायद मैंने अपनी बेटी को यह समझ नहीं दी।"


दोस्तो, मैं आप सबसे भी यही कहना चाहता हूं कि अपनी बेटियों को यह सिखाएं कि जो चीजें उन्हें मायके में मिलती हैं, वह जरूरी नहीं कि ससुराल में भी मिलें। परंतु रिश्तों का सम्मान, प्यार, और समझदारी हर जगह जरूरी होती है। 🏡👩‍❤️‍👨


अगर आप मेरी बात से सहमत हैं, तो इसे दूसरों तक पहुंचाएं, ताकि किसी की भी बहन-बेटी का घर न टूटे। 🙏🌸


#समझदारी #शादी #रिश्तों_का_सम्मान

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...