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Sunday, 1 September 2024

सुहागरात: सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का पल

 💞 सुहागरात: सिर्फ शारीरिक संबंध नहीं, एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव का पल 💞


जब भी हम सुहागरात की बात करते हैं, तो अक्सर लोगों के मन में इसका मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना होता है। लेकिन क्या वाकई सुहागरात का मतलब सिर्फ यही है? 🤔


सुहागरात का पारंपरिक मतलब सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना नहीं होता। यह रात नवविवाहित दंपति के लिए एक खास और महत्वपूर्ण समय होता है। यह वो समय है जब दोनों साथी एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जानने, समझने और अपने रिश्ते को एक नई दिशा देने की कोशिश करते हैं। 🌹


इस रात का असली महत्व एक-दूसरे के साथ खुलकर बातचीत करने में होता है। यह वक्त होता है अपनी भावनाओं, अपने अनुभवों, और अपने भविष्य की योजनाओं को साझा करने का। 💬 यह वह समय है जब दोनों साथी एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने का प्रयास करते हैं।


सुहागरात का माहौल आरामदायक और प्रेमपूर्ण होना चाहिए, ताकि दोनों साथी एक-दूसरे के साथ सहज महसूस कर सकें। अगर शारीरिक संबंध बनाने का विचार है, तो यह जरूरी है कि दोनों इसके लिए सहमत और तैयार हों। किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए। 🚫


इस रात को खास और यादगार बनाने के लिए कुछ रोमांटिक समय बिताना भी शामिल हो सकता है। जैसे कि मोमबत्तियों की रोशनी में डिनर, संगीत सुनना, या एक-दूसरे के साथ प्यार भरे पल साझा करना। 🎶🌟


इसलिए, सुहागरात सिर्फ शारीरिक संबंध बनाने का नाम नहीं है, बल्कि यह वह समय है जब आप एक मजबूत भावनात्मक और मानसिक संबंध बना सकते हैं। 💖

लेखक: सुनिल राठौड़ 

पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है

 **पत्नी है तो दुनिया में सब कुछ है।** राजा की तरह जीने और आज दुनिया में अपना सिर ऊंचा रखने के लिए अपनी पत्नी का **शुक्रिया** अदा कीजिए। 😊 आपकी **सुविधा-असुविधा**, आपके बिना कारण के क्रोध को संभालती है। तुम्हारे **सुख से सुखी** है और तुम्हारे **दुःख से दुःखी** है। आप रविवार को देर से बिस्तर पर रहते हैं लेकिन इसका कोई रविवार या त्योहार नहीं होता है। **चाय लाओ, पानी लाओ, खाना लाओ**। ये ऐसा है और वो ऐसा है। कब अक्कल आएगी तुम्हें? ऐसे ताने हम मारते हैं। उसके पास **बुद्धि** है और केवल उसी के कारण तो आप **जीवित** हैं। वरना दुनिया में आपको कोई भी नहीं पूछेगा। 🙏


अब जरा इस स्थिति की सिर्फ **कल्पना** करें:

एक दिन **पत्नी** अचानक रात को गुजर जाती है! घर में रोने की आवाज आ रही है। पत्नी का **अंतिम दर्शन** चल रहा था। उस वक्त पत्नी की आत्मा जाते-जाते जो कह रही है, उसका वर्णन: 😢


"मैं अभी जा रही हूँ, अब फिर कभी नहीं मिलेंगे। जिस दिन शादी के फेरे लिए थे, उस वक्त साथ-साथ **जीने का वचन** दिया था, पर अब अकेले जाना पड़ रहा है, यह मुझको पता नहीं था। मुझे जाने दो। अपने आंगन में अपना शरीर छोड़ कर जा रही हूँ। बहुत **दर्द** हो रहा है मुझे, लेकिन मैं मजबूर हूँ, अब मैं जा रही हूँ। मेरा मन नहीं मान रहा, पर अब मैं कुछ नहीं कर सकती। मुझे जाने दो। 💔


**बेटा और बहू** रो रहे हैं, देखो। मैं ऐसा नहीं देख सकती और उनको दिलासा भी नहीं दे सकती हूँ। **पोता** 'बा बा बा' कर रहा है, उसे शांत करो, बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हो। हाँ, और आप भी मन मजबूत रखना और बिल्कुल ढीले न होना। मुझे जाने दो। 👶


अभी बेटी **ससुराल** से आएगी और मेरा मृत शरीर देखकर बहुत रोएगी। उसे संभालना और शांत करना। और आप भी बिल्कुल नहीं रोना। मुझे जाने दो। जिसका **जन्म** हुआ है, उसकी **मृत्यु** निश्चित है। जो भी इस दुनिया में आया है, वह यहाँ से ऊपर गया है। धीरे-धीरे मुझे भूल जाना, मुझे बहुत याद नहीं करना। और इस जीवन में फिर से **काम में डूब जाना**। अब मेरे बिना जीवन जीने की आदत जल्दी से डाल लेना। मुझे जाने दो। 🌺


आपने इस जीवन में मेरा कहा कभी नहीं माना है। अब जिद छोड़कर **व्यवहार** में विनम्र रहना। आपको अकेला छोड़कर जाते हुए मुझे बहुत चिंता हो रही है, लेकिन मैं मजबूर हूँ। मुझे जाने दो। 😔


आपको **BP** और **डायबिटीज** है। गलती से भी मीठा नहीं खाना, अन्यथा परेशानी होगी। सुबह उठते ही दवा लेना न भूलना। **चाय** अगर आपको देर से मिलती है तो बहू पर गुस्सा न करना। अब मैं नहीं हूँ, यह समझकर जीना सीख लेना। मुझे जाने दो। ☕💊


**बेटा और बहू** कुछ बोले तो चुपचाप सब सुन लेना। कभी गुस्सा नहीं करना। हमेशा **मुस्कुराते** रहना, कभी उदास नहीं होना। मुझे जाने दो। अपने बेटे के बेटे के साथ **खेलना**। अपने दोस्तों के साथ समय बिताना। अब थोड़ा धार्मिक जीवन जीएं ताकि जीवन को संयमित किया जा सके। अगर मेरी याद आये तो चुपचाप **रो** लेना लेकिन कभी कमजोर नहीं होना। मुझे जाने दो। 😇


मेरा **रूमाल** कहां है, मेरी **चाबी** कहां है, अब ऐसे चिल्लाना नहीं। सब कुछ ध्यान से रखने और याद रखने की आदत डालना। सुबह और शाम नियमित रूप से दवा ले लेना। अगर बहू भूल जाये तो सामने से याद कर लेना। जो भी **खाने** को मिले, प्यार से खा लेना और गुस्सा नहीं करना। मेरी अनुपस्थिति खलेगी, पर कमजोर नहीं होना। मुझे जाने दो। 🔑🍴


**बुढ़ापे की छड़ी** भूलना नहीं और धीरे-धीरे चलना। यदि बीमार हो गए और बिस्तर में लेट गए तो किसी को भी सेवा करना पसंद नहीं आएगा। मुझे जाने दो। शाम को बिस्तर पर जाने से पहले एक लोटा **पानी** मांग लेना। प्यास लगे तो ही पानी पी लेना। अगर आपको रात को उठना पड़े तो अंधेरे में कुछ लगे नहीं, इसका ध्यान रखना। मुझे जाने दो। 🚶‍♂️💧


शादी के बाद हम बहुत **प्यार** से साथ रहे। परिवार में फूल जैसे बच्चे दिए। अब उस फूलों की सुगंध मुझे नहीं मिलेगी। मुझे जाने दो। उठो, सुबह हो गई, अब ऐसा कोई नहीं कहेगा। अब अपने आप उठने की आदत डाल लेना, किसी की प्रतीक्षा नहीं करना। मुझे जाने दो। 🌷🌞


और हाँ, एक बात तुमसे छिपाई है, मुझे माफ कर देना। आपको बिना बताए बाजू की **पोस्ट ऑफिस** में बचत खाता खुलवाकर **14 लाख रुपये** जमा किये हैं। मेरी दादी ने सिखाया था। एक-एक रुपया जमा करके कोने में रख दिया। इसमें से पाँच-पाँच लाख बहू और बेटी को देना और अपने खाते में चार लाख रखना अपने लिए। मुझे जाने दो। 💸💼


भगवान की **भक्ति** और पूजा करना भूलना नहीं। अब फिर कभी नहीं मिलेंगे! मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना।" 🙏


इस आत्मीय संदेश में पत्नी की भावनाएं और उसकी देखभाल की **जिम्मेदारी** को दर्शाया गया है, जो उसके जाने के बाद भी परिवार को संभालने का संदेश देती है। 💖

बच्चों के सेक्स एजुकेशन को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन एक प्रमुख राय यह है

 बच्चों के सेक्स एजुकेशन को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण हो सकते हैं, लेकिन एक प्रमुख राय यह है कि बच्चों को इस विषय में समय पर और सही तरीके से जानकारी दी जानी चाहिए। यह जानकारी देने वाला व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिसे न केवल शरीर शास्त्र की, बल्कि बच्चों के मनोविज्ञान की भी गहरी समझ हो। मुझे जयपुर में इसी तरह की एक क्लास में शामिल होने का मौका मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों को समय पर सेक्स से संबंधित जानकारी देना कितना आवश्यक है। 🎓


एक नजरिया यह भी है कि जैसे अन्य जीव बिना किसी विशेष शिक्षा के सेक्स की समझ विकसित कर लेते हैं, वैसे ही मनुष्य भी कर सकता है। आमतौर पर धार्मिक और परंपरावादी लोग यही सोचते हैं। लेकिन मेरी जानकारी में, किसी भी धर्म में सेक्स एजुकेशन के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। कुछ जनजातियों में सेक्स एजुकेशन के कुछ रूप देखे जा सकते हैं, लेकिन इसका कोई व्यवस्थित ढांचा वहां भी नजर नहीं आता। 🌍


कुछ लोग मानते हैं कि अगर वे अपने बच्चों के सामने सहज और सामान्य व्यवहार करें, जिससे बच्चे उनके शरीर से परिचित हो जाएं, तो बच्चों में विपरीत सेक्स के प्रति सहजता विकसित हो सकती है। लेकिन यह सेक्स एजुकेशन का कोई कारगर उपाय नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं स्विमिंग सूट पहनती हैं और उनके इर्द-गिर्द बच्चे और हर उम्र के पुरुष भी होते हैं। लेकिन उन समाजों में भी सेक्स आधारित हिंसा होती है। यह साफ है कि किशोर-किशोरियां अगर स्त्री या पुरुष के शरीर को देख लेते हैं, तो इससे विपरीत सेक्स के प्रति कोई विशेष सहजता विकसित नहीं होती। 🏊‍♀️


अब उस तर्क की बात की जाए कि समय के साथ सभी लोग सेक्स से जुड़ी जरूरी बातें खुद ही सीख लेते हैं, जैसे दूसरे प्राणी। यहां मनुष्य और दूसरे प्राणियों में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उदाहरण के लिए, मनुष्य का सेक्स के लिए कोई निश्चित समय नहीं होता। वह बच्चा पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि आनंद के लिए सेक्स करता है। बच्चे बाई डिफॉल्ट पैदा हो जाते हैं। मनुष्य स्त्री के मासिक धर्म के दौरान या गर्भावस्था में भी सेक्स करता है। स्त्री की मर्जी न हो, वह बीमार हो, कम या ज्यादा उम्र की हो, फिर भी उसके साथ सेक्स हो सकता है। यह सभी बातें दिखाती हैं कि मनुष्य का सेक्स जीवन अन्य प्राणियों जितना सरल नहीं है। 🌱


मनुष्येतर प्राणियों में अगर मादा का शरीर सेक्स के लिए तैयार नहीं है तो नर उसके करीब नहीं जाता। मादा भी एक खास मौसम या समय में ही सेक्स के लिए तैयार होती है। इस तरह यह बात स्पष्ट है कि मनुष्य का सेक्स जीवन और मनुष्येतर प्राणियों का सेक्स जीवन समान नहीं माना जा सकता। 🌿


स्त्री की यौनिकता को सदियों से नियंत्रित किया गया है जिससे मनुष्य का सेक्स जीवन विकृत हो गया है। हालांकि इसका सम्पूर्ण इलाज एक न्यायपूर्ण समाज व्यवस्था में ही संभव है, लेकिन जब तक ऐसा नहीं होता, बच्चों को जननांगों की कार्यप्रणाली और सामाजिक जीवन में इसे सीमित करने के मामले के सकारात्मक और नकारात्मक पक्षों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा बात होनी चाहिए। 🗣️


अंतिम बात, हम सब एक कामाणु का ही विस्तार हैं, इसलिए सेक्स को पाप, अधर्म या ऐसा कुछ कहना सही नहीं है, इसे समझना जरूरी है। यह भी आवश्यक है कि फैमिली लाइफ के सुख-दुःख का गहरा संबंध स्वस्थ सेक्स लाइफ से है, इसलिए इसे नजरअंदाज या उपेक्षित नहीं किया जा सकता और न ही किसी प्रकार की झाड़फूंक टाइप शिक्षा का इस्तेमाल किया जा सकता है। 🌟

रिलेशनशिप क्या है....?

 रिलेशनशिप क्या है....?


रिलेशनशिप का मतलब एक bf या gf वाला रिलेशनशिप ही नही होता....! 


एक ऐसा रिलेशन जिसमे दो लोग सिर्फ 

भावनाओं से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं..!


इक ऐसा रिश्ता जिस पर कोई सामाजिक 

मोहर या नाम नही होता. 

मगर समाज के हर दिखावटी रिश्ते से 

बढ़कर फर्ज निभाया जाता है


एक ऐसा बंधन जिसमे आप एक दूसरे से 

जुड़े भी रहते है और आपकी आज़ादी पर भी 

किसी तरह की कोई पाबंदी नही रहती


वो एहसास जो आपको कभी तन्हा नही रहने देता... 

ज़रूरी नही की कोई आपके साथ चल रहा है 

तभी साथ है,

ज़रूरी तो ये है की किसी की मौजूदगी 

आपको कभी अकेला महसूस ना होने दे..!


आपकी हँसी में जिसकी खुशी शामिल हो,

आपके दर्द में नमी उसकी पलकों पर ठहर जाये.... 

एक ऐसा रिलेशन जिसमे वादे नही होते,

कसमें नही खायी जाती

बस एक एहसास जो दो लोगो को 

आपस में जोड़े रखता है.


रिलेशन शिप का अंत ज़रूरी नही की 

शादी हो या हमेशा के लिए बिछड़ जाना.... 

उम्र भर निभाया जाने वाला एक अहसास 

एक भरोसा कि चाहे मेरे साथ कोई हो ना हो 

वो हमेशा होगा.. 

एक विश्वास जो आपको कभी कमज़ोर नही पड़ने देता!!

लेखक: सुनिल राठौड़.....

मैं भी एक स्त्री हीं हूं

 वर्ना.. .... वर्ना क्या कर लेंगींं आप?? - सविता गोयल 

नीलम एक मध्यमवर्गीय परिवार की पढ़ी लिखी, सर्वगुण संपन्न लड़की थी। उसके पिता उसके लिए रिश्ता देख हीं रहे थे कि नीलम की बुआ एक बड़े घर का रिश्ता लेकर आ गई। देखने सुनने में सब अच्छा लगा तो नीलम के पापा ने नीलम की रजामंदी से उसका रिश्ता वहीं तय कर दिया।


नीलम भी आंखों में नए संसार, प्यार और अपनेपन के सपने लेकर बहू बनकर अपने ससुराल आ गई। शुरुआत में तो सब अच्छा हीं लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे नीलम की सास के व्यवहार में अंतर आने लगा था। हर रोज कांता जी हर बात पर टोकना और छोटे घर की होने का ताना देने लगी थी।


शादी के चार पांच दिन बाद हीं घर के सारे काम काज का भार कांता जी ने नीलम के सर मंढ दिया और खुद सिर्फ हर काम पर नजर रखने और कमी निकालने में लगी रहतीं।


एक दिन सब्जी में नमक थोड़ा ज्यादा हो गया तो कांता जी चिल्लाते हुए बोली, " कुछ सिखाया नहीं तेरी मां ने ... ढंग से काम कर वर्ना ......


नीलम धोने के कपड़े लेकर वाशिंग मशीन की तरफ बढ़ी तो कांता जी चिल्लाते हुए बोली, " तुझे पता भी है मशीन चलाने से बिजली का बिल कितना आता है?? बिजली का बिल क्या तेरा बाप भरेगा? चुपचाप बैठकर हाथ से कपड़े धो ले वर्ना... ,,


जब नीलम पगफेरे के लिए मायके जा रही थी तो कांता जी बोलीं, " शादी में तो तेरे बाप ने कुछ दिया नहीं इस बार वापस आए अपने बाप से कह देना .. तो मेरे बेटे के लिए एक सोने की चैन और घड़ी दे कर भेजे .. वर्ना... ,,


नीलम मायके जरूर गई लेकिन वहां इस बात का जिक्र भी नहीं किया । बहू को खाली हाथ वापस आया देख कांता जी फिर चिल्लाई , " तुझे कहा था ना कि चैन और घड़ी लेकर आना .... खाली हाथ आने की तेरी हिम्मत कैसे हुई? अभी फोन लगा तेरे बाप को ... वर्ना....


इस बार बाप का नाम आते हीं नीलम के सब्र का बांध टूट गया और वो भी ऊंची आवाज में बोल पड़ी, " वर्ना ... वर्ना क्या मां जी ?? क्या कर लेंगी आप?? मुझे वापस मायके भेजेंगी तो सुन लीजिए.... ये घर जितना आपका है अब मेरा भी है .. और अगर अपने बेटे की दूसरी शादी कराने का इरादा है तो मैं आपके बेटे को तलाक कभी नहीं देने वाली ... और क्या करेंगी ?

मुझपर हाथ उठाएंगी!!!

तो सोचना भी मत.. क्योंकि मैं स्कूल में कराटे चैंपियन रह चुकी हूं .... आप बड़ी हैं इसलिए हाथ नहीं उठाऊंगी.. लेकिन उठे हुए हाथ को ऐसा मरोडूंगी कि दोबारा उठाने लायक भी नहीं रहेगा.....

  और... और क्या करेंगी!! रो धोकर अपने बेटे और ससुर जी को दिखाएंगी, मेरी शिकायत करेंगी !! त्रिया चरित्र दिखाकर बेटे और परिवार वालों को मेरे खिलाफ करेंगी ?? तो सुन लीजिए.... मैं भी एक स्त्री हीं हूं.. ये रोना धोना और नौटंकी दिखाना मुझे भी आता है...


और हां... ज्यादा परेशान करने की कोशिश की तो पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवा दूंगी ... इसलिए भलाई इसी में है कि आराम से जिएं और मुझे जीने दें... वर्ना...


बहू की चेतावनी सुनकर कांता जी का हलक सूख गया। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि सीधी सादी दिखने वाली बहू इतना कुछ बोल भी सकती है। पसीने से तर कांता जी की सांस फूलने लगी तो नीलम ने पानी का गिलास पकड़ाते हुए कहा ,

" मां जी यदि आप चाहती हैं कि मैं इस बात का जिक्र किसी से ना करूं तो विश्वास रखिए नहीं करूंगी ..... लेकिन यदि आप चाहती हैं कि मैं आपकी इज्जत करूं तो खुद को सुधारने में हीं भलाई है। ,,

कांता जी ने एक सांस में हीं पानी का पूरा गिलास गटक लिया। शाम को जब नीलम के ससुर और पति आफिस से वापस आया तो घर का माहौल बिल्कुल शांत था। नीलम चाय लेकर आई तो सबके साथ कांता जी ने भी चुपचाप चाय पी ली। आज कोई नुक्स कोई कमी कांता जी को नजर नहीं आ रही थी ....

पैसे की कोई कमी नहीं थी

 मनीष अपनी पत्नि सीमा से बहुत प्यार करता था। सीमा भी मनीष के बिना रह नहीं सकती थी। उसका हीरों का व्यापार था।


पैसे की कोई कमी नहीं थी। एक दिन मनीष अपने ऑफिस में बैठा काम कर रहा था। तभी उसे एक बड़ा ऑडर मिलता है।


मनीष अपने मैंनेजर से बात करता है।


मनीष: सुनों राकेश यह हमारा आज तक का सबसे बड़ा ऑडर है। मैं अभी बैंक जा रहा हूं इस ऑडर को पूरा करने के लिये मुझे बैंक से लोन लेना पड़ेगा। तुम स्टॉफ से कहो कि वे इसे पूरा करने के लिये तैयार रहें हो सकता है हमें दिन रात काम करना पड़े।


राकेश: जी सर आप चिन्ता न करें सब हो जायेगा।


मनीष सीधा बैंक पहुंच जाता है। बैंक मैंनेजर से अच्छी जान पहचान होने के कारण उसे आसानी से लोन मिल जाता है। बैंक मैंनेजर उससे कहता है कि वह कल सारे पेपर जमा करा दे इसी हफ्ते में लोन की रकम उसके एकाउंट में आ जायेगी।


शाम को मनीष खुशी खुशी घर आकर सीमा को यह खुशखबरी देता है। सीमा बहुत खुश होती है।


सीमा: यह ऑडर पूरा होने पर तुम मुझे बाहर घुमाने ले जाओगे।


मनीष: हां ठीक है इंड्यिा से बाहर चलेंगे लेकिन कुछ दिनों तक मुझे मेहनत करनी होगी हो सकता है मैं घर भी न आ सकूं। तुम चिन्ता मत करना।


सीमा: आप बेफिक्र होकर काम कीजिये मेरी चिन्ता बिल्कुल मत कीजिये।


दो दिन बाद मनीष को ऑडर मिल जाता है।


मनीष: राकेश मैं डायमंड लेने के लिये गुजरात जा रहा हूं। तीन चार दिन में आ जाउंगा। तुम एक काम करो स्टाफ से बात करके रखो और जरूरत पड़े तो ज्यादा स्टॉफ हायर करने का प्रोसेस शुरू कर दो। ये ऑडर हमें हर हाल में समय से डिलीवर करना है।


राकेश: सब हो जायेगा सर लेकिन डायमंड लेने आप खुद क्यों जा रहे हैं।


मनीष: नहीं मैं इतने सारे डायमंड के लिये किसी पर भरोसा नहीं कर सकता। मुझे खुद ही लाने होंगे। तुम यहां ध्यान रखना मैं परसों तक आ जाउंगा।


अगले दिन मनीष दिल्ली से फ्लाईट लेकर गुजरात पहुंच जाता है। वहां अपने पुराने होलसेलर से मिल कर डायमंड खरीद लेता है।


उसी दिन की फ्लाईट से वापास आ जाता है। रात को करीब ग्यारह बजे फ्लाईट लेंड होती है। मनीष ड्राईवर को फोन कर गाड़ी मंगवा लेता है।


गाड़ी में बैठ कर वह अपने घर की ओर चल देता है।


रास्ते में सुनसान सड़क पर ड्राईवर तेजी से गाड़ी दौड़ा रहा था।


मनीष: सुनो इतनी जल्दी क्या है घर ही तो जाना है जरा आराम से चलो।


ड्राईवर: जी साहब


लेकिन वह अपनी स्पीड कम नहीं करता। इसी बीच रास्ते में एक बूढ़ा आदमी सड़क पार करते दिखाई देता है। वह इतना धीरे चल रहा था कि गाड़ी के नीचे आ जाता ड्राईवर ने उसे देख कर गाड़ी की स्पीड कम कर दी लेकिन वह बीच सड़क पर आकर खड़ा हो गया। ड्राईवर को गाड़ी रोकनी पड़ी।


गाड़ी के रुकते ही चारों ओर से चार पांच नकाबपोश रिवाल्वर निकाल कर खड़े हो जाते हैं और सामने बूढ़े के भेष में एक और आदमी गन लिये खड़ा था।


तभी गोलियों की गड़गड़ाहट सन्नाटे को चीर देती है। मनीष का शरीर गोलियों से छलनी हो जाता है। सभी लोग मनीष का सारा सामान लेकर भागने लगते हैं। उनमें वह ड्राईवर भी था।


ड्राईवर: साहब आपको तो कोई नहीं जानता लेकिन मैं साहब को एयरर्पोट से लेकर आ रहा हूं। मैं पकड़ा जाउंगा।


राकेश: मैंने सारा प्लान बना लिया है। तुझे तेरा हिस्सा बाद में मिल जायेगा। फिलहाल तू ये एक लाख रुपये रख और यहां से दूर किसी अनजाने गॉव में चला जा जहां तुझे कोई पहचान न सके और अपना फोन तोड़ दे। मेरे इस नये नम्बर पर दो महीने बाद फोन करना और अखबार पढ़ते रहना। अपने परिवार से भी बात मत करना। सब सही रहा तो पूरी जिन्दगी काम नहीं करना पड़ेगा।


सीमा को जब यह पता लगा तो उसका बुरा हाल हो गया। घर में रिश्तेदारों का तांता लगा था। हर कोई हैरान था। पुलिस इंवेस्टिगेशन कर रही थी। लेकिन कुछ भी पता नहीं लगा।


रात के समय सब सो रहे थे तभी सीमा को अहसास हुआ जैसे कोई उसके बालों को सहला रहा है। सीमा की आंख खुली लेकिन वहां कोई नहीं था। तभी उसे खिड़की के बाहर एक परछाई सी दिखाई दी। वह उठ कर वहां गई तो देखा वह परछाईं छत की ओर जा रही है। सीमा बेहोश सी उस परछाई के पीछे चल दी। छत पर जाकर उसने देखा कोई नहीं था।


वह लौटने लगी उसे लगा उसका बहम था।


तभी उसे किसी के रोने की आवज सुनाई दी। सीमा ने पलट कर देखा तो काले कपड़े पहने एक इंसान रो रहा है।


सीमा: कौन हो तुम यहां कैसे आये।


सीमा कुछ आगे बढ़ी तो उस इंसान का चेहरा दिखाई दिया। भयानक काली आंखें लाल सुर्ख एक दम काला पड़ा चेहरा। मुंह से खून निकल रहा था।


सीमा के पैर जम गये वह भागना चाह रही थी लेकिन भाग न सकी। चीखना चाह रही थी लेकिन उसके गले से आवाज नहीं निकली। वह आदमी रो रहा था। मैं मरना नहीं चाहता था। उसने कहा यह सुनकर सीमा का दिल धक से बैठ गया। यह तो मनीष की आवाज थी।


सीमा तेजी सी चीखी घर की सारी लाईटें जल गईं। सीमा वहीं बेहोश होकर गिर पड़ी घर में सारे रिश्तेदार सीमा को ढूंढ रहे थे। तभी किसी ने छत के गेट खुले देखे दो तीन लोग भाग कर छत पर आये और सीमा को उठा कर नीचे ले गये।


सीमा को पानी के छींटे मारे जिससे उसे होश आ गया। वह होश आने पर चीखने लगी।


सीमा: मनीष, मनीष जाने दो मुझे वो छत पर मुझे बुला रहे हैं।


सबने मिल कर सीमा को पकड़ा। लेकिन वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी।


सीमा की मां ने उसे संभाला पानी पिलाया।


मां: बेटी क्या बात है तू छत पर क्यों गई थी?


सीमा: मां वो छत पर हैं। वो रो रहे हैं और कह रहे थे मैं मरना नहीं चाहता था।


मां: बेटी मनीष अब कहां से आयेंगे उनका तो अंतिम संस्कार भी हो गया। तुझे गहरा सदमा लगा है। तू सोने की कोशिश कर।


सीमा: नहीं मां वो यहीं हैं।


अगले दिन पुलिसवालों ने आकर बताया कि उनके ऑफिस का मैंनेजर राकेश और ड्राईवर लापता हैं इन्होंने ही शायद मिल कर यह काम किया है। राकेश को पता था कि मनीष डायमंड खरीदने गये हैं।


सीमा चुपचाप बैठी थी जैसे उसे इस सब से कोई मतलब नहीं था।


इंस्पेक्टर: मेडम आप इस बारे में कुछ जानती हैं।


सीमा: आप चिंता न करें मेरे पति उन्हें सबक सिखायेंगे।


मां: इंस्पेक्टर साहब इसे गहरा सदमा लगा है। आप बाद में पूछताछ कर लीजियेगा।


इधर राकेश सारे डायमंड लेकर एक अन्जान शहर में एक फ्लेट किराये पर लेकर रहने लगता है।


रात को वह अपने फ्लेट में सो रहा था। तभी उसे कुछ खटका सुनाई दिया उसने देखा तो बॉलकनी में एक परछाई है। वह देखने गया तो उसे वहां एक आदमी दिखाई दिया। वही काले कपड़े, बाल बिखरे हुए, आंखे लाल और मुंह से खून बह रहा था।


राकेश: कौन हो तुम?


मनीष: अपने मालिक को भूल गया तू।


राकेश: कौन मनीष। लेकिन वह तो मर गया।


मनीष : लेकिन मुझे मुक्ति नहीं मिली। तूने विश्वासघात किया तुझे सजा दिये बगैर मुझे मुक्ति कहां मिलेगी।


राकेश अंदर की तरफ भागता है। लेकिन जा नहीं पाता तभी कुछ लोग नीचे से देखते हैं एक आदमी बॉलकनी की रेलिंग पर खड़ा है वे चिल्लाते हैं लेकिन वह आदमी रेलिंग से कूद जाता है। बीसवीं मंजिल से सीधा सड़क पर आकर गिरता है।


तभी पुलिस बुलाई जाती है। पुलिस लाश को पोस्टमार्टम के लिये ले जाती है। बाद में यह खबर सीमा को मिलती है। कि राकेश ने आत्महत्या कर ली उसके फ्लेट से सारे डायमंड मिल जाते हैं।


पुलिस: मेडम आपके पति की कंपनी में काम करने वाले राकेश ने आत्महत्या कर ली। उसके घर से डायमंड भी मिल गये।


सीमा: उसे तो मरना ही था। अभी तो ड्राईवर की बारी है। उसे ढूंढ लो नहीं तो मनीष उसे मार देंगे। यह कहकर वह मुस्कुराने लगी।


उसकी मुस्कुराहट में मौत का पैगाम छिपा था।


कुछ दिन बाद मनीष का ड्राईवर रात को सो रहा था। तभी सपने में उसी भयानक रूप में उसे मनीष दिखता है।


मनीष: सपीड कम रखो इतनी भी क्या जल्दी है। मैंने तुझसे बोला था।


ड्राईवर उठ कर बैठ जाता है। वह अंधेरे में डर के बाहर आ जाता है। सड़क पर तभी सामने से एक कार तेजी से उसकी ओर आ रही होती है। ड्राईवर तेजी से सड़क पर भागने लगता है। लेकिन वह कार तेजी से उसे टक्कर मार देती है वह सड़क पर तड़पने लगता है। तभी उसे मनीष दिखाई देता है। उसी भेष में।


मनीष: मेरा क्या कसूर था?


ड्राईवर: मुझे माफ कर दो साहब पैसों के लालच में मैं अंधा हो गया।


मनीष मुस्कुरा रहा था। कुछ देर तड़प कर वह मर जाता है।


अगले दिन सीमा को ड्राईवर की खबर भी मिल जाती है।


उसी रात सीमा छत पर जाती है


सीमा: मनीष तुम कहां हो मुझे भी साथ ले चलो।

मनीष: नहीं सीमा तुम्हारे आगे पूरी जिन्दगी पड़ी है।

सीमा: मैं भी तुम्हारे पास आ रही हूं तुम्हारे बगैर सब बेकार है।

मनीष: सीमा ऐसा मत करो। बस एक अरमान रह गया तुम्हें घुमाने ले जाना था।

सीमा: चलो दोंनो साथ चलते हैं। यह कहकर वह छत से कूद जाती है।

जो बोओगे, वही काटोगे। जीवन में सच्चाई और ईमानदारी से जीना ही सबसे बड़ा धर्म है।

 एक गाँव में एक किसान रहता था, जिसका जीवन साधारण था, लेकिन उसकी ज़िन्दगी में एक उलझन भी थी। उसकी दो पत्नियाँ थीं, और दोनों से उसे एक-एक बेटा था। दोनों बेटों की शादी हो चुकी थी, और किसान को लगा कि अब उसकी ज़िन्दगी स्थिर और सुखी हो गई है। लेकिन समय ने उसे एक नई चुनौती दी, जब उसके छोटे बेटे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।


बड़े भाई ने अपने छोटे भाई का इलाज करवाने की पूरी कोशिश की। उसने गाँव के आस-पास के वैद्यों से परामर्श लिया, लेकिन छोटे भाई की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे खर्च बढ़ता गया, और छोटे भाई की हालत और भी बिगड़ती चली गई। बड़े भाई के मन में चिंता ने धीरे-धीरे एक कड़वाहट का रूप ले लिया।


एक दिन, बड़े भाई ने अपनी पत्नी से सलाह-मशविरा किया। उसने कहा, "यदि छोटा भाई मर जाए, तो हमें उसके इलाज के लिए और पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।" उसकी पत्नी, जो उसकी सोच में सहभागी हो गई थी, ने एक भयानक सुझाव दिया, "क्यों न किसी वैद्य से बात करके उसे जहर दे दिया जाए? किसी को शक भी नहीं होगा, और उसकी मौत को बीमारी के कारण माना जाएगा।"


बड़े भाई ने अपनी पत्नी की बात मान ली और एक वैद्य से संपर्क किया। उसने वैद्य से कहा, "जो भी तुम्हारी फीस होगी, मैं देने को तैयार हूं। बस मेरे छोटे भाई को ऐसा जहर दे दो, जिससे उसकी मृत्यु हो जाए।" लालच और निर्दयता से भरे वैद्य ने इस नृशंस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और छोटे भाई को जहर दे दिया। कुछ ही दिनों में छोटे भाई की मृत्यु हो गई।


बड़े भाई और उसकी पत्नी ने अंदर ही अंदर खुशी मनाई, यह सोचते हुए कि अब रास्ते का कांटा निकल गया है और सारी संपत्ति उनकी हो गई। छोटे भाई का अंतिम संस्कार कर दिया गया, और समय बीतता चला गया।


कुछ महीनों के बाद, किसान के बड़े बेटे की पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया। परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई, और उन्होंने बड़े लाड-प्यार से बच्चे की परवरिश की। समय के साथ वह लड़का जवान हो गया, और उसकी शादी भी धूमधाम से कर दी गई। लेकिन खुशी के ये दिन अधिक समय तक नहीं टिक सके।


शादी के कुछ समय बाद, बड़े बेटे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसके माता-पिता ने उसके इलाज के लिए हर संभव कोशिश की। कई वैद्यों से परामर्श लिया गया, और जो भी पैसा माँगा गया, वे देने को तैयार थे। अपने बेटे की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी आधी संपत्ति तक बेच दी, लेकिन उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया। अब वह मौत के दरवाजे पर खड़ा था, शरीर इतना कमजोर हो चुका था कि उसकी हालत देखकर दिल दहल उठता था।


एक दिन, वह लड़का अपने चारपाई पर लेटा हुआ था, और उसका पिता उसे दुख भरी नजरों से देख रहा था। लड़के ने अचानक अपने पिता से कहा, "भैया, अपना हिसाब पूरा हो गया है। अब बस कफन और लकड़ी का इंतजाम बाकी है, उसकी तैयारी कर लो।"


पिता ने सोचा कि उसका बेटा बिमारी के कारण बड़बड़ा रहा है और बोला, "बेटा, मैं तेरा बाप हूं, भाई नहीं।"


लड़के ने दुखी आवाज में कहा, "पिताजी, मैं आपका वही भाई हूं जिसे आपने जहर देकर मरवा दिया था। जिस संपत्ति के लिए आपने मुझे मारा, वही अब मेरे इलाज में आधी बिक चुकी है। हमारा हिसाब बराबर हो गया है।"


यह सुनकर पिता का दिल टूट गया। वह फूट-फूट कर रोने लगा और बोला, "मेरा तो कुल नाश हो गया। जो मैंने किया, वह सब मेरे सामने आ गया। पर तेरी पत्नी का क्या दोष है, जो उसे इस बेचारी को जिंदा जलाया जाएगा?" उस समय सतीप्रथा चल रही थी, जिसमें पति की मृत्यु के बाद पत्नी को पति की चिता के साथ जला दिया जाता था।


लड़के ने दुख भरी नजरों से अपने पिता को देखा और कहा, "पिताजी, वह वैद्य कहां है, जिसने मुझे जहर खिलाया था?"


पिता ने उत्तर दिया, "तुम्हारी मृत्यु के तीन साल बाद वह मर गया था।"


लड़के ने कड़वाहट से हंसते हुए कहा, "वह दुष्ट वैद्य आज मेरी पत्नी के रूप में है। मेरे मरने पर उसे भी जिन्दा जलाया जाएगा।"


कहते हैं, परमेश्वर का न्याय अटल होता है। इस कहानी में उस न्याय की झलक मिलती है। जीवन में किए गए कर्मों का हिसाब-किताब कहीं न कहीं सामने आ ही जाता है।


कहानी के अंत में यही संदेश मिलता है कि जो बोओगे, वही काटोगे। जीवन में सच्चाई और ईमानदारी से जीना ही सबसे बड़ा धर्म है।

अंततः यही सच है कि:

"धर्मराज लेगा तिल-तिल का लेखा,

ऋण संबंध जुड़ा .

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...