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Wednesday, 4 September 2024

लड़की की शारीरिक जरुरत

 एक लड़की की शारीरिक जरूरत संभोग से पूरी होती है , 

एक सुखद संभोग स्त्रीत्व की पूर्ति करता है, दिमाग में ऐसे केमिकल निकालने में मदद करती है जिससे स्त्री पूर्ण महसूस करती है।

और मैने भी इस बात को महसूस किया है और ये सत प्रतिशत सही है ।


जब मैं कॉलेज में थी, तो नई नई फिल्म इंटरनेट पर लेख पढ़ती थी, और ये समझ आया कि स्त्री पुरुष की शारीरिक जरुरते होती हैं।

स्त्री की जरूरत को पूरा करने के लिए पुरुष की आवश्यकता होती है, और पुरुष को स्त्री की ओर एक दूसरे की आवश्यकता को पूर्ण करने में कोई गलत बात नहीं है।


वहीं दूसरी तरफ हमारे ग्रन्थ माता पिता इस बात के खिलाफ थे, उनका कहना था शादी से पहले ये सब गलत है। 

ऐसा क्यों था? 

मुझे समझ नहीं आया और मुझे खुद ये लगता था कि ये सब फिजूल की बातें हैं।


मेरा बॉयफ्रेंड बना, और मैने अपनी सहमति जाहिर की,

कि मैं संभोग का आनंद लेना चाहती हूं।


वो भी तैयार था, हम दोनो जाते हैं और इसे एक्सपीरियंस करते हैं।

ये जादुई एहसाह था शरीर में एक अलग तरह की ऊर्जा आने लगी थी। अब मुझे लगा कि ये शारीरिक जरूरत जरूर पूरी करनी चाहिए।

लेकिन कुछ समय बाद मेरा breakup हो गया।


और मैं किसी दूसरे लड़के के साथ सम्बन्ध बनाने लगी।

पर हमारी शादी नहीं हो सकती थी।


और अब शादी की उम्र आगई थी तो मां पापा ने एक अच्छा लड़का खोज के शादी कर दी।

पहले कुछ दिन तो संभोग अच्छा रहा।


लेकिन ना जाने क्यों मेरा मन इस बात से हटने लगा।

पति जब संभोग के बारे में पहल करते मैं बहाना बना देती 

हमारे रिश्तों में खटास आने लगी थी।


मैने डॉक्टर के पास नंबर लगाया और उन्हें अपनी समस्या बताई।

उन्होंने बोला उम्र के साथ ऐसा होता है,

और पूरा एक साल दवाई खाई।


इधर मेरे पति भी मुझसे खिन्न रहने लगे थे।

मुझे पता है, कि पुरुषों को सेक्स की चाहत होती है।

पर मैं चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पा रही थी।


हमारे बच्चे भी नहीं थे lऔर ना हमारे बीच ज्यादा शारीरिक संबंध था।


उन्होंने मुझ बोला कि पत्नी होते हुए भी मेरी शारीरिक जरूरत पूरी नहीं हो पा रही। तो अब हमारा साथ रहने का कोई मतलब नहीं है।


मुझे ये बात अंदर तक चुभ गई।

मैने बोला कुछ समय दो।

और मैं इस बार सब छोड़कर कर ऋषिकेश आई।

इस आस में की मेरी मानसिक स्थिति ठीक नहीं जिसकी वजह से ये सब हो रहा है।

वहां मुझे मेरी गुरु मा मिली जो मुझे ध्यान और योग सिखाती थी।

उन्होंने मुझसे मेरे बातो पर चर्चा किया।

तो मैने उन्हें बताया कि मेरी ये समस्या है।


उन्होंने पल भर में ही ये बोल दिया कि, शादी से पहले कितने पुरुषों के साथ सोई हो ? 


मैं हैरान थी पर मैने उन्हें सही जवाब दे दिया।


उन्होंने बोला हमारा शरीर यादों से मिलकर बना है। जब किसी स्त्री किसी पुरुष के साथ सम्बद्ध बनती हैं तो उसके अंग अंग में उस पुरुष की याद बसती हैं ।

और इस वजह से दोनों के मध्य परस्पर प्रेम काम वासना धीरे धीरे बढ़ती है।


लेकिन जब यही काम 2 3 पुरुषों के साथ करो तो शरीर समझ ही नहीं पाता है कि किसे यादों में बसाना है और किसे निकाल फेकना ।

और आप को संभोग में अरुचि होती है धीरे धीरे प्रेम खत्म होने लगता ।


फिर मुझे समझ आया कि क्यों बड़े बुजुर्ग शादी के बाद ही संभोग करने की सलाह देते हैं।

जिससे हमारे रिश्ते मजबूत हो जाएं।


लेकिन आज मेरी तरह ना जाने कितनी लड़किया शादी से पहले संभोग करती हैं। बिना इसका दुष्प्रभाव डाले।

और ना चाहते हुए भी उनकी शादी शुदा जिंदगी बर्बाद होती है ।


इसके अलावा ऐसी भी लड़किया हैं जो अपने काम को निकालने या अपने स्टेटस को मेंटेन रखने मात्र के लिए अपनी कपड़े किसी के भी सामने खोल देती हैं।

पर ये बात गलत है।

 मुझे इसका एहसाह तब हुआ जब मेरे पति और मेरे रिश्तों के बीच खटास आने लगी।

किसी भी स्थिति में शादी से पहले सम्बन्ध बनाना गलत है। 


आपकी अपनी पूजा मिश्रा

सेक्स एजुकेशन .निधि चौहान की कलम से

पढ़िए निधि चौहान की कलम से सेक्स एजुकेशन से संबंधित एक और दमदार, शानदार लेख यदि आप पूरा पढ़ लोगे तो आपको भी लगेगा कि हां वाकई में बहुत अच्छा लेख है दोस्तो थोड़ा सा लेख बड़ा जरूर है लेकिन बहुत रोमांचक और बहुत जानकारी वाला है इसलिए पूरा जरूर पढें।

लेख शुरू करने से पहले आपको बता दूं मैने इस लेख को भारत के महान दार्शनिक रजनीश ओशो की किताबों को पढ़कर एवं महर्षि वात्सायन की कामसुत्र पुस्तक को पढ़कर तैयार किया है..!!

आइए शुरू करते हैं 👇👇

दोस्तो सबसे पहले मैं सेक्स से संबंधित कुछ बातें आपको बताना चाहती हूं जो मैने अभी तक अनुभव की हैं।

दोस्तो सेक्स हर कोई करना चहता है चाहे वह महिला हो या पुरुष।
कामुक बातें हर किसी को पसन्द हैं
हर कोई कामवासना में लिप्त है।
लेकिन लोग अच्छा होने का दिखावा करते हैं।
जबकि वह भी काम वासना में लिप्त हैं
हालाकि यह कोई बुराई नहीं है क्योंकि यह प्रकृति प्रदत्त है अर्थात प्रकृति ने हमको दिया है।

और सिर्फ मानव ही नहीं बल्कि सभी जीवों की स्वाभाविक प्रक्रिया है।
सहमति से सेक्स कोई गलत नहीं है और ओशो के अनुसार सेक्स भी आम क्रियाओं की तरह ही है।
ओशो कहते हैं जो जीवन को, रूह को आनंदित कर दे वह विषय खराब कैसे हो सकता है।
और फिर जिस विषय पर महर्षि वात्स्यान जैसे महान दार्शनिक ने कामसूत्र पुस्तक लिखी हो और विस्तार पूर्वक वर्णन किया हो बह विषय चर्चा के योग्य क्यों नहीं हो सकता वह विषय खराब कैसे हो सकता है।
सेक्स एजुकेशन के अभाव में ही आजकल बलात्कार जैसे जघन्य अपराध हो रहे हैं क्योंकि लोगों को जिस विषय से जितना दूर रखा जाता है इंसान उसको किसी भी कीमत पर करना चाहता है। यदि सेक्स पर इतनी पाबंदी न हो तो शायद रेप एवं बलात्कार जैसी घटनाओं पर अंकुश भी लग सकता है।

मध्यप्रदेश के खजुराहो के जगत प्रसिद्ध मंदिर जो की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं उन मंदिरों पर जो चित्रकारी की गई है उसमें संभोग को दर्शाया गया है कई इतिहासकारों का मानना है कि उस समय लोगों की सेक्स से काफी दूरी बन गई थी कोई सेक्स पर बात भी नहीं करता था इसी कारण सेक्स एजुकेशन का प्रचार प्रसार करने एवं यह दर्शाने के सेक्स कोई गलत विषय नहीं है इसीलिए वह चित्रकारी की गई थी 

 महर्षि वात्सायन कहते हैं कि यदि सेक्स को सेक्स तरह किया जाए तो फिर सेक्स सबसे ज्यादा आनंदित करने बाली क्रिया है।
 महर्षि वात्सायन का मानना है कि सिर्फ 
इंटरकोर्स करना ही सेक्स नहीं है।
 इंटरकोर्स का मतलब आप समझ ही रहे होंगे चूंकि मैं भाषा को थोड़ा मर्यादित रखना चाहती हूं...इसलिए ऐसा लिख रही हूं कि आपको समझ में भी आ जाए और अपने लेख की भाषा की गरिमा भी बनी रहे।
महर्षि वात्स्यान कामसूत्र में लिखते हैं की जो युवक युवती सिर्फ इंटरकोर्स को ही सेक्स समझते हैं इसका मतलब है कि वह सेक्स को समझते ही नहीं हैं।
सेक्स को बड़े ही आराम से एकाग्रचित होकर
और अच्छा समय लेकर करना चाहिए इसमें जल्दबाजी बिलकुल भी नहीं होना चाहिए।
सेक्स में फॉर प्ले का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होना चाहिए फॉर प्ले मतलब संभोग से पहले महिला एवं पुरुष का आपस में प्यार करना और ऐसा प्यार की वह एक दूसरे में खो जाएं।
ओशो कहते हैं कि चाहे पुरुष हो या महिला फोर प्ले के समय अपने साथी को खुश एवं आनंदित करने के लिए हर वह रति क्रीड़ा करनी चाहिए जिससे उसके प्रेमी को सुखद एहसास हो सके।
ओशो ने एक पुस्तक लिखी है संभोग से समाधि की ओर उसमे उन्होंने बहुत विस्तार पूर्वक सम्भोग का वर्णन किया है।

दोस्तो असल में होता क्या है.... कुछ लोग ऊपर से दिखावा ऐसा करेंगे जैसे सारे संस्कार सिर्फ इन्हीं में कूट कूट कर भर दिए हों।
जब कोई सेक्स की बातें करेगा तो बहुत ही संस्कार वान बनेंगे जैसे ये सेक्स करते ही न हों और यदि सच कहूं तो ऐसे ढोंगी लोग ही कामवासना में सबसे ज्यादा लिप्त हैं यही वो लोग हैं जो अकेले में हर रोज पोर्न वीडियो देखते हैं लेकिन सबके सामने बड़े ही मर्यादित बनेंगे।

जैसे एक ताजा उदाहरण आपको दे दूं अभी मैंने सेक्स विषय पर लिखने से पहले आपकी सहमति मांगी थी हालाकि 95 प्रतिशत लोगों ने सहमति दी कुछ लोगों ने विरोध भी किया।
क्या जिन लोगों ने विरोध किया वह सेक्स नहीं करते होंगे मुझे लगता सबसे ज्यादा पोर्न वीडियो ऐसे ही लोग देखते हैं..!
सेक्स एक क्रिया है महान दार्शनिक रजनीश ओशो जी ने कहा है कि जिस प्रकार नहाना धोना,खाना पीना, सोना जागना, एक क्रिया ठीक वैसे ही सेक्स भी एक क्रिया ही है..!

हालाकि ये सिर्फ महिला और पुरुष द्वारा एकांत में करने वाली क्रिया है।

लेकिन सेक्स से संबंधित जरूरी जानकारी पर खुलकर बात करने में कोई बुराई नहीं है।

क्योंकि सेक्स की शिक्षा के अभाव के कारण कई लोग सेक्स से संबंधित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कई लोग फर्जी डॉक्टरों द्वारा ठगे जा रहे हैं गर्भपात की दर बढ़ रही है महिलाओं में यौन संबंधी रोग बढ़ रहे हैं इसका वास्तविक कारण है सेक्स एजुकेशन की कमी सेक्स विषय पर खुलकर चर्चा न करना।
इसलिए मैं तो सिर्फ सेक्स ही नहीं जिस विषय पर भी लिखती हूं खुलकर लिखती हूं.!!
सेक्स पर लिखूंगी तो कोई बुराई ही तो देगा इससे ज्यादा और कोई क्या कर सकता है और बुराई तो वैसे भी सहज ही मिल जाती है अच्छे कामों में भी मिल जाती है बुराई तो फिर डर किस बात का।
प्रकृति का एक नियम है हमको जिस चीज से दूर रहने का बचने का बोला जाता है तो फिर उसी चीज में अधिक मन लगता है यही हाल सेक्स विषय का है लोगों के मन में ऐसे भ्रांति पैदा कर दी कि सेक्स के बारे में कोई खुलकर बात भी नहीं कर सकता।
गांवों में तो आज भी यह हालात हैं कि कोई लड़की दुकान से पैड तक नहीं खरीद सकती है।
जिसके कारण महिलाओं में इन्फेक्शन की बीमारी हो जाती है और यही हाल गांवों के लड़कों का है वह आज भी गांव की दुकान से निरोधक लेने में शर्म करते हैं जिससे यौन रोगों का खतरा बढ़ जाता है..!!
ओशो कहते हैं- मैं युवकों से कहना चाहूंगा कि तुम जिस दुनिया को बनाने में लगे हुए हो, उसमें यौन संबंधों को वर्जित मत करना. नहीं तो आदमी और भी कामुक से कामुक होता चला जाएगा. मेरी यह बात देखने में बड़ी उलटी लगेगी. लोग चिल्‍ला-चिल्‍ला कर घोषणा करते हैं कि मैं लोगों में काम का प्रचार कर रहा हूं. सच्‍चाई उलटी है कि मैं लोगों को काम से मुक्‍त करना चाहता हूं और प्रचार वे कर रहे हैं. उनका प्रचार दिखाई नहीं पड़ता क्‍योंकि हजारों साल की परंपरा से उनकी बातें सुन-सुन कर हम अंधे और बहरे हो गए है. इसलिए आज जितना कामुक आदमी भारत में है. उतना कामुक आदमी पृथ्‍वी के किसी कोने में नहीं।

एक शिष्य के सवाल के जवाब देते हुए ओशो ने कहा, 'अभी मैं एक गांव में था और कुछ बड़े विचारक और संत-साधु मिलकर अश्लील पोस्टर विरोधी एक सम्मेलन कर रहे थे. तो उनका ख्याल है कि अश्लील पोस्टर दीवार पर लगता है. इसलिए लोग कामवासना से परेशान रहते हैं. जब कि हालत दूसरी है. लोग कामवासना से परेशान हैं, इसलिए पोस्टर में मजा है. यह पोस्टर कौन देखेगा? पोस्टर को देखने कौन जा रहा है?'

ओशो ने आगे कहा, 'पोस्टर को देखने वही जा रहा है, जो स्त्री-पुरुष के शरीर को देख ही नहीं सका. जो शरीर के सौंदर्य को नहीं देख सका, जो शरीर की सहजता को अनुभव नहीं कर सका, वह पोस्टर देख रहा है. पोस्टर इन्हीं गुरुओं की कृपा से लग रहे हैं, क्योंकि ये इधर स्त्री-पुरुष को मिलने-जुलने नहीं देते, पास नहीं आने देते. इसी का परिणाम है कि कोई गंदी किताब पढ़ रहा है, कोई गंदी तस्वीर देख रहा है, कोई फिल्म बना रहा है. क्योंकि आखिर यह फिल्म कोई आसमान से नहीं टपकती, लोगों की जरूरत है...!
इसलिए सवाल यह नहीं है कि गंदी फिल्म क्यों है, सवाल ये है कि लोगों में जरूरत क्यों है? यह तस्वीर जो पोस्टर लगती है, कोई ऐसे ही मुफ्त पैसा खराब करके नहीं लगाता, इसका कोई उपयोग है. इसे कहीं कोई देखने को तैयार है, मांग है इसकी. वह मांग कैसे पैदा हुई है? वह मांग हमने पैदा की है. स्त्री-पुरुष को दूर कर वह मांग पैदा हुई. अब वह मांग को पूरा करने जब कोई जाता है तो हमें गड़बड़ लगती है. तो उसके लिए और बाधाएं डालते हैं. उसको जितनी वे बाधाएं डालेंगे, वह नए रास्ते खोजता है मांग के. क्योंकि मांग तो अपनी पूर्ति मांगती है..!

 ओशो ने अपनी किताब में कहा है कि मेरे एक डॉक्‍टर मित्र इंग्‍लैण्‍ड के एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में भाग लेने गए थे. वाइट पार्क में उनकी सभा होती थी. कोई 500 डॉक्‍टर इकट्ठे थे. बातचीत चलती थी. खाना-पीना चलता था. लेकिन पास की बेंच पर एक युवक और युवती गले में हाथ डाले अत्‍यंत प्रेम में लीन आंखे बंद किए बैठे थे. उन मित्र के प्राणों में बेचैनी होने लगी. भारतीय प्राण में चारों तरफ झांकने का मन होता है. अब खाने में उनका मन न रहा. अब चर्चा में उनका रस न रहा. वे बार-बार लौटकर उस बेंच की ओर देखने लगे. पुलिस क्‍या कर रही है. वह बंद क्‍यों नहीं करती ये सब. ये कैसा अश्‍लील देश है. यह लड़के और लड़की आंख बंद किए हुए चुपचाप 500 लोगों की भीड़ के पास ही बेंच पर बैठे हुए प्रेम प्रकट कर रहे है. कैसे लोग हैं. यह क्‍या हो रहा है. यह बर्दाश्‍त के बाहर है. पुलिस क्‍या कर रही है. बार-बार वहां देखते.पड़ोस के एक ऑस्‍ट्रेलियन डॉक्‍टर ने उनको हाथ का इशारा किया ओर कहा, बार-बार मत देखिए, नहीं तो पुलिसवाला आपको यहां से उठा कर ले जाएगा. वह अनैतिकता का सबूत है. यह दो व्‍यक्‍तियों की निजी जिंदगी की बात है और वे दोनों व्‍यक्‍ति इसलिए 500 लोगों की भीड़ के पास भी शांति से बैठे है, क्‍योंकि वे जानते हैं कि यहां सज्‍जन लोग इकट्ठे हैं. कोई घूरेगा नहीं. आपका यह देखना अच्‍छे आदमी का सबूत नहीं है. आप 500 लोगों को देख रहे हैं, कोई भी फिक्र नहीं कर रहा. यह उनकी अपनी बात है. और दो व्‍यक्‍ति इस उम्र में प्रेम करें तो पाप क्‍या है? और प्रेम में वह आंख बंद करके पास-पास बैठे हों तो हर्ज क्‍या है? आप परेशान हो रहे है. न तो कोई आपके गले में हाथ डाले हुए है, न कोई आपसे प्रेम कर रहा है.वह मित्र मुझसे लौटकर कहने लगे कि मैं इतना घबरा गया कि कैसे लोग हैं. लेकिन धीरे-धीरे उनकी समझ में यह बात पड़ी कि दरअसल गलत वे ही थे. हमारा पूरा मुल्‍क ही एक दूसरे घर में दरवाजे के होल बना कर झांकता रहता है. कहां क्‍या हो रहा है.कौन क्‍या कर रहा है? कौन जा रहा है? कौन किसके साथ है? कौन किसके गले में हाथ डाले है? कौन किसका हाथ-हाथ में लिए है? क्‍या बदतमीजी है, कैसी संस्‍कारहीनता है. यह सब क्‍या है? यह क्‍यों हो रहा है? यह हो रहा है इसलिए कि भीतर वह जिसको दबाता है, वह सब तरफ से दिखाई पड़ रहा है. वही दिखाई पड़ रहा है.युवकों से मैं कहना चाहता हूं कि तुम्‍हारे मां बाप, तुम्‍हारे पुरखे, तुम्‍हारी हजारों साल की पीढ़ियां यौन संबंध से भयभीत रही हैं. तुम भयभीत मत रहना. तुम समझने की कोशिश करना उसे. तुम पहचानने की कोशिश करना. तुम बात करना. तुम इसके संबंध में आधुनिक जो नई खोज हुई है उनको पढ़ना, चर्चा करना और समझने की कोशिश करना कि सेक्‍स क्‍या है.
भारत के युवक के चारों तरफ सेक्‍स घूमता रहता है पूरे वक्‍त. और इस घूमने के कारण उसकी सारी शक्‍ति इसी में लीन और नष्‍ट हो जाती है. जब तक भारत के युवक की इस रोग से मुक्‍ति नहीं होती, तब तक भारत के युवक की प्रतिभा का जन्‍म नहीं हो सकता. प्रतिभा का जन्‍म तो उसी दिन होगा, जिस दिन इस देश में सेक्‍स की सहज स्‍वीकृति हो जायेगी. हम उसे जीवन के एक तथ्‍य की तरह अंगीकार कर लेंगे—प्रेम से, आनंद से—निंदा से नहीं. और निंदा और घृणा का कोई कारण भी नहीं है...!!
दोस्तो भले ही हमारा विषय सेक्स का है लेकिन फिर भी मैंने लेखन की भाषा की गरिमा का ध्यान रखा है कहीं भी आपत्तिजनक एवं अश्लील शब्दों का प्रयोग नहीं किया है।
मुझे पूरा विश्वास है मेरे इस लेख पर आपका प्यार जरूर मिलेगा आपको जरूर पसन्द आयेगा।
दोस्तो एक बात और कहना चाहती हूं आजकल कॉपी पेस्ट का जमाना है लोग कॉपी कर लेते हैं लेकिन ये मैंने खुद मेहनत करके लिखा है यदि कोई इसे कॉपी पेस्ट साबित कर देगा आज से लिखना बंद कर दूंगी।
जो व्यक्ति आज से पहले इस पोस्ट को अपलोड होने का स्क्रीनशॉट दे देगा मैं 10000 दस हज़ार रूपए इनाम दूंगी और लिखना बंद कर दूंगी क्योंकि इस तरह का दावा कोई झूठा व्यक्ति नहीं कर सकता है सांच को आंच का कोई डर नहीं रहता है। हो सकता कल कोई इस पोस्ट को कॉपी कर अपना भी बता सकता है।
लेकिन आज दिनांक 29/08/2024 रात्रि 07:55 पर यह पोस्ट मैने अपलोड की है इस समय से पहले यह पोस्ट किसी ने नहीं पढ़ी होगी। और उससे पहले इस पोस्ट का कोई दवा भी नहीं कर सकता है।
 आजकल लोग फेसबुक से पोस्ट को कॉपी कर अपना बता देते हैं..!!

दोस्तो एक निवेदन है यदि आपको लेख अच्छा लगे तो शेयर जरूर कीजिएगा।

                      
             🙏 धन्यवाद 🙏

✍️..... निधि चौहान की कलम से _...
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सीख: किसी रिश्ते में खुश रहने के लिए हमें एक-दूसरे की कमियों को नजरअंदाज करना

 राहुल और रिया की शादी धूमधाम से हुई थी। रिया बेहद खूबसूरत थी, और उसकी सुंदरता को देखकर हर कोई उसकी तारीफ करता था। शादी के बाद राहुल ने अपनी पत्नी को बहुत प्यार किया और उसकी खूबसूरती की हर दिन सराहना करता रहता। रिया की सुंदरता में जैसे चार चांद लगे हों, और राहुल की नजरें उससे हटती ही नहीं थीं। उनकी ज़िंदगी प्यार और खुशी से भरी हुई थी। दोनों एक-दूसरे को बिना शर्त प्यार करते थे, और हर दिन उनकी मोहब्बत पहले से ज्यादा गहरी हो रही थी।


समय बीतता गया, लेकिन कुछ महीनों बाद रिया को अचानक एक त्वचा रोग हो गया। उसकी त्वचा पर दाग-धब्बे दिखने लगे, और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती खोने लगी। रिया को इस बात का बहुत डर था कि उसकी सुंदरता खत्म हो रही है, और कहीं राहुल उससे नफरत न करने लगे। उसकी सुंदरता ही तो उनकी शादी की पहचान थी, और अब जब वह खत्म हो रही थी, तो उसके मन में बेचैनी बढ़ने लगी। वह अक्सर खुद को शीशे में देखकर उदास हो जाती और सोचती कि जब राहुल उसकी इस हालत को देखेगा, तो क्या वह उससे पहले की तरह प्यार करेगा?


कुछ ही दिनों बाद राहुल को किसी जरूरी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। रिया ने उसे विदा किया, लेकिन उसके मन में बेचैनी थी। कुछ समय बाद, जब राहुल घर लौट रहा था, तो उसका एक भयानक हादसे में एक्सीडेंट हो गया। इस हादसे में उसने अपनी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए खो दी। यह खबर सुनकर रिया टूट गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने पति का ध्यान रखा और उनकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी।


अब दोनों की ज़िंदगी बदल चुकी थी। रिया अब पहले की तरह खूबसूरत नहीं रही, लेकिन उसे इस बात की तसल्ली थी कि राहुल अंधा हो चुका है और वह उसकी बदसूरती को नहीं देख सकता। इस बीच, रिया का त्वचा रोग और बढ़ता गया, और उसकी सुंदरता पूरी तरह समाप्त हो गई। वह बदसूरत हो गई थी, लेकिन राहुल की आंखों की रोशनी न होने के कारण उनके रिश्ते पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। राहुल उसे वैसे ही प्यार करता रहा, जैसे पहले करता था। उनके बीच का रिश्ता उतना ही मजबूत और प्यार भरा रहा, जितना पहले था।


समय बीतता गया, और एक दिन अचानक रिया की तबीयत बिगड़ गई। कुछ समय बाद, वह दुनिया से चली गई। राहुल को गहरा सदमा लगा। उसने अपनी जिंदगी का सबसे अनमोल साथी खो दिया था। रिया के जाने के बाद, वह बिल्कुल अकेला हो गया। उसने खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन रिया की यादें उसे चैन से जीने नहीं दे रही थीं।


रिया की अंतिम संस्कार की सारी रस्में पूरी होने के बाद, राहुल ने फैसला किया कि वह इस शहर को छोड़कर कहीं और चला जाएगा। उसने अपना सामान पैक किया और रवाना होने की तैयारी करने लगा। तभी एक परिचित व्यक्ति, जो उनके रिश्ते के बारे में जानता था, उसके पास आया और बोला, "राहुल भाई, अब आप अकेले कैसे चलेंगे? इतने सालों तक तो रिया आपका सहारा थी। अब वह नहीं रही, तो आप कैसे अपने आप को संभालेंगे?"


राहुल ने हल्की सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "दोस्त, मैं अंधा नहीं हूं। मैंने अंधे होने का सिर्फ दिखावा किया था। जब रिया की खूबसूरती खोने लगी थी, तो मुझे एहसास हुआ कि अगर उसे पता चल गया कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूं, तो वह बहुत दुखी हो जाएगी। इसलिए, मैंने उसके सामने अपनी आंखों की रोशनी खो देने का नाटक किया। मैं बस उसे खुश रखना चाहता था। वह मेरी पत्नी थी, और मुझे उससे पहले की तरह प्यार था।"


राहुल की आंखों में आंसू थे, लेकिन उन आंसुओं में प्यार और बलिदान की एक गहरी कहानी थी। उसने रिया की कमजोरी को कभी उजागर नहीं किया, क्योंकि वह जानता था कि उसकी खुशी उसकी सुंदरता में नहीं, बल्कि उनके रिश्ते की गहराई में थी।


सीख: किसी रिश्ते में खुश रहने के लिए हमें एक-दूसरे की कमियों को नजरअंदाज करना आना चाहिए। यदि हम हर कमी पर ध्यान देंगे, तो रिश्ते में प्यार कम होता जाएगा। लेकिन अगर हम एक-दूसरे को वैसे ही स्वीकार करेंगे जैसे वे हैं, तो प्यार और रिश्ते की मजबूती कभी खत्म नहीं होगी।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

 मेरा हमेशा से यह मानना रहा है 🇮🇳कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है🥹🥺 वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है🥹🥹🥺🥺


हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.


● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं


जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।


● हम वो आखिरी लोग हैं…


जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, लँगड़ी टांग, आइस पाइस, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे, सितोलिया गोटी.पतंग.भंवरा। जैसे खेल खेले हैं।


● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं


जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।


● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…


जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।


● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं


जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।


जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।


जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।


जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है


जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।


जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं


जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है।संतरे वाली गोली होगा असमनतारा की गोली पोंगा हाप चड्डी और बिना चप्पल के साइकिल फोन की घंटी सुन कर ओ खुशी 

? काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।


जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला


Tuesday, 3 September 2024

दोस्तों, सबसे बड़ा सत्य है।

 रविवार का दिन था। आज सचिन और सुजॉय दोनों की ही छुट्टी थी। दोनों अभी-अभी हॉल की सफाई कर वही सोफे पर पसर गए थे। घर में ले देकर तीन जीव ही तो रहते थे सचिन, उसकी पत्नी संध्या और शादी लायक बेटा सुजॉय जो गवरमेंट जाॅब में था। एक बेटी भी है खनक जिसकी चार महीने पहले शादी हो चुकी है। फिलहाल वो अपने ससुराल में हैं।


कामवाली छुट्टी पर है इसलिए सचिन और सुजॉय संध्या की मदद कर रहे हैं। संध्या रसोई में काम में लगी है इसलिए सचिन और सुजॉय ने मिलकर साफ-सफाई का जिम्मा उठा लिया।


इधर संध्या रसोई में फटाफट नाश्ता तैयार कर रही थी। सुबह के 10:00 बज चुके थे। नाश्ता तैयार कर प्लेट में लगाकर संध्या बाहर लेकर आई। अभी तीनों मिलकर नाश्ता करने ही बैठे थे कि इतने में बेटी खनक अकेली ही घर पर आ गई। उसे इस तरह अकेले देख कर जहां सचिन बहुत खुश हुआ वही संध्या का दिमाग ठनक गया,


अरे बेटा तू इस समय अचानक? अकेली ही आई है, अक्षय जी नहीं आए?

संध्या जी ने पूछा तो खनक बिफर पड़ी,

क्या मम्मी मैं अपने घर नहीं आ सकती? ये मेरा घर नहीं है क्या? और जरूरी है क्या मैं किसी के साथ ही आऊँ, अकेली भी तो आ सकती हूं"

उसकी बात सुनकर सचिन ने कहा,

क्या संध्या तुम भी? बेटी आई उसकी तो खुशी हो नहीं रही है उल्टे दस सवाल पूछे जा रही हो। जरा फटाफट से बेटी के लिए भी नाश्ता लेकर आओ


फिर खनक से

" आ बेटा, बैठ तू मेरे पास। आज हम मिलकर नाश्ता करेंगे"

सचिन की बात सुनकर संध्या रसोई में नाश्ता लेने गई। नाश्ते की प्लेट लगाते लगाते उसके दिमाग में कई सवाल चल रहे थे। बेटी की शादी चार महीने पहले ही हुई है, अब तक कितनी बार तो घर पर आ चुकी है। पर इस पिता के दिमाग में तो यह चीज बैठती ही नहीं। हर बार किसी ना किसी छोटी मोटी बात पर लड़ झगड़ कर आ जाती है और सचिन हर बार अपनी बेटी का सपोर्ट करता है।

सचिन शुरू से ही खनक और सुजॉय में से खनक को बहुत ज्यादा चाहता था। और खनक, वो तो बिल्कुल पापा की परी बनी बैठी है। जिस चीज के लिए कह दे सचिन उसकी हर इच्छा पूरी करता। एक बार सुजॉय के लिए कोई चीज आए ना आए लेकिन खनक के लिए तो कैसे भी करके आएगी जरूर।

माना कि सचिन अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है लेकिन इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि उसके गलत में भी उसका साथ दें। जब शादी होकर ससुराल गई थी तो उसके ठीक सात दिन बाद ही नाराज होकर आ गई थी और बहाना क्या बनाया था कि दहेज में दिया सोफा इन लोगों ने मेरे कमरे में नहीं रखा।


और सचिन इतने महान पिता कि अपनी ही बेटी के पक्ष में जाकर उसके ससुराल वालों से लड़ने को तैयार हो गए। इतना भी दिमाग नहीं लगाया कि खनक के कमरे में जगह बची ही कहाँ है?

कोई और होता तो रिश्ता तो इतनी छोटी सी बात पर ही टूटने की बात आ जाती। वो तो खनक के ससुराल वाले इतने अच्छे थे कि उन लोगों ने खनक का कमरा ही बदल दिया, जिसमें जगह भी अच्छी थी और सोफे उसमें रखने में आ गए। कितनी शर्मिंदगी हुई थी संध्या को कि खनक ने अपनी नई नई शादी में छोटी सी बात के लिए बतंगड़ बना दिया।


हर बार कोई ना कोई बहाना करके घर आ जाती। कभी कहती कि घर का सारा काम मुझसे करवाते हैं तो कभी कहती घर में नौकर नहीं है। कभी कहती कि विक एंड पर अक्षय घुमाने नहीं लेकर जाता तो कभी कहती कि मेरे कमरे में टीवी नहीं लगा रखा। कभी कहती कि ननद पर बेवजह खर्चा करते हैं। कभी क्या बहाना तो कभी क्या बहाना? 

जब संध्या ने अकेले में अक्षय से बात की तो अक्षय ने कहा,

 मम्मी जी मुझसे तो खनक कहती है कि मुझे पापा की याद आ रही है उनसे मिलना है इसलिए मैं लेकर आ जाता हूं और यहां आकर यह इस तरह की बातें करती है। इसे जो भी समस्या है ये हमें सीधा सीधा बोले ना तो उसका कोई सॉल्यूशन भी निकले।और सबसे बड़ी बात है कि कोई चीज उसके मन मुताबिक नहीं होती तो बस उसी चीज का बतंगड़ बना देती है। कुछ समझदारी भी तो दिखाएं। बस ये यहां आकर बोलती है और पापा जी हम से लड़ने को तैयार हो जाते हैं। 

कितनी शर्मिंदगी होती है मम्मी पापा को और मुझे, आखिर मैं भी इकलौता बेटा हूं। मेरे माता पिता को मुझसे भी तो उम्मीद होगी। इकलौती बहन है वो भी मुझसे छोटी। अगर अपनी ख़ुशी से उस पर थोड़ा सा खर्च कर देता हूं तो उसमें बुरा मान जाती है जबकि बहन तो मुझसे कुछ मांग ही नहीं रही। मेरी शादी के लिए मेरे माता पिता ने कर्जा लिया था। तो क्या उस कर्ज को चुकाने की जिम्मेदारी मेरी नहीं थी लेकिन वो ये समझती नहीं


तब भी कितनी शर्मिंदगी महसूस हुई थी संध्या को। कई बार खनक को समझाने की कोशिश की पर वो है कि अपने पापा की शह में समझना नहीं चाहती। और उसके पापा, उनके लिए तो अपनी परी का प्यार हटता ही नहीं। सारी दुनिया में बस उन्हें उनकी बेटी ही दीन दुखी नजर आती है और उसके ससुराल वाले जल्लाद।

ऐसे तो उसका घर बसने से रहा। लेकिन हर बार अक्षय(दामाद) साथ होता है, पर आज ये अकेली? जरूर कोई ना कोई बात हुई होगी।

सोचते सोचते ही संध्या ने प्लेट लगाई और नाश्ता खनक को देने के बाद वही बैठ कर नाश्ता करने लगी। साथ ही साथ बेटी के चेहरे के हाव-भाव को पढ़ने की कोशिश करने लगी। लेकिन इतने में खनक बोली,

पापा आपको मेरी फ्रेंड अदिति याद है जो मेरे साथ पढ़ती थी

हां हां याद है। क्यों क्या हुआ?

उसकी मम्मी का कॉल आया था कल मुझे। वो अदिति के लिए सुजॉय का रिश्ता चाहते हैं। मैंने तो जब से उनसे बात की है तब से मुझे यहां आने की लग गई थी। अक्षय तो शाम के लिए बोल रहे थे पर मैं तो अकेली ही चली गई

उसकी बात सुनकर संध्या को थोड़ी तसल्ली हुई और मन ही मन खुशी हुई कि हे भगवान चलो कोई बड़ी बात नहीं है।

अरे पर वो तो बहुत अमीर लोग हैं। उन्हें तो एक से बढ़कर एक रिश्ते मिल जाएंगे। फिर वो यहां शादी क्यों करना चाहते हो? संध्या ने थोड़ा शक जताते हुए कहा।

क्या मम्मा आप भी? अमीर है तो क्या हुआ?सुजॉय में क्या कमी है? अच्छी खासी गवर्नमेंट जॉब में है, इसके लिए तो एक से बढ़कर एक रिश्ते आएंगे ही ना। अच्छा खासा दहेज देने को तैयार है। और आपको पता है उसके पापा उसकी हर ख्वाहिश पूरी करते हैं। वो जिस चीज के लिए कह देती है, वो शाम तक उसके हाथों में होती है। उसके पापा ने बिल्कुल उसको परी की तरह पाला है जैसे मेरे पापा ने मुझे पाला हैं खनक अपने पापा के गले में हाथ डालते हुए बोली।


मुझे किसी पापा की परी को अपने घर की बहू नहीं बनाना संध्या जी ने कहा तो सब हैरान हो उनकी तरफ देखने लगे।

क्यों मम्मा? इतना अच्छा रिश्ता तो है क्यों मना कर रहे हो? कोई बेटी के पापा उसे इतना प्यार करते तो इसमें गलत क्या है खनक ने तुनकते हुए कहा।


देख बेटा, प्यार करना अच्छी बात है पर अंधा प्यार करना गलत है। मुझे ऐसी कोई आफत अपने घर में नहीं लानी जिसके कारण कल को मुझे शर्मिंदा होकर सिर झुका कर बैठना पड़े

आप कहना क्या चाहती हो?

मुझे तेरे सास ससुर और तेरे पति का चेहरा अच्छे से याद है जब उनके घर में एक पापा अपनी परी के लिए लड़ने के लिए पहुंचते हैं, बिना यह सोचे कि उनकी परी भी गलत है। मुझे तेरी उस ननद का चेहरा याद है जो उम्र में तुझसे आठ साल छोटी है। स्कूल में पढ़ती है लेकिन उसका भाई उस पर थोड़ा सा खर्चा कर देता है तो उसकी पत्नी बुरा मान कर अपने मायके आकर बैठ जाती है। और बजाय अपनी परी को ये बात समझाने के उसके पापा उसके पति की हालत टाइट कर देते हैं।

मुझे तेरे उस पति का चेहरा बहुत अच्छे से याद है जिसकी पत्नी उसकी पत्नी ना होकर अभी तक अपने पापा की परी बनी हुई है। जब उसके पापा उसके पति को दस बातें सुना रहे होते हैं तो उसकी पत्नी का थोड़ा सा भी स्वाभिमान नहीं जागता


संध्या की बात सुनकर सचिन बोला,

क्या बकवास कर रही हो तुम? तुम मेरी बेटी पर बैठे बैठे कटाक्ष कर रही हो 

सच हमेशा कटाक्ष ही लगता है। यही बात तो आप हर बार कहते हो अपनी बेटी के ससुराल वालों से


इससे पहले कि सचिन या खनक कुछ कहते, सुजॉय ने कहा

हां, मुझे भी पापा की परी नही चाहिए। मुझे ऐसी पत्नी चाहिए जो मेरे कदम से कदम मिलाकर चल सके। मेरे घर को अपना घर समझ सके। मेरे मम्मी पापा को अपने मम्मी पापा समझ सके। इस तरह की बार-बार की टेंशन तो मुझे भी नहीं चाहिए


एक तो मेरी बेटी तुम्हारे लिए रिश्ता ढूंढ कर लाई हैं और ऊपर से तुम

जाने दीजिए पापा, सही तो कह रहे हैं मम्मी और सुजाॅय। मैंने ही आपके प्यार और कुछ जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है। कभी अपने ससुराल वालों को अपना समझा ही नहीं। पर मम्मी प्लीज मुझे माफ कर दो। मैं कोशिश करूंगी बदलने की


संध्या ने खनक की बात सुनकर उसे गले लगा लिया।


दोस्तों, सबसे बड़ा सत्य है। 'मां के श्रवण कुमार' और 'पापा की परी' सुनने में बड़े अच्छे लगते हैं लेकिन इन अंध भक्तों से तो भगवान ही बचाए। क्योंकि इनकी अपनी कोई सोच और समझ नहीं होती। जब भी अपने बच्चों के लिए रिश्ता देखने जाए यह कंफर्म कर ले कि कहीं आप का पाला इन लोगों से तो नहीं पड़ रहा।

चलो कहानी में तो पापा की परी को समझ में आ गया, पर सच्चाई बहुत अलग होती है। आपका क्या ख्याल है कमेंट करके जरूर बताइएगा।

24 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई

 कुछ लड़कियां ऐसी भी होती हैं, जिन्हें यदि संबंधों का सुख न मिले तो वे बेचैन हो जाती हैं। मैं भी उन्हीं में से एक थी। 😔 24 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई, और मेरी कॉलेज की सहेली की भी उसी समय शादी हुई। हमारी शादियाँ अच्छे परिवारों में हुईं, लेकिन हमारे स्वभाव में काफी अंतर था। मैं नटखट और चुलबुली थी, जबकि मेरी सहेली शर्मीली और शांत। 🌸

*शादी के बाद शुरुआती समय में सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियां बढ़ने लगीं और काम का बोझ भी। इससे हम दोनों फ्रस्टेटेड महसूस करने लगे। एक साल गुजर गया, लेकिन हमारे बीच प्राइवेसी की कमी थी। घर में इतने लोग होते थे कि हमें एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका ही नहीं मिलता था।** 😓

*मैंने अपने पति से अलग रहने की बात की ताकि हमें प्राइवेसी मिल सके। मेरे पति इसके खिलाफ थे, लेकिन मैंने जिद की और घर में झगड़े होने लगे। आखिरकार, मेरे पति ने दिल्ली से बेंगलुरु ट्रांसफर ले लिया। यह मेरे लिए आजादी का दिन था। पहले कुछ महीनों में पतिदेव का मूड ऑफ रहता था, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया।** 🌆

*फिर एक दिन मेरा पीरियड्स मिस हो गया और पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं। यह अनप्लान्ड था और मैं काफी घबरा गई थी। मैंने अपनी सहेली को फोन किया तो उसने खुश होकर बताया कि वह भी एक महीने से प्रेग्नेंट है। उसने मुझे समझाया कि प्रेग्नेंसी नाजुक समय होता है और मुझे अपने ससुराल या मायके जाना चाहिए।** 🤰

*मैंने सास को फोन किया और उन्हें बताया तो वे बहुत खुश हुईं और तुरंत मिलने की इच्छा जताई। लेकिन मैंने कहा कि अभी आना मुमकिन नहीं है। धीरे-धीरे मुझे दिक्कतें होने लगीं और मैंने अपनी सहेली से कम बात करनी शुरू कर दी। पतिदेव सुबह ऑफिस जाते और रात में घर आते। डिलीवरी का समय आया तो सास आ गईं लेकिन दो दिन बाद वापस चली गईं।** 🏡

*समय के साथ मुझे एहसास हुआ कि परिवार की अहमियत क्या होती है। मैंने अपनी सहेली से बात करनी शुरू की और उसने बताया कि कैसे उसका परिवार उसका ख्याल रखता है। मुझे महसूस हुआ कि अलग रहकर मैंने गलती की है। मेरे ससुर ने वीडियो कॉल पर बच्चे को देखा और उनकी आंखों में आंसू आ गए। मेरे पति ने देखा और उदास हो गए।** 😢📱

अगले दिन, उन्होंने कहा कि हम घर चलें। हम बिना बताए घर पहुंचे और सब बहुत खुश हो गए। मेरे ससुर, जो ठीक से चल नहीं पाते थे, दौड़कर आए और बच्चे को गोद में लिया। तीन दिन तक सब कुछ वैसे ही चला जैसे मेरी सहेली के साथ होता था।** 👶👨‍👩‍👧‍👦

*चौथे दिन मैंने अपने पति से पूछा कि कब चलना है। उन्होंने जवाब दिया कि अब वहाँ नहीं जाना है। उन्होंने कहा कि मुझे खुद को सुधारने की जरूरत है और हम परिवार से दूर नहीं रह सकते। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि परिवार के साथ रहना कितना महत्वपूर्ण है।** 🏡💖

*आज मैं मानती हूं कि शादी के बाद अलग रहने का विचार मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। परिवार के साथ रहने से मिलने वाले फायदे और प्यार के आगे आजादी की कोई कीमत नहीं है।** 🌟💞

आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार

 आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार


चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में चने का सेवन करे क्योकि चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।


वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।


ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।


अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला, बथुआ आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।


श्रावण (जूलाई-अगस्त) – श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए। श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।


भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) – इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे। इस महीने में चिता औषधि का सेवन करना चाहिए।


आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) – इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है। ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।


कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) – कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे। ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे। छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।

मार्गशीर्ष (नवम्बर-दिसम्बर) – इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।


पौष (दिसम्बर-जनवरी) – इस ऋतू में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे। ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।

माघ (जनवरी-फ़रवरी) – इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है। घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।

फाल्गुन (फरवरी-मार्च) – इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले। चने का उपयोग न करे।

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...