sunilrathod

Wednesday, 4 September 2024

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

 मेरा हमेशा से यह मानना रहा है 🇮🇳कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है🥹🥺 वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है🥹🥹🥺🥺


हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.


● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं


जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।


● हम वो आखिरी लोग हैं…


जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, लँगड़ी टांग, आइस पाइस, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे, सितोलिया गोटी.पतंग.भंवरा। जैसे खेल खेले हैं।


● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं


जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।


● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…


जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।


● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं


जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।


जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।


जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।


जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है


जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।


जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं


जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है।संतरे वाली गोली होगा असमनतारा की गोली पोंगा हाप चड्डी और बिना चप्पल के साइकिल फोन की घंटी सुन कर ओ खुशी 

? काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।


जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला


Tuesday, 3 September 2024

दोस्तों, सबसे बड़ा सत्य है।

 रविवार का दिन था। आज सचिन और सुजॉय दोनों की ही छुट्टी थी। दोनों अभी-अभी हॉल की सफाई कर वही सोफे पर पसर गए थे। घर में ले देकर तीन जीव ही तो रहते थे सचिन, उसकी पत्नी संध्या और शादी लायक बेटा सुजॉय जो गवरमेंट जाॅब में था। एक बेटी भी है खनक जिसकी चार महीने पहले शादी हो चुकी है। फिलहाल वो अपने ससुराल में हैं।


कामवाली छुट्टी पर है इसलिए सचिन और सुजॉय संध्या की मदद कर रहे हैं। संध्या रसोई में काम में लगी है इसलिए सचिन और सुजॉय ने मिलकर साफ-सफाई का जिम्मा उठा लिया।


इधर संध्या रसोई में फटाफट नाश्ता तैयार कर रही थी। सुबह के 10:00 बज चुके थे। नाश्ता तैयार कर प्लेट में लगाकर संध्या बाहर लेकर आई। अभी तीनों मिलकर नाश्ता करने ही बैठे थे कि इतने में बेटी खनक अकेली ही घर पर आ गई। उसे इस तरह अकेले देख कर जहां सचिन बहुत खुश हुआ वही संध्या का दिमाग ठनक गया,


अरे बेटा तू इस समय अचानक? अकेली ही आई है, अक्षय जी नहीं आए?

संध्या जी ने पूछा तो खनक बिफर पड़ी,

क्या मम्मी मैं अपने घर नहीं आ सकती? ये मेरा घर नहीं है क्या? और जरूरी है क्या मैं किसी के साथ ही आऊँ, अकेली भी तो आ सकती हूं"

उसकी बात सुनकर सचिन ने कहा,

क्या संध्या तुम भी? बेटी आई उसकी तो खुशी हो नहीं रही है उल्टे दस सवाल पूछे जा रही हो। जरा फटाफट से बेटी के लिए भी नाश्ता लेकर आओ


फिर खनक से

" आ बेटा, बैठ तू मेरे पास। आज हम मिलकर नाश्ता करेंगे"

सचिन की बात सुनकर संध्या रसोई में नाश्ता लेने गई। नाश्ते की प्लेट लगाते लगाते उसके दिमाग में कई सवाल चल रहे थे। बेटी की शादी चार महीने पहले ही हुई है, अब तक कितनी बार तो घर पर आ चुकी है। पर इस पिता के दिमाग में तो यह चीज बैठती ही नहीं। हर बार किसी ना किसी छोटी मोटी बात पर लड़ झगड़ कर आ जाती है और सचिन हर बार अपनी बेटी का सपोर्ट करता है।

सचिन शुरू से ही खनक और सुजॉय में से खनक को बहुत ज्यादा चाहता था। और खनक, वो तो बिल्कुल पापा की परी बनी बैठी है। जिस चीज के लिए कह दे सचिन उसकी हर इच्छा पूरी करता। एक बार सुजॉय के लिए कोई चीज आए ना आए लेकिन खनक के लिए तो कैसे भी करके आएगी जरूर।

माना कि सचिन अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है लेकिन इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि उसके गलत में भी उसका साथ दें। जब शादी होकर ससुराल गई थी तो उसके ठीक सात दिन बाद ही नाराज होकर आ गई थी और बहाना क्या बनाया था कि दहेज में दिया सोफा इन लोगों ने मेरे कमरे में नहीं रखा।


और सचिन इतने महान पिता कि अपनी ही बेटी के पक्ष में जाकर उसके ससुराल वालों से लड़ने को तैयार हो गए। इतना भी दिमाग नहीं लगाया कि खनक के कमरे में जगह बची ही कहाँ है?

कोई और होता तो रिश्ता तो इतनी छोटी सी बात पर ही टूटने की बात आ जाती। वो तो खनक के ससुराल वाले इतने अच्छे थे कि उन लोगों ने खनक का कमरा ही बदल दिया, जिसमें जगह भी अच्छी थी और सोफे उसमें रखने में आ गए। कितनी शर्मिंदगी हुई थी संध्या को कि खनक ने अपनी नई नई शादी में छोटी सी बात के लिए बतंगड़ बना दिया।


हर बार कोई ना कोई बहाना करके घर आ जाती। कभी कहती कि घर का सारा काम मुझसे करवाते हैं तो कभी कहती घर में नौकर नहीं है। कभी कहती कि विक एंड पर अक्षय घुमाने नहीं लेकर जाता तो कभी कहती कि मेरे कमरे में टीवी नहीं लगा रखा। कभी कहती कि ननद पर बेवजह खर्चा करते हैं। कभी क्या बहाना तो कभी क्या बहाना? 

जब संध्या ने अकेले में अक्षय से बात की तो अक्षय ने कहा,

 मम्मी जी मुझसे तो खनक कहती है कि मुझे पापा की याद आ रही है उनसे मिलना है इसलिए मैं लेकर आ जाता हूं और यहां आकर यह इस तरह की बातें करती है। इसे जो भी समस्या है ये हमें सीधा सीधा बोले ना तो उसका कोई सॉल्यूशन भी निकले।और सबसे बड़ी बात है कि कोई चीज उसके मन मुताबिक नहीं होती तो बस उसी चीज का बतंगड़ बना देती है। कुछ समझदारी भी तो दिखाएं। बस ये यहां आकर बोलती है और पापा जी हम से लड़ने को तैयार हो जाते हैं। 

कितनी शर्मिंदगी होती है मम्मी पापा को और मुझे, आखिर मैं भी इकलौता बेटा हूं। मेरे माता पिता को मुझसे भी तो उम्मीद होगी। इकलौती बहन है वो भी मुझसे छोटी। अगर अपनी ख़ुशी से उस पर थोड़ा सा खर्च कर देता हूं तो उसमें बुरा मान जाती है जबकि बहन तो मुझसे कुछ मांग ही नहीं रही। मेरी शादी के लिए मेरे माता पिता ने कर्जा लिया था। तो क्या उस कर्ज को चुकाने की जिम्मेदारी मेरी नहीं थी लेकिन वो ये समझती नहीं


तब भी कितनी शर्मिंदगी महसूस हुई थी संध्या को। कई बार खनक को समझाने की कोशिश की पर वो है कि अपने पापा की शह में समझना नहीं चाहती। और उसके पापा, उनके लिए तो अपनी परी का प्यार हटता ही नहीं। सारी दुनिया में बस उन्हें उनकी बेटी ही दीन दुखी नजर आती है और उसके ससुराल वाले जल्लाद।

ऐसे तो उसका घर बसने से रहा। लेकिन हर बार अक्षय(दामाद) साथ होता है, पर आज ये अकेली? जरूर कोई ना कोई बात हुई होगी।

सोचते सोचते ही संध्या ने प्लेट लगाई और नाश्ता खनक को देने के बाद वही बैठ कर नाश्ता करने लगी। साथ ही साथ बेटी के चेहरे के हाव-भाव को पढ़ने की कोशिश करने लगी। लेकिन इतने में खनक बोली,

पापा आपको मेरी फ्रेंड अदिति याद है जो मेरे साथ पढ़ती थी

हां हां याद है। क्यों क्या हुआ?

उसकी मम्मी का कॉल आया था कल मुझे। वो अदिति के लिए सुजॉय का रिश्ता चाहते हैं। मैंने तो जब से उनसे बात की है तब से मुझे यहां आने की लग गई थी। अक्षय तो शाम के लिए बोल रहे थे पर मैं तो अकेली ही चली गई

उसकी बात सुनकर संध्या को थोड़ी तसल्ली हुई और मन ही मन खुशी हुई कि हे भगवान चलो कोई बड़ी बात नहीं है।

अरे पर वो तो बहुत अमीर लोग हैं। उन्हें तो एक से बढ़कर एक रिश्ते मिल जाएंगे। फिर वो यहां शादी क्यों करना चाहते हो? संध्या ने थोड़ा शक जताते हुए कहा।

क्या मम्मा आप भी? अमीर है तो क्या हुआ?सुजॉय में क्या कमी है? अच्छी खासी गवर्नमेंट जॉब में है, इसके लिए तो एक से बढ़कर एक रिश्ते आएंगे ही ना। अच्छा खासा दहेज देने को तैयार है। और आपको पता है उसके पापा उसकी हर ख्वाहिश पूरी करते हैं। वो जिस चीज के लिए कह देती है, वो शाम तक उसके हाथों में होती है। उसके पापा ने बिल्कुल उसको परी की तरह पाला है जैसे मेरे पापा ने मुझे पाला हैं खनक अपने पापा के गले में हाथ डालते हुए बोली।


मुझे किसी पापा की परी को अपने घर की बहू नहीं बनाना संध्या जी ने कहा तो सब हैरान हो उनकी तरफ देखने लगे।

क्यों मम्मा? इतना अच्छा रिश्ता तो है क्यों मना कर रहे हो? कोई बेटी के पापा उसे इतना प्यार करते तो इसमें गलत क्या है खनक ने तुनकते हुए कहा।


देख बेटा, प्यार करना अच्छी बात है पर अंधा प्यार करना गलत है। मुझे ऐसी कोई आफत अपने घर में नहीं लानी जिसके कारण कल को मुझे शर्मिंदा होकर सिर झुका कर बैठना पड़े

आप कहना क्या चाहती हो?

मुझे तेरे सास ससुर और तेरे पति का चेहरा अच्छे से याद है जब उनके घर में एक पापा अपनी परी के लिए लड़ने के लिए पहुंचते हैं, बिना यह सोचे कि उनकी परी भी गलत है। मुझे तेरी उस ननद का चेहरा याद है जो उम्र में तुझसे आठ साल छोटी है। स्कूल में पढ़ती है लेकिन उसका भाई उस पर थोड़ा सा खर्चा कर देता है तो उसकी पत्नी बुरा मान कर अपने मायके आकर बैठ जाती है। और बजाय अपनी परी को ये बात समझाने के उसके पापा उसके पति की हालत टाइट कर देते हैं।

मुझे तेरे उस पति का चेहरा बहुत अच्छे से याद है जिसकी पत्नी उसकी पत्नी ना होकर अभी तक अपने पापा की परी बनी हुई है। जब उसके पापा उसके पति को दस बातें सुना रहे होते हैं तो उसकी पत्नी का थोड़ा सा भी स्वाभिमान नहीं जागता


संध्या की बात सुनकर सचिन बोला,

क्या बकवास कर रही हो तुम? तुम मेरी बेटी पर बैठे बैठे कटाक्ष कर रही हो 

सच हमेशा कटाक्ष ही लगता है। यही बात तो आप हर बार कहते हो अपनी बेटी के ससुराल वालों से


इससे पहले कि सचिन या खनक कुछ कहते, सुजॉय ने कहा

हां, मुझे भी पापा की परी नही चाहिए। मुझे ऐसी पत्नी चाहिए जो मेरे कदम से कदम मिलाकर चल सके। मेरे घर को अपना घर समझ सके। मेरे मम्मी पापा को अपने मम्मी पापा समझ सके। इस तरह की बार-बार की टेंशन तो मुझे भी नहीं चाहिए


एक तो मेरी बेटी तुम्हारे लिए रिश्ता ढूंढ कर लाई हैं और ऊपर से तुम

जाने दीजिए पापा, सही तो कह रहे हैं मम्मी और सुजाॅय। मैंने ही आपके प्यार और कुछ जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया है। कभी अपने ससुराल वालों को अपना समझा ही नहीं। पर मम्मी प्लीज मुझे माफ कर दो। मैं कोशिश करूंगी बदलने की


संध्या ने खनक की बात सुनकर उसे गले लगा लिया।


दोस्तों, सबसे बड़ा सत्य है। 'मां के श्रवण कुमार' और 'पापा की परी' सुनने में बड़े अच्छे लगते हैं लेकिन इन अंध भक्तों से तो भगवान ही बचाए। क्योंकि इनकी अपनी कोई सोच और समझ नहीं होती। जब भी अपने बच्चों के लिए रिश्ता देखने जाए यह कंफर्म कर ले कि कहीं आप का पाला इन लोगों से तो नहीं पड़ रहा।

चलो कहानी में तो पापा की परी को समझ में आ गया, पर सच्चाई बहुत अलग होती है। आपका क्या ख्याल है कमेंट करके जरूर बताइएगा।

24 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई

 कुछ लड़कियां ऐसी भी होती हैं, जिन्हें यदि संबंधों का सुख न मिले तो वे बेचैन हो जाती हैं। मैं भी उन्हीं में से एक थी। 😔 24 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई, और मेरी कॉलेज की सहेली की भी उसी समय शादी हुई। हमारी शादियाँ अच्छे परिवारों में हुईं, लेकिन हमारे स्वभाव में काफी अंतर था। मैं नटखट और चुलबुली थी, जबकि मेरी सहेली शर्मीली और शांत। 🌸

*शादी के बाद शुरुआती समय में सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन धीरे-धीरे जिम्मेदारियां बढ़ने लगीं और काम का बोझ भी। इससे हम दोनों फ्रस्टेटेड महसूस करने लगे। एक साल गुजर गया, लेकिन हमारे बीच प्राइवेसी की कमी थी। घर में इतने लोग होते थे कि हमें एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका ही नहीं मिलता था।** 😓

*मैंने अपने पति से अलग रहने की बात की ताकि हमें प्राइवेसी मिल सके। मेरे पति इसके खिलाफ थे, लेकिन मैंने जिद की और घर में झगड़े होने लगे। आखिरकार, मेरे पति ने दिल्ली से बेंगलुरु ट्रांसफर ले लिया। यह मेरे लिए आजादी का दिन था। पहले कुछ महीनों में पतिदेव का मूड ऑफ रहता था, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो गया।** 🌆

*फिर एक दिन मेरा पीरियड्स मिस हो गया और पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूं। यह अनप्लान्ड था और मैं काफी घबरा गई थी। मैंने अपनी सहेली को फोन किया तो उसने खुश होकर बताया कि वह भी एक महीने से प्रेग्नेंट है। उसने मुझे समझाया कि प्रेग्नेंसी नाजुक समय होता है और मुझे अपने ससुराल या मायके जाना चाहिए।** 🤰

*मैंने सास को फोन किया और उन्हें बताया तो वे बहुत खुश हुईं और तुरंत मिलने की इच्छा जताई। लेकिन मैंने कहा कि अभी आना मुमकिन नहीं है। धीरे-धीरे मुझे दिक्कतें होने लगीं और मैंने अपनी सहेली से कम बात करनी शुरू कर दी। पतिदेव सुबह ऑफिस जाते और रात में घर आते। डिलीवरी का समय आया तो सास आ गईं लेकिन दो दिन बाद वापस चली गईं।** 🏡

*समय के साथ मुझे एहसास हुआ कि परिवार की अहमियत क्या होती है। मैंने अपनी सहेली से बात करनी शुरू की और उसने बताया कि कैसे उसका परिवार उसका ख्याल रखता है। मुझे महसूस हुआ कि अलग रहकर मैंने गलती की है। मेरे ससुर ने वीडियो कॉल पर बच्चे को देखा और उनकी आंखों में आंसू आ गए। मेरे पति ने देखा और उदास हो गए।** 😢📱

अगले दिन, उन्होंने कहा कि हम घर चलें। हम बिना बताए घर पहुंचे और सब बहुत खुश हो गए। मेरे ससुर, जो ठीक से चल नहीं पाते थे, दौड़कर आए और बच्चे को गोद में लिया। तीन दिन तक सब कुछ वैसे ही चला जैसे मेरी सहेली के साथ होता था।** 👶👨‍👩‍👧‍👦

*चौथे दिन मैंने अपने पति से पूछा कि कब चलना है। उन्होंने जवाब दिया कि अब वहाँ नहीं जाना है। उन्होंने कहा कि मुझे खुद को सुधारने की जरूरत है और हम परिवार से दूर नहीं रह सकते। उस दिन मुझे एहसास हुआ कि परिवार के साथ रहना कितना महत्वपूर्ण है।** 🏡💖

*आज मैं मानती हूं कि शादी के बाद अलग रहने का विचार मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। परिवार के साथ रहने से मिलने वाले फायदे और प्यार के आगे आजादी की कोई कीमत नहीं है।** 🌟💞

आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार

 आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार


चैत्र ( मार्च-अप्रैल) – इस महीने में चने का सेवन करे क्योकि चना आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।


वैशाख (अप्रैल – मई)- वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।


ज्येष्ठ (मई-जून) – भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।


अषाढ़ (जून-जुलाई) – आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला, बथुआ आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।


श्रावण (जूलाई-अगस्त) – श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए। श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।


भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर) – इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे। इस महीने में चिता औषधि का सेवन करना चाहिए।


आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर) – इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है। ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।


कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) – कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे। ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे। छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।

मार्गशीर्ष (नवम्बर-दिसम्बर) – इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।


पौष (दिसम्बर-जनवरी) – इस ऋतू में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे। ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।

माघ (जनवरी-फ़रवरी) – इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है। घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।

फाल्गुन (फरवरी-मार्च) – इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले। चने का उपयोग न करे।

Monday, 2 September 2024

बेटी को बाहर पढ़ने भेज रहे हैं, तो उससे कठोर नहीं बल्कि दोस्त बनकर इस बारे में बात करें।

 मैं तो किसी भी लड़के के सामने टांग खोल कर लेट जाऊंगी, और मिनट में मेरा काम हो जाएगा, तुम अपना सोचो। 😔मेरा नाम सोनी है, और मैं मध्य प्रदेश के छोटे से गांव जोगियापुर में रहती हूँ। 🏡 अपने भाई-बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण, घर की जिम्मेदारियाँ मेरे कंधों पर हैं। मेरे माता-पिता ईंट भट्ठे पर काम करते थे, लेकिन एक हादसे में पापा का एक हाथ कट गया और तबसे उन्होंने काम पर जाना बंद कर दिया।💔


जब मैं घर से आ रही थी, तो पापा ने मुझे ₹5000 दिए और बोले, "बेटा, अपना ध्यान रखना।" 💸 **क्योंकि हॉस्टल में खाना-पीना और रहना हो ही रहा था, मेरे पास बस कुछ निजी खर्चे ही थे। मुझे लगा था कि यह पैसे पर्याप्त होंगे, पर ऐसा नहीं था। 😟 कॉलेज में मैंने देखा कि जो लड़कियाँ फीस माफी की एप्लीकेशन देती हैं, उनके पास महंगे फोन और कपड़े होते हैं और वे कहीं आने-जाने के लिए कार बुक करती हैं।🚗


**जब मैंने इस बारे में और जानना चाहा, तो जो बातें सामने आईं, उनसे मैं हैरान रह गई। यह सब मेरे लिए अविश्वसनीय था, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह आम बात थी।** 😳 **आप में से कुछ लोग मेरी इस बात को सुनकर गुस्सा करेंगे और कुछ को यकीन नहीं होगा, लेकिन एक बहुत बड़ा तबका है जो इस सच्चाई को अच्छी तरह जानता है। यह तबका जानता है कि कैसे शहर की लड़कियाँ कॉलेज में पढ़ाई के साथ अपना खर्च चलाती हैं।**


**मुझे पता चला कि ये लड़कियाँ अमीर लड़कों को ढूंढती हैं, जिनकी शक्ल-सूरत से ज्यादा पैसा मायने रखता है।** 💰 **यह सारी प्रक्रिया एक क्रमबद्ध तरीके से होती है। पहले लड़कियाँ एक अच्छा लड़का फंसाती हैं, कुछ दिन प्यार भरी बातें करती हैं और 1-2 हफ्ते में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं।** 😶 **इसके लिए वे डेटिंग ऐप, पब-बार, और महंगी पार्टियों का सहारा लेती हैं, जहां अमीर लड़के आते हैं। एक बार शारीरिक संबंध बन जाने के बाद ये लड़कियाँ लड़कों को अपने वश में कर लेती हैं, और बदले में महंगे मोबाइल, कपड़े, रेस्टोरेंट में खाना आदि मांगती हैं।** 📱👗


**लेकिन इसमें गलती सिर्फ लड़कियों की नहीं है, उनके माता-पिता की भी है। आखिर वे क्यों नहीं पूछते कि उनकी बेटी को इतना महंगा फोन और हर हफ्ते नए कपड़े कहां से मिल रहे हैं?** 🤔 **इस तरह लोग अपना खर्चा चलाते हैं। यह सुनकर आपको लग सकता है कि किसी लड़के को बेवकूफ बनाना कितना आसान है।**

*लेकिन लड़के हमेशा अच्छे नहीं होते हैं। कई बार लड़कियाँ अपने क्षणिक सुख के लिए यह काम करती हैं, लेकिन कैसे चुटकी बजाते ही उनकी जिंदगी खराब हो जाती है, यह मैं बताती हूँ।** 😓 **हमारे वार्ड नंबर 6 के कमरे नंबर 33 की एक लड़की को भी यही नशा चढ़ा था। उसे एक लड़का मिल गया, जो उसे महंगे गिफ्ट और फोन देकर फंसाता रहा। उसने जितना गिफ्ट और पैसे दिए थे, उसका चार गुना लड़की के जिस्म को बेचकर कमा लिया था।** 😢


**एक दिन उस लड़के ने उसे अपने कुछ जानने वालों के साथ संबंध बनाने को कहा। लड़की समझ गई कि वह फंस चुकी है, लेकिन मजबूरी में उसे यह सब करना पड़ा।** 😔 **उसके पास नग्न अवस्था की वीडियो थी, जिसे दिखाकर उसे ब्लैकमेल किया गया। यह सिलसिला चलता रहा और लड़की को समाज के डर से कोई एक्शन नहीं ले सकी। आज वह लड़की काउंसलिंग सेंटर में है, क्योंकि वह अंदर से इतनी स्ट्रॉन्ग नहीं थी।** 😢


**यह एक सच्ची कहानी है, जो बड़े शहर में जाने के बाद कई लड़कियों और लड़कों के साथ होती है।** 😔 **मेरे हॉस्टल में 100 में से 98 लड़कियाँ इसी तरह अपना खर्चा चलाती थीं और उनमें से 10 लड़कियों का जमकर शारीरिक शोषण होता था।** 😓 **यह नंबर सुनने में कम लग सकता है, लेकिन हो सकता है कि आपकी बहन या बेटी भी कभी बड़े कॉलेज में एडमिशन ले और इस रास्ते पर चल पड़े।**

*मैं सभी पैरेंट्स से अनुरोध करूंगी कि आप अपनी बेटी को बाहर पढ़ने भेज रहे हैं, तो उससे कठोर नहीं बल्कि दोस्त बनकर इस बारे में बात करें।** 💬 **उन्हें बताएं कि कैसे लोग चंद जरूरतों के लिए अपना जिस्म किसी गैर लड़के के हाथ में देते हैं और बाद में उन्हें जीवन भर पछताना पड़ता है।** 😢 **यदि उन्हें किसी से प्रेम है या कोई मित्र बना है, तो सबसे पहले मित्रता परिवारवालों की नजर के सामने करें।** 👨‍👩‍👧 **ऐसे दोस्त बनाएं जो आपको अपने माता-पिता से मिलाने में हिचकिचाहट महसूस न करें। नहीं तो पल भर में ही एक कॉलेज स्टूडेंट से वैश्या बनने में समय नहीं लगेगा।** 😞

प्रेम और सेक्स*

 **प्रेम और सेक्स**


अगर कोई पुरुष किसी स्त्री के पास जाता है और कहता है कि "मैं तेरे करीब इस कारण हूँ कि मैं प्यार करता हूँ," तो यह धोखा है। यह गलत है। 


सेक्स शरीर की जरूरत है, तो यह गलत नहीं है। पर सेक्स को प्यार कहने की भूल से बचें। ईमानदार रहें। अगर सेक्स करना है, तो सामने वाले को साफ शब्दों में कहें। 

और साथी से पहले, खुद को स्पष्ट कर लें कि आप प्यार में हैं या वासना में। 


स्त्री फूल की तरह कोमल होती है। और फूल को रगड़कर, नोचकर, उसके शरीर पर निशान बनाकर या बाहर-भीतर घिसकर, प्यार नहीं किया जाता। स्त्री का शरीर और उसकी योनि की नसें बेहद संवेदनशील होती हैं। बहुत ज्यादा बारीक होती हैं। 


आज जो महिलाएं अपनी डॉक्टर के पास जा रही हैं, उसका एक कारण यह भी है कि उनके शारीरिक संबंधों में हिंसा है। वासना के वेग के चलते, न तो पुरुष को होश रहता है और न स्त्री इतनी हिम्मत कर पाती कि पुरुष को 'न' कह सके। 


और फिर बच्चेदानी में हजारों बीमारियां लग जाती हैं। मासिक धर्म में भयानक दर्द, OCD, PCOD और पता नहीं क्या-क्या सहन करना पड़ता है। 


पुरुष एक्टिव है स्वभाव से और स्त्री पैसिव। इसलिए यहां पुरुष को समझना चाहिए कि पल भर की वासना के लिए किसी स्त्री का शरीर खराब न करें। वैसे भी अगर सेक्स को धैर्य और तरीके से किया जाए, और एक ठहराव हो भीतर तो उसके परिणाम दोनों व्यक्तियों के लिए सुखद होते हैं। और संतुष्टि भी मिलती है। 


लेकिन जोश में आकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाले पुरुष, कभी भी संतुष्टि को उपलब्ध नहीं होते। जो व्यक्ति विवाहित हैं, उन्होंने अनुभव किया होगा कि सालों तक सेक्स करने पर भी उनके भीतर सेक्स की इच्छा ज्यों की त्यों है। इसका कारण यही है कि उन्होंने गहराई से कभी इस चीज को नहीं जाना। 


45 मिनट से पहले तो स्त्री का शरीर खुलता ही नहीं कि वह तुम्हें अपनी बाहों में भरे, या तुम्हें अनुमति दे कि तुम उसके भीतर प्रवेश करो। इसलिए फोरप्ले का इतना महत्व है। और ठीक उसी तरह आफ्टरप्ले भी अर्थ रखता है कि तुम्हारी वजह से मैं जीवन ऊर्जा का आनंद ले पाया। 


केवल पेनिट्रेशन को सेक्स समझने वाले, बलात्कारी हैं। अपने ही साथी का बलपूर्वक हरण करना, बलात्कार ही होता है। आज जो 70 फीसदी महिलाएं ऑर्गेज़्म से अनजान हैं, उसका कारण सेक्स की अज्ञानता है। इस बात को अहंकार पर चोट न समझें, बल्कि अपने आपको बेहतर बनाने का प्रयास करें। अपनी महिला मित्र के पैर छुएं, उससे अनुमति लें, उसके प्रति श्रद्धा भाव रखें, और इस बात का ध्यान रखें कि उसे दर्द न दें, आनंद दें। 


भले तुम दस मिनट, आधे घंटे का सेक्स कर लो, पर स्त्री अछूती ही रह जाती है तुम्हारे स्पर्श से, और तुम भी अधूरे ही लौटकर आते हो। बहुत धीरे-धीरे शरीर तैयार होता है, बहुत धीरे-धीरे वे द्वार खुलते हैं, जब तुम्हें अनुमति मिलती है। 


और यह सब समझने के लिए भीतर स्थिरता चाहिए। और बिना मेडिटेशन के यह संभव नहीं। बिना मेडिटेशन जीवन उथला ही रहता है। अगर गहराई चाहिए जीवन में, तो ध्यान बहुत जरूरी है। 


होश, ठहराव, स्थिरता, धीरज, प्रेम, श्रद्धा – ये सारे शब्द केवल ध्यान करने से ही जीवन में उतरेंगे। किताबें पढ़ने या ज्ञान सुनने से कुछ नहीं होगा।

पति और पत्नी दोनों सरकारी अधिकारी थे,

 पति और पत्नी दोनों सरकारी अधिकारी थे, जिसमें पत्नी का पद पति से एक रैंक छोटा था। 😝 एक दिन उनमें किसी बात पर ऐसी खटपट हो गई कि दोनों के बीच बोलचाल बंद हो गई। घर में तीसरा कोई नहीं था, तो यह चुप्पी और भी तकलीफदेह हो गई। लेकिन चूंकि दोनों सरकारी कर्मचारी थे, तो उन्होंने इस समस्या का समाधान भी सरकारी तरीके से निकाल लिया - नोट शीट के माध्यम से! 😍


एक शाम, जब पति महोदय घर लौटे, तो पत्नी ने नोट शीट पर लिखा, "थके हुए लग रहे हैं, क्या चाय लेना चाहेंगे?" 


पति ने लिखा, "यथा प्रस्तावित!" 😁


पत्नी ने आगे लिखा, "अगर आदेश हो, तो क्या बिस्किट भी साथ में संलग्न किए जाएं?" 


पति ने जवाब दिया, "अनुमोदित, लेकिन केवल 2 ही स्वीकृत हैं!" 😜


इस तरह नोट शीट के जरिये चाय-पानी, खाना-पीना सब कुछ चलता रहा, लेकिन बातचीत बंद ही रही। 


फिर एक दिन, पत्नी ने एक और नोट शीट प्रस्तुत की, "मांजी की तबीयत ठीक नहीं है, चार दिनों के लिए मायके जाना चाहती हूं। कृपया अवकाश स्वीकृत कर रिलीव करें।" 


पति ने लिखा, "स्वीकृत, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही अवकाश पर जाएं।" 


इसके बाद घर में मानो पानीपत का चौथा युद्ध शुरू हो गया... और अब पति महोदय मेडिकल लीव पर हैं। 


**मजेदार लगी हो तो हंसी का इजहार जरूर करें! 

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...