sunilrathod

Tuesday, 28 January 2020

The story of my life.



सभी को प्रणाम।

   
      सबसे पहले मैं आपको अपना परिचय देता हूँ।
मेरा पूरा नाम सुनील नारायण राठौड़ है।
मेरा जन्म 22 अप्रैल 1989 दिन बुधवार,समय 11.बजे बुरहानपुर जिले के बोदरली गांव में गरीब किसान के घर बंजारा परिवार में हुआ। मैंने हिंदी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। । हिंदी विषय से मैंने बी.एड भी किया है, कंप्यूटर में डीसीए 1 वर्ष का कोर्स किया है मैंने पीजीडीटीव्स्की भी किया है। उन्होंने पुणे में टैक्सटाइल डिजाइनिंग कोर्स किया। यह एक प्रोजेक्ट मिशन है। स्कूल के दौरान मैंने बस कंडक्टर का काम किया। और मेरी लाइफ की पहली कमाई से मैंने अपनी माँ के लिए एक साड़ी खरीदी। फिर मैंने कपड़े की दुकान में काम सेल्स का काम किया। बाबा रामदेव गारमेट बुरहानपुर), मैंने सन 2006: 2011 तक, 5 साल तक "मेट" के पद पर जॉब किया है।  महिंद्रा एंड महिंद्रा (आरसी एंड एम) कंपनी ने भारतीय जीवन बीमा निगम एलआईसी में अभिकर्ता के तौर पर 2018 तक एंकरिंग कार्य किया। इसके अलावा डीजे ऑपरेटर, जेसीपीआई एजेंट, प्रॉपर्टी ब्रोकर, मैंने इंदौर के कॉल सेंटर में जॉब किया है। सन 2014 में मैंने अपना एक ढाबा भी खोला, लेकिन दो साल बाद उस ढाबे में चोरी हो जाने के कारण मुझे ढाबा बंद करना पड़ा। बैंक से लोन लेकर किराना व्यवसाई का काम आपके घर पर चालू हो गया है। 2019 में सरकारी स्कूल सीतापुर में अतिथि शिक्षक के तौर पर बच्चों को 1 साल मुफ्त में पढ़ाया जाता है। मैं एक नेक और ईमानदार व्यक्ति हूँ। 14 जुलाई 2016 को पूजा नाम की लड़की से शादी हुई। मेरा एक 2 साल का बेटा है।  जिसका नाम पार्थ है।.... मैं उसके भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हूं। मैं एक अच्छे व्यापार या एक अच्छे व्यवसाय की तलाश में हूँ। मैंने अपने जीवन में कई कहानियाँ देखी हैं और कई समाचार देखे हैं। ।  मैं अपने बारे में कम और दूसरों के बारे में ज्यादा सोचता हूं।  मैं एक दयालु व्यक्ति हूँ इसलिए मैं अपने जीवन में सफल नहीं हो सका। मैं अपनी खुद की एक कंपनी खोलना चाहता हूं।  मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी जिसके लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं। मैं अपना पूरा खोलकर गरीब लोगों की मदद करना चाहता हूं। मेरे पास मल्टीपल लाभ मार्केटिंग के लिए बहुत सारी योजनाएं हैं। मेरे पास बहुत सारे विचार हैं। मुझे सत्य यात्रा और पीढ़ी की योजनाओं के बारे में थोड़ा ज्ञान है। लेकिन मैं एक कंपनी खोलने में असमर्थ हूं क्योंकि मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है। इस समय, मुझे एक अच्छा व्यवसाय। की आवश्यकता है।और मैं उसकी तलाश में हूं।मैं अपने जीवन में बहुत बड़ा आदमी बनना चाहता हूं। मुझे एक अच्छे मंच की जरूरत है 
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                         एक पंक्ति।
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                   मेरे जीवन की कहानी
   बहुत शौक था मुझे सबको खुश रखने का ।
 और शायद यही दरियादिली सोच मुझे एक दिन ले डूबेगी मुझे अपने आप पर विश्वास नहीं होता। सभी के सभी कैसे आसान हो सकते हैं। .हो सकता है कहीं पर मैं गलत हूँ। .लेकिन कहां पर गलत हूं। यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है। किसी और की मदद करना, सभी का आधार सम्मान करना, बिना गलती की माफ़ी मांगना। बिना स्वार्थ के समाज सेवा करना। अगर यह गलत बात है तो फिर मैं गलत हूं"कभी-कभी हम गलत नहीं होते लेकिन हमारे पास वह समय और शब्द नहीं होते। जो हमें सही साबित कर सके। मैंने बचपन से लेकर जवानी तक संघर्ष किया है। मैं अपनी कहानी आपकी शब्दों में कहता हूँ। मैं अपने दुखों की सहानुभूति नहीं लेना चाहता। वन लाइनर स्क्रिप्ट में मैं आपको समझ नहीं सकता कि खुद की कहानी लिखूं भी मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं। मैं एक बहुत बुरे दौर से गुजर रहा हूँ। मेरी कहानी आपका मनोरंजन तो नहीं होगा लेकिन आंख में आंसू जरूर आएगा और एक बात हमेशा याद रहेगी।
सिर्फ एक वादा अपने आपसे जिंदगी भर निभाना। जहां पर आप गलत न हों वहां पर सिर मत बहाना। जो गलती मेरी है, उसे तुम मत करो। 
मैं। मैं आपके लिए अपने स्कूल जीवन से लेकर विवाहित जीवन तक की कहानी लेकर आया हूँ।
हमारी अठतो के तार जनधन योजना की तरह होते हैं। मित्र पड़ोसी   मित्र। आदि 

मैं मंदिर कभी नहीं जाता। और 
भगवान को कभी नहीं दुखता।
जरूरी नहीं कि कुछ गलत करने से ही दुख मिले।
यहां हद से ज्यादा अच्छे होने की भी कीमत चुकानी पड़ती है।
बेवजह इल्जाम लगता है मैंने सुना है। इल्जाम इतनी संगीन कि खुद को खत्म करने को जी चाहता है। लेकिन उससे मैं बेगुनाह साबित नहीं हो सकता, हो सकता है। फिर मेरे दिमाग में एक ही बात आती है। इंसान को खुद की नजरों में अच्छा होना चाहिए। दूसरों की नजरों में तो भगवान भी बुरा मानते हैं या फिर झूठे लोगों को भी झूठा मानते हैं। सच को सच करने के लिए खुद का मन भी सच्चा होना नहीं जाना चाहिए और कितने गलती मुझ पर लगे हैं जो मुझे ही पता नहीं। पर आरोप लगाने वालों में दूसरों से ज्यादा अपनों का हाथ है। यह कोई नई बात नहीं है।
दुख तो इस बात का है कि हमारी नियत साफ हो और लोग फिर भी हमें बेईमान समझे। किसी के दयालु इल्जाम ने मेरी जिंदगी नरक बना रखी है। मेरी कहानी कोई 3 घंटे की फिल्म नहीं है कि मैं उन्हें बेगुनाह साबित करके बता दूं। जिंदगी में इतने बेईमान लोग मिले कि ईमानदार लोगों से भी नफरत हो गई। खैर कोई बात नहीं अब जो होगा सो देखा जाएगा। ऊपरवाला परीक्षा कब तक होती है ?

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सत्र १
       
मैं छोटा था, स्कूल जाने के लिए रोता था। मेरी उम्र 4 साल थी और एडमिशन 6 साल में हुआ था।
जब दादाजी ने टीचर से कहा की हाईट कम और उम्र ज्यादा है। तब टी.वी. ने मान लिया।
मेरा जन्म 22 अप्रैल 1989 को हुआ था। सर ने 1987 कर दिया।
प्राइमरी स्कूल में अपने हाथ को अपने सर के ऊपर से कान तक पुराने पर एडमिशन हुआ था। तब मैक 4 साल का था

कहानी की शुरुआत मेरे बचपन से होती है जहाँ तक मुझे याद है।              
   स्कूल से आने के बाद। हम लोग कभी कभार ही पढ़ाई करते थे । कुछ बच्चे के खेल कूद में लग गए । हमारे गाँव का माहौल ही कुछ ऐसा था हमारे टाइम के खेल  ,,,,,, गोटी, भोरा, पतंग, थारे-पुलिस, कबड्डी, हाथी का सूंड, छुपा-छुपी, लड़ाई, दब -दुबली, खो-खो दिलू। दोस्तों का टायर.कुरती.हुआ करते थे। लेकिन ये सब में मेरा गेम सबसे अलग था। कागज की एंडटी पर नोट का आकार जैसा काट के। उसके चेहरे पर मुस्कान थी। 2,5 10,के नोट के आकार की गालों निर्माता अपने पास थे। मेरे घर के सामने की धागे पर कागज की लकड़ी मिट्टी का। पुल बनाकर उस पर से खिलौने की.गाड़ी और थी.न कभी कभी छुप्पा-छापी या। वायरलिंग खेलने का शौक था। हाफ पैंट शर्ट पहनना स्कूल जाने की शुरुआत की। हमारे समय में। स्कूल बैग बसता।  ऐसा नहीं हुआ था। एक थैली में पट्टी और लेखन.लेकर स्कूल जाने लगे। कभी-कभी लेखन का कोई खास महत्व नहीं होता, बल्कि वह अपने घर पर रह जाता है। इसलिए स्कूल जाने के लिए पैसे की मांग नहीं करते। चार आने वाले नन्हें मिलने पर बड़े खुश होकर स्कूल जाने लगे। आकाश तीसरी तिमाही में जाने तक हमें पढ़ा नहीं था। फिर मैं पाँचवी कक्षा में गया। जतन में 77% प्रतिशत के साथ एक नंबर से पास हुआ। जिसके लिए मुझे हमारे गांव के डॉ सतीश भंगड़े साहब ने 15 अगस्त को ₹ 21 का पुरस्कार दिया। उस ₹ 21 को मैंने कई दिन तक खर्च किया। नहीं किया। किया।
           





   ,,,,,, अगला प्रवेश मेरा छठी कक्षा में था। और हमें छठी कक्षा में जाने के लिए बहुत डर लगता था। क्योंकि वहां पर अंग्रेजी अध्ययन पढा जाता था। इंग्लिश का पहला शब्द हमने एबीसीडी छठी कक्षा में पढ़ना शुरू किया। के लिए मेरे पास बुक नहीं थी। मेरे घर की आर्थिक स्थिति खराब थी।
मेरा बड़ा भाई कक्षा सातवीं में पढ़ा था जो कि मुझसे 4 साल बड़ा था। मैं छठी पुरानी किताब पढ़ता हूँ।
कभी-कभी हमारे और बड़े भाई में झगड़ा होने पर भाई मुझे बहुत मरता था और मेरी किताब भी छीन लेती थी। और दोपहर में खाना खाने की छुट्टी में स्कूल से घर जल्दी आ कर। मेरे लिए रखा हुआ खाना भी पूरा खा जाता था। फिर मैं भूखा ही स्कूल चला जाता था। जब शाम को मां-बाप खेत से काम करके वापस आते थे तो भाई की शिकायत करता था।
माँ-बाप के दत्तने पर भाई घर के ऊपर पत्थर फेंकता था।
टंटी को लात मारता है, दरवाजा तोड़ता केवल पत्थरों की पट्टियों या आत्महत्या करने की धमकी देता है। ऐसी हरकतें करता है इसलिए माँ-बाप उससे डर जाते थे और उसे कुछ नहीं होता था। कभी-कभी मुझे भूख लगने पर मैं खिचड़ी बनाता था तो भी मुझे खाने नहीं देता था। मुझे बहुत बुरा लगा था और खुशबूदार खिचड़ी को फेंक देता था। । मैं छोटा था और कमजोर था इसलिए उसका सामना नहीं कर सका। आज भी सारी बातें याद है। मेरी माँ-बाप ने मुझे कभी हाथ नहीं लगाया। मुझे बड़ा लाड प्यार से पाला है।इसलिए वह चुरा ले गयी थी। जितना मैं उससे डरता हूँ उतना मुझे पीटता, मेरे जमा किए हुए पैसे भी चुरा लेता था। मेरे द्वारा पीने जाने पर मुझे ही पीटता था कि माँ-बाप को मत देना। कि पैसे मैंने चुप कराया है तो तू नहीं और बहुत मारेंगे। मार खाने के डर से मैं भी डरा हुआ रहता हूँ।






कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षा देने के लिए हमें हमारे गांव से 9 किलोमीटर दूर दरियापुर गांव में जाना पड़ता है।
एक साइकिल पर दो लोग जांच करने गए थे। गाँव में सिर्फ आठवीं तक के स्कूल थे। आठवीं कक्षा पास करके के नौवीं में प्रवेश के लिए मेरे पास पाँच सौ रुपये नहीं थे।
जैसे-तैसे एडमिशन किया गया। अब तो स्कूल जाने की परेशानी और बढ़ गई। अब हमारे सामने रोज की 5 रूपए की दरकार थी।
घर से जिस दिन पैसे मिलते हैं। उसी दिन स्कूल नहीं जाते थे, तो घर पर रह जाते थे। कभी-कभी तो हम पैदल 5 रुपये बचाने के लिए पैदल स्कूल से घर आते थे। 9वीं कक्षा पास कर के दसवीं में गए।
       हमारी क्लास में लड़के-लड़कियां सहित 34 बच्चे थे।


अच्छे बुरे की परख।

अच्छे बुरे की परख।
                                  A test of good and bad.
           
  1)           बेटे की परख शादी के बाद।
              Son's test after marriage.
           
    2)                बेटी की परख जवानी मे
                  Daughter's test in youth.
   
      3)           पति की परख बीमारी में।
                   In husband's disease.
    
        4)              पत्नी की परख पति के गरीबी में।
               Wife's test in husband's poverty.                                                        
      5)               दोस्त की परख मुसीबत में।
                    Friend's trouble in trouble

         6)          बहन की परख जायदाद में।
                Sister's test in property.
                       
            7)        भाई की परख लड़ाई में।
                   In the battle of brother.
             
            8)    औलाद की परख बुढ़ापे में होती है।
            Children are tested in old age.     
                                         
                                            लेखक सुनिल राठोड
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*ये किताबे  नहीं, जीवन*
*का गणित है ...साहेब ,*

*यहाँ दो में से एक गया..*
*तो कुछ नहीं बचता।*

*चाहे जीवन साथी हो..*
*या दोस्त....✍🏻*
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जमीन अच्छी हो। खाद अच्छा हो।पर पानी अगर खारा हो। तो फूल खिलते नहीं।
The soil is good, the fertilizer is good, but if the water is saline then the flowers do not bloom.
भाव अच्छा हो।विचार भी अच्छा हो।मगर वाणी खराब है।
तो संबंध टिकते नहीं।
If the sentiment is good, the idea is good but if the speech is bad then the relationship does not last.
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 *घमण्ड बता देता है कितना पैसा है ।*
*संस्कार बता देते है परिवार कैसा है ॥*
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*ज़िन्दगी में ठंड और घमंड*
 *से  दूर   ही  रहना  चाहिए*

*दोनो  ही  सूरतों में  ज़िस्म*
*अक्सर  अकड़  जाता   है*
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*रामायण में दो व्यक्ति थे एक विभीषण और एक कैकेई।
 विभीषण रावण के राज में रहता था।
 फिर भी नहीं बिगड़ा।
 केकैई राम के राज्य में रहती थी।
 फिर भी नहीं सुधरी।
तात्पर्य-> सुधरना और बिगड़ना केवल।
मनुष्य की सोच और सभाओं पर निर्भर करता है।
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आर्थिक स्थिति बिगड़ने के मुख्य कारण।

*पिछले 10 वर्षों में अधिकांश घरों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने और मानसिक तनाव बढ़ने के 10 मुख्य कारण*

1. घर के सभी सदस्यों के पास महंगे स्मार्ट फोन।
2. देखा-देखी बाहर घूमने जाने का ट्रेंड।

4. घर के भोजन के बजाय  विकेन्ड पर बाहर खाने का चस्का।
5. ब्युटी पार्लर, सलून, ब्रान्डेड कपड़ों की चाहत।
6. जन्मदिन और मैरेज एनिवर्सरी में पैसों का गलत व्यय।
7. सगाई और शादी में दिखावे के लिये हैसियत से अधिक गैर-जरूरी खर्च।
8. प्राईवेट स्कूल में पढ़ाने की फैशन और स्कूल व ट्यूशन फीस में वृद्धि।
9. गलत लाईफ स्टाईल के कारण मैडिकल खर्च में बढ़ौतरी।
10. लोन की ऊंची ब्याज दर और क्रेडिट कार्ड के कारण अधिक चीजें खरीदने की गलत आदत।
11)बाईक से काम चले वहां भी  स्टेटस के लिये कार चाहिए

आदमी का अमीर होना जरूरी नहीं है जमीर होना जरूरी है।”
Lopiee Rathod
*इन खर्चों के कारण न तो हमारी  कमाई में वृद्धि नहीं हो रही और न ही बचत हो रही है । परिणाम स्वरुप अधिकांश घरों में अशांति है मानसिक तनाव है । गैर-जरूरी खर्चों को कम करो*।
*इंसान की मूल जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान थी, है और रहेगी*।
इंसान के आज कम उम्र से ही  बीमार होने , दुखी रहने और असफल होने का कारण है हम जीवन जीने का तरीका भूल गए है ।
दूसरों की बिल्डिंग देख कर अपना जोपढ़ा ना जलाएं।
घर का शुध्द भोजन खाइये और दिखावे को त्यागकर आनंद से जीना सीखे ।दुनिया को देखने का नजरिया बदलिए ।दुनिया मे आप जैसे लाखो करोड़ो है कौन किसकी परवाह करता है इसलिए दुसरो की राह पर न चले अपनी राह खुद बनाये ।
अमीरी और गरीबी भाग्य द्वारा तय है किंतु कर्म विचार और जीवन जीने का तरीका आपके पास सुरक्षित है ।

Tuesday, 21 January 2020

Cumming Soon.1



            PSR. Help care.

                         MLM company 

हमारा उद्देश्य ,उन लोगों को एकत्रित करना संगठित करना।और एक मंच प्रदान करना है।जो दूसरों की मदद करने के लिए तैयार है।एक ऐसा स्वर्णिम समाज बनाने के लिए।जो साझा करने की शक्ति को समझता है।जो दुनिया को अधिक खुला और जुड़ा समझता है। हमारे मंच को बनाने के लिए।हम लोगों को दूसरे को दान देने के लिए एवं जरूरतमंदों की सहायता के लिए।।हम दूसरों को दान देने और दान लेने की अनुमति भी प्रदान करते है।दान स्वीकार करके।कोई भी अपना अच्छा सुखी जीवन यापन कर सकता है।एक मंच के रूप में हम  किसी को भी।किसी भी अन्य सामाजिक!धर्मार्थ गतिविधियों को।करने के लिए मजबूर नहीं करेंगे। लेकिन इस मंच का (उद्देश्य)मिशन लोगों की मदद करना है।एक कंपनी के रूप में हम।प्राधिकरणो के साथ।समन्वय करके धर्मार्थ।गतिविधियों की शुरुआत करेंगे।और लोगों की मदद करने के लिए सदैव तत्पर रहेगे

हमारा मिशन!
हमारा मिशन प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना। और दूसरों की मदद करने के लिए भी प्रेरित करना। आम लोगों का समुदाय बनाने के लिए निस्वार्थ रूप से।एक दूसरे की मदद करने की जो हर व्यक्ति को बड़े होने की अनुमति देता है।जो बदले में उनके परिवार को बड़ा होने में एवं स्वस्थ रहने मे मदद करता है।

👌"   जीवन में किसी पर दया करोगे,
              तो वो याद करेगा
                  ...क्योंकि 
          दया का उल्टा याद होता है।

👌जीवन में किसी का भला करोगे,
              तो लाभ होगा...
                   क्योंकि 
भला का उल्टा लाभ होता है ।👌            

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----->        फ्री रजिस्ट्रेशन ।.......
----->       ₹700 जोइनिंग चार्ज ।
----->       भविष्य सुरक्षित।
----->       एक्स्ट्रा बिजनेस।
----->        टीम लीडरशिप!
----->        प्लान रिन्यूअल पर 10 % की छूट।
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                                              फायदा.लाभ


1) 5 साल के लिए हेल्थ सुरक्षा! नॉन रिफंडेबल मदद राशि!

2) वातावरण को स्वच्छ रखने के लिए 100 पौधे लगाने पर 
₹2000 का पुरस्कार।

3) बेटी के जन्म होने पर ₹2000 की मदद राशि। 

4)महिलाओं के लिए माइक्रो फाइनेंस सुविधा।

5)वार्षिक ,कंपनी प्रॉफिट का दो 2 %,परसेंट अनाथ 
आश्रम,मुख बधिर स्कूल,को भेंट राशी ।

6) बेरोजगारों को रोजगार का अवसर
 
7) मल्टी लेवल मार्केटिंग बिज़नेस।(MLM) 

8) टीम लीडर ,लेवल प्रमोशन.अवार्ड, रिवार्ड, सम्मान ,सेमिनार,रूबी ,परल, डायमंड डायरेक्टर।,कंपनी ब्रांडिंग,ड्रेस कोड।
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अब आपके मन में एक सवाल जरूर आ रहा होगा कि आप ₹700 लगाकर 500000 की मदद कौन दे सकता है। 
सुनने में आपको अजीब लगेगा।
आपको कंपनी की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही।

कंपनी 1 लाख. हैप्पीनेस परिवार को एक साथ मैसेज करेगी
सभी के खाते से ₹5 रु.डिटेक्शन करेगी और 5 लाख. की मदद बीमार परिवार को देगी।


₹500000 देने की शर्त। कुछ इस प्रकार रहेगी।
कंपनी के 5 मेंबर आकर निरीक्षण करेंगे और जांच करेगे
आपके द्वारा डॉक्टर को दिखाए गए रिपोर्ट की जांच करेगी
रिपोर्ट सत्य पाए जाने पर रिपोर्ट की कॉपी कंपनी की साइट पर।अपलोड की जाएगी।

कुछ ही दिनों बाद आपको ₹500000 की सहायता राशि दी जाएगी।
                                                   नियम व शर्तें लागू।
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फिर से एक सवाल आपके मन में आ रहा होगा ₹200000 का लोन।
कंपनी आपको लोन राष्ट्रीय कृत बैंकों की ब्याज दर पर देगी कि बिना बिना किसी गारंटी

1)लोन सिर्फ अपने (हैप्पीनेस)परिवार के सदस्य कोई दिया जाएगा।
2)आईडी जनरेट के 24 महीने बाद से लोन लेने की पात्रता होगी।

3)लोन की किस्त प्रति महीने चुकानी होगी।

4)महिलाओं को रोजगार के लिए अलग से सामूहिक लोन दिया जाएगा।
5) लोन लेने के लिए 20 पैर कंप्लीट होने चाहिए।

6)लोन लेने के लिए आपका सिविल चेक किया जाएगा सिविल अच्छा होने पर आपको लोन अप्रूवल होगा।
                                                        नियम व शर्तें लागू।
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हैप्पीनेस परिवार के सदस्य के घर बेटी जन्म होने पर।

1).2000 का गिफ्ट या दो हजार कैश।

2)10 पियर कंप्लीट होने पर।

3) बेटी का जन्म प्रमाण पत्र कंपनी की साइट पर अपलोड करना होगा।
4)जन्म प्रमाण पत्र अपलोड करने के 15 दिन बाद पैसे आपके खाते में आएगी।
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100 पेड़ लगाने पर ₹2000 नगद पुरस्कार दिया जाएगा।

1)जिसके लिए आपको कुछ फोटोस एंड सरपंच के हाथ का बना हुआ प्रमाण पत्र जिसमें लिखा हो कि इसके द्वारा 100 पेड. कंप्लीट कर लिए गये हैं।सभी पेड़ जीवित है।

2)पंचायत का प्रमाण पत्र एवं फोटो कंपनी की साइट पर अपलोड करना होगा।

3)1000 पेड़ कंप्लीट होने पर आपका सम्मान किया जाएगा 26 जनवरी या 15 अगस्त के दिन।एव नगद राशी...प्रकृति सौंदर्य प्रमाण पत्र।



बिना कुछ काम करे आपको *यह मदत आपके बँक अकाउंट/google पे/phone पे/paytm में मिलेगी!*
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आप चाहो तो तीन लोगों की मदद कर सकते हो।
और वह तीन से कहो कि वह तीन की मदद करे। 




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हिंदू का सारा जीवन दान दक्षिणा, भंडारा, रक्तदान,

 मौलवी खुद दस बच्चे पैदा करता है, और सभी मुस्लिमों को यही शिक्षा देता है। दूसरी तरफ, हिंदू धर्मगुरु, खुद भी ब्रह्मचारी रहता है,  और सभी हिंद...