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Monday, 26 August 2024

एक पत्नी को शादी के कुछ साल बाद यह विचार आया कि अगर वह अपने पति को छोड़ कर कहीं चली जाए, तो उसका पति कैसा महसूस करेगा?

 एक पत्नी को शादी के कुछ साल बाद यह विचार आया कि अगर वह अपने पति को छोड़ कर कहीं चली जाए, तो उसका पति कैसा महसूस करेगा?


पत्नी ने अपने इस विचार को जानने और परखने के लिए एक सादे कागज पर लिखा, "अब मैं तुम्हारे साथ और नहीं रह सकती। मैं तुम्हारे साथ से उब चुकी हूं। मैं घर छोड़ कर हमेशा के लिए जा रही हूं।”


उस कागज को उसने टेबल पर रखा और जब पति के आने का समय हुआ, तो उसकी प्रतिक्रिया देखने के लिए वह पलंग के नीचे छुप गई।


पति आया और उसने टेबल पर रखे कागज को पढ़ा। कुछ देर की चुप्पी के बाद उसने उस कागज पर कुछ लिखा। फिर वह खुशी में जोर-जोर से सीटी बजाने लगा, गीत गाने लगा, उछल-उछल कर नाचने लगा और फिर अपने कपड़े बदलने लगा।


उसके बाद उसने अपने फोन से किसी को फोन किया और कहा, "आज मैं मुक्त हो गया! शायद मेरी मूर्ख पत्नी को समझ आ गया कि वह मेरे लायक नहीं थी। इसलिए आज वह घर से हमेशा के लिए चली गई। अब मैं आजाद हूं, तुमसे मिलने के लिए। मैं आ रहा हूं कपड़े बदलकर तुम्हारे पास। तुम तैयार होकर मेरे घर के सामने वाले पार्क में अभी आ जाओ।”


पति बाहर निकल गया।


पति के जाने के बाद पत्नी रोते-बिलखते बेड के नीचे से निकली और कांपते हाथों से कागज पर लिखी लाइन पढ़ी, जिसमें लिखा था,


"बेड के नीचे से तेरे पैर दिख रहे हैं पगली। पार्क के पास वाली दुकान से ब्रेड लेकर तुरंत आ रहा हूं। तब तक चाय बना लेना। मेरी जिंदगी में खुशियां तेरे बहाने से हैं। आधी तुझे सताने से हैं और आधी तुझे मनाने से हैं!! लव यू मच..!!"

Sunday, 25 August 2024

अभिनव" नाम से एक फ्रेंड रिक्वेस्ट देख सुरभि हैरान हो गई थी। उसने अनायास ही प्रोफाइल खोलकर देखा

 कई वर्षों बाद "अभिनव" नाम से एक फ्रेंड रिक्वेस्ट देख सुरभि हैरान हो गई थी। उसने अनायास ही प्रोफाइल खोलकर देखा। प्रोफाइल फोटो देखते ही उसकी शंका यकीन में बदल गई। यह अभिनव ही था। सुरभि ने उत्सुकता से अभिनव का पूरा प्रोफाइल खंगाल डाला—पत्नी, बच्चे, व्यवसाय, दोस्तों की तस्वीरें, और कामयाबी की दास्तां। सुरभि मुस्कुराई, उसे यह देखकर अच्छा लगा कि इतने वर्षों बाद भी अभिनव ने उसे याद रखा है। सालों गुजर गए थे...


वह दिन याद आते ही सुरभि के मन में अतीत की परतें खुलने लगीं। इंटर कॉलेज का प्रतियोगिता होने वाला था। सुरभि बहुत अच्छा गाती थी, और यह उसका अंतिम वर्ष था। कॉलेज के बाद कौन मिल पाता है? यह सोचकर उसने सिंगिंग कॉम्पिटिशन में अपना नाम लिखवा दिया था। उसकी शिक्षिका ने भी उसे प्रोत्साहित किया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा, "लड़कियों में तो तुम हर बार जीतती हो, लेकिन हमारे कॉलेज से कोई भी लड़का उस अभिनव से नहीं जीत पाता। पिछले दो सालों से वही जीत रहा है।" अभिनव दूसरे कॉलेज का छात्र था। सुरभि ने पहली बार उसे मंच पर गाते देखा था। उसकी आवाज में इतनी मिठास और सहजता थी कि सुरभि मंत्रमुग्ध हो गई थी। जब वह विजेता घोषित हुआ, तो सुरभि दिल से खुश हुई थी। दोनों की मुलाकातें सीमित थीं, लेकिन अभिनव सुरभि की आवाज से बहुत प्रभावित हुआ था।


कॉलेज खत्म होने के बाद, सुरभि की आकाशवाणी में नौकरी लग गई। एक दिन, एक कार्यक्रम के दौरान, सुरभि को पता चला कि उसके शहर के गायक कलाकारों का इंटरव्यू हो रहा है, जिसमें होस्ट वह खुद थी। और वहां उपस्थित अभिनव को देख सुरभि एक बार फिर अचंभित हो गई। उसे पहचानने में उसे देर न लगी। कार्यक्रम के बाद, औपचारिक बातों के बीच, अभिनव ने सुरभि से पूछा, "क्या हम कहीं और मिल सकते हैं?"


"क्यों?" सुरभि ने थोड़ा हैरानी से पूछा।


"बस ऐसे ही," अभिनव ने हंसते हुए कहा।


सुरभि ने मना नहीं किया। अभिनव के व्यक्तित्व में एक अलग सा आकर्षण था, जो उसे खींच रहा था।


काफी हाउस के एक कोने में बैठकर, अभिनव ने अचानक सुरभि से पूछा, "तुम्हारा विवाह कब हो रहा है?"


सुरभि इस प्रश्न से थोड़ा चौंक गई। मजेदार बात यह थी कि दोनों ही एक ही जाति से थे, लेकिन सुरभि एक साधारण परिवार से थी, जबकि अभिनव एक प्रतिष्ठित परिवार से था। सुरभि ने उत्तर दिया, "अभी तो कुछ सोचा नहीं है, पहले दीदी की शादी हो जाए, फिर मेरी होगी।"


अभिनव कुछ और कहने से पहले रुक गया, लेकिन इस मुलाकात ने दोनों के दिलों में एक नाजुक सा रिश्ता पनपा दिया।


फिर भी, दोनों अपनी-अपनी दुनिया में लौट गए। न कोई वादा, न कोई करार, बस एक अनकहा सा जुड़ाव...


कुछ समय बाद, सुरभि के मामा की बेटी की शादी में वह एक और समारोह में शामिल होने गई। वहां, वह अभिनव से फिर से मिली। दोनों एक-दूसरे को देखकर खुश और हैरान थे, लेकिन यह खुशी दोनों के चेहरे पर साफ झलक रही थी।


बंगाली विवाह की रस्मों के बीच, उस रात, सौरभ ने अपने दिल की बात कह दी, "क्या तुम मुझसे शादी करोगी?"


सुरभि थोड़ा झिझकी, फिर बोली, "देखिए, मैं इस बारे में अभी कुछ नहीं कह सकती। आप घर में रिश्ता भेजिए।" और वह शर्माते हुए वहां से चली गई।


रिश्ते की बात चली भी, लेकिन दहेज की मांग के कारण मामला अटक गया। और फिर, दोनों का मिलना बंद हो गया।


फेसबुक पर अभिनव की फ्रेंड रिक्वेस्ट देखकर सुरभि एक बार फिर अतीत की यादों में खो गई थी। उसने रिक्वेस्ट स्वीकार की और मन ही मन मुस्कुराई। एक सुखद आश्चर्य यह था कि अभिनव भी उसी शहर में रह रहा था। एक प्रोग्राम के दौरान, दोनों आमने-सामने आए।


अभिनव को देखकर सुरभि चौंक गई। वह काफी उम्रदराज लग रहा था, आंखों के नीचे काले घेरे साफ दिखाई दे रहे थे। बात भी बहुत कम ही हुई। अभिनव की पत्नी और बच्चे साथ थे, और वह शायद कुछ असहज महसूस कर रहा था।


बहरहाल, उस प्रोग्राम में सुरभि का एक जानने वाला भी था, जिसने जो कुछ अभिनव के बारे में बताया, उसे सुनकर सुरभि हैरान रह गई। "अभिनव दादा अब बहुत पीने लगे हैं, पत्नी और बच्चे की भी नहीं सुनते। उन्होंने गाना भी छोड़ दिया है। कहते हैं, 'सब कुछ है मेरे पास, बस सुकून नहीं है।'"


सुरभि समझ नहीं पा रही थी कि वह कैसे अभिनव को समझाए।


दूसरे दिन उसने अभिनव को फोन किया। औपचारिक बातें करते-करते सुरभि ने कहा, "आप बहुत कमजोर लग रहे हैं, क्या कोई तकलीफ है?"


"नहीं भी और हां भी," अभिनव ने उत्तर दिया।


"क्या तकलीफ है, बता सकते हैं?" सुरभि ने चिंता से पूछा।


"कुछ छूट गया है, सुरभि, पीछे कहीं।"


सुरभि का दिल धड़क उठा। क्या अभिनव अब भी उसे भूला नहीं था?


"आज मन की बात कह लेने दो, सुरभि, प्लीज," अभिनव ने कहा। "मैंने मन ही मन तुम्हें अपनी पत्नी मान लिया था। लेकिन घर के दबाव में आकर मुझे शादी करनी पड़ी। विवाह की रात मैंने सोचा था कि सबकुछ अपनी पत्नी को बता दूंगा, लेकिन तुम्हारे सम्मान के लिए चुप रहा।"


गहरी सांस लेकर अभिनव ने कहा, "मेरी पत्नी पहले से ही गर्भवती थी। मैंने उसके जुड़वा बच्चों को अपना नाम दिया। लेकिन मेरे मन में हमेशा तुम्हारे लिए एक जगह रही, सुरभि।"


सुरभि सन्न रह गई। उसके मन में हजारों सवाल घूम रहे थे, लेकिन वह कुछ नहीं कह पाई। उसने फोन रख दिया और देर तक रोती रही।


अगले दिन, सुरभि के पास एक और फोन आया। "दीदी, अभिनव दादा नहीं रहे। उनके गले में कैंसर था। अंत तक उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा।"


सुरभि, जो अब किसी और की पत्नी थी, समझ नहीं पा रही थी कि वह खुद को क्या समझे। वह कैसे इस धर्मसंकट से निकले? निढाल होती सुरभि, केवल अपने आंसुओं से अभिनव को श्रद्धांजलि दे रही थी।

कोई भी महिला जो अकेली है और उसे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच घर जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहा है,

 #पुलिस_ने_एक_मुफ्त_यात्रा_योजना_शुरू_की_है, जहां कोई भी महिला जो अकेली है और उसे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच घर जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहा है, वह पुलिस हेल्पलाइन नंबर (1091 और 7837018555) पर संपर्क कर सकती है और वाहन का अनुरोध कर सकती है। वे 24x7 घंटे काम करेंगे. नियंत्रण कक्ष वाहन या निकटतम पीसीआर वाहन/एसएचओ वाहन उसे सुरक्षित रूप से उसके गंतव्य तक ले जाएगा। यह #नि:#शुल्क किया जाएगा। इस संदेश को अपने जानने वाले सभी लोगों तक फैलाएं। अपनी पत्नी, बेटियों, बहनों, माताओं, दोस्तों और उन सभी महिलाओं को नंबर भेजें जिन्हें आप जानते हैं.. उन्हें इसे सेव करने के लिए कहें.. सभी पुरुष कृपया उन सभी महिलाओं के साथ साझा करें जिन्हें आप जानते हैं…। आपातकालीन स्थिति में महिलाएं *खाली संदेश या मिस्ड कॉल* दे सकती हैं.. ताकि पुलिस आपकी लोकेशन ढूंढ सके और आपकी मदद कर सके 

#पूरे_भारत_में_लागू

Saturday, 24 August 2024

कहीं आप अपनी पत्नी के साथ गलत तो नहीं कर रहे?

 कहीं आप अपनी पत्नी के साथ गलत तो नहीं कर रहे?


 आज कुछ ऐसे पति भी हैं जो पढ़े-लिखे हैं और अपनी पत्नी की मानसिक अशांति या आंतरिक खुशी का कारण नहीं जानते या समझने की कोशिश भी नहीं करते।

 सच बताऊं तो कई पति ऐसे होते हैं जिन्हें अगर उनकी पत्नी यह कहे कि मैं तुम्हारे साथ मानसिक रूप से अच्छा नहीं हूं तो उन्हें आश्चर्य होता है, तब पति सोचते हैं और अपनी पत्नियों से कहते हैं कि मैं तुम्हारे भरण-पोषण की जिम्मेदारी ले रहा हूं तो तुम अच्छी क्यों नहीं हो? उन्हें इन बातों की परवाह ही नहीं है.

 लेकिन कोई भी लड़की अपने पति के घर सिर्फ भोजन और कपड़े के लिए नहीं आती है। एक लड़की अपने पिता के घर में भी बिना भोजन और आवश्यकता के नहीं रहती है, चाहे वह कहीं भी हो, अल्लाह उसकी जीविका प्रदान करता है क्या आपकी पत्नी कम से कम एक बार अच्छी है? वह वास्तव में आपसे क्या चाहता है? क्या वह आपसे खुश है?

 अगर आप अपनी पत्नी से दूरियां बनाते हैं तो आप खुद को ही नुकसान पहुंचाएंगे। आप अपनी पत्नी की मानसिक स्थिति को समझने की कोशिश करें। प्यार करते समय आप जिस तरह से एक लड़की की पसंद-नापसंद का पता लगाते हैं। अगर पत्नी को समय दिया होता तो इतने रिश्ते नहीं टूटते.


 दुनिया में ऐसी बहुत सी लड़कियाँ हैं जो अपने पति के प्रति वफादार होती हैं, अगर उनके पति बुरे हैं और समय नहीं देते हैं, तो वे कभी भी दूसरे लड़कों के साथ समय नहीं बिताएँगी...!! लेकिन पति इतने असफल होते हैं कि वो ये समझने की कोशिश भी नहीं करते कि ऐसा क्यों हो रहा है.


 इसलिए अपनी गलती के कारण किसी लड़की को दिन-ब-दिन मानसिक पीड़ा सहना अनुचित है। इसलिए अपनी पत्नी का अच्छे से ख्याल रखें। पति-पत्नी का रिश्ता ईश्वर द्वारा दिया गया एक आशीर्वाद है और यदि ईश्वर के किसी सेवक को ठेस पहुँचती है, तो ईश्वर ऐसा करेगा पीड़ित।

 अब समय है अपनी पत्नी से पूछने का और उसके अंदर के दर्द को बाहर लाने का।

बाप बेटी का प्रेम समुद्र से भी गहरा है

 जब तक बाप जिंदा रहता है, बेटी मायके में हक़ से आती है और घर में भी ज़िद कर लेती है और कोई कुछ कहे तो डट के बोल देती है कि मेरे बाप का घर है। पर जैसे ही बाप मरता है और बेटी आती है तो वो इतनी चीत्कार करके रोती है कि, सारे रिश्तेदार समझ जाते है कि बेटी आ गई है।*

*और वो बेटी उस दिन अपनी हिम्मत हार जाती है, क्योंकि उस दिन उसका बाप ही नहीं उसकी वो हिम्मत भी मर जाती हैं।*

*आपने भी महसूस किया होगा कि बाप की मौत के बाद बेटी कभी अपने भाई- भाभी के घर वो जिद नहीं करती जो अपने पापा के वक्त करती थी, जो मिला खा लिया, जो दिया पहन लिया क्योंकि जब तक उसका बाप था तब तक सब कुछ उसका था यह बात वो अच्छी तरह से जानती है।* 

आगे लिखने की हिम्मत नहीं है, बस इतना ही कहना चाहता हूं कि बाप के लिए बेटी उसकी जिंदगी होती है, पर वो कभी बोलता नहीं, और बेटी के लिए बाप दुनिया की सबसे बड़ी हिम्मत और घमंड होता है, पर बेटी भी यह बात कभी किसी को बोलती नहीं है। 

बाप बेटी का प्रेम समुद्र से भी गहरा है

Friday, 23 August 2024

क्योंकि मैं पुरुष हूँ

 मैं पुरुष हूँ।

मैं भी घुटता हूँ, पिसता हूँ, टूटता हूँ , बिखरता हूँ,

भीतर ही भीतर, रो नही पाता, कह नही पाता

पत्थर हो चुका, तरस जाता हूँ पिघलने को,

क्योंकि मैं पुरुष हूँ।

मैं भी सताया जाता हूँ, जला दिया जाता हूँ,

उस दहेज की आग में, जो कभी मांगा ही नही था।

स्वाह कर दिया जाता हैं मेरे उस मान-सम्मान का,

तिनका-तिनका कमाया था जिसे मैंने,

मगर आह नही भर सकता,

क्योकि मैं पुरुष हूँ।

मैं भी देता हूँ आहुति विवाह की अग्नि में अपने रिश्तों की,

हमेशा धकेल दिया जाता हूँ रिश्तों का वजन बांध कर,

जिम्मेदारियों के उस कुँए में जिसे भरा नही जा सकता मेरे अंत तक कभी।

कभी अपना दर्द बता नही सकता,

किसी भी तरह जता नही सकता,

बहुत मजबूत होने का ठप्पा लगाए जीता हूँ।

क्योंकि मैं पुरुष हूँ।

हाँ, मेरा भी होता है बलात्कार,

उठा दिए जाते है मुझ पर कई हाथ,

बिना वजह जाने, बिना बात की तह नापे,

लगा दिया जाता है सलाखों के पीछे कई धाराओं में,

क्योंकि मैं पुरुष हूँ।

सुना है, जब मन भरता है, तब आँखों से बहता है,

मर्द होकर रोता है, मर्द को दर्द कब होता है,

टूट जाता है तब मन से, आंखों का वो रिश्ता, 

तब हर कोई कहता है,

हर स्त्री स्वेत स्वर्ण नही होती,

न ही हर पुरुष स्याह कालिख,

मुझे सही गलत कहने वालों,

पहले मेरे हालात क्यों नही जांचते?

क्योंकि मैं पुरुष हूँ?


#पंडिताइन

जब और समर्थन का सही मेल होता है, तो किसी भी इंसान को बेहतर बनने से कोई नहीं रोक सकता।

 कहानी एक छोटे से गाँव की है, जहाँ अर्जुन नाम का एक युवक अपने आलस और निकम्मेपन के लिए पूरे गाँव में बदनाम था। अर्जुन की पत्नी, संगीता, गाँव में अपनी मेहनत और बुद्धिमानी के लिए जानी जाती थी। वह हर दिन सूरज की पहली किरण के साथ उठती, खेतों में काम करती, और फिर घर लौटकर परिवार की देखभाल में जुट जाती। दूसरी ओर, अर्जुन दिनभर इधर-उधर घूमता, सोता या दोस्तों के साथ खेल-कूद में अपना समय बिताता।


गाँव के लोग अर्जुन को अक्सर चिढ़ाते और उसे "निकम्मा अर्जुन" कहकर बुलाते थे। संगीता को अपने पति से बहुत प्यार था, लेकिन कभी-कभी उसकी बेपरवाह आदतों पर उसे गुस्सा भी आता था। उसने सोचा कि शायद अर्जुन को सही दिशा में प्रेरित किया जाए, तो वह भी अपनी जिम्मेदारियों को समझने लगेगा।


एक दिन, संगीता ने अर्जुन से गंभीरता से बात करने का फैसला किया। उसने कहा, "अर्जुन, तुम्हारा इस तरह बेकार बैठे रहना न तो हमारे परिवार के लिए अच्छा है और न ही तुम्हारे लिए। क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें कुछ करना चाहिए? तुम्हारी मेहनत से हमारी जिंदगी बेहतर हो सकती है।"


अर्जुन ने हँसते हुए कहा, "मेरे काम करने से क्या फायदा? तुम ही सब कुछ अच्छे से संभाल लेती हो। मुझे कुछ करने की क्या जरूरत है?"


संगीता ने गहरी सांस लेते हुए सोचा कि अगर अर्जुन को सही मौका और प्रेरणा मिले, तो शायद वह अपनी आदतें बदल सकता है। उसने एक योजना बनाई। अगले दिन, गाँव में एक बड़ा मेला लगना था। संगीता ने तय किया कि वह अर्जुन को उस मेले में ले जाएगी, ताकि वह गाँव के अन्य लोगों की मेहनत और सफलता को देख सके।


मेले में पहुँचते ही अर्जुन ने देखा कि गाँव के लोग अपनी मेहनत से कैसे तरक्की कर रहे हैं। किसी ने अपनी दुकान खोली थी, तो कोई खेती-बाड़ी में सफल हो रहा था। हर कोई अपने-अपने काम में लगा था और तरक्की कर रहा था। अर्जुन ने देखा कि उसके जैसे लोग, जो पहले कुछ नहीं करते थे, अब मेहनत करके अपनी जिंदगी को संवार रहे हैं।


मेले से वापस लौटते समय अर्जुन के मन में कुछ बदलने लगा। उसने देखा कि उसकी पत्नी संगीता कितनी मेहनत करती है और उसे इस बात का अहसास हुआ कि उसे भी कुछ करना चाहिए।


अगले दिन से अर्जुन ने छोटे-छोटे कामों में हाथ बंटाना शुरू किया। पहले तो संगीता को यह देखकर आश्चर्य हुआ, लेकिन धीरे-धीरे उसने देखा कि अर्जुन में एक नया जोश और लगन आ रहा है। उसने खुद से सब्जियाँ उगाने का फैसला किया और गाँव के बुजुर्गों से खेती के गुर सीखने लगा।


समय बीतता गया और अर्जुन अब गाँव के सबसे मेहनती किसानों में से एक बन गया। उसके खेतों में भरपूर फसल उगने लगी और संगीता को अपने पति पर गर्व महसूस होने लगा। गाँव के लोग, जो कभी अर्जुन को "निकम्मा" कहकर बुलाते थे, अब उसकी तारीफें करने लगे।


एक दिन, गाँव में एक समारोह का आयोजन हुआ, जिसमें अर्जुन को "सर्वश्रेष्ठ किसान" का पुरस्कार दिया गया। संगीता की आँखों में खुशी के आँसू थे। उसने अर्जुन से कहा, "देखो अर्जुन, तुम्हारी मेहनत ने तुम्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है। यह सब तुम्हारे अंदर के बदलाव और दृढ़ संकल्प का नतीजा है।"


अर्जुन ने मुस्कुराते हुए कहा, "संगीता, यह सब तुम्हारी प्रेरणा और अटूट विश्वास का ही परिणाम है। तुमने मुझे सही रास्ता दिखाया और अब मैं समझ गया हूँ कि जीवन में मेहनत और जिम्मेदारी का कितना महत्व है।"


इस तरह, अर्जुन ने निकम्मे पति से एक मेहनती किसान का सफर तय किया। अब वह गाँव के सबसे सम्मानित नागरिकों में से एक था, और संगीता के साथ मिलकर उन्होंने एक खुशहाल और समर्पित जीवन बिताया। गाँव में उनकी जोड़ी अब मिसाल बन चुकी थी, और लोग कहते थे, "अर्जुन और संगीता की तरह मेहनत और प्यार से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।"


उनकी यह कहानी गाँव के हर घर में प्रेरणा का स्रोत बन गई। अर्जुन और संगीता ने अपने जीवन से यह साबित कर दिया कि जब और समर्थन का सही मेल होता है, तो किसी भी इंसान को बेहतर बनने से कोई नहीं रोक सकता।

हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...