sunilrathod

Tuesday, 12 November 2024

जिस्म से जिस्म की गर्माहट का तो पता नहीं..

 तेरे छूने मात्र से मैं महक उठती हूं...

 बाहों में लेने से तेरी मैं बहक उठती हूं...

 जिस्म से जिस्म की गर्माहट का तो पता नहीं...

 मगर तेरे आलिंगन से ही मैं लहक उठती हूं...

 अधरो का कंपन फिर रुकता नहीं...

 और फिर मैं धीरे-धीरे खुद को तुझे सौंपने लगती हूं...

 क्या होगा अंजाम ये ख्याल भी मुझे फिर सताता नहीं...

 उस वक्त तेरे सिवा मुझे कुछ और भाता नहीं....

 प्रेम में मिलन बड़ा ही सुखद होता है....

 शब्दों में बयां ना हो पाए जो, ये वैसा होता है...

 ना समझ पाएगा कोई इस एहसास को...

 प्रेम से ऊपर भी क्या कुछ और होता है....

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