sunilrathod

Thursday, 19 March 2020

कोरोना वायरस को लेकर भारतियो की सोच।

अभी BBC News पर विश्लेषण देख रहा था, इसमें ये बताया गया कि चीन में हज़ारों शवों को, उनके परिवारों से पूछे बिना कहाँ दफनाया गया, ये केवल सरकार जानती हैं, इटली में किसी भी शव को कोई कंधा देने नहीं आ रहा। वे इंसान जब जिंदा थे तो अकेले हो गये थे और मरे तो लावारिस।चलो कोरोना ने इंसान का असली रूप दिखा दिया।
इसी बीच एक विद्वान यूनियन का प्रेरक लेख पढ़ने को मिला जिसमें भारतीयों के सोशल मीडिया के द्वारा किये जा रहे उपयोग को हास्यास्पद बताया है।
उन्होंने लिखा कि जिंदा रहना है तो सीरियस हो जाओ वरना आने वाले दो सप्ताह की कल्पना मुश्किल होगी
देश-दुनियां में कोई मुसीबत भारत के लोगों के मजाक, हंसी ठिठोली का साधन बन जाती है। पूरी दुनियां में कोहराम मचाए कोविड 19 का जितना मजाक भारत में बन रहा उसका आधा मजाक भी पूरी दुनियां के लोग मिलकर नहीं बना पा  रहे हैं क्योंकि चीन, जापान, फ्रांस, इटली, ईरान समेत तमाम देशों ने अपनी आंखों के सामने अपनों की लाशें देखी हैं। उनको इसके खतरे का ना सिर्फ अंदाजा हुआ बल्कि उसे भुगता भी है। भारत में अभी सिर्फ तीन लाशें ही सामने आई हैं क्योंकि अभी हम वायरस फैलने के सैकंड स्टेज पर चल रहे हैं। कल्पना करना मुश्किल होगा जिस दिन ये तीसरी स्टेज पर पहुंचेगी। जिन देशोें में ये तीसरे चरण में पहुंचा उससे 100 गुना बुरी हालत भारत की होगी क्योंकि यहां के लोगों को इस वायरस के प्रकोप से बचने के बजाय उसकी मजाक बनाने में वक्त बीतता है। मेरे एक मित्र ने कल मुझसे हाथ मिलाने की कोशिश की। मैंने हाथ जोड़ दिए तो उन्होंने मेरा मजाक बनाने के लिए वे दूसरे व्यक्ति के गले मिल लिए। बोले, देखें मुझे कैसे होता है कोराेना ? उनके इस अंदाज ने मुझे भारत में कोरोना के वायरस के तीसरे स्टेज की कल्पना का भयावह दृश्य सामने ला दिया। वजह ये है कि विदेश में सरकार किसी पार्टी की हो लेकिन वो अपनी सरकार के प्रत्येक आदेश का गंभीरता से पालन करते हैं और जो पालन नहीं करते उनके साथ वहां की सेना पालन करवाना जानती है। हमारे देश में हम जाति, धर्म, राज्य, राजनीतिक पार्टी और सेखी बघारने के लिए नियमों को तोड़ने में आनंदित होते हैं। मैं जानता हूं कि भारत सरकार, सभी राज्यों की सरकारें, स्वास्थ्य महकमा इस अंदेशे को भांप चुकी हैं। स्कूल, कॉलेज, ट्रेन, मॉल्, मंदिर सब धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं लेकिन कुछ राक्षसी मानसिकता के लोग जो इसे गंभीरता से नहीं समझना चाहते वे खुद भी मरेंगे और दूसरों को खतरे में डालेंगे। मेरा विनम्र आग्रह है कि सरकार जो भी कह रही उसका पालन करें। हाथ साफ करें बार बार, किसी से हाथ ना मिलाएं। एक मीटर की दूरी से बात करें, साथ में खाना ना खाएं, कुछ अंदेशा हो तो चिकित्सक को दिखाएं। वरना जिस दिन मजाक बनाने वालों की मां, बाप, पत्नी, बेटा, बेटी या कोई और करीबी इसकी चपेट में आया उस दिन उनकी सारी मजाक धरी रह जाएगी और फिर चुनाव के वक्त् वे सरकार को कोसोंगे कि सरकार ने हमारे परिजन की जान नहीं बचाई या पर्याप्त उपचार नहीं मिला। सरकार अभी इजाज के मामले में कई देशों से आगे हैं लेकिन जिस तरह वहां की जनता से वहां की सरकारों का साथ दिया उस तरह हम भी अपनी केन्द्र और अपनी-अपनी राज्य सरकार के आदेशों का पालन करें, गंभीर हो जाएं वरना आने वाले दो सप्ताह बाद वो नजारा देखने को मिलेगा जिसकी कल्पना नहीं कर पाओगे। पता नहीं कल्पना करने लायक बचोगे भी या नहीं पर अगर सरकार का साथ दिया। सही तरीके से चले। खुद पर और परिवार पर ध्यान दिया तो हमारे डाक्टरों के पास इसक पूरा इलाज है। 14 लोग ठीक करके घर भेज दिए हैं। जो भर्ती है उनमें से ज्यादातर की तबियत में सुधार हो रहा है। मेरा आप सभी से विनम्र निवेदन है कि प्लीज भविष्य को बचाने के लिए वर्तमान में थोड़ी सावधानी बरतें।
..............................
सलाम है डाक्टर-नर्सिंग स्टॉफ को
आज पूरे देश की शान हमारे चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ बन चुके हैं। खुद की जान खतरे में डाल कर कई घंटे और कई दिनों तक अपने घर से दूर रहकर आमजनों की जान बचाने में जुटे हैं। उनको सेल्यूट है। हम सब उन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के परिवारों को सांत्वना और भरोसा दें।
..........................
जिंदा रहे तो सब करेंगे आगे।

आग्रह है कि कुछ दिनों के लिए झुंड में न रहें, बैठें तो भी दूरी बनाकर, घरों में रहें ताकि ना आप किसी को वायरस दे सको और ना आप अपने घर में दूसरे से वायरस ला सके।
..............................
क्या होगा अगर कुछ दिन ये नहीं करोगे तो
1. क्या होगा अगर कुछ दिन दोस्तों के साथ बात नहीं कर पाओगे, फोन पर कर लो।
2. क्या होगा अगर कुछ दिन बाजार नहीं जाओगे, नंगे तो नहीं हो इतने कपड़े तो घर पर होंगे।
3. क्या होगा अगर अपनी मांगें मनवाने के लिए कुछ दिन धरना-प्रदर्शन विरोध नहीं करोगे जब सब ठीक हो जाए तब कर लेना।
4. क्या हो जाएगा अगर कहीं घूमने नहीं जाओगे तो जब सब सामान्य हो जाए तब चले जाना।
5. क्या होगा अगर दिन में 10 बार हाथ धो लोगे।
6. क्या होगा अगर मजाक उड़ाने की बजाय लोगों को जागरुक करने के लिए मैसेज करोगे।
7. क्या होगा जो जागरुक मैसेज दूसरों को फॉरवर्ड करते हो उसका खुद भी पालन कर लोगे।
8. क्या फर्क पड़ता है कि सरकार किसकी है और वे क्या कह रहे हैं, मतलब इतना रखो वो आपके हित के लिए कर रहे हैं।
..
क्योंकि मौत ना जाति, ना धर्म, ना क्षेत्र, ना उम्र, ना राज्य, ना इलाका और ना लिंग और ना सूरत देखकर आती है।
इसलिए मेरी विनम्र अपील, अभी वक्त है। मान जाओ। मेरी पोस्ट पढ़कर कुतर्क करने की बजाय जितने शब्द अच्छे लगे उसे  पालन कर लो। वरना कुछ लोगों के लिए लिखने वाले की पोस्ट पर कुर्तक और तर्क करने की आदत होती है और तर्क-कुर्तक भी करना है तो कर लेंगे चार महीने बाद सब सामान्य हो जाएगा अभी अपनी, अपने परिवार, मित्रों पड़ोसियों के हित में सोचें।
.............धन्यवाद, कुछ शब्द बुरे लगें तो हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं।
🙏  एक संवेदनशील, जिम्मेदार और सजग नागरिक

Sunday, 15 March 2020

राठौड परिवार का फैमिली विस्तार।

                राठौड परिवार का फैमिली विस्तार। 
                                 रामसिग
                                     |
                                     ^     
                लुमा रामसिग          घासि रामसिग                             
                                     भाई
                   
 1)कनीराम लुमा।     2)मानसिंह लुमा     3)धनसिंह लुमा
                                 
                                      भाई

1)भुरा कनीराम भीका कनीराम...2)ठाकुर मानसिग3)रसाल धनसिग
     
                                      भाई

1)उखा.ना...जोहरसिंह ना..       2)मोरसिंग ना. खेमसिंह ना.।

 3)बाबू ना. बलवंत ना.  गुलाब ना. दशरथ ना. रामकिशन ना
_____________________________________________
                   
                                   
                             उखा भूरा राठोड

 1)नारायण ना.---->    1) राजेश----->  सार्थक
                               2) सुनील------>  पार्थ
----------------------------------------------------------------

2)अमरसिंह ना--->     1) संजय -----> 1)करण
                                                     2) बंटी
                            2) प्रदीप------>
_____________________________________________

3)दरबार ना.----->   1) महिंद्र --->1) G2
                                              2)
                            2) जितेंद्र
_____________________________________________

4) रमेश ना.------>
_____________________________________________
                   
                  जोहरसिंह भीका राठोड़।

1) सुरेंद्र नायक।------> पीयूष राठोड +G1

2) कैलाश नायक।----> हर्ष, राठौड़ +G1 


मोरसिग ठाकुर .....

1) करतासिग राठोड----> गौरव रा.+G3
2) पुनमसिग राठोड-----> G4
3) किशोर राठोड.-------> यश रा.+G1
_____________________________________________

                      खेमसिंह ठाकुर राठौड़ 
1) रविंद्र राठौर, 
2) राहुल राठौर
_____________________________________________

                         बाबूराव रसाल राठोड

1) हरी राठोड------> 1) प्रमोद रा.
                             2) मनोज रा.

_____________________________________________
                   
                     बलवंतसिंह रसाल राठोड

1) प्रताप सिंह------>1) दादु +G1
                            2) वासु
2) प्रकाश सिंह----->1) मनन
                            2)
_____________________________________________

                    गुलाबसिंह रसाल राठोड

1) करणसिंह------>1) विनोद
                          2)  चेतन
2) चेनसिह ------->1) गोलु +G2
_____________________________________________

                      दसरथ रसाल राठोड

 1) गोपाल------->1) भावेश+G1
 2) प्रवीन-------->2) G1

_____________________________________________

                      रामकिशन रसाल राठोड

1) संदीप -------> 1)
2) सोनु---------> 2)


--------------------------------------------------------------------
                     घासी रामसिंह राठौड़
     
            भागू घासी रा.----> नरसिंह घासी रा.।
       
    सीताराम भागु रा. ----> गणपत भागू रा.।

परसराम सीताराम रा.---->शंकर, सीताराम रा.

रामदास सीताराम रा,----> नत्थू सीताराम रा।

नवल परसराम रा.---->रमेश परसराम रा।G3।

राहुल नवल रा.----> संगम नवल रा.G1।

वीरेंद्र रमेश रा.G1।

गणेश शंकर रा.--->मूलचंद शंकर रा.G1।

भोला गणेश रा.---->पवन गणेश रा.G3।

सचिन मूलचंद रा.---> गोपाल मूलचंद रा.G1।

दरबार रामदास रा.--->राजेश रामदास रा G1।

दीपक दरबार रा.--->प्रमोद दरबार रा.G1।

अनिकेत राजेश रा---> गजराज राजेश रा।

प्रह्लाद नत्थू रा.--->विजय नत्थू रा।

__________________________________

               पूरा नरसिंह रा.

गोकुल पुरा रा. ------>गुरमुख पूरा रा.
बाबूराव पूरा रा.---->.सदाशिव पूरा रा।

मनोहर गोकुल रा.--->थानसिंह, गोकुल रा
सकरू.गोकुल रा.।

रविंद्र मनोहर रा.--->प्रवीण मनोहर रा.
नितिन, मनोहर रा।

श्रीराम थानसिंह रा.--->पूनम थानसिंह 
पदम थानसिंह रा.।

चेतन श्रीराम रा.--->शरद श्रीराम रा.G2।

सत्यम पूनम रा.---> ऋषिकेश पूनम रा.

उज्जवल पदम रा.---> सुशांत पदम रा.G1

नागिन शकरू रा.---> महेंद्र शकरु रा।

रोशन नगीन रा.।भागू घासी रा.----> नरसिंह घासी रा.।
       
सीताराम भागु रा. ----> गणपत भागू रा.।

परसराम सीताराम रा.---->शंकर, सीताराम रा.

रामदास सीताराम रा,----> नत्थू सीताराम रा।

नवल परसराम रा.---->रमेश परसराम रा।G3।

राहुल नवल रा.----> संगम नवल रा.G1।

वीरेंद्र रमेश रा.G1।

गणेश शंकर रा.--->मूलचंद शंकर रा.G1।

भोला गणेश रा.---->पवन गणेश रा.G3।

सचिन मूलचंद रा.---> गोपाल मूलचंद रा.G1।

दरबार रामदास रा.--->राजेश रामदास रा G1।

दीपक दरबार रा.--->प्रमोद दरबार रा.G1।

अनिकेत राजेश रा---> गजराज राजेश रा।

प्रह्लाद नत्थू रा.--->विजय नत्थू रा।

__________________________________

               पूरा नरसिंह रा.

गोकुल पुरा रा. ------>गुरमुख पूरा रा.
बाबूराव पूरा रा.---->.सदाशिव पूरा रा।

मनोहर गोकुल रा.--->थानसिंह, गोकुल रा
सकरू.गोकुल रा.।

रविंद्र मनोहर रा.--->प्रवीण मनोहर रा.
नितिन, मनोहर रा।

श्रीराम थानसिंह रा.--->पूनम थानसिंह 
पदम थानसिंह रा.।

चेतन श्रीराम रा.--->शरद श्रीराम रा.G2।

सत्यम पूनम रा.---> ऋषिकेश पूनम रा.

उज्जवल पदम रा.---> सुशांत पदम रा.G1

नागिन शकरू रा.---> महेंद्र शकरु रा।

रोशन नगीन रा.।

बस ,अपनी भारतीय संस्कृती की सभ्यता की लाज रखीये।ओ स्त्री हो या पुरुष। वंदे मातरम।

Thursday, 13 February 2020

संत आनंद चैतन्य जी महाराज का प्रवचन ग्राम बोदरली।



सेवालाल महाराज जी की जयंती पर खर्च किए गए।
         जमा एवं खर्चे का हिसाब किताब

     (डेबिटजमा पैसे...₹.............(डेबिट)...खर्चा ...₹
।    16000 जनता साऊड
5001/-श्रावण सरपंच, चिल्लारा     11600 महाराज भेट 
2100/-धनराज पूरा चौहान,            7000 आमीन टेंट
2101/-वसंता जगराम चौहान।         5821 ब्रानपुर सुुनिल
2100/-राम सिंह पंवार सरपंच।        2000 फुल
1000/-मोहन पूरण सिंह चौहान।      5000 राजेश फोटोग्रा
1000/-अरुण काका पवार सर।       2000 गाडी भाडा
1000/-संजय नाईक।सर।                600 राजू पाणी
1000/-विजय नत्थू राठौड़।              300 नास्ता गबु
1000/-अनिल प्रह्लाद जाधव निमप।   300 पानी की कैन।
1000/-योगेश, गुलाब राठौर,चिल्लारा  200 जगदीश भाई।
1000/-राजेश फोटोग्राफर, बड़झिरी।  400 चिल्लर खर्चा 
1000/-गोपाल नारायण राठोड।       _______________
1000/-बाबूलाल मधुकर जाठोद।      51021 खर्चा
1000/-करण सिंह वाघा पवार
500/-जीवन प्रेम सिंह चौहान
500/-रामभरोसे हरी, राठौड़।
500/-सुनील, नारायण राठौड
500/-गब्बू गुरुदयाल, राठौड़
500/-गोपाल, दशरथ राठौड
500/-रमेश सेटू चौहान।
500/-रविंद्र खेम सिंह, राठौड़
500/-संतोष नाईक, सर
500/-रविंद्र नाईक
500/-पदम सिंह मधुकर राठौड़,
500/-धारा सरपंच इल्लारा
500/-राजू, छगन
500/-महिंद्रा हेमराज।
500/-हीरा नंदू।
500/-दीपक साहेबराव पाटील।
500/-मदन सिंह पुरा चौहान
500/-मूलचंद शंकर राठौड़
500/-योगेश पाटिल युवा मोर्चा
500/-महेंद्र, हेमराज चौहान
500/-मामराज भूरा राठौड़।
500/-राजू, नंदू राठौड़
500/-नारायण धनु, राठौड़।
500/-श्रीराम गोबरा चौहान।
500/-राजू दशरथ राठौर।
500/-अजय अमर सिंह, राठौड़।
500/-धनराज, श्रवण चौहान।
250/-सुरेश दुबा राठौड सर।
200/-हरी महाराज
200/-अंतर सिंह पवार।
200/-प्रेम सिंह गुलाब भांजे।
200/-लखन भाई पंचायत।
200/-दरबार धनु राठौड़।
200/-अंकुश चौहान,
200/-भागवत सुखा राठौड़।
200/-पदम सिंह पुरा चौहान
150/-भीम सिंह, अमर सिंह
150/-सीताराम रामा।
150/-बाबूलाल चौहान।
100/-रामसिंह अभयसिंह
100/-महाराज महाराज
100/-यशवंत कालू
100/-प्रेम सिंह भुरा।
100/-राजू पराग कचरे वाले
100/-पूनम चौहान
100/-प्रवीण भाई कृष्णा मेडिकल
100/- भोला चौहान
100/- स्वरूप पाटिल
100/-अभयसिंह उखा
100/-मंजीराम कनीराम,
100/- पांडू रामा
100/-गणेश मखराम
100/- बाऊ महाराज
100/-रामसिंह सदाशिव
100/- तुलसीराम, मोतीराम
100/-मनोज हरी
100/- हीरा मिट्ठू।
100/-सुभाष तुलसीराम।
100/-सुरेश तुलसीराम।
100/-किशोर मांगू।पवार
100/-मिथुन कालू पवार
100/-कान्हा हरदास पवार
100/-रामदास टुकडू
100/-प्रेमसिंह राठौड़,
100/-अजमल गंगाराम।
100/-रमेश तुलसीराम पवार
100/-श्रीराम धनु राठौड़।
100/-रोहिदास रामू राठौड़
100/- मधुकर तारा चौहान।
100/-हरि मधुकर जाठोद
100/- धनसिंग कनीराम जाठोद
50/-किशन महारु राठौड़
50/-करण भागा पवार (पिछला टांडा)
50/-मोजीलाल शेर सिंह।
50/-रोहिदास कालू पवार
50/-प्रकाश पवार
50/-गुमनाम रसीद नंबर 24।
50/-रामलाल मारू चौहान
50/- बाऊभाई ड्राइवर
50/-प्रेम राठौड।
50/-करण देवीदास
50/- रामलाल अमरसिंह।
50/-जयसिंह ऊखा
50/-तारा नायक
50/-हरि राठौड़
50/- जगन चौहान।
50/-राजू आसाराम
50/-गणेश महाराज
50/-हेमा गंगाराम
50/- डिगंबर, मोतीराम
50/-रतन हीरा पवार
50/- रामा, हीरा पवार
50/-राजू गणपत पवार।
50/-नगराम रसीद नंबर 83।
50/-किशोर सदाशिव। जाठोद
7172/-रामनगर का रसीद कट्टा
_____________________________________________      जमा ₹             खर्चा ₹

₹48172/-      ₹51021

बाकी रकम 

प्रवीण सरपंच............5000/-
तेजू राम नगर। ..... .....500/-
खेमराज,राठौड़ ..........500/-
पिंटूभाई, जाठोद..........500/-
ईश्वर  मेडिकल।.......... 500/-
गोविंद रघु राठौड़ ........500/-
भीमराज कैलाश..........500/-
अनिल दशरथ राठौड़ ...500/-
रतीलाल ग्रंथि।.............500/-
मिश्रीलाल गुदा राठौड़...500/-
__________________
                     9500/-बाकी

11600/-महाराज भेट       
 7000/- आमीन टेंट
 5821/- ब्रानपुर सुुनिल
 2000/- फुल 
 5000/- राजेश फोटोग्रा
 2000/- गाडी भाडा             
600 /-राजू पाणी         
300/- नास्ता गबु
300 /-पानी की कैन। 
200/- जगदीश भाई।
400/- चिल्लर खर्चा
_________________      
 51021 खर्चा





















Tuesday, 28 January 2020

The story of my life.



सभी को प्रणाम।

   
      सबसे पहले मैं आपको अपना परिचय देता हूँ।
मेरा पूरा नाम सुनील नारायण राठौड़ है।
मेरा जन्म 22 अप्रैल 1989 दिन बुधवार,समय 11.बजे बुरहानपुर जिले के बोदरली गांव में गरीब किसान के घर बंजारा परिवार में हुआ। मैंने हिंदी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। । हिंदी विषय से मैंने बी.एड भी किया है, कंप्यूटर में डीसीए 1 वर्ष का कोर्स किया है मैंने पीजीडीटीव्स्की भी किया है। उन्होंने पुणे में टैक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्स किया। यह एक प्रोजेक्ट मिशन है। स्कूल के दौरान मैंने बस कंडक्टर का काम किया। और मेरी लाइफ की पहली कमाई से मैंने अपनी माँ के लिए एक साड़ी खरीदी। फिर मैंने कपड़े की दुकान में काम सेल्स का काम किया। बाबा रामदेव गारमेट बुरहानपुर), मैंने सन 2006: 2011 तक, 5 साल तक "मेट" के पद पर जॉब किया है।  महिंद्रा एंड महिंद्रा (आरसी एंड एम) कंपनी ने भारतीय जीवन बीमा निगम एलआईसी में अभिकर्ता के तौर पर 2018 तक एंकरिंग कार्य किया। इसके अलावा डीजे ऑपरेटर, जेसीपीआई एजेंट, प्रॉपर्टी ब्रोकर, मैंने इंदौर के कॉल सेंटर में जॉब किया है। सन 2014 में मैंने अपना एक ढाबा भी खोला, लेकिन दो साल बाद उस ढाबे में चोरी हो जाने के कारण मुझे ढाबा बंद करना पड़ा। बैंक से लोन लेकर किराना व्यवसाई का काम आपके घर पर चालू हो गया है। 2019 में सरकारी स्कूल सीतापुर में अतिथि शिक्षक के तौर पर बच्चों को 1 साल मुफ्त में पढ़ाया जाता है। मैं एक नेक और ईमानदार व्यक्ति हूँ। 14 जुलाई 2016 को पूजा नाम की लड़की से शादी हुई। मेरा एक 2 साल का बेटा है।  जिसका नाम पार्थ है।.... मैं उसके भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हूं। मैं एक अच्छे व्यापार या एक अच्छे व्यवसाय की तलाश में हूँ। मैंने अपने जीवन में कई कहानियाँ देखी हैं और कई समाचार देखे हैं। ।  मैं अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में ज्यादा सोचता हूं।  मैं एक दयालु व्यक्ति हूँ इसलिए मैं अपने जीवन में सफल नहीं हो सका। मैं अपनी खुद की एक कंपनी खोलना चाहता हूं।  मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी जिसके लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं। मैं अपना पूरा खोलकर गरीब लोगों की मदद करना चाहता हूं। मेरे पास मल्टीपल लाभ मार्केटिंग के लिए बहुत सारी योजनाएं हैं। मेरे पास बहुत सारे विचार हैं। मुझे सत्य यात्रा और पीढ़ी की योजनाओं के बारे में थोड़ा ज्ञान है। लेकिन मैं एक कंपनी खोलने में असमर्थ हूं क्योंकि मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है। इस समय, मुझे एक अच्छा व्यवसाय। की आवश्यकता है।और मैं उसकी तलाश में हूं।मैं अपने जीवन में बहुत बड़ा आदमी बनना चाहता हूं। मुझे एक अच्छे मंच की जरूरत है 
_____________________________________________

                         एक पंक्ति।
                   ----------------------------
                   मेरे जीवन की कहानी
   बहुत शौक था मुझे सबको खुश रखने का ।
 और शायद यही दरियादिली सोच मुझे एक दिन ले डूबेगी मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं होता। सभी के सभी कैसे आसान हो सकते हैं। .हो सकता है कहीं पर मैं गलत हूँ। .लेकिन कहां पर गलत हूं। यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है। किसी और की मदद करना, सभी का आधार सम्मान करना, बिना गलती की माफ़ी मांगना। बिना स्वार्थ के समाज सेवा करना। अगर यह गलत बात है तो फिर मैं गलत हूं"कभी-कभी हम गलत नहीं होते लेकिन हमारे पास वह समय और शब्द नहीं होते। जो हमें सही साबित कर सके। मैंने बचपन से लेकर जवानी तक संघर्ष किया है। मैं अपनी कहानी आपकी शब्दों में कहता हूँ। मैं अपने दुखों की सहानुभूति नहीं लेना चाहता। वन लाइनर स्क्रिप्ट में मैं आपको समझ नहीं सकता कि खुद की कहानी लिखूं भी मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। मैं एक बहुत बुरे दौर से गुजर रहा हूँ। मेरी कहानी आपका मनोरंजन तो नहीं होगा लेकिन आंख में आंसू जरूर आएगा और एक बात हमेशा याद रहेगी।
सिर्फ एक वादा अपने आपसे जिंदगी भर निभाना। जहां पर आप गलत न हों वहां पर सिर मत बहाना। जो गलती मेरी है, उसे तुम मत करो। 
मैं। मैं आपके लिए अपने स्कूल जीवन से लेकर विवाहित जीवन तक की कहानी लेकर आया हूँ।
हमारी अठतो के तार जनधन योजना की तरह होते हैं। मित्र पड़ोसी   मित्र। आदि 

मैं मंदिर कभी नहीं जाता। और 
भगवान को कभी नहीं दुखता।
जरूरी नहीं कि कुछ गलत करने से ही दुख मिले।
यहां हद से ज्यादा अच्छे होने की भी कीमत चुकानी पड़ती है।
बेवजह इल्जाम लगता है मैंने सुना है। इल्जाम इतनी संगीन कि खुद को खत्म करने को जी चाहता है। लेकिन उससे मैं बेगुनाह साबित नहीं हो सकता, हो सकता है। फिर मेरे दिमाग में एक ही बात आती है। इंसान को खुद की नजरों में अच्छा होना चाहिए। दूसरों की नजरों में तो भगवान भी बुरा मानते हैं या फिर झूठे लोगों को भी झूठा मानते हैं। सच को सच करने के लिए खुद का मन भी सच्चा होना नहीं जाना चाहिए और कितने गलती मुझ पर लगे हैं जो मुझे ही पता नहीं। पर आरोप लगाने वालों में दूसरों से ज्यादा अपनों का हाथ है। यह कोई नई बात नहीं है।
दुख तो इस बात का है कि हमारी नियत साफ हो और लोग फिर भी हमें बेईमान समझे। किसी के दयालु इल्जाम ने मेरी जिंदगी नरक बना रखी है। मेरी कहानी कोई 3 घंटे की फिल्म नहीं है कि मैं उन्हें बेगुनाह साबित करके बता दूं। जिंदगी में इतने बेईमान लोग मिले कि ईमानदार लोगों से भी नफरत हो गई। खैर कोई बात नहीं अब जो होगा सो देखा जाएगा। ऊपरवाला परीक्षा कब तक होती है ?

_____________________________________________
सत्र १
       
मैं छोटा था, स्कूल जाने के लिए रोता था। मेरी उम्र 4 साल थी और एडमिशन 6 साल में हुआ था।
जब दादाजी ने टीचर से कहा की हाईट कम और उम्र ज्यादा है। तब टी.वी. ने मान लिया।
मेरा जन्म 22 अप्रैल 1989 को हुआ था। सर ने 1987 कर दिया।
प्राइमरी स्कूल में अपने हाथ को अपने सर के ऊपर से कान तक पुराने पर एडमिशन हुआ था। तब मैक 4 साल का था

कहानी की शुरुआत मेरे बचपन से होती है जहाँ तक मुझे याद है।              
   स्कूल से आने के बाद। हम लोग कभी कभार ही पढ़ाई करते थे । कुछ बच्चे के खेल कूद में लग गए । हमारे गाँव का माहौल ही कुछ ऐसा था हमारे टाइम के खेल  ,,,,,, गोटी, भोरा, पतंग, थारे-पुलिस, कबड्डी, हाथी का सूंड, छुपा-छुपी, लड़ाई, दब -दुबली, खो-खो दिलू। दोस्तों का टायर.कुरती.हुआ करते थे। लेकिन ये सब में मेरा गेम सबसे अलग था। कागज की एंडटी पर नोट का आकार जैसा काट के। उसके चेहरे पर मुस्कान थी। 2,5 10,के नोट के आकार की गालों निर्माता अपने पास थे। मेरे घर के सामने की धागे पर कागज की लकड़ी मिट्टी का। पुल बनाकर उस पर से खिलौने की.गाड़ी और थी.न कभी कभी छुप्पा-छापी या। वायरलिंग खेलने का शौक था। हाफ पैंट शर्ट पहनना स्कूल जाने की शुरुआत की। हमारे समय में। स्कूल बैग बसता।  ऐसा नहीं हुआ था। एक थैली में पट्टी और लेखन.लेकर स्कूल जाने लगे। कभी-कभी लेखन का कोई खास महत्व नहीं होता, बल्कि वह अपने घर पर रह जाता है। इसलिए स्कूल जाने के लिए पैसे की मांग नहीं करते। चार आने वाले नन्हें मिलने पर बड़े खुश होकर स्कूल जाने लगे। आकाश तीसरी तिमाही में जाने तक हमें पढ़ा नहीं था। फिर मैं पाँचवी कक्षा में गया। जतन में 77% प्रतिशत के साथ एक नंबर से पास हुआ। जिसके लिए मुझे हमारे गांव के डॉ सतीश भंगड़े साहब ने 15 अगस्त को ₹ 21 का पुरस्कार दिया। उस ₹ 21 को मैंने कई दिन तक खर्च किया। नहीं किया। किया।
           





   ,,,,,, अगला प्रवेश मेरा छठी कक्षा में था। और हमें छठी कक्षा में जाने के लिए बहुत डर लगता था। क्योंकि वहां पर अंग्रेजी अध्ययन पढा जाता था। इंग्लिश का पहला शब्द हमने एबीसीडी छठी कक्षा में पढ़ना शुरू किया। के लिए मेरे पास बुक नहीं थी। मेरे घर की आर्थिक स्थिति खराब थी।
मेरा बड़ा भाई कक्षा सातवीं में पढ़ा था जो कि मुझसे 4 साल बड़ा था। मैं छठी पुरानी किताब पढ़ता हूँ।
कभी-कभी हमारे और बड़े भाई में झगड़ा होने पर भाई मुझे बहुत मरता था और मेरी किताब भी छीन लेती थी। और दोपहर में खाना खाने की छुट्टी में स्कूल से घर जल्दी आ कर। मेरे लिए रखा हुआ खाना भी पूरा खा जाता था। फिर मैं भूखा ही स्कूल चला जाता था। जब शाम को मां-बाप खेत से काम करके वापस आते थे तो भाई की शिकायत करता था।
माँ-बाप के दत्तने पर भाई घर के ऊपर पत्थर फेंकता था।
टंटी को लात मारता है, दरवाजा तोड़ता केवल पत्थरों की पट्टियों या आत्महत्या करने की धमकी देता है। ऐसी हरकतें करता है इसलिए माँ-बाप उससे डर जाते थे और उसे कुछ नहीं होता था। कभी-कभी मुझे भूख लगने पर मैं खिचड़ी बनाता था तो भी मुझे खाने नहीं देता था। मुझे बहुत बुरा लगा था और खुशबूदार खिचड़ी को फेंक देता था। । मैं छोटा था और कमजोर था इसलिए उसका सामना नहीं कर सका। आज भी सारी बातें याद है। मेरी माँ-बाप ने मुझे कभी हाथ नहीं लगाया। मुझे बड़ा लाड प्यार से पाला है।इसलिए वह चुरा ले गयी थी। जितना मैं उससे डरता हूँ उतना मुझे पीटता, मेरे जमा किए हुए पैसे भी चुरा लेता था। मेरे द्वारा पीने जाने पर मुझे ही पीटता था कि माँ-बाप को मत देना। कि पैसे मैंने चुप कराया है तो तू नहीं और बहुत मारेंगे। मार खाने के डर से मैं भी डरा हुआ रहता हूँ।






कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए हमें हमारे गांव से 9 किलोमीटर दूर दरियापुर गांव में जाना पड़ता है।
एक साइकिल पर दो लोग जांच करने गए थे। गाँव में सिर्फ आठवीं तक के स्कूल थे। आठवीं कक्षा पास करके के नौवीं में प्रवेश के लिए मेरे पास पाँच सौ रुपये नहीं थे।
जैसे-तैसे एडमिशन किया गया। अब तो स्कूल जाने की परेशानी और बढ़ गई। अब हमारे सामने रोज की 5 रूपए की दरकार थी।
घर से जिस दिन पैसे मिलते हैं। उसी दिन स्कूल नहीं जाते थे, तो घर पर रह जाते थे। कभी-कभी तो हम पैदल 5 रुपये बचाने के लिए पैदल स्कूल से घर आते थे। 9वीं कक्षा पास कर के दसवीं में गए।
       हमारी क्लास में लड़के-लड़कियां सहित 34 बच्चे थे।


स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के नाम छोटा सा संदेश.. छोड़ा मुंह बड़ी बात..

 स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के नाम छोटा सा संदेश.. छोड़ा मुंह बड़ी बात..   राज नेता, कुछ विपक्षी दल,संगठन,मीडिया.सभी, के सभी अपनी अपनी र...