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Sunday, 3 November 2024

पिता के बाद पति ही होते हैं जो पत्नियों के लिए हमेशा अमीर होते है ❤️

 एक विवाहित स्त्री जो आपको आकर्षक और सुंदर लगती हैं 😊


याद रखिए कि उसकी सुंदरता भले ही जन्मजात हो लेकिन उस सौंदर्य को बरकरार रखने में एक पुरूष का प्रेम और समर्पण होता है...


 पुरूष जो खुद भूल जाते है कई बार शेव करवाना हेयर कट...


याद रखते हैं त्यौहारों पर स्त्री के लिए की उसे कुछ चाहिए तो नहीं नई साड़ी, चूड़ियां, श्रृंगार...


 वो एडजस्ट कर लेते हैं अपने लिए पर सदैव ये चाहते हैं कि उनकी पत्नी जब घर परिवार के साथ खड़ी हो तो लोगों को उनकी किस्मत पर रश्क हो...


 गौर से देखिएगा कभी उन स्त्रियों का चेहरा जिनके विवाह सफल नहीं हुए या पति जल्दी चले गए ..


आपको एहमियत समझ में आ जाएगी एक स्त्री के जीवन में पुरूष के क्या मायने हैं 😊


शारीरिक रूप से स्त्री एक नहीं हजारों पुरुषों की प्रेमिका हो सकती हैं लेकिन..


 उसे सर का ताज गृह लक्ष्मी अपना मान ये हर कोई नहीं बना सकता है उसे मानसिक रूप से हर पुरूष नही संभाल सकता है...


 भले वो परिवार की धुरी है पर उसे भी एक समतल स्थान चाहिए स्वछंद होकर घूमने के लिए 😊


याद रखिए जब आप कहते है कि एक विवाहिता की उम्र देख कर नहीं लगता कि वो शादीशुदा है या बच्चों की मां है तो उसमें सबसे बड़ा योगदान उस पुरूष का होता है जो किसी की घर की राजकुमारी को अपने घर की रानी बनाकर रखता है...


 पिता के बाद पति ही होते हैं जो पत्नियों के लिए हमेशा अमीर होते है ❤️ 🧿🧿🧿

Wednesday, 30 October 2024

जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।

 एक दिन, एक कंपनी में साक्षात्कार के दौरान, बॉस, जिसका नाम अनिल था, ने सामने बैठी महिला, सीमा से पूछा, "आप इस नौकरी के लिए कितनी तनख्वाह की उम्मीद करती हैं?"


सीमा ने बिना किसी झिझक के आत्मविश्वास से कहा, "कम से कम 90,000 रुपये।"


अनिल ने उसकी ओर देखा और आगे पूछा, "आपको किसी खेल में दिलचस्पी है?"


सीमा ने जवाब दिया, "जी, मुझे शतरंज खेलना पसंद है।"


अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा, "शतरंज बहुत ही दिलचस्प खेल है। चलिए, इस बारे में बात करते हैं। आपको शतरंज का कौन सा मोहरा सबसे ज्यादा पसंद है? या आप किस मोहरे से सबसे अधिक प्रभावित हैं?"


सीमा ने मुस्कुराते हुए कहा, "वज़ीर।"


अनिल ने उत्सुकता से पूछा, "क्यों? जबकि मुझे लगता है कि घोड़े की चाल सबसे अनोखी होती है।"


सीमा ने गंभीरता से जवाब दिया, "वास्तव में घोड़े की चाल दिलचस्प होती है, लेकिन वज़ीर में वो सभी गुण होते हैं जो बाकी मोहरों में अलग-अलग रूप से पाए जाते हैं। वह कभी मोहरे की तरह एक कदम बढ़ाकर राजा को बचाता है, तो कभी तिरछा चलकर हैरान करता है, और कभी ढाल बनकर राजा की रक्षा करता है।"


अनिल ने उसकी समझ से प्रभावित होते हुए पूछा, "बहुत दिलचस्प! लेकिन राजा के बारे में आपकी क्या राय है?"


सीमा ने तुरंत जवाब दिया, "सर, मैं राजा को शतरंज के खेल में सबसे कमजोर मानती हूँ। वह खुद को बचाने के लिए केवल एक ही कदम उठा सकता है, जबकि वज़ीर उसकी हर दिशा से रक्षा कर सकता है।"


अनिल सीमा के जवाब से प्रभावित हुआ और बोला, "बहुत शानदार! बेहतरीन जवाब। अब ये बताइए कि आप खुद को इनमें से किस मोहरे की तरह मानती हैं?"


सीमा ने बिना किसी देर के जवाब दिया, "राजा।"


अनिल थोड़ी हैरानी में पड़ गया और बोला, "लेकिन आपने तो राजा को कमजोर और सीमित बताया है, जो हमेशा वज़ीर की मदद का इंतजार करता है। फिर आप क्यों खुद को राजा मानती हैं?"


सीमा ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, "जी हाँ, मैं राजा हूँ और मेरा वज़ीर मेरा पति था। वह हमेशा मेरी रक्षा मुझसे बढ़कर करता था, हर मुश्किल में मेरा साथ देता था, लेकिन अब वह इस दुनिया में नहीं है।"


अनिल को यह सुनकर थोड़ा धक्का लगा, और उसने गंभीरता से पूछा, "तो आप यह नौकरी क्यों करना चाहती हैं?"


सीमा की आवाज भर्राई, उसकी आँखें नम हो गईं। उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, "क्योंकि मेरा वज़ीर अब इस दुनिया में नहीं रहा। अब मुझे खुद वज़ीर बनकर अपने बच्चों और अपने जीवन की जिम्मेदारी उठानी है।"


यह सुनकर कमरे में एक गहरी खामोशी छा गई। अनिल ने तालियाँ बजाते हुए कहा, "बहुत बढ़िया, सीमा। आप एक सशक्त महिला हैं।"


शिक्षा और सशक्तिकरण का महत्व:


यह कहानी उन सभी बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो जिंदगी में किसी भी तरह की मुश्किलों का सामना कर सकती हैं। बेटियों को अच्छी शिक्षा और परवरिश देना बेहद जरूरी है, ताकि अगर कभी उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो वे खुद वज़ीर बनकर अपने और अपने परिवार के लिए एक मजबूत ढाल बन सकें।

किसी विद्वान ने कहा है, "एक बेहतरीन पत्नी वह होती है जो अपने पति की मौजूदगी में एक आदर्श औरत हो, और पति की गैरमौजूदगी में वह मर्द की तरह परिवार का बोझ उठा सके।"

यह कहानी अरविन्द वर्मा हमें सिखाती है कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, अगर आत्मविश्वास और समझदारी हो, तो कोई भी मुश्किल हालात को पार किया जा सकता है।

Monday, 28 October 2024

रिश्ते में सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उन्हें पूरा करना भी जरूरी होता है।

 जब एक औरत की शारीरिक जरूरत उसका पति पूरा नहीं कर पाता तो अक्सर औरत ऐसा ही करती है 

रीमा ने एक दिन अपने पति अशोक से सीधे शब्दों में सवाल किया, "क्या तुम्हें लगता है कि हमारी शादी में वो जुनून अब भी है?" अशोक कुछ देर चुप रहा, जैसे उसे समझ ही नहीं आया कि आखिर रीमा ऐसा सवाल क्यों पूछ रही है। उसने हल्की हंसी के साथ जवाब दिया, "हम तो एक खुशहाल दंपती हैं, ऐसा क्या कमी महसूस होती है तुम्हें?" लेकिन रीमा की आँखों में जो खलिश थी, वो शायद अशोक समझ नहीं पा रहा था।


💔 रीमा की उलझन: शादी के आठ साल बाद भी रीमा को अपने रिश्ते में वो अपनापन और उत्साह महसूस नहीं हो रहा था। अशोक एक अच्छा इंसान था, लेकिन उसने कभी रीमा की भावनाओं और उसकी गहरी इच्छाओं को समझने की कोशिश नहीं की थी। उसकी सारी प्राथमिकताएं काम और परिवार की जिम्मेदारियों में समाई हुई थीं। रीमा अक्सर महसूस करती कि उनका रिश्ता एक रूटीन बनकर रह गया है, जिसमें रोमांच और वो खास जुड़ाव कहीं खो गए हैं।


🌹 अपनी सहेली से सलाह: अपनी उलझन को दूर करने के लिए रीमा ने अपनी करीबी सहेली सोनल से बात की। सोनल ने उसे एक महत्वपूर्ण सलाह दी, "तुम्हें अशोक से इस बारे में खुलकर बात करनी चाहिए। बहुत बार मर्द अपनी पत्नी की ख्वाहिशों को तभी समझ पाते हैं जब वो सीधा बताती हैं।" सोनल ने रीमा को समझाया कि उसे अपनी भावनाएं स्पष्ट शब्दों में अशोक के सामने रखनी चाहिए।


🌌 अशोक के साथ संवाद: रीमा ने एक शांत शाम को अशोक के साथ बैठकर अपनी भावनाओं के बारे में बात की। उसने बताया कि वो सिर्फ एक जीवन साथी नहीं, बल्कि एक ऐसा साथी भी चाहती है जो उसकी भावनाओं, इच्छाओं और ख्वाहिशों को समझ सके। उसने अशोक से कहा कि उसे सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि ऐसा जुड़ाव चाहिए जो उनकी शादीशुदा जिंदगी को और मजबूत बना सके।


💫 अशोक की जागरूकता: रीमा की बातों ने अशोक को सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने महसूस किया कि उसने कभी अपने रिश्ते में उस गहराई को नहीं देखा, जिसकी रीमा को जरूरत थी। उसने अपने रिश्ते को एक नई ऊर्जा देने का वादा किया। उसने तय किया कि वो सिर्फ एक पति नहीं, बल्कि रीमा का ऐसा साथी बनेगा जो उसकी भावनाओं को भी समझे।


💖 नई शुरुआत: धीरे-धीरे अशोक और रीमा के बीच की दूरियां मिटने लगीं, और उनका रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गया। अशोक ने महसूस किया कि रीमा की इच्छाओं को समझने और उसे संतुष्ट करने से उनकी शादी में वो पुरानी गर्मजोशी लौट आई है। अब रीमा भी पहले से ज्यादा खुश और संतुष्ट महसूस करने लगी थी।


सीख: रिश्ते में सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और उन्हें पूरा करना भी जरूरी होता है। सच्चा प्यार और संतोष तभी संभव है जब दोनों अपने दिल की बातें खुलकर साझा करें और अपने रिश्ते को संजीवनी देने की कोशिश करें।

Sunday, 20 October 2024

आपकी एक छोटी सी पहल समाज को एक कुरीति से बचाएगी…

 विवाह भोज या निकाह की पार्टी : विचार करना 

कल एक जैन परिवार की शादी में ,प्रीतिभोज में जाना हुआ , स्वागत गेट में गुलाब के फूल ,मैंगो शेक,ड्राइफूट के साथ स्वागत हुआ अंदर मैदान में अद्भुत नजारा था। आर्केस्ट्रा की स्वर लहरी चारो तरफ गुंजायमान थी ।

इवेंट मैनेजमेंट का फंडा चारो तरफ बिखरा हुआ दिख रहा है। दूल्हा और दुल्हन को गेट से ही मंच तक लेकर जाने की अदभुत तैय्यारी भी रथ व नाचने गाने वालो को पूरी टीम तैयार थी जो वर वधु को लेकर बीच मैदान में ले जाकर वरमाला करवाकर स्टेज में ले गया ।


हम सब तो थके मांदे भूख से व्याकुल लोग थे जो पहुंच गए स्टार्टर की ओर पर उसी बीच एक दूसरे और तेज हो हल्ला सुनाई देने लगी, मैं भी गुपचुप का दोना रख उस और हो लिया।


वहा तो अलग ही नजारा था। चक सफेद धोती कुर्ता और कंधे में क्रीम कलर का साफी डाले लगभग 65 साल का बुजुर्ग पर उनका आवाज युवाओं से भी तेज ,लड़की वाले व केट्ररर्स को चमका रहा था और बार बार कह रहा था हम सब खाना नही खायेगे,या तो आप ये मेनू की जो सूची लिखे बोर्ड है उसे फेके या फिर भोजन को फेके ? हम सब ये खाना नही खायेगे ।

हम शादी में आए है निकाह में नहीं।


मेरी भी नजर अचानक खाने के स्टाल पर पड़ी ,जहा लिखा था #वेज_बिरयानी_हरा_भरा_कबाब_वेज_कोरमा_कबाब_वेज_हांडी_बिरयानी,।


बुजुर्ग तमतमाया हुआ था, बात बात में कहता था बिरयानी व कबाब किसे कहते है, मुझे समझाओ फिर ही हम सब भोजन करेगे और अपने इस बहस में मुझे भी शामिल कर लिया की बताइए भाईजी क्या ऐसा लिखना उचित है।

मांस के उपयोग से बने भोजन को ही बिरयानी व कबाब कहते है ,क्या हमे इस जगह पर ऐसे हालात में भोजन करना चाहिए ।मेरे और अनायास दादा के प्रश्न पर मैं भी कुछ बोल नहीं पा रहा था।


एक तरफ केट्ररर्स की गलती ,समाज में चल रहे अंधाधुन पश्चात्य संस्कृति के ढल रहे लोग,और दूसरी ओर हाथ जोड़े अनुनय करते खड़े लड़की के परिवार वाले? और सबके बीच धर्म, संस्कृति व भोजन के तरीके पर अड़े दादाजी,जो अपनी जगह बिल्कुल सही थे अब उनके स्वर और तीखे हो गए कहने लगे बताओ मैं विवाह में आया हूं की निकाह में ?


बाते बढ़ते देख मैंने व वहाँ पर खड़े दो तीन मित्रो ने मिलकर केटरर्स को चिल्लाकर स्टाल से सारे स्टीगर निकाल फेके जिसमे बिरयानी व कबाब जैसे शब्द लिखे थे, तब दादाजी का गुस्सा शांत हुआ और फिर उन्होंने भोजन ग्रहण करने की हामी भरी वो भी बैठकर, ।


दादा जी की बाते वहा पर उपस्थित सभी लोगो को एक सीख दे गई की मांसाहारी भोजन के लिए ही कबाब व बिरयानी जैसे शब्द प्रयोग किया जाता है ।और खाना नही हमे भोजन करना चाहिए । केटरर्स जो भी लिखे उसे हमे भी एक बार मेन्यू तय करते समय अपनी समाज एवम संस्कृति के हिसाब से देख भी लेना चाहिए।ज़्यादातर लोग बिना जानकारी के ही कर लेते हैं हम सब यदि सोच समझकर इस दिशा में आगे बढ़ेंगे तो बदलाव लाया जा सकता है…

~~~

*बिरयानी का मतलब होता है सब्ज़ियों एंव मांस का मिश्रण 

*कवाब एक फ़ारसी शब्द है जिसका मतलब होता है पका हुआ मांस 

*कोरमा मतलब भुना हुआ मांस

अब आप खुद सोचें भारतीय व्यंजन के नाम के साथ इनको जोड़ना ठीक है…?जब नाम ये होगा तो हम किस मानसिकता का खाना खाते हैं…

विरोध करिये अभी तो हमारी पकड़ में है नहीं तो वास्तव में निकाह में ही जाओगे और मांसाहारी खाना खाओगे…नई पीढ़ी वेज भूल जाएगी और मांसाहारी बन जाएगी क्यूँकि हम यही तो दे रहे हैं…?

कैटर्स को रोकिये ये नाम देने के लिये…होटल व रेस्टोरेंट में विरोध प्रकट कीजिए…

आपकी एक छोटी सी पहल समाज को एक कुरीति से बचाएगी…

आप भी करिये, मैं भी करता हूँ।

साभार

Saturday, 19 October 2024

आज मुझे आप पर गर्व है

 मिडिल क्लास परिवार में पली बढ़ी खुशबू अपने जिंदगी में सबसे ज्यादा गुस्सा अपने पापा से थी। पापा के लिए उसके मन में नफरत के अलावा कुछ न था। 22 साल की हो चुकी खुशबू ने आज तक एक भी वेलेंटाइन दिन नहीं बनाया था। जबकि उसकी क्लास मेट्स हर साल अलग-अलग लड़को के साथ वेलेंटाइन दिन मनाती थी।

खैर, आज खुशबू आग्नेय से शादी के वक़्त सबसे ज्यादा खुश थी, कि आखिर इस बेहद सख्त, कड़क और अनुशाषित पापा से छुटकारा तो मिला। हमेशा "ये न करो" "वो न करो" "ऐसे कपड़े न पहनों", लेट नाईट पार्टियाँ नहीं, लड़कों से दोस्ती नहीं। आज तक एक स्मार्टफोन तक खरीद कर नहीं दिया ! सारे सपनों और अरमानों को अपने दिमाग की छोटी सोच के कारण कुचलकर रख दिया।


अब मैं आग्नेय के साथ सारी दबी इच्छाएँ पूरी करूँगी। आग्नेय और खुशबू पिछले तीन सालों से एक ही कॉलेज में साथ साथ पढ़ते थे और एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे एक दूसरे की पसंद नापसंद का अच्छे से ख्याल रखते थे। खुशबू ने बहुत डरते डरते पापा से आग्नेय के साथ शादी की इच्छा जताई थी।और पापा ने आग्नेय और उसके परिवार वालों से मिलकर शादी के लिए हामी भर दी।


खुशबू ने विदाई समय पहली बार पापा को उससे लिपटकर बच्चों की तरह फूट फूट कर रोते देखा पर खुशबू को पापा की भावना से कोई मतलब न था वह बस पत्थर की बुत बन खड़ी थी, जाते जाते उसके पापा ने उसे ढ़ेर सारे उपहार के साथ एक बंद लिफाफा भी खुशबू को दिया। ससुराल पहुँचते ही सबसे पहले खुशबू ने लिफाफा खोला। 


उस लिफाफे में पाप की चिट्ठी थी उसने पापा की चिट्ठी को पढ़ना शुरु किया "खुशबू बेटा मैं जानता हूँ कि पिछले दस सालों से मैं तुम्हारे साथ बैड डैड की तरह पेश आता रहा। मैं तुम्हारे सामने सख्त इसलिए बनता था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारा भी हाल रागिनी जैसा हो।रागिनी मेरे साथ कॉलेज में पढ़ने वाली एक बहुत अच्छे घर की पढ़ने में तेज, शरीफ लड़की थी परंतु फैशन और नकली ग्लैमर के चक्कर में उसने अपनी ही ज़िंदगी बर्बाद कर ली थी।


उसने वो सब किया जिससे मैं तुम्हें हमेशा रोकता रहा। फैशनेबल कपड़े, लड़को से दोस्ती, लेट नाईट पार्टियाँ सब करती थी, सोचती थी कि चरित्र अच्छा है तो इन सब में कोई हर्ज नहीं होता है। फिर एक दिन उसके ड्रिंक्स में नशा डालकर उसके कुछ दोस्तों ने उसका नाजायज़ फायदा उठा लिया। इस घटना के बाद से वो अपना दिमागी संतुलन खो बैठी और समाज के तानों और लोगों से बचने के लिए उसके पापा ने उसकी माँ और छोटी बहन के साथ सल्फास खाकर सुसाइड कर लिया।


खुशबू बेटा, आज से तुम अब एक नही बल्कि दो परिवारों की इज़्ज़त हो और मैं तुमसे यही उम्मीद करूँगा कि आगे भी तुम ऐसा कोई काम नही करोगी जिससे दोनों परिवारों की इज़्ज़त पर कोई दाग लगे और हो सके तो अपने इस "बैड डैड" को माफ कर देना। 


चिट्ठी पढ़कर खुशबू फूट-फूट कर रोते हुए तुरंत फ़ोन लगाकर भर्राए आवाज़ में पापा से कहा मुझे माफ़ कर दीजिए पापा ! मैं आपके गुस्से के पीछे के प्यार को नही देख पाई ! आपके चिल्लाहट के पीछे की आपकी परवाह को नहीं देख पाई! आपकी झुंझलाहट के पीछे का समर्पण नही देख पाई ! अब तो मैं हर जन्म में आपकी ही बेटी बनना चाहूँगी पापा ।


वक़्त बीतता चला गया.. खुशबू को ससुराल आए लगभग एक साल होने को आया। मगर ऐसा कोई दिन ना था जिस दिन उसने अपने पापा को याद ना किया हो। आज उसके पापा का जन्मदिन था। सुबह मंदिर गई पूजा की पापा की खुशी और सलामती के लिए दुआएँ माँगी। फिर शाम में केक लाकर अपने ससुराल वालों के साथ उनका जन्मदिन मनाने का प्रोग्राम बनाया।


फिर केक काटने से पहले पापा को वीडियो कॉल लगाया उधर पापा मम्मी के साथ उदास बैठे थे। खुशबू उन्हें देखते ही चहक के बोली "हैप्पी बर्थडे टू यू माई स्वीट पापा ! पता है पापा यहाँ मैं आपकी डाँट, आपके गुस्से को हर दिन मिस करती हूँ। यहाँ सारे लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं स्पेशली सासू माँ ! 


पता है पापा एक दिन घर में मुहल्ले की औरतों सासु माँ को जब ये बोल रहीँ थीं कि कितनी अच्छी बहु मिली है तुम्हे। कपड़ो, बोली और स्वभाव में शालीनता जरूर इसके मम्मी पापा से विरासत में मिले है। आज कल की लड़कियों में इतने संस्कार अब कहाँ मिलते हैं। आपके लिए ये शब्द सुनकर पापा मेरा सर फक्र से ऊँचा हो गया।


आज मुझे आप पर गर्व है पापा ! आप माँ को हमेशा बोलते थे कि सारी दुनिया को तो सुधार नही सकते बस अपना दामन बचा के रखना होगा। जानती हूँ पापा और महसूस भी किया है मैंने कि आजकल लड़कियों के लिए बॉयफ्रेंड बनाना, ड्रिंक्स करना, लिव इन रिलेशन रहना और ट्रांसपेरेंट ड्रेस पहनना फैशन सा है पर आपने एक सुरक्षा कवच बनकर मुझे इन बुराइयों से बचाये रखा।


आपको पता है पापा जब मैं यहाँ बी.एड. का एग्जाम पास कर टीचर बनूँगी ना, तो बच्चो को यही सिखाऊंगी कि "डैड के तेज गुस्से के पीछे का प्यार महसूस कर सको तो कर लो, ऐसा न हो कि बाद में सिर्फ पछताने के सिवा कुछ न रहे ! दूसरी तरफ पापा के होंठ काँप रहे थे। वो बोल रहे थे आँखों से लगातार आँसू लिए मुँह से अपनी खुशबू बेटी के लिए "खुश रहो भगवान करे तुम्हें मेरी उम्र और खुशियाँ लग जाए बेटा"

जरूरी नहीं कि आपके सामने खुश और सुखी नजर आने वाले सभी लोगों का जीवन परफेक्ट हो

 पत्नी और पति में झगड़ा हो गया। पति और बच्चे खाना खाकर सो गए तो पत्नी घर से बाहर निकाल गई, यह सोचकर कि अब वह अपने पति के साथ नहीं रह सकती। मोहल्ले की गलियों में इधर-उधर भटक रही थी कि तभी उसे एक घर से आवाज सुनाई दी, जहाँ एक स्त्री रोटी के लिए ईश्वर से अपने बच्चे के लिए प्रार्थनाएं कर रही थी।


वह थोड़ा और आगे बढ़ी तो एक और घर से आवाज आई, जहाँ एक स्त्री ईश्वर से अपने बेटे को हर परेशानी से बचाने की दुआ कर रही थी। एक और घर से आवाज आ रही थी जहाँ एक पति अपनी पत्नी से कह रहा था किa वह मकान मालिक से कुछ और दिन की मोहलत मांग लें और उससे हाथ जोड़कर अनुरोध करें कि रोज-रोज आकर उन्हें तंग न करें।


थोड़ा और आगे बढ़ी तो एक बुज़ुर्ग दादी अपने पोते से कह रही थी, "बेटा, कितने दिन हो गए तुम मेरे लिए दवाई नहीं लाए।" पोता रोटी खाते हुए कह रहा था, "दादी माँ, अब मेडिकल वाला भी दवा नहीं देता और मेरे पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि मैं आपके लिए दवाई ले आऊं।"


थोड़ा और आगे बढ़ी तो एक घर से स्त्री की आवाज आ रही थी जो अपने भूखे बच्चों को यह कह रही थी कि आज तुम्हारे बाबा तुम्हें खाने के लिए कुछ ना कुछ जरूर लाएंगे, तब तक तुम सो जाओ। जब तुम्हारे बाबा आएंगे तो मैं तुम्हें जगा दूंगी। वह औरत कुछ देर वहीं खड़ी रही और सोचते हुए अपने घर की ओर वापस लौट गई कि जो लोग हमारे सामने खुश और सुखी दिखाई देते हैं, उनके पास भी कोई ना कोई कहानी होती है।


फिर भी, यह सब अपने दुख और दर्द को छुपाकर जीते हैं। वह औरत अपने घर वापस लौट आई और ईश्वर का धन्यवाद करने लगी कि उसके पास अपना मकान, संतान, और एक अच्छा पति है। हाँ, कभी-कभी पति से नोक-झोंक हो जाती है, लेकिन फिर भी वह उसका बहुत ख्याल रखता है। वह औरत सोच रही थी कि उसकी जिंदगी में कितने दुख हैं, मगर जब उसने लोगों की बातें सुनीं तो उसे यह एहसास हुआ कि लोगों के दुख तो उससे भी ज्यादा हैं।


सीख :---


जरूरी नहीं कि आपके सामने खुश और सुखी नजर आने वाले सभी लोगों का जीवन परफेक्ट हो। उनके जीवन में भी कोई न कोई परेशानी या तकलीफ होती है, लेकिन सभी अपनी परेशानी और तकलीफ को छुपाकर मुस्कुराते हैं। दूसरों की हंसी के पीछे भी दुख और मातम के आंसू छिपे होते हैं। कठिनाइयों और परीक्षणों के बावजूद जीना जीवन की वास्तविकता है, यही सच्ची जिंदगी है

Wednesday, 16 October 2024

पुरुष के लिए स्त्री पहेली रही है

 ✍️✍️पुरुष के लिए स्त्री पहेली रही है। स्त्री के लिए पुरुष पहेली है। स्त्री सोच ही नहीं पाती कि तुम किसलिए चांद पर जा रहे हो? घर काफी नहीं? वही तो यशोधरा ने बुद्ध से पूछा, जब वे लौटकर आए, कि जो तुमने वहां पाया वह यहां नहीं मिल सकता था? ऐसा जंगल भागने की क्या पड़ी थी? यह घर क्या बुरा था? अगर शांत ही होना था तो जितनी सुविधा यहां थी, इतनी वहां जंगल में तो नहीं थी। तुमने कहा होता, हम तुम्हें बाधा न देते। हम तुम्हें एकांत में छोड़ देते। हम सारी सुविधा कर देते कि तुम्हें जरा भी बाधा न पड़े। लेकिन बुद्ध को अगर यशोधरा ऐसा इंतजाम कर देती कि जरा भी बाधा न पड़े--यशोधरा अपनी छाया भी न डालती बुद्ध पर--तो भी बुद्ध बंधे-बंधे अनुभव करते। क्योंकि वे अनजाने तार यशोधरा के चारों तरफ फैलते जाते, और भी ज्यादा फैल जाते। वह छाया की तरह चारों तरफ अपना जाल बुन देती। घबड़ाकर भाग गए।

जो भी कभी भागा है जंगल की तरफ, प्रेम से घबड़ाकर भागा है। और क्या घबड़ाहट है? कहीं प्रेम बांध न ले। कहीं प्रेम आसक्ति न बन जाए। कहीं प्रेम राग न हो जाए। स्त्रियों को जंगल की तरफ भागते नहीं देखा गया। क्योंकि स्त्री को समझ में ही नहीं आता, भागना कहां है? डूबना है। डूबना यहीं हो सकता है। और स्त्री ने बहुत चिंता नहीं की परमात्मा की जो आकाश में है, उसने तो उसी परमात्मा की चिंता की जो निकट और पास है।


स्त्री को रस नहीं मालूम होता कि चीन में क्या हो रहा है? उसका रस होता है, पड़ोसी के घर में क्या हो रहा है? पास। तुम्हें कई दफा लगता भी है--पति को--कि ये भी क्या फिजूल की बातों में पड़ी है कि पड़ोसी की पत्नी किसी के साथ चली गयी, कि पड़ोसी के घर बच्चा पैदा हुआ, कि पड़ोसी नयी कार खरीद लाया--ये भी क्या फिजूल की बातें हैं? वियतनाम है, इजराइल है, बड़े सवाल दुनिया के सामने हैं। तू नासमझ! पड़ोसी के घर बच्चा हुआ, यह भी कोई बात है? लाखों लोग मर रहे हैं युद्ध में। इस एक बच्चे के होने से क्या होता है?

स्त्री को समझ में नहीं आता कि पड़ोसी के घर बच्चा पैदा होता है, इतनी बड़ी घटना घटती है--एक नया जीवन अवतीर्ण हुआ; कि पड़ोसी की पत्नी किसी के साथ चली गयी--एक नए प्रेम का आविर्भाव हुआ; तुम्हें इसका कुछ रस ही नहीं है! इजराइल से लेना-देना क्या है? इजराइल से फासला इतना है कि स्त्री के मन पर उसका कोई अंकुरण नहीं होता, कोई छाप नहीं पड़ती। दूरी इतनी है।


स्त्री परमात्मा जो बहुत दूर है आकाश में उसमें उत्सुक नहीं है। परमात्मा जो बहुत पास है, बेटे में है, पति में है, परिवार में है, पड़ोसी में है, उसमें उसका रस है। क्योंकि दूर जाने में उसकी आकांक्षा नहीं है। यहीं डूब जाना है।

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...