sunilrathod

Tuesday, 6 May 2025

निःस्वार्थ प्रेम का अर्थ वह होता है,

 यदि निस्वार्थ भाव से इंसान की आंखों में स्नेह, होठों पर मुस्कान, हृदय में सरलता और करुण नहीं है, तो सब कुछ है व्यर्थ

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निःस्वार्थ प्रेम का अर्थ वह होता है, जिसमें स्वार्थ न हो । प्रेम देने का नाम है, लेने का नहीं। जब प्रेम के बदले कोई अपेक्षा की जाती है, तब वह प्रेम निः स्वार्थ प्रेम नहीं रह जाता है। एक माँ अपने बुरे से बुरे पुत्र को भी निःस्वार्थ प्रेम के वशीभूत होकर गले से लगा लेती है, जबकि दूसरे रिश्तों में उस व्यक्ति विशेष के लिए हमें अच्छा होना पड़ता है, तभी प्रेम मिल पाता है, लेकिन माता-पिता द्वारा अपने बच्चे को किए गए प्रेम को निस्वार्थ कह सकते हैं। बच्चा बड़ा होकर अपने मां-बाप के प्रेम का कर्ज किस तरह उतारेगा, इसकी परवाह मां बाप कभी नहीं करते हैं और अपने बच्चे की परवरिश में पूरी जिंदगी लगा देते हैं। निस्वार्थ प्रेम का इससे सच्चा उदाहरण और क्या हो सकता है ।

आज के परिवर्तनशील माहौल में अधिकांश लोग स्वार्थी हो गए हैं क्योंकि हर चीज किसी न किसी स्वार्थ के धागे में बंधी हुई है। फिर भी सच्चा प्रेम और दिल से किया गया प्रेम हमेशा निस्वार्थ होता है, लेकिन क्या सच्चे प्रेम को नापने का कोई पैमाना है ? इसलिए इस तरह के प्रेम में समय के साथ बदलाव भी होता है और धोखे भी होते हैं। हम एक-दूसरे को चाहे कितने भी भारी भारी प्यार भरे शब्दों से सजावट कर के सुविचार भेज दें, यदि निस्वार्थ भाव से हमारी आंखों में स्नेह, होठों पर मुस्कान, ह्रदय में सरलता और करुणा नहीं है, तो सब कुछ व्यर्थ है ।

लेखक: सुनिल राठौड़ 


Friday, 2 May 2025

जिस मनुष्य का जैसा विचार, कर्म, व्यवहार व स्वभाव होता है, उसी के अनुरूप उसे मिलता है सुख दुख व मान सम्मान

 जिस मनुष्य का जैसा विचार, कर्म, व्यवहार व स्वभाव होता है, उसी के अनुरूप उसे मिलता है सुख दुख व मान सम्मान

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सम्मान वह अनमोल भावना है, जो ना केवल हमारे रिश्तों को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक संबंधों को भी बेहतर बनाता है। यह एक सकारात्मक दृष्टिकोण है, जो किसी भी व्यक्ति की अहमियत और गरिमा को पहचानने से जुड़ा होता है। आत्म-सम्मान से लेकर दूसरों के प्रति सम्मान तक, यह हर पहलू हमारे जीवन को प्रभावित करता है। खासकर छात्रों के लिए, यह एक महत्वपूर्ण विषय बन जाता है क्योंकि यही वह समय है, जब वे दूसरों से सम्मान प्राप्त करने के साथ-साथ खुद का भी सम्मान करना सीखते हैं। मान सम्मान व्यक्ति के व्यक्तित्व का आईना है । बुरे विचार व बुरे स्वभाव वाला व्यक्ति हमेशा पतन की खाई में ही गिरता है । यदि हममें दूसरों से मान सम्मान पाने की अपेक्षा है तो हमें भी सामने वाले व्यक्ति को सम्मान देना ही होगा ।

मान सम्मान अनंत सम्पत्ति है। पद पैसे की शक्ति का रुतबा इन सबका अंत है, मान और सम्मान की सम्पत्ति तो सदैव अनंत है क्योंकि समय के बदलने के साथ ही पद प्रतिष्ठा समाप्त हो जाती है, परंतु मान और सम्मान का कभी भी अंत नहीं होता। ताली दोनों हाथों से बजती है, एक हाथ से नहीं । रास्ता दिखाने वाले को पहले स्वयं आगे चलना पड़ता है । हर मनुष्य का जैसा विचार, कर्म, व्यवहार और स्वभाव होता है, उसी के अनुरूप उसे सुख-दुख व मान-सम्मान मिलता है ।


      ✍🏻 *लेखक

      सुनिल राठौड़ बुरहानपुर मप्र 

Thursday, 1 May 2025

जो पुरुष अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रख सकता है, वही लंबे समय तक इस धरती पर सुख-शांति से जी सकता है।

 जो पुरुष अपनी यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रख सकता है, वही लंबे समय तक इस धरती पर सुख-शांति से जी सकता है।


पुरुषों को ये समझना चाहिए कि उनकी कई परेशानियों और पतनों की जड़ कई बार कई गर्लफ्रेंड्स होती हैं।


हर लड़की की आत्मा अच्छी नहीं होती।


कुछ राक्षसी स्वभाव की होती हैं, कुछ में ज़हर छिपा होता है, और कुछ औरतें किसी की किस्मत को बर्बाद करने वाली होती हैं। जैसा की अभी हाल में आप सब देख चुके हैं...!!


इसलिए सावधान रहें।


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1. हर बार अपने इरेक्शन (लिंगोत्थान) की बात मत मानो।

अधिकतर बार यह तुम्हें गलत दिशा में ले जाता है।

अगर आप अपने इरेक्शन पर नियंत्रण नहीं रख पाए, तो ज़िंदगी छोटी और गरीबी से भरी हो सकती है।


2. किसी लड़की के कर्व्स, बॉडी और फिगर को देखकर रिलेशनशिप मत बनाओ।

ये सब धोखा है, खासकर सोशल मीडिया पर। असली सुंदरता और मूल्य इससे कहीं ज्यादा होता है।


3. हर स्कर्ट के नीचे जो है, उसे हासिल करने की कोशिश मत करो।

कुछ स्कर्ट के नीचे सांप होते हैं, जो काटकर चैन छीन लेते हैं। संयम और अब्स्टिनेंस (संयमित जीवन) अक्सर सबसे अच्छा फल देता है।


4. कई गर्लफ्रेंड्स रखना मर्दानगी नहीं है।

ये सिर्फ आपको औरतबाज़, धोखेबाज़, और बच्चा बनाता है — असली मर्द नहीं।


5. सिर्फ बेड में अच्छे होने से मर्द नहीं बनते।

असली मर्द वह है जो अपनी जिम्मेदारियों से भागता नहीं, उन्हें पूरा करता है।


6. उस लड़की का सम्मान करो जो तुमसे सच्चा प्यार करती है।

किसी लड़की का प्यार और सपोर्ट मिलना आसान नहीं होता। यह उसकी भावनात्मक ताकत और ईमानदारी का सबूत है।


7. दुनिया उन्हीं पुरुषों को सम्मान देती है जो कामयाब होते हैं।

तुम्हारे पास अगर बहुत सारी गर्लफ्रेंड्स हैं, तो कोई तुम्हारी तारीफ नहीं करेगा।

ये सिर्फ समय, ऊर्जा, पैसा और वीर्य की बर्बादी है।


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याद रखो:

ईमानदार, वफादार और ज़िम्मेदार पुरुष ही असली मर्द कहलाते हैं।

संयम ही सफलता की कुंजी है। ......

Monday, 14 April 2025

कांग्रेस नेत्री की सलाह नहीं मानी।तो क्या हुआ

 *पुरानी तीन घटनाएं याद दिला दूँ। लेखक यहां पहले ही स्पष्ट कर देना चाहता है कि जो घटनाएं जैसी हुईं, सिर्फ वैसी ही लिखी जा रही हैं।* 


1. ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व राष्ट्रपति थे। उन्हें z security प्राप्त थी। उन्होंने दिल्ली में घोषणा की - "कल मैं चंडीगढ़ पहुंचने के बाद बोफोर्स के सारे राज खोलने वाला हूँ।" तो साहब हुआ ये कि दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर सामने से एक ट्रक दनदनाता हुआ आया और जैलसिंह की कार को कुचल दिया। वे वहीं मृत्यु को प्राप्त हुए। कोई जांच नहीं हुई।


2. राजेश पायलट ने कांग्रेस नेत्री की सलाह नहीं मानी। उन्होंने घोषणा की - "कल मैं कांग्रेस अध्यक्ष पद हेतु नामांकन भरूँगा।" बस फिर क्या था, सामने से एक बस आई और उनकी कार को कुचल दिया। वो वहीं मृत्यु को प्राप्त हुए। कोई जांच नहीं हुई।


इन दोनों घटनाओं में modus of operandi एक समान थी। तीसरी घटना में modus of operandi अलग थी। 


3. श्रीमन्त माधवराव शिन्दे (सिंधिया) उस लोकसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय व कर्मठ नेता थे। वे लोकसभा के लिए लगातार नवीं बार चुने गए थे व लोकसभा में विपक्ष के नेता भी थे। कांग्रेस नेत्री ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को कहा - "मैं प्रचार करने आ रही हूँ !" प्रदेश अध्यक्ष निर्भीक था। उसने कहा - "आप मत आइए। माधवराव जी को भेज दीजिए। वे ही वोट दिलवा सकते हैं।" बस फिर क्या था। माधवराव जी को बोला गया कि आप अपने व्यक्तिगत विमान से नहीं बल्कि इस विमान से जाएंगे। एक चश्मदीद किसान ने बयान दिया - "विमान में पहले बम विस्फोट हुआ, फिर आग लगी।" विमान में सवार आठों लोग मारे गए लेकिन कोई जांच नहीं हुई। अल्प काल के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी मृत पाए गए। (डॉ. ईश्वर चन्द्र करकरे की कलम से साभार)


*सोनिया गांधी ने देश के लिए क्या-क्या काम किया है?*


■राजीव गांधी अपने पूरे जीवन काल मे कुल 181 रेलिया की थीं। जिसमें 180 में सोनिया गांधी भी उसके साथ थी, बस उस दिन साथ नहीं थी, जिस दिन राजीव गांधी के जीवन की अंतिम रैली हुई। 


■राजीव गांधी की हत्या के समय 14 लोगों की भी मौत हुई थी। मगर मजे की बात इन मरने वाले 14 लोगों में एक भी कोंग्रेसी नेता नहीं था, जो भी मरे आम लोग थे। क्या ये सम्भव है कि देश के प्रधानमंत्री की रैली में उनके साथ एक भी बड़ा कोंग्रेसी नेता नहीं हो?


■राजीव गांधी के साथ कोई बड़ा या छोटा कांग्रेसी नेता नहीं मरा, ना सोनिया गांधी जो हर सभा में राजीव गांधी जी के साथ रहतीं थीं। उस दिन होटल में सरदर्द के कारण रुक गईं थी, ये आफिशियल स्टेटमेंट हैं।

तो क्या सबको मालूम था, कि क्या होने वाला है और इस तरह पूरी कांग्रेस विदेशियों द्वारा हाइजैक कर ली गई। 


■बाद में खुद प्रियंका गांधी ने अपने बाप के कातिल को कोर्ट में माफ करने की अपील कर दी थी। 


■जब से इटली की सोनिया मानियो इस परिवार की बहू बनकर आई हैं जब से अब तक इस गांधी परिवार में एक भी मृत्यु को प्राकृतिक मृत्यु का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है, सब अप्राकृतिक मौत मरे हैं।


■इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के ससुर कर्नल आनंद अपने ही फार्म हाउस से थोड़ी दूरी पर गोली लगने से मरे पाये गये थे ।


■संजय गांधी हवाई जहाज गिर जाने से मारे गये । इंदिरा गांधी अपने ही अंगरक्षकों के द्धारा गोली मारे जाने से मारी जाती है ।


■राजीव गांधी को बम से उड़ा दिया जाता है ।


■प्रियंका गांधी के ससुर राजेन्द्र वाड्रा दिल्ली के एक गेस्ट हाउस मे मरे पाये जाते है। प्रियंका गांधी की ननद जयपुर दिल्ली हाइवे में कार दुर्घटना में मारी जाती है। प्रियंका गांधी का देवर मुरादाबाद के एक होटल में मरा पाया जाता है।


■राजीव गांधी के सबसे खास दो दोस्त माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट यह तीनों उस बीयर बार में एक साथ जाया करते थे जिस बीयर बार में सोनिया शादी के पहले बार डांसर थी।


■राजेश पायलट एक सड़क दुर्घटना में मारा जाता है और माधवराव सिंधिया जहाज दुर्घटना में मारा जाता है।


■ हम खुद देख सकते हैं, केरल में नम्बी नारायण को जेल, गोधरा व मालेगांव कांड में हिन्दुओं को फंसाना व पाकिस्तान आतंकवादियों को छोड़़ना, हिन्दू आंतकवाद शब्द का जन्म, करोड़ों व अरबों के घोटाले, देश को कमज़ोर करना, इमरजेंसी स्टॉक 40 से 7 दिन करना, सेना को गोला बारूद ना देना, बुलेट प्रूफ जैकेट्स न देना, लड़ाकू विमान न खरीदना, कश्मीर से हिन्दू पंडितों से निकालना, 26/ 11 के लिए पाकिस्तान पर एक्शन के लिए मना करना, चीन के अम्बेसडर से मिलना व बाद में इनकार करना, सबूत देने पर सफाई देना, डिफॉल्टर्स को बैंक्स के मना करने के बावजूद अरबों रुपए के लोन देने, अब लंदन कोर्ट की मोहर से जग जाहिर। 


विशेष - संसद में हमले के दिन भी सोनिया-राहुल गांधी संसद नहीं गए थे... पता नहीं फिर भी देश के लोगों की आंखे क्यों नहीं खुल रही।

पैसे कमवणे किती अवघड आहे पण तू फक्त घरात बसतेस.

 स्वतःच्या बायकोला खुश करण्यासाठी, खालील पोस्ट तिला टॅग करुन टाका.

              एक उच्चशिक्षित नवरा आपल्या बायकोला एके दिवशी समजावून सांगत होता की तु पैसे कमावून बघ आणि मग तुला कळेल की पैसा कसा खर्च करावा. 

              मी तुला आज एक दिवस देतो घराच्या बाहेर निघ, आणि बघ किती स्पर्धा चालू आहे. काहीतरी प्रयत्न कर काम शोधण्यासाठी. तीही एक शिक्षित बायको, एक आई आणि एक सून होती...

        ती बाहेर निघाली आणि दिवसभर फिरत राहिली. खुप माहिती घेतली आणि घरी आली. दुसऱ्यादिवशी नेहमी प्रमाणे सासू सासरे यांना वेळेला नाश्ता जेवण, मुलांचा डबा, वेळेला शाळेत पाठवणे, नवऱ्याला डबा, त्याचा आवडीचा नाश्ता जेवण बनवले आणि खोलीत गेली .

           नवरा म्हणाला आज कळाले असेल मार्केटमध्ये किती स्पर्धा चालू आहे, पैसे कमवणे किती अवघड आहे पण तू फक्त घरात बसतेस.

         तिने एक स्मित केले आणि एक लिस्ट त्यांच्या हातात दिली. त्यात तिने घरात घालवलेले अनेक वर्षे आणि घरातील कामाचे मार्केट मध्ये जी किंमत मोजली जाते त्याचा ताळेबंद दिला. नवऱ्याला एकदम घाम फुटला ज्यावेळेस त्याने वाचायला सुरुवात केली .


१. मुलांचा सांभाळ आणि त्यांना संस्कार लावणे ज्याला मार्केटमध्ये Baby sitting म्हणतात .

Salary Rs.१५,०००/-


२. घरातील पसारा जागेवर ठेवणे आणि घर काम करणे, ज्याला मार्केट मध्ये Made म्हणतात.

Salary Rs १०,०००/-


३. सर्वांची आवडनिवड बघून सकाळ संध्याकाळ केलेला स्वयंपाक , ज्याला मार्केट मध्ये Cook म्हणतात.

 Salary Rs.१०,०००/-


४. घरात आलेल्या पाहुण्यांचा पाहुणचार , ज्याला मार्केट मध्ये Host of the Guest बोलतात.   

Salary Rs.५,०००/-

      असा तिने नवऱ्याकडे महिन्याचा Rs.५०,०००/ - पगार या हिशोबाने वर्षाला सहा लाख रुपये आणि गेल्या २५ वर्षाचे दिड कोटीची मागणी केली.

      मग त्याचे डोळे खाडकन उघडले. ज्या व्यक्तीने स्वतःचा कणभरही विचार न करता माझ्या घराला वेळ दिला, ज्याची किंमत मार्केटमध्ये शोधूनही न मिळणारी होती.

        तात्पर्य एवढेच की ज्यावेळेस एक शिक्षित स्त्री घरात बसते त्यावेळेस ती खुप विचार करुन सगळं काही करत असते. तिला माहिती असते आज जर आपण आपल्या मुलांना सोडून बाहेर काम करण्याचा विचार करु, त्यावेळेस आपल्याच मुलांचे भविष्य अंधारात लपलेले असेल. कारण एक आईच चांगले संस्कार मुलांना देऊ शकते चांगले लक्ष देऊ शकते.


मित्रांनो हे कोणी लिहिले माहिती नाही परंतु फार छान आणि महिलांच्या त्यागाची दखल घेणारे आहे त्यामुळे आपणाशी शेअर केलं. याचा अर्थ असा नाही की पुरुषाच्या संसारामध्ये काहीच त्याग नाही पुरुषाचाही त्याग असतो परंतु त्याचा त्याग दिसून येतो परंतु महिलांच्या त्यागाची बऱ्याच पुरुषप्रधान संस्कृतीमध्ये बऱ्याचदा किंमत नसते प्रत्येकाच्या संसारामध्ये नवरा आणि बायको दोघांचीही भूमिका महत्त्वाची असते परंतु बायकोच्या भूमिकेकडे लक्ष दिले जात नाही त्यामुळे खास आपणासाठी टाकले आहे कृपया।

Thursday, 10 April 2025

अपने पति का घर स्वर्ग बना दे।

 दोस्तों सुंदर पत्नी ,के चक्कर में आज के युवा अपनी आधी उमर तो निकाल देते हैं इसी की तलाश में बिना ये जाने की लड़की वास्तव मे कैसी है जो उसे वा उसके पुरे परिवार को लेके आगे चल सके आज की कहानी भी इसी पर है आपको पसंद आएगी आप भी अपने विचार लिख सकते हैं 

अभय लेडीज शोरूम पर काम किया करता था वहां सुंदर से सुंदर लड़कियां और महिलाएं कपड़े खरीदने आया करती थी।

अभय जब खूबसूरत महिलाओं को देखता तो उसे भी लगता मैं भी एक खूबसूरत लड़की से शादी करूंगा जब मैं उसके साथ बाजार शादी या पार्टी में निकलूंगा तो लोग देखते ही रह जाएंगे और सब लोग यही कहेंगे वाह अभय ने क्या अच्छी किस्मत पाई है।

रोज की तरह अभय आज भी शाम को घर लौटा मां ने एक लड़की का फोटो दिखाते हुए कहा अभय तेरे लिए लड़की देखी है ,पसंद कर ले,

अभय ने फोटो में देखा सिंपल सी एक पतली दुबली लड़की सांवले रंग की।


अभय ने फोटो टेबल पर गुस्से से पटकते हुए मां से कहा यह तो जरा सी भी सुंदर नहीं है हमारे शोरूम में तो एक से एक सुंदर लड़कियां आती हैं 

मैं नहीं करूंगा ,,इस लड़की से शादी,, इतना कहकर अभय अपने कमरे में चला गया। अभय ने ठान लिया मैं शादी नहीं करूंगा उस सांवली लड़की से चाहें मुझे घर से भाग जाना क्यों ना पड़े

मां पीछे-पीछे अभय के कमरे तक आई और खूब समझाया घर के सभी सदस्यों ने समझाते हुए कहा,, अच्छी लड़की है,, पढ़ी लिखी है,, घर के कामकाज भी खूब कर लेती है ।

अभय गुस्से से कमरे से निकलकर छत पर आ पहुंचा बिना कुछ खाए पिए ही रात भर छत पर पड़े एक टूटे पलंग पर लेटा रहा। जैसे तैसे सुबह हुई अभय दुकान पर जाने के लिए तैयार हो चुका था आज उसका नाश्ते में कुछ भी खाने का मन नहीं कर रहा था।


अभय अपने शोरूम पर जाने के लिए हमेशा पैदल पथ का ही सहारा लेता था वह रास्ते में आने जाने वाली लड़कियों को देखता हुआ आगे बढ़ रहा था उसे राह में जो भी खूबसूरत लड़की दिखती उसे लगता इससे मेरी शादी होनी चाहिए, अचानक उसका पैर पैदल पथ पर पड़े केले के छिलके से फिसल गया और वह पास पड़े कचरे के डिब्बे के ऊपर गिरा धड़ाम ।

वही एक ब्यूटी पार्लर की शॉप थी उसमें से एक औरत बाहर निकली तुरंत अभय को उठाया अपने ब्यूटी पार्लर के भीतर ले जाते हुए कहा ,,ज्यादा चोट तो नहीं लगी भैया,,

अंदर एक गद्देदार ऊंची कुर्सी पर बैठा दिया।

   ,इतने में जींस और टीशर्ट पहने हुए एक महिला ब्यूटी पार्लर के भीतर आई सामने पड़ी दूसरी खाली कुर्सी पर बैठ गई।

अभय उस सांवली सी महिला को देखने लगा ।एक धागे की मदद से उसकी आइब्रो बना दी उसकी आंखें खूबसूरत लगने लगी बालों पर प्रेस करके बालों की चमक और बढ़ गई, चेहरे पर ब्लीच फेशियल और ना जाने क्या-क्या क्रीम लगाने के बाद

उस महिला की खूबसूरती में चार चांद लग गए

 अभय इस कलाकारी को देखकर दंग रह गया अभय समझ चुका था दुनिया की सभी दिखने वाली सुंदर लड़कियां और महिलाएं सिर्फ एक दिखावा है।

सब ईश्वर की संतान है हमें काले गोरे का भेद नहीं रखना चाहिए जिसका मन सुंदर है वहां जिस्म का कोई मोल नहीं रहता

देश को और समाज को एक अच्छे गुणों वाली पत्नियों की तलाश है।


जो अपने पति का घर स्वर्ग बना दे।

मां ने मुझे कल जिस लड़की का फोटो दिखाया था

वह लड़की ब्यूटी पार्लर जाकर खुद को सज संवर कर भी फोटो खिंचवा सकती थी। पर उसने ऐसा नहीं किया,,

वह जैसी है खुद को वैसे ही रखना चाहती है। यही उसकी खूबसूरती का खजाना है,,

अभय ने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निकाला और अपनी मां को फोन पर बताया ।

    ,मुझे वही लड़की पसंद है,, जिसे मैं कल कह रहा था ,, ना ,, ना ,, ना,,,,❤️❤️

Monday, 7 April 2025

पत्रकार को लगा यह स्त्री इंटरव्यू के बीच में से उठ जाएगी लेकिन स्त्री ने एक क्षण रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी ।

 वह अजीब स्त्री. लोग बताते हैं कि जवानी में वह बहुत सुन्दर स्त्री थी। हर कोई पा लेने की जिद के साथ उसके पीछे लगा था। लेकिन शादी उसने एक बहुत साधारण इंसान से की जिसका ना धर्म मेल खाता था, ना कल्चर, वह सुन्दर भी खास नहीं था और कमाता भी खास नहीं था। बहुत बड़े, रसूखदार और अच्छी पोजीशन वाले अनगिनत रिश्ते उसके पास आये, अनगिनत प्रेम निवेदन उसके पास आये लेकिन उसने जिसे जीवन साथी चुना वह इन सबमें कमतर था


लोग उस स्त्री के बारे में सुनते, सामाजिकता में पगे, रटे-रटाये वाक्य दोहरा देते, जैसे कि "बहुत सुन्दर स्त्री की अक्ल घुटने में होती है", "नखरे निकल जाने के बाद ऐसे ही मिलते हैं", "ज्यादा भाव खाने वालो को कोई भाव नहीं देता"आदि।


उस स्त्री को ऐसे किसी बीज वाक्य से सरोकार नहीं था, वह अपनी पसंद के जीवन साथी के साथ खुश थी, सुखी थी।


उसकी कहानी एक पत्रकार ने सुनी, उसे उसकी कहानी में कई रंग नजर आये। वह उस स्त्री के पास गया। पत्रकार उसकी सुंदरता देखकर दंग था। आज भी वह बेहद सुन्दर और जहीन थी।


पत्रकार ने विनम्रता से उस स्त्री को साक्षात्कार के लिए निवेदन किया। स्त्री जोर से ठहाका लगाकर हंसी, बोली "मेरा इंटरव्यू पूरा करने से पहले या तो तुम बीच में भाग जाओगे, या फिर अपनी पारम्परिक सोच को मिक्स करके अपनी ही कहानी शुरू कर दोगे, इसलिए मैं कोई इंटरव्यू देने की इच्छुक नहीं हूँ। आप चाय पीजिये, रुखसत लीजिये।"


पत्रकार के जीवन का ऐसा पहला वाकया था जब एक ही वाक्य में उसका खुद का इंटरव्यू हो लिया था। वह सम्भला और जैसे तैसे उसने इंटरव्यू के लिए उस जहीन स्त्री को राजी कर लिया ।


पत्रकार ने पूछा, "आप बेहद सुंदर हैं, बहुत स्त्रियों को आपकी सुंदरता पर रश्क होता है। आप इसे कैसे लेती हैं।"


स्त्री ने पत्रकार को देखे बिना बाल झटकते हुए जवाब दिया, "बकवास सवाल, मेरे सुंदर होने में मेरा कोई योगदान नही, कुदरत ने मुझे दिया, इसे मेरी उपलब्धि ना कहें। अगर मैं इतराती हूँ तो मेरा इतराना गैर वाजिब है। दैहिक सुंदरता पूर्ण सुंदर होना नही।"


पत्रकार असहज हुआ, दूसरा सवाल किया,


"आप ने कभी कोई सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग क्यो नही लिया। आप विश्व की कोई भी प्रतियोगिता जीत सकती थी।'


स्त्री ने इस बार पत्रकार की नजरों में नजरें डाल दी। पत्रकार उसके तेज का सामना नही कर पाया, उसने नजरें झुका ली। 

स्त्री बोली- "सुंदरता में प्रतियोगिता कैसी। सब अपने अपने हिसाब से सुंदर हैं। गोरी चमड़ी सुंदर क्यो है। बहती नदी को देखिए कभी। जहाँ जहाँ वह गहरी है वहाँ वहाँ सांवली हो जाती है। किसी से सुंदरता की प्रतियोगिता जीत कर आप सुंदरता के मानदण्ड स्थापित करना चाहते हैं? सुंदर लोग आपने देखे नही। मेरी झुर्रियों वाली दादी मेरी नजर में सबसे सुंदर महिला है, आपकी माँ आपकी नजर में सबसे सुंदर हो सकती है। आपकी अपनी पत्नी अपने पिता की नजर में सबसे सुंदर होगी। आपकी बहन किसी को दुनिया की सर्वश्रेस्ठ सुन्दरी लग सकती है। गुलाब सुंदर या चमेली ये वाहियात प्रतियोगिता है। आगे पूछिये।"


"जी,

आप के संबंध बडे औऱ रसूखदार लोगों से रहे, फ़िल्म के हीरो भी लट्टू थे आप पर, ऐसा सुना है, फिर शादी आपने एक बहुत ही साधारण इंसान से की। साधारण मतलब लो प्रोफाइल, वैसे तो आपने चुना है तो असाधारण भी हो सकते हैं। क्या कहेंगी आप।"


"देखिये पत्रकार महोदय, मैं इंटरव्यू इसलिए नही देती क्योंकि आपके तथाकथित सभ्य समाज मे मैं किसी का आदर्श नही हूँ। स्त्रियां मुझे फॉलो नही कर सकती। उनकी सामाजिक स्थिति ऐसी नही है कि वे खुद पर प्रयोग कर सकें। मैंने खुद पर प्रयोग किये और सुंदर, रसूखदार लोगो से मोहभंग होने के बाद मैंने एक असाधारण पुरूष जिसे आप साधारण कहते हैं को अपना जीवन साथी बनाया। मेरी कहानी किसी के काम नही आएगी इसलिए मैं अपनी कहानी जीना चाहती हूं, बांटना नही। "


स्त्री के सहज चेहरे पर वितृष्णा फैलने लगी। वह खामोश हो गई। उसने पत्रकार को चाय दी औऱ ख़ुद भी चाय के घूँट भीतर उतारने लगी।


पत्रकार को लगा यह स्त्री इंटरव्यू के बीच में से उठ जाएगी लेकिन स्त्री ने एक क्षण रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी । पत्रकार चुपचाप उस अजीब स्त्री को देखता रहा, चाय के एक-एक घूँट के साथ उसकी वितृष्णा कम होती गयी। जल्द सहज होते हुए वह बोली, "सॉरी", फिर उसने एक अजीब सी स्माइल दी।


"जिन लोगो को आप रसूखदार कह रहे हैं दरअसल वे रसूखदार नही होते। ये रसूखदार आदमी तमाम सृष्टि का उपभोग कर लेने की वृत्ति के साथ ऊपर तक भरे हैं। उन्हे जिंदगी में सब संगमरमर का चाहिए खुद वे बेशक उबड़ खाबड़ खुरदुरा पत्थर हों। 

आप हैरान होंगे कि तमाम रसूखदार लोगो की चाह मैं नही थी। मेरा जिस्म थी। मुझे पुरुष की वृत्ती मालूम थी। पुरुष ने जिस्म मांगा, मैंने दिया, मैंने वही तो दिया जो उसने मांगा। लेकिन जिस्म भोगने के बाद मैं चरित्रहीन थी, वह चरित्रवान।

मुझे पुरूष की रमझ समझ आ गयी थी। मुझे याद नही कि कितने पुरूष थे । लेकिन जितने थे सब मेरी देह से प्रेम करने वाले थे, और सब ही मुझे चरित्र का प्रमाण पत्र देकर गए। मुझे हैरानी हुई कि किसी को मैं देह और चरित्र से आगे नजर ही नही आई। मैंने एक अंग्रेजी फ़िल्म देखी जिसका एक संवाद मेरे जेहन में अटका रहा कि प्रेम के वहम में ज्यादा दिन अटके मत रहो। पहले सेक्स करो फिर प्रेम। मुझे हैरानी हुई कि कि प्रेम के लंबे चौड़े दावे करने वाले पुरूष सेक्स के बाद भागते नजर आए। वे मुझे अफ़्फोर्ड नही कर सकते थे शायद, अमीर थे जबकि। अफ़्फोर्ड करना समझते हैं ना आप। स्त्री को अफ़्फोर्ड करना हर पुरूष के वश का नही। तमाम पुरुषो के घर मे जो स्त्री है ना वह स्त्री नहीं है, स्त्री की चलती फिरती लाश हैं। जिंदा स्त्री अफ़्फोर्ड करना इस मुल्क के पुरूषों के लिए लगभग असंभव है।पति का तो अर्थ ही मालिक है। मालिक या तो गुलाम रखते है या वस्तुएं। पुरुष क्या ये मुल्क ही जिंदा स्त्री को अफ़्फोर्ड नही कर सकता। पूरे मुल्क की चेतना में ही पितृसत्ता भरी है।"


पत्रकार ने रीढ़ सीधी कर ली।


वह आगे बोली, "एक दिन एक असाधारण पुरूष मेरी जिंदगी में आया। जब एक रसूखदार पुरूष मुझे अचेतन अवस्था में अपनी बड़ी सी गाड़ी से फेंक कर जाता रहा। 

वह असाधारण पुरुष मुझे नहीं जानता था, मेरा जिस्म लहूलुहान था, उसने मुझे उठाया और हॉस्पिटल की ओर दौड़ पड़ा। मेरा मेडिकल हुआ जिसमें रेप की पुष्टि हुई, मेरे चेतना में आने तक वह पुलिस यातना झेल चुका था, उसका बचना मेरे बयान पर टिका था। मैं चेतना में जब आयी तो देखा कि मेरा पूरा जिस्म पट्टियों में जकड़ा है। मुझे बताया गया कि पुलिस ने उसे ही उठा लिया है जो मुझे गोद मे उठाकर यहां लाया, अपनी रिंग और गले की चेन डॉक्टर के पास रख गया कि मैं नही लौटूँ तो इसे बेचकर बिल चुका देना। उसी रिंग और चेन से पुलिस का शक और गहरा हुआ कि यह इन्वॉल्व हो सकता है।


मैंने किसी के खिलाफ शिकायत नही लिखवाई। वह असाधारण पुरूष लौट आया, उसने मुझे देखा, मैं तो टूटी-फूटी पट्टियों में बंधी थी। लेकिन उस पुरूष का वह देखना अद्भुत था। हजारो खा जाने वाली नजरो से अलग कोई नजर थी जो भीतर तक उतरती चली गयी। उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा, उसका स्पर्श अद्भुत था, वह पुलिस थाने से लौटा था लेकिन उसने अपनी व्यथा नही गाई, वह धीरे से बोल पाया, ठीक हो?। मेरी आँखें स्वतः बन्द हो गयी। कोई भी संवाद इतना मर्मान्तक नही था आजतक जितना कि ये। मेरी आंख से आंसू टपक पड़ा। मैं भी होले से कह पाई , ठीक हूँ । शुक्रिया मुझे बचाने के लिए।


उसने अपनी उंगली के पोर से मेरी आँख का आँसू उठाया औऱ आसमान में उड़ा दिया। मेरे होते मन नही भरना, मैं हूं ना। आजतक इतना बड़ा आश्वासन भी कभी नही मिला था कि मैं हूँ। मन छोटा नही करना। 

उसने मुझे सहारा देकर लिटाया, पूछा, आपके घर मेसेज कर दूं , आपका कोई पता नही मिला हमे। मैंने कहा मेरे घर कोई नही है, मैं अकेली हूँ। जबकि सब हैं लेकिन मेरी प्रयोग धर्मिता से डरे हुए। मैं उन्हें इत्तलाह नही करना चाहती थी। वह असाधारण पुरुष बोला, मेरे घर मेरी छोटी बहन है। आप मेरे घर चलना स्वास्थ्य लाभ के लिए।


मैंने पूछा उससे,मेरी मेडिकल रिपोर्ट पढ़ी आपने। वह थोड़ा रुंआसा हुआ, बोला हां पढ़ी, आपने उन्हें छोड़ क्यो दिया, रिपोर्ट करते उनके खिलाफ। 

मुझे दर्द था तेज, मैंने कहा। मैं निबट लूँगी उनसे ।


उस पुरूष ने अगला सवाल नही किया। बोला आराम कीजिये। ठीक हो जाइए पहले फिर निबट लेना। मुझे लगा यह मध्यम वर्गीय परिवार का साधारण पुरूष चरित्र प्रमाण पत्र दे ना दे लेकिन जेहन मे जरूर तैयार कर लिया होगा। बडी सोसाइटी भी जब वहीँ अटकी है तो यहां तो चरित्र बडा फसाद होगा। हॉस्पिटल का बिल मैं भर सकती थी लेकिन मैंने नही भरा। उसकी रिंग और चेन बिक गईं । वह मुझे अपने घर लिवा लाया। एक साफ सुथरा साधारण घर था वह। करीने से सजे घर मे मेरी नजर एक बड़ी अलमारी पर पड़ी जिसमे अनेकों किताबें थी। पता चला कि वह साधारण पुरूष दरअसल साधरण नही हैं। उसकी अलमारी में एक से एक बेहतरीन किताब रखी थी। मालूम हुआ वह नास्तिक है। आज तक जितने पुरूष मिले वे सब आस्तिक थे। कोई गले में लॉकेट डाले था कोई उंगली में नग पहने कोई माथे पर तिलक लगाए। इस मे जो था सब अपना था, दिखावा नही था रत्ती भर भी। उसने मेरे आराम का प्रबंध किया। मेरे पास बैठा रहा घण्टो। मेरी पसंद की उसके पास बहुत किताबें थी लेकिन अद्भुत यह था कि उसकी अलमारी मे वह किताब भी थी जिस पर बनी फ़िल्म मेरे जेहन में थी। उस किताब में उसने कुछ वाक्य अंडरलाइन किये हुए थे कि स्त्री प्रेम पाने के लिए सेक्स करती है पुरूष सेक्स पाने के लिए प्रेम लुटाता है। मेरी पूरी जिंदगी इसी एक वाक्य में बंधी थी। 

एक दूसरा वाक्य जो मेरे जेहन में अटका था कि प्रेम के भरम में अटके मत रहो, पहले सेक्स करो फिर प्रेम करो। पढ़ने वाले ने उस वाक्य के नीचे लिख दिया था कि ऐसी स्त्री इस मुल्क में नही मिलती लेखक महोदय। मुझे हंसी आ गयी। मैं हूं ना, मैंने खुद को आईने में देखा। मैं तो बची ही नही थी, जिस देह को मैं मैं समझती थी वह तो जगह जगह से चोटिल थी लेकिन भीतर जो कोई और आकार ले रहा था वह मैं थी। मेरा पुनर्जन्म हो रहा था। मैं अब सिर्फ उस पुरूष को पढ़ती। एक साल मैं उसके घर रही। एक साल उसने मेरी देह को नही छुआ। हाथ पकड़ कर बहुत बार उसने चूमा, माथा चूमा लेकिन वह एक आत्मीय स्पर्श था।


एक दिन मैंने उसकी रिंग और गले की चैन उसे लौटा दी। वह हैरान हुआ लेकिन मैंने उसे बता दिया कि इसे बिकने नही दे सकती थी। अपने पास रखना चाहती थी सहेज कर। कि जब भी महंगे गहने पहनने होंगे तो इन्हे पहनूँगी। बिल के पैसे देकर जाती लेकिन इस गहने से बड़ा गहना मुझे मिल गया है तो यह गहना लौटा रही हूं । उसे मैंने मेरा इतिहास बताया, मेरे अफेयर बताये। बताया कि मैं देह के तमाम प्रयोग करके आज जहां अटकी हूँ वहाँ देह कहीं है ही नही । वह वो किताब उठाकर लाया। उसने अपने हाथ से लिखी एक और पंक्ति दिखाई कि ऐसी कोई स्त्री मिली तो मैं उसके समक्ष विवाह प्रस्ताव अवश्य रखूँगा। उसने पूछा मुझसे। शादी करोगी? उसके पास लिव इन का ऑप्शन भी था। एक साल में पास पड़ोस कितनी बातें करता था लेकिन उसने कभी कान नही धरा। वह परम्परावादी आधुनिक इन्सान था। जो अब तक मिले वे आधुनिकता के छदम भेष में परंपरा वादी थे, जो लिव इन मे रहना चाहते थे ।अनगिनत प्रस्तावों के बाद यह प्रस्ताव मुझे भीतर तक भिगो गया। सच मे, एक असाधारण आदमी साधारण भेष में ढका था। मैं किस्मत वाली रही कि वह मुझे मिल गया।


स्त्री के चेहरे पर गहरा संतोष पसर आया था। कोई अलौकिक तेज उसके चेहरे पर दीप्त होने लगा था। पत्रकार ने आज उस अजीब स्त्री में स्त्री घमासान के नए पक्ष चिन्हित किये।

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हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...